इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन रह सकता है दमदार

भारतीय शेयर बाजारों का प्रदर्शन इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में शानदार रह सकता है। स्ट्रॉन्ग ग्रोथ, लगातार अच्छा कैपिटल एक्सपेंडिचर और क्रेडिट एक्सपैंशन इसकी वजह होगी। हालांकि, इनफ्लेशन बढ़ने से इंटरेस्ट रेट में इजाफा हो सकता है। एललामा की रिपोर्ट में यह कहा गया है।

चुनौतियों की बीच इकोनॉमिक ग्रोथ 7.8 फीसदी

इस रिपोर्ट में इनफ्लेशन बढ़ने की आशंका जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ऑयल की दोगुनी कीमतों को बर्दाश्त किया है। महंगे ऑयल के बावजूद 7.8 फीसदी ग्रोथ बनाए रखी है। भारतीय इकोनॉमी ज्यादातर दूसरी बड़ी इकोनॉमीज के मुकाबले मजबूत है। 7.8 फीसदी जीडीपी ग्रोथ के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 59.3 है।

निफ्टी की वैल्यूएशन 10 साल के एवरेज के मुकाबले कम

इनफ्लेशन को चिंता की वजह बताते हुए इस रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफ्लेशन बढ़ने के 9-15 महीनों के दौरान मार्केट में तेजी दिखी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि निफ्टी अपने 10 साल के एवरेज 18.6 के पी/ई के मुकाबले 17.7 पी/ई पर आ गया है। इस हिसाब से महंगे बाजारों के मुकाबले भारतीय बाजार सस्ता है।

घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को मिला सहारा

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने इस साल भारतीय शेयर बाजारों में अब तक 29 अरब डॉलर की बिकवाली की है। इसके मुकाबले घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 45.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस रिपोर्ट में एनर्जी, मेटल्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, पावर, डिफेंस, फार्मास्युटिकल्स, ऑटोमोबाइल्स के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद जताई गई है।

बाजार के लिए ये हैं कुछ बड़े रिस्क

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल की कीमतों में तेज उछाल, आरबीआई के उम्मीद से पहले इंटरेस्ट रेट में वृद्धि और जल्द डिसइनफ्लेशन जैसे रिस्क बने हुए हैं। ऐसे में रियल एस्टेट और साइक्लिकल्स में ओवरवेट बने रहना ठीक होगा। जुलाई में विदेशी संस्थागत निवेशकों का रुख भारत को लेकर बदला है। उन्होंने भारत में बिकवाली से ज्यादा खरीदारी की है।

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17 जुलाई को प्रमुख सूचकाकों में जोरदार तेजी

अमेरिका-ईरान के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने और क्रूड में उछाल के बावजूद भारतीय बाजार में बड़ी गिरावट नहीं दिखी है। 17 जुलाई को सेंसेक्स और निफ्टी में जोरदार तेजी दिखी। निफ्टी 1.09 फीसदी यानी 261.55 फीसदी चढ़कर 24,334 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.25 फीसदी यानी 964 अंक के उछाल के साथ 78,151 पर क्लोज हुआ।

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शेयरों में निवेश करने जा रहे हैं? पहले जान लीजिए एचएसबीसी ने Sensex के लिए क्या टारेगट दिया है

शेयर बाजार में सेंटिमेंट बेहतर हुआ है। अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई फिर से शुरू होने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आई है। निफ्टी 24000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बना हुआ है। इस बीच, विदेशी ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने 16 जुलाई को भारतीय कंपनियों के शेयरों की रेटिंग बढ़ा दी। उसने रेटिंग ‘अंडरवेट’ से ‘न्यूट्रल’ कर दी ।

विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी

HSBC ने कहा है कि क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी से कंपनियों की अर्निंग्स को लेकर रिस्क घटा है। रुपये को गिरने से रोकने के उपायों से विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में वापसी हुई है। एचएसबीसी ने 2026 के अंत में BSE Sensex का टारगेट बढ़ाकर 84,000 प्वाइंट्स कर दिया है। पहले उसने 80,500 का टारगेट प्राइस दिया था। इसका मतलब है कि सेंसेक्स मौजूदा लेवल से 8.6 फीसदी चढ़ सकता है।

2026 में सेंसेक्स और निफ्टी का रिटर्न निगेटिव

इस साल भारतीय शेयर बाजार का रिटर्न निगेटिव है। निफ्टी और सेंसेक्स 2026 में अब तक 7 फीसदी से ज्यादा नीचे हैं। एचएसबीसी की रिपोर्ट की मानें तो अगले छह महीनों में बाजार में हालात बदलने वाले हैं। एचएसबीसी ने पहले इस साल दिसंबर तक सेंसेक्स के लिए 80,500 अंक का टारेगट दिया था। इस बीच, India VIX 12.91 पर आ गया है। 16 जुलाई को इसमें 2.71 फीसदी गिरावट दिखी। इंडिया वीआईएक्स का 15 से नीचे होना बाजार के लिए पॉजिटिव है।

ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स रिकॉर्ड ऊंचाई से 33% गिरा

क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी भारत के लिए अच्छी खबर है। भारत क्रूड की अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी हिस्सा इंपोर्ट से पूरा करता है। 28 फरवरी को अमेरिका-ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद क्रूड की कीमतें आसमान में पहुंच गई थीं। अप्रैल में Brent curde Futures 126.41 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। इस लेवल से क्रूड 33 फीसदी गिर चुका है।

क्रूड ऑयल में नरमी से मार्जिन पर दबाव घटा

एचएसबीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “ऑयल में नरमी आई है। इससे मार्जिन पर दबाव थोड़ा कम हुआ है। अर्निंग्स डाउनग्रेड का रिस्क भी घटा है।” इस महीने की शुरुआत में गोल्डमैन सैक्स ने इंडिया के आउटलुक को बेहतर बताया था। उसने कमोडिटी की कीमतों में नरमी और रुपये में स्थिरता को इसकी वजह बताई थी।

जुलाई में विदेशी निवेशकों ने की 1.6 अरब डॉलर की खरीदारी

विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजार को लेकर बदलता दिख रहा है। जुलाई में उन्होंने अब तक 1.6 अरब डॉलर के शेयर खरीदे हैं। चार महीनों तक भारतीय बाजार में बड़ी बिकवाली के बाद विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए हैं। 2026 में उन्होंने भारतीय बाजार में 27.7 अरब डॉलर की बिकवाली की है। यह पिछले साल उनकी 18.9 अरब डॉलर की बिकवाली से ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह AI से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी है।

फॉरेन इनवेस्टर्स ने की इस वजह से बिकवाली 

भारतीय बाजार में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों की कमी है। इस वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से पैसे निकाल अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में लगाए हैं। इससे इन बाजारों में अच्छी तेजी आई है। दक्षिण कोरिया का बाजार तो इस साल दुनिया में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला बाजार बन गया है। वहां एआई कंपनियों के शेयरों की कीमतें कई गुनी हो गई हैं।