8th Pay Commission: कम फिटमेंट फैक्टर पर भी सैलरी में आएगा बड़ा उछाल! समझिए 2.1 के फॉर्मूले का पूरा गणित

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के गठन के बाद से ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सबसे ज्यादा ध्यान ‘फिटमेंट फैक्टर’ पर टिका हुआ है। कर्मचारी यूनियंस ने 2.7 से लेकर 4 तक के फिटमेंट फैक्टर की डिमांड की है।

7वें वेतन आयोग में जहां 2.57 का फिटमेंट फैक्टर मिला था। लेकिन अगर 8वें वेतन आयोग में इसे घटाकर 2.1 भी कर दिया जाए, तो भी आपकी टेक-होम सैलरी और बेसिक पे में 7वें वेतन आयोग से भी बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने सोशल मीडिया पर एक कैलकुलेशन शेयर कर समझाया है कि आखिर कैसे कम फिटमेंट फैक्टर भी जेब में ज्यादा पैसा ला सकता है। आइए समझते हैं इसका पूरा गणित।

7th CPC vs 8th CPC: क्यों सिर्फ ‘नंबर’ देखना है धोखा?

7वें वेतन आयोग के समय फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जबकि 8वें में इसके 2.1 रहने का अनुमान लगाया जा रहा है। पहली नजर में 2.1 कम लगता है, लेकिन असल फायदा इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी बेस सैलरी कितनी है:

7वें वेतन आयोग में क्या हुआ था?

पुराना न्यूनतम बेसिक पे ₹7,000 था। इस पर 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लगा, जिससे नया बेसिक पे ₹18,000 हो गया। लेकिन उस समय कर्मचारी पहले से ही 125% डीए (DA) ले रहे थे (यानी ₹7,000 का 125% = ₹8,750)।

इस तरह पुरानी सैलरी + DA मिलाकर पहले ही ₹15,750 बन रहा था। ऐसे में नया बेसिक ₹18,000 होने से असल अतिरिक्त फायदा सिर्फ ₹2,250 (लगभग 32%) का ही हुआ था।

8वें वेतन आयोग में 2.1 फिटमेंट फैक्टर पर क्या होगा?

फिलहाल न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 है। अगर इस पर 2.1 का फिटमेंट फैक्टर लगता है, तो नया न्यूनतम बेसिक पे सीधे करीब ₹38,000 हो जाएगा। अगर मौजूदा 58% डीए को देखा जाए, तो ₹18,000 पर 58% DA मिलाकर कुल रकम ₹28,440 होती है। अब ₹38,000 के नए बेसिक से इसकी तुलना करें, तो कर्मचारियों को लगभग ₹9,560 का सीधा अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जो मौजूदा बेसिक का करीब 53% फायदा है।

7वें और 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित

7वें और 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित

टेक-होम सैलरी में होगा बड़ा इजाफा

वैसे ₹38,000 सिर्फ न्यूनतम बेसिक पे का एक अनुमानित उदाहरण है। कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी इससे कहीं ज्यादा होगी, क्योंकि इसमें नया महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA), ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) और अन्य भत्ते भी जोड़े जाएंगे।

कब तक लागू होंगी सिफारिशें?

नवंबर 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया गया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। इस हिसाब से सिफारिशें मई 2027 के आसपास सामने आने की उम्मीद है। तब तक कर्मचारियों को सरकार के आधिकारिक ऐलान का इंतजार करना होगा।

8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर बढ़ा तो HRA कितना बढ़ेगा? समझिए हर पे-लेवल का पूरा हिसाब

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर करीब 50-55 लाख केंद्रीय कर्मचारी और 69 लाख पेंशनर्स की नजर फिटमेंट फैक्टर पर टिकी है। अगर बेसिक सैलरी बढ़ती है, तो उसके साथ हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी बढ़ सकता है, क्योंकि इसकी गणना बेसिक पे के आधार पर होती है।

फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत HRA शहर की कैटेगरी के हिसाब से मिलता है। X कैटेगरी शहरों में सबसे ज्यादा HRA मिलता है। वहीं, Y और Z कैटेगरी में यह क्रमश: कम होता है। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के तहत अंतिम HRA कितना होगा, यह आयोग की सिफारिशों और सरकार की मंजूरी के बाद ही तय होगा।

HRA कैसे बढ़ सकता है?

फिलहाल HRA की मौजूदा दरें इस तरह हैं।

  • X शहर: 30%
  • Y शहर: 20%
  • Z शहर: 10%

नीचे की गणना 2x, 2.5x और 3x फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर आधारित है। यह सिर्फ संभावित हिसाब है, अंतिम फैसला सरकार करेगी।

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लेवल-4 कर्मचारी का अनुमानित HRA

मान लीजिए किसी लेवल-4 कर्मचारी की बेसिक सैलरी 2.0 फिटमेंट फैक्टर के बाद ₹51,000 हो जाती है। ऐसे में HRA का अनुमान इस तरह बनता है।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹15,300
Y (20%)₹10,200
Z (10%)₹5,100

अगर यही कर्मचारी 2.5 फिटमेंट फैक्टर के दायरे में आता है और उसकी बेसिक पे ₹63,750 हो जाती है, तो HRA भी उसी हिसाब से बढ़ जाएगा।

शहर की कैटेगरीअनुमानित HRA
X (30%)₹19,125
Y (20%)₹12,750
Z (10%)₹6,375

यानी सिर्फ 2.0 से 2.5 फिटमेंट फैक्टर के अनुमान पर ही X शहर में HRA करीब ₹3,825, Y शहर में ₹2,550 और Z शहर में ₹1,275 बढ़ सकता है।

HRA बढ़ने का सीधा मतलब क्या है?

कई कर्मचारी सिर्फ बेसिक सैलरी पर ध्यान देते हैं। लेकिन HRA बढ़ने का असर हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी पर भी पड़ता है। अगर फिटमेंट फैक्टर बढ़ता है, तो उसी के साथ HRA की रकम भी ऊपर चली जाती है।

हालांकि यह याद रखना जरूरी है कि फिटमेंट फैक्टर सीधे HRA तय नहीं करता। यह सिर्फ बेसिक पे बढ़ाता है और HRA उसी बढ़ी हुई बेसिक सैलरी का तय प्रतिशत होता है। इसलिए अंतिम बढ़ोतरी का सही आंकड़ा 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों और सरकार के अंतिम फैसले के बाद ही साफ होगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

8th Pay Commission Updates: पे रिवीजन के बाद कितनी हो जाएगी एएसओ, इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स की सैलरी?

8th Pay Commission Updates: केंद्र सरकार के लाखों एंप्लॉयीज और पेंशनर्स की नजरें 8वें वेतन आयोग पर लगी हैं। आयोग के सदस्य अभी देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों और यूनियंस लीडर्स से मुलकात कर रहे हैं। इस महीने के आखिर में आयोग के सदस्य जयपुर जाने वाले हैं। उसके बाद उनका कार्यक्रम चेन्नई और पुद्दुचेरी जाने का है। दिल्ली, कोलकाता सहित कई बड़े शहरों में वे पहले ही एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों की राय जान चुके हैं।

सैलरी में होने वाली वृद्धि फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करेगी

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी कितनी बढ़ेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फिटमेंट फैक्टर कितना रहता है। सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था। लेकिन, इस बार एंप्लॉयीज यूनियंस ने काफी ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग 8वें वेतन आयोग से की है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी उतनी ज्यादा बढ़ेगी।

इस बार एंप्लॉयीज यूनियंस ने ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग की है

इस बार नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ (BPMS) ने 4.0 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने भी 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। एंप्लॉयीज यूनियंस में फिटमेंट फैक्टर को लेकर एक राय नहीं है।

एएसओ, इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स की सैलरी में बदलाव

सवाल है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद असिस्टेंस सेक्शन अफसर (ASO), इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स जैसे एंप्लॉयीज की सैलरी कितनी बढ़ जाएगी? ये एंप्लॉयीज अभी लेवल 5 और लेवल 6 पे ग्रेड के तहत आते हैं। लेवल 5 के एंप्लॉयीज का बेसिक पे अभी 29,200 रुपये है। लेवल 6 का 35,400 रुपये है।

इस बार फिटमेंट फैक्टर 2 से 2.5 रहने की उम्मीद 

अगर केंद्र सरकार 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद फिटमेंट फैक्टर 2 रखती है तो लेवल 5 के तहत आने वाले एंप्लॉयीज का बेसिक पे बढ़कर 58,400 रुपये हो जाएगा। फिटमेंट फैक्टर 2.25 होने पर बेसिक बढ़कर 65,700 रुपये हो जाएगा। इसी तरह अगर फिटमेंट फैक्टर 2 रहता है तो लेवल 6 के तहत आने वाले एंप्लॉयीज का बेसिक पे बढ़कर 70,800 रुपये हो जाएगा। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.25 रहता है तो यह 79,650 रुपये हो जाएगा।

18 महीने में देनी है वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट

जानकारों का कहना है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर से 2 से 2.5 के बीच रह सकता है। इसका मतलब है कि एएसओ, इंस्पेक्टर्स, जूनियर इंजीनियर्स जैसे एंप्लॉयीज का बेसिक पे कम से कम दोगुना हो जाएगा। इसी हिसाब से उनकी ग्रॉस सेलरी में भी वृद्धि होगी। हालांकि, सैलरी रिवीजन में अभी समय लगेगा। 8वें वेतन आयोग को 18 महीने में अपनी रिपोर्ट देनी है।

अगले साल के आखिर तक आयोग की सिफारिशें लागू होने की उम्मीद

आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था। इस हिसाब से आयोग अगले साल मई-जून तक अपनी रिपोर्ट दे सकता है। उसके बाद सरकार उस पर विचार करेगी। इसका मतलब है कि अगले साल के आखिर तक केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी में रिवीजन लागू हो जाएगा।

8th Pay Commission में सैलरी हाइक का ये फैक्टर आप गारंटीड नहीं जानते होंगे! वो ‘हिडन फॉर्मूला’ जो कर देगा मालामाल

8th Pay Commission Salary Hike: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के मन में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यही है कि 8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद उनकी सैलरी में कितना उछाल आएगा। आमतौर पर हर कोई इसे सिर्फ फिटमेंट फैक्टर और महंगाई भत्ते (DA) के आंकड़ों से जोड़कर देख रहा है, लेकिन असल में सैलरी में ऐतिहासिक बढ़ोतरी का फैसला एक ‘स्पेशल फैक्टर’ के हाथ में है। अगर यह फॉर्मूला मंजूर हो गया, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी में सीधे 283% तक की रिकॉर्ड बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

यह मास्टर फैक्टर है- ‘फैमिली यूनिट’ की गणना में बड़ा बदलाव का। आइए समझते हैं कि यह नया फॉर्मूला आपकी इन-हैंड सैलरी को कैसे बदल देगा।

क्या है ‘फैमिली यूनिट’ और अब तक कैसे तय होती थी आपकी सैलरी?

वेतन आयोग कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 के 15वें इंडियन लेबर कॉन्फ्रेंस (ILC) के मानकों का पालन करता है। 7वें वेतन आयोग तक सरकार परिवार में केवल 3 यूनिट्स का खर्च जोड़कर न्यूनतम बेसिक पे तय करती थी:

  • कर्मचारी खुद: 1 यूनिट
  • पति या पत्नी: 1 यूनिट
  • 2 बच्चे (0.5 + 0.5): 1 यूनिट
  • कुल योग: 3 यूनिट्स

इसी 3 यूनिट्स के फॉर्मूले के आधार पर 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर दिया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 तय हुई थी।

8वें वेतन आयोग में 5 यूनिट्स का नया प्रस्ताव

कर्मचारी यूनियनों की मांग है कि अब परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को भी शामिल किया जाए। नए प्रस्ताव में यूनिट्स का गणित कुछ इस प्रकार है:

  • कर्मचारी: 1 यूनिट
  • पति या पत्नी: 1 यूनिट
  • 2 बच्चे (0.8 + 0.8): 1.6 यूनिट
  • आश्रित माता-पिता (0.8 + 0.8): 1.6 यूनिट
  • कुल योग: 5.2 यूनिट्स (राउंड ऑफ करके 5 यूनिट्स)

3 बनाम 5 यूनिट: जानिए आपकी सैलरी में कितना आएगा अंतर?

मान लीजिए, आज की महंगाई में एक व्यक्ति का न्यूनतम मासिक लिविंग कॉस्ट यानी राशन, कपड़ा, बिजली, मकान किराया, बच्चों की पढ़ाई और इलाज का खर्च लगभग ₹13,800 बैठता है:

पुराने 3 यूनिट फॉर्मूले से: 3×₹13,800=₹41,400 (अनुमानित न्यूनतम बेसिक सैलरी)

प्रस्तावित 5 यूनिट फॉर्मूले से: 5×₹13,800=₹69,000 (प्रस्तावित न्यूनतम बेसिक सैलरी)

साफ है कि सिर्फ माता-पिता का खर्च जुड़ने (2 अतिरिक्त यूनिट्स) से ही कर्मचारियों की बेसिक पे सीधे ₹27,600 प्रति महीना अतिरिक्त बढ़ जाएगी!

फिटमेंट फैक्टर 3.83 होते ही ₹18,000 की बेसिक बनेगी ₹69,000

फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी में गुणा करके नई बेसिक पे निकाली जाती है। 5 यूनिट्स का फॉर्मूला लागू होने पर फिटमेंट फैक्टर बढ़कर 3.83 हो जाएगा।

ऐसे समझें कैलकुलेशन (लेवल-1 कर्मचारी):

  • मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000
  • नया फॉर्मूला: मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर
  • नई बेसिक सैलरी: ₹18,000×3.83=₹68,940 (लगभग ₹69,000)

यानी 5 यूनिट्स का नियम पास होते ही बेसिक पे ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹69,000 हो जाएगी। इसके ऊपर से मिलने वाला DA, HRA और अन्य अलाउंस अलग से जुड़ेंगे।

कर्मचारी यूनियनों ने दिए ये 3 मजबूत कानूनी तर्क

नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग के सामने 5 यूनिट्स लागू करने के लिए ठोस कानूनी आधार रखे हैं:

सीनियर सिटीजन एक्ट: ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल करना कर्मचारी की कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी है।

सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: नए लेबर कोड्स में भी कर्मचारी के परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को आधिकारिक तौर पर जगह दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले: शीर्ष अदालत (1991 और भूपेंद्र नाथ हजारिका केस) ने साफ कहा है कि सरकार को अपने कर्मचारियों को सिर्फ ‘जीवित रहने लायक’ नहीं, बल्कि ‘सम्मानजनक जीवन’ जीने लायक वेतन देना चाहिए।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग की 18 महीने की डेडलाइन कब खत्म हो रही है? जानिए सरकार ने इस बारे क्या कहा

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के लाखों एंप्लॉयीज और पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार है। इस बीच, आयोग की 18 महीने की डेडलाइन को लेकर चल रही चर्चा पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। गौरतलब है कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी में बदलाव करेगी।

नवंबर 2025 में हुआ था आयोग का गठन

आठवें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर, 2025 को हुआ था। इसे 18 महीने में सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। इस हिसाब से आयोग को मई 2027 तक अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस बीच, सरकार ने कहा है कि उसे आयोग से अभी कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और आयोग ने तय समय से पहले रिपोर्ट सौंपने के बारे में भी कुछ नहीं कहा है।

18 महीने के अंदर आयोग सौंपेगा अपनी रिपोर्ट

संसद के मानसून सत्र के दौरान वित्त मंत्रालय ने एक सवाल के जवाब में कहा कि आठवां वेतन आयोग गठन के 18 महीनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। उसने यह भी कहा कि उसने अब तक अपनी सिफारिशें नहीं सौंपी है। सरकार ने यह भी कहा कि आयोग को कामकाज की प्रगति के बारे में सरकार को नियमित रूप से बताने की जरूरत नहीं है।

अलग-अलग शहरों में आयोग एंप्लॉयीज यूनियंस से मिल रहा

अभी आयोग एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों, एंप्लॉयीज यूनियंस, पेंशनर्स के प्रतिनिधिमंडल और मामले से जुड़े दूसरे पक्षों से बातचीत कर रहा है। कोलकाता और दिल्ली सहित कई शहरों में आयोग एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से चर्चा कर चुका है। यह आने वाले दिनों में जयपुर, चेन्नई, पुद्दुचेरी और चंडीगढ़ में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से बातचीत करेगा।

आयोग को एंप्लॉयीज के वेतन सहित इन मसलों पर देनी है रिपोर्ट

आठवें वेतन आयोग को पे स्केल के रिवीजन, डियरनेस अलाउन्स, पेंशन, फैमिली पेंशन और नौकरी से संबंधित दूसरी शर्तों के बारे में अपनी सिफारिशें सौंपनी है। सरकार ने अभी यह संकेत नहीं दिया है कि आयोग की सिफारिशों का केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स पर कितना असर पड़ेगा।

आयोग की सिफारिशों का असर करीब 70 एंप्लॉयीज और पेंशनर्स पर पड़ेगा

एक अनुमान के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का असर केंद्र सरकार के करीब 70 लाख एंप्लॉयीज और पेंशनर्स पर पड़ेगा। 1 मार्च, 2026 को केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की संख्या 35.77 लाख थी। 31 दिसंबर, 2025 को पेंशनर्स और फैमिली पेंशनर्स की संख्या 33.76 लाख थी।

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अगल साल के अंत तक लागू हो सकती हैं वेतन आयोग की सिफारिशें 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आयोग अगले साल मई तक अपनी फाइनल सिफारिशें सरकार को सौंप देता है तो यह अगले साल के अंत तक लागू हो सकता है। सरकार आयोग की सिफारिशें मिलने के बाद उस पर व्यापक विचार करेगी। उसके बाद सिफारिशों को लागू करने के बारे में फैसला लेगी।

8th Pay Commission Update: क्या मई 2027 से पहले आएगी रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग की डेडलाइन पर सरकार ने संसद में दी सफाई

8th Pay Commission Report: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। संसद के मानसून सत्र में सरकार ने साफ किया है कि आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय है। हालांकि, सरकार ने इस बात की कोई पुष्टि नहीं की है कि आयोग अपनी रिपोर्ट तय डेडलाइन यानी मई 2027 से पहले जमा करेगा या नहीं।

न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग से जुड़ी हर एक बारीकी और संसद में वित्त राज्य मंत्री द्वारा दिए गए जवाब को नीचे विस्तार से समझाया गया है।

18 महीने की डेडलाइन: संसद में सरकार ने क्या कहा?

लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की। 8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को आधिकारिक संकल्प के माध्यम से किया गया था। सरकार के मुताबिक, आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने की समयसीमा दी गई है। इसके हिसाब से रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समयसीमा मई 2027 बैठती है।

जब सरकार से पूछा गया कि क्या आयोग मई 2027 से पहले रिपोर्ट सौंपेगा, तो मंत्री ने किसी भी निश्चित तारीख की पुष्टि नहीं की और केवल 18 महीने के नियम को दोहराया। हालांकि, मूल प्रस्ताव के अनुसार यदि आयोग किसी विषय पर सिफारिशें पहले तय कर लेता है, तो वह सरकार को अंतरिम रिपोर्ट सौंप सकता है।

कितने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर?

सरकार द्वारा संसद में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस नए वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर लगभग 70 लाख लोगों पर पड़ेगा:

सिविलियन कर्मचारी: 1 मार्च 2026 तक केंद्र सरकार के तहत लगभग 35.77 लाख नागरिक कर्मचारी कार्यरत थे।

पेंशनभोगी: 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 33.76 लाख पेंशनभोगी और फैमिली पेंशनर्स रजिस्टर्ड थे (इसमें रक्षा पेंशनभोगी शामिल नहीं हैं)।

आयोग के जनादेश में वेतन संशोधन, भत्ते, पेंशन, फैमिली पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़े सभी अहम पहलू शामिल हैं।

वर्तमान में किस चरण में है आयोग का काम?

8वां वेतन आयोग फिलहाल हितधारकों के साथ परामर्श के चरण में है। आयोग कर्मचारी संगठनों, यूनियनों, पेंशनभोगी संघों और अन्य हितधारकों से मुलाकात कर उनकी मांगों और सुझावों को सुन रहा है। इसके लिए जयपुर, चेन्नई, पुडुचेरी और चंडीगढ़ जैसी जगहों पर बैठकें प्रस्तावित हैं।

काम को तेजी से निपटाने के लिए आयोग ने 11 अगस्त को कंसल्टेंट्स के नियमों में संशोधन किया है। अब एचआर (HR), लीगल रिसर्च, आईटी, डेटा एनालिसिस और डेटा विजुअलाइजेशन के क्षेत्र में सीनियर कंसल्टेंट्स और यंग प्रोफेशनल्स को शामिल किया जा रहा है।

लागू होने की तारीख पर स्थिति

कर्मचारी और पेंशनभोगी इस बात का भी इंतजार कर रहे हैं कि नई सिफारिशें किस तारीख से लागू मानी जाएंगी। सरकार ने साफ किया है कि जब तक आयोग अपनी अंतिम या अंतरिम रिपोर्ट नहीं सौंप देता और सरकार उस पर विचार नहीं कर लेती, तब तक नई दरों के लागू होने की तिथि पर कोई फैसला नहीं लिया जा सकता।

कुल मिलाकर केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी नई सैलरी, एरियर और पेंशन संशोधन के लिए आयोग की बैठकों के पूरा होने और मई 2027 तक रिपोर्ट आने का इंतजार करना होगा।

8th Pay Commission पर केन्द्रीय मंत्री ने संसद में दिया बड़ा अपडेट! जानें रिपोर्ट और सैलरी हाइक को लेकर पूरी डिटेल

8th Pay Commission News: देश के करीब 70 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में 8वें वेतन आयोग के गठन, इसकी समयसीमा और मौजूदा स्थिति पर संसद में ताजा अपडेट शेयर किया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए गठन की तारीख से 18 महीने का समय दिया गया है। हालांकि, नई सैलरी, भत्ते और लागू होने की तारीख को लेकर सस्पेंस अभी बरकरार है।

कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट?

संसद में दिए गए सरकारी बयान के मुताबिक, ‘सरकार ने 3 नवंबर 2025 को एक संकल्प जारी करके 8वें वेतन आयोग का आधिकारिक गठन किया था। आयोग को अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने दिए गए हैं। इसका मतलब है कि रिपोर्ट सौंपने की अंतिम समयसीमा मई 2027 है।

कब से लागू होंगी सिफारिशें?

वेतन वृद्धि और पेंशन संशोधन किस तारीख से प्रभावी होंगे, इस पर सरकार ने कहा कि जब तक आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट नहीं सौंप देता, तब तक लागू होने की तारीख तय नहीं की जा सकती।

कौन हैं 8वें वेतन आयोग के अध्यक्ष और सदस्य?

सरकार ने इस आयोग की जिम्मेदारी अनुभवी पैनल को सौंपी है। इसकी अध्यक्ष जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई है और अन्य सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष, पंकज जैन हैं। यह आयोग केंद्रीय कर्मचारियों के मौजूदा वेतन ढांचे, सेवा शर्तों और भत्तों की विस्तृत समीक्षा करेगा।

किन-किन चीजों में होगा बदलाव?

3 नवंबर 2025 को अधिसूचित ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ के तहत आयोग इन महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समीक्षा कर अपनी सिफारिशें देगा:

  • वेतन संशोधन: बेसिक सैलरी और पे-मैट्रिक्स का नया ढांचा।
  • महंगाई भत्ता: डीए (DA) और डीआर (DR) का विलय व कैलकुलेशन।
  • अन्य भत्ते: मकान किराया भत्ता (HRA), ट्रेवल अलाउंस (TA) और अन्य भत्तों में संशोधन।
  • पेंशन व पारिवारिक पेंशन: सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए पेंशन में बढ़ोतरी।
  • सेवा शर्तें: कार्यस्थल के माहौल और सर्विस रूल्स में सुधार।

करीब 70 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस कदम से एक बड़ी आबादी प्रभावित होगी। 1 मार्च 2026 तक देश में लगभग 35.77 लाख नागरिक केंद्रीय कर्मचारी सेवा में हैं। साथ ही 31 दिसंबर 2025 तक लगभग 33.76 लाख पेंशनभोगी और पारिवारिक पेंशनभोगी हैं। दोनों को मिलाकर करीब 70 लाख कर्मचारियों और पेंशनरों की जेब पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

क्या राज्यों में भी लागू होंगी ये सिफारिशें?

संसद में जब पूछा गया कि क्या केंद्र सरकार राज्यों को भी इसे अपनाने का कोई निर्देश या दिशानिर्देश जारी करेगी, तो सरकार ने साफ किया कि अभी राज्यों को ऐसा कोई परामर्श जारी नहीं किया गया है। आयोग की रिपोर्ट आने के बाद ही इस दिशा में आगे विचार किया जाएगा।

फिलहाल सभी की निगाहें 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट पर टिकी हैं। आयोग के समीक्षा पूरी करने और रिपोर्ट सौंपने के बाद ही नई सैलरी, एरियर और पेंशन हाइक की तस्वीर पूरी तरह साफ हो पाएगी।

8th Pay Commission: दिल्ली में खत्म हुईं बैठकें, कर्मचारियों की मांग कम से कम ₹52,600 हो बेसिक सैलरी! समझिए फिटमेंट फैक्टर का गणित

8th Pay Commission Latest News Today: 8वें वेतन आयोग की दिल्ली में जारी अहम परामर्श बैठकें आज यानी 10 अगस्त को समाप्त हो जाएगी। इन बैठकों में दिल्ली और आसपास के पंजीकृत केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों, पेंशनभोगियों और एसोसिएशनों ने अपनी-अपनी मांगें आयोग के समक्ष रखने का मौका मिला।

इससे पहले नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) और फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशंस (FNPO) जैसी कई प्रमुख यूनियनें भी सैलरी, पेंशन और भत्तों में संशोधन को लेकर अपने ज्ञापन सौंप चुकी हैं। वेतन आयोग इन सभी सुझावों और मांगों का अध्ययन करने के बाद मई-जून 2027 तक अपनी अंतिम सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंप सकता है।

इस बीच इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने भी आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹52,600 प्रति माह करने और अलग-अलग पे-लेवल के हिसाब से फिटमेंट फैक्टर तय करने की जोरदार मांग की गई है।

न्यूनतम सैलरी ₹52,600 और फिटमेंट फैक्टर की मांग

IRTSA ने 8वें वेतन आयोग से मांग की है कि 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाली न्यूनतम सैलरी ₹18,000 को बढ़ाकर सीधा ₹52,600 किया जाना चाहिए। एसोसिएशन ने न्यूनतम सैलरी की गणना के लिए 2.92 का फिटमेंट फैक्टर प्रस्तावित किया है।

IRTSA का कहना है कि आज के आधुनिक पारिवारिक खर्चों जैसे- इंटरनेट का खर्च, पैकेज्ड पीने का पानी, बच्चों की पढ़ाई और मेडिकल इंश्योरेंस को ध्यान में रखते हुए पुरानी गणना का तरीका बदला जाना चाहिए।

साथ ही रेलवे सुरक्षा और तकनीकी श्रेणियों में तैनात कर्मचारियों के लिए पे-लेवल 6 से आगे अधिक फिटमेंट फैक्टर लागू करने की मांग की गई है।

पे-लेवल के हिसाब से IRTSA का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर

एसोसिएशन ने सभी पे-लेवल के लिए एक समान फिटमेंट फैक्टर रखने के बजाय कर्मचारियों के पद और जिम्मेदारी के हिसाब से अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर का प्रस्ताव दिया है:

पे-लेवल के हिसाब से IRTSA का प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर

(नोट: यह आंकड़े IRTSA द्वारा आयोग को दिए गए ज्ञापन पर आधारित हैं। अंतिम फैसला सरकार द्वारा गठित आयोग की रिपोर्ट के बाद ही होगा।)

5% सालाना इंक्रीमेंट और करियर ग्रोथ की मांग

IRTSA ने केवल सैलरी बढ़ाने की मांग नहीं की है, बल्कि कर्मचारियों के करियर और भत्तों में भी सुधार की सिफारिश की है:

5% एनुअल इंक्रीमेंट: वर्तमान में मिलने वाले 3% के सालाना वेतन वृद्धि को बढ़ाकर 5% करने का सुझाव दिया गया है।

ग्रुप-B गजेटेड का दर्जा: जूनियर इंजीनियर्स (JE) और सीनियर सेक्शन इंजीनियर्स (SSE) के करियर में आ रहे ठहराव को दूर करने के लिए SSE को ग्रुप B गजेटेड स्टेटस देने की मांग की गई है।

MACP और भत्तों में संशोधन: मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (MACPS) के नियमों में ढील देने के साथ-साथ नाइट ड्यूटी अलाउंस, ओवरटाइम, रिस्क और हार्डशिप अलाउंस को आज के महंगाई दर के हिसाब से बढ़ाने की मांग रखी गई है।

आगे क्या होगा? जानिए वेतन आयोग का अगला शेड्यूल

दिल्ली की बैठकें पूरी होने के बाद भी 8वें वेतन आयोग का कंसल्टेशन प्रोसेस जारी रहेगा। आयोग 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच जयपुर का दौरा करेगा। इसके बाद 7-8 सितंबर को चेन्नई, 9 सितंबर को पुडुचेरी और 16-18 सितंबर के दौरान चंडीगढ़ में अलग-अलग कर्मचारी संगठनों के साथ बैठकें होंगी।

कुल मिलाकर फिलहाल न्यूनतम सैलरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर आयोग या केंद्र सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। देशभर के सभी प्रमुख कर्मचारी संगठनों से विचार-विमर्श करने के बाद ही आयोग अपनी अंतिम सिफारिशों का ड्राफ्ट तैयार करेगा।

8th Pay Commission: 7वें वेतन आयोग जैसा फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहा, तो कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? देखिए लेवल 1, 4, 6 और 10 का पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Salary Calculation: 8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच सुगबुगाहट तेज है। नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की सैलरी में कितना उछाल आएगा, यह पूरी तरह से फिटमेंट फैक्टर पर निर्भर करता है।

अगर सरकार 8वें वेतन आयोग में भी 7वें वेतन आयोग की तरह 2.57 का फिटमेंट फैक्टर बरकरार रखती है, तो अलग-अलग पे-लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और कुल टेक-होम सैलरी में कितना अंतर आएगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कैसे बढ़ती है बेसिक सैलरी?

फिटमेंट फैक्टर एक कॉमन मल्टीप्लायर होता है, जिससे मौजूदा बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है।

7वें वेतन आयोग का फॉर्मूला: 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हो गई थी।

2.57 फिटमेंट फैक्टर का गणित: अगर 8वें वेतन आयोग में भी 2.57 का ही फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो 7वें वेतन आयोग की बेसिक पे को सीधे 2.57 से मल्टीप्लाई कर नया बेसिक पे तय किया जाएगा।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

1. लेवल 1 (ग्रुप D/एमटीएस कर्मचारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹18,000

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹18,000 × 2.57): ₹46,260

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक पे में सीधे ₹28,260 प्रति महीने की बढ़ोतरी होगी। महंगाई भत्ता यानी DA घटने के बाद नए बेसिक पर री-कैल्कुलेट होगा।

2. लेवल 4 (लोअर डिविजन क्लर्क / LDC)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹25,500

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹25,500 × 2.57): ₹65,535

सैलरी में बढ़ोतरी: बेसिक सैलरी में लगभग ₹40,035 प्रति महीने की सीधी वृद्धि देखने को मिलेगी।

3. लेवल 6 (असिस्टेंट / सीनियर क्लर्क / सब-इंस्पेक्टर)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹35,400

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹35,400 × 2.57): ₹90,978

सैलरी में बढ़ोतरी: इस लेवल के कर्मचारियों की बेसिक पे में ₹55,578 प्रति महीने का बड़ा उछाल आएगा।

4. लेवल 10 (ग्रुप A / क्लास 1 अधिकारी)

7वें सीपीसी में मौजूदा बेसिक सैलरी: ₹56,100

8वें सीपीसी में अनुमानित बेसिक सैलरी (₹56,100 × 2.57): ₹1,44,177

सैलरी में बढ़ोतरी: ग्रुप-ए अधिकारियों की बेसिक पे में सीधे ₹88,077 प्रति महीने की बंपर बढ़ोतरी होगी।

लेवल 1 से लेवल 10 तक का सैलरी कैलकुलेशन (2.57 फिटमेंट फैक्टर पर)

भत्तों पर क्या पड़ेगा असर?

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो केवल बेसिक सैलरी ही नहीं बदलती, बल्कि अन्य भत्तों का ढांचा भी पुनर्गठित होता है:

हाउस रेंट अलाउंस (HRA): नए बेसिक पे के आधार पर X, Y और Z श्रेणी के शहरों के हिसाब से HRA दोबारा तय किया जाएगा।

महंगाई भत्ता (DA): नया वेतन आयोग लागू होते ही मौजूदा DA शून्य (0%) कर दिया जाता है और नई बेसिक सैलरी पर फ्रेश तरीके से डीए की गणना शुरू होती है।

पेंशनभोगियों को फायदा: 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का सीधा लाभ 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों की बेसिक पेंशन रिवीजन में भी मिलेगा।

कर्मचारी यूनियनें इस बार 2.86 से 3.25 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं, लेकिन अगर सरकार पिछले आयोग के 2.57 के फॉर्मूले को भी अपनाती है, तब भी कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी में जबरदस्त इजाफा होगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग में अब सामने आईं ये 5 मांगें, पांच बड़े अपडेट जान लीजिए

8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग ने दिल्ली में 7 अगस्त को केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज यूनियंस, पेंशनर्स और मामले से जुड़े दूसरे पक्षों के साथ चर्चा शुरू कर दी। आयोग दिल्ली में 10 अगस्त तक एंप्लॉयीज के प्रतिनिधिमंडलों से वेतन में संशोधन को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश करेगा। इससे पहले आयोग कोलकाता सहित देश के कई शेयरों में वेतन में संशोधन को लेकर एंप्लॉयीज के प्रतिनिधिमंडलों के साथ चर्चा कर चुका है।

अगले हफ्तों में इन शहरों में प्रतिनिधिमंडलों की राय जानेगा आयोग

आयोग का कार्यक्रम आने वाले हफ्तों में चेन्नई, पुद्दुचेरी, चंडीगढ़ और जयपुर जाने का है। इन शेयरों में वह केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के प्रतिनिधियों के साथ वेतन में संशोधन को लेकर उनकी राय जानने की कोशिश करेगा। आठवें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था। इसे 18 महीनों में अपनी रिपोर्ट देनी है। मान जा रहा है कि अगले साल जून तक यह अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। सरकार रिपोर्ट पर विचार करने के बाद एंप्लॉयीज के वेतन में संशोधन का फैसला लेगी।

केंद्र सरकार के स्कूलों के शिक्षकों ने आयोग को बताई मांगें

सूत्रों ने बताया कि आयोग को दिल्ली में केंद्र सरकार के स्कूलों के शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों ने अपनी मांगों के बारे में बताया है। इनमें कुछ नई मांगें भी शामिल हैं। एक प्रमुख मांग शिक्षकों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की है। उनका कहना है कि इसे बढ़ाकर 65 साल किया जाना चाहिए। अगर सरकार यह मांग मानती है तो इससे केंद्र सरकार के स्कूलों में नए शिक्षकों की भर्ती पर असर पड़ सकता है।

शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों की पांच सबसे प्रमुख मांगे

दूसरी मांग टीचर्स के प्रमोशन से जुड़ी है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि स्कूलों में 50 फीसदी डिपार्टमेंट टीचर्स का प्रमोशन प्रिंसिपल के पोस्ट पर होना चाहिए। इसके अलावा हर विषय के प्रमुख के लिए नया प्रमोशनल पोस्ट बनाया जाना चाहिए। इसका ग्रेड पे 5,400 होना चाहिए। वाइस-प्रिंसिपल का ग्रेड पे बढ़ाकर 6,600 रुपये किया जाना चाहिए। इसके अलावा टीचर्स एसोसिएशंस ने लीव की संख्या बढ़ाए जाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि दिल्ली सरकार के शिक्षकों को भी सीजीएचएस मेडिकल सुविधा मिलनी चाहिए।

नए फिटमेंट फैक्टर पर लगी एंप्लॉयीज की नजरें  

इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी को लेकर अलग-अलग अनुमान लगाए जा रहे हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने पर सैलरी में 30-34 फीसदी तक इजाफा हो सकता है। नजरें फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हैं। आयोग की तरफ से तय फिटमेंट फैक्टर पर ही सैलरी में होने वाली बढ़ोतरी निर्भर करेगी।

1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है फिटमेंट फैक्टर

सूत्रों का कहना है कि फिटमेंट फैक्टर 1.83 से 2.46 के बीच रह सकता है। जानकारों का कहना है कि केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को रूप में भी काफी पैसे मिलेंगे। इससे बाजार में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर में मांग बढ़ सकती है।