Bajaj Finance पहुंचा आठ महीने के हाई पर, लगातार पांचवे दिन उछले शेयर, अब ये है अगला ट्रिगर

Bajaj Finance Share Price: बजाज ग्रुप की बजाज फाइनेंस के शेयर लगातार पांचवे कारोबारी दिन ऊपर चढ़ा है। इन पांच दिनों की तेजी के साथ आठ कारोबारी दिनों में यह 14 जुलाई को डेढ़ फीसदी से अधिक की गिरावट को छोड़ बाकी सात दिन यह मजबूत हुआ। आज की बात करें तो यह करीब 1% उछलकर आठ महीने के हाई पर पहुंच गया और अब रिकॉर्ड हाई से काफी करीब आ चुका है। अभी की बात करें तो बजाज फाइनेंस के शेयर बीएसई पर फिलहाल 0.29% की बढ़त के साथ ₹1067.00 पर है। इंट्रा-डे में यह 0.98% उछलकर ₹1,074.40 तक पहुंचा था।

जून में 11% से अधिक की बढ़त के बाद इस महीने अब तक यह 6% से अधिक उछल चुका है। इसके साथ ही पिछले साल सितंबर-अक्टूबर के बाद पहली बार लगातार दूसरे महीने यह मजबूती दिखा रहा है। हालांकि इस तेजी के साथ बजाज फाइनेंस का RSI (रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स) 71 हो गया यानी कि यह ओवरबॉट कैटेगरी में पहुंच गया। आरएसआई के 70 के ऊपर होने का मतलब स्टॉक का ओवरबॉट होना है।

क्यों चढ़ रहा Bajaj Finance का शेयर और अब आगे क्या है ट्रिगर?

बजाज फाइनेंस ने इस महीने की शुरुआत में जून 2026 तिमाही का बिजनेस अपडेट पेश किया था जिससे शेयरों को सपोर्ट मिल रहा है। इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बजाज फाइनेंस का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) 23.9% बढ़कर ₹5.46 लाख करोड़ पर पहुंच गया तो डिपॉजिट्स भी करीब 15% उछलकर ₹72,109 करोड़ पर पहुंच गया। कंपनी ने जून तिमाही में रिकॉर्ड 51 लाख नए ग्राहक जोड़े और अब इसकी कस्टमर फ्रेंचाइजी 12.44 करोड़ पर पहुंच गई। जून तिमाही के आखिरी में कंपनी का डिपॉजिट बुक ₹68,500 करोड़ था।

बजाज फाइनेंस के लिए अब अगला ट्रिगर 30 जुलाई को आने वाला है, जिस दिन पूरी तिमाही के कारोबारी नतीजे पेश करेगी। नतीजे के साथ-साथ इस वित्त वर्ष 2027 के लिए गाइडेंस पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। अपनी एसेट क्वालिटी पर ध्यान देने के लिए बजाज फाइनेंस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने ग्रोथ अनुमान को कम कर दिया था। कंपनी ने ग्रोथ के मामले में इस अनुमान को पहले के 25%-30% से घटाकर 22%-24% और नए कस्टमर जोड़ने के मामले में 1.5 करोड़-1.7 करोड़ कर दिया था।

एक साल में कैसी रही बजाज फाइनेंस की चाल

बजाज फाइनेंस के शेयरों ने निवेशकों को करारा झटका दिया। पिछले साल बीएसई पर 23 अक्टूबर 2025 को यह ₹1,102.45 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से 5 ही महीने में यह 28.49% फिसलकर 23 मार्च 2026 को ₹788.40 पर आ गया था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है।

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Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी का मुनाफा 264% उछला, ₹1000 करोड़ जुटाने की तैयारी

Q1 Results: बेंगलुरु की रियल एस्टेट कंपनी Sobha Ltd ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू, दोनों में शानदार बढ़ोतरी देखने को मिली है। इसके साथ ही कंपनी ने ₹1,000 करोड़ तक का फंड जुटाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।

264% बढ़ गया कंपनी का मुनाफा

अप्रैल-जून 2026 तिमाही में Sobha का शुद्ध मुनाफा (Net Profit) सालाना आधार पर 264.3% बढ़कर ₹51 करोड़ रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में कंपनी ने ₹14 करोड़ का मुनाफा कमाया था।

कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू भी शानदार रहा। यह एक साल पहले के ₹851.9 करोड़ से बढ़कर ₹1,278.1 करोड़ पहुंच गया। यानी कंपनी के रेवेन्यू में करीब 50% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ऑपरेटिंग कमाई में भी बड़ा सुधार

शोभा लिमिटेड का EBITDA भी काफी मजबूत रहा। यह पिछले साल के ₹23.7 करोड़ से बढ़कर ₹77.6 करोड़ हो गया।

कंपनी का EBITDA मार्जिन भी 2.8% से बढ़कर 6.1% पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि कंपनी की ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पहले के मुकाबले बेहतर हुई है।

₹1,000 करोड़ जुटाएगी कंपनी

तिमाही नतीजों के साथ शोभा लिमिटेड ने एक और बड़ा फैसला लिया है। Sobha के बोर्ड ने प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए ₹1,000 करोड़ तक के नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने को मंजूरी दे दी है।

यह रकम एक बार में या फिर एक से ज्यादा चरणों (Tranches) में जुटाई जा सकती है।

कौन तय करेगा पूरी प्रक्रिया?

शोभा के बोर्ड ने इस फंड जुटाने की पूरी प्रक्रिया Investments and Borrowings Committee को सौंप दी है।

यही कमेटी तय करेगी कि NCD कब जारी होंगे, उनकी अवधि कितनी होगी, निवेशकों को कितना कूपन (ब्याज) मिलेगा, ब्याज का भुगतान कैसे होगा और लिस्टिंग समेत बाकी शर्तें क्या रहेंगी। कंपनी ने कहा है कि इन सभी बातों की जानकारी बाद में दी जाएगी।

शोभा के शेयरों के हाल

Sobha का शेयर ₹9.30 यानी 0.63% की गिरावट के साथ ₹1,455.35 पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने में स्टॉक 7% चढ़ा है। वहीं, 1 साल में इसने 14.24% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 15.62 हजार करोड़ रुपये है।

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इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

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17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

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FY27 की दूसरी छमाही में विदेशी निवेशकों की होगी वापसी, एक्सपर्ट ने बताया कहां दांव लगाने से होगी कमाई

लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों के रुख में बदलाव दिखा है। जुलाई में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है। इससे अमेरिका-ईरान में फिर से लड़ाई शुरू होने के बावजूद बाजार में ज्यादा गिरावट नहीं आई है। शेयर बाजार के ट्रेंड को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने AlfAccurate Advisors के चीफ इनवेस्टमेंट अफसर राजेश कोठारी से बातचीत की।

कोठारी ने कहा कि इंटरेस्ट रेट उम्मीद के मुताबिक रहने पर विदेशी निवेशकों की इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में धीरे-धीरे भारतीय बाजार में वापसी होगी। उनका मानना है कि बाजार में हालिया गिरावट के बाद भारतीय बाजार की वैल्यूएशंस वाजिब हो गई है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा वैल्यूएशंस पर रियल एस्टेट सेक्टर को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। हालांकि, हाउसिंग ईकोसिस्टम के बारे में उनकी सोच पॉजिटिव है। उनका मानना है कि इस सेक्टर में बिल्डिंग मैटेरियल्स और रियल एस्टेट की एंसिलियरीज कंपनियों के शेयरों में रिस्क-रिवॉर्ड अट्रैक्टिव दिख रहा है।

आईटी सेक्टर के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि इस सेक्टर में सेलेक्टिव रहने की जरूरत है। डिमांड में सुस्ती का दौर बीत चुका है। वैश्विक अनिश्चितता घटने पर डिस्क्रेशनरी खर्च में धीरे-धीरे इम्प्रूवमेंट दिखेगा। हालांकि, रिकवरी के एकसमान रहने की उम्मीद नहीं है। आईटी सर्विसेज ऑफर करने वाली ट्रेडिशनल कंपनियों के मुकाबले डिजिटल कपैबिलिटीज, एआई सर्विसेज ऑफर करने वाली कंपनियों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा।

क्या एआई थीम में अब दिलचस्पी घट रही है? इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एआई थीम अभी शुरुआती अवस्था में है। कुछ खास ग्लोबल एआई कंपनियों के शेयरों की वैल्यूएशंस काफी बढ़ गई है। उनमें बीच-बीच में करेक्शंस दिख सकता है। लेकिन, एआई थीम से जुड़ी इनवेस्टमेंट साइकिल मजबूत बनी हुई है।

कोठारी ने कहा कि घरेलू अर्थव्यवस्था से जुड़ी कंपनियों को इंडिया की तेज ग्रोथ का फायदा मिलेगा। भारत में लोगों की खर्च करने योग्य इनकम बढ़ रही है। सरकार की पॉलिसी भी सपोर्टिव है। ऐसे में ऑटो एंसिलियरीज, कैपिटल गुड्स, कंजम्प्शन, बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर में अच्छी संभावना दिख रही है। खासकर इन सेक्टर की वे कंपनियां अच्छी दिख रही हैं, जिनकी अर्निंग्स को लेकर तस्वीर साफ है।

Delhi Metro: दिल्ली वालों के लिए बड़ी खुशखबरी! द्वारका से राजीव चौक तक सिर्फ 25 मिनट में पहुंचेगी मेट्रो

Delhi Metro: दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने द्वारका सेक्टर-25 स्थित यशोभूमि से कनॉट प्लेस के राजीव चौक तक 20 किलोमीटर लंबे हाई-स्पीड अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर के लिए एक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार किया है। इसका उद्देश्य पश्चिमी दिल्ली से सेंट्रल दिल्ली तक सफर का समय काफी कम करना है।

यह नया कॉरिडोर मौजूदा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का विस्तार होगा। इससे यशोभूमि इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर, तेजी से विकसित हो रहे द्वारका इलाके और दिल्ली के केंद्रीय हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

पांच अंडरग्राउंड स्टेशनों की योजना

DPR के अनुसार, प्रस्तावित रूट पर पांच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडरग्राउंड स्टेशन होंगे। यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए इन्हें प्रमुख रिहायशी और संस्थागत इलाकों के पास बनाया जाएगा।

प्रोजेक्ट की मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

प्रोजेक्ट की जानकारीविवरण
रूट की लंबाईलगभग 20 किलोमीटर
मेट्रो का प्रकारहाई-स्पीड अंडरग्राउंड मेट्रो
प्रस्तावित स्टेशन5 अंडरग्राउंड स्टेशन
रूटयशोभूमि (द्वारका सेक्टर-25) से राजीव चौक तक
प्रोजेक्ट एजेंसीदिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC)
अनुमानित यात्रा समयघटकर करीब 25 मिनट होने की उम्मीद

इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य दिल्ली के पश्चिमी उपनगरों और सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट के बीच तेज और ज्यादा सीधा संपर्क उपलब्ध कराना है।

फिलहाल, अभी बाहरी द्वारका से कनॉट प्लेस जाने वाले लोग आम तौर पर भीड़-भाड़ वाली सड़कों या ब्लू लाइन से लंबे सफर पर निर्भर रहते हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित हाई-स्पीड कॉरिडोर से यशोभूमि और राजीव चौक के बीच सफर का समय 25 मिनट से भी कम होने की उम्मीद है। इससे रोजाना सफर करने वालों, बिजनेस के लिए यात्रा करने वालों और कन्वेंशन सेंटर आने वाले लोगों को एक तेज विकल्प मिलेगा।

अधिकारियों का मानना ​​है कि इस सीधे कनेक्शन से दिल्ली की सड़कों पर दबाव कम होगा और राजधानी के सबसे बड़े कन्वेंशन और एग्जिबिशन वेन्यू तक पहुंचना भी आसान हो जाएगा।

इंजीनियरिंग और मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है

DPR के अनुसार, संबंधित अधिकारी फंडिंग की मंजूरी और जरूरी कानूनी मंजूरी की प्रक्रिया में तेजी ला रहे हैं। DMRC के इंजीनियरों ने शुरुआती मिट्टी की जांच और अलाइनमेंट स्टडी पूरी कर ली है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि प्रस्तावित रूट मौजूदा अंडरग्राउंड यूटिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के रास्ते में न आए।

क्योंकि पूरा कॉरिडोर घनी आबादी वाले शहरी इलाकों के नीचे से गुजरेगा, इसलिए सड़क पर ट्रैफिक और जमीन पर होने वाली गतिविधियों में कम से कम रुकावट आए, इसके लिए टनल बोरिंग मशीनों (TBMs) का इस्तेमाल करके निर्माण करने का प्रस्ताव है।

रियल एस्टेट पर संभावित असर

प्रस्तावित मेट्रो कॉरिडोर से नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) में रियल एस्टेट मार्केट पर भी असर पड़ने की उम्मीद है।

इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, प्रस्तावित रूट के आस-पास के इलाकों, खासकर द्वारका और गुरुग्राम के सटे हुए हिस्सों में, इस प्रोजेक्ट की खबर के बाद से ही घर खरीदने वालों और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स का कहना है कि बेहतर कनेक्टिविटी से द्वारका और द्वारका एक्सप्रेसवे के आस-पास रेजिडेंशियल डेवलपमेंट की मांग बढ़ सकती है, जबकि पड़ोसी गुरुग्राम सेक्टरों में रेजिडेंशियल प्लॉट और हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को भी मेट्रो की बेहतर सुविधा का फायदा मिल सकता है।

वेस्ट दिल्ली और सिटी सेंटर के बीच एक नया लिंक

अगर मंजूरी मिल जाती है, तो यशोभूमि-राजीव चौक मेट्रो कॉरिडोर दिल्ली मेट्रो के हाई-स्पीड नेटवर्क का एक अहम हिस्सा बन जाएगा। यह मौजूदा एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन का विस्तार होगा, जो दिल्ली के बीचों-बीच तक सीधी कनेक्टिविटी देगा।

इस प्रोजेक्ट से रिहायशी इलाकों, कमर्शियल जोन और इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, इससे मौजूदा ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर पर भीड़ कम होगी और पूरे NCR में भविष्य के शहरी विकास में मदद मिलेगी।

बता दें कि प्रस्तावित कॉरिडोर अभी ‘डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट’ (DPR) के स्टेज पर है और निर्माण शुरू होने से पहले जरूरी मंज़ूरी का इंतजार कर रहा है।

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Market Outlook : अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए भारतीय इक्विटी इंडेक्स, जानिए 20 जुलाई को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : 17 जुलाई को भारतीय इक्विटी इंडेक्स मजबूती के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,300 के ऊपर रहा। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 964.58 अंक या 1.25 प्रतिशत बढ़कर 78,151.45 पर और निफ्टी 261.55 अंक या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 24,334.30 पर बंद हुआ। लगभग 1632 शेयरों में बढ़त हुई, 2419 शेयरों में गिरावट आई और 175 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी में सबसे ज़्यादा बढ़त वाले शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक,टेक महिंद्रा,TCS,जियो फाइनेंशियल और रिलायंस इंडस्ट्रीज शामिल रहे। जबकि गिरावट वाले शेयरों में हिंडाल्को,डॉ. रेड्डीज़ लैब्स,विप्रो,सन फार्मा और मैक्स हेल्थकेयर शामिल रहे। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी प्राइवेट बैंक सबसे ज्यादा बढ़त वाला सेक्टर रहा। इसमें 2 प्रतिशत की तेजी आई। इसके बाद निफ्टी बैंक रहा,जिसमें 1.6 प्रतिशत की बढ़त हुई। निफ्टी IT में 1.7 प्रतिशत की तेजी आई।

दूसरे बढ़त वाले सेक्टरों में निफ्टी ऑटो और निफ्टी रियल्टी में 1.3-1.3 प्रतिशत की बढ़त हुई। जबकि निफ्टी ऑयल एंड गैस में 1 प्रतिशत और निफ्टी FMCG में 0.7 प्रतिशत की बढ़त हुई। दूसरी ओर निफ्टी फार्मा में 1.4 प्रतिशत और मेटल में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.4 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल

बाजार जानकारों का कहना है कि घरेलू बाजार के लिए पहली तिमाही के नतीजे मेन ट्रिगर होंगे,जिससे अलग-अलग सेक्टर और शेयरों में हलचल दिखेगी। हालांकि,मिडिल ईस्ट में हो रही घटनाएं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी अहम डिसाइडिंग फैक्टर बने रहेंगे। इनसे ब्याज दरों,कंपनियों की अर्निंग, महंगाई और देश के मैक्रोइकॉनॉमिक आउटलुक के अनुमानों पर असर पड़ने की संभावना है।

टाटा म्यूचुअल फंड को उम्मीद है कि बेहतर होते मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल के दम पर FY27 में निफ्टी की अर्निंग्स में 15-17% की बढ़ोतरी होगी। इसका कहना है कि निफ्टी का वैल्यूएशन अपने लान्ग टर्म एवरेज से नीचे आ गया है,जो अगले 12-18 महीनों में इक्विटी रिटर्न के लिए एक अच्छा माहौल बनाता है। भारत का लॉन्ग-टर्म इक्विटी आउटलुक, बेहतर होते इन्वेस्टमेंट साइकल,क्रेडिट ग्रोथ,मैन्युफैक्चरिंग को मिल रहे सपोर्ट,रियल एस्टेट में रिकवरी और मज़बूत बैंकिंग फंडामेंटल्स की वजह से अच्छा बना हुआ है। FII की लगातार बिकवाली के बावजूद,घरेलू संस्थागत निवेशकों का मज़बूत निवेश भारतीय इक्विटी को सपोर्ट कर रहा है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के हेड ऑफ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि मार्केट की चाल में बदलाव दिख रहा है, जिसमें IT और बैंकिंग सेक्टर की अगुवाई में लार्ज-कैप शेयरों की ओर जबरदस्त रुझान है। बिजनेस अपडेट्स और Q1 की कमाई की उम्मीदों को लेकर अच्छे माहौल से इसे सपोर्ट मिल रहा है। यह ट्रेंड मुख्य रूप से घरेलू संस्थागत निवेशकों की वजह से दिख रहा है,जो महंगे मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों से निकलकर बेहतर रिस्क-रिवॉर्ड प्रोफाइल और आकर्षक वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

साथ ही,FY27 की दूसरी छमाही (H2) में घरेलू मांग अच्छी रहने की उम्मीद में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी खरीदारी का रुझान दिख रहा है। कुल मिलाकर भारत के लिए बेहतर होते आउटलुक के बीच चुनिंदा शेयरों में प्रॉफिट बुकिंग और खरीदारी के साथ ब्रॉडर मार्केट का रुख पॉजिटिव बना हुआ है।

LKP सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि इंडेक्स पांच दिन के कंसोलिडेशन फेज से बाहर निकल गया है। यह ट्रेडर्स और इन्वेस्टर्स के बढ़ते भरोसे का संकेत है। बाजार का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है क्योंकि इंडेक्स अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा,RSI बुलिश क्रॉसओवर में आ गया है,जिससे पॉजिटिव मोमेंटम और मजबूत हुआ है। आने वाले समय में निफ्टी के मजबूत बने रहने और 24,800 के लेवल की ओर बढ़ने की संभावना है। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 24,200 पर है। अगर यह इस लेवल से नीचे गिरता है तो कंसोलिडेशन का दौर शुरू हो सकता है।

बोनान्जा में रिसर्च एनालिस्ट अभिनव तिवारी का कहना है कि आगे बाजार रिलायंस इंडस्ट्रीज,HDFC बैंक और ICICI बैंक के Q1FY27 नतीजों पर बारीकी से नजर रखेगा। इनसे बाजार की निकट भविष्य की दिशा तय होने की उम्मीद है। कुल मिलाकर,बाजार के स्टॉक-स्पेसिफ़क रहने की संभावना है। अच्छी कमाई करने वाली कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

अब वैष्णो देवी जाना हुआ और आसान! सिर्फ 6 घंटे में दिल्ली से कटरा पहुंच जाएंगे भक्त, जानिए पूरी डिटेल्स

Delhi-Amritsar-Katra Expressway: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार (17 जुलाई) को दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के कई महत्वपूर्ण हिस्सों को राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद राजधानी दिल्ली से माता वैष्णो देवी (कटरा) तक सड़क यात्रा का समय करीब 14 घंटे से घटकर सिर्फ 6 घंटे रह जाएगा। जबकि दिल्ली से अमृतसर की यात्रा 8 घंटे से घटकर लगभग 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। यह एक्सप्रेसवे 667 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर-कटरा कॉरिडोर का हिस्सा है। इसे लगभग 38,905 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से विकसित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, पीएम मोदी हरियाणा के जींद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 157.92 किलोमीटर लंबे चार-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (पैकेज 1 से 5) का लोकार्पण करेंगे। इस हिस्से का निर्माण लगभग 9,680 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। इसके बाद प्रधानमंत्री पंजाब के जालंधर में 30.9 किलोमीटर लंबे पैकेज-6 का भी उद्घाटन करेंगे।

तेज यात्रा के साथ हाईवे पर घटेगा दबाव

पूरे कॉरिडोर के चालू होने के बाद दिल्ली से कटरा की यात्रा लगभग 6 घंटे और दिल्ली से अमृतसर की यात्रा करीब 4 घंटे में पूरी हो सकेगी। इससे मौजूदा एनएच-44 (जीटी रोड) पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

इस एक्सप्रेसवे से माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के बीच कनेक्टिविटी मजबूत होगी। परियोजना से पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, माल परिवहन और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा, प्रमुख इंटरचेंज के आसपास व्यावसायिक और रियल एस्टेट विकास को भी नई गति मिलेगी। साथ ही इससे उत्तर भारत में भी आर्थिक गतिविधियां और तेज होंगी।

भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन लॉन्च

पीएम मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की कैटेगरी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें हैं। यह रेलवे क्षेत्र में स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था को अपनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर की दूरी यह ट्रेन दो घंटे में तय करेगी। इस दौरान यह 12 स्टेशनों पर रुकेगी।

प्रधानमंत्री ने जींद रेलवे स्टेशन से ट्रेन को रवाना करते समय हाथ हिलाकर अभिवादन किया। इस ट्रेन में बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे भी सवार थे। यह ट्रेन पूरी तरह भारत में डिजाइन, विकसित और एकीकृत की गई है। इसका निर्माण स्वदेशी तकनीक से किया गया है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग के क्षेत्र में देश की बढ़ती क्षमता को दर्शाता है।

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आसमानी नीले और सफेद रंग की आकर्षक डिजाइन वाली यह ट्रेन ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ टेक्नोलॉजी से चलती है। इस तकनीक में हाइड्रोजन को बिजली में परिवर्तित किया जाता है। इससे ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक ऊर्जा प्राप्त होती है। भारत की इस हाइड्रोजन ट्रेन में 10 डिब्बे हैं, जिससे यह अब तक विकसित सबसे लंबी हाइड्रोजन चालित यात्री ट्रेनों में शामिल हो गई है।

Home Loan: सिर्फ सस्ते घर नहीं, आसान होम लोन भी जरूरी; एक्सपर्ट बोले- तभी बढ़ेगा हाउसिंग सेक्टर

Home Loan: भारत में घरों की मांग लगातार बढ़ रही है। अफोर्डेबल हाउसिंग, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और तेज मंजूरियों पर अक्सर चर्चा होती है। लेकिन इन सबसे पहले एक सवाल आता है। क्या आम परिवार के पास घर खरीदने के लिए आसान और समय पर लोन उपलब्ध है? एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत के हाउसिंग सेक्टर की अगली बड़ी ग्रोथ इसी सवाल के जवाब पर निर्भर करेगी।

होम लोन सिर्फ फाइनेंशियल प्रोडक्ट भर नहीं है। ज्यादातर परिवारों के लिए यह जिंदगी का सबसे बड़ा निवेश होता है। यह आर्थिक सुरक्षा, स्थिरता और बेहतर भविष्य का भरोसा देता है। लेकिन यह सपना तभी पूरा होता है, जब सही समय पर लोन मिल सके। इसलिए हाउसिंग सेक्टर की असली ताकत सिर्फ मकानों की संख्या नहीं, बल्कि लोगों तक क्रेडिट की पहुंच है।

तेजी से बढ़ सकता है होम लोन बाजार

CareEdge Ratings के मुताबिक, भारत का होम लोन बाजार फिलहाल करीब ₹33 लाख करोड़ का है। FY25 से FY30 के बीच इसके 15-16% CAGR से बढ़ने का अनुमान है। इस रफ्तार से बाजार का आकार ₹77 लाख करोड़ से ₹81 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है।

हालांकि, यह ग्रोथ सिर्फ बड़े शहरों या कॉर्पोरेट कर्मचारियों से नहीं आएगी। अगली बड़ी मांग छोटे शहरों, स्वरोजगार करने वालों, छोटे कारोबारियों और उन परिवारों से आने की उम्मीद है, जो अपना पहला घर खरीदना चाहते हैं।

असली चुनौती लोन तक पहुंच

देश में ऐसे लाखों लोग हैं, जिनके पास लोन चुकाने की क्षमता है। लेकिन पारंपरिक बैंकिंग व्यवस्था में उन्हें अक्सर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। वजह साफ है। बैंक लंबे समय तक सैलरी स्लिप, इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) और स्थायी नौकरी को ही सबसे बड़ा आधार मानते रहे हैं।

इस कारण छोटे दुकानदार, फ्रीलांसर, स्वरोजगार करने वाले और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले कई लोग लोन से वंचित रह जाते हैं। जबकि उनकी आय और भुगतान क्षमता मजबूत हो सकती है।

AI और डिजिटल डेटा बदल रहे हैं तस्वीर

अब लोन देने का तरीका तेजी से बदल रहा है। फाइनेंस कंपनियां और बैंक डिजिटल डेटा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक एनालिटिक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे ग्राहक की वास्तविक वित्तीय स्थिति और भुगतान क्षमता को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।

अब सिर्फ कागजी दस्तावेज ही नहीं, बल्कि ग्राहक के फाइनेंशियल व्यवहार और लेनदेन का भी आकलन किया जा रहा है। इससे पहले जिन लोगों के लिए लोन लेना मुश्किल था, उनके लिए भी नए अवसर बन रहे हैं।

टेक्नोलॉजी के साथ भरोसा भी जरूरी

डिजिटल प्रक्रिया ने लोन लेना आसान बनाया है। फिर भी पहली बार घर खरीदने वाले लोगों के लिए यह फैसला आसान नहीं होता। दस्तावेज, नियम, EMI और दूसरी शर्तें कई बार लोगों को उलझन में डाल देती हैं।

ऐसे में एक्सपर्ट्स का मानना है कि टेक्नोलॉजी के साथ भरोसेमंद सलाहकारों की भूमिका भी अहम बनी रहेगी। सही सलाह मिलने से ग्राहक बेहतर फैसला ले पाते हैं और पूरे लोन प्रोसेस को आसानी से समझते हैं।

सफलता का असली पैमाना क्या?

हाउसिंग फाइनेंस सेक्टर में सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होगी कि कितना लोन बांटा गया। असली सफलता इस बात में होगी कि कितने नए परिवार अपने घर का सपना पूरा कर पाए।

जब ज्यादा लोगों तक आसान होम लोन पहुंचेगा, तो इसका फायदा सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे रियल एस्टेट, निर्माण, रोजगार और पूरी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। यही वजह है कि आसान और समावेशी क्रेडिट एक्सेस को भारत की अगली हाउसिंग ग्रोथ स्टोरी का सबसे बड़ा आधार माना जा रहा है।

(यह आर्टिकल मनीकंट्रोल हिंदी के लिए अतुल मोंगा ने लिखा है, जो बेसिक होम लोन के को-फाउंडर और सीईओ हैं)

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