India Growth Forecast: चार बड़ी ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, जानिए वजह

India Growth Forecast: भारत की आर्थिक ग्रोथ को लेकर अच्छी खबर आई है। चार बड़ी ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है। इसकी वजह निवेश, खपत और एक्सपोर्ट का उम्मीद से बेहतर रहना है।

इनमें चारों में एक OECD यानी ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट है। यह दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर नजर रखने वाला आर्थिक संगठन है। साथ ही, दो क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां Fitch Ratings और S&P Global Ratings हैं। वहीं Asian Development Bank (ADB) एशिया के देशों को आर्थिक विकास के लिए मदद और फंडिंग देने वाला संस्थान है।

ग्रोथ का अनुमान कितना बढ़ा?

OECD ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.3% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया है। चारों एजेंसियों में यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।

Fitch ने अपना अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 6.9% किया है। S&P Global Ratings और ADB ने भी अपना अनुमान 40-40 बेसिस प्वाइंट बढ़ाया है। दोनों ने अब भारत की ग्रोथ 7% रहने का अनुमान लगाया है। अब चारों एजेंसियों का अनुमान 6.9% से 7.1% के बीच है। इससे पहले यह 6.3% से 6.6% के बीच था।

पिछले हफ्ते Moody’s Ratings ने भी भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया था। उसने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए इसे 6% से बढ़ाकर 7% किया था।

जून तिमाही में 7.8% की ग्रोथ

ग्रोथ अनुमान बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह जून तिमाही के आंकड़े हैं। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की GDP 7.8% बढ़ी। यह ज्यादातर एजेंसियों के पुराने अनुमान से काफी ज्यादा थी। S&P के मुताबिक, फैक्ट्री और इंडस्ट्री से जुड़ी गतिविधियां मजबूत रहीं। लोगों ने भी खर्च किया। गुड्स एक्सपोर्ट बढ़ा। सरकारी निवेश भी तेज रहा।

Fitch ने कहा कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत रही। पहली तिमाही की 7.8% ग्रोथ का असर पूरे साल के अनुमान पर भी पड़ा है। बाकी महीनों में ग्रोथ कुछ धीमी हो सकती है। फिर भी पूरे साल का आंकड़ा पहले के अनुमान से बेहतर रह सकता है।

निवेश से मिल रहा बड़ा सहारा

निवेश भारत की ग्रोथ का बड़ा सहारा बन रहा है। पहली तिमाही में ग्रॉस फिक्स्ड कैपिटल फॉर्मेशन 11.9% बढ़ा। ADB के मुताबिक, कम ब्याज दर और सरकारी खर्च से निवेश को मदद मिल रही है। कंपनियों की बैलेंस शीट भी मजबूत है।

Fitch को प्राइवेट निवेश में भी तेजी की उम्मीद है। उसे इस साल निवेश में 10% से ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद है। जुलाई में नॉन-फूड क्रेडिट 19% बढ़ा। इससे कंपनियों की कर्ज की मांग मजबूत रहने का संकेत मिलता है।

घरेलू मांग भी मजबूत

महंगी ऊर्जा के बावजूद देश में मांग बनी हुई है। S&P के मुताबिक, लोगों की खपत अच्छी रही। इंडस्ट्री और सरकारी खर्च से भी ग्रोथ को सहारा मिला। Moody’s ने भी मजबूत घरेलू मांग और निजी खपत को अहम बताया है। भारत के पास कच्चे तेल की सप्लाई के कई विकल्प हैं। विदेशी मुद्रा भंडार भी पर्याप्त है।

ADB ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 5.2% से घटाकर 5% कर दिया है। इसका मतलब है कि महंगी ऊर्जा का असर उम्मीद से कम पड़ा है।

एक्सपोर्ट भी दे रहा सहारा

S&P ने मजबूत गुड्स एक्सपोर्ट को भी ग्रोथ की वजह बताया है। ADB के मुताबिक, सर्विसेज एक्सपोर्ट भी अच्छा बना हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट में मजबूती जारी रहने की उम्मीद है। AI से जुड़ी टेक्नोलॉजी सर्विसेज की मांग से भी भारत को फायदा मिल सकता है।

सितंबर के शुरुआती आंकड़े भी अच्छे संकेत दे रहे हैं। HSBC Flash Composite PMI अगस्त के 54.3 से बढ़कर सितंबर में 56.5 हो गया। मैन्युफैक्चरिंग PMI भी बढ़कर 55.7 पर पहुंच गया।

फिर भी जोखिम खत्म नहीं हुए

करीब 7% का ग्रोथ अनुमान आने का मतलब यह नहीं है कि 7.8% की रफ्तार आगे भी बनी रहेगी। Fitch को बाकी वित्त वर्ष में ग्रोथ कुछ धीमी पड़ने की आशंका है। कमजोर मानसून का असर खेती और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है। महंगाई बढ़ने से लोगों की खरीदारी क्षमता भी घट सकती है।

Fitch को दिसंबर तक महंगाई 5.5% पहुंचने की उम्मीद है। उसे RBI की ओर से ब्याज दर बढ़ाने की भी आशंका है। OECD ने भी कहा है कि हाल की तेज ग्रोथ के बावजूद साल की दूसरी छमाही में लोगों की खरीदारी क्षमता पर दबाव पड़ सकता है। इससे ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम हो सकती है।

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शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा भारत और वहीं देखिए कंगाल पाकिस्तान के एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट का ऐसा हाल!

जहां एक तरफ भारत आज आधुनिक और शानदार-दमदार एक्सप्रेसवे का देश बनता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देश पाकिस्तान अपनी कंगाली और बदहाली के आंसू रो रहा है। भारत में जहां रिकॉर्ड समय में बड़े-बड़े हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा रहे हैं वहीं पाकिस्तान के आर्थिक संकट ने उसके सबसे प्रमुख शहरों के विकास को पूरी तरह से ठप कर दिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को अब रावलपिंडी डिवीजन में अपने विकास खर्चों में भारी कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके चलते लंबे समय से वादे किए गए कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स अधर में लटक गए हैं। इसने वहां के गवर्नेंस और अर्बन प्लानिंग के पैरालिसिस को पूरी तरह उजागर कर दिया है।

रावलपिंडी डिवीजन के बजट में 60 फीसदी की भारी कटौती

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक नए वित्तीय वर्ष में रावलपिंडी डिवीजन में काम करने वाले सभी प्राधिकरणों के विकास आवंटन में भारी कटौती की गई है। इस फंड संकट के कारण छह बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को पूरी तरह से रोक दिया गया है। रावलपिंडी, अटॉक, झेलम, चकवाल, तलगंग और मरी को कवर करने वाले वार्षिक जिला विकास कार्यक्रमों के बजट में करीब 60 प्रतिशत की कटौती की गई है। इस बड़ी कटौती के कारण अब नए सार्वजनिक निवेश के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। फंड की इस भारी किल्लत का मतलब यह है कि 30 जून 2027 से पहले किसी भी बड़े विकास कार्य या प्रोजेक्ट की शुरुआत होने की कोई उम्मीद नहीं है।

अधर में लटका ‘लेह एक्सप्रेसवे’ और मियावाकी फॉरेस्ट

प्रशासनिक अधिकारियों ने इसके साथ ही पूरे डिवीजन में मियावाकी जंगलों के विस्तार पर भी पूरी तरह से रोक लगा दी है। जिला प्रशासन के सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान रावलपिंडी या उसके पड़ोसी जिलों में एक भी ऐसा अर्बन फॉरेस्ट विकसित नहीं किया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि जिन प्रोजेक्ट्स को अनिश्चित काल के लिए रोका गया है उनमें लेह एक्सप्रेसवे और मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल शामिल हैं। ये दोनों ही प्रोजेक्ट्स पूर्व आंतरिक मंत्री शेख रशीद अहमद के राजनीतिक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और अब पूरी तरह से ठप हो चुके हैं।

ये मेगा प्रोजेक्ट्स भी हुए डिले या पूरी तरह से ड्रॉप

फंड की कमी और आर्थिक तंगी की मार केवल एक्सप्रेसवे तक ही सीमित नहीं है बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण नागरिक सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट्स पर भी पड़ी है। मरी रोड सिग्नल-फ्री कॉरिडोर प्रोजेक्ट को अब कम से कम दिसंबर 2027 तक के लिए टाल दिया गया है। रावलपिंडी में बार-बार आने वाली शहरी बाढ़ की समस्या से निपटने के लिए डिजाइन की गई प्रस्तावित भूमिगत सीवरेज टनल योजना को अब पूरी तरह से छोड़ दिया गया है। रावलपिंडी और इस्लामाबाद के लिए दीर्घकालिक जल सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए गाजी बरोथा वॉटर प्रोजेक्ट को भी बंद कर दिया गया है। इसकी मुख्य वजह यह रही कि इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 17 अरब रुपये से बढ़कर लगभग 110 अरब रुपये तक पहुंच गई। इसे वहन करना कंगाल पाकिस्तान के बस के बाहर था।

अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं का ही सहारा!

रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तानी अधिकारियों ने विकास एजेंसियों को साफ तौर पर सूचित कर दिया है कि ये सभी प्रोजेक्ट्स अब केवल एक ही शर्त पर आगे बढ़ सकते हैं। अगर इनके लिए विश्व बैंक या एशियाई विकास बैंक जैसे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं से वित्तीय सहायता या लोन सुरक्षित किया जा सके। इसके बिना पाकिस्तान सरकार के पास इन्हें पूरा करने का कोई पैसा नहीं है। रावलपिंडी विकास प्राधिकरण (RDA) के पूर्व अध्यक्ष तारिक मुर्तजा ने इस बदहाली पर बात करते हुए बताया कि लेह एक्सप्रेसवे, सीवरेज टनल और वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट को उनके कार्यकाल के दौरान सभी आवश्यक मंजूरियां और फंडिंग मिल चुकी थी। लेकिन देश में हुए सरकार परिवर्तन के बाद इन सभी जनहित के प्रोजेक्ट्स को बंद कर दिया गया।