ईरान के लिए ‘सीक्रेट हथियार’ बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप

China Secret Support to Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन एक तरफ तो खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान के लिए एक खास ‘सीक्रेट हथियार’ भी बना रहा है।

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान के रक्षा मंत्रालय को भेजे जाने वाले ‘डुअल-यूज’ पार्ट्स यानी दोहरे इस्तेमाल वाले घटकों की डिलीवरी में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। ईरानी सीमा शुल्क डेटा, अमेरिकी अधिकारियों और इस गुप्त व्यापार से जुड़े लोगों के हवाले से आई इस रिपोर्ट से कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बीच इस खुलासे ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

चीन से क्या-क्या मिल रहा है ईरान को?

‘डुअल-यूज’ पार्ट्स वे सामान होते हैं जिनका उपयोग आम नागरिक उपकरणों के साथ-साथ खतरनाक हथियारों में भी किया जा सकता है। WSJ रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान भेजे गए सामान में ये प्रमुख चीजें शामिल हैं:

इलेक्ट्रॉनिक्स और जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण: जो मिसाइलों की सटीक निशाना लगाने की क्षमता बढ़ाते हैं।

इलेक्ट्रिक मोटर और एयरक्राफ्ट इंजन पार्ट्स: जिनका सीधा इस्तेमाल सैन्य ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में होता है।

रासायनिक सामग्री: जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के फ्यूल बनाने में किया जा सकता है।

उपग्रह तस्वीरें: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 17 जुलाई के उस हमले से पहले और बाद में ईरान ने चीनी सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

कार्गो फ्लाइट्स में अचानक उछाल: ‘महान एयर’ का संदिग्ध रोल

फ्लाइट ट्रैकिंग साइट ‘FlightRadar24’ के डेटा के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन महान एयर ने मार्च के महीने में चीन के बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू से तेहरान के लिए हर हफ्ते सिर्फ 4 उड़ानें भरी थीं।

लेकिन अप्रैल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 27 उड़ानें प्रति सप्ताह हो गई। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में महान एयर की फ्लाइट्स की संख्या 39 तक पहुंच गई। इन अधिकांश उड़ानों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के बजाय गुप्त सैन्य और तकनीकी कार्गो (हथियारों के पुर्जों) की डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।

अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर खेल कर रहा तेल का ‘मास्टरमाइंड’

अमेरिकी पाबंदियों से पंगु हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को चीन संजीवनी दे रहा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, चीन ईरान के क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा खुद खरीद रहा है। अमेरिकी वित्तीय पाबंदियों को चकमा देने के लिए चीनी बैंकों और छद्म कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे तेहरान तक पैसा आसानी से पहुंच रहा है।

16 सितंबर को बीजिंग में हुई बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ शब्दों में कहा था कि चीन और ईरान ‘व्यापक रणनीतिक भागीदार’ हैं और चीन ईरान के ‘वैध अधिकारों और हितों’ की रक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने को तैयार है।

ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग के बीच अमेरिकी सियासत में भूचाल

वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन अमेरिकी संसद में ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है।

सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रपति ट्रंप, शी जिनपिंग के सामने चीन की इस ‘सैन्य मदद’ का मुद्दा सख्ती से उठाएं। सीनेटरों ने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अमेरिकी सैनिकों की हत्या और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को जिंदा रखने में मदद कर रही हैं।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन चीन से सीधे टकराने में थोड़ा हिचकिचा रहा है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को सीधे हथियार नहीं देंगे और वे शी पर भरोसा करते हैं।

चीन की सफाई: ‘हमारी छवि खराब करने की कोशिश’

इन गंभीर आरोपों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘चीन को बदनाम करने की साजिश’ है। चीन का तर्क है कि वह दोहरे उपयोग वाले सामानों के निर्यात पर सख्त नियम लागू करता है और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।

एक जैसे फिंगरप्रिंट और रेटिना! जुड़वां बहनों का आधार कार्ड बनाने में छूटे पसीने, जानिए रामपुर DM अजय द्विवेदी ने कैसे सुलझाया ये केस

रामपुर की तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के लिए एक जैसी शक्ल-सूरत सिर्फ पारिवारिक समानता नहीं, बल्कि पहचान की बड़ी उलझन बन गई। दोनों बहनों की जिंदगी में एक ऐसा वक्त आया, जब खुद को अलग-अलग साबित करना भी आसान नहीं रहा। मामला इतना पेचीदा था कि एक जरूरी सरकारी दस्तावेज बन गया, जबकि दूसरी बहन के लिए वही प्रक्रिया बार-बार रुकती रही। परिवार ने इसे दूर करने के लिए कई कोशिशें कीं, लेकिन हर बार तकनीकी दिक्कत सामने आ गई। इस परेशानी का असर सिर्फ कागजी प्रक्रिया तक सीमित नहीं था, बल्कि बच्ची से जुड़े जरूरी काम भी प्रभावित होने लगे।

आखिरकार मामला स्थानीय स्तर से निकलकर उच्च स्तर तक पहुंचा और कई हफ्तों की कोशिश के बाद रास्ता निकला। ये कहानी सिर्फ दो जुड़वां बहनों की नहीं, बल्कि उस परिवार के इंतजार, चिंता और राहत की भी है, जिसने अपनी ही बेटी की पहचान को सिस्टम के सामने साबित करने के लिए लंबी जद्दोजहद की।

एक बहन की पहचान बनी, दूसरी की फाइल अटक गई

रामपुर नगर के खारी कुआं मोहल्ले में रहने वाले जुबैर इलियास की जुड़वां बेटियां तुबा और खिजरा हैं। दोनों का पहचान पत्र बनवाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो शुरुआत में सब सामान्य रहा। एक बच्ची का पंजीकरण हो गया। मुश्किल तब सामने आई, जब दूसरी बेटी का नामांकन कराया गया। बायोमीट्रिक प्रणाली ने उसके डेटा को पहले से दर्ज रिकॉर्ड से अत्यधिक मिलता-जुलता पाया। सिस्टम ने इसे डुप्लीकेट नामांकन की आशंका माना और आवेदन आगे बढ़ने से रोक दिया। परिवार के लिए यह महज तकनीकी दिक्कत नहीं थी। पहचान पत्र न होने से बच्ची के स्कूल प्रवेश और सरकारी योजनाओं से जुड़े जरूरी काम प्रभावित होने लगे।

जुड़वां बहनों की समानता बनी सिस्टम की चुनौती

आम तौर पर बायोमीट्रिक प्रणाली किसी व्यक्ति की अलग पहचान सुनिश्चित करने के लिए उसके शारीरिक डेटा का इस्तेमाल करती है। लेकिन तुबा और खिजरा के मामले में दोनों के बीच मौजूद जैविक समानता ने यही व्यवस्था चुनौती के सामने खड़ी कर दी।

एक तरफ सिस्टम सुरक्षा के लिहाज से किसी संभावित डुप्लीकेट रिकॉर्ड को स्वीकार नहीं कर रहा था, दूसरी तरफ परिवार के सामने यह साबित करने की चुनौती थी कि दोनों बच्चियां अलग-अलग व्यक्ति हैं। यही वह मोड़ था, जहां एक तकनीकी समस्या धीरे-धीरे पूरे परिवार की चिंता बन गई।

जनता दर्शन में पहुंची फरियाद, डीएम ने बनाया रास्ता

कई स्तरों पर प्रयास के बावजूद जब समाधान नहीं निकला तो जुबैर इलियास ने रामपुर कलेक्ट्रेट में आयोजित जनता दर्शन में अपनी समस्या जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के सामने रखी। मामले को सामान्य दस्तावेजी शिकायत मानने के बजाय प्रशासन ने इसे बायोमीट्रिक पहचान से जुड़ी तकनीकी समस्या के रूप में लिया। जिलाधिकारी के निर्देश पर स्थानीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच और सत्यापन कराया गया। इसके बाद जिला प्रशासन ने यूआईडीएआई अधिकारियों से संपर्क किया और पूरे मामले का विवरण, जरूरी दस्तावेज तथा सत्यापन रिपोर्ट मुख्यालय भेजी।

जब मामला पहुंचा दिल्ली के तकनीकी विशेषज्ञों तक

चूंकि समस्या बायोमीट्रिक डी-डुप्लीकेशन प्रणाली से जुड़ी थी, इसलिए इसे यूआईडीएआई मुख्यालय, नई दिल्ली भेजा गया। वहां उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रशासन की ओर से भेजे गए सत्यापन दस्तावेजों की तकनीकी जांच की गई। सामान्य व्यवस्था में किसी नए नामांकन का बायोमीट्रिक डेटा पहले से मौजूद रिकॉर्ड से बहुत अधिक मेल खाने पर सिस्टम उसे संभावित डुप्लीकेट मानकर रोक देता है। इस मामले में भी यही हुआ था। लेकिन जिला प्रशासन के सत्यापन और विशेष अनुरोध के बाद मामले को असाधारण परिस्थिति के तौर पर लिया गया। जरूरी सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया पूरी करने के बाद तकनीकी स्तर पर विशेष समाधान निकाला गया।

तीन महीने बाद खत्म हुआ इंतजार

तकनीकी समाधान के बाद दूसरी बच्ची का नामांकन सफल हो सका। पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब तीन महीने लगे। इस दौरान जिला प्रशासन और यूआईडीएआई अधिकारियों के बीच लगातार संपर्क बना रहा। आखिरकार वह दिन भी आया, जब तुबा और खिजरा दोनों के अलग-अलग पहचान पत्र जारी हो गए।

दो बहनें, दो पहचान और परिवार के चेहरे पर सुकून

पहचान पत्र हाथ में आने के बाद जुबैर इलियास अपनी दोनों बेटियों को लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके लिए ये कार्ड सिर्फ सरकारी दस्तावेज नहीं थे, बल्कि उस लंबे इंतजार के खत्म होने का प्रमाण थे जिसमें एक छोटी-सी तकनीकी अड़चन ने परिवार को महीनों परेशान रखा। तुबा और खिजरा की कहानी यह भी बताती है कि तकनीक जहां पहचान को आसान और सुरक्षित बनाने का काम करती है, वहीं असाधारण मामलों में मानवीय हस्तक्षेप और संवेदनशील प्रशासनिक कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी हो सकती है।

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ब्रिक्स में आईएफएस बनाम आईएंडबी

हाल में संपन्न हुए ब्रिक्स सम्मेलन में नई दिल्ली डिक्लेरेशन को लेकर जितनी चर्चा हुई उससे ज्यादा चर्चा तरह तरह की तस्वीरों औऱ वायरल वीडियोज को लेकर हुई। कहीं प्रधानमंत्री की नरेंद्र मोदी की वीडियो वायरल हुई, जिसमें वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का हाथ पकड़ कर खींच रहे हैं तो कहीं बस में भाजपा नेताओं के साथ बैठे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की फोटो वायरल हुई। पहले ही दिन एक महिला पत्रकार ने विदेश मंत्रालय की ओर से पत्रकारों को दिए गए किट को खोल कर एक एक चीज की वीडियो बनाई।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल और विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के विदेशी मेहमानों के पीछे बैठ कर लगातार कुछ खाते रहने की वीडिया वायरल हुई। हालांकि पता नहीं है कि ये वीडियो सही है या एआई जेनेरेटेड है या सही है लेकिन संपादित है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के ऐसे रॉ वीडियो वायरल नहीं होते हैं। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्रालय ने इस बार सूचना व प्रसारण मंत्रालय को पूरे कार्यक्रम से दूर रखा। सब कुछ विदेश सेवा के अधिकारियों की देखरेख में विदेश मंत्रालय द्वारा किया गया। तभी कई खराब ऑपटिक्स बने।

इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब पर लगेगा बैन? पीएम मेलोनी का बड़ा ऐलान

इटली के स्कूलों में बुर्का-नकाब पर लगेगा बैन? पीएम मेलोनी का बड़ा ऐलान

Georgia Meloni

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इसके तहत इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित की जाएगी। ALSO READ: Top News 21 September: केरल में बारिश से तबाही, टाटा में चंद्रशेखरन पर घमासान; क्या ट्रंप बदलेंगे AI का नाम?

 

मेलोनी ने अपनी पार्टी ब्रदर्स ऑफ इटली के युवा संगठन के राष्ट्रीय महोत्सव में कहा कि कैबिनेट जल्द इस पर फैसला लेगी। कानून बनने के लिए सरकार की मंजूरी के बाद संसद से 60 दिनों के भीतर पास कराना होगा।

 

इटली की पीएम ने कहा कि प्रस्तावित नियमों के तहत विदेशी छात्रों के उन पेरेंट्स को इटैलियन भाषा की क्लास करनी होगी, जिनके बच्चों को स्कूल व्यवस्था में घुलने-मिलने में दिक्कत है। अगर क्लास में सिर्फ एक बच्चा है, जिसे इटैलियन भाषा नहीं आती तो वह बच्चा शायद क्लास के फ्रेंड्स और टीचर्स की मदद से भाषा सीख लेगा और जल्दी घुल मिल जाएगा। लेकिन अगर ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा हुई तो यह नजरंदाज करना हो जाएगा। वह घुल मिल नहीं सकेंगे। अपनी मेजोरिटी बनाकर रहेंगे।

 

उन्होंने कहा कि छात्रों को बिना चेहरा ढंके स्कूल जाना होगा। उन्होंने कहा कि इटली में कोई भी धर्म, परंपरा और मजहब के नाम पर यह तय नहीं कर सकता है कि लड़कियां अपना चेहरा ढंके। ALSO READ: डोनाल्‍ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, अमेरिका में बनेगी एआई फोर्स, क्‍या अब बदलेंगे AI का नाम?

 

कक्षा में विदेशी छात्रों की बढ़ती संख्या पर भी मेलोनी सख्त नजर आई। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि एक कक्षा में कितने विदेशी छात्रों को अनुमति दी जाएगी।

Top News 21 September: केरल में बारिश से तबाही, टाटा में चंद्रशेखरन पर घमासान; क्या ट्रंप बदलेंगे AI का नाम?

Top News 21 September: केरल में बारिश से तबाही, टाटा में चंद्रशेखरन पर घमासान; क्या ट्रंप बदलेंगे AI का नाम?

top news 21 september

Top News 21 September: केरल में भारी बारिश से तबाही। टाटा संस में चेयरमैन पद पर एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट ने उठाए सवाल। ट्रंप बदल सकते हैं एआई का नाम। ट्रंप और जेलेंस्की की मुलाकात तय। जॉर्जिया मेलोनी स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगाएगी। 21 सितंबर की बड़ी खबरें : 

 

केरल में भारी बारिश से तबाही

केरल में भारी बारिश से भारी तबाही हुई। वर्षा जन्य हादसों में 5 लोगों की मौत हो गई। मलप्पुरम, इडुक्की और कोट्टायम में बारिश से हाल बेहाल है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों में राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने राज्य के हालात का हर घंटे आकलन करने का निर्देश दिया है।

 

एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर टाटा ट्रस्ट का सवाल

Tata Trusts ने टाटा संस के चेयरमैन के रूप में एन. चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी है। ट्रस्ट ने कहा कि उनकी पुनर्नियुक्ति के समर्थन में कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन की जो व्याख्या दी जा रही है, वो सही नहीं है। Tata Trusts ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर दी जा रही दलीलों को भी खारिज किया है। ALSO READ: Tata Trust ने एन. चंद्रशेखरन की नियुक्ति पर उठाए सवाल, खारिज किया बोर्ड का फैसला, री-अपॉइंटमेंट को दी चुनौती

 

क्या ट्रंप बदल देंगे AI का नाम?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के नाम को बदलने की चर्चा छेड़ दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर एक ऑनलाइन पोल शुरू किया और लोगों से एआई के लिए नया नाम चुनने को कहा। ट्रंप ने सुपीरियर इंटेलिजेंस, एक्सट्रीम इंटेलिजेंस और सुप्रीम इंटेलिजेंस तीन विकल्प दिए हैं। ALSO READ: डोनाल्‍ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, अमेरिका में बनेगी एआई फोर्स, क्‍या अब बदलेंगे AI का नाम?

 

ट्रंप-जेलेंस्की की मुलाकात तय

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत की है। जेलेंस्की ने इसे बेहद अहम बातचीत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने कई मुद्दों पर चर्चा की और अब न्यूयॉर्क में मुलाकात करने पर सहमति बनी है।

 

बुर्के-नकाब पर मेलोनी का बड़ा फैसला

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने घोषणा की कि उनकी सरकार जल्द ही एक उपाय पेश करेगी। इसके तहत इटली के स्कूलों में बुर्का और नकाब पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा। साथ ही, कक्षाओं में विदेशी छात्रों की संख्या भी सीमित की जाएगी।

घर से भटक कर 1200km दूर चला गया बुजुर्ग, युवक ने AI पर लगाई ऐसी तरकीब और ढूंढ निकाला सही पता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई , अब लोगों की जिंदगी में एक अहम हिस्सा बनता जा रहा है। AI ने इंसानी जिंदगी को आसान बनाने के साथ-साथ लोगों का बचाने का भी काम कर रही है। बिहार से एक ऐसी ही खबर आई है कि, जहां AI की मदद से एक खोए बुजुर्ग को खोज निकाला गया। बिहार के गया में नीरज को एक बुजुर्ग मिले, जो अपने घर से बहुत दूर थे और सिर्फ अपने गांव का नाम बता पा रहे थे। नीरज ने उन्हें अपने घर में रखा, उनके परिवार को खोजा और आखिरकार 1,200 किलोमीटर से ज्यादा दूर पंजाब में उन्हें उनके परिवार से मिला दिया।

अमृतसर में एक बुजुर्ग अपनी ही तीर्थयात्रा के दौरान रास्ता भटककर सीधे 1200 किलोमीटर दूर बिहार के गया जा पहुंचे थे। पंजाब के लुधियाना के रहने वाले चमन लाल लंबे समय से भूलने की समस्या से जूझ रहे हैं। पंजाब सरकार की तीर्थयात्रा योजना के तहत अमृतसर गए थे लेकिन वहां से वे न जाने कैसे ट्रेन पकड़कर गया पहुंच गए। इसके बाद वह बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गए और अपने घर से 1,200 किलोमीटर से ज्यादा दूर बिहार के गया पहुंच गए।

घर से 1200 किमी दूर पहुंचे चमन लाल

चार दिनों तक चमन लाल पंजाब से सैकड़ों किलोमीटर दूर एक ऐसे परिवार के साथ रहे, जिसे वह पहले कभी नहीं जानते थे। इस दौरान एक अजनबी व्यक्ति उनके घर और पहचान के बारे में पता लगाने की कोशिश कर रहा था। बुजुर्ग चमन लाल के पास बताने के लिए ज्यादा जानकारी नहीं थी। वह सिर्फ पंजाबी बोलते थे और उन्हें अपने गांव का नाम फतेहगढ़ गुजरान ही याद था।

गया में नीरज की मुलाकात चमन लाल से हुई। वह बुजुर्ग काफी परेशान और भूखे थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वह गया कैसे पहुंचे। नीरज ने उन्हें अकेला छोड़ने के बजाय अपने घर ले जाकर खाना और रहने की जगह दी। इसके साथ ही उन्होंने चमन लाल के परिवार को ढूंढने की कोशिश शुरू की। भाषा की परेशानी के कारण यह काम आसान नहीं था, क्योंकि चमन लाल सिर्फ पंजाबी बोलते थे। हालांकि, उन्होंने नीरज को अपने गांव का नाम बता दिया, जिससे उनके परिवार को खोजने में मदद मिली।

AI की ली मदद

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, गया के रहने वाले नीरज ने पंजाब में उस गांव का पता लगाने के लिए ऑनलाइन सर्च और चैटजीपीटी की मदद ली। आखिरकार, गांव का यही नाम चमन लाल के परिवार तक पहुंचने की अहम कड़ी साबित हुआ। करीब तीन दिनों की कोशिश के बाद नीरज को लुधियाना जिले में माछीवाड़ा साहिब के पास फतेहगढ़ गुजरान गांव के बारे में जानकारी मिली। इससे चमन लाल के परिवार तक पहुंचने का रास्ता साफ हो गया। जगह का पता चलने के बाद भी नीरज ने चमन लाल को अकेले जाने नहीं दिया। वह खुद उनके साथ गया से लुधियाना पहुंचे और फिर माछीवाड़ा की ओर गए, ताकि चमन लाल को सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके।

नीरज ने पेश की इंसानियत की मिसाल

माछीवाड़ा पहुंचने के बाद नीरज ने वहां के लोगों को चमन लाल की फोटो दिखाकर उनके बारे में पूछा। आखिरकार मास्टर कृष्ण लाल ने फोटो देखकर चमन लाल को पहचान लिया। इसके बाद उनके परिवार को जानकारी दी गई। चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह माछीवाड़ा पहुंचे और उन्होंने पहचान की कि गया से नीरज जिन बुजुर्ग को अपने साथ लाए थे, वे उनके दादा चमन लाल ही हैं। इसके बाद चमन लाल के परिवार को इसकी जानकारी दी गई। उनके पोते सुखचैन सिंह माछीवाड़ा पहुंचे और उन्होंने पुष्टि की कि नीरज गया से जिस बुजुर्ग को अपने साथ लाए थे, वह उनके दादा चमन लाल ही हैं।

जब नीरज चमन लाल के घर पहुंचे तो परिवार ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। परिवार ने धन्यवाद के तौर पर उन्हें पैसे और कपड़े भी दिए। गया में कंस्ट्रक्शन का काम करने वाले नीरज ने बताया कि उन्हें लगा कि वह एक अकेले और परेशान बुजुर्ग को इस हालत में नहीं छोड़ सकते। जब उन्हें चमन लाल के गांव का नाम पता चला, तो उनके परिवार को ढूंढकर उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना नीरज ने अपनी जिम्मेदारी समझी।

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‘जिंदगी मैराथन है, कोई 100 मीटर की दौड़ नहीं…’, एन चंद्रशेखरन की वो 4 बातें जो हर स्टूडेंट को जाननी चाहिए

N Chandrasekaran: ‘जिंदगी एक मैराथन दौड़ है, कोई 100 मीटर की स्प्रिंट नहीं। असली मकसद दूसरों से आगे निकलना नहीं, बल्कि खुद को हर दिन बेहतर बनाना है।’ यह प्रेरणादायक बात देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने चेन्नई के चेंगलपट्टू स्थित साई यूनिवर्सिटी के छात्रों को संबोधित करते हुए कही।

खुद 18 सालों से रनिंग का शौक रखने वाले चंद्रशेखरन ने खेल और जीवन के अनुभवों को जोड़ते हुए युवाओं को सफलता, AI के असर और जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए बेहद खास मंत्र दिए। आइए आपको बताते हैं उनकी इस स्पीच के 4 सबसे बड़े टेकअवे और सबक।

‘उतार-चढ़ाव से मत डरो, आत्मविश्वास को अहंकार न बनने दो’

चंद्रशेखरन ने छात्रों को समझाते हुए कहा कि जिंदगी और खेल दोनों का नियम एक जैसा है। इसमें केवल जीतना मायने नहीं रखता, बल्कि तैयारी में पूरी ताकत झोंकना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने कहा, ‘जीवन में उतार और चढ़ाव दोनों आएंगे। बुरे दौर से कभी मत डरो, और जब अच्छा दौर आए तो अपने आत्मविश्वास को कभी अहंकार में मत बदलने दो। इस पूरी यात्रा का आनंद लो।’

AI से नौकरियां जाने का डर? नए मौकों पर रखें नजर

आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और छंटनी की खबरों से डरे हुए युवाओं को उन्होंने ढांढस बंधाया। इस बाबत उन्होंने नकारात्मक खबरों से न घबराने की सलाह दी। एआई की वजह से नौकरियां खत्म होने की खबरें डरा सकती हैं, लेकिन टेक्नोलॉजी हर दिन नई संभावनाएं पैदा कर रही है।

आने वाले 5 वर्षों में ऐसे नए सेक्टर्स और उद्योग सामने आएंगे, जिनके नाम और शब्दावली का अंदाजा भी आज हमें नहीं है। भारत इस समय बेहद मजबूत आर्थिक स्थिति में है और देश की ग्रोथ पूरी दुनिया के लिए मिसाल बनने वाली है।

‘दबाव झेलना एक विशेषाधिकार है’

कॉलेज खत्म करने के बाद करियर में मिलने वाले तनाव और प्रेशर पर बात करते हुए उन्होंने मशहूर टेनिस खिलाड़ी बिली जीन किंग की बात का जिक्र किया। ‘प्रेशर महसूस करने का अधिकार मिलना अपने आप में एक विशेषाधिकार है। पढ़ाई के बाद व्यावहारिक जीवन में दबाव आपकी जिंदगी का हिस्सा रहेगा, युवाओं को इस दबाव से डरने के बजाय इसका आनंद लेना सीखना चाहिए।’

सोशल मीडिया के दौर में युवाओं को 2 सलाह

लगातार सीखते रहें: कभी भी सीखना बंद न करें।

कंटेंट का सही चुनाव करें: सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करें। आप क्या पढ़ते हैं, क्या देखते हैं और क्या सुनते हैं इसका चुनाव बहुत सोच-समझकर करें।

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बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

बिहार की चार फिल्मी हस्तियों को वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के लिए 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह खास होने जा रहा है। बिहार से जुड़ी चार फिल्मी हस्तियों अभिनेता संजय मिश्रा, निर्देशक कमलेश के. मिश्र, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवाड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगी। दरभंगा निवासी अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। ‘भक्षक’ की कहानी चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है। गोपालगंज निवासी निर्देशक कमलेश के. मिश्र और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। देशभक्ति पर आधारित यह फिल्म 1925 के ऐतिहासिक ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी वर्ष पर काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। फिल्म में काकोरी की ऐतिहासिक घटना और उससे जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य, संकल्प और उनके अमिट योगदान को रेखांकित किया गया है।

कमलेश के. मिश्र की फ़िल्म को पहले भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुका हैं। उनकी फ़िल्म ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ के लिए गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कथन का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मकार कमलेश मिश्र की पहली निर्देशित फीचर फिल्म ‘आज़मगढ़’ है, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने मुख्य नेगेटिव भूमिका निभाई है। यह फिल्म आतंकवाद के विषय पर आधारित है। अपनी फिल्मों में विशेष दृष्टिकोण से इतिहास और रिसर्च को प्रमुख स्थान देते हैं। हाल ही में उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों पर ‘दिल्ली दंगे…जलने और दोषारोपण की कहानी’ ( दिल्ली राइट्स- अ टेल ऑफ बर्न एंड ब्लेम) डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जो तब काफ़ी चर्चित हुई थी। उनकी पहली शोर्ट फ़िल्म “किताब” ने वैश्विक ख्याति अर्जित की। काकोरी के निर्माता जसविंदर सिंह दिल्ली से और मिंटी मिश्रा बिहार के गोपालगंज की हैं। यह फ़िल्म उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से बनी है। बिहार के दरभंगा के रहने वाले संजय मिश्रा देश के प्रसिद्ध अभिनेता हैं।

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तीन दशक से भी ज्यादा समय से अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रभावशाली अभिनय उनकी पहचान है। 1995 में फिल्म ओह डार्लिंग! ये है इंडिया! से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। ‘आंखों देखी ‘ (2015) और ‘वध’ (2022) में उन्हें उम्दा अभिनय के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिल चुका है। सीतामढ़ी निवासी पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए स्वर्ण कमल प्रदान किया जाएगा। वह करीब ढाई दशक से दिल्ली में पत्रकारिता और फिल्मों पर लेखन कर रहे हैं। वह मुंबई में भी फिल्मों की रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री श्रीवास्तव की सिनेमा पर कई पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें ‘समय सिनेमा और इतिहास’, ‘सिनेमा की समानांतर दुनिया’ और ‘आपातकाल का सिनेमा’ प्रमुख हैं।

उन्होंने ‘माधुरी’ पत्रिका के संस्थापक संपादक अरविंद कुमार से स्वर्णिम दौर के सिनेमा पर लंबी बातचीत भी की है, जिसे वह सिनेमाई अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। फिल्मकार कमलेश के मिश्र ने ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल किसी फिल्म या फिल्मकार का सम्मान नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और संवेदनाओं को ईमानदारी से सामने रखने वाले रचनात्मक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति है। श्री मिश्र ने कहा कि वह इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं। काकोरी रेल एक्शन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था और फिल्म के माध्यम से इस ऐतिहासिक घटना को उचित महत्व के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाना उनका उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्माण पूरी निष्ठा के साथ किया गया है। उन्होंने निर्माता जसविंदर सिंह, मिंटी मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार तथा फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और तकनीशियनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पुरस्कार सामूहिक प्रयास और समर्पण की सफलता है। कमलेश के मिश्र ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के माध्यम से काकोरी के वीर क्रांतिकारियों की स्मृति और उनके बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने यह सम्मान सभी अमर शहीदों को समर्पित किया। मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी जैसी ऐतिहासिक घटना पर फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना इस पूरी यात्रा को और विशेष बना देता है।

मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी रेल एक्शन स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है और काकोरी के अमर क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान को आज की पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि काकोरी के माध्यम से इतिहास की महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित घटना को प्रमुखता से सामने लाने का छोटा-सा प्रयास किया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से निर्मित फिल्म के मुख्य निर्माता जसविंदर सिंह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लेखक-निर्देशक कमलेश के मिश्र और पूरी टीम के समर्पण ने इस प्रयास को सार्थक बनाया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना भी बड़ी बात है।

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गूगल जेमिनी एआई ने सुरक्षा परीक्षण के दौरान तीन कंपनियों के सिस्टम में लगाई सेंध

गूगल के कृत्रिम मेधा (एआई) मॉडल जेमिनी ने साइबर सुरक्षा क्षमताओं के परीक्षण के दौरान तीन कंपनियों के सिस्टम में स्वायत्त रूप से सेंध लगाई। कंपनी ने यह जानकारी दी है। इसे इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देने वाला जेमिनी का पहला ज्ञात मामला माना जा रहा है।

यह घटना इजरायली साइबर सुरक्षा फर्म ‘इर्रेगुलर’ के एक ऑनलाइन परीक्षण के दौरान हुई। परीक्षण के तहत एआई मॉडल को एक काल्पनिक वातावरण में एक नकली कंपनी के डेटा पर लक्ष्य साधने का काम दिया गया था।

परीक्षण प्रणाली के इंटरनेट से जुड़े होने और नकली कंपनी का नाम एक वास्तविक कंपनी से मेल खाने के कारण जेमिनी ने इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक जानकारियों का उपयोग किया तथा पासवर्ड एवं क्रेडेंशियल्स का अनुमान लगाकर असली कंपनियों के सर्वर तक पहुंच बना ली।

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बीबीसी ने गूगल अधिकारी के हवाले से बताया कि जैसे ही मॉडल को इसका अहसास हुआ, ‘मॉडल स्वतः ही रुक गया’।

गूगल की सुरक्षा इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष हीदर एडकिन्स ने एक बयान में कहा, “हमने तीनों प्रभावित कंपनियों को इसकी जानकारी दे दी है और अपने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार किये हैं।”

उन्होंने कहा कि यह घटना शक्तिशाली एआई मॉडलों को जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने का महत्व बताती है।

गौरतलब है कि हाल ही में अन्य एआई सिस्टमों में भी इस तरह के उल्लंघन देखे गये हैं। इससे पहले जुलाई में एंथ्रोपिक के क्लॉड और ओपनएआई के मॉडलों के भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने और साइबर हमलों को अंजाम देने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

एआई के विकास की गति और इससे पैदा होने वाले संभावित खतरों को लेकर तकनीकी जगत और वैश्विक नेताओं के बीच अच्छी खासी बहस तेज हो गयी है। जहां एक ओर एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग ने एआई विकास को तेज गति से आगे बढ़ाने की वकालत की है, वहीं ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी सैम आल्टमैन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में इस तकनीक की सुरक्षा पर अपनी बात रखने वाले हैं।

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एआई का भारत में मजाक चल रहा है

वह तो भला हो गलगोटिया वालों का कि उन्होंने भारत में हुए एआई समिट में चीन का रोबोटिक कुत्ता अपना आविष्कार बता कर पेश कर दिया, जिस पर पूरी दुनिया में हंसी उड़ी अन्य़था उस सम्मेलन के बाद तो भारत को एआई में विश्वगुरू घोषित किए जाने की तैयारी थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भारत का एआई समिट दो कारणों से चर्चा में रहा। एक चीन के रोबोटिक कुत्ते को भारत की एक यूनिवर्सिटी द्वारा अपना कह कर बताने। दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एआई के दिग्गजों के हाथ उठा कर चुनावी रैली जैसा प्रदर्शन करने के कारण।

वह तस्वीर दुनिया भर में वायरल हुई थी। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो आमोदेई दोनों को मोदी के जोर देने पर एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाना पड़ा, जबकि दोनों एक दूसरे से बात करना तक पसंद नहीं करते। दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाते समय बहुत असहज दिख भी रहे थे। लेकिन मोदी को उसकी परवाह नहीं थी। उन्हें तो दिखाना था कि वे दुनिया के एआई दिग्गजों के साथ मिल कर भारत में एआई क्रांति का ऐलान कर रहे हैं।

खैर, उसके बाद भारत में एआई की चर्चा दूसरे ही संदर्भों में होने लगी। उस समय जो मजाक बना उसके बाद मान लिया गया कि एआई से मजाक ही बन सकता है। तभी भारत में एआई का इस्तेमाल राजनीतिक दल एक दूसरे का मजाक बनाने, एक दूसरे को कमजोर बताने और एक दूसरे को अपमानित करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका में भी भले प्रौद्योगिकी के दिग्गज एआई के क्षेत्र में बड़े काम कर रहे हैं और इसकी प्रगति को लेकर चिंतित भी हैं। लेकिन वहां भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता एआई का इस्तेमाल अपना मजाक बनवाने और दूसरे का मजाक बनाने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप ने एआई से बना कर दर्जनों मीम्स सोशल मीडिया में शेयर किए। किसी में वे ग्रीनलैंड पर कब्जा कर रहे होते हैं तो किसी में कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बना रहे होते हैं तो किसी में ईरान को नष्ट कर रहे दिखते हैं। एआई का जैसा इस्तेमाल राष्ट्रपति ट्रंप कर रहे हैं वैसी ही इस्तेमाल भारत के नेता भी कर रहे हैं। सिर्फ एआई का ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत में ऐसे ही कामों के लिए किया जा रहा है।

भारत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का भी ऐसा ही इस्तेमाल है तो फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन आदि का भी इसी तरह का इस्तेमाल हो रहा है। सभी पार्टियों ने सैकड़ों या हजारों फर्जी अकाउंट बना रखे हैं। भाजपा के तो ‘भाजपा इजराइल’ और ‘भाजपा फिलस्तीन’ के नाम से भी अकाउंट बने हैं। हालांकि पार्टी कहेगी कि इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। लेकिन असल में वहां से वह काम सारे काम हो रहे हैं, जो पार्टी अपने आधिकारिक हैंडल से नहीं कर सकती है। वहां जिस तरह का ऑफेंसिव कंटेंट डाला जाता है, उसकी इजाजत किसी भी सभ्य समाज में नहीं हो सकती है। बात बात में कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश देने वाली सरकार इन मामलों में चुप रहती है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा ऐसा कर रही है। भाजपा का स्केल थोड़ा बड़ा है। वैसे भी आजकल प्रधानमंत्री अपने लगभग हर भाषण में स्केल और स्पीड की बात कर रहे हैं। तो विपक्षी पार्टियों के लिए अपमानजनक कंटेंट तैयार करके सोशल मीडिया में उसे शेयर करने के मामले में भी भाजपा की स्पीड और स्केल बड़ा है। लेकिन कांग्रेस और दूसरी पार्टियां भी पीछे नहीं हैं। अगर भाजपा समर्थकों के हैंडल से सोनिया गांधी से मिलती जुलती शक्ल वाली महिला की तस्वीर और वीडिया बना कर बार बाला नाम से पोस्ट किया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी से मिलते जुलते शक्ल वाले व्यक्ति को वडनगर रेलवे स्टेशन पर जेबतराशी करते दिखाया जा रहा है। भाजपा समर्थकों की ओर से अखिलेश यादव को टोंटी चोरी के रूप में दिखाया जा रहा है तो सपा समर्थक अखिलेश को हीरो और योगी आदित्यनाथ को विलेन बता कर फिल्मी अंदाज में पेश कर रहे हैं।

भारत के नेताओं के लिए एआई का कोई सार्थक या सकारात्मक इस्तेमाल नहीं है। यह प्रचार सामग्री तैयार करने और विपक्ष के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा अपमानजनक कंटेंट तैयार करने में इस्तेमाल हो रहा है। पहले पार्टियों के कार्यकर्ता हाथ से पोस्टर और बैनर तैयार करते थे। तब उनमें सार्थक और समय की वास्तविकताओं को बताने वाले नारे लिखे होते थे। बाद में प्रिटिंग प्रेस में पोस्टर, बैनर छपने लगे। तब पोस्टर के साथ प्रेस का नाम लिखना होता था। इसलिए कोई प्रेस वाला अपमानजनक सामग्री नहीं छापता था। बाद में कंप्यूटर ने इस काम को बहुत आसान बना दिया। कंप्यूटर से तैयार करके बिना प्रिटिंग प्रेस गए अपने प्रिंटर से पोस्टर, पैम्फलेट आदि बनाए जाने लगे। तब नेताओं के लिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालना बहुत आसान हो गया। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एआई ने मिल कर इस काम को बहुत बड़े स्तर पर पहुंचा दिया है। अब आइडिया भी एआई जेनरेट कर रहा है, तस्वीरें और वीडियो भी वही तैयार कर रहा है और उससे कंटेंट भी वही बना रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट बना कर उस पर एआई से तैयार कंटेंट शेयर करना और उसे वायरल कराना आज की राजनीति का और प्रचार का भी सबसे बड़ा सत्य है। भारत में कम से कम नेता और पार्टियां एआई का इस्तेमाल इसके लिए ही कर रही हैं।