Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन शिवरात्रि पर एक साथ बन रहे हैं 4 राजयोग, 4 राशियों पर बरसेगी भगवान की कृपा और मिलेगा मान-सम्मान

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो कर इसी दिन भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन ढेरों शिवभक्त पवित्र नदियों से कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। खास बात यह है कि इस साल शिवरात्रि पर एक साथ कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक तो सावन शिवरात्रि का पर्व दूसरे मंगला गौरी व्रत के साथ पड़ रहा है। इसके अलावा यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से 4 प्रभावशाली राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इनमें हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग शामिल हैं। इन शुभ योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिल सकता है। लेकिन 4 राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। इन राशियों को करियर में सफलता, कारोबार में लाभ, आर्थिक मजबूती और समाज में मान-सम्मान मिलने के योग बन सकते हैं। आइए जानते हैं कि वे शुभ राशियां कौन सी हैं।

इन चार राशियों को होगा लाभ

वृषभ राशि : इन शुभ योगों के बनने से वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है। करियर में लंबे समय से अटके काम अब गति पकड़ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ प्रमोशन के अवसर भी बन सकते हैं। व्यापारियों को नए ग्राहक मिलने और आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

कर्क राशि : इस राशि के जातकों के लिए चारों राजयोगों का सबसे शुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होंगे।

तुला राशि : इस राशि के जातकों को यह राजयोग सफलता की सीढ़ी चढ़ा सकता है। इस अवधि में व्यापार से जुड़े जातकों को अच्छे लाभ के अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट गति पकड़ेंगे और उन्हें पूरा करने में सफलता मिल सकती है।

कुंभ राशि : शुभ राजयोग से कुंभ राशि के जातकों की किस्मत चमक सकती है। नौकरी में बदलाव या करियर की नई शुरुआत करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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Sawan Second Somwar 2026: दूसरे सोमवार पर बन रहे प्रदोष व्रत समेत 7 शुभ संयोग, जानें किस समय किया जाएगा भगवान शिव का जलाभिषेक

Sawan Second Somwar 2026: सावन माह के सोमवार पर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा-उपवास करना शुभ मानते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी पड़ रही है, जिससे सावन सोमवार के साथ पहले प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस साल सावन के दूसरे सोमवार को प्रदोष व्रत के साथ ही कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। उनके और माता पार्वती के आशीर्वाद से जल्द ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन के दूसरे सोमवार पर बनने वाले 7 शुभ संयोग

सावन के दूसरे सोमवार पर सोम प्रदोष व्रत, एकादशी पारण, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग, हंसराज योग, वज्र योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग एक साथ बन रहा है।

प्रदोष व्रत : दूसरे सावन सोमवार पर सावन का पहला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत भगवान शिव के लिए रखते हैं और पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद होती है। उस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से है। प्रदोष व्रत करने से दुख, रोग, दोष, पाप, कष्ट आदि मिट जाते हैं।

एकादशी पारण : दूसरे सावन सोमवार को कामिका एकादशी व्रत का पारण है, जो सूर्योदय के बाद होगा। इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 08:00 ए एम तक है, फिर शिव जी की तिथि त्रयोदशी प्रारंभ होगी।

त्रिग्रही योग : दूसरे सावन सोमवार को कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की युति से त्रिग्रही योग बना हुआ है। 5 अगस्त को जब कर्क में बुध का गोचर हुआ है, तब से यह त्रिग्रही योग बना है। इससे मिथुन, कर्क, कन्या वालों को बंपर लाभ होगा।

बुधादित्य योग : कर्क में ही सुर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण हुआ है, जो दूसरे सावन सोमवार पर भी विद्यमान होगा।

हंसराज योग : इस समय कर्क राशि में देव गुरु बृहस्पति विराजमान हैं। यह उनकी उच्च राशि है। इस वजह से हंसराज योग बन रहा है।

वज्र योग : दूसरे सावन सोमवार पर प्रात:काल से वज्र योग बनेगा, जो रात – 10:27 पी एम तक रहेगा। इस योग में नए काम नहीं करते हैं, वाहन, सोना आदि नहीं खरीदते हैं।

सिद्धि योग : दूसरे सावन सोमवार पर रात 10:27 पी एम से सिद्धि योग बन रहा है, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। इसमें किए गए कार्य सिद्ध होते हैं।

दूसरा सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

दूसरे सावन सोमवार पर जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से ही प्रारंभ हो जाएगा। वैसे तो आप सुबह में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं। लेकिन नीचे सुबह के कुछ शुभ मुहूर्त दिए गए हैं। उस दिन प्रदोष है तो शाम के समय में भी जलाभिषेक होगा।

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:22 बजे से 05:05 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक

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Budhaditya Yog 2026: कर्क राशि में आज बुध गोचर से बनेगा बुधादित्य राजयोग, सूर्य के समान चमकेगा 4 राशियों का भाग्य

Budhaditya Yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों का गोचर बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। यूं तो यह सामान्य घटना है, लेकिन इस असर देश-दुनिया की घटनाओं को सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है। कोई ग्रह जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है, तो कई उसका संयोग वहां पहले से मौजूद दूसरे ग्रहों के साथ बन जाता है। ऐसी स्थिति में कुछ खास और लाभकारी योग भी बनते हैं, जो कुछ राशियों के लिए अत्यंत शुभ होते हैं।

ऐसा ही संयोग कर्क राशि में आज बनने जा रहा है। इस राशि में गुरु और सूर्य पहले से ही मौजूद हैं, जबकि बुध आज प्रवेश कर रहे हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, 5 अगस्त को बुध के कर्क राशि में गोचर करेंगे। इस गोचर के साथ ही बुधादित्य योग का निर्माण होगा। इस योग से 4 राशियों को शुभ फलों की प्राप्ति हो सकती है। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को आत्मा और पिता का कारक माना जाता है। वहीं, बुध को बुद्धि व वाणी का कारक माना गया है। आइए जानते हैं इस गोचर से किन-किन राशियों को जबरदस्त लाभ मिलने वाला है।

मेष राशि : मेष राशि के जातकों के लिए यह योग अत्यंत फलदायी सिद्ध होगा। संपत्ति, वाहन या नया घर खरीदने के योग बन रहे हैं। नौकरी में पदोन्नति और वेतन वृद्धि के स्पष्ट संकेत हैं। माता-पिता का पूरा सहयोग मिलेगा और घर में मांगलिक कार्य हो सकते हैं।

मिथुन राशि : बुध आपकी राशि के स्वामी हैं, इसलिए सूर्य के साथ उनका यह संयोग आपके लिए वरदान साबित हो सकता है। अटका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। आपकी बोलचाल शैली से लोग प्रभावित होंगे, जिससे व्यापार और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को बड़ा फायदा होगा।

कर्क राशि : यह गोचर आपकी ही राशि (प्रथम भाव) में हो रहा है, जिससे आपका आत्मविश्वास और मान-सम्मान चरम पर रहेगा। समाज में आपकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होगी। व्यवसाय से जुड़े लोगों को नए सौदे मिल सकते हैं। जीवनसाथी के साथ रिश्ते मजबूत होंगे।

तुला राशि : तुला राशि वालों के लिए यह योग कर्म भाव में बनेगा, जो करियर में बड़े बदलाव लाएगा। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को मनचाही कंपनी से ऑफर मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपकी कार्यशैली की सराहना होगी। आय के नए स्रोत बनेंगे, जिससे आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

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Guru Purnima 2026: 29 जुलाई को गुरु पूर्णिमा पर 56 साल बाद एक साथ 3 राजयोगों का बना दुर्लभ संयोग, जानें पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

Guru Purnima 2026: हिंदू धर्म में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चारों वेदों और महाभारत के रचयिता ऋषि वेद व्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। साथ ही, इस दिन गुरु पूर्णिमा का पर्व भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन धार्मिक कार्यक्रमों के अलावा लोग अपने गुरुओं का सम्मान करते हैं और उनका आभार जताते हैं।

माना जाता है कि इस दिन जो लोग अपने माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों को अपना गुरु मानकर उनका सम्मान करते हैं, उन्हें सद्गति प्राप्त होती है। इस दिन अपने गुरु के पास जाकर उनके चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लेना चाहिए। इस बार गुरु पूर्णिमा पर ग्रहों का बहुत अद्भुत और शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ऐसा संयोग 56 वर्षों में पहली बार देखने को मिल रहा है। आइए जानें इस दिन की विशेष पूजा विधि, मुहूर्त और इस दिन बन रहे 3 राजयोगों के बारे में

गुरु पूर्णिमा 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से होगी। इसका समापन 29 जुलाई को रात 08:05 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व 29 जुलाई को मनाया जाएगा।

सत्यनारायण व्रत और गुरु पूजन का समय

29 जुलाई को सुबह 05:41 बजे से लेकर प्रातः 09:47 बजे तक पूजा का सबसे उत्तम मुहूर्त रहेगा। इस दौरान आप सत्यनारायण भगवान की कथा और अपने गुरु का पूजन कर सकते हैं।

56 साल बाद बन रहे हैं 3 राजयोग

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस बार गुरु पूर्णिमा पर एक साथ 3 राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इस दिन बुधादित्य राजयोग, शश महापुरुष और हंस राजयोग बन रहा है। बुधादित्य राजयोग सूर्य और बुध की युति से बनता है, जो बौद्धिक क्षमता, करियर और मान-सम्मान में वृद्धि करेगा। वहीं, इस दिन ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण शश राजयोग जैसे शक्तिशाली योग भी बन रहे हैं।

गुरु पूर्णिमा पूजा मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:17 से 04:59 बजे तक

प्रातःकाल पूजा का श्रेष्ठ समय : सुबह 05:41 से 09:05 बजे तक

विजय मुहूर्त : दोपहर 02:43 से 03:37 बजे तक

सांध्यकाल मुहूर्त : शाम 07:14 से रात 08:17 बजे तक

राहुकाल : दोपहर 12:27 PM से 02:08 PM बजे तक

पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और गुरु/महर्षि वेदव्यास जी का ध्यान करके व्रत/पूजन का संकल्प लें।

महर्षि वेदव्यास जी (आदि गुरु) के चित्र या मूर्ति पर रोली, चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें।

अपने प्रत्यक्ष गुरुजनों का आशीर्वाद लें, वस्त्र/फल/दक्षिणा भेंट करें और उनका पूजन करें।

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