F&O ट्रेडिंग में जल्द बड़ा बदलाव! लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स को लेकर SEBI का ये है नया प्लान

SEBI Long Term Derivatives Market: जल्द ही फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस मार्केट में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता हैं। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय के उस प्रस्ताव को मार्केट एक्सपर्ट्स और पार्टिसिपेंट्स का बड़ा समर्थन मिल रहा है, जिसमें उन्होंने बाजार में लंबी अवधि के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को बढ़ावा देने की बात कही थी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस कदम से भारतीय कैपिटल मार्केट मजबूत होगा।

हालांकि, बाजार के दिग्गजों का यह भी कहना है कि ये लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स तभी कामयाब हो सकते हैं, जब लिक्विडिटी, मार्केट मेकिंग, मार्जिन नियमों और संस्थागत निवेशकों की भागीदारी जैसी ढांचागत कमियों को दूर किया जाए। आइए समझते हैं कि लॉन्ग-टर्म F&O को लेकर SEBI का क्या है पूरा प्लान और इसके सामने क्या चुनौतियां हैं।

क्यों है लॉन्ग-टर्म F&O पर सेबी का फोकस?

19 जून 2026 को हुई सेबी की बोर्ड बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि शॉर्ट-टर्म के अलावा लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स भी मार्केट में मिलने चाहिए। सेबी इस समय रिटेल निवेशकों के नुकसान को लेकर एक बड़ा स्टडी डेटा जुलाई 2026 में जारी करने वाला है, जिसके बाद डेरिवेटिव मार्केट की समीक्षा की जा रही है। सेबी का मानना है कि लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स आने से बाजार में केवल सट्टेबाजी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म हेजिंग यानी जोखिम प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा।

लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन कम करना क्यों जरूरी?

हेज फंड मैनेजर मयंक बंसल के मुताबिक, भारत का मौजूदा मार्जिन फ्रेमवर्क लॉन्ग-टर्म डेरिवेटिव्स को आकर्षक नहीं बनाता। इस समय लंबी अवधि के इंडेक्स डेरिवेटिव्स पर मार्जिन काफी ज्यादा है:

रेगुलर इंडेक्स डेरिवेटिव्स मार्जिन: 9.3%

लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस के लिए स्पैन फ्लोर: 17.7% (जो कि काफी ज्यादा है)

एक्सपोजर मार्जिन (ELM): 5%

सेबी के पूर्व होल-टाइम मेंबर अनंत नारायण जी ने भी कहा कि लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स के लिए मार्जिन नियमों को तर्कसंगत बनाने की गुंजाइश है, लेकिन इसके लिए एक विस्तृत स्टडी और रिव्यू की जरूरत है।

मार्केट मेकर्स और STT पर क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

क्रॉस सीज कैपिटल के एमडी राजेश बहेती ने कहा कि इन प्रोडक्ट्स की सफलता के लिए ‘डेजिग्नेटेड मार्केट मेकर्स’ की जरूरत होगी, जो दोनों तरफ यानी बाय और सेल के कोट्स उपलब्ध करा सकें। इसके लिए उन्हें मिलने वाला इंसेंटिव ट्रांजैक्शन कॉस्ट और STT से ज्यादा होना चाहिए।

एनएमआई के नेशनल प्रेसिडेंट कमलेश श्रॉफ का मानना है कि शुरुआत में इन्हें इंडेक्स डेरिवेटिव्स जैसे- निफ्टी, सेंसेक्स में लागू किया जाना चाहिए क्योंकि इनमें उतार-चढ़ाव कम होता है और मैनिपुलेशन का रिस्क नहीं रहता। बाद में इसे चुनिंदा लिक्विड स्टॉक्स में बढ़ाया जा सकता है।

क्या वीकली एक्सपायरी जैसे वॉल्यूम की बराबरी कर पाएगा लॉन्ग-टर्म?

एक्सपर्ट्स का साफ मानना है कि मार्जिन कम होने के बाद भी लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स कभी भी वीकली या मंथली कॉन्ट्रैक्ट्स के वॉल्यूम की बराबरी नहीं कर पाएंगे। ऑप्शंस ग्रीक्स के काम करने के तरीके के कारण लॉन्ग-टर्म ऑप्शंस में कम अवधि के मुकाबले प्रति यूनिट कैपिटल पर रिटर्न काफी कम मिलता है। अमेरिका, यूरोप और दक्षिण कोरिया जैसे वैश्विक बाजारों में भी वीकली और शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट्स का वॉल्यूम ही सबसे ज्यादा रहता है, जबकि लॉन्ग-टर्म का इस्तेमाल पेंशन फंड्स और एसेट मैनेजर्स अपनी होल्डिंग को हेज करने के लिए करते हैं।

BSE के एमडी और सीईओ सुंदररमन आर ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि बीएसई पहले से ही ‘BSE Focused IT Index’ और ‘Bankex’ जैसे लॉन्ग-टर्म सुइट्स पर काम कर रहा है। उन्होंने भी माना कि एसटीटी और मार्जिन फ्रेमवर्क की समीक्षा से इसे तेजी से अपनाने में मदद मिलेगी।

₹69 का प्राइस बैंड और ₹9 का तगड़ा इशारा! आज से खुले इस आईपीओ में पैसा लगाने से पहले जान लें जरूरी बातें

Twinkle Papers IPO: एसएमई सेगमेंट में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए आज यानी 29 जून से एक और नया मौका खुल गया है। ट्विंकल पेपर्स लिमिटेड का आईपीओ आज से सब्सक्रिप्शन के लिए ओपन हो चुका है। यह आईपीओ निवेश के लिए 1 जुलाई तक खुला रहेगा।

कंपनी इस पब्लिक इश्यू के जरिए बाजार से ₹28 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। अगर आप भी इस आईपीओ में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो दांव लगाने से पहले इसके प्राइस बैंड, ग्रे मार्केट प्रीमियम और सभी जरूरी डिटेल्स को विस्तार से जान लेना जरूरी है।

आईपीओ की तारीख, प्राइस बैंड और साइज 

ट्विंकल पेपर्स लिमिटेड का यह पब्लिक इश्यू आज यानी 29 जून 2026 से निवेशकों के लिए खुल चुका है और इसमें बुधवार, 1 जुलाई 2026 तक दांव लगाया जा सकता है। कंपनी ने इस आईपीओ के लिए ₹64 से ₹69 प्रति इक्विटी शेयर का प्राइस बैंड तय किया है। ट्विंकल पेपर्स इस बुक बिल्ड इश्यू के जरिए बाजार से कुल ₹28 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। कंपनी इस आईपीओ में पूरी तरह से फ्रेश शेयरों की पेशकश कर रही है।

लॉट साइज, अलॉटमेंट और लिस्टिंग की पूरी टाइमलाइन

चूंकि यह एक एसएमई आईपीओ है, इसलिए इसका लॉट साइज काफी बड़ा रखा गया है जिसके तहत निवेशकों को कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना होगा और एक लॉट में 2000 शेयर शामिल हैं। आईपीओ बंद होने के बाद सफल निवेशकों को शेयरों का अलॉटमेंट 2 जुलाई 2026 को होने की उम्मीद है और कंपनी के शेयरों की बीएसई एसएमई एक्सचेंज पर लिस्टिंग 6 जुलाई 2026 को हो सकती है। इस पूरे इश्यू के लिए ‘अलंकित असाइनमेंट्स लिमिटेड’ को आधिकारिक रजिस्ट्रार और ‘नोवस कैपिटल एडवाइजर्स’ को लीड मैनेजर नियुक्त किया गया है।

ग्रे मार्केट में क्या है हलचल?

आईपीओ मार्केट के विश्लेषकों के मुताबिक, ट्विंकल पेपर्स के शेयरों को लेकर ग्रे मार्केट में हलचल देखी जा रही है। आज यह शेयर ग्रे मार्केट में ₹9 के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। यानी इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹9 चल रहा है। अगर यही ट्रेंड बरकरार रहता है, तो ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से इसकी लिस्टिंग शानदार बढ़त के साथ हो सकती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! वेतन आयोग की जुलाई बैठक से पहले सामने आईं ये 5 बड़ी मांगें

8th Pay Commission Latest Updates: देश के करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था NC-JCM ने इस बार केवल पैसों की डिमांड नहीं की, बल्कि सर्विस कंडीशन में मौजूद उन 5 बड़ी विसंगतियों को टारगेट किया है जो लंबे समय से चुभ रही थीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन मांगों को कैबिनेट सचिव ने खुद आगे बढ़ाया है, जिससे यह साफ है कि जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता की बैठकों में केवल चर्चा नहीं, बल्कि आर-पार का फैसला होने की उम्मीद है।

इन मांगों में पेंशन रिवीजन, सैलरी में विसंगतियां और मैटरनिटी बेनिफिट जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारियों की ये 5 मांगें क्या हैं और जुलाई में होने वाली बैठकें क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 मुख्य मांगें

NC-JCM की बैठक के दौरान स्टाफ साइड की तरफ से कई लंबे समय से लटके मुद्दों को उठाया गया, जिन्हें अब 8वें वेतन आयोग के पास भेजने या संबंधित विभागों द्वारा समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। ये 5 बड़ी मांगें ये हैं:

हर 5 साल में पेंशन का रिवीजन: पेंशनर्स की मांग है कि हर पांच साल में उनकी पेंशन की समीक्षा की जाए और इसके साथ ही मिलने वाले ‘फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस’ को बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह किया जाए।

फैमिली पेंशन में कटौती न हो: कर्मचारियों की मांग है कि किसी कर्मचारी या पेंशनर की मृत्यु के बाद उनकी फैमिली पेंशन को घटाकर मृतक की नोशनल पे का 30 फीसदी न किया जाए, बल्कि इसमें बढ़ोतरी की जाए।

फायरफाइटर्स के वेतन में समानता: केंद्रीय विभागों में काम करने वाले फायरफाइटर्स के पे-स्केल को ‘दिल्ली फायर सर्विस’ के बराबर लाकर समानता दी जाए।

MACP के बाद पे-फिक्सेशन का लाभ: जिन कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ मिलने के बाद प्रमोशन मिलता है, उन्हें FR-22(1)(a)(1) के तहत पे-फिक्सेशन का पूरा फायदा दिया जाए।

महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी बेनिफिट: महिला केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ‘मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961’ के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और अन्य मुद्दों पर भी दबाव

इन 5 मांगों के अलावा, कर्मचारी संगठनों ने सरकार और 8वें वेतन आयोग से कुछ अन्य पुरानी मांगों पर भी दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। इसमें मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन में सुधार, कम्यूटेड पेंशन को समय से पहले बहाल करना और सबसे महत्वपूर्ण ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को वापस लागू करना शामिल है।

जुलाई में कहाँ और कब होंगी अहम बैठकें?

8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (https://8cpc.gov.in/) के अनुसार, आयोग अगले महीने विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा करने जा रहा है। यह बैठकें दो बड़े शहरों में आयोजित होंगी:

भुवनेश्वर: 6 और 7 जुलाई को चर्चा होगी।

कोलकाता: 9 और 10 जुलाई को बैठकें की जाएंगी।

अगर इन बैठकों में अन्य यूनियनों ने भी इन मांगों का पुरजोर समर्थन किया, तो इन पर एक आम सहमति बन सकती है। हालांकि, आयोग ने अभी तक सैलरी में बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

फाइनल रिपोर्ट आने में कितना समय बाकी है?

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग के लिए जुलाई की ये बैठकें एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी, क्योंकि आयोग के गठन को लगभग 8 महीने पूरे होने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, आयोग के पास सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए अब करीब 10 महीने का समय और बचा हुआ है। ऐसे में जुलाई के इस दौर की बातचीत से यह तय होगा कि आने वाले समय में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों का ढांचा कैसा रहने वाला है।

जल्द भारत आने वाले है ट्रंप! अमेरिकी विदेश मंत्री का बड़ा ऐलान, फाइनल स्टेज में है ‘ट्रेड डील’

India-US Relations: भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर एक बड़ा पॉजिटिव अपडेट आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिए हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत का दौरा कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर भी बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है।

समाचार एजेंसी ‘आईएएनएस’ से बातचीत के दौरान मार्को रुबियो ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते बेहद शानदार चल रहे हैं। ट्रंप के संभावित भारत दौरे पर उन्होंने कहा, ‘हम इसी दिशा में काम कर रहे हैं कि अगले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति ट्रंप भारत आएं। भारत और अमेरिका बेहद करीबी पार्टनर और सहयोगी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच के रिश्ते इससे बेहतर नहीं हो सकते, जो कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं।’

राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप का पहला भारत दौरा!

अगर यह दौरा तय समय पर होता है, तो व्हाइट हाउस में दूसरी बार सत्ता संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की यह पहली भारत यात्रा होगी। इससे पहले ट्रंप फरवरी 2020 में भारत आए थे। हाल ही में पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच फ्रांस के एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के इतर एक द्विपक्षीय बैठक हुई थी, जो पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की मुलाकात थी।

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने 12-13 फरवरी 2025 को राष्ट्रपति ट्रंप के निमंत्रण पर अमेरिका का दौरा किया था। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन के बाद पीएम मोदी की वह पहली अमेरिकी यात्रा थी, जिसमें व्यापार, रक्षा, तकनीक, ऊर्जा और रणनीतिक सहयोग पर व्यापक चर्चा हुई थी।

ट्रेड डील पर कहां फंसा है पेंच?

दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अंतिम दौर में है, लेकिन भारतीय वार्ताकार कुछ शर्तों पर पूरी स्पष्टता चाहते हैं:

धारा 301 टैरिफ: भारत ने अमेरिकी व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 के तहत लगाए जाने वाले टैरिफ पर अधिक स्पष्टता मांगी है। भारतीय पक्ष का तर्क है कि डील फाइनल होने से पहले भारत को अन्य व्यापारिक साझेदारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलनी चाहिए।

अमेरिकी ट्रेजरी का रुख: अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया है कि ये टैरिफ धारा 301 के तहत पिछले स्तरों पर वापस आ जाएंगे।

हाल के महीनों में क्यों बढ़ा था तनाव?

पिछले कुछ महीनों में दोनों देशों के व्यापारिक और कूटनीतिक रिश्तों में कुछ खटास देखी गई थी, जिसे सुधारने के लिए विदेश मंत्री मार्को रुबियो क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक के सिलसिले में भारत आए हुए हैं:

रूसी तेल और भारी टैरिफ: राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में भारतीय आयातों पर कुल 50% का भारी टैरिफ लगा दिया था। इसमें 25% का पारस्परिक टैरिफ और भारत द्वारा रूस से लगातार तेल खरीदने के कारण लगाया गया 25% का अतिरिक्त जुर्माना शामिल था, जो 27 अगस्त 2025 से लागू हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला: हालांकि, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के पारस्परिक टैरिफ को खारिज किए जाने के बाद, वर्तमान में भारतीय निर्यातों पर केवल 10% का बेसलाइन टैरिफ लग रहा है, जबकि वाशिंगटन अपनी व्यापार नीतियों की समीक्षा कर रहा है।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर भी हैं वैचारिक मतभेद

व्यापार के अलावा दोनों देशों के बीच एक अन्य कूटनीतिक मतभेद भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीजफायर को लेकर भी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने बार-बार दावा किया है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उन्होंने ही भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम कराया था।

हालांकि, भारत ने ट्रंप के इस दावे को हमेशा सिरे से खारिज किया है। भारत का स्पष्ट स्टैंड है कि यह सीजफायर दोनों देशों के बीच बिना किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के, सीधे डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) स्तर की बातचीत के जरिए हुआ था।

8th Pay Commission: 1 करोड़ कर्मचारियों की चांदी! बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी की तैयारी, फिटमेंट फैक्टर और DA पर आए ये 10 बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Latest News: देश के 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वां वेतन आयोग अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है और इसके तहत कर्मचारियों की किस्मत बदलने वाली है। ऐतिहासिक रूप से हर 10 साल में बनने वाला यह आयोग इस बार कर्मचारियों की झोली में बंपर सैलरी हाइक करने की तैयारी में है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह हाई-प्रोफाइल पैनल इस समय देशव्यापी दौरों पर है और 30 जून 2026 तक ऑनलाइन डेटा जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18000 से सीधे ₹69000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.80 तक बढ़ाने की डिमांड रखी हुई है।

रेलवे, डिफेंस से लेकर तमाम सरकारी विभागों के 1 करोड़ से अधिक परिवारों की जेब पर सीधा असर डालने वाले इस महा-बदलाव को लेकर 10 सबसे बड़े अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर नौकरीपेशा और रिटायर्ड कर्मचारी के लिए जानना बेहद जरूरी है।

8वें वेतन आयोग के टॉप 10 सबसे बड़े अपडेट्स

1. ₹69000 तक न्यूनतम बेसिक पे की मांग

सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर बड़े कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें सौंप दी हैं। नेशनल काउंसिल (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर ₹69000 करने की मांग की है। वहीं, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन ने इसे ₹65000 करने की वकालत की है।

2. रेलवे यूनियनों की अलग मांग

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आधुनिक आर्थिक कारकों के आधार पर न्यूनतम वेतन ₹52600 करने की मांग की है। इसके अलावा, रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) का कहना है कि न्यूनतम वेतन की गणना 1 जनवरी 2026 के प्राइस इंडेक्स के आधार पर होनी चाहिए।

3. फिटमेंट फैक्टर पर बड़ा अपडेट

कर्मचारियों की सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर की सबसे बड़ी भूमिका होती है। रेलवे यूनियन (IRTSA) ने मांग की है कि सेफ्टी कैटेगरी के पदों (लेवल 6) के लिए उच्च इंडेक्सिंग अपनाई जाए। उन्होंने 2.92, 3.50 और 3.80 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है।

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4. महंगाई भत्ते को लेकर नया फॉर्मूला

महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी संगठनों ने अपनी बात रखी है:

NC-JCM: इन्फ्लेशन-लिंक्ड यानी महंगाई से जुड़ा वेज मॉडल होना चाहिए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन: न्यूनतम 4% डीए बढ़ोतरी और 50% होने पर डीए को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए।

5. डेटा सबमिशन की आखिरी तारीख 30 जून

8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन सौंपने की खिड़की 15 जून को बंद कर दी है। हालांकि, हितधारकों के लिए ऑनलाइन डेटा सबमिट करने का पोर्टल 30 जून 2026 तक खुला रहेगा।

6. आयोग के सदस्यों की टीम

इस समय 8वें वेतन आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है, जो इसकी अध्यक्ष हैं। उनके साथ पैनल में पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष और पूर्व आईएएस पंकज जैन (सदस्य-सचिव) शामिल हैं।

7. ओडिशा और पश्चिम बंगाल का दौरा

कर्मचारी संगठनों और यूनियनों से सीधे चर्चा करने के लिए आयोग लगातार राज्यों के दौरे कर रहा है। इसी कड़ी में आयोग 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 July को कोलकाता का दौरा करने जा रहा है।

8. 1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को फायदा

इस वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। इसमें रक्षा और रेलवे के कर्मचारी और रिटायरीज भी शामिल हैं।

9. कब आएगी फाइनल रिपोर्ट?

आमतौर पर आयोग को अपनी सिफारिशें देने में 18 महीने का समय लगता है। इस लिहाज से फरवरी 2027 से पहले आधिकारिक सिफारिशें आना मुश्किल है। हालांकि, ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल 2027 में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।

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10. जेब में कब तक आएगा पैसा?

पिछले ट्रेंड्स को देखें तो वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद उन्हें पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का वक्त लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली सैलरी बढ़ोतरी का पूरा फायदा कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल पाएगा।

₹250 वाला काम अब सिर्फ ₹13 में… विदेशी बाजारों में अब तहलका मचाएंगे भारतीय आम, पाकिस्तान को लगेगा बड़ा झटका!

Mango Export: कुछ दिनों पहले ऐसी कई रिपोर्ट्स सामने जिसमें अमेरिका के बाजारों में भारतीय आमों के लिए खूब डिमांड का जिक्र था। हालांकि, भारत में ₹50-₹100 किलो मिलने वाले आम US में करीब ₹1900 के चार पीस बिक रहे थे। इतने मंहगे प्राइस को लेकर खूब बहस हो रही थी। इन्हीं सब के बीच भारतीय आम के शौकीनों के साथ-साथ विदेशी बाजारों के लिए भी एक बड़ी खबर सामने आई है। भारत से विदेशों में आम भेजने का खर्च, जो अब तक ₹250 प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाता था, वह अब घटकर महज ₹13 से ₹20 प्रति किलोग्राम रह गया है।

भारत ने समुद्र के रास्ते सिंगापुर को आमों की एक बड़ी खेप सफलतापूर्वक भेजकर लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। इस क्रांतिकारी बदलाव से न सिर्फ भारतीय आमों का निर्यात कई गुना बढ़ जाएगा, बल्कि विदेशी बाजारों में पाकिस्तान और अन्य देशों के आमों के मुकाबले भारतीय आम बेहद प्रतिस्पर्धी और सस्ते हो जाएंगे।

अब तक क्यों महंगा था आम का एक्सपोर्ट?

अब तक भारत से प्रीमियम क्वालिटी के आमों जैसे- हापुस, दशहरी, लंगड़ा, चौंसा का निर्यात मुख्य रूप से हवाई जहाज के जरिए होता था। हवाई सफर के कारण केवल ट्रांसपोर्टेशन की लागत ही ₹150 से ₹250 प्रति किलोग्राम तक आ जाती थी। इसके चलते विदेशों में भारतीय आम काफी महंगे बिकते थे और आम निवेशक या निर्यातक ज्यादा मात्रा में ट्रेडिंग नहीं कर पाते थे।

लेकिन, समुद्र के रास्ते किए गए इस सफल ट्रायल ने गेम ही बदल दिया है। अब यह खर्च सीधे ₹13 से ₹20 प्रति किलो पर सिमट गया है, जो कि पहले के मुकाबले लगभग 90% से भी ज्यादा सस्ता है।

कैसे मुमकिन हुआ यह कारनामा?

समुद्र के रास्ते आम भेजने में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि कई दिनों के सफर में आम सड़ या गल न जाएं। इस चुनौती को पार करने के लिए लखनऊ स्थित ICAR-सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर ने ‘एपीडा’ (APEDA) के साथ मिलकर एक खास वैज्ञानिक ‘सी-शिपमेंट प्रोटोकॉल’ तैयार किया।

इस स्पेशल प्रयोग के तहत आंध्र प्रदेश से 4.3 टन बंगनपल्ली आमों को एक खास रीफर कंटेनर (रेफ्रिजरेटेड कंटेनर) में रखकर समुद्र के रास्ते सिंगापुर भेजा गया। वैज्ञानिकों ने इन तकनीकों का इस्तेमाल किया:

FUSICONT बायो-कंट्रोल तकनीक: वैज्ञानिकों ने बागों में फल लगने से लेकर कटाई तक अपनी खास तकनीक से निगरानी की ताकि आम पूरी तरह से केमिकल और पेस्टिसाइड रेजिड्यू-फ्री रहें।

हॉट वाटर और CISH-Met Wash ट्रीटमेंट: कटाई के बाद आमों को CISH द्वारा विकसित खास वॉश तकनीक और हॉट वाटर ट्रीटमेंट से गुजारा गया। इससे आमों की ‘शेल्फ लाइफ’ यानी खराब न होने की अवधि बढ़ गई और उनमें कोई बीमारी नहीं लगी।

30 दिनों तक नहीं खराब होंगे आम: इस तकनीक की मदद से समुद्र के ठंडे तापमान में भी आमों की लाइफ को 30 दिनों तक बढ़ाया जा सकता है। सिंगापुर पहुंचने में इस कंसाइनमेंट को 16 दिन लगे और जब वहां कंटेनर खुला, तो आम बिल्कुल ताजा और बेहतरीन कंडीशन में मिले।

क्यों बेहद महत्वपूर्ण है यह सफलता?

नए और बड़े बाजारों पर कब्जा: अब तक भारतीय आम सिर्फ कुछ प्रीमियम विदेशी स्टोर्स तक ही सीमित थे। लेकिन अब लागत कम होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स सिंगापुर, मलेशिया, हॉन्गकॉन्ग जैसे बाजारों में अपनी धाक जमा सकते हैं, जहां आम का आयात करीब $4-5 मिलियन का है। इसके अलावा, भारत संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े मार्केट को भी टारगेट कर सकता है, जिसका बाजार $20-25 मिलियन का है।

किसानों की बढ़ेगी आमदनी: लॉजिस्टिक्स कॉस्ट में इतनी बड़ी कटौती का सीधा फायदा आम उत्पादक किसानों और एक्सपोर्टर्स को मिलेगा। वे अब बिना किसी नुकसान के डर के भारी मात्रा में आम विदेशों में मुनाफे के साथ बेच सकेंगे।

यहां सिर्फ 3 रुपये किलो मिल रहा किसानों को आम का दाम, तोतापरी की हजारों एकड़ की खेती पेड़ पर ही सड़ने को छोड़ी!

बढ़ सकती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें! आम आदमी को लग सकता है बड़ा झटका, वेनेजुएला में भयंकर तबाही से मंडराया बड़ा खतरा

Venezuela Earthquake: बीते दिन वेनेजुएला में एक के बाद एक दो भीषण भूकंप आए जिससे पूरे देश में भयंकर तबाही मची है। अब इन दोनों भूकंपों ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। मलबे में दबे लोगों को बचाने के लिए अभी भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है, लेकिन इस आपदा ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भी हलचल पैदा कर दी है। दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देशों में से एक होने के कारण अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वेनेजुएला के संकट से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं?

हालांकि, अभी तक तेल की सप्लाई रुकने का कोई बड़ा सबूत नहीं मिला है, लेकिन कच्चे तेल के लिए वेनेजुएला पर भारत की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए अगले कुछ दिन बेहद अहम होने वाले हैं।

भारत के लिए क्यों इतना महत्वपूर्ण है वेनेजुएला?

इस संकट की टाइमिंग भारत के लिए थोड़ी चिंताजनक है। पिछले दो महीनों में मिडिल ईस्ट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भारत ने वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया था। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल और मई 2026 में वेनेजुएला भारत के सबसे बड़े क्रूड सप्लायर्स में से एक बनकर उभरा है।

वित्त वर्ष 2025-26 में जहां वेनेजुएला से हर महीने औसतन 64000 मीट्रिक टन क्रूड आता था, वहीं अप्रैल-मई 2026 में यह आंकड़ा उछलकर 10 लाख मीट्रिक टन प्रति माह के पार पहुंच गया है। भारतीय रिफाइनरियां वेनेजुएला के हैवी क्रूड ऑयल को प्रोसेस करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, इसलिए सरकार इसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम मानती है।

क्या भूकंप से तेल रिफाइनरियों को पहुंचा है नुकसान?

शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, राहत की बात यह है कि वेनेजुएला का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर इस भयानक भूकंप के बाद भी बड़े नुकसान से बच गया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, तेल उत्पादन और निर्यात से जुड़े ऑपरेशन्स में अभी तक किसी बड़े व्यवधान की खबर नहीं है।

भूकंप का सबसे ज्यादा असर राजधानी काराकास और उसके आस-पास के रिहायशी इलाकों, ट्रांसपोर्ट और पब्लिक सुविधाओं पर पड़ा है। हालांकि, इंडस्ट्रियल इलाकों, बड़ी पाइपलाइनों, स्टोरेज टैंकों और एक्सपोर्ट टर्मिनल्स का बारीकी से निरीक्षण अभी भी जारी है। अगर बाद में किसी बड़े स्ट्रक्चरल डैमेज का पता चलता है, तो आने वाले दिनों में सप्लाई पर असर पड़ सकता है।

क्या भारत में पैदा हो सकता है तेल का संकट?

इसकी उम्मीद बेहद कम है। भारत अपनी जरूरत का क्रूड ऑयल किसी एक देश से नहीं बल्कि 35 से ज्यादा देशों से खरीदता है। इस समय रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। इसके अलावा इराक, सऊदी अरब, यूएई, अमेरिका, ब्राजील और कई अफ्रीकी देशों से भी भारत तेल मंगाता है।

एनर्जी एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर वेनेजुएला से तेल की सप्लाई कुछ समय के लिए धीमी भी होती है, तो भारत के पास दूसरे विकल्प मौजूद हैं। साथ ही, भारतीय तेल कंपनियां हमेशा बैकअप इन्वेंट्री बनाकर रखती हैं।

सप्लाई नहीं रुकी, तो फिर क्यों डर रहा है बाजार?

बाजार की चिंता की बड़ी वजह यह है कि मिडिल ईस्ट के समुद्री रास्तों में जारी तनाव के बीच भारत ने जानबूझकर वेनेजुएला से खरीदारी बढ़ाई थी ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भरता कम की जा सके।

अब अगर एक तरफ मिडिल ईस्ट का रास्ता असुरक्षित रहता है और दूसरी तरफ भूकंप के चलते वेनेजुएला का एक्सपोर्ट भी प्रभावित होता है, तो ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कमी हो जाएगी। भारत अपनी जरूरत का 85 से 90 फीसदी कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड की कीमतों में थोड़ी सी भी बढ़ोतरी भारत का इम्पोर्ट बिल बढ़ा देती है, जिससे देश का चालू खाता घाटा और महंगाई दोनों बढ़ने का खतरा रहता है।

क्या आपकी जेब पर पड़ेगा असर?

इसका जवाब है- फिलहाल नहीं। भारत में पेट्रोल और डीजल की रिटेल कीमतें केवल क्रूड ऑयल पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स और सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) के फैसले शामिल होते हैं। इसलिए, वेनेजुएला में आए इस भूकंप का तुरंत भारतीय पेट्रोल पंपों पर कोई असर नहीं दिखेगा।

लेकिन, अगर आने वाले दिनों में वेनेजुएला के ऑयल फील्ड्स में लंबा नुकसान सामने आता है और ग्लोबल मार्केट में क्रूड के दाम लंबे समय तक ऊंचे बने रहते हैं, तो आगे चलकर भारतीय उपभोक्ताओं को महंगे ईंधन का सामना करना पड़ सकता है।

Bank Holiday: दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत देश के कई राज्यों में आज बंद रहेंगे बैंक, जानें आरबीआई ने क्यों दी है छुट्टी

Bank Holiday Today: आज शुक्रवार, 26 जून को मोहर्रम के मौके पर दिल्ली, मुंबई और चेन्नई समेत देश के कई बड़े राज्यों में सरकारी और प्राइवेट बैंक बंद रहेंगे। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के आधिकारिक हॉलिडे कैलेंडर के मुताबिक, आज देश के ज्यादातर हिस्सों में बैंक बंद रहने के कारण बैंकों में कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा।

अगर आप आज बैंक से जुड़ा कोई बड़ा काम निपटाने की सोच रहे हैं, तो घर से निकलने से पहले बंद शहरों की लिस्ट और आने वाले लंबे वीकेंड की डिटेल्स जरूर चेक कर लें।

आज 26 जून को आपके शहर में बैंक खुले हैं या बंद?

आरबीआई के कैलेंडर के अनुसार, आज 26 जून को मोहर्रम के चलते देश के इन बड़े शहरों में बैंकों की छुट्टियां रहेंगी:

नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, कोलकाता, लखनऊ, कानपुर, भोपाल, हैदराबाद, पटना, रांची, रायपुर, नागपुर, श्रीनगर, जम्मू, अगरतला, आइजोल और बेलापुर।

इन शहरों के अलावा जिन राज्यों में मोहर्रम की छुट्टी स्थानीय स्तर पर अधिसूचित नहीं है, वहां बैंक सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे।

लगातार 3 दिन की छुट्टी: आज से शुरू हुआ लॉन्ग वीकेंड

देश के कई राज्यों में आज से लगातार तीन दिनों तक बैंक बंद रहने वाले हैं। ऐसे में अगर आपको बैंक ब्रांच जाना है, तो अब सीधे सोमवार को ही काम हो पाएगा:

26 जून (शुक्रवार): मोहर्रम के मौके पर देश के अधिकांश हिस्सों में बैंक बंद हैं।

27 जून (शनिवार): महीने का चौथा शनिवार होने के कारण देशभर के सभी बैंक बंद रहेंगे।

28 जून (रविवार): साप्ताहिक अवकाश के कारण देशभर के बैंकों में ताला लटका रहेगा।

इसके अलावा, अगले हफ्ते की शुरुआत में भी कुछ राज्यों में क्षेत्रीय छुट्टियां हैं। जैसे 29 जून को संत गुरु कबीर जयंती के मौके पर शिमला में बैंक बंद रहेंगे और 30 जून को ‘रेमना नी’ (Remna Ni) त्योहार के चलते आइजोल में बैंकों की छुट्टी रहेगी।

बैंक बंद होने पर कैसे निपटाएं अपने जरूरी काम?

भले ही त्योहार और वीकेंड के कारण बैंकों की शाखाएं बंद रहेंगी, लेकिन इस दौरान डिजिटल बैंकिंग सेवाएं बिना किसी रुकावट के 24 घंटे काम करती रहेंगी:

ऑनलाइन ट्रांजैक्शन: आप पैसे भेजने या मंगाने के लिए नेट बैंकिंग (Net Banking), मोबाइल बैंकिंग या यूपीआई (UPI) सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।

एटीएम और कैश: कैश निकालने के लिए देशभर के सभी एटीएम (ATMs) हमेशा की तरह काम करते रहेंगे।

डिजिटल फॉर्म और रिक्वेस्ट: चेकबुक रिक्वेस्ट, एनईएफटी (NEFT), आरटीजीएस (RTGS) और डिजिटल अकाउंट मेंटेनेंस से जुड़े काम ऑनलाइन ऐप के जरिए किए जा सकते हैं।