UP Holiday List 2026: 18 से 20 अक्टूबर तक दफ्तर बंद, चलिए जानते हैं मायावती, अखिलेश या योगी-किस सरकार में मिलीं ज्यादा छुट्टियां?

UP Holiday List 2026: त्योहारों के बीच उत्तर प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों को लगातार तीन दिन की छुट्टी मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महानवमी के मौके पर 19 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का फैसला लिया है। वहीं, रविवार की साप्ताहिक छुट्टी और मंगलवार को विजयादशमी की छुट्टी पहले से तय है। ऐसे में अब सरकारी दफ्तर लगातार तीन दिन बंद रहेंगे।

राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने 2026 की छुट्टियों की पहले जारी की गई सूची में बदलाव को लेकर आदेश जारी किया है। हालांकि, पुराने आदेश की बाकी सभी बातें पहले की तरह लागू रहेंगी।

बता दें कि शिक्षकों और कर्मचारियों के संगठनों ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर महानवमी पर छुट्टी देने की मांग की थी। इससे पहले राज्य सरकार ने 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयादशमी, दोनों त्योहारों के लिए एक ही दिन की छुट्टी घोषित की थी।

दफ्तर कब तक बंद रहेंगे?

तारीखदिनस्थितिकारण
18 अक्टूबररविवारबंदसाप्ताहिक छुट्टी (महाअष्टमी)
19 अक्टूबरसोमवारबंदनए आदेश के तहत महानवमी की सार्वजनिक छुट्टी
20 अक्टूबरमंगलवारबंदपहले से घोषित विजयादशमी/दशहरा की छुट्टी
21 अक्टूबरबुधवारखुलेंगेसरकारी दफ्तर दोबारा खुलेंगे

क्या योगी सरकार ने पहली बार किसी त्योहार की छुट्टी बढ़ाई है?

नहीं। इस साल की शुरुआत में, राज्य सरकार ने 26 और 27 मार्च को राम नवमी के मौके पर दो दिन की छुट्टी की घोषणा की थी, और 15 जनवरी को मकर संक्रांति के लिए सार्वजनिक अवकाश था। अक्टूबर 2024 में, सरकार ने नवमी के दिन छुट्टी घोषित की।

अलग-अलग सरकारों के दौरान यूपी में छुट्टियों को लेकर क्या बदलाव आए हैं?

राज्य सरकारें पहले भी अपनी छुट्टियों की सूची का इस्तेमाल एक राजनीतिक संकेत देने के लिए करती रही हैं। मई 2007 में मायावती सरकार ने 9 अक्टूबर को-जो बीएसपी संस्थापक कांशी राम की पुण्यतिथि है-छुट्टी घोषित की थी। हालांकि, अक्टूबर 2012 में अखिलेश यादव सरकार ने इस छुट्टी को खत्म कर दिया।

बता दें कि सपा सरकार ने महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती, अजमेर उर्स, तथा चंद्रशेखर और महाराणा प्रताप की जयंती पर भी छुट्टियां घोषित की थीं।

वहीं अप्रैल 2017 में, योगी कैबिनेट ने 15 छुट्टियां रद्द कर दीं थी, जिनमें चेटी चंड, परशुराम जयंती, छठ पूजा और वाल्मीकि जयंती शामिल थीं। सरकार का कहना था कि स्कूलों को इन महापुरुषों के बारे में पढ़ाना चाहिए, न कि उनके नाम पर छुट्टी देनी चाहिए।

सरकारछुट्टीफैसलासमयकिससे संबंधित
मायावती (BSP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत छुट्टी घोषितमई 2007बहुजन समाज के प्रमुख नेता
मायावती (BSP)कांशीराम की जयंती (15 मार्च)यूपी की छुट्टियों की सूची में शामिल2012 तकबहुजन समाज के प्रमुख नेता
अखिलेश यादव (SP)कांशीराम की पुण्यतिथि (9 अक्टूबर)छुट्टी रद्द कीअक्टूबर 2012BSP सरकार के फैसले में बदलाव
अखिलेश यादव (SP)महर्षि कश्यप और निषादराज जयंती (5 अप्रैल)छुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक और सामुदायिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)अजमेर गरीब नवाज उर्सछुट्टी घोषित की2012–2017धार्मिक महत्व
अखिलेश यादव (SP)चंद्रशेखर जयंती (17 अप्रैल) और महाराणा प्रताप जयंती (9 मई)छुट्टी घोषित की2012–2017महापुरुषों की जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)चेती चंद, परशुराम जयंती, अजमेर उर्स, जमात-उल-विदा, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, छठ पूजा और ईद-ए-मिलाद समेत 15 छुट्टियांछुट्टियां रद्द कींअप्रैल 2017त्योहार और जयंती
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (11 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2024धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)मकर संक्रांति (15 जनवरी)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)रामनवमी (26–27 मार्च)दो दिन की छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार
योगी आदित्यनाथ (BJP)महानवमी (19 अक्टूबर)छुट्टी घोषित की2026धार्मिक त्योहार

क्या योगी ने नवरात्रि के दौरान कुछ और भी कहा?

छुट्टी का यह आदेश नवरात्रि के छठे दिन आया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने महिलाओं की शक्ति के बारे में एक संदेश भी दिया। उन्होंने इस संदेश के जरिए लड़कियों और खेलों के क्षेत्र में अपनी सरकार के कामकाज को सामने रखा।

मां कात्यायनी को समर्पित इस दिन, योगी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने देवी को महिलाओं के साहस, संकल्प और वीरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सभी बाधाओं और राक्षसी प्रवृत्तियों का नाश करने वाली मां कात्यायनी, महिलाओं के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय वीरता का प्रतीक हैं।”

उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले, “राज्य में डर और अराजकता का माहौल था, जहां बेटियों के सपनों को दबा दिया जाता था, उनका आत्मविश्वास कुचल दिया जाता था और मौकों की कमी के कारण उनकी प्रतिभा मुरझा जाती थी।”

सीएम योगी ने कहा कि खेल के मैदान माफियाओं के नियंत्रण में थे, और लड़कियों के सपनों को उड़ान मिलने के बजाय, उन्हें “चार दीवारों के भीतर कैद” कर दिया गया था।

उन्होंने कहा, “पिछले साढ़े नौ वर्षों में, राज्य में बदलाव का एक नया अध्याय लिखा गया है। डर की जगह सुरक्षा ने ले ली है, उपेक्षा की जगह प्रोत्साहन ने, और संसाधनों की कमी की जगह खेल सुविधाओं के विस्तार ने ले ली है।”

योगी ने खेलों से जुड़ी किन सुविधाओं का जिक्र किया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब लड़कियों के पास अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए एक मजबूत आधार है, जिसमें “गांव के खेल के मैदानों और ब्लॉक-स्तरीय मिनी स्टेडियमों से लेकर जिला स्टेडियम, मंडल स्तरीय खेल कॉलेज और मेरठ में स्थित मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय” शामिल हैं।

उन्होंने ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों के पदक विजेताओं को मिलने वाले लाखों-करोड़ों रुपये के नकद पुरस्कारों और खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये चीजें प्रतिभा को बढ़ावा देती हैं, उपलब्धियों का सम्मान करती हैं और खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाती हैं।

मुख्यमंत्री ने किन महिला खिलाड़ियों के नाम गिनाए?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी; जूडो में अस्मिता डे; क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह; हॉकी में वंदना कटारिया; और कुश्ती में दिव्या काकरान का नाम लिया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में उनके प्रदर्शन ने भारत और उत्तर प्रदेश, दोनों का मान बढ़ाया है।

यह भी पढ़ें: Rajasthan Bus Accident: कोटा में श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी, 8 की मौत, 6 से ज्यादा घायल