गूगल जेमिनी एआई ने सुरक्षा परीक्षण के दौरान तीन कंपनियों के सिस्टम में लगाई सेंध

गूगल के कृत्रिम मेधा (एआई) मॉडल जेमिनी ने साइबर सुरक्षा क्षमताओं के परीक्षण के दौरान तीन कंपनियों के सिस्टम में स्वायत्त रूप से सेंध लगाई। कंपनी ने यह जानकारी दी है। इसे इस तरह की कार्रवाई को अंजाम देने वाला जेमिनी का पहला ज्ञात मामला माना जा रहा है।

यह घटना इजरायली साइबर सुरक्षा फर्म ‘इर्रेगुलर’ के एक ऑनलाइन परीक्षण के दौरान हुई। परीक्षण के तहत एआई मॉडल को एक काल्पनिक वातावरण में एक नकली कंपनी के डेटा पर लक्ष्य साधने का काम दिया गया था।

परीक्षण प्रणाली के इंटरनेट से जुड़े होने और नकली कंपनी का नाम एक वास्तविक कंपनी से मेल खाने के कारण जेमिनी ने इंटरनेट पर मौजूद सार्वजनिक जानकारियों का उपयोग किया तथा पासवर्ड एवं क्रेडेंशियल्स का अनुमान लगाकर असली कंपनियों के सर्वर तक पहुंच बना ली।

Also Read : द रेवोल्यूशनरीज के लिए रोहित सराफ ने की 15 महीने की ट्रेनिंग

बीबीसी ने गूगल अधिकारी के हवाले से बताया कि जैसे ही मॉडल को इसका अहसास हुआ, ‘मॉडल स्वतः ही रुक गया’।

गूगल की सुरक्षा इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष हीदर एडकिन्स ने एक बयान में कहा, “हमने तीनों प्रभावित कंपनियों को इसकी जानकारी दे दी है और अपने ट्रेनिंग पार्टनर के साथ मिलकर परीक्षण प्रक्रियाओं में आवश्यक सुधार किये हैं।”

उन्होंने कहा कि यह घटना शक्तिशाली एआई मॉडलों को जिम्मेदारी से कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करने का महत्व बताती है।

गौरतलब है कि हाल ही में अन्य एआई सिस्टमों में भी इस तरह के उल्लंघन देखे गये हैं। इससे पहले जुलाई में एंथ्रोपिक के क्लॉड और ओपनएआई के मॉडलों के भी सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने और साइबर हमलों को अंजाम देने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

एआई के विकास की गति और इससे पैदा होने वाले संभावित खतरों को लेकर तकनीकी जगत और वैश्विक नेताओं के बीच अच्छी खासी बहस तेज हो गयी है। जहां एक ओर एनवीडिया के सीईओ जेन्सन हुआंग ने एआई विकास को तेज गति से आगे बढ़ाने की वकालत की है, वहीं ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी सैम आल्टमैन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में इस तकनीक की सुरक्षा पर अपनी बात रखने वाले हैं।

Pic Credit : ANI

AI की सुस्त रफ्तार पर तेज गिरावट, 13% टूट गया SoftBank का शेयर, ये है कनेक्शन

सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयरों में बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि यह करीब तीन महीने में सबसे तेज स्पीड से नीचे फिसल गया। यह दबाव ऐसे समय में आया है, जब एंथ्रॉपिक पीबीसी (Anthropic PBC) और चैटजीपीटी (ChatGPT बनाने वाली कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने डेवलपर्स से सुरक्षा कारणों से एआई डेवलपमेंट की स्पीड सुस्त करने को कहा है। इसके चलते जापान के टेक इंवेस्टर सॉफ्टबैंक (SoftBank) को लेकर मार्केट की चिंता बढ़ गई और धड़ाधड़ इसके शेयरों की बिक्री बढ़ गई। जापान के मार्केट में इसके शेयर आज सोमवार 14 सितंबर को 13% से अधिक टूट गए जोकि जून के आखिरी दिनों के बाद से इसके लिए सबसे बड़ी गिरावट है।

SoftBank को क्यों लगा झटका

एआई की रफ्तार सुस्त करने की अपील ने सॉफ्टबैंक के शेयरों को तगड़ा झटका दिया है। इसकी वजह ये है कि एआई इंडस्ट्री में निवेश के लिए सॉफ्टबैंक लगातार ताबड़तोड़ कर्ज ले रहा है और यह ओपनएआई के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार है। इसमें सॉफ्टबैंक का कुल निवेश अक्टूबर तक करीब $6.5 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि सॉफ्टबैंक के फाउंडर मासायोशी सोन (Masayoshi Son) के एआई की संभावनाओं पर अत्यधिक भरोसे को लेकर अब निवेशक चिंता जता रहे हैं। मासायोशी ने अरबों डॉलर के कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं, लेकिन रेवेन्यू कितना मिलेगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने ‘एआई बबल’ की आशंकाओं को खारिज कर दिया है लेकिन इस आक्रामक रणनीति के चलते सॉफ्टबैंक भारी-भरकम वोलैटिलिटी के रिस्क में आ गई है।

क्या है सॉफ्टबैंक की योजना?

सॉफ्टबैंक की योजना ¥1 ट्रिलियन ($6.5 बिलियन) यानी ₹62 हजार करोड़ से अधिक के रिटेल बॉन्ड जारी करने की है। इसके अलावा ओपनएआई के शेयरों से जुड़े करीब $1000 करोड़ के लोन हासिल करने की है। यह एबीबी रोबोटिक्स और डिजिटलब्रिज जैसी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए फंड जुटा रही है। सॉफ्टबैंक की योजना दुनिया भर में डेटा सेंटर बनाने की भी है।

AI पर बहस तेज, Trump ने कहा निगेटिव ताकतें कर रही शिकायतें, इतना गंभीर है मामला

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

संडे प्रोफाइल : विनोद खोसला:टेक में जोखिम भरे निवेश के लिए जाने जाते हैं खोसला

भारतीय मूल के अमेरिकी इन्वेस्टर विनोद खोसला फोर्ब्स की 2026 अमीर इमिग्रेंट्स सूची में सबसे अमीर भारतीय आप्रवासी के रूप में नामित हुए हैं। वे जोखिम भरी टेक्नोलॉजी कंपनियों में निवेश के लिए जाने जाते हैं। विनोद खोसला मानते हैं कि हर बड़ी समस्या में एक बड़ा अवसर छिपा होता है। उनकी यह सोच निवेश के फैसलों में भी दिखती है। 2011 में स्केटिंग के दौरान घुटने में चोट लगने पर डॉक्टरों ने इलाज को लेकर अलग-अलग राय दी। हेल्थ केयर सिस्टम से निराश खोसला ने एक लेख में लिखा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अल्गोरिदम डॉक्टरों से बेहतर काम कर सकते हैं। इस पर लंबे समय तक बहस हुई। इसके बाद उनकी फर्म ने रोबोटिक्स और मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में कई निवेश किए। खोसला आज भी अपनी बात पर कायम हैं। सिलिकॉन वैली की प्रमुख हस्तियों में शामिल 71 वर्षीय खोसला ने तीन अन्य लोगों के साथ 1982 में कंप्यूटिंग कंपनी सन माइक्रोसिस्टम्स की स्थापना की थी। 2010 में उन्होंने इसे ओरेकल को बेच दिया। इसके बाद उनकी वेंचर कैपिटल कंपनी खोसला वेंचर्स ने ग्रीन टेक, हेल्थ केयर और एआई स्टार्टअप्स में बड़े दांव लगाए। 2019 में खोसला वेंचर्स ने ओपनएआई में 50 मिलियन डॉलर यानी करीब 477 करोड़ रुपए का निवेश किया था। उस समय कंपनी आज जैसी बड़ी नहीं थी। खोसला ने बाद में कहा कि ओपनएआई के असफल होने की 90% संभावना भी होती तो दुनिया बदलने की 10% संभावना के लिए यह दांव लगाने लायक था। आज ओपनएआई दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल है। 2023 में जब सीईओ सैम आल्टमैन को कंपनी से बाहर किया गया तो खोसला उनके समर्थन में खड़े हुए थे। नई दिल्ली में जन्मे खोसला के पिता सेना में थे। वे चाहते थे कि बेटा भी सेना में जाए। लेकिन विनोद की दिलचस्पी तकनीक में थी। उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग की और इसके बाद स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए तथा कार्नेगी मेलोन यूनिवर्सिटी से साइंस में मास्टर्स किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अमेरिका में बस गए। खोसला का भरोसा शुरू से एआई में रहा है। वे बताते हैं कि 2014 में एआई रेडियोलॉजी से उनका पहला एआई निवेश शुरू हुआ। उनके मुताबिक ओपनएआई में निवेश बहुत बड़ा दांव था, जबकि वे आमतौर पर बड़े दांव नहीं लगाते। उनका मानना है कि ऊंचे जोखिम वाली नई टेक्नोलॉजी में निवेश जरूरी है। वे कहते हैं कि एआई से खतरे हो सकते हैं, लेकिन इसके फायदों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खोसला के मुताबिक अभी अमेरिकी एआई मॉडल्स का दबदबा है, लेकिन देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अपने मॉडल विकसित कर सकते हैं। चीन अपना मॉडल बनाएगा तो भारत भी अपना मॉडल बना सकता है। उन्हें भरोसा है कि एआई के फायदे धीरे-धीरे बढ़ेंगे। वे भारत के पेमेंट सिस्टम का उदाहरण देते हैं। उनके अनुसार तकनीक की मदद से डॉक्टर और एआई ट्यूटर जैसी सेवाएं कम लागत में अधिक लोगों तक पहुंचाई जा सकती हैं।

OpenAI IPO: पहले सेफ्टी, फिर आईपीओ; इस साल नहीं लिस्ट होगी ChatGPT, खुद Sam Altman ने किया ऐलान

OpenAI IPO: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई का आईपीओ इस साल 2026 में भी नहीं आने वाला है। ये बातें खुद कंपनी के सीईओ सैम आल्टमैन (Sam Altman) ने कही है। फॉर्च्यून के साथ एक इंटरव्यू में सैम आल्टमैन ने कहा कि फिलहाल कंपनी का ध्यान एआई तकनीक से जुड़ी सुरक्षा से मसलों को सुलझाने पर है और ऐसे में इस साल कंपनी की शेयर मार्केट में लिस्ट होने की कोई योजना नहीं है। शनिवार को सामने आए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आईपीओ लाने के लिए यह गलत समय होगा और अगले साल से पहले यह होने वाला नहीं हैं।

OpenAI के सीईओ Sam Altman किस खतरे से कर रहे सेफ्टी की बात?

ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन का कहना है कि इस दशक के आखिरी तक सभी के मारे जाने का लगभग 10% रिस्क उठाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया एक नए दौर में एंट्री कर रही है और जैसा कि अब तक होता आया है, उसी तरह से इस दौर में भी अलग तरह से काम करना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी मानवता को फायदा पहुंचाने वाला ऐसा काम किया जाए, लेकिन यह भी सुनिश्चित हो कि कोई भी इसके करीब का भी रिस्क न उठाए।

बता दें कि एआई से इंसानों के अस्तित्व के खत्म होने की चर्चा अब चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है। अभी हाल ही में एंथ्रॉपिक के एक रिसर्चर ने इससे जुड़ी चिंता जताते हुए इस्तीफा दिया तो और खलबली मच गई। रिसर्चर ने चिंता जताई कि एंथ्रॉपिक एआई को लेकर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम कर रही थी और यह दशक के आखिरी तक सभी इंसानों को खत्म कर सकता है। एंथ्रॉपिक के एक मौजूदा एंप्लॉयी ने भी X (पूर्व नाम Twitter) पर एक पोस्ट में कहा कि अगले दशक तक इस तरह की स्थिति बनने की आशंका 10% से अधिक हो सकती है। ऐसे में इसे लेकर सैम आल्टमैन का कहना है कि इस बात को लेकर सभी को एक राय होना चाहिए कि ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना है जिससे एआई के हाथों इंसानों को अपना कंट्रोल देने का रिस्क हो जाए।

जून में दाखिल किया था का IPO का एप्लीकेशन

ओपएनएआई ने जून महीने में आईपीओ के लिए गोपनीय तरीके से एप्लीकेशन फाइल किया था। अब सामने आ रहा है कि कंपनी इस साल आईपीओ नहीं लाने वाली है लेकिन यह नहीं बताया कि यह शेयर मार्केट में कब लिस्ट होगी। वैसे एआई सेक्टर की एक और कंपनी एंथ्रॉपिक भी आईपीओ की तैयारी कर रही है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह स्पेसएक्स (SpaceX) के रिकॉर्ड आईपीओ से भी बड़ा हो सकता है। स्पेसएक्स का $86 अरब का आईपीओ इस साल आया था।

AI का खतरा आया सामने, डरे Elon Musk, इस काम के लिए Dario Amodei की कॉल पर Sam Altman भी हुए राजी

AI बेकाबू! Dario Amodei, Sam Altman और Elon Musk आए साथ; ग्रोथ की रफ्तार सुस्त करने पर राजी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की दुनिया तेजी से बढ़ रही है लेकिन इसी इंडस्ट्री की एक दिग्गज कंपनी एंथ्रॉपिक (Anthropic) के सीईओ डेरियो एमोडेई (Dario Amodei) इसकी रफ्तार कम करने की वकालत कर रहे हैं। इस मामले में उन्हें ओपनएआई (OpenAI) के सीईओ सैम आल्टमैन (Sam Altman) और टेस्ला (Tesla) के मालिक एलॉन मस्क (Elon Musk) से सपोर्ट मिला है। डेरियो का कहना है कि एआई डेवलपमेंट की रफ्तार सुस्त करनी होगी ताकि भविष्य में इंसानों का एडवांस्ड एआई सिस्टम्स पर नियंत्रण न खो जाए। एमोडेई ने ये बातें ऐसे समय में कही है जब कई टेक एक्सपर्ट्स एआई के अनियंत्रित विकास और इस्तेमाल को लेकर चिंता जता चुके हैं।

क्या कहना है Anthropic के Dario Amodei का

एमोडेई ने एआई के खतरों को लेकर एक निबंध लिखा है। इसमें उन्होंने लिखा है कि एआई जिंदगी की क्वालिटी में काफी सुधार कर सकता है, लेकिन इसमें बड़े खतरे भी हैं। उनका कहना है कि एआई की रफ्तार सुस्त करनी ही होगी और अगर इसकी ग्रोथ बिना कंट्रोल के जारी रही तो एक ऐसा समय भी आ सकता है कि जब इंसानों की इस पर नियंत्रण की क्षमता पीछे रह जाए।

एमोडेई ने X (पूर्व नाम Twitter) पर लिखा है कि एआई इंडस्ट्री की रफ्तार सुस्त क्यों होनी चाहिए और ऐसा करने के लिए तीन चरण की योजना भी पेश की है, जिसमें से पहले चरण को एंथ्रॉपिक ने एकतरफा तौर पर अपनाने की प्रतिबद्धता जताई है। एमोडेई का कहना है कि एंथ्रॉपिक थर्ड पार्टी एवैल्युएटर्स को अपने सिस्टम तक स्थायी एंप्लॉयी के लेवल का एक्सेस देगी, ताकि वे सेफ्टी की जांच कर सकें, घटनाओं की जानकारी दे सकें और ट्रेनिंग के दौरान एआई मॉडल के अलाइनमेंट का आकलन कर सकें।

किस कारण जता रहे खतरा

एमोडेई का कहना है कि उन्होंने 12 साल से एआई पर इसलिए काम किया क्योंकि उनका मानना है कि यह इंसानों की जिंदगी बेहतर कर सकता है और अगले पांच साल में यह बड़ी अधिकतर बीमारियों का इलाज कर सकता है, आर्थिक विकास तेज कर सकता है तो लोकतंत्र और सशक्तिकरण के नए दौर की शुरुआत कर सकता है। हालांकि अब उन्होंने चेतावनी दी है कि बाकी शक्तिशाली तकनीकों की तरह एआई के साथ भी गंभीर खतरे जुड़े हैं हुए हैं जैसे कि एआई सिस्टम पर नियंत्रण खत्म हो जाए या साइबर हमले और आतंकी हरकतों के लिए इसका गलत इस्तेमाल और आर्थिक अस्थिरता। एमोडेई का मानना है कि कमर्शियल तौर पर कॉम्पटीशन से ये रिस्क बढ़ सकते हैं।

उन्होंने इससे जुड़े खतरे को लेकर ओपनएआई और हगिंग फेस से जुड़े एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें एआई एजेंट्स के एक ग्रुप ने उन टारगेट पर अटैक किया, जिसके लिए निर्देश ही नहीं दिया गया था। एमोडेई का कहना है कि से ऐसे ग्रुप पूरे इंटरनेट पर कब्जा भी कर सकते हैं।

क्या कहना है Tesla के Elon Musk और OpenAI के Sam Altman का

सैम आल्टमैन ने एमोडेई का सपोर्ट करते हुए कहा कि ओपनएआई में भी पिछले कुछ हफ्ते फ्रंटियर एआई के डेवलपमेंट की रफ्तार सुस्त करने पर चर्चा हुई। उन्होंने एमोडेई के थर्ड पार्टी एवैल्युएटर्स को एंप्लॉयी जैसा एक्सेस देने के आइडिया का सपोर्ट किया और कहा कि ओपनएआई में भी ऐसा होगा। एलॉन मस्क ने भी एमोडेई का सपोर्ट करते हुआ कहा कि डेरियो सही हैं।