Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: जिस तरह सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, उसी तरह उन्हें बिल्प पत्र यानी बेलपत्र भी प्रिय हैं। भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेल पत्र की जड़ में दुनिया में जितने सभी प्रसिद्ध तीर्थ निवास करते हैं। इसलिए इसकी जड़ के पास दीपक जलाने, दीपमाला दान करने से कई गुना फल मिलता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति धूप-दीप, फूलों से बिल्ववृक्ष के मूल का पूजन करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और उसके सन्तान और सुख दोनों में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को संतान से सुख मिलता है। शिवपुराण सावन के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व और अनेक लाभ बताए गए हैं। इसे प्रदोष काल या रात में जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

भगवान शिव का आशीर्वाद : शिवपुराण के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष की जड़ में स्वयं महादेव का वास होता है। सावन में इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक को सुख-शांति तथा आरोग्य का वरदान देते हैं।

मां लक्ष्मी का वास और धन-धान्य की प्राप्ति : धार्मिक कथाओं के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष में माता लक्ष्मी का भी निवास माना गया है। मान्यता है कि शाम या रात के समय बेलपत्र के नीचे घी का दीपक जलाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

पापों का नाश : माना जाता है कि बेलपत्र की जड़ में समस्त तीर्थों का वास होता है। इसके नीचे दीपदान करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष से मुक्ति : घर में या आसपास लगे बेलपत्र के नीचे दीया जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है।

पितृ दोष और कष्टों से राहत : बेलपत्र के पेड़ के पास शाम को दिया जलाने से ग्रह-दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

दीपक जलाने का सही तरीका

दीपक के लिए गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का उपयोग करें।

दीपक मुख्य रूप से प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में बेलपत्र की जड़ के पास जलाएं।

दीपक जलाते समय भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का मन में जाप करें।

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