|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

|खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha | The Better India Hindi

रितेश हिंडोचा को 3 साल की उम्र में Down Syndrome होने का पता चला। लेकिन उनके परिवार ने उन्हें कभी सीमाओं में नहीं बाँधा। Swimming, Speech Classes, Sports, लोगों से जुड़ना, हर कदम ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया।
45 साल की उम्र में भी रितेश उसी जोश के साथ ज़िंदगी जीते हैं। Covid के दौरान शुरू हुआ उनका Instagram आज लाखों लोगों तक मुस्कान और उम्मीद पहुँचा रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने आमिर खान की फिल्म ‘सितारे ज़मीन पर’ में भी काम किया।
रितेश की कहानी याद दिलाती है कि सही साथ, प्यार और भरोसा किसी भी Diagnosis से बड़ा हो सकता है।

@riteshhindocha

Person with Down Syndrome Achievement, Family Support for Down Syndrome Child, Down Syndrome Influencer

खुलकर जीना सिखाते हैं ये Down Syndrome कलाकार | Ritesh Hindocha

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Nail care Astrology: आज ही बदल लें किसी भी दिन नाखून काटने की आदत, जानें ज्योतिष में क्या हैं नाखून काटने के नियम

Nail care Astrology: नाखून काटने के लिए इतना क्या सोचना, जब बढ़े हुए दिखें तभी काट लो। अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो आप गलत हैं। हमारे शास्त्रों में यानी हिंदू धर्म में साफ-सफाई से जुड़े इस तरह के कामों के लिए कुछ नियम निर्धारित किए गए हैं। इनकी अनदेखी करना जातक के लिए कई तरह की मुश्किलें खड़ी कर देता है। इसका असर आपकी किस्मत, पैसे और पॉजिटिविटी पर पड़ सकता है। हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, नाखून काटने के लिए कुछ दिन शुभ माने जाते हैं जबकि कुछ दिनों का बुरा असर होता है। नाखून काटने के लिए सबसे अच्छे और बुरे दिनों के बारे में ज्योतिषी क्या कहते हैं, आइए जानें।

नाखून काटने के लिए ये दिन चुनें

हिंदू ज्योतिष और पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए सबसे सही दिन माने जाते हैं। ज्योतिषी प्रशांत ने न्यूज 18 को बताया कि सोमवार, बुधवार और शुक्रवार नाखून काटने के लिए अच्छे माने जाते हैं। इन दिनों में नाखून काटने से सकारात्मक ऊर्जा, खुशी और समृद्धि बढ़ती है। माना जाता है कि ये दिन ग्रहों के बुरे असर को दूर रखते हैं।

अच्छा नहीं इन दिनों में नाखून काटना

ज्योतिष में मंगलवार और गुरुवार के दिन भूलकर भी नाखून नहीं काटने चाहिए। इन दिनों को इस काम के लिए वर्जित माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इससे आर्थिक स्थिति कमजोर हो सकती है और वैवाहिक जीवन में झगड़े बढ़ सकते हैं।

मंगलवार मंगल ग्रह से जुड़ा दिन है। पारंपरिक रूप से इसे भगवान हनुमान से जोड़ा जाता है। इस दिन नाखून काटने से गुस्सा, बहस, पैसे की परेशानी और जीवन में दूसरी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, गुरुवार का स्वामी बृहस्पति है और इसे भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताएं इस दिन नाखून काटने से मना करती हैं, क्योंकि इससे धन, पैसे की स्थिरता और छात्रों की एकाग्रता पर असर पड़ता है।

इसी तरह, हिंदू परंपराओं में शनिवार को नाखून काटना अशुभ माना जाता है, क्योंकि ऐसा करने से मन की शांति भंग हो सकती है और मेहनत का फल मिलने में देरी हो सकती है। शनिवार का दिन कर्म और न्याय के देवता भगवान शनि से जुड़ा है।

इन दिनों का भी रखें ध्यान

रविवार का दिन सूर्य का होता है और इस दिन छुट्टी होती है। हालांकि, पारंपरिक ज्योतिष इस दिन नाखून काटने की सलाह नहीं देता है। माना जाता है कि इससे आत्मविश्वास, सम्मान और पेशेवर तरक्की में कमी आती है।

इसके अलावा, हिंदू परंपरा में अमावस्या का भी खास आध्यात्मिक महत्व है। कुछ लोग इस दिन नाखून काटना ठीक नहीं मानते हैं। इनके अनुसार, ऐसा करने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है, पूर्वज नाराज होते हैं और मानसिक चिंताएं बढ़ती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

नीलम चमकाएगा किस्मत या बढ़ाएगा परेशानी! पहनने से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम

क्या आपका बच्चा पढ़ने बैठता है लेकिन ध्यान भटक जाता है? रोज की ये 5 आदतें तेज याददाश्त और फोकस बेहतर करने में करेंगी मदद

जैसे ही नया शैक्षणिक वर्ष शुरू होता है, कई माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे ध्यान भटकाने वाली चीज़ों को छोड़कर अपने स्कूल के काम पर बेहतर ढंग से ध्यान दें। हालांकि, आज की आधुनिक दुनिया में, स्मार्ट टेलीविजन, फ़ोन, सोशल मीडिया और किसी विषय को पूरी तरह से न समझ पाना पढ़ाई के दौरान रुकावटें पैदा कर सकता है।

ध्यान और याददाश्त को बेहतर बनाने के उपाय खोजने से पहले, ध्यान (फ़ोकस) और एकाग्रता (कॉन्सेंट्रेशन) के बीच के अंतर को समझना ज़रूरी है। फ़ोकस का मतलब है किसी गतिविधि या विचार पर ध्यान देना, जबकि एकाग्रता का मतलब है किसी चीज़ पर लगातार ध्यान बनाए रखने की क्षमता। फ़ोकस और एकाग्रता दोनों ही ज़रूरी कौशल हैं जिनकी बच्चों को सीखने, लक्ष्य हासिल करने, अपनी भावनाओं को संभालने और रचनात्मक रूप से सोचने में सफलता के लिए आवश्यकता होती है। बच्चों को कामों पर ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होने के कई कारण हैं।

ध्यान और एकाग्रता कौशल में सुधार एक क्रमिक प्रक्रिया है जिसके लिए धैर्य, निरंतरता और निश्चित रूप से माता-पिता, शिक्षकों और साथियों से उचित सहयोग की आवश्यकता होती है। आज की दुनिया में, जो ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से भरी है, ऐसे कौशल विकसित करना एक रोज़मर्रा की दिनचर्या बन सकती है जो बच्चों को पढ़ाई में सफल होने और अधिक आत्मविश्वासी और मज़बूत व्यक्ति बनने में मदद करती है। हमने संस्कृति ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स के शिक्षक और ट्रस्टी प्रणीत मुंगाली से बात की, जिन्होंने 5 ऐसी आदतें बताईं जिनका अभ्यास स्कूली बच्चे कर सकते हैं और जो याददाश्त और फ़ोकस को बेहतर बनाने में सार्थक बदलाव ला सकती हैं:

1. शारीरिक व्यायाम को बढ़ावा देना

शारीरिक व्यायाम मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने के साथ-साथ एकाग्रता और समन्वय कौशल को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

a. योग और गहरी सांस लेने को बढ़ावा दें। योग मुद्राएं जैसे ‘ट्री पोज़’ (वृक्षासन) और ‘वॉरियर पोज़’ (वीरभद्रासन) शरीर में समन्वय बनाने और खुद पर नियंत्रण विकसित करने में मदद करती हैं। गहरी सांस लेने से बच्चे शांत और फिर से ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होंगे।

b. क्रॉस-लेटरल मूवमेंट (शरीर के दोनों हिस्सों का इस्तेमाल करने वाली गतिविधियां) शुरू करें। ऐसी गतिविधियां जैसे अपने दाहिने कोहनी को अपने बाएं घुटने से छूना, मस्तिष्क के दोनों हिस्सों का उपयोग करने में मदद करती हैं।

2. ऐसी गतिविधियां करें जो आपके मस्तिष्क को सक्रिय करें

मज़ेदार ब्रेन गेम्स ध्यान देने, याद रखने और तार्किक रूप से सोचने की आपकी क्षमता को विकसित करते हैं।

a. अंतर पहचानें या छिपी हुई वस्तु खोजें। यह अवलोकन कौशल, दृश्य स्मृति और लंबे समय तक ध्यान बनाए रखने की क्षमता विकसित करने के लिए किया जाता है।

b. पैटर्न की नकल करें और उन्हें आगे बढ़ाएं। रंगीन मोतियों, ब्लॉकों या किसी अन्य आकार का उपयोग करके पैटर्न बनाना और उन्हें आगे बढ़ाना अनुक्रमण कौशल, तार्किक सोच और फ़ोकस विकसित करता है।

c. स्टोरी चेन एक्टिविटी- हर बच्चे को कहानी में एक वाक्य जोड़ना होता है, जिसमें उन्हें यह याद रखना होता है कि पहले क्या कहा गया था। इससे सुनने की क्षमता, मौखिक याददाश्त और रचनात्मकता को विकसित करने में मदद मिलती है।

3. बड़े कामों को छोटे हिस्सों में बांटें

कभी-कभी बच्चे काम से ध्यान हटा लेते हैं क्योंकि उन्हें वे काम बहुत मुश्किल लगते हैं। किसी नए या मुश्किल काम को कई आसान स्टेप्स में बांटने से उसे समझना, करना और याद रखना आसान हो जाता है।

4. पोमोडोरो तकनीक

पोमोडोरो तकनीक में कुछ समय (20-25 मिनट) तक किसी काम पर ध्यान देने और फिर थोड़ा ब्रेक (5 मिनट) लेने का सुझाव दिया जाता है। इस तकनीक से दिमाग की थकान कम होती है, प्रोडक्टिविटी बढ़ती है और ध्यान लगाने की क्षमता बेहतर होती है।

5. पढ़ाई के लिए ऐसी जगह बनाएं जहां ध्यान न भटके

बच्चों को पढ़ाई के लिए शांत और व्यवस्थित जगह देना बहुत ज़रूरी है। साथ ही, यह पक्का करें कि होमवर्क करते समय गैजेट्स जैसी चीज़ें उनका ध्यान न भटकाएं। आखिरी टिप लाइफ़स्टाइल के बारे में है। सही खान-पान, भरपूर पानी और अच्छी नींद से दिमाग बेहतर काम करता है, और ध्यान लगाने व याद रखने की क्षमता में सुधार होता है।

मुश्किलें बड़ी थीं, हौसला उससे भी बड़ा! पैरों से लिखकर रच रही इतिहास 13 साल की बच्ची

13 साल की लक्ष्मी अपनी हिम्मत और मेहनत से लोगों को इंस्पायर कर रही हैं। शरीर से विकलांग होने के बावजूद उन्होंने पढ़ाई को रुकने नहीं दिया और अपने स्कूल का काम पूरा करने का रास्ता खुद खोज लिया। वह पैरों से लिखकर अपनी पढ़ाई जारी रख रही हैं और हर दिन यह साबित कर रही हैं कि मुश्किल हालात भी किसी के हौसले को रोक नहीं सकते।

सरकारी स्कूल की चौथी कक्षा में पढ़ने वाली स्टूडेंट का जज्बा उन बच्चों के लिए भी इंस्पिरेशन है, जो किसी न किसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उनके लिए पढ़ाई सिर्फ स्कूल का काम नहीं, बल्कि अपने सपनों की ओर बढ़ने का एक जरिया है। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे हों, कोशिश जारी रखी जाए तो रास्ता जरूर निकाला जा सकता है।

 

1. लक्ष्मी का डेली रूटीन

लक्ष्मी का स्कूल का रोज काम करने का तरीका काफी अलग है। वह अपने स्कूल बैग के पास बैठकर सबसे पहले उसे खोलती हैं और अपने पैरों की मदद से बैग के अंदर रखा सामान बाहर निकालती हैं। वह नोटबुक और पेन को सावधानी से निकालती हैं, फिर कॉपी को अपने सामने सही जगह पर रखती हैं। इसके बाद वह पन्ने पलटकर अपना काम शुरू कर देती हैं। आम बच्चों के लिए ये छोटे-छोटे काम बहुत आसान होते हैं, लेकिन लक्ष्मी को इन्हें करने के लिए ज्यादा मेहनत और ध्यान लगाना पड़ता है। इसके बावजूद वह किसी पर निर्भर रहने के बजाय अपने काम खुद करने की कोशिश करती हैं। उन्होंने धीरे-धीरे इस तरीके को अपना डेली रूटीन बना लिया है।

 

2. पढ़ाई के प्रति लगन

लक्ष्मी की पढ़ाई के प्रति लगन उनकी सबसे खास बात है। वह अपने पैरों से पेन पकड़कर कॉपी में लिखती हैं और इसी तरह अपना स्कूल का काम पूरा करती हैं। वीडियो में वह बिना किसी जल्दबाजी के पूरे ध्यान से लिखती हुई दिखाई देती हैं। उनके लिए लिखना और कॉपी संभालना आसान नहीं है, लेकिन उन्होंने अपनी परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लिया है। जिस काम के लिए दूसरे बच्चों को हाथों का सहारा मिलता है, उसके लिए लक्ष्मी अपने पैरों का इस्तेमाल करती हैं। इसके लिए उन्हें रोज अभ्यास और मेहनत करनी पड़ती होगी, लेकिन उन्होंने इसे अपनी पढ़ाई के बीच रुकावट नहीं बनने दिया। उनका शांत तरीके से अपने काम पर ध्यान देना दिखाता है कि वह अपनी पढ़ाई को लेकर कितनी गंभीर हैं।

 

3. बनी आम जनता की प्रेरणा

लक्ष्मी की लोगों ने उनकी मेहनत और हिम्मत की जमकर तारीफ की। कई लोगों को उनकी एकाग्रता और पढ़ाई के प्रति लगन काफी पसंद आई। लोगों ने उनके लिए अच्छे भविष्य, खुशी और सफलता की कामना करते हुए रियेक्ट किया। किसी ने उनकी तारीफ करते हुए उन्हें बहुत हिम्मती बताया, तो किसी ने उनके जज्बे को देखकर इंस्पिरेशन मिलने की बात कही। यही कारण है कि उनकी छोटी सी कोशिश कई लोगों के लिए इंस्पिरेशन बन गयी।

 

4. आगे बढ़ने का तरीका

लक्ष्मी की कहानी सिर्फ उनके स्कूल का काम करने या पैरों से लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बच्चों को आगे बढ़ने का मौका देने की जरूरत भी दिखाती है। दिव्यांग बच्चों के लिए ऐसा माहौल होना जरूरी है, जहां वे अपनी क्षमता के अनुसार पढ़ाई कर सकें और बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें। उनकी कहानी हमें यह समझाती है कि हर बच्चे के सीखने और आगे बढ़ने का तरीका अलग हो सकता है।

13 साल की लक्ष्मी की यह कहानी पढ़ाई के प्रति लगन को दिखाती है। पैरों से लिखकर स्कूल का काम पूरा करना उनके लिए आसान नहीं है, फिर भी उन्होंने अपनी शारीरिक चुनौती को पढ़ाई के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया। जो हमें सिखाती है कि सही मौका, सहयोग और मजबूत इरादे मिलें तो मुश्किल रास्ते भी आसान किए जा सकते हैं।

Sun Transit 2026: सूर्य इस दिन करने वाले हैं स्वराशि सिंह में गोचर, 4 राशियों के करियर और कारोबार में लगाएंगे चार चांद

Sun Transit 2026: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को यश, पिता और स्वास्थ्य का कारक माना जाता है। किसी भी जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति विशेष रूप से देखी जाती है। यह ग्रह जब राशि या नक्षत्र परिवर्तन करता है, तो उसका असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है। हर माह राशि परिवर्तन करने वाले इस ग्रह के गोचर को संक्रांति कहा जाता है। अगस्त माह में सूर्य की सिंह संक्रांति होगी यानी सूर्य सिंह राशि में प्रवेश करेंगे।

वैदिक ज्योतिष में सूर्य को नवग्रहों का राजा माना गया है। उज्जैन के ज्योतिष आचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि 17 अगस्त 2026 को सूर्य कर्क राशि से निकलकर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे। सूर्य का यह गोचार विशेष रूप से चार राशि के जातकों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे उनके करियर और कारोबार में जबरदस्त उछाल आ सकता है। आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और नेतृत्व क्षमता पर पड़ सकता है। आर्थिक स्थिति मजबूत होने और आय के नए रास्ते खुलने की संभावना है।

चार राशियों को होगा लाभ

मिथुन राशि : इस राशि के जातकों को यह परिवर्तन बड़ा ही शुभ परिणाम देने वाला रहेगा। इस दौरान व्यक्तित्व में निखार, आकर्षण और आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरीपेशा जातकों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, साथ ही प्रमोशन और वेतनवृद्धि के अवसर बनेंगे। व्यापारियों के लिए नई योजनाएं लाभदायक साबित हो सकती हैं।

सिंह राशि : ग्रहों के राजा सूर्य का यह परिवर्तन इस राशि के जातकों के लिए बड़ा शुभ परिणाम लेकर आया है। आय के नए स्रोत खुलने की संभावना है और लंबे समय से रुके हुए कार्यों में गति आ सकती है। अचानक धन लाभ के योग भी बन सकते हैं, जिससे आर्थिक मजबूती मिलेगी।

तुला राशि : इस राशि के जातकों के लिए सूर्य ग्रह का यह गोचर सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। इस दौरान मानसिक तनाव कम होगा और शांति और संतुलन बना रहेगा। किस्मत का साथ मिलने के संकेत हैं। कार्य आसानी से पूरे हो सकते हैं। अविवाहित लोगों के रिश्तों में शुभ प्रगति होने की संभावना बन सकती है।

वृश्चिक राशि : इस राशि के जातकों के लिए आने वाला समय शुभ संकेत लेकर आ सकता है। नौकरी से जुड़ी परेशानियां दूर होने के योग बन रहे हैं और कार्यक्षेत्र में पदोन्नति के अवसर भी मिल सकते हैं। व्यापार से जुड़े लोगों के लिए यह समय बदलाव और प्रगति का साबित हो सकता है।

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Surya Grahan impact: साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण आज, शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती वाली राशियों पर 15 दिन मंडराएगा खतरा

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन शिवरात्रि पर एक साथ बन रहे हैं 4 राजयोग, 4 राशियों पर बरसेगी भगवान की कृपा और मिलेगा मान-सम्मान

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो कर इसी दिन भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन ढेरों शिवभक्त पवित्र नदियों से कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। खास बात यह है कि इस साल शिवरात्रि पर एक साथ कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक तो सावन शिवरात्रि का पर्व दूसरे मंगला गौरी व्रत के साथ पड़ रहा है। इसके अलावा यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से 4 प्रभावशाली राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इनमें हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग शामिल हैं। इन शुभ योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिल सकता है। लेकिन 4 राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। इन राशियों को करियर में सफलता, कारोबार में लाभ, आर्थिक मजबूती और समाज में मान-सम्मान मिलने के योग बन सकते हैं। आइए जानते हैं कि वे शुभ राशियां कौन सी हैं।

इन चार राशियों को होगा लाभ

वृषभ राशि : इन शुभ योगों के बनने से वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है। करियर में लंबे समय से अटके काम अब गति पकड़ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ प्रमोशन के अवसर भी बन सकते हैं। व्यापारियों को नए ग्राहक मिलने और आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

कर्क राशि : इस राशि के जातकों के लिए चारों राजयोगों का सबसे शुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होंगे।

तुला राशि : इस राशि के जातकों को यह राजयोग सफलता की सीढ़ी चढ़ा सकता है। इस अवधि में व्यापार से जुड़े जातकों को अच्छे लाभ के अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट गति पकड़ेंगे और उन्हें पूरा करने में सफलता मिल सकती है।

कुंभ राशि : शुभ राजयोग से कुंभ राशि के जातकों की किस्मत चमक सकती है। नौकरी में बदलाव या करियर की नई शुरुआत करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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Dwi Dwadash Yog: बुध-मंगल ने दुर्लभ द्विद्वादश योग बनाया, 4 राशियों की चमकेगी किस्मत और बढ़ेगी धन-संपत्ति

विराट पर ब्रेट ली का बड़ा खुलासा, जब कोहली की बल्लेबाजी देखकर रह गए थे हैरान…बताया ये किस्सा

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने भारत के दिग्गज खिलाड़ी विराट कोहली की जमकर तारीफ की है। ली के मुताबिक, कुछ खिलाड़ी शुरुआत में सबसे बेहतरीन नजर नहीं आते, लेकिन उनका मजबूत सोचने का तरीका उन्हें आगे चलकर सफल बनाता है। विराट कोहली भी ऐसे ही खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। ली ने बताया कि कोहली के शुरुआती दौर में उनकी बल्लेबाजी से ज्यादा उनकी आंखों में दिखने वाला आत्मविश्वास और जोश उन्हें प्रभावित करता था। वहीं कोहली का आक्रामक और मुकाबला करने वाला अंदाज इंटरनेशनल क्रिकेट में शुरुआती दिनों से ही दिखाई देता था।

विराट के अंदर जीतने की जबरदस्त इच्छा

ब्रेट ली के मुताबिक, विराट कोहली के अंदर शुरू से ही जीतने की जबरदस्त इच्छा थी, जिसने उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग पहचान दिलाई। ब्रेट ली ने बीयर बाइसेप्स के पॉडकास्ट पर बात करते हुए कहा, “आप इसे उनकी आंखों में देख सकते हैं। कुछ खिलाड़ियों में यह खास बात होती है। हो सकता है कि शुरुआत में उनमें ज्यादा टैलेंट न दिखे, लेकिन उनका मानसिक रवैया मजबूत होता है। उनमें यह सोच होती है कि क्या वे बाकी खिलाड़ियों से ज्यादा फोकस कर सकते हैं।”

विराट की तारीफ की

ली ने कहा, “आपने उनकी आंखें देखी हैं। वह सीधे आपकी तरफ देखते हैं और ऐसा लगता है जैसे कह रहे हों, ‘गेम शुरू हो गया है और तुम मुझे आउट नहीं कर पाओगे।’ जब मैंने उनके खिलाफ खेला था, तब मैंने यह चीज उनमें देखी थी।” पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ने आगे कहा, “आज आप देख सकते हैं कि उनका करियर कितना शानदार रहा है।” ब्रेट ली की बातों से विराट कोहली के करियर के पीछे की सोच और मेहनत की झलक मिलती है।

बड़े क्रिकेटरों में शामिल है

ली के मुताबिक, कोहली की सफलता को सिर्फ उनके रनों और रिकॉर्ड के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में बड़ा स्टार बनना अपने साथ काफी दबाव भी लेकर आता है। कोहली ने इस दबाव के बीच लगातार अच्छा प्रदर्शन किया और खुद को देश के सबसे बड़े क्रिकेट सितारों में शामिल किया। उन्होंने कहा, “दूसरी बात ये है कि आप अलग-अलग दौर के खिलाड़ियों की तुलना नहीं कर सकते। जरा सोचिए कि सनी भाई ने क्या किया था। सनी गावस्कर बहुत बड़े खिलाड़ी थे। इसके बाद सचिन तेंदुलकर आए, जिन्होंने उनकी जगह लेने और उस मुकाम तक पहुंचने की कोशिश की।”

ली ने आगे कहा, “उस समय सचिन के साथ करीब 1.5 अरब लोगों की उम्मीदें जुड़ी थीं। पूरा देश उन्हें सपोर्ट करता था और उन्हें इन उम्मीदों का दबाव अपने कंधों पर उठाना पड़ता था। इसके बाद विराट कोहली आए, जिन्होंने सचिन की जगह लेने की जिम्मेदारी संभाली।”

18,000 रुपये की सैलरी से शुरू हुआ सफर, अब हर महीने ₹10 लाख कमाते हैं शब्बीर, जानें कैसे बदली किस्मत

रात की नौकरी और दिनभर की पढ़ाई के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता, लेकिन शब्बीर मिठाईवाला ने कई साल तक इसी चुनौतीपूर्ण जिंदगी को अपनी मेहनत का हिस्सा बनाया। UAE में बचपन बिताने के बाद पढ़ाई के लिए मुंबई आए शब्बीर के सामने आर्थिक चुनौतियां थीं। अपनी पढ़ाई का खर्च खुद उठाने के लिए उन्होंने नौकरी करने का फैसला किया। एक कॉल सेंटर से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आगे चलकर उनके करियर और जिंदगी की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। दिन में कॉलेज, पढ़ाई और रात की शिफ्ट के बीच उन्होंने लगातार मेहनत की।

उस दौर में उनकी कमाई भले ही आज की तुलना में छोटी थी, लेकिन अनुभव और संघर्ष ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया। कई साल बाद जब परिस्थितियों ने उन्हें एक बड़ा फैसला लेने के लिए मजबूर किया, तब मुंबई में सीखी मेहनत और आत्मनिर्भरता उनके काम आई। उनकी कहानी अब संघर्ष से सफलता तक के सफर की मिसाल बन गई है।

18-19 घंटे की जिंदगी, पांच साल तक यही रूटीन

कमाई का इस्तेमाल किराए, खाने और पढ़ाई के खर्चों को संभालने में होता था, लेकिन इसके लिए उन्हें बेहद व्यस्त दिनचर्या अपनानी पड़ती थी। सुबह 11 बजे तक कॉलेज, दोपहर से शाम तक CA की कोचिंग और रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नौकरी। यानी कई बार दिन का करीब 18-19 घंटे हिस्सा पढ़ाई और काम में गुजरता था। शब्बीर के मुताबिक, करीब पांच साल तक उन्होंने इसी तरह काम किया और इसी अनुभव ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में शुरुआत से कुछ खड़ा करने का आत्मविश्वास दिया।

पिता की आंख की रोशनी गई, तो बदल गई जिंदगी की दिशा

CA की पढ़ाई पूरी करने के दौरान उन्हें पता चला कि उनके पिता की एक आंख की रोशनी चली गई है। उनके पिता 1984 से दुबई में पिक्चर-फ्रेम का कारोबार चला रहे थे, लेकिन 2013 में जब शब्बीर UAE लौटे, तब परिवार का बिजनेस गंभीर आर्थिक संकट में था। कारोबार में कैश-फ्लो की समस्या थी और करीब 10 लाख दिरहम का कर्ज जमा हो चुका था। दूसरी ओर, परिवार को शब्बीर के छोटे भाई-बहनों की पढ़ाई का खर्च भी उठाना था।

CA का सपना छोड़ा, परिवार का कारोबार चुना

शब्बीर के सामने बड़ा सवाल था जिस CA करियर के लिए उन्होंने वर्षों मेहनत की, उसे आगे बढ़ाएं या परिवार के मुश्किल दौर में कारोबार संभालें? उन्होंने CA करियर छोड़कर परिवार के बिजनेस में लौटने का फैसला किया। मुंबई के वर्षों के संघर्ष ने उन्हें दोबारा शून्य से शुरुआत करने का हौसला दिया था। दुबई लौटने के बाद उन्होंने एक बार फिर करीब 19-20 घंटे काम करने वाली दिनचर्या अपना ली।

पिक्चर फ्रेम से आर्किटेक्चरल ग्लास तक बदला कारोबार

शब्बीर सिर्फ पुराने बिजनेस को बचाने तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कारोबार के लिए नया रास्ता तलाशना शुरू किया। पारंपरिक रूप से परिवार का काम पिक्चर फ्रेम बनाने पर केंद्रित था, लेकिन उन्होंने इसे एक नए बाजार की ओर ले जाने का फैसला किया। 2017 में उन्होंने Glass R Us Industries की शुरुआत की, जिसके जरिए कंपनी ने आर्किटेक्चरल ग्लास सॉल्यूशंस की दिशा में कदम बढ़ाया। कारोबार अब रेजिडेंशियल, कमर्शियल और हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट्स के लिए ग्लास सॉल्यूशंस देने की ओर बढ़ गया।

करीब 7 साल लगे कर्ज से बाहर निकलने में

कारोबार को नई दिशा देने के बावजूद आर्थिक मुश्किलें तुरंत खत्म नहीं हुईं। शब्बीर के मुताबिक, परिवार को करीब छह से सात साल का समय लगा पूरा कर्ज चुकाने में। कर्ज खत्म होने के बाद उनका फोकस सिर्फ कारोबार चलाने पर नहीं रहा। उन्होंने इसे आगे बढ़ाने और एक लग्जरी ब्रांड के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया।

खुद की सैलरी भी रखी सीमित

करीब 10 लाख दिरहम के कर्ज का अनुभव शब्बीर की वित्तीय सोच पर भी गहरा असर डाल गया। अब वह कर्ज लेने और खर्च करने को लेकर काफी सावधानी बरतते हैं। उनके मुताबिक, कंपनी से वह हर महीने करीब 40,000 दिरहम यानी लगभग ₹10 लाख लेते हैं, जबकि वह इससे ज्यादा रकम भी निकाल सकते हैं। लेकिन वह अपने व्यक्तिगत खर्च और जरूरतों का हिसाब लगाकर सैलरी की सीमा तय करते हैं और बाकी पैसा कारोबार में वापस लगाते हैं।

अब लक्ष्य है इंटरनेशनल मार्केट और रोजाना $1 मिलियन

शब्बीर की महत्वाकांक्षा अब सिर्फ पारिवारिक कारोबार को सफल बनाने तक सीमित नहीं है। वह अपने ब्रांड को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाना चाहते हैं। उनका सबसे बड़ा वित्तीय लक्ष्य सुनकर शायद कई लोग चौंक जाएं। शब्बीर का कहना है कि वह भविष्य में हर दिन 1 मिलियन डॉलर कमाने का लक्ष्य रखते हैं। उनके लिए यह सिर्फ एक बड़ी रकम का सपना नहीं, बल्कि सोच को बड़े स्तर पर ले जाने का लक्ष्य है। मुंबई की रात की शिफ्ट से शुरू हुई उनकी कहानी अब दुबई से ग्लोबल बिजनेस बनाने की महत्वाकांक्षा तक पहुंच चुकी है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Vaibhav Sooryavanshi: ‘अगर वह 17 या 18 साल का है, तो…’ वैभव सूर्यवंशी की उम्र पर ब्रेट ली ने दिया अजीब बयान

IPL में शानदार प्रदर्शन के बाद वैभव सूर्यवंशी को भारतीय टी20 टीम में जगह मिली। इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआत भले ही उनके लिए खास नहीं रही, लेकिन जिम्बाब्वे दौरे पर उन्होंने दमदार वापसी की। यहां उनके बल्ले से लगातार अच्छी पारियां देखने को मिलीं और उनके प्रदर्शन के दम पर उन्हें सीरीज का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। कम उम्र में दबाव से निकलकर इस तरह का प्रदर्शन करना वैभव की प्रतिभा और आत्मविश्वास को दिखाता है। वहीं वैभव की उम्र को लेकर अक्सर चर्चा होती रहती है।

वहीं हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व तेज गेंदबाज ब्रेट ली ने युवा भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि इस समय वैभव की उम्र को लेकर काफी चर्चा हो रही है, लेकिन इससे ज्यादा जरूरी उनकी क्रिकेट प्रतिभा है।

वैभव को लेकर ली ने क्या कहा

बीयर बाइसेप्स YouTube चैनल पर बात करते हुए ब्रेट ली ने कहा, “वह जबरदस्त है। भारत से बाहर हर कोई यही सवाल पूछ रहा है कि क्या वह 15 साल का है? क्या वह 15 साल का है? शायद इस समय दुनिया भर में सबसे बड़ी चर्चा इसी बात को लेकर है। मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह कितने साल का है।” ली ने आगे कहा, “अगर वह 15 साल का है, तो शानदार है, लेकिन अगर वह 17 या 18 साल का है, तो इससे क्या फर्क पड़ता है। यह बच्चा क्रिकेट खेलना जानता है। वह भारत के लिए एक बहुत बड़ी खोज है और आने वाले समय में वह इससे भी बड़ी और बेहतर उपलब्धियां हासिल करेगा।”

कम समय में मिली ज्यादा तारीफ

ली ने कहा, “उन्होंने इतने कम समय में IPL में धूम मचा दी है। SRH के खिलाफ उन्होंने जो 97 रन बनाए, वह ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों के खिलाफ थे। वे बहुत तेज गेंदबाजी कर रहे थे और वह उनके खिलाफ बेखौफ होकर हुक शॉट खेल रहे थे।” ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर ब्रेट ली ने वैभव सूर्यवंशी के खेल की तारीफ करते हुए कहा कि इतनी कम उम्र में उनका आत्मविश्वास और समझ काबिले तारीफ है। उन्होंने ये भी माना कि सूर्यवंशी ने IPL में तेज गेंदबाजों के खिलाफ बिना डरे जिस तरह बल्लेबाजी की, वह उनकी खासियत है। लेकिन, ली के मुताबिक आगे बढ़ने के साथ सूर्यवंशी पर लोगों की उम्मीदें और मीडिया का ध्यान भी बढ़ेगा, जिसे संभालना उनके लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।

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गरीबी चुराने कोई नहीं आता!

Sarvodaya Philosophy: सर्वोदय दर्शन को समग्रता से समझने एवं सहजता से समझाने वाले तथा स्वाधीनता आंदोलन के सैनिक दादा धर्माधिकारी अपने संस्मरणों को सहजता से अभिव्यक्त करते हुए कहते हैं कि एक बार आदिवासियों के एक गांव में जाने का मौका हुआ। उनके पास कोई जगह नही थी। मकान में एक ही कमरा था। उसमें खिड़की नहीं थी। वहीं रोटी बनती थी। सारे मकान में धुआं था। कुछ मुर्गियां थी, बच्चे भी इधर- उधर खेलते थे। उन्होंने सोचा कि मुझे वहां सुलाना ठीक नहीं होगा।

बगल में एक झोपड़ी थी, वहां मेरी खाट बिछा दी। 'हमने पूछा यह जगह आपके पास कहां से आई?' वह हमारा अपमान या मज़ाक नहीं करना चाहता था, पर उसने वस्तुस्थिति बतलाई कि 'हम इसमें सूअर रखते हैं। हमारे पास और कोई जगह नहीं थी। हमने इसे आज साफ कर लिया।' मैंने कहा- 'खैर साफ कर लिया तो अच्छा ही किया।' थोड़ी देर में हमें लगा कि यह व्यक्ति यहां सूअर रखता था। रात को कोई घुस आए तो क्या होगा? हमने पूछा- 'इसमें किवाड़ नहीं है?' बोला- 'इसमें किवाड़ों की जरूरत नहीं है।' 'क्यों? आसपास कोई चोर नहीं है?'

 

'चोर तो बहुत हैं।' 'तो फिर तुम्हारे घर में किवाड़ क्यों नहीं?' बोला हम ऐसे भाग्यवान कहां कि हमारे घर में चोर आए?'

अब यह बिल्कुल अनपढ़ मनुष्य कह रहा है। वह कह रहा है कि हमारा ऐसा भाग्य नहीं है। क्यों? भाग्य किसलिए चाहिए? तो कहता है- 'हमारे पास एक ही चीज हैं ग़रीबी और उसे चुराने वाला कोई नहीं।' मैंने कहा- 'तब तो आपको पुलिस और फौज की जरूरत नहीं होती।'

 

'वह जवाब देता है कि पुलिस और फौज की हमें क्या ज़रूरत पड़ती होगी?'

'पुलिस वाला कभी नहीं आता तुम्हारे यहां?' कहता है 'आता है।' 'कब आता है?'

'आपकी घड़ी गुम हो जाए, तो खोजने के लिए हमारे मकानों में आता है।' 

'पुलिस और फौज किसलिए हैं?'

'बोला आपकी अमीरी को बचाने के लिए है और हमारी गरीबी को बचाने के लिए। वह दोनों की हिफाज़त करतीं हैं।'

 

आदिवासी मनुष्य की अपनी मौलिक दार्शनिक समझ होती है जिसे वे लोग ही समझ पाते हैं जो प्राकृतिक मानस के होते हैं, सदा जीवन्त और भय मुक्त। अपने मन और शरीर की ताकत से जीवन की हर चुनौती को हल करने की सहजता से ओतप्रोत। इसी तरह आदिवासी अंचलों में जो बसाहट होती है वह भी इसी दृष्टि का विस्तार करती हैं। आदिवासी अंचलों में घरों की बनावट और बसाहट की अपनी मौलिक लोकदृष्टि होती हैं।

आदिवासी अंचलों में मनुष्य केवल मनुष्य या परिवार या समाज के साथ ही नहीं रहता समूची प्रकृति की अंतहीन जीवन श्रृंखला के साथ सहजता से सहजीवन करता है। पर्वतीय इलाकों में हो या घने जंगल में आदिवासी अंचलों की जीवन शैली में समूचे जीवन या प्राकृतिक श्रृंखला का समावेश होता है। एक बात मैंने आदिवासी अंचलों में चार पांच दशकों के अपने लोक सम्पर्क और सहजीवन से समझी है कि प्रकृति और सहजीवन की सहज समझ आज के कालखंड में आदिवासी अंचलों के लोक जीवन में मौजूद होकर आज भी बनी हुई है।

 

एक बार मैंने अलिराजपुर के अंदरूनी हिस्से के सधन जंगलों में देखा कि अधिकांश घर मिट्टी और लकड़ी के सुन्दर, सुरुचिपूर्णऔर आकर्षक संरचना के साथ मौजूद हैं। निरक्षर लोगों ने  बिना कागज़ पर कोई प्रारूप या रेखाकंन बनाए और बिना बड़े भौतिक संसाधनों को इस्तेमाल किए ही अपनी लोक परम्परागत नजर और सहज समझ के समन्वय से स्थानीय संसाधनों से बनाए हैं, जिसमें हर किसी के लिए अपनी सुविधा और जरूरत के हिसाब से घर को साझा इस्तेमाल करने का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया है।

जब मैंने एक आदिवासी बुजुर्ग से उनकी बसाहट को लेकर यह जिज्ञासा प्रगट की कि आपके घरों में दरवाजे क्यों नहीं है? तो उन्होंने मुझे अपनी लोकदृष्टि से विनम्रतापूर्वक समझाते हुए कहा कि वकील साहब यह घर केवल हमारे परिवार के सदस्यों के लिए ही हम नहीं बनाते। हमारे साथ हमारी बकरी, मुर्गी और गाय-बैल भी हमारे जीवन एवं परिवार के सदस्य हैं। उन्हें जब हमारे घर में आवश्यकतानुसार अंदर बाहर आना जाना हो तो दरवाजा उनके स्वतंत्र अवागमन में बाधा खड़ी कर सकता है। हम उनकी जरूरत और सुविधा की दृष्टि से दरवाजा नहीं रखते हैं। ऐसी उदात्त लोकदृष्टि खुद ही आदिवासी समाज प्राकृतिक जीवन की निरन्तरता को अपने जीवन में आत्मसात कर, सब पर पूरा-पूरा विश्वास रखते हुए घर के सदस्य की तरह सहजता से करता है। तो मन खिल उठता है। खिला हुआ मन आदिवासी लोक जीवन की अनूठी धरोहर है जो सारी दुनिया के वनप्रान्तरों में रची-बसी आदिवासी लोक परम्परा का सार या निचोड़ हैं।

 

अभी भी सदूर आदिवासी अंचलों में पीने का पानी घर के बाहर एक छोटे मिट्टी और लकड़ी से बने एक मचान में मिट्टी के मटके को चारों और से मिट्टी से ही ढंककर उसमें पीने का पानी सबके लिए रखने की लोक परम्परा कहीं कहीं देखने को मिलती हैं। इसी तरह अनाज को भी घर के बाहर बांस एवं गोबर मिट्टी से निर्मित बड़ी बड़ी कोठियों में रखने की लोक परम्परा आज भी आदिवासी अंचलों में देखने को मिलती हैं। सब पर भरोसा और आत्मविश्वास, आदिवासी लोक परम्परा का मूल है। आज भी अधिकांश आदिवासी अंचलों में स्वावलंबन और सहजीवन की अनोखी जुगलबंदी की मजबूती से खड़ी होकर मौजूद दिखाई देती हैं।

 

आधुनिक जीवन शैली के आदी होते जा रहे विकसित शहरी सभ्यता के लोग, आदिवासी अंचलों की जीवन शैली के प्राकृतिक रूप स्वरूप और दर्शन को आत्मसात करने का आत्मविश्वास और उदात्त मानवीय मूल्यों को समझने के बजाय जाने अंजाने अपने आप ही प्रकृति से दूर जाते जा रहे हैं। इससे ऐसा आभास होता है कि विकसित मानव सभ्यता की दिशा सरलता से जटिलता की दिशा में निरंतर बढ़ती ही जा रही है। जिसे आज की विकास यात्रा में हम शहरी या विकसित बसाहट में सब कुछ यंत्राधारित करने की अंधी दौड़ में निरंतर ले जाने में प्राणप्रण से जुट गए हैं, उससे हम सब की प्राकृतिक सोच समझ और जीवन का आनंद हमारे पास से निरन्तर दूर जाने की दिशा में बढ़ता जा रहा है।

भौतिक समृद्धि और प्राकृतिक सम्पदा के सह सम्बन्ध को भूलकर आगे बढ़ने की दौड़ में हम सब हांफ रहे हैं। इसी से कभी कभी ऐसा लगता है कि हम विकसित सभ्यता के आदी मनुष्य अपने प्राकृतिक जीवन  क्रम को खुद होकर लुप्त करने में लगे हुए हैं।