8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जाएंगी ये 5 बड़ी शर्तें, नए पे स्केल के इंतजार में बैठे कर्मचारियों के लिए आया अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और सेवा से जुड़े सुधारों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार का आठवां केंद्रीय वेतन आयोग देशव्यापी दौरों और हितधारकों से बातचीत के अपने अजेंडे के तहत 6 और 7 जुलाई को ओडिशा का दौरा करने जा रहा है। वित्त मंत्रालय की एक ऑफिशियल नोटिस के मुताबिक आयोग ने उन सभी केंद्र सरकार के संगठनों, संस्थानों, एसोसिएशनों और यूनियनों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के लिए आमंत्रित किया है जो भुवनेश्वर दौरे के दौरान इस पैनल से बातचीत करने में रुचि रखते हैं। इस बीच कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर् के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग से मुलाकात की और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 69000 रुपये सैलरी की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित?

यूनियन ने नए पे स्केल के तहत 3.83 फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की जोरदार मांग की है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नया वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों के मूल वेतन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। यूनियन के इस प्रस्ताव के तहत अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर हो जाता है तो वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन 18000 से बढ़कर सीधे लगभग 69000 रुपये हो जाएगा।

वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 बड़ी शर्तें

कर्मचारी संगठन ने वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण शर्तें और मांगें रखी हैं-

1- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली

प्रतिनिधित्व कर रहे कर्मचारी संगठन ने वर्तमान व्यवस्था को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने की बड़ी मांग सामने रखी है।

2- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भारी बढ़ोतरी

शहरों की कैटिगरी के आधार पर हाउस रेंट अलाउंस की दरों को बढ़ाकर 40%, 35% और 30% करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हाउस बिल्डिंग एडवांस और कंप्यूटर लोन जैसे कल्याणकारी एडवांस को भी दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।

3- वेतन विसंगतियों को दूर करना और फाइनेंशियल अपग्रेडेशन

वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पे लेवल्स का रेशनलाइजेशन किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों के पूरे सर्विस पीरियडके दौरान पांच फाइनेंशियल अपग्रेडेशन दिए जाएं।

4- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से CGHS और ECHS के तहत व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज के विस्तार की मांग रखी गई है।

5- संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नीतियां

सामाजिक सुरक्षा को और व्यापक बनाने के साथ-साथ संविदात्मक और आकस्मिक श्रमिकों के लिए नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की मांग की गई है।

1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर

8वां वेतन आयोग वर्तमान में देश भर के हितधारकों से लगातार फीडबैक और सुझाव जुटा रहा है। इस पैनल द्वारा दी जाने वाली सिफारिशों का सीधा असर देश के लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के भविष्य पर पड़ेगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के इस न्यूनतम फॉर्मूले से भी 18000 की सैलरी सीधे होगी 33000 रुपये! ये है पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Calculate Minimum Salary Hike: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी हर महीने आने वाली इनहैंड सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। इस पूरी कैलकुलेशन को तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चाबी फिटमेंट फैक्टर है।

केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत सावधानीपूर्ण और रूढ़िवादी रुख अपना सकती है। अगर सरकार सबसे न्यूनतम पैमाना यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी अपनाती है तो भी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे लगभग 33000 रुपये हो जाएगी। आइए समझते हैं इस पूरे गणित और कैलकुलेशन को।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है?

फिटमेंट फैक्टर वह गणितीय मल्टीप्लायर या गुणांक होता है जिसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे (7th CPC) को नए संशोधित बेसिक पे (8th CPC) में बदलने के लिए किया जाता है। सरकारी यूनियनों और कर्मचारियों की नजरें इसी पर टिकी हैं क्योंकि यही आपकी बेसिक सैलरी तय करता है।

इसे निकालने का सीधा और आसान फॉर्मूला ये है: रिवाइज्ड बेसिक पे= मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

ध्यान देने वाली बात ये है कि फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल सीधे तौर पर हाउस रेंट अलाउंस या अन्य भत्तों पर नहीं होता लेकिन यह आपकी बेसिक सैलरी को बढ़ा देता है। चूंकि महंगाई भत्ता, HRA और कई अन्य भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर ही तय होते हैं इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही पूरा सैलरी पैकेज खुद-ब-खुद काफी बड़ा हो जाता है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इस वजह से कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये हो गई थी।

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (1.83) पर सैलरी का पूरा कैलकुलेशन

अगर सरकार सबसे कम यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर तय करती है तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में इस तरह बढ़ोतरी देखने को मिलेगी-

लेवल-1 कर्मचारी (न्यूनतम वेतन श्रेणी): 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18000 रुपये है। 1.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर करीब 32940 रुपये तक पहुंच जाएगा।

लेवल-2 कर्मचारी: इन कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 19900 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग 36417 रुपये हो जाएगा।

लेवल- 6 कर्मचारी: इस पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मूल वेतन 35,400 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग यह 64,782 रुपये हो जाएगा।

लेवल-10 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 56100 रुपये है। 1.83 के गुणांक से संशोधित होने के बाद 1.02 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।

इस पूरे कैलकुलेशन को डायग्राम के जरिए समझें

WhatsApp Image 2026-07-03 at 9.53.46 AM

वहीं 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट फैक्टर को 2 गुना, 2.5 गुना या 3 गुना तय किया जाता है, तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर इसका सीधा असर इस प्रकार दिखेगा:

WhatsApp Image 2026-07-03 at 9.54.27 AM

पेंशनभोगियों पर भी होगा बड़ा असर

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में पेंशनभोगियों की भी बेसिक पेंशन इसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत जो न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये तय है, वह इस नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद बढ़कर लगभग 16470 रुपये हो जाएगी।

यह केवल एक न्यूनतम अनुमान है, बढ़ सकती है सीमा

एक्सपर्ट्स और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि 1.83 का फिटमेंट फैक्टर केवल एक सबसे रूढ़िवादी या न्यूनतम अनुमान है। महंगाई और जीवन स्तर में सुधार को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर अधिकत रह सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने इसे 3.83 तक करने की मांग रखी है। 8वें वेतन आयोग के लिए आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर पर अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में आयोग सभी स्टेकहोल्डर्स और कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार-विमर्श, मूल्यांकन और कंसल्टेशन मीटिंग्स (जैसे लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता) लगातार कर रहा है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा जिसके बाद केंद्रीय कैबिनेट उस पर अपनी मुहर लगाएगी।

सरकार का आखिरी फैसला पूरी तरह से देश की राजकोषीय क्षमता पर निर्भर करेगा क्योंकि सरकार को यह भी देखना होगा कि सैलरी और पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद वित्तीय देनदारियों का देश के बजट पर क्या असर पड़ेगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली वास्तविक वेतन वृद्धि पूरी तरह स्पष्ट होगी।

यह भी पढ़ें: EPF में 1800 रुपये से ज्यादा कटवाना ठीक या VPF, PPF, NPS और Mutual Fund SIP बेहतर? समझिए पूरा गणित