दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार दोपहर को एक 5 मंजिला बिल्डिंग गिर गई। हादसे में अब तक कम से कम तीन लोगों की मौत की खबर है। वहीं कई छात्रों के मलबे में दबे होने की आशंका है। इस इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए PG के तौर पर किया जा रहा था। वहीं इस हादसे के बाद से राहत-बचाव काम जारी है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दुख जताया है। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। प्रधानमंत्री ने रविवार को X पर पोस्ट कर इस घटना को बेहद दुखद बताया।
पीएम ने जताया दुख
प्रधानमंत्री ने कहा कि, हादसे से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अधिकारी मौके पर राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। सोशल मीडिया X पर किए पोस्ट में पीएम ने लिखा, “दिल्ली के सत्य निकेतन में एक बिल्डिंग का गिरना दुखद है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है, उनके प्रति संवेदना। घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना। अधिकारी मौके पर काम कर रहे हैं और हादसे में प्रभावित लोगों की मदद कर रहे हैं।”
The collapse of a building at Satya Niketan, Delhi is distressing. Condolences to those who lost their loved ones. Praying for the speedy recovery of the injured. Authorities are working at the site and assisting those affected in the mishap: PM narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) September 6, 2026
अबतक 3 लोगों की हुई मौत
जानकारी के अनुसार, दिल्ली के सत्य निकेतन मार्केट में इमारत गिरने की घटना में अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है। वहीं नौ लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला गया है। हादसे के बाद राहत और बचाव टीमें लगातार मौके पर काम कर रही हैं और प्रभावित लोगों को निकालने की कोशिश जारी है। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख जताया और घायलों के जल्द ठीक होने की कामना की।
40-50 साल पुरानी है इमारत
दिल्ली पुलिस ने बताया कि, साउथ कैंपस थाने में दोपहर करीब 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली थी। जानकारी मिलते ही पुलिस, NDRF, दिल्ली फायर सर्विस और DDMA की टीमें फायर टेंडर और एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंच गईं। इसके बाद मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया। वहीं जांच के दौरान सामने आया कि सत्य निकेतन की यह इमारत करीब 40 से 50 साल पुरानी थी और इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं। बिल्डिंग का इस्तेमाल PG के रूप में किया जा रहा था और हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था।
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