8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खुशखबरी! न्यूनतम पेंशन 67% और उम्र के साथ 100% हाइक की मांग, देखें पूरी लिस्ट

8th Pay Commission Pension Revision Demands: केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ देश के करीब 65 लाख रिटायर्ड पेंशनर्स के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। आयोग इस समय विभिन्न राज्यों का दौरा करके कर्मचारी संगठनों, यूनियनों और हितधारकों से मुलाकात कर सुझाव जुटा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाले इस आयोग के कार्यक्षेत्र में 31 दिसंबर 2025 या उससे पहले रिटायर होने वाले पेंशनर्स की पेंशन की समीक्षा करना भी शामिल है। अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने पेंशन को लेकर कई बड़ी और क्रांतिकारी मांगें रखी हैं। आइए समझते हैं कि पेंशनर्स के लिए क्या-क्या मुख्य मांगें की गई हैं और इन्हें कब तक लागू किया जा सकता है।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं मांगें?

नेशनल काउंसिल फॉर जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन और ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) जैसे बड़े संगठनों ने आयोग को अपनी विस्तृत मांगें सौंपी हैं:

NC-JCM: संशोधित वेतन के साथ पेंशन का स्ट्रक्चरल अलाइनमेंट किया जाए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गनाइजेशन: पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में सुधार और इसे DA से जोड़ा जाए।

AIDEF: नए रिवाइज्ड पे-स्ट्रक्चर के आधार पर सभी पेंशनर्स के लिए एक समान पेंशन लागू की जाए।

पेंशन रिवीजन से जुड़ी 5 सबसे बड़ी मांगें

हितधारकों और कर्मचारी यूनियनों द्वारा उठाई गई प्रमुख मांगें नीचे दी गई हैं:

  1. न्यूनतम पेंशन में बंपर बढ़ोतरी: पेंशनर्स के लिए न्यूनतम पेंशन को आखिरी बार मिले वेतन या आखिरी 10 महीनों के औसत वेतन का 67% किया जाए।
  2. फिटमेंट फैक्टर और डीआर में सुधार: पेंशन कैलकुलेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फिटमेंट फैक्टर को संशोधित किया जाए और डियरनेस रिलीफ (DR) के ढांचे की समीक्षा करके इसे पेंशन लाभों में जोड़ा जाए।
  3. फैमिली पेंशन और ग्रेच्युटी: फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाया जाए, ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी हो और पेंशन कम्यूटेशन यानी पेंशन की एकमुश्त रकम के नियमों में सुधार किया जाए।
  4. पेंशन स्कीम चुनने की आजादी: रिटायर्ड कर्मचारियों को उनकी सुविधा के अनुसार पुरानी पेंशन योजना (OPS), नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) या यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) में से किसी एक को चुनने का विकल्प दिया जाए।
  5. उम्र बढ़ने के साथ बढ़ेगी पेंशन: जैसे-जैसे पेंशनभोगी की उम्र बढ़े, उसकी पेंशन में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की जाए। 90 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों के लिए इसे आखिरी वेतन का 100% करने का प्रस्ताव है।

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

संगठनों ने बढ़ती उम्र के साथ पेंशनर्स की चिकित्सा और अन्य जरूरतों को देखते हुए इस प्रकार पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है:

उम्र के हिसाब से कितनी पेंशन बढ़ाने की है मांग?

आयोग का अगला शेड्यूल और देशव्यापी बैठकें

8वें वेतन आयोग ने अप्रैल, मई और जून में कई राज्यों का दौरा किया है। जुलाई में भी बैठकों का दौर जारी है:

भुवनेश्वर (ओडिशा): 6 और 7 जुलाई को आयोग यहां हितधारकों के साथ अहम चर्चा कर रहा है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 15 जून को ही बंद हो चुके थे।

कोलकाता (पश्चिम बंगाल): इसके बाद आयोग 9 और 10 जुलाई को कोलकाता का दौरा करेगा।

मुंबई दौरा: आयोग ने मुंबई में सेंट्रल रेलवे जोन के तहत विभिन्न रेलवे विभागों का दौरा करने की इच्छा भी जताई है, ताकि कर्मचारियों की कामकाजी परिस्थितियों को करीब से समझा जा सके।

कब तक लागू होंगी 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें?

आमतौर पर वेतन आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में गठन के बाद से करीब 18 महीने का समय लगता है, जो मध्य-2027 (फरवरी या अप्रैल 2027) के आसपास पूरा होगा।

रिपोर्ट सौंपने के बाद, पिछले ट्रेंड्स बताते हैं कि केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने और इसे पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का समय लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली वेतन और पेंशन बढ़ोतरी साल 2029 या 2030 तक पूरी तरह से जमीन पर लागू हो पाएगी।

Central Government Employees DA: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को 7वें पे कमीशन के तहत डीए मिलेगा या 8वें के तहत?

Central Government Employees DA: आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में अभी वक्त लगेगा। इस बीच केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की नजरें डीए में अगले संशोधन पर लगी हैं, जिसका समय आ चुका है। लेबर ब्यूरो की तरफ से रिलीज नए इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के डेटा से पता चलता है कि इस साल मई में इंडेक्स 150.8 पर चला गया। यह अप्रैल में 149.9 था। मई तक के इनफ्लेशन के डेटा के आधार पर जुलाई से डीए में करीब 3 फीसदी वृद्धि हो सकती है।

नया पे स्केल अगले साल के अंत तक होगा लागू

आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें अगले साल के अंत तक लागू होने की उम्मीद है। हालांकि, वेतन में वृद्धि जनवरी 2026 से लागू की जा सकती है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज को 18-24 महीने का एरियर मिलेगा। जुलाई 2026 के डीए का कैलकुलेशन सातवें वेतन आयोग के तहत होने की उम्मीद है। इसका मतलब है कि इस साल जनवरी से जून पीरियड का डीए का कोई एरियर बकाया नहीं रहेगा।

नए पे स्केल लागू होने के बाद डीए का एरियर मिलेगा

एंप्लॉयी यूनियन के एक सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि जुलाई 2026 के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत डीए में होने वाली वृद्धि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद एरियर्स हो जाएंगी। इसका मतलब है कि अगर एंप्लॉयीज का सातवें वेतन आयोग के तहत जुलाई 2026 में डीए बढ़ता है और बाद में 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होती हैं तो सरकार को पहले से हो चुके डीए के पेमेंट और रिवाइज्ड पे स्केल पर आधारित डीए के बीच के फर्क का पेमेंट बतौर एरियर करना होगा।

साल में दो बार होता है डीए में संशोधन

एक साल में दो बार केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के डीए में संशोधन होता है। यह 1 जनवरी और 1 जुलाई से लागू होता है। हालांकि, इसका ऐलान कुछ महीने की देर से होता है, लेकिन एंप्लॉयी को पहले की तारीख से रिवाइज्ड डीए का पेमेंट होता है। जुलाई 2026 के डीए का ऐलान इस साल अक्तूबर में दीवाली के करीब होने की उम्मीद है। अगर डीए 3 फीसदी बढ़ता है तो एंप्लॉयीज को मिल चुके डीए और 8वें वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर संसोधित डीए के बीच का फर्क बतौर एरियर मिलेगा।

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डीए 58 से बढ़कर 60 फीसदी हो चुका है

हालांकि, जब तक सरकार लागू होने की तारीख, फिटमेंट फैक्टर, पे मैट्रिक्स और डीए ट्रांजिशन फॉर्मूला का ऐलान नहीं कर देती है, एंप्लॉयीज को इस बारे में तस्वीर साफ होने का इंतजार करना होगा। बीते 12 महीनों के एवरेज सीपीआई-आईडब्ल्यू डेटा पर डीए का कैलकुलेशन होता है। इससे पहले केंद्र सरकार ने डीए 2 फीसदी बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इससे डीए 58 फीसदी से बढ़कर 60 फीसदी हो गया।

8th Pay Commission: फैमिली यूनिट में माता-पिता को शामिल करने की मांग, इससे बढ़ेगा मिनिमम बेसिक पे

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज ने 8वें वेतन आयोग से फैमिली यूनिट के प्रस्तावित विस्तार में माता-पिता (आश्रित सास-ससुर सहित) को शामिल करने की मांग की है। इससे एंप्लॉयी की फैमिली की यूनिट्स तीन से बढ़कर पांच हो जाएगी। इससे पहले के वेतन आयोग ने जरूरत आधारित मिनिमम वेजेज के कैलकुलेशन के लिए एंप्लॉयी की फैमिली के तीन यूनिट्स तक पर विचार किया था। इनमें गवर्नमेंट एंप्लॉयी (1 यूनिट), पत्नी/पति (0.8 यूनिट) और दो बच्चे (0.6X2=1.2 यूनिट्स) शामिल थे।

एंप्लॉयीज के अलग-अलग लेवल के पे में काफी फर्क

एंप्लॉयीज एसोसिएशंस और यूनियंस का कहना है कि नए वेतन आयोग को जरूरत आधारित वेजेज के कैलकुलेशन के लिए माता-पिता सहित फैमिली यूनिट्स पर विचार करना चाहिए। अगर यह मांग मान ली जाती है तो केंद्र सरकार के हर लेवल के एंप्लॉयीज का बेसिक पे काफी बढ़ जाएगा। यूनियंस की दलील है कि एंप्लॉयीज के अलग-अलग लेवल के बीच पे के मामले में बड़ा फर्क है।

एंप्लॉयीज की फैमिली यूनिट की संख्या बढ़ाने की मांग

एंप्लॉयीज यूनियंस के मुताबिक, लेवल 1 के लिए मिनिमम बेसिक पे प्रति माह 18,000 रुपये है। लेवल 18 के एंप्लॉयीज के लिए बेसिक पे 2.5 लाख रुपये प्रति माह है। एंप्लॉयीज का प्रतिनिधित्व करने वाली नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JMC) की दलील है कि फैमिली यूनिट्स 5 मानी जानी चाहिए। इसमें एंप्लॉयी एक यूनिट, पत्नी/पति 1 यूनिट (0.8 यूनिट से बढ़ाकर 1), दो तक बच्चे (0.8 यूनिटX2 = 1.6 यूनिट), पेरेंट्स (आश्रित माता-पिता सहित) 0.8 यूनिट्स शामिल होने चाहिए।

आश्रित सास-ससुर भी फैमिली में शामिल होने चाहिए 

अगर 8वां वेतन आयोग माता-पिता को 0.8 यूनिट्स मान लेता है और पत्नी/पति का यूनिट 0.2 बढ़ा देता है तो कुल फैमिली यूनिट्स बढ़कर 5.2 हो जाएगी। एनसी-जेसीएम की मांग है कि मिनिमम पे तय करने के लिए फैमिली यूनिट्स पर विचार के दौरान सास-ससुर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। फूड एंड क्लॉदिंग के लिए 3490 Kcal के ICMR की सिफारिश मानी जानी चाहिए। हाउसिंग को मौजूदा 3 फीसदी से बढ़ाकर 7.5 फीसदी किया जाना चाहिए।

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5 यूनिट के लिए मिनिमम 69,000 पे का कैलकुलेशन

फ्यूल, इलेक्ट्रिसिटी, वाटर चार्जेज ओवरऑल कॉस्ट का 20 फीसदी होना चाहिए। स्किल डेवलपमेंट 25 फीसदी होना चाहिए। एडिशनल एक्सपेंसेज 5 फीसदी होने चाहिए। NC-JCM की ड्राफ्टिंग कमेटी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि एनसी-जेसीएम ने जिस मिनिमम पे का कैलकुलेशन किया है, वह 5 यूनिट फैमिली के लिए 69,000 रुपये है। इसके हिसाब से एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के लिए फिटमेंट फॉर्मूला 3.83 होगा।

8th Pay Commission Updates: क्या केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी 283 फीसदी बढ़ने जा रही है?

आठवां वेतन आयोग केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के वेतन वृद्धि के बारे में अपनी सिफारिशें देने के लिए देशभर में अलग-अलग पक्षों के विचार जानने की कोशिश कर रहा है। एंप्लॉयीज यूनियंस 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे है। अगर यह मांग मान ली जाती है तो मिनिमम बेसिक पे 283 फीसदी बढ़ जाएगा। यह 18,000 रुपये से बढ़कर करीब 68,940 रुपये हो जाएगा। नए पे स्केल का फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख एंप्लॉयीज और 70 लाख पेंशनर्स को मिलेगा।

एंप्लॉयीज यूनियंस ने बताई अपनी मांगें

कनफेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लॉयीज एंड वर्कर्स के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल में 8वें वेतन आयोग को एक व्यापक मेमोरेंडम सौंपा है। इसमें मिनिमम बेसिक पे 69,000 रुपये करने, 3.83 फिटमेंट फैक्टर, ओल्ड पेंशन स्कीम फिर से लागू करने और ज्यादा हाउस रेंट अलाउन्स (HRA) की मांग की गई है।

7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर माना था

फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज और पेंशनर्स के पे में संशोधन करने के लिए होता है। रिवाइज्ड बेसिक सैलरी तय करने के लिए फिटमेंट फैक्टर के आधार पर एंप्लॉयीज के मौजूदा बेसिक पे में बदलाव किया जाता है। एंप्लॉयीज यूनियंस ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। अगर यह लागू हुआ तो मिनिमम बेसिक पे करीब 69,000 रुपये हो जाएगा। 7वें वेतन आयोग ने 2.57 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया था।

इस महीने भुवनेश्वर और कोलकाता में बैठक

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यूनियंस के प्रस्ताव मान लिए जाते हैं तो रिवाइज्ड बेसिक सैलरी का कैलकुलेशन मौजूदा बेसिक पे में 3.83 से गुणा कर किया जाएगा। हालांकि, 8वां वेतन आयोग कितना फिटमेंट फैक्टर रखता है, अभी इस बारे में कहना मुश्किल है। आयोग देश के अलग-अलग शहरों में एंप्लॉयीज के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर रहा है। 22-23 जून को लखनऊ की बैठक के बाद 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 जुलाई को कोलकाता में बैठक होने वाली है।

सातवें आयोग ने मिनिमम बेसिक पे 18000 किया था

कुछ एंप्लॉयीज यूनियंस ने मिनिमम बेसिक पे बढ़ाकर 55,000 रुपये करने की मांग की है। उनका कहना है कि बीते कुछ सालों में कॉस्ट ऑफ लिविंग काफी बढ़ी है। खासकर हेल्थकेयर और एजुकेशन पर होने वाला खर्च काफी बढ़ा है। ऐसे में 18000 रुपये का मौजूदा न्यूनतम बेसिक पे पर्याप्त नहीं रह गया है। इससे पहले के वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे करीब ढ़ाई गुना कर दिया था। 7वें वेतन आयोग ने मिनिमम बेसिक पे को 7000 से बढ़ाकर 18,000 रुपये कर दिया था। यह 10 साल पहले की बात है।

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अगले साल के मध्य में आयोग सौंप सकता है रिपोर्ट

अनुमान है कि 8वां वेतन आयोग अगले साल के मध्य में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगा। इसके बाद केंद्र सरकार इस रिपोर्ट पर व्यापक विचार करेगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला लेने से पहले केंद्र सरकार अपनी वित्तीय स्थिति का भी ध्यान रखेगी। सरकार ने पिछले साल जीएसटी के रेट्स में कमी किए हैं। इस साल अमेरिका-ईरान में लड़ाई की वजह से क्रूड में उछाल आया था। इससे सरकार का इंपोर्ट बिल काफी बढ़ गया था।

8th Pay Commission extends deadline: 8वें वेतन आयोग ने अब 31 जुलाई की आखिरी डेडलाइन फिक्स की, सैलरी और भत्तों पर आया लेटेस्ट अपडेट!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन को लेकर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वेतन आयोग ने विभिन्न श्रेणियों के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे पर केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सिफारिशें और जरूरी डेटा लेने की आखिरी तारीख को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। अब इसके लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है।

15 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई आखिरी तारीख

इससे पहले आठवें वेतन आयोग ने अपने आधिकारिक ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी। वेतन आयोग द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के मुताबिक चूंकि कई मंत्रालय, विभाग और केंद्र शासित प्रदेश तय समय सीमा के भीतर आवश्यक डेटा जमा करने का काम पूरा नहीं कर पाए थे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से डेटा जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दिया जाए।

सिर्फ ऑनलाइन स्वीकार होंगे मेमोरेंडम

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को अपने मेमोरेंडम विशेष रूप से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा करने होंगे। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। फिजिकल सबमिशन मान्य नहीं होंगे। ईमेल के जरिए भेजे गए सुझावों पर भी आयोग विचार नहीं कर सकता है।

अगले 10 वर्षों के लिए तैयार की जा रही हैं सिफारिशें

समय सीमा बढ़ाए जाने पर ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का भी रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब पूरी स्पीड से काम चल रहा होता है तो आयोग के लिए भी समय सीमा को बार-बार आगे बढ़ाना आसान फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग को देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और दूसरे हितधारकों की असल जरूरतों का विश्लेषण करने के लिए मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त निकायों से संबंधित डेटा की जरूरत होती है। इसी डेटा के आधार पर आयोग अगले 10 वर्षों के लिए निष्पक्ष, व्यावहारिक और दूरदर्शी सिफारिशें पेश की जा सकेंगी।

लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता का दौरा करेगा वेतन आयोग

इस बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चल रहे परामर्श दौरों के क्रम में आठवें वेतन आयोग ने अपने अगले दौर के दौरों का भी ऐलान कर दिया है। आयोग लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता के दौरे करेगा। भुवनेश्वपर में बैठक 6-7 जुलाई और कोलकाता में 9-10 जुलाई को तय की गई है।

आयोग से मिलने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए केंद्रीय सरकारी संगठनों, संस्थानों, कर्मचारी संघों और यूनियनों को आयोग की वेबसाइट के माध्यम से एक ऑनलाइन अनुरोध जमा करना होगा।

इन राज्यों में पहले ही हो चुका है परामर्श

आठवां वेतन आयोग लगातार अलग अलग क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। हाल ही में आयोग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद (तेलंगाना) और महाराष्ट्र में हितधारकों के साथ चर्चा की है। इससे पहले, आयोग ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड के कर्मचारी संघों के साथ अपनी पहली बातचीत की थी।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जाएंगी ये 5 बड़ी शर्तें, नए पे स्केल के इंतजार में बैठे कर्मचारियों के लिए आया अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और सेवा से जुड़े सुधारों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार का आठवां केंद्रीय वेतन आयोग देशव्यापी दौरों और हितधारकों से बातचीत के अपने अजेंडे के तहत 6 और 7 जुलाई को ओडिशा का दौरा करने जा रहा है। वित्त मंत्रालय की एक ऑफिशियल नोटिस के मुताबिक आयोग ने उन सभी केंद्र सरकार के संगठनों, संस्थानों, एसोसिएशनों और यूनियनों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के लिए आमंत्रित किया है जो भुवनेश्वर दौरे के दौरान इस पैनल से बातचीत करने में रुचि रखते हैं। इस बीच कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर् के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग से मुलाकात की और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 69000 रुपये सैलरी की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित?

यूनियन ने नए पे स्केल के तहत 3.83 फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की जोरदार मांग की है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नया वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों के मूल वेतन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। यूनियन के इस प्रस्ताव के तहत अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर हो जाता है तो वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन 18000 से बढ़कर सीधे लगभग 69000 रुपये हो जाएगा।

वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 बड़ी शर्तें

कर्मचारी संगठन ने वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण शर्तें और मांगें रखी हैं-

1- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली

प्रतिनिधित्व कर रहे कर्मचारी संगठन ने वर्तमान व्यवस्था को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने की बड़ी मांग सामने रखी है।

2- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भारी बढ़ोतरी

शहरों की कैटिगरी के आधार पर हाउस रेंट अलाउंस की दरों को बढ़ाकर 40%, 35% और 30% करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हाउस बिल्डिंग एडवांस और कंप्यूटर लोन जैसे कल्याणकारी एडवांस को भी दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।

3- वेतन विसंगतियों को दूर करना और फाइनेंशियल अपग्रेडेशन

वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पे लेवल्स का रेशनलाइजेशन किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों के पूरे सर्विस पीरियडके दौरान पांच फाइनेंशियल अपग्रेडेशन दिए जाएं।

4- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से CGHS और ECHS के तहत व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज के विस्तार की मांग रखी गई है।

5- संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नीतियां

सामाजिक सुरक्षा को और व्यापक बनाने के साथ-साथ संविदात्मक और आकस्मिक श्रमिकों के लिए नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की मांग की गई है।

1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर

8वां वेतन आयोग वर्तमान में देश भर के हितधारकों से लगातार फीडबैक और सुझाव जुटा रहा है। इस पैनल द्वारा दी जाने वाली सिफारिशों का सीधा असर देश के लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के भविष्य पर पड़ेगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के इस न्यूनतम फॉर्मूले से भी 18000 की सैलरी सीधे होगी 33000 रुपये! ये है पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Calculate Minimum Salary Hike: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी हर महीने आने वाली इनहैंड सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। इस पूरी कैलकुलेशन को तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चाबी फिटमेंट फैक्टर है।

केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत सावधानीपूर्ण और रूढ़िवादी रुख अपना सकती है। अगर सरकार सबसे न्यूनतम पैमाना यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी अपनाती है तो भी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे लगभग 33000 रुपये हो जाएगी। आइए समझते हैं इस पूरे गणित और कैलकुलेशन को।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है?

फिटमेंट फैक्टर वह गणितीय मल्टीप्लायर या गुणांक होता है जिसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे (7th CPC) को नए संशोधित बेसिक पे (8th CPC) में बदलने के लिए किया जाता है। सरकारी यूनियनों और कर्मचारियों की नजरें इसी पर टिकी हैं क्योंकि यही आपकी बेसिक सैलरी तय करता है।

इसे निकालने का सीधा और आसान फॉर्मूला ये है: रिवाइज्ड बेसिक पे= मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

ध्यान देने वाली बात ये है कि फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल सीधे तौर पर हाउस रेंट अलाउंस या अन्य भत्तों पर नहीं होता लेकिन यह आपकी बेसिक सैलरी को बढ़ा देता है। चूंकि महंगाई भत्ता, HRA और कई अन्य भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर ही तय होते हैं इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही पूरा सैलरी पैकेज खुद-ब-खुद काफी बड़ा हो जाता है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इस वजह से कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये हो गई थी।

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (1.83) पर सैलरी का पूरा कैलकुलेशन

अगर सरकार सबसे कम यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर तय करती है तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में इस तरह बढ़ोतरी देखने को मिलेगी-

लेवल-1 कर्मचारी (न्यूनतम वेतन श्रेणी): 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18000 रुपये है। 1.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर करीब 32940 रुपये तक पहुंच जाएगा।

लेवल-2 कर्मचारी: इन कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 19900 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग 36417 रुपये हो जाएगा।

लेवल- 6 कर्मचारी: इस पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मूल वेतन 35,400 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग यह 64,782 रुपये हो जाएगा।

लेवल-10 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 56100 रुपये है। 1.83 के गुणांक से संशोधित होने के बाद 1.02 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।

इस पूरे कैलकुलेशन को डायग्राम के जरिए समझें

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वहीं 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट फैक्टर को 2 गुना, 2.5 गुना या 3 गुना तय किया जाता है, तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर इसका सीधा असर इस प्रकार दिखेगा:

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पेंशनभोगियों पर भी होगा बड़ा असर

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में पेंशनभोगियों की भी बेसिक पेंशन इसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत जो न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये तय है, वह इस नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद बढ़कर लगभग 16470 रुपये हो जाएगी।

यह केवल एक न्यूनतम अनुमान है, बढ़ सकती है सीमा

एक्सपर्ट्स और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि 1.83 का फिटमेंट फैक्टर केवल एक सबसे रूढ़िवादी या न्यूनतम अनुमान है। महंगाई और जीवन स्तर में सुधार को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर अधिकत रह सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने इसे 3.83 तक करने की मांग रखी है। 8वें वेतन आयोग के लिए आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर पर अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में आयोग सभी स्टेकहोल्डर्स और कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार-विमर्श, मूल्यांकन और कंसल्टेशन मीटिंग्स (जैसे लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता) लगातार कर रहा है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा जिसके बाद केंद्रीय कैबिनेट उस पर अपनी मुहर लगाएगी।

सरकार का आखिरी फैसला पूरी तरह से देश की राजकोषीय क्षमता पर निर्भर करेगा क्योंकि सरकार को यह भी देखना होगा कि सैलरी और पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद वित्तीय देनदारियों का देश के बजट पर क्या असर पड़ेगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली वास्तविक वेतन वृद्धि पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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8th Pay Commission: केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग पर ये है 5 बड़े अपडेट, जुलाई में होने वाली हैं कई अहम बैठकें

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर आ रही है। सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। जुलाई के महीने में आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर कई बड़ी बैठकों और दौरों का शेड्यूल जारी किया गया है।

18 महीने के कुल कार्यकाल में से करीब 8 महीने का समय बीत चुका है और अब सिर्फ 10 महीने बचे हैं, जिसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। इस बीच सैलरी हाइक, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों को लेकर क्या चल रहा है, इसे 5 बड़े पॉइंट्स में समझें:

1. जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता में होंगी अहम बैठकें

आयोग इस समय देश भर में घूम-घूमकर अलग-अलग राज्यों और विभागों से सुझाव और सबूत जुटा रहा है। इसी कड़ी में जुलाई 2026 में दो बड़े दौरे तय किए गए हैं। आयोग 6-7 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में और 9-10 जुलाई 2026 को कोलकाता में कर्मचारी यूनियनों, मंत्रालयों और स्टेकहोल्डर्स के साथ सीधे मुलाकात करेगा। इन बैठकों से भविष्य का सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में मदद मिलेगी।

2. कौन तय कर रहा है आपकी नई सैलरी?

इस हाई-लेवल कमिटी की कमान चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है। उनके साथ इस पैनल में प्रोफेसर पुलक घोष (पार्ट-टाइम मेंबर) और श्री पंकज जैन (मेंबर-सेक्रेटरी) शामिल हैं, जो कर्मचारियों और पेंशनर्स से मिले ज्ञापनों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। बता दें कि सुझाव भेजने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 किया गया था, जो अब बंद हो चुकी है।

3. फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस बरकरार

कर्मचारियों की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि इस बार ‘फिटमेंट फैक्टर’ क्या होगा। आपको बता दें कि छठे वेतन आयोग में यह 1.86 था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 किया गया था। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मूला अभी तक फाइनल नहीं हुआ है, इस पर अभी भी चर्चा चल रही है।

4. पेंशनर्स को भी मिलेगा बड़ा तोहफा

यह आयोग सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों के लिए नहीं है। इसके तहत पेंशनर्स की पेंशन में संशोधन और सुधार को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। रिटायर हो चुके कर्मचारियों को महंगाई के इस दौर में कितनी राहत मिलनी चाहिए और उनका नया बेसिक स्ट्रक्चर क्या होगा, यह भी आयोग की अंतिम सिफारिशों में शामिल रहेगा।

5. कब लागू होगी नई सैलरी और कब आएगी रिपोर्ट?

कैबिनेट नोट के अनुसार, आयोग का कार्यकाल मई 2027 के आसपास समाप्त होगा, यानी साल 2027 के मध्य में आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। जहां तक इसके लागू होने की बात है, तो चर्चाओं के अनुसार नए पे-साइकिल के लिए 1 जनवरी 2026 को रेफरेंस डेट माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक रूप से इसे कब लागू किया जाएगा और पिछला एरियर मिलेगा या नहीं, इस पर अंतिम मुहर केंद्रीय कैबिनेट ही लगाएगी।

8th Pay Commission: वेतन आयोग का वो सीक्रेट फॉर्मूला, जो पूरी तरह बदल देगा कर्मचारियों का पे-मैट्रिक्स; जानिए क्या है ये

8th Pay Commission Family Unit Formula: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन और सैलरी रिवीजन को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। इस बार फिटमेंट फैक्टर के अलावा एक और चीज है जो कर्मचारियों की सैलरी तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है, और वह है ‘फैमिली यूनिट’ का फॉर्मूला।

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सैलरी सिर्फ महंगाई के हिसाब से बढ़ती है, लेकिन हकीकत में न्यूनतम मूल वेतन तय करने के पीछे वेतन आयोग का एक खास गणित काम करता है। आइए समझते हैं कि यह ‘फैमिली यूनिट’ क्या है और इसके बदलने से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में कितना बड़ा उछाल आ सकता है।

क्या होता है ‘फैमिली यूनिट’ का नियम और इसका महत्व?

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, ‘फैमिली यूनिट’ वह मानक या मानकर चली गई धारणा है जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग किसी सरकारी कर्मचारी के घर को चलाने की न्यूनतम लागत का अनुमान लगाने के लिए करता है।

7वें वेतन आयोग का ने फैमिली यूनिट को 3.0 माना था। इसका मतलब था कि इस यूनिट में कर्मचारी, उसकी पत्नी और दो बच्चों के जरूरी खर्चों को ही शामिल किया गया था। इस फॉर्मूले में कर्मचारी पर निर्भर बुजुर्ग माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के खर्चों को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया था।

बदलते समय के साथ क्यों उठ रही है इसे बढ़ाने की मांग?

पिछले कुछ वर्षों में पारिवारिक ढांचा और जरूरतें काफी बदल चुकी हैं। आज के समय में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों के कंधों पर अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और उनके इलाज का बड़ा खर्च होता है। बढ़ती महंगाई के बीच हेल्थकेयर, रोजमर्रा के सामान और बच्चों की पढ़ाई की लागत काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि कई कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से इस ‘फैमिली यूनिट’ के दायरे को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

फैमिली यूनिट बढ़ने से कैसे बढ़ेगी बेसिक सैलरी?

अगर 8वां वेतन आयोग फैमिली यूनिट के आंकड़े को 3.0 से ऊपर संशोधित करता है, तो जीवन यापन की न्यूनतम लागत का अनुमान भी अपने आप बढ़ जाएगा। उदाहरण से समझिए:

अगर पिछले आयोग (7th PC) में माता-पिता को शामिल करके फैमिली यूनिट को 3.0 के बजाय 4.6 माना गया होता, तो कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी ₹18000 के बजाय करीब ₹27600 तय होती।

8वें वेतन आयोग में असर: चूंकि पूरा पे-मैट्रिक्स इसी न्यूनतम बेसिक सैलरी के इर्द-गिर्द तैयार होता है, इसलिए अगर इस बार बेंचमार्क बढ़ा, तो इसका कैस्केडिंग इफेक्ट दिखेगा। यानी निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के सभी पे-लेवल के कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में भारी बढ़ोतरी होगी।

यह पैरामीटर कोई सामान्य गणितीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की जेब पर सीधा असर डालने वाली एक महत्वपूर्ण चाबी है। 8वां वेतन आयोग अपनी बैठकों और जुलाई 2026 में होने वाले विचार-विमर्श में इस फॉर्मूले पर गंभीर चर्चा कर सकता है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! वेतन आयोग की जुलाई बैठक से पहले सामने आईं ये 5 बड़ी मांगें

8th Pay Commission Latest Updates: देश के करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था NC-JCM ने इस बार केवल पैसों की डिमांड नहीं की, बल्कि सर्विस कंडीशन में मौजूद उन 5 बड़ी विसंगतियों को टारगेट किया है जो लंबे समय से चुभ रही थीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन मांगों को कैबिनेट सचिव ने खुद आगे बढ़ाया है, जिससे यह साफ है कि जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता की बैठकों में केवल चर्चा नहीं, बल्कि आर-पार का फैसला होने की उम्मीद है।

इन मांगों में पेंशन रिवीजन, सैलरी में विसंगतियां और मैटरनिटी बेनिफिट जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारियों की ये 5 मांगें क्या हैं और जुलाई में होने वाली बैठकें क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 मुख्य मांगें

NC-JCM की बैठक के दौरान स्टाफ साइड की तरफ से कई लंबे समय से लटके मुद्दों को उठाया गया, जिन्हें अब 8वें वेतन आयोग के पास भेजने या संबंधित विभागों द्वारा समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। ये 5 बड़ी मांगें ये हैं:

हर 5 साल में पेंशन का रिवीजन: पेंशनर्स की मांग है कि हर पांच साल में उनकी पेंशन की समीक्षा की जाए और इसके साथ ही मिलने वाले ‘फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस’ को बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह किया जाए।

फैमिली पेंशन में कटौती न हो: कर्मचारियों की मांग है कि किसी कर्मचारी या पेंशनर की मृत्यु के बाद उनकी फैमिली पेंशन को घटाकर मृतक की नोशनल पे का 30 फीसदी न किया जाए, बल्कि इसमें बढ़ोतरी की जाए।

फायरफाइटर्स के वेतन में समानता: केंद्रीय विभागों में काम करने वाले फायरफाइटर्स के पे-स्केल को ‘दिल्ली फायर सर्विस’ के बराबर लाकर समानता दी जाए।

MACP के बाद पे-फिक्सेशन का लाभ: जिन कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ मिलने के बाद प्रमोशन मिलता है, उन्हें FR-22(1)(a)(1) के तहत पे-फिक्सेशन का पूरा फायदा दिया जाए।

महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी बेनिफिट: महिला केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ‘मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961’ के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और अन्य मुद्दों पर भी दबाव

इन 5 मांगों के अलावा, कर्मचारी संगठनों ने सरकार और 8वें वेतन आयोग से कुछ अन्य पुरानी मांगों पर भी दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। इसमें मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन में सुधार, कम्यूटेड पेंशन को समय से पहले बहाल करना और सबसे महत्वपूर्ण ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को वापस लागू करना शामिल है।

जुलाई में कहाँ और कब होंगी अहम बैठकें?

8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (https://8cpc.gov.in/) के अनुसार, आयोग अगले महीने विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा करने जा रहा है। यह बैठकें दो बड़े शहरों में आयोजित होंगी:

भुवनेश्वर: 6 और 7 जुलाई को चर्चा होगी।

कोलकाता: 9 और 10 जुलाई को बैठकें की जाएंगी।

अगर इन बैठकों में अन्य यूनियनों ने भी इन मांगों का पुरजोर समर्थन किया, तो इन पर एक आम सहमति बन सकती है। हालांकि, आयोग ने अभी तक सैलरी में बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

फाइनल रिपोर्ट आने में कितना समय बाकी है?

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग के लिए जुलाई की ये बैठकें एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी, क्योंकि आयोग के गठन को लगभग 8 महीने पूरे होने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, आयोग के पास सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए अब करीब 10 महीने का समय और बचा हुआ है। ऐसे में जुलाई के इस दौर की बातचीत से यह तय होगा कि आने वाले समय में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों का ढांचा कैसा रहने वाला है।