Prayagraj Housing Scheme: सिर्फ ₹2.50 लाख देकर बुक करें 2BHK फ्लैट! अतीक अहमद की पुरानी कोठी के पास बनेगा 700 फ्लैटों का बड़ा प्रोजेक्ट

Prayagraj Housing Scheme: प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) शहर में एक बड़े ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत करने जा रहा है। खास बात यह है कि यह परियोजना माफिया डॉन अतीक अहमद के पुराने कोठी के पास स्थित उस जमीन पर विकसित की जाएगी, जिस पर पहले अवैध कब्जा था। कसारी-मसारी आवास योजना के तहत यहां करीब 700 दो बेडरूम (2BHK) फ्लैट बनाए जाएंगे, जिनकी कीमत ₹25 लाख प्रति फ्लैट तय की गई है।

सिर्फ ₹2.50 लाख जमा कर करा सकेंगे रजिस्ट्रेशन

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना का भूमि पूजन अक्टूबर में दीपावली से पहले किया जाएगा। इसके बाद दिसंबर से फ्लैटों की बुकिंग (रजिस्ट्रेशन) शुरू होगी। फ्लैट खरीदने के इच्छुक लोगों को रजिस्ट्रेशन के समय कुल कीमत का 10 प्रतिशत यानी 2.50 लाख रुपये जमा करना होगा। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे की भुगतान व्यवस्था की जाएगी।

RERA से मांगी गई मंजूरी

प्राधिकरण ने इस परियोजना के निर्माण के लिए रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) से अनुमति लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन पहले ही भेजा जा चुका है। PDA का कहना है कि जिस लगभग 9,000 वर्गमीटर जमीन पर यह प्रोजेक्ट विकसित किया जाएगा, उस पर पहले अतीक अहमद का अवैध कब्जा था। प्राधिकरण ने कार्रवाई कर जमीन को अपने कब्जे में लिया और अब वहां आवासीय परियोजना विकसित करने का फैसला किया है।

तीन साल में पूरा होगा निर्माण

PDA का लक्ष्य इस पूरे प्रोजेक्ट का निर्माण तीन साल में पूरा करने का है। फ्लैटों का आवंटन लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।

कम आय वर्ग के लोगों को मिलेगा फायदा

PDA के जोनल अधिकारी सूरज पटेल के अनुसार, यह परियोजना विशेष रूप से कम आय वर्ग (LIG) के लोगों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की जा रही है। उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इच्छुक लोग आवेदन कर सकेंगे।

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इस परियोजना के शुरू होने से प्रयागराज में किफायती आवास की तलाश कर रहे लोगों को नया विकल्प मिलेगा। वहीं अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन का उपयोग अब सार्वजनिक हित के लिए किया जाएगा। प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) अक्सर शहर में विभिन्न आय वर्गों (EWS, LIG, MIG और HIG) के लिए कई आवासीय योजनाएं और प्लॉट/फ्लैट नीलामी योजनाएं चलाता रहता है।

अब मिनटों में पहुंचेंगे दिल्ली! 900 करोड़ से ग्रेटर नोएडा में बनने जा रहा यूपी का पहला डबल-डेकर फ्लाईओवर

ग्रेटर नोएडा में उत्तर प्रदेश का पहला डबल डेकर फ्लाईओवर बनाने की तैयारी है। यह फ्लाईओवर ग्रेनो वेस्ट की 130 मीटर रोड को शाहबेरी और क्रॉसिंग रिपब्लिक के रास्ते दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसके बनने से गाजियाबाद और दिल्ली की तरफ जाने वाले लोगों का सफर आसान होगा। इस परियोजना के पूरा होने से ग्रेटर नोएडा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। साथ ही ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गाजियाबाद के बीच आने-जाने की सुविधा बेहतर होगी और एनसीआर के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक पर ट्रैफिक का दबाव भी कम होगा।

900 करोड़ आएगी लागत

रिपोर्ट के अनुसार, इस फ्लाईओवर के निर्माण पर करीब 900 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके बनने के बाद ग्रेटर नोएडा वेस्ट की 130 मीटर चौड़ी सड़क सीधे शाहबेरी, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और राष्ट्रीय राजमार्ग-9 (एनएच-9) से जुड़ जाएगी। इससे लोगों को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे तक सीधा रास्ता मिलेगा और रोजाना इस मार्ग से सफर करने वाले हजारों यात्रियों का यात्रा समय भी काफी कम हो जाएगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह छह लेन का एलिवेटेड फ्लाईओवर ग्रेटर नोएडा का पहला डबल-डेकर फ्लाईओवर होगा। इस परियोजना में अलग-अलग तरह के वाहनों के लिए अलग रास्ते बनाए जाएंगे, जिससे सड़क की क्षमता बढ़ेगी और व्यस्त समय में लगने वाले ट्रैफिक जाम से काफी राहत मिलने की उम्मीद है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट को मिलेगा बड़ा फायदा

रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट में तेजी से नई हाउसिंग सोसायटियां और रिहायशी परियोजनाएं बन रही हैं। यह इलाका एनसीआर के सबसे बड़े आवासीय क्षेत्रों में शामिल हो गया है, लेकिन आबादी बढ़ने की तुलना में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास उतनी तेजी से नहीं हो पाया है। शाहबेरी के आसपास की संकरी सड़कें और नोएडा, गाजियाबाद व दिल्ली के बीच भारी ट्रैफिक के कारण यह इलाका अक्सर लंबे जाम का सामना करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, एयू रियल एस्टेट के निदेशक आशीष अग्रवाल ने कहा कि प्रस्तावित डबल-डेकर फ्लाईओवर यह दिखाता है कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के तेजी से हो रहे विकास को देखते हुए अब बुनियादी ढांचे की योजना भी उसी रफ्तार से बनाई जा रही है।

उनका कहना है कि इस फ्लाईओवर से न सिर्फ ट्रैफिक जाम कम होगा, बल्कि बेहतर सुविधाओं की तलाश में घर खरीदने वाले लोगों के लिए इस इलाके का आकर्षण भी बढ़ेगा। रियल एस्टेट कंपनियों का कहना है कि यह फ्लाईओवर प्रोजेक्ट ग्रेटर नोएडा वेस्ट के विकास में एक बड़ा कदम साबित होगा। उनका मानना है कि इससे इलाके की सड़क व्यवस्था और आने-जाने की सुविधा पहले से बेहतर हो जाएगी।

बढ़ेगी कनेक्टिविटी, ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत

एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, सीआरसी ग्रुप के मार्केटिंग और बिजनेस मैनेजमेंट प्रमुख सलिल कुमार ने कहा कि ग्रेटर नोएडा वेस्ट के तेजी से विकास में बेहतर सड़क और अन्य सुविधाओं का सबसे बड़ा योगदान रहा है। उनका कहना है कि शाहबेरी डबल-डेकर फ्लाईओवर इस दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे इलाके की कनेक्टिविटी और भी मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि फ्लाईओवर बनने के बाद एनएच-9, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और ग्रेटर नोएडा जैसे प्रमुख इलाकों तक पहुंचना पहले से आसान हो जाएगा। इससे रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी और उनका सफर भी आसान होगा।

सलिल कुमार ने कहा कि जब भी इस इलाके में कोई बड़ा कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट पूरा हुआ है, तब घरों की मांग और निवेश दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी को देखते हुए ऐसे विकास कार्य बहुत जरूरी हैं। इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पहचान एनसीआर के तेजी से विकसित हो रहे प्रमुख रिहायशी इलाकों में और मजबूत होगी।

देश का पहला REIT-बेस्ड इंडेक्स फंड, Edelweiss Mutual Fund ने किया लॉन्च

एडलवाइज म्यूचुअल फंड (Edelweiss Mutual Fund) ने ‘एडलवाइज निफ्टी REITs एंड रियल्टी इंडेक्स फंड’ लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड पैसिव स्कीम है जो निफ्टी REITs और रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स (TRI) इंडेक्स को ट्रैक करती है। इस एक ही निवेश स्कीम के जरिए निवेशकों को लिस्टेड REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स)) और रियल एस्टेट डेवलपर्स, दोनों में निवेश का मौका मिलेगा। लिंक्डइन पर एक पोस्ट में सीईओ राधिका गुप्ता ने जिक्र किया कि यह अपनी तरह का पहला फंड है और यह निवेशकों को एक महत्वपूर्ण एसेट क्लास में डाईवर्सिफाईड निवेश का मौका देता है, जिसमें पहले से ही बड़े संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी है।

Edelweiss Mutual Fund के नई स्कीम की खास बातें

एडलवाइज म्यूचुअल फंड का एडलवाइज निफ्टी REITs एंड रियल्टी इंडेक्स फंड सब्सक्रिप्शन के लिए अगले महीने 5 अगस्त को खुलेगा और19 अगस्त को बंद होगा। इसमें कम से कम ₹100 का निवेश करना होगा, कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा और इसका अधिकतम TER (टोटल एक्सपेंस रेश्यो) 0.90% होगा। इस स्कीम को भरत लाहोटी (Bharat Lahoti) और मानसी जलगांवकर (Manasi Jalgaonkar) मैनेज करेंगे।

यह फंड निफ्टी रीट्स एंड रियल्टी इंडेक्स को ट्रैक करेगा जिसमें 60% लिस्टेड रीट्स और 40% रियल एस्टेट कंपनियां हैं। एडलवाइज म्यूचुअल फंड का कहना है कि जैसे-जैसे नए REITs लिस्ट होंगे और इंडेक्स में शामिल होंगे, REITs का हिस्सा बढ़ने की संभावना है। इसके पोर्टफोलियो में 15 सिक्योरिटीज शामिल होंगी और कम से कम 60% REITs में लगेगा और बाी लिस्टेड रियल एस्टेट स्टॉक्स में। किसी एक सिक्योरिटीज में अधिकतम 15% तक ही निवेश किया जाएगा और साथ ही प्रमोटर ग्रुप से जुड़ी कंपनियों में निवेश पर भी एग्रीगेट एक्सपोजर लिमिट तय की गई है।

भारत में तेजी से बढ़ रहा REIT मार्केट

एडलवाइज की स्कीम ऐसे समय में लॉन्च हो रही है जब भारत का लिस्टेड REIT मार्केट लगातार बढ़ रहा है। छह लिस्टेड REITs के पास कुल मिलाकर लगभग ₹3.1 लाख करोड़ के ग्रेड-ए कमर्शियल रियल एस्टेट एसेट्स हैं और साल 2019 से उन्होंने निवेशकों को ₹31,700 करोड़ रुपये से अधिक का डिस्ट्रीब्यूशन किया है। REITs को 1 जनवरी, 2026 से इक्विटी इंस्ट्रूमेंट्स के तौर पर रीक्लासिफाई किया गया और 1 जुलाई से वे इक्विटी इंडेक्स का हिस्सा बन गए, जिससे इंस्टीट्यूशनल और रिटेल निवेशकों के बीच उनकी अपील बढ़ी है।

एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) के मुताबिक देश के ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस का सिर्फ 13% हिस्सा ही फिलहाल लिस्टेड REITs के तहत आता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में कमर्शियल एसेट्स के मोनेटाइजेशन की काफी संभावनाएं मौजूद हैं। फंड हाउस का मानना है कि शहरीकरण, इन्फ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते खर्च, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) के विस्तार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ और इंस्टीट्यूशनल कैपिटल के बढ़ते निवेश जैसे जैसे स्ट्रक्चरल ड्राइवर्स से इस एसेट क्लास की लॉन्ग-टर्म ग्रोथ को मजबूती मिलेगी।

विकसित देशों की तुलना में भारत का REIT मार्केट अभी शुरुआती दौर में है। भारत में फिलहाल 6 लिस्टेड REITs हैं, जिनका अनुमानित मार्केट कैप करीब $1900 करोड़ है जबकि अमेरिका में 196 लिस्टेड REITs हैं, जिनका कुल मार्केट कैप करीब $1.4 ट्रिलियन यानी $1.4 लाख करोड़। इससे भारत में भविष्य में इस क्षेत्र के विस्तार की काफी संभावनाएं दिख रही हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Realty Stocks : निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने लगाई जबरदस्त छलांग, एनालिस्ट्स को इन चुनिंदा शेयरों में अभी नजर आ रहा दम

Real Estate Stocks : पिछले महीने निफ्टी रियल्टी इंडेक्स सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा है। इसमें 10.8% की बढ़त हुई और इसने बाकी सभी सेक्टर इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया। मजबूत बिक्री,नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी पाइपलाइन और रेजिडेंशियल रियल एस्टेट साइकल के बने रहने की उम्मीदों के चलते इन्वेस्टर्स लिस्टेड डेवलपर्स में रुचि ले रहे हैं। इसके चलते इस सेक्टर में अच्छी तेजी आई है।

निफ्टी रियल्टी इंडेक्स ने इस अवधि में दूसरे सेक्टर इंडेक्सों के मुकाबले काफी बेहतर प्रदर्शन किया है। इसी दौरान,निफ्टी IT इंडेक्स में 3.6% की बढ़त हुई,जबकि बैंकिंग,फाइनेंशियल सर्विस और अधिकांश दूसरे सेक्टर में मामूली बढ़त हुई या फिर उनमें सुस्ती रही। निफ्टी रियल्टी की यह बढ़त व्यापक रही जिसमें लोढ़ा डेवलपर्स,गोदरेज प्रॉपर्टीज़,प्रेस्टीज एस्टेट्स प्रोजेक्ट्स,ब्रिगेड एंटरप्राइजेज,ओबेरॉय रियल्टी,फीनिक्स मिल्स और अनंत राज जैसे शेयरों की अहम भूमिका रही।

मिरे एसेट शेरखान के रिसर्च एनालिस्ट अक्षय शेट्टी का कहना है कि यह तेजी किसी एक वजह से नहीं,बल्कि बेहतर मैक्रो स्थितियों और कंपनियों के मज़बूत होते फंडामेंटल्स के मिले-जुले असर से आ रही है। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में सुधार से जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है। साथ ही,बड़े लिस्टेड डेवलपर्स लगातार अच्छी प्री-सेल्स,मजबूत बिज़नेस डेवलपमेंट और लॉन्च की मजबूत पाइपलाइन की जानकारी दे रहे हैं,जिससे यह भरोसा मजबूत होता है कि रेजिडेंशियल रियल एस्टेट का साइकिल कायम है।

उन्होंने बताया कि 2026 की पहली छमाही में भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत निवेशकों ने लगभग 4.3-4.4 अरब डॉलर निवेश किया जो सालाना आधार पर 23-25% की बढ़ोतरी दिखाता है। कुल बैंक क्रेडिट ग्रोथ लगभग 18% रही,जबकि हाउसिंग लोन में सालाना आधार पर लगभग 11% की बढ़ोतरी देखने को मिली जिससे मांग में तेजी के संकेत मिल रहे हैं।

ब्याज दरों के कम रहने की उम्मीद से भी लोगों का भरोसा बढ़ा है। RBI का रेपो रेट 5.25% है और होम लोन की दरें लगभग 7.1% से शुरू हो रही हैं, जिससे घर खरीदना आसान हो गया है।

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की AVP और रिसर्च एनालिस्ट स्नेहा पोद्दार ने कहा कि यह तेजी रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में आए स्ट्रक्चरल सुधारों को दिखाती है। हाउसिंग सेक्टर की स्थिति अच्छी बनी हुई है। डिमांड अपने पीक लेवल से थोड़ी कम हुई है,लेकिन सप्लाई पर कंट्रोल रहा है,जिससे इन्वेंट्री का बहुत ज्यादा स्टॉक जमा नहीं हुआ है। लिस्टेड डेवलपर्स ने पिछले चार-पांच सालों में अपना कर्ज काफी कम किया है,जिससे कैश जेनरेशन बेहतर हुआ है और उनकी बैलेंस शीट मज़बूत हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में कंसोलिडेशन की वजह से बड़े ब्रांडेड डेवलपर्स लगातार मार्केट शेयर बढ़ा रहे हैं। साथ ही,प्रीमियम हाउसिंग सेगमेंट में मजबूत डिमांड और बेहतर बैलेंस शीट की वजह से डेवलपर्स जमीन के बड़े सौदे कर रहे हैं और नए इलाकों में अपना कारोबार फैला रहे हैं।

कहां करें निवेश?

पिछले महीने में हुई जबरदस्त बढ़त के बावजूद,एनालिस्ट्स का कहना है कि निवेशकों को इस सेक्टर में अच्छे रिटर्न के लिए अब चुनिंदा क्विलिटी शेयरों पर ही फोकस करना चाहिए। लिस्टेड कंपनियों में एनालिस्ट्स अब मजबूत बैलेंस शीट और समय पर काम पूरा करने की क्षमता वाले बड़े डेवलपर्स को प्राथमिकता दे रहे हैं।

अक्षय शेट्टी को मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में काम करने के तरीके,अच्छे कलेक्शन,प्रीमियम लॉन्च और सोच-समझकर होने वाले कैपिटल एलोकेशन के कारण लोढ़ा डेवलपर्स सबसे ज्यादा पसंद है। इसके अलावी उनको गोदरेज प्रॉपर्टीज भी पसंद है। उनका मानना है कि कंपनी को मज़बूत बिज़नेस डेवलपमेंट पाइपलाइन और एसेट-लाइट विस्तार की रणनीति क फायदा मिलेगा। अनंत राज भी उनकी फेवरिट लिस्ट में शामिल है। उनका कहना है कि इस कंपनी को रियल एस्टेट बिजनेस के साथ-साथ बढ़ते डेटा सेंटर प्लेटफॉर्म का भी फायदा मिलेगा।

स्नेहा पोद्दार ने कहा कि ने कहा कि मोतीलाल ओसवाल की पसंदीदा कंपनियों में लोढ़ा डेवलपर्स,DLF और गोदरेज प्रॉपर्टीज शामिल हैं,क्योंकि इनके पास अच्छा फ्री कैश फ्लो,प्रीमियम प्रोजेक्ट पाइपलाइन और काम करने की मजबूत क्षमता है।

 

 

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भारत में प्रॉपर्टी खरीदने की होड़ शुरू! इन शहरों में निवेश से मिलेगा बम्पर रिटर्न

अब्रॉड में रहने वाले इंडियन (NRI) अब भारत में घर और प्रॉपर्टी (property) खरीदने में पहले से ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। अच्छी कमाई, बेहतर रिटर्न (returns) और भारत के रियल एस्टेट बाजार (real estate market) में बढ़ते भरोसे की वजह से वे बड़े शहरों में तेजी से इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं, इन शहरों में सबसे ज्यादा इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं NRI:

Delhi-NCR (दिल्ली-एनसीआर)

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दिल्ली-एनसीआर, खासकर गुरुग्राम (Bengaluru), NRI इंवेटर्स की पसंदीदा जगहों में शामिल है। यहां लग्जरी प्रोजेक्ट्स, अच्छी सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी (metro connectivity), बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस (corporate office) और तेजी से डेवलप हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण प्रॉपर्टी की मांग लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि यहां इन्वेस्टमेंट करने पर अच्छे रिटर्न (return) की उम्मीद रहती है।

 

Bengaluru (बेंगलुरु)

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बेंगलुरु को भारत की IT केपिटल कहा जाता है। यहां देश-विदेश की बड़ी टेक कंपनियां (tech companies) मौजूद हैं, जिससे नौकरी के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं। बढ़ती आबादी और किराये के घरों की मांग के कारण NRI इस शहर को लंबे समय के इन्वेस्टमेंट के लिए अच्छा ऑप्शन मानते हैं।

 

Hyderabad (हैदराबाद)

 

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हैदराबाद तेजी से आगे बढ़ता हुआ रियल एस्टेट (real estate) बाजार है। यहां बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, आईटी सेक्टर (IT sector) का विस्तार और दूसरे बड़े शहरों की तुलना में किफायती प्रॉपर्टी कीमतें इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती हैं। यही कारण है कि हाल के वर्षों में NRI का रुझान इस शहर की ओर तेजी से बढ़ा है।

 

Mumbai (मुंबई)

 

This may contain: an aerial view of a highway in the city with tall buildings and trees on both sides

मुंबई देश की आर्थिक राजधानी होने के साथ-साथ NRI इन्वेस्टर्स की सबसे पसंदीदा रियल एस्टेट मार्केट भी है। यहां लग्जरी अपार्टमेंट, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स और ऊंची प्रॉपर्टी वैल्यू (property value) इन्वेस्टर्स को अट्रैक्ट करती है। 2024 में भारतीय रियल एस्टेट के प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट का लगभग 50% हिस्सा मुंबई को मिला, जिससे इसकी पॉपुलैरिटी और मजबूत हुई।

 

अच्छे रिटर्न (Good Returns) की उम्मीद

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भारत के कई शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में NRI मानते हैं कि आज किया गया इन्वेस्टमेंट आने वाले वर्षों में अच्छा प्रॉफिट दे सकता है। इसी वजह से वे रियल एस्टेट को सिक्योर और फायदेमंद इन्वेस्टमेंट मानते हैं।

 

किराये से कमाई (Rental Income) का मौका

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कई NRI भारत में घर खरीदकर उसे किराये पर दे देते हैं। इससे उन्हें हर महीने रेगुलर इनकम होती है और साथ ही समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत (property’s value) बढ़ने का भी फायदा मिलता है।

 

निवेश (Investment) करना हुआ आसान

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सरकार ने NRI के लिए प्रॉपर्टी खरीदने की प्रोसेस पहले से ज्यादा आसान बना दी है। डिजिटल बैंकिंग (digital banking), ऑनलाइन डॉक्यूमेंटेशन (documentation) और सिंपल रेगुलेशन की वजह से अब विदेश में रहकर भी भारत में इन्वेस्टमेंट करना आसान हो गया है।

 

परिवार (Family) और भविष्य (Future) की जरूरत

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कई NRI अपने माता-पिता या परिवार के रहने के लिए भारत में घर खरीदते हैं। वहीं कुछ लोग रिटायरमेंट (retirement) के बाद भारत लौटने की प्लानिंग बनाकर पहले से ही प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं।

650 करोड़ की एलिवेटेड रोड से बदलेगा NCR का सफर! लाल कुआं-दादरी का 1 घंटे का रास्ता सिर्फ 20 मिनट में

गाजियाबाद के लाल कुआं और दादरी के बीच जीटी रोड पर रोजाना सफर करने वालों को लंबे समय से भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ रहा है, खासकर हफ्ते के दिनों में पीक आवर्स के दौरान। ऐसे में चौधरी मोड़, न्यू बस स्टैंड और रेलवे क्रॉसिंग वाले हिस्से पर अक्सर जाम लगने की वजह से यात्रियों, कमर्शियल गाड़ियों और स्थानीय निवासियों को लंबे समय तक फंसे रहना पड़ता है।

News18 के अनुसार, अब लाल कुआं और दादरी के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने का लंबे समय से लंबित प्रस्ताव एक कदम और आगे बढ़ गया है; अधिकारियों ने इस रूट पर 12 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड रोड कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा है, जिससे जाम कम होने और यात्रा का समय काफी कम होने की उम्मीद है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड GT रोड के उस बड़े रीडेवलपमेंट प्लान का हिस्सा है जिसका मकसद गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। सेतु निगम ने इस कॉरिडोर के लिए डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) और सर्वे का काम पूरा कर लिया है।

करोड़ों की नई परियोजनाओं को मिलेगी मंजूरी

लगभग 650 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रस्ताव को गाजियाबाद के सांसद अतुल गर्ग ने आगे बढ़ाया था और अब इसे मंजूरी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के पास भेजा गया है। मंजूरी मिलने के बाद, यह एलिवेटेड कॉरिडोर दादरी की ओर जाने वाले वाहनों को कई व्यस्त चौराहों और लोकल ट्रैफिक पॉइंट्स से बचाकर निकलने में मदद करेगा, जिसकी वजह से जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।

फिलहाल अभी, GT रोड पर भारी ट्रैफिक के कारण लाल कुआं और दादरी के बीच सफर में 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय लग सकता है। जबकि चौधरी मोड़, न्यू बस स्टैंड और रेलवे क्रॉसिंग के पास जाम की वजह से लोगों को लंबे समय तक रुकना पड़ता है।

ट्रैफिक होगा कम

अधिकारियों का मानना ​​है कि एलिवेटेड रोड से गुजरने वाले ट्रैफिक के लिए एक अलग रास्ता मिलने से सफर का समय घटकर लगभग 15 से 20 मिनट हो सकता है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना सफर करने वालों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट दोनों तरफ सफर का समय कम करके उनके रोजाना लगभग एक घंटे बचा सकता है।

प्रस्तावित कॉरिडोर सीधे लाल कुआं से दादरी तक जाएगा और रास्ते में पड़ने वाले बड़े चौराहों से होकर नहीं गुजरेगा। दूर जाने वाला ट्रैफिक एलिवेटेड हिस्से से गुजरेगा, जबकि लोकल गाड़ियां नीचे वाली सड़क का इस्तेमाल करती रहेंगी।

अधिकारियों को उम्मीद है कि लोकल और लंबी दूरी के ट्रैफिक के अलग-अलग होने से आवागमन बेहतर होगा, चार प्रमुख सिग्नलों पर लगने वाला जाम कम होगा और इस रास्ते की सबसे बड़ी समस्या भी दूर होगी। दरअसल, अभी एक ही सड़क पर भारी कमर्शियल वाहन, औद्योगिक क्षेत्र का ट्रैफिक और स्थानीय यात्रियों की आवाजाही होती है, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनती है।

बता दें कि GT रोड उन सबसे व्यस्त सड़क कॉरिडोर में से एक है जो दिल्ली को गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों से जोड़ता है। दिल्ली, सीलमपुर, साहिबाबाद, मोहन नगर और घंटा घर से आने वाला ट्रैफिक लाल कुआं की तरफ आता है, जिससे मौजूदा सड़क नेटवर्क पर काफी दबाव पड़ता है।

गौरतलब है कि लाल कुआं पर दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से आने वाली गाड़ियां, अलीगढ़ की ओर जाने वाली गाड़ियां और दादरी व सूरजपुर की ओर जाने वाले भारी इंडस्ट्रियल ट्रैफिक की वजह से जाम की समस्या बढ़ जाती है। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां पहले से मौजूद फ्लाईओवर ने कुछ हद तक राहत जरूर दी है, लेकिन नीचे वाली सड़क पर अभी भी भारी ट्रैफिक रहता है, खासकर दादरी NTPC, कोट और आस-पास के इंडस्ट्रियल इलाकों में जाने वाले ट्रकों की वजह से।

उम्मीद है कि एलिवेटेड रोड से गाजियाबाद, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और दादरी रोड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। साथ ही, इससे सूरजपुर, कोट और दादरी के इंडस्ट्रियल हब को भी फायदा होगा, क्योंकि माल की ढुलाई आसान हो जाएगी।

अधिकारियों को यह भी उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करने वाले लोगों के लिए एक वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध कराएगा, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की सर्विस लेन पर ट्रैफिक का दबाव होगा।

इस प्रोजेक्ट का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ने की उम्मीद है। NCR में पहले भी देखा गया है कि जब किसी इलाके में कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होता है, तो वहां घरों की मांग बढ़ने लगती है। माना जा रहा है कि प्रस्तावित एलिवेटेड रोड का भी ऐसा ही असर देखने को मिल सकता है।

लाल कुआं, जिसे पहले मुख्य रूप से एक ट्रांजिट पॉइंट माना जाता था, धीरे-धीरे एक रिहायशी इलाके के तौर पर उभरा है क्योंकि यह वेव सिटी, क्रॉसिंग्स रिपब्लिक और राज नगर एक्सटेंशन से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

वहीं, नोएडा में प्रॉपर्टी की कीमतें लगातार बढ़ने के कारण, कई घर खरीदार गाजियाबाद और आस-पास के इलाकों में तुलनात्मक रूप से सस्ते घरों के विकल्प तलाशने लगे हैं।

एलिवेटेड रोड बनने के बाद दादरी, कोट गांव और रोजा-याकूबपुर क्षेत्र जैसे इलाकों की लोकप्रियता बढ़ सकती है, क्योंकि यहां से गाजियाबाद पहुंचना आसान हो जाएगा।

रिपोर्टों से पता चलता है कि इस इलाके में अभी दादरी की तरफ 45 लाख रुपये से कम कीमत वाले 2BHK घरों की मांग है, जबकि लाल कुआं और क्रॉसिंग्स रिपब्लिक में खरीदार 65 लाख रुपये से कम कीमत वाले 2BHK और 3BHK अपार्टमेंट देख रहे हैं।

फिलहाल यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रहा है। जैसे ही इसे हरी झंडी मिलेगी, अधिकारी जमीन से जुड़े काम, अतिक्रमण हटाने और बिजली-पानी जैसी सार्वजनिक सुविधाओं (यूटिलिटी) को शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करेंगे। आमतौर पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में यही चरण सबसे ज्यादा समय लेते हैं।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल कुआं से न्यू बस स्टैंड तक के एलिवेटेड सेक्शन की लागत लगभग 650 करोड़ रुपये आंकी गई है, जबकि दादरी की ओर जाने वाले पूरे 12 किलोमीटर के कॉरिडोर को चरणों में विकसित किए जाने की उम्मीद है। अगर मंजूरी और शुरुआती काम योजना के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो अगले साल तक निर्माण कार्य शुरू हो सकता है, जिससे NCR के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक पर यात्रा करने वाले लोगों को लंबे समय से जाम की समस्या से राहत मिलेगी।

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Market Outlook : गिरावट के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 23 जुलाई को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : 22 जुलाई को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए और निफ्टी 24,000 के नीचे बंद हुआ। ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 715.06 अंक या 0.92 प्रतिशत गिरकर 76,755.05 पर और निफ्टी 191.45 अंक या 0.79 प्रतिशत गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। लगभग 1443 शेयरों में बढ़त हुई, 2616 शेयरों में गिरावट आई और 170 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन, जियो फाइनेंशियल, इंफोसिस, एसबीआई और डॉ. रेड्डीज़ लैब्स शामिल रहे। जबकि बढ़ने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, नेस्ले, टाटा कंज्यूमर, पावर ग्रिड कॉर्प और ओएनजीसी शामिल रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत की गिरावट आई।

सेक्टर के हिसाब से परफॉर्मेंस ज्यादातर नेगेटिव रहा। निफ्टी FMCG सबसे ज्यादा बढ़ने वाला सेक्टर रहा, जिसमें 0.65% की बढ़त हुई, इसके बाद निफ्टी ऑटो में 0.18% की बढ़त हुई। गिरावट वाले सेक्टर में, निफ्टी मीडिया सबसे खराब परफॉर्मेंस वाला सेक्टर रहा, जिसमें 2.68% की गिरावट आई। इसके बाद निफ्टी रियल्टी (-2.6%), निफ्टी PSU बैंक (-1.8%), निफ्टी प्राइवेट बैंक (-1.4%), निफ्टी IT (-1.5%), निफ्टी बैंक (-1.2%), निफ्टी फार्मा (-1.3%), निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (-0.86%), निफ्टी इंफ्रा (-0.85%), निफ्टी ऑयल एंड गैस (-0.6%), निफ्टी मेटल (-0.48%) और निफ्टी एनर्जी (-0.3%) रहे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में हेड ऑफ़ रिसर्च विनोद नायर का कहना है कि आज भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। US-ईरान के बीच जारी तनाव और अहम ग्लोबल शिपिंग रूट पर हूथी गुट की वजह से आई दिक्कतो ने तेल की सप्लाई से जुड़ी चिंता बढ़ा दी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं और रुपया कमजोर हुआ। घरेलू महंगाई को लेकर फिर से बढ़ती चिंताओं के कारण बाजार में जोखिम लेने से बचने का माहौल हावी रहा। इसने उम्मीद से बेहतर बिजनेस अपडेट और Q1 के अच्छे नतीजों के असर को कम कर दिया।

रियल एस्टेट, बैंकिंग और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे ब्याज दरों पर निर्भर सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट आई। फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट पर US के प्रस्तावित टैरिफ को लेकर फिर से बनी अनिश्चितता के बीच फार्मा शेयरों पर भी दबाव रहा।

सावधानी भरे माहौल के बावजूद, FMCG और ऑटो शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सेक्टर की बड़ी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से इन्हें सहारा मिला, जो यह दिखाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच भी निवेशक उन कंपनियों को पसंद कर रहे हैं जिनकी कमाई में मज़बूत ग्रोथ दिख रही है।

निफ्टी व्यू

Hedged.in में एसोसिएट वाइस प्रेसिडेंट-HNI ​​एंड डेरिवेटिव्स रियांक अरोड़ा का कहना है कि आज के सेशन में भारतीय इक्विटी मार्केट में हर तरफ गिरावट नजर आई। लगातार बिकवाली के दबाव और निवेशकों के सतर्क रवैये के बीच बेंचमार्क इंडेक्स काफी नीचे बंद हुए। अहम सेक्टरों में कमजोरी और प्रॉफिट बुकिंग ने इंडेक्स को नीचे धकेल दिया, जिससे बाजार में रिस्क-ऑफ (जोखिम से बचने का) मूड दिखा।

निफ्टी 191.45 अंक यानी 0.79% गिरकर 23,996.25 पर बंद हुआ। यह 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया, जो शॉर्ट-टर्म कमजोरी का संकेत है। अब इसके लिए 23,950–23,900 के आसपास तत्काल सपोर्ट है। उसके बाद 23,800 के पास अगला मजबूत सपोर्ट जोन है। ऊपर की तरफ, 24,100–24,200 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। पॉजिटिव मोमेंटम वापस पाने के लिए लगातार इन स्तरों से ऊपर बने रहना जरूरी होगा।

BSE सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92% गिरकर 76,755.05 पर बंद हुआ। इंडेक्स में हर तरफ बिकवाली हुई और यह दिन के निचले स्तर के पास बंद हुआ। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 76,600–76,400 के आसपास है, जबकि रेजिस्टेंस 77,000–77,300 के पास दिख रहा है। रेजिस्टेंस जोन से ऊपर एक मजबूत चाल बुलिश सेंटीमेंट को बहाल करने में मदद कर सकती है।

आज की गिरावट की वजह हर तरफ से हुई प्रॉफिट बुकिंग और बाजार का सतर्क रवैया रहा। हालांकि शॉर्ट-टर्म मोमेंटम कमजोर हुआ है, लेकिन जब तक अहम सपोर्ट लेवल बचे हुए हैं, मीडियम-टर्म ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है। ट्रेडर्स को सलाह दी जाती है कि वे चुनिंदा शेयरों पर ध्यान दें, आक्रामक लॉन्ग पोजीशन लेने से बचें और सख्त रिस्क मैनेजमेंट के साथ मजबूत सपोर्ट जोन के पास गिरावट पर खरीदारी का तरीका अपनाएं।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें फिर से भारतीय इक्विटी मार्ट के लिए परेशानी का कारण बन गई हैं। जहां कच्चा तेल 50EMA के ऊपर बना हुआ है, वहीं निफ्टी 50EMA के नीचे जाने की कगार पर है। ऐसा लगता है कि निफ्टी और कच्चा तेल फिर से एक-दूसरे के विपरीत दिशा में चल रहे हैं।

निफ्टी के डेली चार्ट पर कंसोलिडेशन का दौर नीचे की ओर टूटता हुआ दिख रहा है। RSI में बेयरिश क्रॉसओवर है, जो निकट भविष्य में कमजोर मोमेंटम का संकेत दे रहा है। अगर निफ्टी 23900 के नीचे गिरता है तो गिरावट 23700/23600 तक बढ़ सकती है। शॉर्ट टर्म में ऊपरी स्तर 24100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा है।

कोटक सिक्योरिटीज में हेड ऑफ इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा कि आज बेंचमार्क इंडेक्स में बड़ी गिरावट आई। निफ्टी 191 अंक गिरकर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में 715 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो रियल्टी और मीडिया इंडेक्स में 2.5 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई, जबकि बाजार का मूड खराब होने के बावजूद कुछ चुनिंदा FMCG और ऑटो शेयरों में तेजी दिखी। तकनीकी तौर पर निफ्टी 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,100 के सपोर्ट जोन से नीचे आ गया है और इस गिरावट के बाद बिकवाली का दबाव बढ़ गया है। डेली चार्ट पर एक लॉन्ग ‘बेयरिश कैंडल’ बनी है, जो मौजूदा स्तरों से और गिरावट का संकेत देती है।

श्रीकांत चौहान मानना ​​है कि जब तक निफ्टी 24,100 के नीचे ट्रेड कर रहा है, तब तक गिरावट का दौर जारी रहने की संभावना है। यह गिरावट 50-डे SMA या 23,850 के स्तर तक जारी रह सकती है। इसके बाद और गिरावट हो सकती है, जिससे इंडेक्स 23,750-23,700 के स्तर तक जा सकता है। दूसरी ओर, 24,100 के स्तर के ऊपर जाने पर बाजार का मूड बदल सकता है। इस स्तर के ऊपर, बाजार में 24,200-24,250 तक की रिकवरी हो सकती है। इंट्राडे मार्केट की स्थिति अनिश्चित और उतार-चढ़ाव वाली है। इसलिए, डे ट्रेडर्स के लिए लेवल-बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

बैंक निफ्टी व्यू

SBI सिक्योरिटीज में हेड-टेक्निकल एंड डेरिवेटिव्स रिसर्च, सुदीप शाह का कहना है कि बैंक निफ्टी जो पिछले आठ ट्रेडिंग सेशन से 58,597–57,287 की रेंज में बना हुआ था, उसमें भी आज एक बड़ा ब्रेकडाउन देखने को मिला। इंडेक्स ने एक बड़ी बेयरिश कैंडल बनाई और 8 जुलाई के बाद पहली बार अपने 20-डे EMA के नीचे बंद हुआ। गिरती हुई MACD लाइन और बढ़ते हुए रेड हिस्टोग्राम बार नीचे की ओर बढ़ते मोमेंटम का संकेत दे रहे हैं।

आगे बैंक निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 56700-56600 जोन में है। अगर यह लगातार इस जोन के नीचे बना रहता है, तो बैंक निफ्टी में और कमजोरी आ सकती है और यह शॉर्ट टर्म में 56300 और फिर 56000 तक गिर सकता है। ऊपर की तरफ, बैंक निफ्टी के लिए तत्काल रेजिस्टेंस 57500-57600 जोन में है।

 

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DDA फ्लैट में अब बिना अनुमति क्या-क्या बदल सकते हैं? जानिए रिनोवेशन के नए नियम

DDA renovation norms: राजधानी दिल्ली में दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के फ्लैट मालिकों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। DDA ने अपने फ्लैट्स में मरम्मत और रिनोवेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कई तरह के संशोधनों को मंजूरी प्रक्रिया से मुक्त कर दिया है। इसी महीने से लागू हुई इस नई नीति के तहत अब फ्लैट मालिक बालकनी की रेलिंग/पैरापेट बढ़ाने, घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग दीवार हटाने, दरवाजे शिफ्ट करने, लॉफ्ट बनाने, वाटरप्रूफिंग के साथ फ्लोरिंग बदलने और पीवीसी पानी की टंकी लगाने जैसे काम बिना DDA या नगर निगम की पूर्व अनुमति के करा सकेंगे।

अब बिना अनुमति के कर सकेंगे ये बदलाव

DDA अधिकारियों के मुताबिक संशोधित नीति के तहत ऐसे बदलावों को Condonable यानी स्वीकार्य कैटेगरी में रखा गया है। इनके लिए पहले से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।

बालकनी और सुरक्षा: बेहतर सुरक्षा के लिए बालकनी के पैरापेट (रेलिंग) की ऊंचाई को ग्रिल या ग्लेजिंग लगाकर 5 फीट तक बढ़ाया जा सकता है।

बाउंड्री वॉल: वेंटिलेशन को बनाए रखते हुए फ्रंट और रियर आंगन की दीवारों को वायर फेंसिंग यानी जाली के जरिए 7 फीट तक ऊंचा किया जा सकता है।

दरवाजे बदलना या शिफ्ट करना: फ्रंट या रियर आंगन में नए दरवाजे लगाए जा सकते हैं या मौजूदा दरवाजों की जगह बदली जा सकती है, बशर्ते इससे आम रास्ता बाधित न हो।

दीवारें हटाना: रहने के लिए बड़ी जगह बनाने के उद्देश्य से घर के अंदर की गैर-लोड-बेयरिंग इंटरनल पार्टिशन वॉल (लगभग 4.5 इंच मोटी दीवार) को बिना अनुमति के हटाया जा सकता है।

इंटीरियर और यूटिलिटी अपग्रेड: इसके तहत सामान रखने के लिए लॉफ्ट बनाना, वाटरप्रूफिंग ट्रीटमेंट के साथ फ्लोरिंग (फर्श) बदलना और ग्राउंड फ्लोर या गैरेज लेवल पर अतिरिक्त पीवीसी (PVC) पानी की टंकियां लगाना शामिल है। इनके लिए अब पूर्व अनुमति की जरूरत नहीं है।

DDA ने क्यों बदले 2007 से चले आ रहे नियम?

DDA अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली की कई हाउसिंग सोसायटी दशकों पहले बनी थीं। तब परिवारों की जरूरतें आज से अलग थीं। समय के साथ इनमें रहने वाले लोगों को स्टोरेज, वेंटिलेशन या स्पेस का सही इस्तेमाल करने के लिए मामूली बदलाव करने पड़ते थे लेकिन छोटे-छोटे काम के लिए भी मंजूरी लेने में लंबा समय लगता था और शिकायतें बढ़ती थीं।

एक वरिष्ठ DDA अधिकारी ने बताया कि DDA फ्लैटों में बदलाव और रिनोवेशन को नियंत्रित करने वाली नीति में लगभग दो दशकों से कोई बदलाव नहीं हुआ था। 2007 के बाद यह पहला मौका है जब प्राधिकरण ने नीति में संशोधन किया है ताकि स्ट्रक्चरल सेफ्टी को नुकसान पहुंचाए बिना घर मालिकों को सहूलियत दी जा सके।

उन्होंने कहा कि इस नई नीति का मकसद अस्पष्टता को खत्म करना है ताकि DDA का प्रवर्तन दल रूटीन होम इम्प्रूवमेंट की बजाय अवैध कब्जों और असुरक्षित निर्माण पर कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित कर सके।

किन बदलावों के लिए अभी भी अनिवार्य होगी मंजूरी?

DDA ने साफ किया है कि इस नीति का मतलब अनियंत्रित या अवैध निर्माण की छूट नहीं है। नीचे दिए गए बड़े और स्ट्रक्चरल बदलावों के लिए औपचारिक अनुमति और प्रमाणन अनिवार्य रहेगा-

स्ट्रक्चरल बदलाव: फ्लैट के मुख्य ढांचे, एक्सटेंशन (विस्तार), बालकनी/छत को पूरी तरह ढकने या स्ट्रक्चरल सेफ्टी को प्रभावित करने वाले किसी भी काम के लिए DDA की मंजूरी लेनी होगी।

किचन और बाथरूम: रसोई या शौचालय में किया जाने वाला ऐसा बदलाव जो इमारत के ढांचे को प्रभावित करता हो।

ऐसे प्रस्तावों के लिए रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर से प्रमाण पत्र, निर्धारित शुल्क और कई मामलों में प्रभावित पड़ोसियों की सहमति जमा करनी होगी। कॉमन एरिया (साझा रास्तों) पर अवैध कब्जा करना, अतिरिक्त मंजिलें बनाना या लोड-बेयरिंग दीवारों से छेड़छाड़ करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा और ऐसा करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट पर क्या पड़ेगा असर?

रियल एस्टेट विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि DDA के इस फैसले से दिल्ली के पुराने आवासीय क्षेत्रों के फ्लैट मालिकों और संभावित खरीदारों को सबसे बड़ा फायदा होगा। द्वारका, वसंत कुंज, रोहिणी, पीतमपुरा, मयूर विहार और जनकपुरी जैसे प्रमुख इलाकों में स्थित पुराने DDA फ्लैटों की रीसेल वैल्यू और मांग में सुधार देखने को मिल सकता है। पहले खरीदार कानूनी मंजूरी के झंझट के कारण पुराने फ्लैट खरीदने से कतराते थे लेकिन अब वे कानूनी रूप से अपने हिसाब से फ्लैट को आधुनिक बना सकेंगे।

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म राइज इंफ्रावेंचर्स लिमिटेड के वाइस प्रेसिडेंट मोहित गावरी ने बताया कि, ‘पहले DDA फ्लैटों में हर छोटे बदलाव के लिए मंजूरी की जरूरत होती थी जिससे समय और लागत दोनों बढ़ते थे और खरीदार हिचकिचाते थे। ये नए नियम उस अड़चन को दूर करते हैं और DDA घरों को बाजार में अधिक बिक्री योग्य बनाते हैं। स्थापित DDA कॉलोनियों में जहां नई हाउसिंग सप्लाई सीमित है, यह फ्लेक्सिबिलिटी बेहतर रीसेल डिमांड और अच्छी कीमतें दिलाने में मदद करेगी।’

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नियमों में ढील मिलने के बाद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि फ्लैट मालिकों द्वारा रेनोवेशन कराने से आर्किटेक्ट्स, ठेकेदारों, इंटीरियर डिजाइनरों और रिनोवेशन कंपनियों के काम और गतिविधियों में तेजी आएगी।

Anant Raj Demerger: अनंत राज दो हिस्सों में बंटेगी, डेटा सेंटर कारोबार के लिए अलग लिस्टेड कंपनी बनेगी

Anant Raj Demerger: रियल एस्टेट कंपनी Anant Raj Ltd ने अपने कारोबार में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। कंपनी के बोर्ड ने एक कॉम्पोजिट स्कीम ऑफ अरेंजमेंट को मंजूरी दी है। इसके तहत डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विसेज बिजनेस को रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार से अलग किया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद ग्रुप की दो अलग-अलग लिस्टेड कंपनियां होंगी।

हालांकि, इस योजना को लागू करने से पहले NCLT, SEBI, स्टॉक एक्सचेंज, शेयरधारकों और अन्य नियामकीय मंजूरियां मिलना जरूरी होगा।

किस कंपनी के पास कौन सा कारोबार रहेगा?

डिमर्जर के बाद Anant Raj Ltd रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर कारोबार पर फोकस करेगी। कंपनी का ध्यान रेजिडेंशियल टाउनशिप, लग्जरी हाउसिंग, कमर्शियल प्रोजेक्ट्स और हॉस्पिटैलिटी बिजनेस पर रहेगा।

वहीं, Ashok Cloud Private Limited डेटा सेंटर, क्लाउड सर्विसेज और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का कारोबार संभालेगी। कंपनी AI वर्कलोड, को-लोकेशन सर्विस, सॉवरेन पब्लिक क्लाउड, डिजास्टर रिकवरी, क्लाउड माइग्रेशन और डेटा बैकअप जैसी सेवाएं देगी।

शेयरधारकों को क्या मिलेगा?

कंपनी ने बताया कि डिमर्जर लागू होने के बाद योग्य शेयरधारकों को Anant Raj Ltd के हर एक ₹2 फेस वैल्यू वाले शेयर के बदले Ashok Cloud Private Limited का ₹2 फेस वैल्यू वाला एक शेयर मिलेगा।

हालांकि, डिमर्जर के बाद भी Ashok Cloud, Anant Raj Ltd की सब्सिडियरी बनी रहेगी। कंपनी की मौजूदा हिस्सेदारी रद्द नहीं की जाएगी।

कंपनी ने क्यों लिया यह फैसला?

कंपनी का कहना है कि दोनों कारोबार अब अलग-अलग दिशा में बढ़ रहे हैं। दोनों की पूंजी जरूरत, बिजनेस मॉडल और ग्रोथ स्ट्रेटजी भी अलग है। ऐसे में अलग कंपनियां बनने से दोनों बिजनेस अपने-अपने क्षेत्र पर ज्यादा फोकस कर सकेंगे।

कंपनी का मानना है कि इससे डेटा सेंटर बिजनेस को अलग पहचान मिलेगी। उसकी वैल्यू बेहतर तरीके से सामने आएगी। साथ ही सेक्टर-फोकस्ड निवेशकों को आकर्षित करने, रणनीतिक साझेदारी करने और नए निवेश जुटाने में भी आसानी होगी।

Anant Raj के एमडी ने क्या कहा?

Anant Raj के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित सरीन ने कहा कि रियल एस्टेट और डेटा सेंटर कारोबार अब दो अलग प्लेटफॉर्म बन चुके हैं। दोनों की जरूरतें और ग्रोथ का रास्ता अलग है। ऐसे में डिमर्जर से दोनों कंपनियों को स्वतंत्र रणनीति बनाने और तेजी से विस्तार करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर और क्लाउड कारोबार को एक ही प्लेटफॉर्म के तहत लाने से कॉरपोरेट स्ट्रक्चर सरल होगा। इससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और निवेशकों के लिए पारदर्शिता भी बढ़ेगी।

यह घोषणा बाजार बंद होने के बाद हुई। Anant Raj का शेयर मंगलवार को BSE पर 1.50% की गिरावट के साथ ₹609.60 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।