माता की चौकी सजाने से पहले: जान लें पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, सुबह से दोपहर तक की पूरी टाइमिंग

शारदीय नवरात्रि इस साल 11 अक्टूबर, रविवार से शुरू होगी। नवरात्रि के पहले दिन घर में कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है। पूरे 9 दिनों तक माता के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। इस बार कलश स्थापना के लिए दो शुभ समय मिल रहे हैं।

प्रतिपदा तिथि कब से कब तक?

आश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होगी। यह 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी। 11 अक्टूबर को सूर्योदय प्रतिपदा तिथि में होने के कारण इसी दिन से नवरात्रि की शुरुआत होगी।

नवरात्रि के दौरान कई लोग व्रत रखते हैं। घर में कलश स्थापना के बाद 9 दिनों तक पूजा की जाती है। इसके बाद कन्या पूजा और हवन भी किया जाता है।

कलश स्थापना के शुभ समय

सुबह: 6:19 बजे से 10:12 बजे तक

दोपहर: 11:44 बजे से 12:31 बजे तक

सुबह का मुहूर्त 3 घंटे 52 मिनट का है। वहीं दोपहर का मुहूर्त 46 मिनट का रहेगा।

पहले दिन कब-कब रहेगा शुभ समय?

नवरात्रि के पहले दिन पूजा और दूसरे शुभ कामों के लिए ये समय रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:40 से 5:30 बजे तक

प्रातः संध्या: सुबह 5:05 से 6:19 बजे तक

विजय मुहूर्त: दोपहर 2:04 से 2:50 बजे तक

अमृत काल: दोपहर 3:55 से शाम 5:34 बजे तक

निशिता मुहूर्त: रात 11:43 से 12:33 बजे तक

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके व्रत और पूजा का संकल्प लिया जा सकता है।

राहुकाल, सूर्योदय और चंद्रोदय का समय

राहुकाल शाम 4:29 बजे से 5:56 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस समय शुभ काम करने से बचना चाहिए। सूर्योदय सुबह 6:19 बजे होगा। सूर्यास्त शाम 5:56 बजे होगा। चंद्रोदय सुबह 6:52 बजे और चंद्रास्त शाम 6:02 बजे होगा।

कलश स्थापना को नवरात्रि की पूजा की शुरुआत माना जाता है। इसे सही समय और पूजा की विधि के अनुसार करने की मान्यता है।

Aashadh Gupt Navratri 2026: जुलाई में इस दिन से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि, जानें सभी 10 महाविद्याओं के नाम और महत्व

Aashadh Gupt Navratri 2026: आषाढ़ का महिना चंद्र मास आधारित हिंदू कैलेंडर का चौथा महीना होता है। इस महीने में सबसे ज्यादा बारिश होती है। इसी माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से पूरे साल में आने वाली 4 नवरात्रि पर्व में से आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस समय में शक्ति की उपासना बेहद फलदायी मानी जाती है। साल में चार बार आने वाली नवरात्रि में चैत्र और शारदीय नवरात्रि सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं, लेकिन माघ और आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि भी धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को शाकंबरी नवरात्रि या शाकंबरी उत्सव के नाम से भी जाना जाता है। यह नवरात्रि मुख्य रूप से उत्तर भारत में मनाई जाती है। गुप्त नवरात्रि को साधना, मंत्र जाप और दस महाविद्याओं की आराधना के लिए जाना जाता है। इस साल आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 15 जुलाई से शुरू होकर 23 जुलाई तक चलेगी। इस दौरान देवी की 10 महाविद्याओं की पूजा की जाएगी और भक्त पूरे नौ दिनों तक व्रत एवं उपासना करेंगे।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026 तिथि और मुहूर्त

गुप्त नवरात्रि का पहला दिन 15 जुलाई 2026 को होगा। इसी दिन घट स्थापना की जाएगी। घट स्थापना का शुभ समय सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे तक रहेगा। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी।

10 महाविद्याओं के नाम

मां काली : शत्रुओं पर विजय और भय से मुक्ति के लिए मां काली की आराधना की जाती है।

मां तारा : आर्थिक उन्नति, मोक्ष और ज्ञान की प्राप्ति के लिए तारा देवी की पूजा फलदायी है।

मां त्रिपुर सुंदरी (ललिता): सुख-समृद्धि, सुंदरता और ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के लिए इनकी साधना की जाती है।

मां भुवनेश्वरी : संतान सुख और पारिवारिक सुख-शांति के लिए भुवनेश्वरी देवी की कृपा अनिवार्य है।

मां छिन्नमस्ता : मानसिक शक्ति और सोची हुई कामनाओं की तत्काल पूर्ति के लिए इनकी पूजा की जाती है।

मां त्रिपुर भैरवी : आत्मविश्वास में वृद्धि और जीवन की बड़ी बाधाओं को दूर करने के लिए भैरवी माता का पूजन करें।

मां धूमावती : संकटों के नाश और दुर्भाग्य को दूर करने के लिए धूमावती देवी की आराधना की जाती है।

मां बगलामुखी : अदालती मामलों, वाद-विवाद और विरोधियों को शांत करने के लिए इनकी पूजा अचूक मानी जाती है।

मां मातंगी : वैवाहिक जीवन की समस्याओं को सुलझाने और कला के क्षेत्र में सफलता के लिए इनकी साधना करें।

मां कमला : धन की देवी मां लक्ष्मी का ही रूप हैं। पूर्ण ऐश्वर्य और धन प्राप्ति के लिए इनकी पूजा की जाती है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व

चैत्र और शारदीय नवरात्रि की तरह गुप्त नवरात्रि में सार्वजनिक उत्सव नहीं होते, बल्कि इसमें साधकों द्वारा तंत्र-मंत्र और गुप्त साधनाएं की जाती हैं। यह पर्व मुख्य रूप से मनोवांछित फल की प्राप्ति, शत्रुओं पर विजय और आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करने के लिए उत्तम माना जाता है।

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