उत्तर प्रदेश में ये 4 नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट हुए मंजूर, पूर्वांचल से विंध्य तक जबर्दस्त तरीके से बदलेगी कनेक्टिविटी

UP Expressway news: उत्तर प्रदेश के व्यापक एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित यूपी कैबिनेट की बैठक में राज्य के रोड नेटवर्क को मजबूती देने के लिए चार नए प्रमुख एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी गई है। इन मंजूरियों में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले दो लिंक एक्सप्रेसवे के साथ-साथ प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक का एलाइनमेंट शामिल है।

आइए जानते हैं इन चारों नए एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट्स के बारे में विस्तार से और यह भी समझते हैं कि कैसे ये स्टेट की सुपर डेवलपमेंट स्पीड को सपोर्ट कर सकते हैं-

12264 करोड़ रुपये से ज्यादा के 2 ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे

कैबिनेट ने दो लिंक एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए संशोधित और अंतिम रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल को मंजूरी दी है। इनकी कुल लागत 12,264 करोड़ रुपये से अधिक है। पहला है 50.98 किलोमीटर लंबा आगरा-लखनऊ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे लिंक। यह 6-लेन वाला ग्रीनफील्ड एक्सेस-कंट्रोल कॉरिडोर होगा। इसे भविष्य में 8 लेन तक बढ़ाया जा सकेगा। इसका निर्माण इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (EPC) मॉडल के तहत करीब 4775.84 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जाएगा।

इसमें दूसरा है 90.84 किलोमीटर लंबाई वाला फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ से गंगा एक्सप्रेसवे लिंक। यह फर्रुखाबाद के रास्ते आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। यह 6-लेन (8 लेन तक विस्तार योग्य) ग्रीनफील्ड लिंक होगा। इस प्रोजेक्ट के निर्माण में अनुमानित 7,488.74 करोड़ रुपये की लागत आएगी। डेवलपर्स के चयन के लिए टेंडर की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। चुनी गई एजेंसियों को लगभग 36 महीनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा करना होगा और उसके बाद अगले 5 वर्षों तक सड़क का रखरखाव करना होगा।

26315 करोड़ रुपये की लागत वाला ‘विंध्य एक्सप्रेसवे’

कैबिनेट ने राज्य के दक्षिणी और विंध्य क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने के लिए विंध्य एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट को हरी झंडी दे दी है। इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 26315 करोड़ रुपये होगी। यह 6-लेन वाला एक्सप्रेसवे होगा। इसे जरूरत पड़ने पर 8-लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। यह प्रस्तावित कॉरिडोर प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र जिलों के लिए आवागमन और सड़कोंकी कनेक्टिविटी को सीधे तौर पर बेहतर बनाएगा।

पूर्वांचल को जोड़ने वाला विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक

पूर्वी उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने विंध्य-पूर्वांचल स्पर लिंक (विकल्प-1) के एलाइनमेंट को भी मंजूरी दी है। यह करीब 9039 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाला प्रोजेक्ट है। यह लिंक गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली को आपस में जोड़ेगा, जिससे पूर्वी यूपी के इन जिलों में सड़कों का नेटवर्क काफी मजबूत होगा।

एक्सप्रेसवे ग्रिड से मिलेगा बड़ा आर्थिक फायदा

राज्य सरकार के अनुसार, इन सभी परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे को मिलाकर एक सीमलेस एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार करना है। इस इंटिग्रेटेड नेटवर्क से लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल हो जाएगी। यात्रा के समय और ईंधन की खपत में भारी कमी आएगी। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।

शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा भारत और वहीं देखिए कंगाल पाकिस्तान के एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का ऐसा हाल!

जहां एक तरफ भारत आज आधुनिक और शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी कंगाली और बदहाली के आंसू रो रहा है। भारत में जहां रिकॉर्ड समय में बड़े-बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा रहे हैं वहीं पाकिस्तान के आर्थिक संकट ने उसके सबसे प्रमुख शहरों के विकास को पूरी तरह से ठप कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब रावलपिंडी डिवीजन में अपने विकास खर्चों में भारी कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके चलते लंबे समय से वादे किए गए कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए हैं। इसने वहां के गवर्नेंस और अर्बन प्लानिंग के पैरालिसिस को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

रावलपिंडी डिवीजन के बजट में 60 फीसदी की भारी कटौती

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक नए वित्तीय वर्ष में रावलपिंडी डिवीजन में काम करने वाले सभी प्राधिकरणों के विकास आवंटन में भारी कटौती की गई है। इस फंड संकट के कारण छह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया गया है। रावलपिंडी, अटॉक, झेलम, चकवाल, तलगंग और मरी को कवर करने वाले वार्षिक जिला विकास कार्यक्रमों के बजट में करीब 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़ी कटौती के कारण अब नए सार्वजनिक निवेश के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। फंड की इस भारी किल्लत का मतलब यह है कि 30 जून 2027 से पहले किसी भी बड़े विकास कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत होने की कोई उम्मीद नहीं है।

अधर में लटका ‘लेह एक्सप्रेसवे’ और मियावाकी फॉरेस्ट

प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके साथ ही पूरे डिवीजन में मियावाकी जंगलों के विस्तार पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रावलपिंडी या उसके पड़ोसी जिलों में एक भी ऐसा अर्बन फॉरेस्ट विकसित नहीं किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन प्रोजेक्ट्स को अनिश्चित काल के लिए रोका गया है उनमें लेह एक्सप्रेसवे और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शामिल हैं। ये दोनों ही प्रोजेक्ट्स पूर्व आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद के राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और अब पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।

ये मेगा प्रोजेक्ट्स भी हुए डिले या पूरी तरह से ड्रॉप

फंड की कमी और आर्थिक तंगी की मार केवल एक्सप्रेसवे तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ी है। मरी रोड सिग्नल-फ्री कॉरिडोर प्रोजेक्ट को अब कम से कम दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। रावलपिंडी में बार-बार आने वाली शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए डिजाइन की गई प्रस्तावित भूमिगत सीवरेज टनल योजना को अब पूरी तरह से छोड़ दिया गया है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए गाजी बरोथा वॉटर प्रोजेक्ट को भी बंद कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह रही कि इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 17 अरब रुपये से बढ़कर लगभग 110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इसे वहन करना कंगाल पाकिस्तान के बस के बाहर था।

अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं का ही सहारा!

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने विकास एजेंसियों को साफ तौर पर सूचित कर दिया है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स अब केवल एक ही शर्त पर आगे बढ़ सकते हैं। अगर इनके लिए विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं से वित्तीय सहायता या लोन सुरक्षित किया जा सके। इसके बिना पाकिस्तान सरकार के पास इन्हें पूरा करने का कोई पैसा नहीं है। रावलपिंडी विकास प्राधिकरण (RDA) के पूर्व अध्यक्ष तारिक मुर्तजा ने इस बदहाली पर बात करते हुए बताया कि लेह एक्सप्रेसवे, सीवरेज टनल और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को उनके कार्यकाल के दौरान सभी आवश्यक मंजूरियां और फंडिंग मिल चुकी थी। लेकिन देश में हुए सरकार परिवर्तन के बाद इन सभी जनहित के प्रोजेक्ट्स को बंद कर दिया गया।