बिजनेस का B भी नहीं आता है फिर भी 36 साल की महिला ने एक लाख रुपये से खड़ी कर दी कंपनी, अब महीने की कमाई ₹35 लाख!

एक महिला की बिजनेस जर्नी इन दिनों चर्चा में है, जिसने महज ₹1 लाख से अपने सफर की शुरुआत की थी। न कोई कारोबारी विरासत, न बड़ा निवेश और न ही बिजनेस की कोई पारिवारिक समझ इसके बावजूद उन्होंने छोटे स्तर से शुरुआत कर अपनी अलग पहचान बनाई। 36 साल की उम्र में वह आज एक सफल कंपनी चला रही हैं और उनकी कहानी संघर्ष, आत्मविश्वास और लगातार मेहनत की मिसाल पेश करती है। शुरुआती दौर में उन्होंने एक छोटे बेसमेंट से काम शुरू किया था। सफर के दौरान आर्थिक परेशानियां भी आईं, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।

समय के साथ उनका छोटा-सा कारोबार बढ़ता गया और आज कंपनी करीब ₹3 करोड़ का मासिक कारोबार करती है। खास बात यह है कि इस बिजनेस से करीब 150 परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। महिला के मुताबिक, वह आज भी अपनी यात्रा को पूरा नहीं मानतीं और आने वाले वर्षों में कंपनी को और आगे ले जाने की तैयारी में जुटी हैं।

पिता ने दिए थे ₹1 लाख

महिला के मुताबिक, करीब 10 साल पहले उनके पिता ने उन्हें ₹1 लाख दिए थे। इसी रकम से उन्होंने एक छोटा-सा बेसमेंट किराए पर लिया और एक मशीन खरीदकर काम शुरू किया। उनका परिवार बिजनेस से जुड़ा हुआ नहीं था। परिवार में किसी को कारोबार का अनुभव नहीं था। इसके बावजूद उनके माता-पिता और बाद में उनके पति ने उनके फैसले का लगातार समर्थन किया।

I’m 36, I’m a mother, and I make ₹35,00,000 a month. Sometimes I genuinely cannot believe this is my life.

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कभी लंच के पैसे भी नहीं होते थे

बिजनेस की शुरुआती राह आसान नहीं रही। महिला ने बताया कि एक समय ऐसा भी था जब उनकी जेब में लंच खरीदने तक के पैसे नहीं होते थे। ऐसे मुश्किल दौर में उनके दोस्तों ने उनकी मदद की और उन्हें आगे बढ़ते रहने का हौसला दिया। वित्तीय परेशानियों के बावजूद उन्होंने काम बंद नहीं किया। हर अगले दिन वह उसी ऊर्जा के साथ दोबारा काम शुरू करती थीं।

10 साल में ₹3 करोड़ का मासिक कारोबार

शुरुआत में जिस बिजनेस को आसपास के लोग एक सामान्य कोशिश के तौर पर देखते थे, वह आज एक स्थापित कंपनी में बदल चुका है। महिला के अनुसार, उनकी कंपनी फिलहाल हर महीने करीब ₹3 करोड़ का कारोबार करती है और कंपनी profitable है। उन्होंने अपनी व्यक्तिगत मासिक कमाई करीब ₹35 लाख बताई है। कंपनी की ग्रोथ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज इससे करीब 150 परिवारों की आय जुड़ी हुई है।

अब पांच साल आगे की तैयारी

महिला का कहना है कि इस साल पहली बार उनके पास एक पूरी टीम है, जो कंपनी को आगे बढ़ाने में उनकी मदद कर रही है। वह अगले पांच साल के लिए बिजनेस को लेकर एक स्पष्ट विजन के साथ काम कर रही हैं। दस साल के सफर के बाद भी वो खुद को अपनी मंजिल पर नहीं मानतीं। उनके मुताबिक, उन्हें अब भी लगता है कि उन्होंने अपने बिजनेस की शुरुआत भर की है। उनकी कहानी में सबसे खास बात सिर्फ ₹1 लाख से करोड़ों के कारोबार तक पहुंचना नहीं, बल्कि लगातार मुश्किलों के बावजूद काम करते रहना है। महिला ने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें शुरू से भरोसा था कि वह यह कर सकती हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

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जापान के खिलाफ होने वाले महामुकाबले से पहले क्या बोले सरपंच

 

भारत के टी20 कप्तान श्रेयस अय्यर चाहते हैं कि उनकी टीम जापान के अनजान हालात के हिसाब से जल्दी ढल जाए, क्योंकि वे अफ़गानिस्तान के खिलाफ 3-0 से टी 20 सीरीज़ जीतने के बाद एशियन गेम्स में हिस्सा लेने जा रहे हैं।

भारतीय टीम रविवार सुबह की फ़्लाइट से जापान के लिए रवाना होगी और आइची-नागोया में एशियन गेम्स में अपना अभियान शुरू करने से पहले जापान के खिलाफ़ एक टी 20 मैच खेलेगी। अय्यर के लिए यह दौरा एशियन गेम्स में उनकी पहली मौजूदगी भी होगी, इसलिए वहाँ के हालात के हिसाब से ढलना उनकी सबसे ज़रूरी प्राथमिकताओं में से एक है।”एशियन गेम्स के बारे में कहूँ तो, यह मेरा पहला मौका होगा। इसलिए, मैं वहाँ जाने और सबसे पहले वहाँ के हालात के हिसाब से ढलने का इंतज़ार कर रहा हूँ क्योंकि हम पहले कभी वहाँ नहीं गए हैं।”

अय्यर ने कहा, “इसलिए, वहाँ की पिच कैसी हैं, इस बारे में कुछ अंदाज़ा होना ज़रूरी है; यह सब चीज़ों का मिला-जुला असर होगा और सबसे ज़रूरी बात यह है कि हम एक टीम के तौर पर एकजुट रहें और यह सीरीज़ निश्चित रूप से एशियन गेम्स के लिए एक शानदार मोमेंटम है।”

अफ़गानिस्तान के खिलाफ़ भारत की सीरीज़ जीत पर बात करते हुए, अय्यर ने विरोधी टीम के जोश और कॉम्पिटिटिव रवैये की तारीफ़ की और साथ ही अपनी टीम के आत्मविश्वास और निरंतरता पर भी ज़ोर दिया।

“अगर आप अफ़ग़ानी खिलाड़ियों को देखें, तो वे बहुत जोशीले लोग हैं और मैदान पर उतरते ही उनका रवैया ज़बरदस्त होता है; वे जीतना चाहते हैं। उनमें यहाँ आकर अच्छा प्रदर्शन करने की भूख और जोश है। पहली सीरीज़ जीत ज़िम्बाब्वे में हुई थी। दूसरी सीरीज़ जीत, और वह भी घर से दूर, लेकिन घरेलू माहौल जैसा ही महसूस हुआ। यह बहुत अच्छा लगता है। हर खिलाड़ी ने मैदान पर जाकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की ज़िम्मेदारी ली। मुझे लगता है कि इसी योगदान की वजह से हमने सीरीज़ में शानदार जीत हासिल की।”

“मुझे लगता है कि हमारा नज़रिया ही पॉज़िटिव था। जब हम मैदान पर उतरे, तो हम टूर्नामेंट से पहले अपने लिए एक लय बनाना चाहते थे और फिर पहले मैच में आपने देखा कि हमारा अंदाज़ कितना दबदबे वाला था।” उन्होंने आगे कहा, “खिलाड़ियों का रवैया शानदार था और मुझे लगता है कि यह दूसरे और तीसरे मैच में भी देखने को मिला।”

अय्यर ने ओपनर अभिषेक शर्मा की भी खास तौर पर तारीफ़ की, जिन्होंने सीरीज़ में टॉप ऑर्डर में अहम भूमिका निभाई और गुरुवार को तीसरे टी20 मैच में सिर्फ़ 30 गेंदों में शतक जड़कर रिकॉर्ड बनाया।

“अभिषेक ने जिस तरह से पूरे समय बल्लेबाज़ी की… वह आम तौर पर यहीं दिल्ली में प्रैक्टिस करते हैं और उन्होंने कहा कि उन्हें यहाँ की पिचों की अच्छी आदत है। इसलिए, हमें उनसे यहाँ बड़े स्कोर की उम्मीद थी और पिछले दो मैचों में भी उन्होंने ऐसा करके दिखाया, इसलिए मैं उनके लिए खुश हूँ।”

अय्यर ने भारत के लगातार अच्छे प्रदर्शन का श्रेय ड्रेसिंग रूम के माहौल को दिया और कहा कि टीम का स्टैंडर्ड बनाए रखने में प्लेइंग XI से बाहर रहने वाले खिलाड़ियों का योगदान भी उतना ही अहम है।

“सच कहूँ तो, हमने तय किया है कि हम अपने लिए एक स्टैंडर्ड सेट करेंगे और आप हर मैच में देखेंगे कि हम बेहतर होते जा रहे हैं। इससे मैच में हिस्सा लेने वाले और बाहर बैठने वाले हर खिलाड़ी की सोच का पता चलता है। उनका योगदान बहुत मायने रखता है क्योंकि ड्रेसिंग रूम के अंदर की एनर्जी ही असल में अच्छा प्रदर्शन और नतीजे दिलाती है।”

Rashifal Today: इन मूलांक वालों के लिए धन लाभ के योग, जानें क्या कहते हैं आपके सितारे

Aaj Ka Rashifal: आज आर्थिक मामलों में स्थिति सामान्य रह सकती है। आपकी योजनाओं में बदलाव हो सकता है, जिससे बजट पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। निवेश के नए मौके मिल सकते हैं, लेकिन फैसला सोच-समझकर ही लें। आइए जानते हैं मूलांक 1 से 9 तक के लिए आज का दिन कैसा रहेगा।

मूलांक 1

अगर आपका जन्म 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो आज आपका ध्यान पैसों से जुड़े मामलों पर रहेगा। आर्थिक स्थिति सामान्य रह सकती है, इसलिए खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है। मन में बड़े निवेश की योजना आ सकती है, लेकिन फिलहाल छोटे और सुरक्षित निवेश पर ध्यान देना बेहतर होगा। कोई आर्थिक प्रस्ताव मिले तो अच्छी तरह सोचने के बाद ही फैसला लें। लेन-देन में साफ-साफ बात करें। आपकी मेहनत और हुनर से कमाई के नए रास्ते भी मिल सकते हैं।

मूलांक 2

अगर आपका जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में दिन अच्छा रह सकता है। आप समझदारी से फैसले लेंगे और बड़े निवेश की योजना बनाने के लिए समय अनुकूल है। कोई पुराना आर्थिक मामला सुलझ सकता है, जिससे आपको राहत मिलेगी। खर्च कम करें और बचत को प्राथमिकता दें। आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा और आप बेहतर आर्थिक योजना बना पाएंगे। परिवार या दोस्तों से सलाह लेना भी फायदेमंद रहेगा।

मूलांक 3

अगर आपका जन्म 3, 12, 21 या 30 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। आप अपनी पुरानी आर्थिक योजनाओं की दोबारा समीक्षा कर सकते हैं। इससे भविष्य में फायदा मिल सकता है। जोखिम वाले निवेश से फिलहाल दूरी बनाकर रखें। छोटे-छोटे खर्चों पर भी नजर रखें, क्योंकि ये बजट बिगाड़ सकते हैं। पैसे से जुड़ा कोई बड़ा फैसला लेने से पहले किसी जानकार की सलाह लेना बेहतर होगा।

मूलांक 4

अगर आपका जन्म 4, 13, 22 या 31 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में स्थिति सामान्य रह सकती है। आपकी योजनाओं में बदलाव हो सकता है, जिससे बजट पर दोबारा विचार करना पड़ेगा। निवेश के नए मौके मिल सकते हैं, लेकिन फैसला सोच-समझकर ही लें। कोई पुराना आर्थिक मामला सुलझाने के लिए दिन अच्छा है। जल्दबाजी से बचें और खर्चों पर नियंत्रण रखें। आपकी मेहनत का फायदा धीरे-धीरे मिल सकता है।

मूलांक 5

अगर आपका जन्म 5, 15 या 23 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में दिन अच्छा रहने वाला है। कमाई के नए स्रोत बन सकते हैं और पुराने निवेश से फायदा मिलने की संभावना है। नए आर्थिक अवसर भी सामने आ सकते हैं। किसी आर्थिक योजना पर काम करने से पहले उसके बारे में अच्छी तरह जानकारी लें। किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए उपयोगी साबित हो सकती है। कारोबार में साझेदारी करते समय सावधानी रखें।

मूलांक 6

अगर आपका जन्म 6, 15 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सकारात्मक स्थिति रहेगी। आपकी मेहनत और बनाई गई योजनाओं का अच्छा परिणाम मिल सकता है। निवेश करने का विचार है तो पहले अच्छी तरह रिसर्च करें। परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सुधार के संकेत हैं। पुराना कर्ज या पैसों से जुड़ा विवाद खत्म हो सकता है। भविष्य के लिए बचत करें और सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दें।

मूलांक 7

अगर आपका जन्म 7, 16 या 25 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। बजट बनाकर चलना और बेवजह के खर्चों से बचना जरूरी है। निवेश के नए मौके मिल सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी में फैसला न लें। किसी करीबी दोस्त या परिवार के सदस्य से आर्थिक सलाह लेना फायदेमंद हो सकता है। फिलहाल बड़े आर्थिक जोखिम लेने से बचें और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करने पर ध्यान दें।

मूलांक 8

अगर आपका जन्म 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, तो आज पैसों के मामले में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। हालांकि, खर्चों पर नजर रखना जरूरी है। कुछ अतिरिक्त खर्च हो सकते हैं, लेकिन वे नियंत्रण में रहेंगे। निवेश का कोई नया मौका मिले तो पूरी जानकारी लेने के बाद ही फैसला करें। लंबे समय से बनाई गई आर्थिक योजना को अब लागू करने का समय आ सकता है। सख्त बजट बनाकर चलने से फायदा होगा।

मूलांक 9

अगर आपका जन्म 9, 18 या 27 तारीख को हुआ है, तो आज आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। आपकी मेहनत का फल मिलने और योजनाओं के सफल होने की संभावना है। नए निवेश का विचार आ सकता है, जिससे भविष्य में फायदा मिल सकता है। हालांकि, किसी की सलाह पर आंख बंद करके भरोसा न करें। बेवजह के खर्चों से बचें। अगर कोई आर्थिक विवाद चल रहा है तो उसे सुलझाने के लिए आज का दिन अच्छा हो सकता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख की सामग्री पूरी तरह से ज्योतिषीय भविष्यवाणियों पर आधारित है। हम इसकी सत्यता और सटीकता का पूरी तरह दावा नहीं करते। यहां दी गई किसी भी जानकारी के आधार पर कोई वित्तीय, स्वास्थ्य या व्यावसायिक निर्णय लेने से पहले योग्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

‘जिंदगी मैराथन है, कोई 100 मीटर की दौड़ नहीं…’, एन चंद्रशेखरन की वो 4 बातें जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए

N Chandrasekaran: ‘जिंदगी एक मैराथन दौड़ है, कोई 100 मीटर की स्प्रिंट नहीं। असली मकसद दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि खुद को हर दिन बेहतर बनाना है।’ यह प्रेरणादायक बात देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चेन्नई के चेंगलपट्टू स्थित साई यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित करते हुए कही।

खुद 18 सालों से रनिंग का शौक रखने वाले चंद्रशेखरन ने खेल और जीवन के अनुभवों को जोड़ते हुए युवाओं को सफलता, AI के असर और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए बेहद खास मंत्र दिए। आइए आपको बताते हैं उनकी इस स्पीच के 4 सबसे बड़े टेकअवे और सबक।

‘उतार-चढ़ाव से मत डरो, आत्मविश्वास को अहंकार न बनने दो’

चंद्रशेखरन ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि जिंदगी और खेल दोनों का नियम एक जैसा है। इसमें केवल जीतना मायने नहीं रखता, बल्कि तैयारी में पूरी ताकत झोंकना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘जीवन में उतार और चढ़ाव दोनों आएंगे। बुरे दौर से कभी मत डरो, और जब अच्छा दौर आए तो अपने आत्मविश्वास को कभी अहंकार में मत बदलने दो। इस पूरी यात्रा का आनंद लो।’

AI से नौकरियां जाने का डर? नए मौकों पर रखें नजर

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और छंटनी की खबरों से डरे हुए युवाओं को उन्होंने ढांढस बंधाया। इस बाबत उन्होंने नकारात्मक खबरों से न घबराने की सलाह दी। एआई की वजह से नौकरियां खत्म होने की खबरें डरा सकती हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी हर दिन नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

आने वाले 5 वर्षों में ऐसे नए सेक्टर्स और उद्योग सामने आएंगे, जिनके नाम और शब्दावली का अंदाजा भी आज हमें नहीं है। भारत इस समय बेहद मजबूत आर्थिक स्थिति में है और देश की ग्रोथ पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनने वाली है।

‘दबाव झेलना एक विशेषाधिकार है’

कॉलेज खत्म करने के बाद करियर में मिलने वाले तनाव और प्रेशर पर बात करते हुए उन्होंने मशहूर टेनिस खिलाड़ी बिली जीन किंग की बात का जिक्र किया। ‘प्रेशर महसूस करने का अधिकार मिलना अपने आप में एक विशेषाधिकार है। पढ़ाई के बाद व्यावहारिक जीवन में दबाव आपकी जिंदगी का हिस्सा रहेगा, युवाओं को इस दबाव से डरने के बजाय इसका आनंद लेना सीखना चाहिए।’

सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को 2 सलाह

लगातार सीखते रहें: कभी भी सीखना बंद न करें।

कंटेंट का सही चुनाव करें: सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करें। आप क्या पढ़ते हैं, क्या देखते हैं और क्या सुनते हैं इसका चुनाव बहुत सोच-समझकर करें।

Tata vs Tata: एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ग्रुप में रार! ट्रस्ट ने दी अभिषेक मनु सिंघवी को कमान

न नौकरी की तलाश, न कोई पहचान… फिर CMO को भेजा एक मैसेज और मिल गया ₹17 लाख का ऑफर

कभी-कभी करियर का बड़ा बदलाव किसी नौकरी के आवेदन से नहीं, बल्कि एक छोटे से मैसेज से शुरू होता है। कारोबारी विशाल ठाकुर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने एक कंपनी के CMO को LinkedIn पर बिना किसी जान-पहचान के मैसेज किया, ताकि यह पता चल सके कि बाजार में उनकी स्किल्स की असली कीमत कितनी है। उस समय विशाल नौकरी बदलने की तलाश में भी नहीं थे। लेकिन कुछ ही दिनों में CMO का जवाब आया और बातचीत आगे बढ़ते-बढ़ते इंटरव्यू तक पहुंच गई। इसके बाद जो हुआ, उसने विशाल को भी हैरान कर दिया। उन्हें ऐसी नौकरी का ऑफर मिला, जिसकी सैलरी उनकी मौजूदा कमाई से करीब तीन गुना थी।

नौकरी बदलने का इरादा नहीं था, बस खुद को परखना चाहते थे

यह कहानी 2021 की है। उस वक्त विशाल की सालाना कमाई करीब ₹6 लाख थी। खास बात यह थी कि वह सक्रिय रूप से नई नौकरी की तलाश भी नहीं कर रहे थे। उनके मन में बस एक सवाल था क्या उनकी स्किल्स की मार्केट वैल्यू उनकी मौजूदा सैलरी से कहीं ज्यादा हो सकती है? इसी सवाल का जवाब पाने के लिए उन्होंने सामान्य नौकरी तलाशने के बजाय एक अलग रास्ता चुना।

सीधे कंपनी के CMO को भेज दिया मैसेज

विशाल ने एक B2B कंपनी के CMO को LinkedIn पर Cold Message और ईमेल भेजा। मकसद नौकरी मांगना नहीं, बल्कि बातचीत शुरू करना था। कुछ दिनों के भीतर ही उन्हें जवाब मिल गया। इसके बाद बातचीत आगे बढ़ी और मामला कई राउंड के इंटरव्यू तक पहुंच गया। हालांकि, इंटरव्यू का अनुभव विशाल के लिए बिल्कुल आसान नहीं था।

फाइनल इंटरव्यू के बाद लगा था शायद मौका हाथ से गया

अंतिम बातचीत कंपनी के CMO के साथ हुई। विशाल के मुताबिक, इस दौरान कई सवालों के जवाब वह ठीक तरह से नहीं दे पाए। इंटरव्यू खत्म होने के बाद उन्हें खुद भी लगा कि शायद उन्होंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया। लेकिन कहानी में असली ट्विस्ट अभी बाकी था।

जिस ऑफर की उम्मीद नहीं थी, वही सामने आ गया

इंटरव्यू के बाद कंपनी ने विशाल को ₹17 लाख सालाना के पैकेज का ऑफर दिया। यानी उनकी उस समय की ₹6 लाख सालाना कमाई के मुकाबले करीब तीन गुना। विशाल के लिए यह फैसला चौंकाने वाला था। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि इंटरव्यू में कुछ सवालों के जवाब न दे पाने के बावजूद कंपनी ने उन्हें क्यों चुना।

CMO ने बताया आखिर उनमें क्या खास दिखा

इस सवाल का जवाब उन्हें बाद में खुद CMO से मिला। कंपनी के अधिकारी ने बताया कि उन्हें विशाल की सीखने की इच्छा, उत्साह और जिज्ञासा प्रभावित कर गई थी। उनका मानना था कि अगर किसी व्यक्ति में सीखने और समस्याओं को हल करने का सही रवैया है, तो वह कुछ महीनों में अपनी जानकारी की कमियों को दूर कर सकता है। यानी इस बार नौकरी सिर्फ इस आधार पर नहीं मिली कि उम्मीदवार पहले से कितना जानता था, बल्कि इस बात पर भी मिली कि वह कितना सीखने को तैयार था।

₹17 लाख का ऑफर मिला, फिर भी नहीं की नौकरी

दिलचस्प बात यह है कि विशाल ने आखिरकार ₹17 लाख का ऑफर स्वीकार नहीं किया। उन्होंने एक दूसरी opportunity चुनी, जिसमें Remote Work और ज्यादा flexibility मिल रही थी। फिर भी यह इंटरव्यू उनके करियर में एक बड़ा मोड़ बन गया।

एक इंटरव्यू ने बदल दी खुद को देखने की नजर

विशाल के मुताबिक, इस अनुभव ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह अपनी कल्पना से कहीं बड़े अवसरों के लिए तैयार हो सकते हैं। इसी आत्मविश्वास ने बाद में उन्हें करियर में बड़े जोखिम लेने के लिए प्रेरित किया। आज वह एक मार्केटिंग एजेंसी और AI स्टार्टअप चला रहे हैं। उनका मानना है कि अगर उस समय CMO ने उनकी क्षमता पर भरोसा नहीं जताया होता, तो शायद आगे की उनकी पेशेवर यात्रा भी अलग होती।

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Anil Kapoor: ‘मुझे गर्व है कि पहली जीत एक महिला के नाम रही’, अनिल कपूर ने ‘इंडिया के टॉप 1%’ की फर्स्ट विनर को दी बधाई

Anil Kapoor: स्टार प्लस के नए गेम शो ‘इंडिया के टॉप 1% – द अनिल कपूर शो’ की शुरुआत एक ऐतिहासिक जीत के साथ हुई। ग्रैंड प्रीमियर एपिसोड में मुंबई की बिजल शाह ने अपनी सूझबूझ और शानदार खेल के दम पर शो की पहली विजेता बनने का गौरव हासिल किया और ₹94 लाख की बड़ी धनराशि अपने नाम की।

बिजल की यह उपलब्धि केवल पुरस्कार राशि तक सीमित नहीं है। उनकी जीत उस सोच को मजबूती देती है कि सही नजरिया और सोचने का अलग अंदाज किसी भी मुकाम तक पहुंचा सकता है। अलग-अलग क्षेत्रों में बाधाओं को तोड़कर इतिहास रचने वाली महिलाओं की सूची में अब बिजल का नाम भी जुड़ गया है। पूरे खेल के दौरान उन्होंने अपना संयम बनाए रखा और अपनी सूझबूझ पर भरोसा किया। बिजल ने अपने पति नीलय मेहता के साथ इस सफर की शुरुआत की थी। नीलय का खेल समाप्त होने के बाद भी वह लगातार बिजल का हौसला बढ़ाते रहे।

बिजल की ऐतिहासिक जीत पर शो के होस्ट अनिल कपूर ने कहा, “बिजल ने पहले ही एपिसोड में दिखा दिया कि ‘इंडिया के टॉप 1%’ तक पहुंचने के लिए सिर्फ प्रेजेंस ऑफ माइंड और स्ट्रीट-स्मार्ट सोच की जरूरत होती है। वह पूरे खेल के दौरान शांत, सतर्क और हर चुनौती के लिए तैयार रहीं। हमारी ग्रैंड ओपनिंग इससे ज्यादा धमाकेदार नहीं हो सकती थी। बिजल हमारी पहली विजेता हैं और मुझे इस बात पर खास गर्व है कि यह ऐतिहासिक जीत एक महिला के नाम रही। उन्होंने सच में साबित कर दिया कि वह ‘इंडिया के टॉप 1%’ में शामिल हैं!”

अपनी जीत की खुशी साझा करते हुए बिजल शाह ने कहा, “₹94 लाख जीतना और शो की पहली विजेता बनना आज भी किसी सपने जैसा लग रहा है। मैंने एक समय में सिर्फ एक सवाल पर ध्यान दिया और खुद पर भरोसा बनाए रखा। यह जीत मेरे लिए बेहद खास है। मुझे सच में लगता है कि पूरे खेल के दौरान मेरे पिता का आशीर्वाद और मेरे बेटे प्रणित की किस्मत मेरे साथ थी। बेशक, मेरे परिवार के सहयोग के बिना यह संभव नहीं होता।”

अपने पहले ही एपिसोड में ‘इंडिया के टॉप 1%’ ने अपनी मूल सोच को एक ऐसे यादगार पल में बदल दिया, जिसका जश्न दर्शक भी मना सकते हैं। शो ने साबित किया कि कई बार सबसे बड़ी ताकत यह नहीं होती कि आप कितना जानते हैं, बल्कि यह होती है कि आप सोचते कैसे हैं। और इस बार अपनी सूझबूझ और आत्मविश्वास के दम पर बिजल शाह ने यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम की है।

देखिए ‘इंडिया के टॉप 1% – द अनिल कपूर शो’ हर शनिवार और रविवार रात 8 बजे सिर्फ स्टार प्लस और जियोहॉटस्टार पर।

India’s Got Latent: भुवन बाम से YouTube को लेकर सवाल पूछना पड़ा भारी? समय रैना को मिला ऐसा जवाब, VIDEO हुआ वायरल

‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ के सीजन 2 के सातवें एपिसोड में भुवन बाम की एंट्री ने शो में अलग ही रंग भर दिया। समय रैना के साथ मंच साझा करते हुए भुवन ने अपनी मौजूदगी से दर्शकों का ध्यान खींचा। एपिसोड के दौरान समय ने भुवन से उनके यूट्यूब से दूर रहने को लेकर सवाल किया। सवाल सीधा था, लेकिन भुवन का जवाब बेहद संक्षिप्त और आत्मविश्वास से भरा था। उन्होंने कहा, “भाई, मैं चला था ताकि तुम दौड़ सको।” भुवन की इस एक लाइन ने स्टूडियो में हंसी का माहौल बना दिया। इसके बाद समय रैना ने भी अपने अंदाज में जवाब देते हुए कहा, “मैं दौड़ रहा हूं ताकि कौस्तुभ चल सके।”

दोनों की यह मजेदार बातचीत अब सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गई है। इस एपिसोड में नवाजुद्दीन सिद्दीकी, मुकेश छाबड़ा और कौस्तुभ अग्रवाल भी नजर आए, जिससे शो में मनोरंजन का रंग और गहरा हो गया।

समय ने पूछा- यूट्यूब से क्यों हुए दूर?

समय रैना ने भुवन का स्वागत करते हुए पूछा कि आखिर उन्होंने यूट्यूब से दूरी क्यों बना ली। इस पर भुवन ने बेहद आत्मविश्वास भरे अंदाज में कहा, “भाई, मैं चला था ताकि तुम दौड़ सको।” उनका यह जवाब सुनते ही स्टूडियो में हंसी गूंज उठी और पैनल में बैठे लोगों ने भी प्रतिक्रिया दी।

भुवन के जवाब पर समय ने किया पलटवार

भुवन के जवाब के बाद समय रैना भी कहां पीछे रहने वाले थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा, “मैं दौड़ रहा हूं ताकि कौस्तुभ चल सके।” समय की इस बात पर भी दर्शक खूब हंसे। दोनों के बीच हुई यह छोटी-सी मजेदार बातचीत एपिसोड के चर्चित पलों में शामिल हो गई।

एक मंच पर जुटे मनोरंजन जगत के बड़े चेहरे

इस एपिसोड में भुवन बाम के अलावा अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी, कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा और कॉमेडियन कौस्तुभ अग्रवाल भी मौजूद थे। अभिनय, कॉमेडी और डिजिटल दुनिया से जुड़े इन कलाकारों ने एपिसोड को खास बना दिया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

भुवन और समय की बातचीत का वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कुछ दर्शकों ने भुवन को यूट्यूब के शुरुआती दौर का बड़ा नाम बताते हुए उनकी बात को सही ठहराया। वहीं, कुछ लोगों को यह बातचीत पसंद नहीं आई और उन्होंने इसे असहज बताया।

किसी ने खूब सराहा, तो किसी ने किया ट्रोल

एक तरफ कई दर्शकों ने एपिसोड को पसंद किया और इसे सीजन के बेहतरीन एपिसोड में बताया, तो दूसरी तरफ कुछ यूजर्स ने भुवन पर तंज भी कसा। कुछ ही सेकंड की इस बातचीत ने सोशल मीडिया पर अच्छी-खासी चर्चा छेड़ दी।

22 की उम्र में छोड़ी 15 LPA की नौकरी, दिल्ली में खोला कैफे, एक साल बाद सामने आई ये मुश्किल

Mangal Nakshatra Gochar: मंगल करेंगे शनि के नक्षत्र पुष्य में प्रवेश, 4 राशियों के जातकों की होगी छप्पर फाड़ कमाई और आएगी खुशहाली

Mangal Nakshatra Gochar: ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को उग्र और अग्नितत्व वाला ग्रह माना जाता है। इस ग्रह से प्रभावित जातक साहसी, पराक्रमी और बलवान माने जाते हैं। यह ग्रह जब किसी राशि या नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब इसका असर सभी 12 राशियों के जातकों पर देखने को मिलता है। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रह-नक्षत्रों की चाल का प्रभाव सभी राशियों पर एक जैसा नहीं रहता है। कुछ के लेकिन बहुत अच्छा, तो कुछ के सामान्य, जबकि कुछ अन्य के लिए ग्रहों की चाल बदलना कष्टकारी साबित होता है।

ऐसा ही एक बदलाव ग्रहों के सेनापति मंगल की चाल में 24 सितंबर 2026 को होने वाला है। मंगल ग्रह इस दिन पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं, जबकि देवगुरु बृहस्पति इसके अधिष्ठाता देवता माने जाते हैं। मंगल का इस नक्षत्र में प्रवेश कुछ राशियों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से शुभ साबित हो सकता है।

मंगल ग्रह का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश कब?

कर्क राशि में गोचर कर रहे मंगल 24 सितंबर को सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। 17 अक्टूबर 2026 तक इसी नक्षत्र में रहेंगे। कर्क राशि मंगल की नीच राशि मानी जाती है। इसी राशि में गुरु पहले से मौजूद हैं और उनकी मौजूदगी के कारण मंगल के नकारात्मक प्रभाव में कमी और शुभ प्रभाव में वृद्धि का अनुमान जताया जा रहा है।

इन राशियों के शुरू होंगे अच्छे दिन

मेष राशि : मंगल का नक्षत्र परिवर्तन मेष राशि के जातकों के लिए राहत और प्रगति लेकर आ सकता है। लंबे समय से अटके काम पूरे होने की संभावना है। संपत्ति से जुड़े मामलों में लाभ मिल सकता है। कारोबारियों के लिए यह समय अनुकूल रह सकता है। परिवार के लोगों का सहयोग मिलेगा।

सिंह राशि : सिंह राशि वालों के लिए यह नक्षत्र परिवर्तन नए अवसरों के दरवाजे खोल सकता है। नौकरी बदलने की योजना बना रहे लोगों को कोई अच्छा मौका मिल सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। आपकी कार्यक्षमता और आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हो सकती है।

कन्या राशि : कन्या राशि के जातकों के लिए मंगल का पुष्य नक्षत्र में प्रवेश मान-सम्मान और करियर में प्रगति का संकेत दे रहा है। नौकरी या व्यापार में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। अटके हुए कामों को गति मिल सकती है। रोजी-रोजगार के क्षेत्र में तरक्की के अवसर बनेंगे।

धनु राशि : धनु राशि के लोगों के लिए मंगल का यह नक्षत्र परिवर्तन आर्थिक रूप से लाभकारी रह सकता है। आमदनी में सुधार और व्यापार में मुनाफे के योग बन सकते हैं। लंबे समय से रुके किसी काम में तेजी आ सकती है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां कम होने की संभावना है।

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हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

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14 सितंबर को हिंदी दिवस का आगमन संपूर्ण हिंदी जगत के लिए उमंग, उत्साह और ऊर्जा से भरा उत्सव होता है। इसका समापन प्रायः 'हिंदी सप्ताह' या 'हिंदी पखवाड़े' के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करने तथा हिंदी सेवियों, प्रेमियों एवं साधकों के श्रेष्ठ कार्यों के सम्मान के साथ एक औपचारिकता (कर्मकांड) के रूप में हो जाता है।

 

हिंदी दिवस पर हम अत्यंत आत्मविश्वास के साथ हिंदी की गरिमा, महिमा और उसके अप्रतिम गौरव का गुणगान तो करते हैं, किंतु वास्तव में हम इसकी वर्तमान दशा को लेकर अपेक्षित रूप से गंभीर नहीं होते। जबकि यह दिन हमारे आत्म-मूल्यांकन और आत्म-विश्लेषण का है कि हमने हिंदी के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की दिशा में क्या महती योगदान दिया है।

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यह निर्विवाद है कि हिंदी हमारी अस्मिता की पहचान और भारत की आत्मा है। यह हमारी सांस्कृतिक चेतना को सूक्ष्मता से अभिव्यक्त करने वाली अनमोल संपदा है। यह हमारे सार्वभौमिक मूल्यों की संरक्षिका है, जो समग्र राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोती है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि एक समृद्ध, सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिक विरासत की संवाहिका है। यह 'वसुधैव कुटुंबकम' अर्थात् वैश्विक बंधुत्व और एकता की भावना को जाग्रत कर जन-जन में आत्म-सम्मान का भाव भरती है। परस्पर सम्मान, जुड़ाव, विनम्रता, सहिष्णुता, संवेदनशीलता और समरसता हिंदी की अंतर्निहित प्रकृति है। इसी कारण यह जन-जन की अभिलाषा के अनुरूप पूरे राष्ट्र की संपर्क भाषा बनी है।

 

मध्यकाल में हिंदी भक्ति आंदोलन के धार्मिक और सामाजिक सुधारों का माध्यम बनी तथा स्वाधीनता संग्राम के राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वाले आदर्शों को इसने सशक्त स्वर दिया। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लंबे संघर्ष के बाद 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान किया गया कि 'संघ की आधिकारिक भाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी।' हालांकि, संविधान लागू होने के समय से 15 वर्षों की अवधि तक संघ के उन सभी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति भी दी गई।

 

अनुच्छेद 343 की धारा 3 में यह व्यवस्था थी कि संसद 15 वर्ष की अवधि के पश्चात विधि द्वारा अंग्रेजी के प्रयोग को बढ़ा सकेगी। खेर आयोग और पंत समिति की रिपोर्टों के आधार पर 1963 में राजभाषा अधिनियम बनाकर यह प्रावधान कर दिया गया कि 26 जनवरी 1965 के बाद भी अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा। इसमें यह शर्त जोड़ दी गई कि अंग्रेजी तब तक बनी रहेगी जब तक हिंदी को राजभाषा अपनाने वाले सभी राज्यों के विधानमंडल इसे समाप्त करने का संकल्प पारित न कर दें। इस व्यवस्था ने अंग्रेजी के प्रयोग को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया और एक भी राज्य की असहमति पर हिंदी अनिवार्य राजकाज की भाषा बनने से वंचित रह गई।

 

डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भाषा के प्रश्न को केवल भावुकता से नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा। संस्कृत हो या हिंदी, उनका मानना था कि ये भाषाएं भारत को एकता के सूत्र में बांधकर भाषाई विवादों से बचा सकती हैं। 9 भाषाओं के ज्ञाता और 32 उपाधियों के धारक डॉ. आंबेडकर ने अंग्रेजी के बजाय हिंदी में समाचार पत्र निकाले, जिससे वे वंचित समाज की मुखर आवाज बन सके। वे प्रांतीय भाषाओं के विकास के पक्षधर थे, किंतु राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का ही समर्थन करते थे। भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी डॉ. आंबेडकर ने 'एक भाषा-एक राज्य' के स्थान पर 'एक राज्य-एक भाषा' की अवधारणा का समर्थन किया था।

 

हमारे राष्ट्र-निर्माताओं ने बहुत सोच-समझकर हिंदी की स्वीकार्यता को रेखांकित किया था:

महात्मा गांधी: “यदि हम भारत को एक राष्ट्र बनाना चाहते हैं, तो हिंदी ही हमारी राष्ट्रभाषा हो सकती है। राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: “प्रांतीय ईर्ष्या-द्वेष को दूर करने में जितनी सहायता हिंदी प्रचार से मिलेगी, उतनी किसी अन्य साधन से नहीं।”

महर्षि दयानंद सरस्वती: “हिंदी के माध्यम से संपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।”

के. एम. मुंशी: “हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना नहीं है, वह तो पहले से ही है।”

 

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा था—

“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

पै निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को सूल॥”

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसी मूलमंत्र को स्वीकारते हुए मातृभाषाओं और लोकभाषाओं को प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक विशेष स्थान दिया गया है। हालांकि, मातृभाषा में शिक्षा का क्रियान्वयन पर्याप्त मानवीय और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। हिंदी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह केवल प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रहकर वैश्विक विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय शोध और ज्ञान की बुनियाद बने।

 

किसी भाषा का भविष्य केवल शासकीय आदेशों या तंत्र पर निर्भर नहीं होता; वह भाषा-भाषियों के सृजनात्मक समर्पण, अपनत्व और निस्वार्थ संकल्प-शक्ति से जीवंत रहता है। यदि हमारा हिंदी-प्रेम केवल 14 सितंबर के उत्सव तक सीमित है, तो हमें आत्मचिंतन की आवश्यकता है।

 

मनुस्मृति का कथन है- “धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः” (जो धर्म का नाश करता है, उसका नाश हो जाता है और जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है)। भाषा के संदर्भ में भी यही सत्य है—जो समाज अपनी भाषा की उपेक्षा करता है, उसकी संस्कृति का क्षरण निश्चित है।

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि “अन्य भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी।” अतः हिंदी का यह दायित्व है कि वह अन्य भारतीय भाषाओं को सहेली मानकर परस्पर सम्मान, सहयोग और आदान-प्रदान का वातावरण बनाए।

 

आज सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डिजिटल युग में हिंदी के समक्ष अनंत संभावनाएं हैं। एक तरफ जहां सूचनाओं का विशाल भंडार है, वहीं फर्जी व गुणवत्ताहीन सामग्री से बचकर प्रामाणिक ज्ञान का चयन करना एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल दुनिया में अपनी उपादेयता बनाए रखने के लिए हिंदी में उच्चस्तरीय ज्ञान-कौशल और समृद्ध डिजिटल सामग्री का निर्माण अनिवार्य है।

 

हिंदी के सर्वांगीण विकास के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता है। आधुनिक विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, एआई, अर्थशास्त्र, खगोल, भूगोल और दर्शन जैसे विषयों पर हिंदी में मौलिक व प्रामाणिक ग्रंथों का सृजन युद्ध स्तर पर होना चाहिए।

 

जिस दिन हिंदी रोजगार की कुंजी और अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान का प्रवेश द्वार बन जाएगी, उसी दिन 'हिंदी दिवस' का आयोजन सही मायनों में सार्थक होगा।

 

कोटि-कोटि कंठों की भाषा,

जन-गण की मुखरित अभिलाषा।

हिंदी है पहचान हमारी,

हिंदी है हम सबकी परिभाषा॥

 

लेखक: डॉ. अशोक कुमार भार्गव (पूर्व आईएएस)

संपर्क: 9425427525 | ईमेल: dr.ak.bhargava2022@gmail.com

Jupiter Transit in Leo 2026: देवगुरु बृहस्पति करेंगे सिंह राशि में प्रवेश और 4 राशियों के लिए खुलेगा खजाने का ताला, जानें कौन सी हैं ये राशियां

Jupiter Transit in Leo 2026: देवगुरु बृहस्पति का सिंह राशि में 31 अक्टूबर को गोचर होगा। ज्योतिषशास्त्र में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना मानी जाती है, जिसे “सिंहस्थ बृहस्पति” भी कहा जाता है। सिंह राशि के स्वामी सूर्य हैं, जो बृहस्पति के मित्र ग्रह हैं। मित्र राशि में होने के कारण गुरु का यह गोचर सामान्यतः शुभ और प्रभावकारी परिणाम देता है। सिंह राशि शक्ति, नेतृत्व और अधिकार का प्रतीक है। गुरु का यहां आना व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता, ज्ञान, प्रशासनिक गुणों और आत्मविश्वास को बढ़ाता है। जब देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं और सूर्य मेष राशि में होते हैं, तब नासिक के त्र्यंबकेश्वर में प्रसिद्ध सिंहस्थ कुंभ मेले का आयोजन होता है। समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में तेजी आती है। लोग परोपकार और ज्ञान प्राप्ति की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। यह समय राजनीति, प्रशासन, शिक्षा, कानून या प्रबंधन से जुड़े लोगों के लिए विशेष रूप से उन्नतिदायक सिद्ध होता है। देवगुरु के इस गोचर से यूं तो सभी 12 राशियों के जातक प्रभावित होंगे, लेकिन 4 राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ रहेगा। आइए जानें इसके बारे में

मेष राशि : मेष राशि वालों के लिए गुरु का सिंह राशि में गोचर कई तरह के शुभ अवसरों में वृद्धि हो सकती है। गुरु आपकी राशि से पंचम भाव में गोचर करते हैं। इससे करियर में नए तरह के अवसर मिल सकते हैं। प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के अच्छे संकेत हैं। आर्थिक मोर्चे पर आपको आय के नए स्त्रोत मिल सकते हैं।

कर्क राशि : कर्क राशि वालों के लिए गुरु का राशि परिवर्तन धन लाभ के अवसरों में वृद्धि ला सकता है। पारिवारिक मामलों में सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। यहां पर गुरु का आपकी कुंडली में गोचर आपके धन के भाव में होगा जिससे आपको अच्छा खासा लाभ हासिल हो सकता है।

तुला राशि : तुला राशि वालों पर गुरु के राशि परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव देखने को मिलेगा। गुरु का गोचर आपके लिए बहुत ही लाभकारी रहेगा। गुरु आपकी राशि से 11वें भाव में संचरण करेंगे,ऐसे में आपको आय में वृद्धि के अवसर मिल सकते हैं। करियर में नई तरह की जिम्मेदारियां मिल सकती है।

सिंह राशि : सिंह राशि में गुरु के गोचर करने से सिंह राशि वालों पर विशेष प्रभाव पड़ेगा। आपके आत्मविश्वास में बढ़ोतरी और नेतृत्व करने की क्षमता में विकास होता है। गुरु के गोचर करने से मान-सम्मान में वृद्धि, नौकरी-कारोबार में नई तरह की जिम्मेदारी या अवसर मिल सकता है। आपकी आय में वृद्धि होगी।

शुभ परिणामों के लिए सरल उपाय

गुरु ग्रह के बीज मंत्र का जाप करें: `ॐ बृं बृहस्पतये नमः`

गुरुवार के दिन पीले कपड़े, चने की दाल या हल्दी का दान करें।

भगवान विष्णु या श्री हरि की पूजा करें और माथे पर केसर/हल्दी का तिलक लगाएं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Shani-Chandra Vish Yog: शनि-चंद्र ने बना लिया है खतरनाक विष योग, जानें किन राशियों पर ये समय पड़ेगा भारी और किनकी लगेगी लॉटरी