8th Pay Commission: आठवें वेतन आयोग के गजट नोटिफिकेशन से कर्मचारी नाराज! इस बात पर यूनियनों और सरकार में भारी टकराव

8th Pay Commission Pension Update: 8वें वेतन आयोग के गठन को 3 नवंबर 2026 तक लगभग 9 महीने पूरे होने वाले हैं। आयोग अपनी 18 महीने की निर्धारित समय-सीमा का आधा सफर जल्द तय कर लेगा। जुलाई महीने में कोलकाता और भुवनेश्वर का दौरा पूरा करने के बाद अब आयोग देश के अलग-अलग राज्यों में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों के साथ बैठकों का अगला दौर शुरू करने जा रहा है।

लेकिन आयोग की इन सिफारिशों के बीच पेंशन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। सरकार द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन और कर्मचारी यूनियनों की मांगों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ जहां सरकार नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के रिव्यू पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूर्ण बहाली पर अड़े हुए हैं।

गजट नोटिफिकेशन का क्या है मैंडेट?

नवंबर 2025 में जारी सरकारी गजट नोटिफिकेशन में 8वें वेतन आयोग की नियम एवं शर्तों (ToR) को स्पष्ट किया गया है:

मौजूदा स्कीम्स का रिव्यू: आयोग को निर्देश दिया गया है कि वह NPS और अप्रैल 2025 में लागू हुई UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी और पेंशन लाभों की समीक्षा करे।

सुधार की सिफारिशें: नोटिफिकेशन में NPS/UPS को खत्म करने या ओपीएस (OPS) वापस लाने का कोई जिक्र नहीं है। आयोग को केवल मौजूदा फ्रेमवर्क के भीतर ही सुधार और सुविधाएं बढ़ाने के सुझाव देने का अधिकार दिया गया है।

वित्तीय बोझ का ध्यान: सरकार ने आयोग को यह भी निर्देश दिया है कि बिना योगदान वाली पेंशन योजनाओं के वित्तीय प्रभाव का ध्यान रखकर ही कोई फैसला लिया जाए।

कर्मचारियों की मांग बनाम गजट का मैंडेट

कर्मचारी यूनियनों की मांगें और सरकार का रुख एक-दूसरे के विपरीत नजर आ रहे हैं:

कर्मचारियों की मांग बनाम गजट का मैंडेट

कर्मचारियों और पेंशनर्स यूनियनों का क्या है तर्क?

नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) की स्टाफ साइड ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए अपने ज्ञापन में ओपीएस की बहाली की पुरजोर वकालत की है। यूनियनों का तर्क है कि NPS के तहत पेंशन पूरी तरह से शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करती है, जिससे 1 जनवरी 2004 के बाद सेवा में आए कर्मचारियों का भविष्य अनिश्चित हो गया है।

कर्मचारी संगठनों ने आंकड़े देते हुए बताया कि अप्रैल 2025 में UPS लागू होने के बावजूद, लगभग 26 लाख NPS सब्सक्राइबर्स में से केवल 1.22 लाख (लगभग 4.5%) कर्मचारियों ने ही UPS को चुना है। यह दिखाता है कि कर्मचारियों को यह स्कीम खास पसंद नहीं आ रही है।

पेंशनर्स एसोसिएशनों की मांग है कि अगर ओपीएस पूरी तरह लागू नहीं होता, तो कम से कम न्यूनतम पेंशन की गारंटी, सरकार का अधिक अंशदान और निश्चित आय का मजबूत प्रावधान किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

8वां वेतन आयोग आने वाले महीनों में विभिन्न राज्यों का दौरा कर राज्य सरकारों, केंद्रीय मंत्रालयों और कर्मचारी यूनियनों के साथ अपनी परामर्श प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। हालांकि, आयोग और केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती गजट के सीमित दायरे (NPS/UPS रिव्यू) और कर्मचारियों की मुख्य मांग OPS बहाली के बीच एक संतुलित और सर्वमान्य रास्ता निकालने की होगी।

8th Pay Commission extends deadline: 8वें वेतन आयोग ने अब 31 जुलाई की आखिरी डेडलाइन फिक्स की, सैलरी और भत्तों पर आया लेटेस्ट अपडेट!

केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की सैलरी, भत्तों और पेंशन को लेकर आठवें केंद्रीय वेतन आयोग से एक बड़ा अपडेट सामने आया है। वेतन आयोग ने विभिन्न श्रेणियों के सरकारी अधिकारियों, कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन ढांचे पर केंद्र शासित प्रदेशों, केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों से सिफारिशें और जरूरी डेटा लेने की आखिरी तारीख को एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है। अब इसके लिए 31 जुलाई की डेडलाइन तय की गई है।

15 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई आखिरी तारीख

इससे पहले आठवें वेतन आयोग ने अपने आधिकारिक ऑनलाइन वेब पोर्टल के माध्यम से सुझाव और मेमोरेंडम जमा करने की अंतिम तिथि 15 जून निर्धारित की थी। वेतन आयोग द्वारा जारी किए गए एक सर्कुलर के मुताबिक चूंकि कई मंत्रालय, विभाग और केंद्र शासित प्रदेश तय समय सीमा के भीतर आवश्यक डेटा जमा करने का काम पूरा नहीं कर पाए थे, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि डेटा कलेक्शन पोर्टल के माध्यम से डेटा जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 31 जुलाई, 2026 कर दिया जाए।

सिर्फ ऑनलाइन स्वीकार होंगे मेमोरेंडम

आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी मंत्रालयों और विभागों को अपने मेमोरेंडम विशेष रूप से आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही जमा करने होंगे। आयोग ने साफ कहा है कि किसी भी तरह की हार्ड कॉपी स्वीकार नहीं की जाएगी। फिजिकल सबमिशन मान्य नहीं होंगे। ईमेल के जरिए भेजे गए सुझावों पर भी आयोग विचार नहीं कर सकता है।

अगले 10 वर्षों के लिए तैयार की जा रही हैं सिफारिशें

समय सीमा बढ़ाए जाने पर ऑल इंडिया एनपीएस एम्प्लॉइज फेडरेशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह पटेल का भी रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने कहा कि जब पूरी स्पीड से काम चल रहा होता है तो आयोग के लिए भी समय सीमा को बार-बार आगे बढ़ाना आसान फैसला नहीं होता। उन्होंने कहा कि आठवें वेतन आयोग को देशभर के केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनभोगियों और दूसरे हितधारकों की असल जरूरतों का विश्लेषण करने के लिए मंत्रालयों, विभागों, केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त निकायों से संबंधित डेटा की जरूरत होती है। इसी डेटा के आधार पर आयोग अगले 10 वर्षों के लिए निष्पक्ष, व्यावहारिक और दूरदर्शी सिफारिशें पेश की जा सकेंगी।

लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता का दौरा करेगा वेतन आयोग

इस बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के चल रहे परामर्श दौरों के क्रम में आठवें वेतन आयोग ने अपने अगले दौर के दौरों का भी ऐलान कर दिया है। आयोग लखनऊ, भुवनेश्वर और कोलकाता के दौरे करेगा। भुवनेश्वपर में बैठक 6-7 जुलाई और कोलकाता में 9-10 जुलाई को तय की गई है।

आयोग से मिलने और अपॉइंटमेंट लेने के लिए केंद्रीय सरकारी संगठनों, संस्थानों, कर्मचारी संघों और यूनियनों को आयोग की वेबसाइट के माध्यम से एक ऑनलाइन अनुरोध जमा करना होगा।

इन राज्यों में पहले ही हो चुका है परामर्श

आठवां वेतन आयोग लगातार अलग अलग क्षेत्रों के हितधारकों के साथ बैठकें कर रहा है। हाल ही में आयोग ने उत्तर प्रदेश, दिल्ली, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हैदराबाद (तेलंगाना) और महाराष्ट्र में हितधारकों के साथ चर्चा की है। इससे पहले, आयोग ने 26 अप्रैल को उत्तराखंड के कर्मचारी संघों के साथ अपनी पहली बातचीत की थी।