8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के सामने रखी जाएंगी ये 5 बड़ी शर्तें, नए पे स्केल के इंतजार में बैठे कर्मचारियों के लिए आया अपडेट

8th Pay Commission: केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, पेंशन और सेवा से जुड़े सुधारों को लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है। भारत सरकार का आठवां केंद्रीय वेतन आयोग देशव्यापी दौरों और हितधारकों से बातचीत के अपने अजेंडे के तहत 6 और 7 जुलाई को ओडिशा का दौरा करने जा रहा है। वित्त मंत्रालय की एक ऑफिशियल नोटिस के मुताबिक आयोग ने उन सभी केंद्र सरकार के संगठनों, संस्थानों, एसोसिएशनों और यूनियनों को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के लिए आमंत्रित किया है जो भुवनेश्वर दौरे के दौरान इस पैनल से बातचीत करने में रुचि रखते हैं। इस बीच कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर् के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में 8वें वेतन आयोग से मुलाकात की और केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 69000 रुपये सैलरी की मांग करते हुए एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।

क्या है फिटमेंट फैक्टर का पूरा गणित?

यूनियन ने नए पे स्केल के तहत 3.83 फिटमेंट फैक्टर को लागू करने की जोरदार मांग की है। फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल नया वेतन आयोग लागू होने पर कर्मचारियों के मूल वेतन को संशोधित करने के लिए किया जाता है। यूनियन के इस प्रस्ताव के तहत अगर 3.83 का फिटमेंट फैक्टर मंजूर हो जाता है तो वर्तमान न्यूनतम मूल वेतन 18000 से बढ़कर सीधे लगभग 69000 रुपये हो जाएगा।

वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 बड़ी शर्तें

कर्मचारी संगठन ने वेतन आयोग के सामने न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण शर्तें और मांगें रखी हैं-

1- ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) की बहाली

प्रतिनिधित्व कर रहे कर्मचारी संगठन ने वर्तमान व्यवस्था को हटाकर पुरानी पेंशन योजना को फिर से बहाल करने की बड़ी मांग सामने रखी है।

2- हाउस रेंट अलाउंस (HRA) में भारी बढ़ोतरी

शहरों की कैटिगरी के आधार पर हाउस रेंट अलाउंस की दरों को बढ़ाकर 40%, 35% और 30% करने की मांग की गई है। इसके साथ ही हाउस बिल्डिंग एडवांस और कंप्यूटर लोन जैसे कल्याणकारी एडवांस को भी दोबारा शुरू करने की बात कही गई है।

3- वेतन विसंगतियों को दूर करना और फाइनेंशियल अपग्रेडेशन

वेतन विसंगतियों को दूर करने के लिए पे लेवल्स का रेशनलाइजेशन किया जाए। इसके अलावा कर्मचारियों के पूरे सर्विस पीरियडके दौरान पांच फाइनेंशियल अपग्रेडेशन दिए जाएं।

4- स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार

कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से CGHS और ECHS के तहत व्यापक स्वास्थ्य देखभाल कवरेज के विस्तार की मांग रखी गई है।

5- संविदा और आकस्मिक कर्मचारियों के लिए नीतियां

सामाजिक सुरक्षा को और व्यापक बनाने के साथ-साथ संविदात्मक और आकस्मिक श्रमिकों के लिए नियमितीकरण नीतियों को लागू करने की मांग की गई है।

1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों-पेंशनभोगियों पर पड़ेगा असर

8वां वेतन आयोग वर्तमान में देश भर के हितधारकों से लगातार फीडबैक और सुझाव जुटा रहा है। इस पैनल द्वारा दी जाने वाली सिफारिशों का सीधा असर देश के लगभग 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के भविष्य पर पड़ेगा।

8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग के इस न्यूनतम फॉर्मूले से भी 18000 की सैलरी सीधे होगी 33000 रुपये! ये है पूरा कैलकुलेशन

8th Pay Commission Calculate Minimum Salary Hike: 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन और इसकी सिफारिशों को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर उनकी हर महीने आने वाली इनहैंड सैलरी और पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी। इस पूरी कैलकुलेशन को तय करने वाली सबसे महत्वपूर्ण चाबी फिटमेंट फैक्टर है।

केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों की तरफ से फिटमेंट फैक्टर को 3.83 तक बढ़ाने की मांग की जा रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि सरकार वित्तीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए अपेक्षाकृत सावधानीपूर्ण और रूढ़िवादी रुख अपना सकती है। अगर सरकार सबसे न्यूनतम पैमाना यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर भी अपनाती है तो भी कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी 18000 रुपये से बढ़कर सीधे लगभग 33000 रुपये हो जाएगी। आइए समझते हैं इस पूरे गणित और कैलकुलेशन को।

फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह कैसे काम करता है?

फिटमेंट फैक्टर वह गणितीय मल्टीप्लायर या गुणांक होता है जिसका इस्तेमाल पुराने बेसिक पे (7th CPC) को नए संशोधित बेसिक पे (8th CPC) में बदलने के लिए किया जाता है। सरकारी यूनियनों और कर्मचारियों की नजरें इसी पर टिकी हैं क्योंकि यही आपकी बेसिक सैलरी तय करता है।

इसे निकालने का सीधा और आसान फॉर्मूला ये है: रिवाइज्ड बेसिक पे= मौजूदा बेसिक पे×फिटमेंट फैक्टर

ध्यान देने वाली बात ये है कि फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल सीधे तौर पर हाउस रेंट अलाउंस या अन्य भत्तों पर नहीं होता लेकिन यह आपकी बेसिक सैलरी को बढ़ा देता है। चूंकि महंगाई भत्ता, HRA और कई अन्य भत्ते बेसिक सैलरी के आधार पर ही तय होते हैं इसलिए बेसिक पे बढ़ते ही पूरा सैलरी पैकेज खुद-ब-खुद काफी बड़ा हो जाता है। पिछली बार 7वें वेतन आयोग के तहत सरकार ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय किया था। इस वजह से कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी 7000 रुपये से बढ़कर सीधे 18000 रुपये हो गई थी।

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर (1.83) पर सैलरी का पूरा कैलकुलेशन

अगर सरकार सबसे कम यानी 1.83 का फिटमेंट फैक्टर तय करती है तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में इस तरह बढ़ोतरी देखने को मिलेगी-

लेवल-1 कर्मचारी (न्यूनतम वेतन श्रेणी): 7वें वेतन आयोग के तहत लेवल-1 कर्मचारियों का मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन 18000 रुपये है। 1.83 का फिटमेंट फैक्टर लागू होने पर यह बढ़कर करीब 32940 रुपये तक पहुंच जाएगा।

लेवल-2 कर्मचारी: इन कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 19900 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग 36417 रुपये हो जाएगा।

लेवल- 6 कर्मचारी: इस पद पर कार्य करने वाले कर्मचारियों का मूल वेतन 35,400 रुपये है। इस न्यूनतम फॉर्मूले से बढ़कर लगभग यह 64,782 रुपये हो जाएगा।

लेवल-10 कर्मचारी: इस स्तर के कर्मचारियों का मौजूदा मूल वेतन 56100 रुपये है। 1.83 के गुणांक से संशोधित होने के बाद 1.02 लाख रुपये से अधिक हो जाएगा।

इस पूरे कैलकुलेशन को डायग्राम के जरिए समझें

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वहीं 8वें वेतन आयोग में अगर फिटमेंट फैक्टर को 2 गुना, 2.5 गुना या 3 गुना तय किया जाता है, तो अलग-अलग पे-मैट्रिक्स लेवल के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी पर इसका सीधा असर इस प्रकार दिखेगा:

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पेंशनभोगियों पर भी होगा बड़ा असर

न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर लागू होने की स्थिति में पेंशनभोगियों की भी बेसिक पेंशन इसी अनुपात में बढ़ जाएगी। वर्तमान में 7वें वेतन आयोग के तहत जो न्यूनतम पेंशन 9000 रुपये तय है, वह इस नए फॉर्मूले के लागू होने के बाद बढ़कर लगभग 16470 रुपये हो जाएगी।

यह केवल एक न्यूनतम अनुमान है, बढ़ सकती है सीमा

एक्सपर्ट्स और कर्मचारी संगठनों का मानना है कि 1.83 का फिटमेंट फैक्टर केवल एक सबसे रूढ़िवादी या न्यूनतम अनुमान है। महंगाई और जीवन स्तर में सुधार को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि अंतिम फिटमेंट फैक्टर अधिकत रह सकता है। फिलहाल 8वें वेतन आयोग के सामने कर्मचारी यूनियनों ने इसे 3.83 तक करने की मांग रखी है। 8वें वेतन आयोग के लिए आधिकारिक फिटमेंट फैक्टर पर अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान में आयोग सभी स्टेकहोल्डर्स और कर्मचारी यूनियनों की मांगों पर विचार-विमर्श, मूल्यांकन और कंसल्टेशन मीटिंग्स (जैसे लखनऊ, भुवनेश्वर, कोलकाता) लगातार कर रहा है। आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपेगा जिसके बाद केंद्रीय कैबिनेट उस पर अपनी मुहर लगाएगी।

सरकार का आखिरी फैसला पूरी तरह से देश की राजकोषीय क्षमता पर निर्भर करेगा क्योंकि सरकार को यह भी देखना होगा कि सैलरी और पेंशन में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के बाद वित्तीय देनदारियों का देश के बजट पर क्या असर पड़ेगा। अंतिम फैसला आने के बाद ही केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाली वास्तविक वेतन वृद्धि पूरी तरह स्पष्ट होगी।

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8th Pay Commission: केन्द्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग पर ये है 5 बड़े अपडेट, जुलाई में होने वाली हैं कई अहम बैठकें

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी खबर आ रही है। सरकार द्वारा 3 नवंबर 2025 को गठित किया गया यह आयोग अब अपने सबसे महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुका है। जुलाई के महीने में आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर कई बड़ी बैठकों और दौरों का शेड्यूल जारी किया गया है।

18 महीने के कुल कार्यकाल में से करीब 8 महीने का समय बीत चुका है और अब सिर्फ 10 महीने बचे हैं, जिसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगा। इस बीच सैलरी हाइक, फिटमेंट फैक्टर और भत्तों को लेकर क्या चल रहा है, इसे 5 बड़े पॉइंट्स में समझें:

1. जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता में होंगी अहम बैठकें

आयोग इस समय देश भर में घूम-घूमकर अलग-अलग राज्यों और विभागों से सुझाव और सबूत जुटा रहा है। इसी कड़ी में जुलाई 2026 में दो बड़े दौरे तय किए गए हैं। आयोग 6-7 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर में और 9-10 जुलाई 2026 को कोलकाता में कर्मचारी यूनियनों, मंत्रालयों और स्टेकहोल्डर्स के साथ सीधे मुलाकात करेगा। इन बैठकों से भविष्य का सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में मदद मिलेगी।

2. कौन तय कर रहा है आपकी नई सैलरी?

इस हाई-लेवल कमिटी की कमान चेयरपर्सन जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है। उनके साथ इस पैनल में प्रोफेसर पुलक घोष (पार्ट-टाइम मेंबर) और श्री पंकज जैन (मेंबर-सेक्रेटरी) शामिल हैं, जो कर्मचारियों और पेंशनर्स से मिले ज्ञापनों का बारीकी से अध्ययन कर रहे हैं। बता दें कि सुझाव भेजने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 किया गया था, जो अब बंद हो चुकी है।

3. फिटमेंट फैक्टर पर सस्पेंस बरकरार

कर्मचारियों की सबसे ज्यादा नजर इस बात पर है कि इस बार ‘फिटमेंट फैक्टर’ क्या होगा। आपको बता दें कि छठे वेतन आयोग में यह 1.86 था, जबकि 7वें वेतन आयोग में इसे बढ़ाकर 2.57 किया गया था। हालांकि, 8वें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर का फॉर्मूला अभी तक फाइनल नहीं हुआ है, इस पर अभी भी चर्चा चल रही है।

4. पेंशनर्स को भी मिलेगा बड़ा तोहफा

यह आयोग सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों के लिए नहीं है। इसके तहत पेंशनर्स की पेंशन में संशोधन और सुधार को लेकर भी समीक्षा की जा रही है। रिटायर हो चुके कर्मचारियों को महंगाई के इस दौर में कितनी राहत मिलनी चाहिए और उनका नया बेसिक स्ट्रक्चर क्या होगा, यह भी आयोग की अंतिम सिफारिशों में शामिल रहेगा।

5. कब लागू होगी नई सैलरी और कब आएगी रिपोर्ट?

कैबिनेट नोट के अनुसार, आयोग का कार्यकाल मई 2027 के आसपास समाप्त होगा, यानी साल 2027 के मध्य में आयोग अपनी फाइनल रिपोर्ट सरकार को सौंप सकता है। जहां तक इसके लागू होने की बात है, तो चर्चाओं के अनुसार नए पे-साइकिल के लिए 1 जनवरी 2026 को रेफरेंस डेट माना जा रहा है, लेकिन वास्तविक रूप से इसे कब लागू किया जाएगा और पिछला एरियर मिलेगा या नहीं, इस पर अंतिम मुहर केंद्रीय कैबिनेट ही लगाएगी।

8th Pay Commission: वेतन आयोग का वो सीक्रेट फॉर्मूला, जो पूरी तरह बदल देगा कर्मचारियों का पे-मैट्रिक्स; जानिए क्या है ये

8th Pay Commission Family Unit Formula: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग के गठन और सैलरी रिवीजन को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। इस बार फिटमेंट फैक्टर के अलावा एक और चीज है जो कर्मचारियों की सैलरी तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकती है, और वह है ‘फैमिली यूनिट’ का फॉर्मूला।

आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सैलरी सिर्फ महंगाई के हिसाब से बढ़ती है, लेकिन हकीकत में न्यूनतम मूल वेतन तय करने के पीछे वेतन आयोग का एक खास गणित काम करता है। आइए समझते हैं कि यह ‘फैमिली यूनिट’ क्या है और इसके बदलने से केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में कितना बड़ा उछाल आ सकता है।

क्या होता है ‘फैमिली यूनिट’ का नियम और इसका महत्व?

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के मुताबिक, ‘फैमिली यूनिट’ वह मानक या मानकर चली गई धारणा है जिसका इस्तेमाल वेतन आयोग किसी सरकारी कर्मचारी के घर को चलाने की न्यूनतम लागत का अनुमान लगाने के लिए करता है।

7वें वेतन आयोग का ने फैमिली यूनिट को 3.0 माना था। इसका मतलब था कि इस यूनिट में कर्मचारी, उसकी पत्नी और दो बच्चों के जरूरी खर्चों को ही शामिल किया गया था। इस फॉर्मूले में कर्मचारी पर निर्भर बुजुर्ग माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों के खर्चों को सीधे तौर पर शामिल नहीं किया गया था।

बदलते समय के साथ क्यों उठ रही है इसे बढ़ाने की मांग?

पिछले कुछ वर्षों में पारिवारिक ढांचा और जरूरतें काफी बदल चुकी हैं। आज के समय में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों के कंधों पर अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल और उनके इलाज का बड़ा खर्च होता है। बढ़ती महंगाई के बीच हेल्थकेयर, रोजमर्रा के सामान और बच्चों की पढ़ाई की लागत काफी बढ़ गई है। यही वजह है कि कई कर्मचारी संगठन 8वें वेतन आयोग से इस ‘फैमिली यूनिट’ के दायरे को बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

फैमिली यूनिट बढ़ने से कैसे बढ़ेगी बेसिक सैलरी?

अगर 8वां वेतन आयोग फैमिली यूनिट के आंकड़े को 3.0 से ऊपर संशोधित करता है, तो जीवन यापन की न्यूनतम लागत का अनुमान भी अपने आप बढ़ जाएगा। उदाहरण से समझिए:

अगर पिछले आयोग (7th PC) में माता-पिता को शामिल करके फैमिली यूनिट को 3.0 के बजाय 4.6 माना गया होता, तो कर्मचारियों की मिनिमम बेसिक सैलरी ₹18000 के बजाय करीब ₹27600 तय होती।

8वें वेतन आयोग में असर: चूंकि पूरा पे-मैट्रिक्स इसी न्यूनतम बेसिक सैलरी के इर्द-गिर्द तैयार होता है, इसलिए अगर इस बार बेंचमार्क बढ़ा, तो इसका कैस्केडिंग इफेक्ट दिखेगा। यानी निचले स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के सभी पे-लेवल के कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में भारी बढ़ोतरी होगी।

यह पैरामीटर कोई सामान्य गणितीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि कर्मचारियों की जेब पर सीधा असर डालने वाली एक महत्वपूर्ण चाबी है। 8वां वेतन आयोग अपनी बैठकों और जुलाई 2026 में होने वाले विचार-विमर्श में इस फॉर्मूले पर गंभीर चर्चा कर सकता है।

8th Pay Commission: केंद्रीय कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट! वेतन आयोग की जुलाई बैठक से पहले सामने आईं ये 5 बड़ी मांगें

8th Pay Commission Latest Updates: देश के करीब 55 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था NC-JCM ने इस बार केवल पैसों की डिमांड नहीं की, बल्कि सर्विस कंडीशन में मौजूद उन 5 बड़ी विसंगतियों को टारगेट किया है जो लंबे समय से चुभ रही थीं। सबसे बड़ी बात यह है कि इन मांगों को कैबिनेट सचिव ने खुद आगे बढ़ाया है, जिससे यह साफ है कि जुलाई में भुवनेश्वर और कोलकाता की बैठकों में केवल चर्चा नहीं, बल्कि आर-पार का फैसला होने की उम्मीद है।

इन मांगों में पेंशन रिवीजन, सैलरी में विसंगतियां और मैटरनिटी बेनिफिट जैसे बड़े मुद्दे शामिल हैं। आइए जानते हैं कि कर्मचारियों की ये 5 मांगें क्या हैं और जुलाई में होने वाली बैठकें क्यों इतनी महत्वपूर्ण हैं।

8वें वेतन आयोग के सामने रखी गईं ये 5 मुख्य मांगें

NC-JCM की बैठक के दौरान स्टाफ साइड की तरफ से कई लंबे समय से लटके मुद्दों को उठाया गया, जिन्हें अब 8वें वेतन आयोग के पास भेजने या संबंधित विभागों द्वारा समीक्षा करने की सिफारिश की गई है। ये 5 बड़ी मांगें ये हैं:

हर 5 साल में पेंशन का रिवीजन: पेंशनर्स की मांग है कि हर पांच साल में उनकी पेंशन की समीक्षा की जाए और इसके साथ ही मिलने वाले ‘फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस’ को बढ़ाकर ₹3000 प्रति माह किया जाए।

फैमिली पेंशन में कटौती न हो: कर्मचारियों की मांग है कि किसी कर्मचारी या पेंशनर की मृत्यु के बाद उनकी फैमिली पेंशन को घटाकर मृतक की नोशनल पे का 30 फीसदी न किया जाए, बल्कि इसमें बढ़ोतरी की जाए।

फायरफाइटर्स के वेतन में समानता: केंद्रीय विभागों में काम करने वाले फायरफाइटर्स के पे-स्केल को ‘दिल्ली फायर सर्विस’ के बराबर लाकर समानता दी जाए।

MACP के बाद पे-फिक्सेशन का लाभ: जिन कर्मचारियों को एमएसीपी का लाभ मिलने के बाद प्रमोशन मिलता है, उन्हें FR-22(1)(a)(1) के तहत पे-फिक्सेशन का पूरा फायदा दिया जाए।

महिला कर्मचारियों को मैटरनिटी बेनिफिट: महिला केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ‘मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961’ के सभी प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) और अन्य मुद्दों पर भी दबाव

इन 5 मांगों के अलावा, कर्मचारी संगठनों ने सरकार और 8वें वेतन आयोग से कुछ अन्य पुरानी मांगों पर भी दोबारा विचार करने का अनुरोध किया है। इसमें मौजूदा पेंशनभोगियों की पेंशन में सुधार, कम्यूटेड पेंशन को समय से पहले बहाल करना और सबसे महत्वपूर्ण ओल्ड पेंशन स्कीम (OPS) को वापस लागू करना शामिल है।

जुलाई में कहाँ और कब होंगी अहम बैठकें?

8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट (https://8cpc.gov.in/) के अनुसार, आयोग अगले महीने विभिन्न कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों के साथ आमने-सामने बैठकर चर्चा करने जा रहा है। यह बैठकें दो बड़े शहरों में आयोजित होंगी:

भुवनेश्वर: 6 और 7 जुलाई को चर्चा होगी।

कोलकाता: 9 और 10 जुलाई को बैठकें की जाएंगी।

अगर इन बैठकों में अन्य यूनियनों ने भी इन मांगों का पुरजोर समर्थन किया, तो इन पर एक आम सहमति बन सकती है। हालांकि, आयोग ने अभी तक सैलरी में बढ़ोतरी या फिटमेंट फैक्टर को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।

फाइनल रिपोर्ट आने में कितना समय बाकी है?

3 नवंबर 2025 को गठित हुए 8वें वेतन आयोग के लिए जुलाई की ये बैठकें एक बड़ा मील का पत्थर साबित होंगी, क्योंकि आयोग के गठन को लगभग 8 महीने पूरे होने वाले हैं। नियमों के मुताबिक, आयोग के पास सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए अब करीब 10 महीने का समय और बचा हुआ है। ऐसे में जुलाई के इस दौर की बातचीत से यह तय होगा कि आने वाले समय में केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों का ढांचा कैसा रहने वाला है।

8th Pay Commission: 1 करोड़ कर्मचारियों की चांदी! बेसिक सैलरी में बंपर बढ़ोतरी की तैयारी, फिटमेंट फैक्टर और DA पर आए ये 10 बड़े अपडेट्स

8th Pay Commission Latest News: देश के 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के लिए बड़ी खबर है। केंद्र सरकार द्वारा गठित 8वां वेतन आयोग अब पूरी तरह एक्शन मोड में आ चुका है और इसके तहत कर्मचारियों की किस्मत बदलने वाली है। ऐतिहासिक रूप से हर 10 साल में बनने वाला यह आयोग इस बार कर्मचारियों की झोली में बंपर सैलरी हाइक करने की तैयारी में है।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला यह हाई-प्रोफाइल पैनल इस समय देशव्यापी दौरों पर है और 30 जून 2026 तक ऑनलाइन डेटा जुटाने की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। कर्मचारी संगठनों ने आयोग के सामने न्यूनतम बेसिक सैलरी को मौजूदा ₹18000 से सीधे ₹69000 करने और फिटमेंट फैक्टर को 3.80 तक बढ़ाने की डिमांड रखी हुई है।

रेलवे, डिफेंस से लेकर तमाम सरकारी विभागों के 1 करोड़ से अधिक परिवारों की जेब पर सीधा असर डालने वाले इस महा-बदलाव को लेकर 10 सबसे बड़े अपडेट्स सामने आए हैं, जिन्हें हर नौकरीपेशा और रिटायर्ड कर्मचारी के लिए जानना बेहद जरूरी है।

8वें वेतन आयोग के टॉप 10 सबसे बड़े अपडेट्स

1. ₹69000 तक न्यूनतम बेसिक पे की मांग

सैलरी में बढ़ोतरी को लेकर बड़े कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगें सौंप दी हैं। नेशनल काउंसिल (NC-JCM) और ऑल इंडिया डिफेंस एम्प्लॉइज फेडरेशन (AIDEF) ने न्यूनतम बेसिक पे को बढ़ाकर ₹69000 करने की मांग की है। वहीं, महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन ने इसे ₹65000 करने की वकालत की है।

2. रेलवे यूनियनों की अलग मांग

इंडियन रेलवे टेक्निकल सुपरवाइजर्स एसोसिएशन (IRTSA) ने आधुनिक आर्थिक कारकों के आधार पर न्यूनतम वेतन ₹52600 करने की मांग की है। इसके अलावा, रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) का कहना है कि न्यूनतम वेतन की गणना 1 जनवरी 2026 के प्राइस इंडेक्स के आधार पर होनी चाहिए।

3. फिटमेंट फैक्टर पर बड़ा अपडेट

कर्मचारियों की सैलरी तय करने में फिटमेंट फैक्टर की सबसे बड़ी भूमिका होती है। रेलवे यूनियन (IRTSA) ने मांग की है कि सेफ्टी कैटेगरी के पदों (लेवल 6) के लिए उच्च इंडेक्सिंग अपनाई जाए। उन्होंने 2.92, 3.50 और 3.80 का फिटमेंट फैक्टर लागू करने का सुझाव दिया है।

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4. महंगाई भत्ते को लेकर नया फॉर्मूला

महंगाई भत्ते (DA) को लेकर भी संगठनों ने अपनी बात रखी है:

NC-JCM: इन्फ्लेशन-लिंक्ड यानी महंगाई से जुड़ा वेज मॉडल होना चाहिए।

महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन: न्यूनतम 4% डीए बढ़ोतरी और 50% होने पर डीए को बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाए।

5. डेटा सबमिशन की आखिरी तारीख 30 जून

8वें वेतन आयोग ने ज्ञापन सौंपने की खिड़की 15 जून को बंद कर दी है। हालांकि, हितधारकों के लिए ऑनलाइन डेटा सबमिट करने का पोर्टल 30 जून 2026 तक खुला रहेगा।

6. आयोग के सदस्यों की टीम

इस समय 8वें वेतन आयोग की कमान सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के हाथों में है, जो इसकी अध्यक्ष हैं। उनके साथ पैनल में पीएम के आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य प्रोफेसर पुलक घोष और पूर्व आईएएस पंकज जैन (सदस्य-सचिव) शामिल हैं।

7. ओडिशा और पश्चिम बंगाल का दौरा

कर्मचारी संगठनों और यूनियनों से सीधे चर्चा करने के लिए आयोग लगातार राज्यों के दौरे कर रहा है। इसी कड़ी में आयोग 6-7 जुलाई को भुवनेश्वर और 9-10 July को कोलकाता का दौरा करने जा रहा है।

8. 1 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को फायदा

इस वेतन आयोग की सिफारिशों का सीधा असर 50 लाख से अधिक केंद्रीय कर्मचारियों और लगभग 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। इसमें रक्षा और रेलवे के कर्मचारी और रिटायरीज भी शामिल हैं।

9. कब आएगी फाइनल रिपोर्ट?

आमतौर पर आयोग को अपनी सिफारिशें देने में 18 महीने का समय लगता है। इस लिहाज से फरवरी 2027 से पहले आधिकारिक सिफारिशें आना मुश्किल है। हालांकि, ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह पटेल के मुताबिक, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत यानी अप्रैल 2027 में कोई बड़ा ऐलान हो सकता है।

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10. जेब में कब तक आएगा पैसा?

पिछले ट्रेंड्स को देखें तो वेतन आयोग की सिफारिशें आने के बाद उन्हें पूरी तरह लागू होने में 2 से 3 साल का वक्त लग जाता है। इसका मतलब है कि 2027 में घोषित होने वाली सैलरी बढ़ोतरी का पूरा फायदा कर्मचारियों को 2029 या 2030 तक मिल पाएगा।

8th Pay Commission: अब DA और DR को लेकर सरकारी कर्मचारियों ने कर दी ये बड़ी मांग, ऐसा हुआ तो मिलेगा बड़ा फायदा

8th Pay Commission Update: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लॉयीज फेडरेशन (AIDEF) ने वेतन आयोग को एक नया सप्लीमेंट्री मेमोरेंडम सौंपा है। इस ज्ञापन में फेडरेशन ने सेवारत कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) और पेंशनभोगियों के महंगाई राहत (DR) की गणना करने के मौजूदा फॉर्मूले की समीक्षा करने और एक नया फॉर्मूला लागू करने की पुरजोर मांग की है।

AIDEF का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था कर्मचारियों और रिटायर्ड लोगों के खर्चों और महंगाई के वास्तविक बोझ को सही तरीके से नहीं दर्शाती है। आइए डिटेल में समझते हैं कि कर्मचारियों की मांग क्या है और इससे उनकी सैलरी और पेंशन पर क्या असर पड़ सकता है।

अभी कैसे होती है DA और DR की गणना?

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों के DA और पेंशनर्स के DR में होने वाले संसोधन ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के 12 महीने के औसत के आधार पर तय किए जाते हैं। इस इंडेक्स को इस तरह डिजाइन किया गया है ताकि महंगाई के खिलाफ कर्मचारियों की क्रय शक्ति को सुरक्षित रखा जा सके।

मौजूदा फॉर्मूले पर क्यों उठे सवाल?

AIDEF का कहना है कि मौजूदा फॉर्मूले में कई कमियां हैं और यह अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स द्वारा झेली जा रही जमीनी महंगाई से मेल नहीं खाता:

कम आय वाले कर्मचारियों पर ज्यादा बोझ: साल 2022-23 में संसोधित किए गए कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स बास्केट में खाद्य और पेय पदार्थों को केवल 36.75% वेटेज दिया गया है। जबकि, कम वेतन पाने वाले कर्मचारी और पेंशनभोगी अपनी आय का एक बहुत बड़ा हिस्सा भोजन, दवाओं, शिक्षा और मकान किराए जैसी जरूरी चीजों पर खर्च करते हैं। इनके लिए वास्तविक महंगाई आधिकारिक इंडेक्स से कहीं अधिक है।

पेंशनभोगियों की अलग जरूरतें: रिटायरमेंट के बाद वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा मासिक खर्च स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम, दवाओं, चिकित्सा उपचार और तीमारदारी पर होता है। यदि इन जरूरी सेवाओं की कीमतें आम महंगाई से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो मौजूदा DR संसोधन उनकी क्रय शक्ति को बचाने में नाकाम साबित होता है।

कर्मचारी संगठन ने क्या दिए हैं सुझाव?

फेडरेशन ने इन कमियों को दूर करने के लिए वेतन आयोग के सामने कुछ बड़े प्रस्ताव रखे हैं:

कर्मचारी-विशिष्ट इंडेक्स: एक ऐसा नया कॉस्ट-ऑफ-लिविंग इंडेक्स तैयार किया जाए, जो विशेष रूप से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के खर्च करने के पैटर्न को सटीक रूप से कैप्चर करता हो।

बुजुर्गों की देखभाल को प्राथमिकता: भविष्य के वेतन और पेंशन संसोधन में बुजुर्गों की देखभाल से जुड़े खर्चों को अधिक मान्यता दी जानी चाहिए।

फिटमेंट फैक्टर में बदलाव: बदलते खर्चों के तरीकों को ध्यान में रखते हुए उस फिटमेंट फैक्टर को तय किया जाए, जिसके आधार पर सैलरी और पेंशन में अंतिम बढ़ोतरी निर्धारित होती है।

आगे क्या होगा?

8वां वेतन आयोग इस समय विभिन्न कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी निकायों से मिलने वाले ज्ञापनों और प्रस्तावों की गहन जांच कर रहा है। आयोग की अंतिम सिफारिशें ही आने वाले समय में देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के वेतन ढांचे, भत्तों और सेवानिवृत्ति लाभों का भविष्य तय करेंगी।

DA Hike: महंगाई भत्ते में 20% का तगड़ा इजाफा, बंगाल सरकार का अपने कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ा तोहफा

DA Hike: पश्चिम बंगाल की नव-निर्वाचित बीजेपी सरकार ने सोमवार को अपना पहला बजट पेश किया। इसमें राज्य के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को बड़ी राहत दी। सरकार ने महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) में 20% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है।

इस बढ़ोतरी के बाद राज्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को मिलने वाला DA/DR उनकी बेसिक सैलरी का 38% हो जाएगा। नई दरें 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगी।

यह फैसला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय से पश्चिम बंगाल के कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर DA की मांग कर रहे थे। नए ऐलान के बाद राज्य और केंद्र के कर्मचारियों के DA के बीच का अंतर 42 प्रतिशत अंक से घटकर 22 प्रतिशत अंक रह गया है।

क्या होता है DA?

महंगाई भत्ता (Dearness Allowance) कर्मचारियों और पेंशनर्स को बढ़ती महंगाई के असर से राहत देने के लिए दिया जाता है। यह बेसिक सैलरी का एक हिस्सा होता है और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर समय-समय पर संशोधित किया जाता है। DA पूरी तरह टैक्सेबल होता है।

क्यों उठ रही थी DA बढ़ाने की मांग?

केंद्र सरकार के कर्मचारी फिलहाल 7वें वेतन आयोग के तहत वेतन और भत्ते पा रहे हैं। वहीं, पश्चिम बंगाल के कई कर्मचारी अभी भी 5वें और 6वें वेतन आयोग की व्यवस्था के दायरे में हैं। इससे दोनों के वेतन और भत्तों में बड़ा अंतर बना हुआ है। 8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने के बाद यह अंतर और बढ़ने की आशंका जताई जा रही थी।

7वें वेतन आयोग का भी वादा

कर्मचारी संगठनों के मुताबिक मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जनवरी 2027 से 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने का भी आश्वासन दिया है। इसके अलावा सरकार ने बजट में 1 लाख सरकारी नौकरियां भरने, महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना पर ₹36,000 करोड़ खर्च करने और फ्री बस सेवा के लिए ₹550 करोड़ आवंटित करने की घोषणा की है।

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8th Pay Commission Big Update: सितंबर में केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज को मिल सकती है बड़ी खुशखबरी

8th Pay Commission Big Update: आठवें वेतन आयोग को बने करीब 8 महीने बीत गए हैं। आयोग के पास अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 10 महीने का समय बचा है। आयोग को केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बदलाव का प्रस्ताव सौंपना है। इसका फायदा करीब 55 लाख एंप्लॉयीज और करीब 69 लाख पेंशनर्स को होगा। इस साल सितंबर में सरकार डीए यानी महंगाई भत्ता बढ़ाने का ऐलान कर सकती है।

डीए बढ़कर 60 फीसदी हो चुका है

केंद्र सरकार एक साल में दो बार डीए का ऐलान करती है। इस साल जनवरी में सरकार ने डीए 2 फीसदी बढ़ाने का ऐलान किया था। इससे एंप्लॉयीज का डीए बढ़कर 60 फीसदी हो गया है। ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉयीज फेडरेशन के प्रेसिडेंट मनजीत सिंह पटेल ने कहा़, “आम तौर पर डीए का ऐलान सितंबर में होता है। हालांकि, कई बार इसका ऐलान अक्तूबर में हुआ है।”

2-3 महीनों के डेटा पर होता है निर्धारण

उन्होंने कहा कि डीए के ऐलान में देरी की वजह डीए का निर्धारण है। इसके लिए सरकार को कम से कम 2 महीनों के डेटा की जरूरत पड़ती है। सिर्फ जुलाई के डेटा के आधार पर जुलाई से दिसंबर तक के डीए का ऐलान नहीं किया जा सकता। इसलिए सरकार दो से तीन महीनों के डेटा पर आधारित एवरेज चार्ट का इस्तेमाल करती है।

अप्रैल का AICPI-IW 0.8 प्वाइंट्स बढ़कर 149.9 पर

केंद्र सरकार के एंप्लॉयीज के डीए का कैलकुलेशन इंडस्ट्रियल वर्कर्स के लिए ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (AICPI-IW) के डेटा के आधार पर होता है। इसे लेबर ब्यूरो रिलीज करता है। अप्रैल 2026 के लिए अंतिम AICPI-IW 0.8 प्वाइंट्स बढ़कर 149.9 पर पहुंच गया। जुलाई 2026 का डीए का रेट ब्यूरो की तरफ से रिलीज होने वाले AICIP-IW के मई और जून के डेटा पर निर्भर करेगा।

एंप्लॉयीज अपनी मांगों के बारे में बता चुके हैं

8वें वेतन आयोग को ज्ञापन सौंपने की आखिरी तारीख 15 जून, 2026 थी। केंद्र सरकार के एंप्लॉयी यूनियंस और एसोसिएशंस अपने ज्ञापन आयोग को सौंप चुके हैं। इनमें सैलरीज, पेंशन और रिटायरमेंट बेनेफिट्स में रिवीजन के प्रस्ताव हैं। सबसे प्रमुख मांग हायर फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी है। इसके अलावा एंप्लॉयीज मिनिमम बेसिक पे में भी बड़ा इजाफा चाहते हैं।

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राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा कर रहा आयोग

सिंह ने कहा, “ज्ञापन सौंपने की 15 जून की तारीख बीत जाने के साथ ही वेतन आयोग ने एंप्लॉयीज से कंसल्टेशन का एक अहम चरण पूरा कर लिया है। अब आयोग एंप्लॉयीज, पेंशनर्स, न्यायिक अधिकारियों और दूसरे पक्षों से मिले सुझावों की बारीकी से अध्ययन करेगा।” इस बीच, 8वें वेतन आयोग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अपने दौरा के बारे में बताया है। कुछ राज्यों का दौरा पूरा भी हो गया है। इस दौरे में वह एंप्लॉयीज के सुझावों को जानने की कोशिश करेगा।

8th Pay Commission: चपरासी से लेकर टीचर तक… सबकी चमकेगी किस्मत! जानिए 8वें वेतन आयोग में किसकी कितनी बढ़ेगी सैलरी?

8th Pay Commission Expected Salary Hike: केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए एक बड़ी खुशखबरी आ रही है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर सुगबुगाहट तेज है। नए वेतन आयोग के लागू होने से चपरासी से लेकर सरकारी स्कूल के टीचरों की बेसिक सैलरी और भत्तों में बंपर उछाल आने की उम्मीद है।

अगर आप भी जानना चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद आपकी इन-हैंड सैलरी कितनी बढ़कर आएगी, तो यहां समझिए इसका पूरा गणित और संभावित सैलरी कैलकुलेटर।

क्या होता है फिटमेंट फैक्टर और कितनी बढ़ेगी बेसिक सैलरी?

वेतन आयोग में सैलरी बढ़ाने का सबसे मुख्य फॉर्मूला फिटमेंट फैक्टर होता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था। एक्सपर्ट्स और कर्मचारी यूनियनों की मांगों के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.83 से लेकर 2.86 गुना या उससे भी अधिक होने की उम्मीद जताई जा रही है। अगर सरकार न्यूनतम फिटमेंट फैक्टर को भी मंजूरी देती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में 20% से 30% तक की सीधी बढ़ोतरी देखी जा सकती है।

चपरासी (Level 1) की सैलरी: ₹18,000 से बढ़कर कितनी होगी?

सरकारी विभागों में एंट्री-लेवल या चपरासी जैसे पद पे मैट्रिक्स लेवल 1 में आते हैं।

वर्तमान बेसिक सैलरी (7th CPC): ₹18000

संभावित फिटमेंट फैक्टर: अगर 2.28 से 2.57 का फिटमेंट फैक्टर बैठता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी सीधे ₹41000 से ₹46260 के बीच पहुंच सकती है।

कुल इन-हैंड सैलरी: बेसिक सैलरी बढ़ने के साथ ही इस पर मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA) और हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी बढ़ जाएगा, जिससे ग्रॉस सैलरी में बड़ा इजाफा होगा।

सरकारी स्कूल के टीचर (Level 6 और Level 7): कितनी बढ़ेगी सैलरी?

सरकारी स्कूलों में प्राइमरी टीचर्स (PRT) और ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर्स (TGT) की सैलरी लेवल 6 और लेवल 7 के तहत तय होती है। उनके लिए यह हाइक काफी बड़ा होने वाला है:

1. प्राइमरी टीचर (PRT – Level 6)

वर्तमान बेसिक सैलरी (7th CPC): ₹35400

संभावित 8th CPC बेसिक सैलरी: फिटमेंट फैक्टर (2.57x) के हिसाब से यह बढ़कर करीब ₹90978 हो सकती है। अगर फिटमेंट फैक्टर 2.86x रहा तो यह ₹101244 तक जा सकती है।

2. मिडिल/हाई स्कूल टीचर (TGT – Level 7)

वर्तमान बेसिक सैलरी (7th CPC): ₹44900

संभावित 8th CPC बेसिक सैलरी: 2.57 गुना के अनुमान से यह करीब ₹115393 और 2.86 गुना होने पर ₹128414 तक पहुंच सकती है।

8th CPC में किस लेवल पर कितनी होगी बेसिक सैलरी?

नीचे दिए गए अनुमानित कैलकुलेटर (2.57x के आधार पर) से समझिए अलग-अलग पदों की बेसिक सैलरी का अंतर:

8th CPC में किस लेवल पर कितनी होगी बेसिक सैलरी?

DA और HRA का क्या होगा?

जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तब मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) को बेसिक सैलरी में मर्ज कर दिया जाता है और नए सिरे से DA की गणना 0% से शुरू होती है। इसके अलावा, शहरों की कैटेगरी (X, Y, Z) के हिसाब से मिलने वाला हाउस रेंट अलाउंस (HRA) भी नई बेसिक सैलरी के आधार पर दोबारा कैलकुलेट किया जाएगा, जिससे कुल सैलरी में भारी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

कब तक लागू हो सकता है 8वां वेतन आयोग?

आमतौर पर हर 10 साल में सरकार नया वेतन आयोग लाती है। 7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था। नियमों के मुताबिक 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से प्रभावी होनी हैं। हालांकि, अंतिम रिपोर्ट और सरकार की मंजूरी मिलने में कुछ महीनों का समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारियों को इसका लाभ एरियर के साथ 1 जनवरी 2026 से ही मिलेगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।