TCS Q2 Results: प्रॉफिट 4% बढ़कर ₹13884 करोड़, प्रति शेयर 12 रुपये डिविडेंड का ऐलान

TCS Q2 Results: देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टीसीएस ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है। इस दौरान कंपनी का प्रॉफिट तिमाही दर तिमाही आधार पर 4 फीसदी बढ़कर 13,884 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया। कंपनी के शेयर पर नतीजों का असर 9 अक्तूबर यानी बुधवार को दिखेगा।

सितंबर तिमाही में कॉन्स्टैंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ 0.5 फीसदी

टीसीएस के सितंबर तिमाही के नतीजे एनालिस्ट्स के अनुमान से थोड़े कमजोर रहे। कंपनी की कॉन्स्टैंट करेंसी रेवेन्यू ग्रोथ 0.5 फीसदी रही। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने इसके 0.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था। सितंबर तिमाही में 13,884 करोड़ का प्रॉफिट जून तिमाही के 13,349 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

दूसरी तिमाही में रेवेन्यू एनालिस्ट्स के अनुमान से थोड़ा कम 

लेकिन तुलना के लिए बेस तिमाही का प्रॉफिट 13,849 करोड़ रुपये है, क्योंकि इसमें वन-टाइम का 668 करोड़ रुपये का एक्सेप्शनल आइटम शामिल है, जिसकी वजह एक लीगल क्लेम का सेटलमेंट है। सितंबर तिमाही में टीसीएस का रेवेन्यू 73,188 करोड़ रुपये रहा। सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में एनालिस्ट्स ने इसके 73,225 करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था।

टैक्स से पहले अर्निंग्स (EBIT) 17,553 करोड़ रुपये

तिमाही दर तिमाही आधार पर सितंबर तिमाही में कंपनी की रेवेन्यू ग्रोथ 1.3 फीसदी ज्यादा रही। डॉलर में कंपनी का रेवेन्यू 764.2 करोड़ डॉलर रहा। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में 765.7 करोड़ डॉलर के अनुमान के करीब है। सितंबर तिमाही में कंपनी की इंटरेस्ट और टैक्स से पहले अर्निंग्स (EBIT) 17,553 करोड़ रुपये रही। यह सीएनबीसी-टीवी18 के पोल में 17,738 करोड़ के अनुमान से थोड़ा ज्यादा है।

EBIT मार्जिन 24 फीसदी पर स्थिर रहा

सितंबर तिमाही में कंपनी का EBIT मार्जिन 24 फीसदी पर स्थिर रहा। जून तिमाही में भी यह इतना ही था। सितंबर तिमाही में कंपनी को 9.6 अरब डॉलर की डील मिली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से कंपनी का रेवेन्यू 3 अरब डॉलर से ज्यादा रहा। अब कंपनी के कुल रेवेन्य में इसकी हिस्सेदारी 10 फीसदी से ज्यादा हो गई है।

पोर्शे से डील से एआई वर्टिकल को मजबूती मिलेगी

टीसीएस ने पोर्शे के साथ एक बड़ी डील की है। इसके तहत वह पोर्शे की मैनेजमेंट एंड आईटी कंसल्टिंग सब्सिडियरी MHP का 100 फीसदी अधिग्रहण करेगी। इस डील की वैल्यू 32 करोड़ यूरो होगी। पोर्शे और टीसीएस ने 1.5 अरब यूरो की एक पांच साल की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप की है। इससे टीसीएस को अपने एआई वर्टिकल के विस्तार में मदद मिलेगी।

प्रति शेयर 12 रुपये डिविडेंड का ऐलान 

टीसीएस ने प्रति शेयर 12 रुपये डिविडेंड का ऐलान किया है। इसके लिए कंपनी ने रिकॉर्ड डेट 14 अक्तूबर, 2026 तय की है। कंपनी शेयरहोल्डर्स को डिविडेंड का पेमेंट 30 अक्तूबर, 2026 को करेगी। 8 अक्तूबर को टीसीएस के शेयर 0.16 फीसदी गिरकर 2,077 रुपये पर बंद हुए। इस साल कंपनी का शेयर 35 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

रॉकेट बन सकता है इस आईटी बीपीओ हेल्थकेयर कंपनी का शेयर, नुवामा ने दी खरीदने की सलाह

सैजिलिटी का शेयर रॉकेट बन सकता है। यह कंपनी आईटी बीपीओ हेल्थकेयर सर्विस ऑफर करती है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म नुवामा ने ‘बाय’ रेटिंग यानी खरीदने की सलाह के साथ इस शेयर को कवर करना शुरू किया है। 8 अक्टूबर को यह शेयर 1.86 फीसदी चढ़कर 43.90 रुपये चल रहा था।

करेंट लेवल से करीब 40 फीसदी चढ़ सकता है शेयर 

Nuvama ने Sagility के शेयर के लिए 60 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। इसका मतलब है कि यह शेयर करेंट लेवल से करीब 40 फीसदी चढ़ सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने 8 अक्टूबर की अपनी रिपोर्ट में कंपनी के बारे में कई बातें बताई हैं। उसने कहा है कि हेल्थकेयर बिजनेस प्रोसेस मैनेजमेंट (BPM) एआई आधारित बदलाव के युग में प्रवेश कर रहा है। अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में इस बिजनेस के लिए बड़े मौके हैं।

अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में कंपनी के लिए बड़े मौके

ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि अमेरिका में हेल्थकेयर ऑपरेशंस पर खर्च बढ़कर 2028 के अंत तक 259 अरब डॉलर पहुंच जाने का अनुमान है। 2023 में यह 201 अरब डॉलर था। नुवामा का मानना है कि आउटसोर्स्ड स्पेंड के इन-हाउस ऑपरेशंस से आगे निकल जाने का अनुमान है। नुवामा ने सैजिलिटी की वैल्यूएशंस FY28-29 के अनुमानित ईपीएस का 18 गुना बताया है। कंपनी के पास क्रॉस-सेल के बड़े मौके हैं।

कर्ज के रीपमेंट से बैलेंसशीट को मिलेगी मजबूती

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि फ्री कैश फ्लो जेनरेशन और डेट रीपेमेंट से सैजिलिटी की बैलेंशशीट को मजबूती मिलेगी। उसका मानना है कि इस फाइनेंशियल ईयर के अंत तक सैजिलिटी नेट कैश कंपनी बन जाएगी। FY26-29 के बीच डॉलर में सैजिलिटी के रेवेन्यू का CAGR 13 फीसदी से ज्यादा रह सकता है। इस दौरान एडजस्टेड EPS का सीएजीआर 19 फीसदी रह सकता है। EBITDA मार्जिन 24-25 फीसदी रह सकता है।

ग्रोथ का गाइडेंस डबल डिजिट में बना रहेगा

सैजिलिटी ग्रुप के सीईओ एवं एमडी रमेश गोपालन ने पिछले महीने बताया था कि अमेरिका में हेल्थकेयर सर्विसेज ऑफर करने वाली कंपनियों पर ज्यादा दबाव है। इससे आउटसोर्सिंग की मांग बढ़ रकही है। उन्होंने यह भी कहा था कि FY27 के लिए ग्रोथ का कंपनी का गाइडेंस लो डबल-डिजिट में होगा।

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कमजोर बाजार में भी शेयरो में तेजी 

सैजिलिटी के शेयरों में 8 अक्टूबर को तब तेजी देखने को मिली, जब शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक दबाव में थे। निफ्टी 1.60 फीसदी यानी 361 अंक गिरकर 22,242 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.45 फीसदी यानी 1,058 अंक गिरकर 71,588 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 0.90 फीसदी की गिरावट दिखी।

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Elon Musk: एक फैसला और डूब गए ₹1.75 लाख करोड़! AI पर ये दांव मस्क को पड़ गया भारी?

Elon Musk: दुनिया के सबसे अमीर इंसान एलन मस्क की संपत्ति में बुधवार को अचानक $21 बिलियन (करीब ₹1.75 लाख करोड़) से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। मस्क की कंपनी स्पेसएक्स के शेयरों में आई अचानक गिरावट को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्पेसएक्स एनवीडिया के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप्स खरीदने के लिए $40 बिलियन का भारी-भरकम कर्ज जुटाने की योजना बना रही है, जिसके सामने आते ही निवेशकों में खलबली मच गई।

कैसे घटी मस्क की नेटवर्थ?

फोर्ब्स की रियल-टाइम बिलियनेयर्स लिस्ट के अनुसार, बुधवार सुबह तक मस्क की कुल संपत्ति घटकर $1.03 ट्रिलियन रह गई, जो एक ही दिन में 2.04% की गिरावट है।

इतनी बड़ी कमी की वजह बना है उनकी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट। स्पेसएक्स के शेयर करीब 2% गिरकर $168.86 पर कारोबार कर रहे थे, वहीं टेस्ला के शेयरों में भी 1.5% की गिरावट देखी गई।

मस्क के पास स्पेसएक्स में ऑप्शंस सहित लगभग 38% हिस्सेदारी है। यही वजह है कि रॉकेट और एआई क्षेत्र की इस दिग्गज कंपनी के शेयरों में जरा सी भी हलचल मस्क की कुल संपत्ति पर बड़ा असर डालती है।

क्यों गिरे स्पेसएक्स के शेयर?

स्पेसएक्स के शेयरों में इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह $40 बिलियन की नई फाइनेंसिंग की खबरें हैं। कंपनी अपने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार करने के लिए एनवीडिया के एआई चिप्स खरीदना चाहती है।

‘फाइनेंशियल टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस $40 बिलियन के फंड में $10 बिलियन का बैंक लोन और $30 बिलियन का इन्वेस्टमेन्ट-ग्रेड डेट शामिल होगा।ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, यह सौदा 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है, हालांकि बातचीत अभी शुरुआती स्तर पर है।

क्रेडिट मार्केट में दिखी घबराहट: बॉन्ड और डिफॉल्ट स्वैप पर असर

$40 अरब के अतिरिक्त कर्ज की खबर से क्रेडिट मार्केट में चिंता बढ़ गई। स्पेसएक्स के 5-साल के क्रेडिट डिफॉल्ट स्वैप यानी जो कंपनी के डिफॉल्ट होने के जोखिम का बीमा होता है उसका स्प्रेड बढ़कर 197.6 बेसिस पॉइंट्स के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। जून में जब यह शुरू हुआ था, तब यह महज 110 बेसिस पॉइंट्स पर था। 194 बेसिस पॉइंट्स का मतलब है कि निवेशकों को $1 मिलियन के स्पेसएक्स कर्ज के बीमे के लिए सालाना $19,400 चुकाने होंगे। साथ ही साल 2056 में मैच्योर होने वाले स्पेसएक्स के बॉन्ड्स पर यील्ड स्प्रेड अमेरिकी ट्रेजरी के मुकाबले बढ़कर 2.36% पर पहुंच गया।

IPO के बाद एक और बड़ा फाइनेंसिंग राउंड

कंपनी का यह कदम शेयर बाजार में लिस्टिंग के महज कुछ ही महीनों बाद आया है। स्पेसएक्स ने जून में $135 प्रति शेयर के भाव पर अपना आईपीओ लॉन्च किया था और नैस्डैक पर SPCX टिकर के तहत लिस्ट हुई थी। आईपीओ के जरिए कंपनी ने करीब $85.7 बिलियन जुटाए थे।

जून के अंत में कंपनी ने 2031 से 2056 की मैच्योरिटी वाले $25 बिलियन के सीनियर नोट्स जारी किए थे। तब रेटिंग एजेंसियों (Moody’s – Baa1, Fitch – BBB+, S&P – BBB) ने इसे इन्वेस्टमेन्ट-ग्रेड रेटिंग दी थी। अगर $40 बिलियन की यह नई फाइनेंसिंग पूरी हो जाती है, तो कंपनी के कुल कर्ज में भारी बढ़ोतरी होगी।

एनवीडिया चिप्स पर स्पेसएक्स का बड़ा दांव

एआई की रेस में आगे रहने के लिए मस्क की कंपनी पूरी तरह से एनवीडिया के हार्डवेयर पर निर्भर है। अगस्त में स्पेसएक्स की अर्निंग्स कॉल के दौरान मस्क ने साफ कहा था कि, ‘हमने पूरी तरह से एनवीडिया पर निर्माण करने का फैसला किया है क्योंकि हमारा मानना है कि ‘वेरा रुबिन आर्किटेक्चर’ सबसे बेहतरीन है।’

दरअसल, इस समय पूरी टेक इंडस्ट्री (अल्फाबेट, मेटा, ओरेकल, अमेजन) डेटा सेंटर्स और एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए डेट मार्केट से भारी कर्ज उठा रही है। एनवीडिया ने भी एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए अपोलो, ब्लैकस्टोन और गोल्डमैन सैक्स जैसे दिग्गजों के साथ $500 बिलियन का प्लेटफॉर्म बनाने की घोषणा की है।

गिरावट के बाद भी नंबर-1 और ट्रिलियनेयर बने हुए हैं मस्क

$21 बिलियन के नुकसान के बावजूद एलन मस्क दुनिया के सबसे अमीर इंसान बने हुए हैं और उनका ‘ट्रिलियनेयर’ का टैग बरकरार है। मस्क ने सबसे पहले जून में स्पेसएक्स के सफल आईपीओ के बाद $1 ट्रिलियन का आंकड़ा पार किया था, जब कंपनी की मार्केट वैल्यू लगभग $2 ट्रिलियन पहुंच गई थी। हालांकि इसके बाद शेयरों में गिरावट से उनकी संपत्ति $1 ट्रिलियन से नीचे आ गई थी, लेकिन इसी हफ्ते स्पेसएक्स और टेस्ला में आई तेजी के चलते उन्होंने दोबारा यह मुकाम हासिल किया था।

कैंसर के इलाज और वैक्सीन रिसर्च के लिए आईआईटी कानपुर और भारत बायोटेक ने उठाया बड़ा कदम, मिलकर करेंगे ये काम

कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए देश में ही नई तकनीक तैयार करने की तैयारी चल रही है। IIT कानपुर और भारत बायोटेक इस दिशा में साथ काम करेंगे। दोनों इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट बीमारी की पहचान, जांच और इलाज से जुड़ी तकनीक पर रिसर्च करेंगे।

दोनों संस्थानों के बीच जल्द समझौता हो सकता है। इसका मकसद देश में ही नई मेडिकल तकनीक तैयार करना है। आगे इन तकनीकों का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा।

कैंसर और वैक्सीन पर रहेगा खास ध्यान

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के बीच हुई मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों पर खास ध्यान दिया गया। साइंटिस्ट इन बीमारियों को समझने पर काम करेंगे। इसके साथ नए इलाज और तकनीक भी तैयार की जाएगी।

बायोमेडिकल और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर IIT कानपुर में पहले से काम हो रहा है। भारत बायोटेक के साथ जुड़ने से इस काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

IIT कानपुर पहुंचे भारत बायोटेक के ऑफिसर

IIT कानपुर की इंडस्ट्री कनेक्ट सीरीज के तहत यह मीटिंग हुई। इसमें भारत बायोटेक के प्रेजिडेंट (R&D) डॉ. के. मुरुगप्पन शामिल हुए। IIT कानपुर के शिक्षक और साइंटिस्ट भी मीटिंग में मौजूद रहे। मीटिंग में वैक्सीन, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों पर चर्चा हुई।

मीटिंग के बाद डॉ. मुरुगप्पन ने IIT कानपुर की रिसर्च सुविधाएं देखीं। इस दौरान डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. जयधरन राव और जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख प्रो. अश्वनी कुमार ठाकुर समेत कई साइंटिस्ट मौजूद रहे।

गंगवाल स्कूल में भी हो रही मेडिकल रिसर्च

IIT कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कई फील्ड पर रिसर्च चल रही है। इनमें हेल्थकेयर में एआई, टेलीमेडिसिन और रोबोटिक्स शामिल हैं। यहां बीमारी की शुरुआती जांच और मेटाबॉलिक बीमारियों पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा इन्फेक्शन, न्यूरोसाइंस, न्यूरोटेक्नोलॉजी और मेंटल हेल्थ पर रिसर्च की जा रही है।

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के साथ काम करने से नई वैक्सीन और जांच की बेहतर तकनीक बन सकती है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। साथ ही देश में मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

AI का जोश, एशियाई कंपनियो ने जुटाया 6 साल का रिकॉर्ड फंड, लिस्टिंग के बाद मार्केट में फिर जल्द एंट्री की होड़

AI Boom in Stock Market: हॉन्ग कॉन्ग में एआई से जुड़ी कंपनियों ने इस बार रिकॉर्डतोड़ पैसे जुटाए। यह तेजी ऐसे समय में आई, जब हॉन्ग कॉन्ग के शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। कंपनियों ने आईपीओ, प्लेसमेंट्स और ब्लॉक ट्रेड्स के जरिए जुलाई-सितंबर में $47.5 अरब जुटाए, जोकि ब्लूमबर्ग के मुताबिक किसी साल की तीसरी तिमाही में अब तक की सबसे बड़ी रकम है।

इसके साथ ही इस साल अब तक हॉन्ग कॉन्ग में कुल $92 अरब से अधिक फंड जुटाए गए जोकि साल 2021 में $112.5 अरब के रिकॉर्ड के काफी करीब है। यह ऐसे समय में हुआ, जब बॉन्ड यील्ड में तेजी और कई नए शेयरों के खराब परफॉरमेंस के कारण निवेशक और कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक सतर्कता बरत रही हैं।

AI ने भरा जोश

हॉन्ग कॉन्ग में रौनक के पीछे एआई रही है लेकिन इस गर्मी तो इसने तगड़ा जोश दिखा दिया। चीन की कंपनियों ने तेजी से बढ़ रही एआई इंडस्ट्री में विस्तार के लिए ताबड़तोड़ पैसे जुटाए और पहले की तुलना में मार्केट में बहुत जल्द दोबारा एंट्री की। सबसे तगड़ा सौदा तो अलीबाबा ग्रुप की $10.2 अरब का फॉलो-ऑन ऑफर रहा तो Zhongji Innolight ने करीब $8 अरब जुटाए जोकि लगभग सात वर्षों में हॉन्ग कॉन्ग की सबसे बड़ी लिस्टिंग रही। अन्य कंपनियों ने भी बार-बार निवेशकों से पैसे जुटाए। एआई मॉडल बनाने वाली Z.AI ने इस साल IPO, प्लेसमेंट और कन्वर्टिबल बॉन्ड के जरिए कुल $9.6 अरब जुटाए।

गोल्डमैन में एशिया (एक्स-जापान) इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख जेम्स वांग का कहना है कि पहले कंपनियां एक बार पैसे जुटाने के बाद फिर एक-दो साल बाद ही दोबारा ऐसी कोशिश करती थी लेकिन अब लॉकअप पीरियड समाप्त होते ही पूंजी जुटाने लगी हैं। उनका कहना है कि AI की वजह से यह सिलसिला अगले कुछ वर्षों तक जारी रहेगा और इसकी रफ्तार जल्द धीमे होने के कोई संकेत नहीं हैं।

Z.AI के अलावा एक और एआई मॉडल कंपनी मिनीमैक्स ग्रुप, चिप बनाने वाली कंपनी शंघाई एलुवेटर कोरएक्स सेमीकंडक्टर और शंघाई बिरेन टेक्नोलॉजी भी अपने IPO लॉकअप की अवधि खत्म होने के तुरंत बाद जुलाई में दोबारा बाजार में लौट आईं।

यह तेजी सिर्फ चीन या हॉन्ग कॉन्ग तक ही नहीं रही, पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में देखने को मिली। तीसरी तिमाही में इस क्षेत्र में शेयर बिक्री के जरिए रिकॉर्ड $120 अरब से अधिक जुटाए गए, जो छह वर्षों में इस अवधि के लिए सबसे अधिक है। चीन में भी इस दौरान मेमोरी चिप बनाने वाली Corp का 66.6 अरब युआन (लगभग $9.9 अरब) का IPO आया, जो चीन में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा IPO रहा।

भारत में भी दिखी रौनक

साल की शुरुआत में अमेरिका-ईरान युद्ध, शेयर बाजार में हाहाकार और विदेशी निवेशकों की ताबड़तोड़ बिकवाली के दबाव में रहने के बाद भारतीय बाजार ने भी जोरदार वापसी की। जुलाई से अब तक यहां शेयरों की बिक्री के जरिए कंपनियों ने रिकॉर्ड $26 अरब जुटाए, जिसके साथ भारतीय मार्केट के लिए यह अब तक की सबसे अच्छी तिमाही साबित हुई।

इस दौरान सबसे बड़े डील्स की बात करें तो एलआईसी में $3.2 अरब की सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री शामिल थी तो एनएसई ने $2.4 अरब का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ पेश किया। यह ऐसे समय में हुआ जब निफ्टी 50 अगस्त की शुरुआत के अपने हाई लेवल से लगभग 9.5% नीचे आ गया था। घरेलू बाजार में पर्याप्त लिक्विडिटी ने नए शेयर ऑफरिंग की मांग को मजबूत बनाए रखा।

आगे भी आईपीओ का पाइपलाइन काफी मजबूत है। मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स नवंबर में संभावित लिस्टिंग से पहले निवेशकों से मुलाकात कर रही है। ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है। सिटीग्रुप में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के प्रमुख हरीश रमन का कहना है कि इस साल अभी और आईपीओ आ सकते हैं और वैश्विक निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है।

आगे कैसा है रुझान

एआई पर होने वाले भारी खर्च भविष्य में पर्याप्त रिटर्न दे पाएगा या नहीं, इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं लेकिन इसके बावजूद एआई से जुड़ी कंपनियां ताबड़तोड़ पैसा जुटा रही हैं और निवेशकों की दिलचस्पी भी बनी हुई है। हालांकि HSBC के ग्लोबल हेड ऑफ इक्विटी कैपिटल मार्केट्स मार्टिन जोल (Martin Zoll) का कहना है कि कई कंपनियों के शेयर आईपीओ प्राइस से नीचे आ गए हैं, जिसके चलते निवेशक सावधानी भी बरतने लगे हैं। बता दें कि जुलाई की शुरुआत से हांगकांग में हुए 10 सबसे बड़े सौदों में से केवल दो ही अपने ऑफर प्राइस से ऊपर हैं। फास्ट-फैशन रिटेलर शेन ग्लोबल होल्डिंग्स (Shein Global Holdings) और चिपमेकर लॉन्गसिस इलेक्ट्रॉनिक्स (chipmaker Longsys Electronics) के शेयर तो पहले ही दिन इश्यू प्राइस के नीचे आ गए।

आगे की बात करें तो आईपीओ और अन्य सौदों की पाइपलाइन काफी बड़ी है। फिलीपींस के सबसे लोकप्रिय मोबाइल पेमेंट ऐप GCash की पैरेंट कंपनी Mynt Inc ने आईपीओ का भाव फिक्स कर दिया है और यह फिलीपींस का सबसे बड़ा आईपीओ बनने वाला है। ऑस्ट्रेलिया भी एआई से जुड़ी इस तेजी का एक हिस्सा बनने वाला है। वहां डेटा सेंटर ऑपरेटर Firmus Grid $5 अरब का IPO देश में अब तक के सबसे बड़े लिस्टिंग में से एक होगा।

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103 गुना भरा IPO, अब धांसू लिस्टिंग को तैयार यह SME, आपको मिला शेयर?

BenchMark Infotech Listing: इंटीग्रेटेड आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस कंपनी बेंचमार्क इंफोटेक के शेयर अब NSE SME पर लिस्ट होने वाले हैं। इसके आईपीओ को निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल 103 गुना से अधिक भरा था। अब ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर धमाकेदार संकेत मिल रहे हैं। इश्यू प्राइस के मुकाबले इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) ₹25 यानी 22.73% है। इस प्रकार ग्रे मार्केट से बेंचमार्क इंफोटेक के शेयरों की मजबूत लिस्टिंद के संकेत हैं। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा। इसके शेयर 5 अक्टूबर को एनएसई एसएसई पर लिस्ट होंगे। आईपीओ के तहत निवेशकों को यह ₹110 के भाव पर जारी हुआ है और डीमैट खाते में 1 अक्टूबर को क्रेडिट हो चुका है।

BenchMark Infotech IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

बेंचमार्क इंफोटेक का ₹42 करोड़ का आईपीओ 25-29 सितंबर तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का धमाकेदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 103.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 88.62 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 136.92 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 96.90 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹37 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 4.58 लाख शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹30.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की जरूरतों, ₹4.59 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹3.18 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

BenchMark Infotech के बारे में

बेंचमार्क इंफोटेक सर्विसेज एक इंटीग्रेटेड आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस कंपनी है। यह सरकारी विभागों, PSUs, इंस्टीट्यूशंस और प्राइवेट सेक्टर के क्लाइंट्स को एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। यह नेटवर्किंग, कम्युनिकेशन सिस्टम्स, स्ट्रक्चर्ड केबलिंग, फाइबर ऑप्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर, सर्विलांस सिस्टम्स, ऑडियो-विजुअल सॉल्यूशंस, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सॉल्यूशंस और एनुअल मेटेनेंस सर्विसेज पर काम करती है। इसके अलावा कंपनी ने एआई लैब सॉल्यूशंस को लेकर भी काम शुरू किया है, जिसके तहत यह एआई लैब के सेटअप का काम करती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 163% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹10.22 करोड़ और टोटल इनकम करीब 36% के सीएजीआर से ₹63.99 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹2.71 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹26.44 करोड़ पड़े थे।

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Jr NTR: जाह्नवी कपूर के एआई मॉर्फ्ड वीडियो को देख भड़के जूनियर एनटीआर, लीगल एक्शन लेने की चेतावनी दी

Jr NTR: एक बार फिर से जान्हवी कपूर को ‘देवरा’ फिल्म के उनके गाने ‘चुट्टामल्ले’ के एक परेशान करने वाले AI-जनरेटेड वीडियो के जरिए निशाना बनाया गया, जिसमें वह जूनियर NTR के साथ नजर आई थीं। वायरल हो रहा यह AI वीडियो एक्ट्रेस के लुक का मॉर्फ्ड वर्जन है, जिसे डिजिटल रूप से बदलकर ऐसे अश्लील सीन बनाए गए हैं जो ओरिजिनल गाने का हिस्सा कभी नहीं थे।

जूनियर NTR ने X पर ऐसे भद्दे वीडियो बनाए जाने की कड़ी आलोचना की और साफ कहा कि वह इसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। उन्होंने लिखा, “यह दिमागी रूप से बीमार लोगों का घिनौना और बेशर्मी वाला काम है। जिस देश में महिलाओं को मां और देवी के रूप में पूजा जाता है, जहां ‘मातृदेवो भव’ सिर्फ एक कहावत नहीं बल्कि हमारी संस्कृति का हिस्सा है, वहां कुछ लोग इतने नीचे गिर गए हैं कि वे AI का इस्तेमाल करके किसी महिला का बेहद अपमानजनक तरीके से अनादर कर रहे हैं। AI का इस्तेमाल करके ऐसी घिनौनी चीज बनाना शब्दों से परे शर्मनाक है।”

उन्होंने आगे कहा, “इस मॉर्फ्ड ‘चुट्टामल्ले’ वीडियो के पीछे जो घटिया लोग हैं, मैं उनमें से किसी को नहीं बख्शूंगा। इसे बनाने वालों और इसे फैलाने वालों के खिलाफ मैं हर संभव कानूनी कार्रवाई करूंगा। कृपया ऐसे कंटेंट को न देखें, न शेयर करें और न ही उस पर कोई प्रतिक्रिया दें। आज यह किसी और के साथ हुआ है। कल यह आपकी मां, बहन, पत्नी या बेटी के साथ भी हो सकता है।”

एक्टर ने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है और मैं सभी राज्य सरकारों और भारत सरकार से अपील करता हूं कि वे AI के गलत इस्तेमाल के खिलाफ सख्त कदम उठाएं और कड़े नियम बनाएं।”

देवरा के बारे में

‘चुट्टामल्ले’ एक रोमांटिक गाना है, जो मुख्य किरदारों के बीच की केमिस्ट्री को दिखाता है। यह गाना जंगल और समुद्र बीच के शानदार बैकग्राउंड पर फिल्माया गया है और इसे जान्हवी कपूर द्वारा निभाए गए फीमेल लीड किरदार के नजरिए से दिखाया गया है। इसे अनिरुद्ध रविचंदर ने कंपोज़ किया है और रामाजोगाया शास्त्री ने लिखा है। शिल्पा राव ने अपनी आवाज दी है और बोस्को मार्टिस ने कोरियोग्राफी की है। ‘चुट्टामल्ले’ तमिल, हिंदी, कन्नड़ और मलयालम भाषाओं में रिलीज किया गया था।

इस फिल्म में जूनियर एनटीआर के साथ जान्हवी कपूर, सैफ अली खान, प्रकाश राज, श्रीकांत मेका, टॉम शाइन चाको और नारायण जैसे कई बड़े कलाकार शामिल थे। यह फिल्म 27 सितंबर, 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में जूनियर एनटीआर ने दोहरी भूमिका निभाई है – देवरा और वरधा दोनों की। जसुधा आर्ट्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को साराजू हरि कृष्णा और सुधाकर मिक्किलीनेनी ने प्रोड्यूस किया था और नंदमुरी कल्याण राम ने इसे पेश किया था। यह फिल्म तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी सहित कई भाषाओं में रिलीज हुई थी।

खत्म हुआ मार्केट में गिरावट का दौर! इस कारण मैक्वेरी को है भरोसा, लगाया इन सेक्टर पर दांव

Market Outlook: मैक्वेरी कैपिटल के एमडी और भारत में इक्विटी हेड संदीप भाटिया का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार फिलहाल अपनी रेंज के निचले स्तर पर हैं। इसके अलावा उनका यह भी मानना है कि मार्केट को झटका देने वाली जितनी भी खबरें हैं, और जो भी दबाव है, उसका खराब दौर अब निश्चित रूप से पीछे छूट चुका है। संदीप के मुताबिक कच्चे तेल के भाव और अमेरिकी टैरिफ का रिस्क बना हुआ है तो भारत और अमेरिका में ब्याज दरें अभी भी मार्केट के लिए एक चुनौती बनी हुई हैं। इसके अलावा भारत को अभी तक हार्डवेयर और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) से जुड़े थीम में बढ़ती वैश्विक दिलचस्पी का पूरा फायदा नहीं मिला है। इन चिंताओं के बावजूद उनका मानना है कि भारतीय कंपनियों के सितंबर 2026 तिमाही के रिजल्ट उम्मीद से बेहतर रह सकते हैं।

बैंकिंग सेक्टर

किस सेक्टर के कंपनियों के कारोबारी नतीजे धमाकेदार रह सकते हैं, इसे लेकर संदीप ने कोई अनुमान तो नहीं बताया लेकिन यह जरूर कहा कि बैंकिंग सेक्टर में आउटलुक सुधर रहा है। बैंकिंग सेक्टर उन सेक्टर्स में शुमार है, जिनमें सबसे अधिक दबाव दिखा है लेकिन अब संदीप को उम्मीद है कि अगले दो साल में बैंकों के मार्जिन में सुधार होगा और उनके शेयरों की वैल्यूएशन फिर से बढ़ सकती है, हालांकि नियर टर्म में कमाई पर कुछ दबाव रह सकता है। उनका कहना है कि साल 2027 और साल 2028 में यानी अगले दो वर्षों में बैंकों की कमाई अच्छी रहेगी।

फाइनेंशियल सेक्टर

संदीप भाटिया को फाइनेंशियल सेविंग्स में बड़ा मौका दिख रहा है। उनका अनुमान है कि देश की वित्तीय बचत $50 हजार करोड़ से अधिक है, जोकि और बढ़ सकता है। संदीप का मानना है कि एमसीएक्स, बीएसई और एनएसई को इस रुझान से फायदा हो सकता है।

कंज्यूमर और ऑटो सेक्टर

संदीप भाटिया को उम्मीद है कि कंज्यूमर-ड्यूरेबल कंजम्प्शन से अच्छे नतीजे देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने हुंडई इंडिया, मारुति सुजुकी इंडिया और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी ऑटो कंपनियों का जिक्र करते हुए कहा कि फेस्टिवल सीजन के दौरान गाड़ियों की बिक्री जबरदस्त रही है।

पावर और एनर्जी सेक्टर

संदीप भाटिया की पावर और एनर्जी स्पेस में दिलचस्पी बनी हुई है। रिन्यूएबल एनर्जी स्पेस में उन्हें क्लीन मैक्स एंवायरो एनर्जी सॉल्यूशंस तो पावर इक्विपमेंट और ट्रांसमिशन कंपनियों में हिताची एनर्जी इंडिया पसंद है। उनका कहना है कि यह मौका सिर्फ एआई से जुड़ी बिजली की मांग की वजह से नहीं बन रहा है, बल्कि देश में मजबूत इंडस्ट्रियल और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ से भी इसे बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

आईटी सेक्टर

वैल्यूएशन आकर्षक होने के बावजूद संदीप आईटी सेक्टर को लेकर सतर्क हैं और अभी इस सेक्टर में निवेश करने से बच रहे हैं। संदीप का मानना है कि जब तक एआई के असर को लेकर अधिक स्पष्टता नहीं आती, तब तक दबाव बना रहेगा।

इंश्योरेंस सेक्टर

संदीप भाटिया का कहना है कि इंश्योरेंस सेक्टर के लिए नियमों में बदलाव बड़ी चिंता बनी हुई है। फिलहाल वह पॉलिसीबाजार की पीबी फिनटेक को लेकर सतर्क हैं और इस सेक्टर पर कोई फैसला लेने से पहले बीमा नियामक IRDA की ड्राफ्ट सिफारिशों के फाइनल होने का इंतजार करना चाहते हैं।

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Nifty छह महीनों के निचले स्तर पर, एनालिस्ट्स से जानिए आगे बाजार चढ़ेगा या गिरेगा

निफ्टी 50 में 29 सितंबर को भी गिरावट देखने को मिली। इससे सूचकांक गिरकर छह महीने के निचले स्तर पर आ गया। 28 सितंबर को भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। ब्रेंट क्रूड में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का हाई लेवल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। सवाल है कि अगले साल की शुरुआत में निफ्टी का लेवल क्या होगा?

एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि बाजार पर कई वजहों से दबाव दिख रहा है। इनमें क्रूड में उछाल, रुपये में कमजोरी और फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली शामिल है। BofA ने पिछले महीने भारतीय बाजारों के लिए 8 बड़े रिस्क बताए थे। इनमें क्रूड की ऊंची कीमतें, मानसून की कमजोर बारिश, रुपये में कमजोरी और आईपीओ की ज्यादा संख्या शामिल थी।

जेफरीज के क्रिस वुड ने ऑयल की ऊंची कीमतों को शॉर्ट टर्म के लिए सबसे बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि निफ्टी में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। उनका यह भी कहना है कि आरबीआई के इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने पर हैरानी होगी। आरबीआई 7 अक्तूबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करेगा। अनुमान है कि वह रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि कर सकता है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा था कि भारतीय बाजार में शॉर्ट टर्म में कमजोरी दिख सकती है, क्योंकि एआई कंपनियों वाले देशों और भारतीय बाजार के प्रदर्शन के बीच गैप काफी बढ़ गया है। हालांकि, उसने कहा था कि चूंकि भारतीय बाजार कई साल के निचले स्तर पर हैं, जिसका मतलब है कि बाजार पर खराब खबरों का असर पड़ चुका है।

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि आगे कई तिमाहियों तक अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। एचएसबीसी की भी भारत को लेकर सोच पॉजिटिव है। BofA का मानना है कि अक्तूबर तक भारतीय बाजारों के लिए रिस्क चरम पर पहुंच जाएगा। उसके बाद नवंबर से बाजार में रिकवरी शुरू होगी। जेपी मॉर्गन ने अक्तूबर के अंत तक सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसका मानना है कि साल के अंत से बाजार में तेजी शुरू हो सकती है।

एंबिट एसेट मैनेजमेंट में फंड मैनेजर त्रिलोक अग्रवाल ने कहा कि निफ्टी में एक साल की फॉरवर्ड अर्निंग्स के करीब 19 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। इसका मतलब है कि हालिया करेक्शन के बाद भी भारतीय बाजार की वैल्यूएशन दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हाई बॉन्ड यील्ड को देखते हुए वैल्यूएशन में यह फर्क मायने रखता है।

अग्रवाल का हालांकि मानना है कि भारतीय बाजार में और गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने इसकी वजह अर्निंग्स आउटलुक को बताया। उनका मानना है कि FY27 में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ 17-20 फीसदी रह सकती है। अर्निंग्स ग्रोथ वैल्यूएशन में आई कमी से भारतीय बाजारों को सपोर्ट मिलेगा।

Groww ने अमेरिकी कंपनियों में निवेश की सुविधा शुरू की, भारत में इनवेस्टर्स AI और Apple, Nvidia जैसी कंपनियों में लगा सकेंगे पैसे

ब्रोकरेज फर्म ग्रो ने पिछले हफ्ते अपने ऐप पर अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा शुरू कर दी। हालांकि, ग्रो के सभी यूजर्स के लिए इस सुविधा के अगले हफ्ते से उपलब्ध होने की संभावना है। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को यह बताया। ग्रो को इस साल जुलाई में गिफ्ट सिटी के जरिए ग्लोबल कंपनियों के शेयरों में निवेश के लिए आईएफएससीए लाइसेंस मिला था।

Groww ने विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा देने के लिए ब्रोकरेज इंफ्रास्ट्रक्चर ऑफर करने वाली कंपनी Alpaca Securities से समझौता किया है। ग्रो ने इस सुविधा के बारे में मनीकंट्रोल के सवालों के जवाब नहीं दिए। ग्रो की इस सुविधा से इनवेस्टर्स उसके ऐप के जरिए अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के शेयर खरीद और बेच सकेंगे।

ग्रो के प्लेटफॉर्म से इनवेस्टर्स को 10,000 से ज्यादा कंपनियों के स्टॉक्स और ईटीएफ में निवेश की सुविधा मिलेगी। इनमें Google, Apple, Nvidia, Tesla, Amazon और Meta जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं। Zerodha, Angel One और Upstox को भी गिफ्टी सिटी के जरिए अपने प्लेटफॉर्म के जरिए अमेरिकी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सुविधा ऑफर करने की इजाजत मिल चुकी है।

Gift City ने अगस्त 2025 में ग्लोबल एक्सेस प्रोवाइडर (GAP) रजिस्ट्रेशन लॉन्च की थी। इसका मकसद इनवेस्टर्स को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश का किफायती रास्ता देना है। विदेशी कंपनी के शेयर बचने पर इनवेस्टर्स जब पैसा भारत लाएगा तो उसे किसी तरह की कॉस्ट नहीं चुकानी होगी। इससे भारतीय इनवेस्टर्स को विदेशी कंपनियों के शेयरों में निवेश का आसान रास्ता खुलेगा।

ग्रो यूजर्स की संख्या के लिहाज से देश की सबसे बड़ी ब्रोकरेज फर्म है। इसके 2 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स हैं। यह 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के एसेट्स का प्रबंधन करती है। इसकी शुरुआत एक म्यूचअल फंड प्लेटफॉर्म के रूप में हुई थी। अब तक विदेशी कंपनियों में निवेश की सुविधा देने वाले प्लेटफॉर्म्स में IndMoney, Smallcase और Vested Finance का दबदबा रहा है।

बीते करीब 2 सालों में अमेरिका, ताइवान और दक्षिण कोरिया में एआई और सेमीकंडक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। चूंकि, इंडिया में ऐसी कंपनियां नहीं हैं, जिससे भारतीय इनवेस्टर्स की दिलचस्पी विदेश में इन कंपनियों के शेयरों में निवेश के मौके तलाने में बढ़ी है। इसके अलावा कई बड़ी AI कंपनियों का प्लान अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंजों में खुद को लिस्ट कराने का है। ये कंपनियां अपने आईपीओ पेश करने वाली हैं।