एआई का भारत में मजाक चल रहा है

वह तो भला हो गलगोटिया वालों का कि उन्होंने भारत में हुए एआई समिट में चीन का रोबोटिक कुत्ता अपना आविष्कार बता कर पेश कर दिया, जिस पर पूरी दुनिया में हंसी उड़ी अन्य़था उस सम्मेलन के बाद तो भारत को एआई में विश्वगुरू घोषित किए जाने की तैयारी थी। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। भारत का एआई समिट दो कारणों से चर्चा में रहा। एक चीन के रोबोटिक कुत्ते को भारत की एक यूनिवर्सिटी द्वारा अपना कह कर बताने। दूसरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एआई के दिग्गजों के हाथ उठा कर चुनावी रैली जैसा प्रदर्शन करने के कारण।

वह तस्वीर दुनिया भर में वायरल हुई थी। ओपनएआई के सैम ऑल्टमैन और एंथ्रोपिक के डारियो आमोदेई दोनों को मोदी के जोर देने पर एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाना पड़ा, जबकि दोनों एक दूसरे से बात करना तक पसंद नहीं करते। दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उठाते समय बहुत असहज दिख भी रहे थे। लेकिन मोदी को उसकी परवाह नहीं थी। उन्हें तो दिखाना था कि वे दुनिया के एआई दिग्गजों के साथ मिल कर भारत में एआई क्रांति का ऐलान कर रहे हैं।

खैर, उसके बाद भारत में एआई की चर्चा दूसरे ही संदर्भों में होने लगी। उस समय जो मजाक बना उसके बाद मान लिया गया कि एआई से मजाक ही बन सकता है। तभी भारत में एआई का इस्तेमाल राजनीतिक दल एक दूसरे का मजाक बनाने, एक दूसरे को कमजोर बताने और एक दूसरे को अपमानित करने के लिए कर रहे हैं। हालांकि अमेरिका में भी भले प्रौद्योगिकी के दिग्गज एआई के क्षेत्र में बड़े काम कर रहे हैं और इसकी प्रगति को लेकर चिंतित भी हैं। लेकिन वहां भी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जैसे नेता एआई का इस्तेमाल अपना मजाक बनवाने और दूसरे का मजाक बनाने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप ने एआई से बना कर दर्जनों मीम्स सोशल मीडिया में शेयर किए। किसी में वे ग्रीनलैंड पर कब्जा कर रहे होते हैं तो किसी में कनाडा को अमेरिका का हिस्सा बना रहे होते हैं तो किसी में ईरान को नष्ट कर रहे दिखते हैं। एआई का जैसा इस्तेमाल राष्ट्रपति ट्रंप कर रहे हैं वैसी ही इस्तेमाल भारत के नेता भी कर रहे हैं। सिर्फ एआई का ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल भारत में ऐसे ही कामों के लिए किया जा रहा है।

भारत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का भी ऐसा ही इस्तेमाल है तो फेसबुक, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन आदि का भी इसी तरह का इस्तेमाल हो रहा है। सभी पार्टियों ने सैकड़ों या हजारों फर्जी अकाउंट बना रखे हैं। भाजपा के तो ‘भाजपा इजराइल’ और ‘भाजपा फिलस्तीन’ के नाम से भी अकाउंट बने हैं। हालांकि पार्टी कहेगी कि इससे उनका कोई लेना देना नहीं है। लेकिन असल में वहां से वह काम सारे काम हो रहे हैं, जो पार्टी अपने आधिकारिक हैंडल से नहीं कर सकती है। वहां जिस तरह का ऑफेंसिव कंटेंट डाला जाता है, उसकी इजाजत किसी भी सभ्य समाज में नहीं हो सकती है। बात बात में कंटेंट हटाने के लिए सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश देने वाली सरकार इन मामलों में चुप रहती है।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ भाजपा ऐसा कर रही है। भाजपा का स्केल थोड़ा बड़ा है। वैसे भी आजकल प्रधानमंत्री अपने लगभग हर भाषण में स्केल और स्पीड की बात कर रहे हैं। तो विपक्षी पार्टियों के लिए अपमानजनक कंटेंट तैयार करके सोशल मीडिया में उसे शेयर करने के मामले में भी भाजपा की स्पीड और स्केल बड़ा है। लेकिन कांग्रेस और दूसरी पार्टियां भी पीछे नहीं हैं। अगर भाजपा समर्थकों के हैंडल से सोनिया गांधी से मिलती जुलती शक्ल वाली महिला की तस्वीर और वीडिया बना कर बार बाला नाम से पोस्ट किया जा रहा है कि कांग्रेस की ओर से नरेंद्र मोदी से मिलते जुलते शक्ल वाले व्यक्ति को वडनगर रेलवे स्टेशन पर जेबतराशी करते दिखाया जा रहा है। भाजपा समर्थकों की ओर से अखिलेश यादव को टोंटी चोरी के रूप में दिखाया जा रहा है तो सपा समर्थक अखिलेश को हीरो और योगी आदित्यनाथ को विलेन बता कर फिल्मी अंदाज में पेश कर रहे हैं।

भारत के नेताओं के लिए एआई का कोई सार्थक या सकारात्मक इस्तेमाल नहीं है। यह प्रचार सामग्री तैयार करने और विपक्ष के खिलाफ ज्यादा से ज्यादा अपमानजनक कंटेंट तैयार करने में इस्तेमाल हो रहा है। पहले पार्टियों के कार्यकर्ता हाथ से पोस्टर और बैनर तैयार करते थे। तब उनमें सार्थक और समय की वास्तविकताओं को बताने वाले नारे लिखे होते थे। बाद में प्रिटिंग प्रेस में पोस्टर, बैनर छपने लगे। तब पोस्टर के साथ प्रेस का नाम लिखना होता था। इसलिए कोई प्रेस वाला अपमानजनक सामग्री नहीं छापता था। बाद में कंप्यूटर ने इस काम को बहुत आसान बना दिया। कंप्यूटर से तैयार करके बिना प्रिटिंग प्रेस गए अपने प्रिंटर से पोस्टर, पैम्फलेट आदि बनाए जाने लगे। तब नेताओं के लिए एक दूसरे पर कीचड़ उछालना बहुत आसान हो गया। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और एआई ने मिल कर इस काम को बहुत बड़े स्तर पर पहुंचा दिया है। अब आइडिया भी एआई जेनरेट कर रहा है, तस्वीरें और वीडियो भी वही तैयार कर रहा है और उससे कंटेंट भी वही बना रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी अकाउंट बना कर उस पर एआई से तैयार कंटेंट शेयर करना और उसे वायरल कराना आज की राजनीति का और प्रचार का भी सबसे बड़ा सत्य है। भारत में कम से कम नेता और पार्टियां एआई का इस्तेमाल इसके लिए ही कर रही हैं।

फ्रांस में स्मार्ट चश्मे से महिलाओं की रिकॉर्डिंग पर जांच:बिना इजाजत वीडियो सोशल मीडिया पर डाले; पिछले साल मेटा के 70 लाख चश्मे बिके

फ्रांस में स्मार्ट चश्मों से महिलाओं के बिना अनुमति वीडियो बनाने के मामलों की जांच शुरू हुई है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग सड़क पर महिलाओं के वीडियो बनाकर उन्हें इंटरनेट पर डाल रहे थे। इसी को लेकर यौन उत्पीड़न की शिकायतें मिली हैं। इन चश्मों में छोटा कैमरा लगा होता है। इन्हें पहनने वाला बिना मोबाइल निकाले वीडियो बना सकता है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर दुनिया के कई देशों में चिंता बढ़ रही है। इन स्मार्ट चश्मों में मेटा के चश्मे सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। मेटा ने ये चश्मे, चश्मा बनाने वाली कंपनी एस्सिलोरलक्सोटिका के साथ मिलकर बनाए हैं। पिछले साल इनके करीब 70 लाख चश्मे बिके थे। फ्रांस में निजी वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल का नियम रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक आपराधिक जांच शुरू की गई है। हालांकि, पुलिस ने यह नहीं बताया कि महिलाओं के वीडियो बनाने के लिए किस कंपनी के चश्मे का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस की साइबर क्राइम टीम ने दो हफ्ते पहले इन चश्मों को खुद इस्तेमाल करके देखा। पुलिस यह पता करना चाहती थी कि इनसे किस तरह के गलत काम किए जा सकते हैं। फ्रांस में किसी व्यक्ति की निजी जगह पर बिना अनुमति उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने पर एक साल तक जेल और 45 हजार यूरो तक जुर्माने का प्रावधान है। महिलाओं को ज्यादा निशाना बनाए जाने की चिंता मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, स्मार्ट चश्मों के गलत इस्तेमाल में महिलाओं को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली इनेस गिरार्द ने कहा कि इसका समाधान यह नहीं हो सकता कि जिस व्यक्ति की रिकॉर्डिंग हो रही है, उसी से कहा जाए कि वह ज्यादा सावधान रहे। उनका कहना है कि स्मार्ट चश्मे बनाने वाली कंपनियों को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी तकनीक का इस्तेमाल लोगों को परेशान करने या उनकी निजता भंग करने के लिए न हो। दूसरे देशों में भी स्मार्ट चश्मों पर सवाल जर्मनी: मेटा और स्मार्ट चश्मे से जुड़ी कई कंपनियों के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की गई है। अमेरिका: एक व्यक्ति ने हिरासत केंद्र के अंदर लोगों के वीडियो चुपके से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने इसे लेकर चिंता जताई। ब्रिटेन: इंग्लैंड और वेल्स की अदालतों में मेटा के कैमरा वाले स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक है। कुछ सिनेमाघरों ने भी पाइरेसी के डर से इनके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया है। नॉर्वे: छात्रों की प्राइवेसी को लेकर स्कूलों में स्मार्ट चश्मों के इस्तेमाल पर रोक लगाई गई है ऑस्ट्रेलिया: सरकार सरकारी दफ्तरों में कैमरे वाले स्मार्ट चश्मों पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। अमेजन डिलीवरी में भी इस्तेमाल कर रही स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल सिर्फ वीडियो बनाने के लिए नहीं हो रहा है। अमेजन डिलीवरी के काम में भी ऐसे चश्मों का इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। कंपनी ऐसे चश्मे बना रही है, जिनसे डिलीवरी कर्मचारी बिना मोबाइल निकाले पैकेज स्कैन कर सकेंगे, रास्ता देख सकेंगे और सामान पहुंचाने के बाद उसकी तस्वीर ले सकेंगे। रास्ते में कुत्ता या कोई दूसरी रुकावट होने पर चश्मा अलर्ट भी दे सकता है। अमेजन ने इन चश्मों को डिलीवरी कर्मचारियों के साथ टेस्ट किया है। मेटा बिना कैमरे वाला स्मार्ट चश्मा ला सकता है स्मार्ट चश्मों को लेकर उठ रहे निजता के सवालों के बीच मेटा एक ऐसा नया चश्मा लाने की तैयारी कर रहा है, जिसमें कैमरा नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका नाम लूना हो सकता है। इस चश्मे में छह माइक्रोफोन और कान के पास स्पीकर होंगे। इनके जरिए यूजर मेटा के एआई से बात कर सकेगा। यानी एआई इस्तेमाल करने के लिए कैमरे की जरूरत नहीं होगी। चश्मे में AI को चालू करने के लिए एक अलग बटन भी दिया जा सकता है। यह सामान्य चश्मे जैसा ही दिखेगा। मेटा इसे क्लबमास्टर और बरबैंक नाम के नए डिजाइन में ला सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेटा 23 सितंबर से होने वाले अपने डेवलपर कार्यक्रम में इसकी घोषणा कर सकता है। इसकी बिक्री इस साल के आखिर में शुरू होने की बात कही गई है। —————————– ये खबर भी पढ़ें…. सिंगापुर सरकार किताब पढ़ने के बदले पैसे देगी: रोजाना कम से कम 15 मिनट पढ़ना होगा सिंगापुर सरकार अब लोगों को किताब पढ़ने के लिए पैसे देगी। इसके लिए रोज कम से कम 15 मिनट किताब या लंबे लेख पढ़ने होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत की सड़कों पर मर्दानगी से जूझती महिलाएं

भारत की सड़कों पर मर्दानगी से जूझती महिलाएं

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साहिबा खान

अगर आप एक पुरुष हैं और मोटरसाइकिल चलाते हैं तो मुमकिन है कि जब आप घर से बाहर निकलते होंगे तो जेहन में सिर्फ काम या बाहर जाने की वजह, हेलमेट, वॉलेट और घर की चाबी साथ होती होगी। आप एक निक्कर या हाफ पेंट पहन सकते हैं। सुकून भरा मौसम हो तो बिना बांह की शर्ट या टी शर्ट पहन सकते हैं। लेकिन अगर आप दोपहिया पर सफर करने वाली एक महिला हैं तो आपको कपड़ों से लेकर कई किस्म के अदृश्य भयों के बारे में भी सोचना पड़ता है। ALSO READ: भारत सस्ते पैकेटबंद खाने पर इतना निर्भर कैसे हुआ

 

भारत के जम्मू शहर की सोनाली डब चंडीगढ़ में एक ग्राफिक डिजाइनर और इलस्ट्रेटर के तौर पर काम करती हैं। उन्हें अपनी मोटरसाइकिल से देश को जानना पंसद है। डीडब्ल्यू से बात करते हुए उन्होंने बताया, “निकलने से पहले मैं किसी परिजन को अपनी लोकेशन भेजती हूं, उनसे अपना रूट साझा करती हूं और यह सुनिश्चित करती हूं कि रात में भी वह जगह आने जाने के लिए सुरक्षित है या नहीं।”

 

इतनी तैयारी के बावजूद कई महिलाओं को खासकर भारत की सड़कों पर अभद्र भाषा, आक्रामक ओवरटेक करने और यौन हिंसा व उत्पीड़न जैसे खतरनाक व्यवहार का सामना करना पड़ता है।

 

हाल ही में राजधानी नई दिल्ली से सटे गुरुग्राम की एक घटना सामने आई, जहां एक महिला राइडर को एक कार ड्राइवर ने ओवरटेक करके ऐसी टक्कर मारी कि वे मोटरसाइकिल से ही गिर गईं और भीड़ भाड़ से भरे ट्रैकिफ के बीच बाल बाल बचीं। इस घटना का वीडियो भी वायरल हुआ।

 

इस घटना में एक तरफ सड़क पर गुस्सा, आक्रामक ड्राइविंग और ट्रैफिक उल्लंघनों का मुद्दा है और दूसरी तरफ महिलाओं का सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न, असुरक्षा और उनकी आवाजाही का सवाल है। क्या सड़कें, रुतबा, मर्दानगी और हैसियत दिखाने का मैदान बन गई हैं? ALSO READ: कैसा है 2027 यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव का ‘नीला दांव’

 

सड़क पर गुस्सा केवल पुरुषों की समस्या नहीं है

इंटरनेशनल जर्नल और सोशल साइकेट्री ने ‘रोड रेज’ नाम का अध्ययन पब्लिश किया है। 2013 के इस शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि दिल्ली में हॉर्न बजाना, गलत दिशा से ओवरटेक करना, तेज संगीत बजाना ड्राइविंग से जुड़े गुस्से को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल था। दिल्ली के 200 वाहन चालकों पर किए गए इस अध्ययन में गर्म और उमस भरे मौसम के साथ ही इन कारणों को अहमियत दी गई। ज्यादा गुस्सा महसूस करने वाले ड्राइवरों में आक्रामक तरीके से ओवरटेक करने, गाली देने, चिल्लाने, दूसरे ड्राइवरों को रास्ता न देने और यहां तक कि दूसरे वाहन चालकों से लड़ने या उन्हें टक्कर मारने जैसा व्यवहार ज्यादा दिखाई पड़ा।

 

हालांकि, पुरुषों को स्वाभाविक रूप से ज्यादा आक्रामक ड्राइवर मान लेना शोध से पूरी तरह साबित नहीं हुआ। भारत में रोड रेज पर प्रवीण जैन और उनके सहयोगियों ने भी 2022 में एक शोध किया। 282 प्रतिभागियों पर आधारित यह शोध यूरोपियन साइकेट्री में भी प्रकाशित हुआ। इसके शोधकर्ताओं को पुरुषों और महिलाओं के रोड रेज स्कोर में कोई महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। इसके बजाय कम उम्र के प्रतिभागियों में ड्राइविंग के दौरान गुस्से का स्तर अधिक पाया गया।

 

लेकिन इससे एक दूसरा सवाल खत्म नहीं होता। अगर भारत की सड़कों पर गुस्सा इतना आम हो चुका है तो क्या उसका इजहार महिलाओं के खिलाफ अलग तरीके से किया जाता है?

 

सड़क किसकी? 

कल्पना विश्वनाथ भारत में एक सोशल एंटरप्रेन्योर हैं और ‘सेफ्टीपिन’ नाम की ऐप की को-फाउंडर और सीईओ हैं। सेफ्टीपिन शहरों के सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा का आकलन करता है जैसे रोशनी, दृश्यता, सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षा और पैदल चलने की सुविधाएं। यह आकलन डाटा के आधार पर किया जाता है। विश्वनाथ को जेंडर-समावेशी शहरीकरण पर अच्छी पकड़ हासिल है। डीडब्ल्यू से बात करते हुए उन्होंने बताया “सड़क पुरुषों के लिए उनका अपना मैदान होता है जहां वो शोहरत, गाड़ी और रफ्तार की नुमाइश करते हैं। अब उसमें एक दोपहिया सवार महिला उनकी पितृसत्ता पर चोट करती है। वो सोचते हैं कि एक महिला कैसे इस रफ्तार से मोटरसाइकिल चला कर निकली?” विश्वनाथ कहती हैं कि यह गुस्सा, महिलाओं को उनकी जगह बताने पर आमादा हो जाता है।

 

प्रियंका ठाकुर कुल्लू से हैं और चंडीगढ़ में पत्रकारिता करती हैं। वे भी सोनाली की तरह ही मोटरसाइकिल चलाती हैं। उन्होंने बताया कि एक बार उन्हें भी एक ऐसे व्यक्ति का सामना करना पड़ा जो उनकी मोटरसाइकिल स्टार्ट ना होने पर हॉर्न पर हॉर्न मारता रहा ताकि वो डर जाएं। उनका कहना है कि उनकी मोटरबाइक अचानक रुक गई थी क्योंकि वह व्यक्ति बहुत करीब आ गया था और उन्हें अचानक ब्रेक लगाने पड़े थे। ऐसी कई घटनाएं कई महिलाओं के साथ सड़कों पर हर रोज होती हैं।

 

सार्वजनिक जगह में महिलाओं की मौजूदगी

दिल्ली में युवा महिलाओं के अनुभवों पर 2014 में प्रकाशित एक अध्ययन में 18 से 30 वर्ष की 20 महिलाओं का इंटरव्यू किया गया। महिलाओं ने सड़क पर होने वाले उत्पीड़न के अलग-अलग रूपों और उसके कारण अपने जीवन में लगने वाली बंदिशों के बारे में बताया। अध्ययन में महिलाओं ने उत्पीड़न को महिलाओं के प्रति सामाजिक रवैये और कानूनों के कमजोर क्रियान्वयन से भी जोड़ा।

 

इससे यह समझने में मदद मिलती है कि सड़क पर किसी महिला का अनुभव सिर्फ यह नहीं है कि वह कितने सुरक्षित तरीके से वाहन चला रही है। उसके भीतर यह बेचैनी भी रहती है कि दूसरे लोग उसके साथ कैसा व्यवहार कर सकते हैं।

 

भूगोल और जनसांख्यिकी का असर

शहरीकरण के संदर्भ में कल्पना विश्वनाथ बताती हैं कि जिस रोड पर गुरुग्राम हादसा हुआ, वह सिर्फ तेज चलने वाली गाड़ियों के लिए ही बनी है। उसके इर्द गिर्द न ज्यादा खाने पीने की जगहें हैं, और सभी ट्रैफिक लाइट्स भी हटा दी गई हैं। उन्होंने मानना है कि यह इलाका उत्तरी भारत के हरियाणा राज्य में आता है, जहां ज्यादातर पुरुष पितृसत्ता और सामंती मानसिकता से आते हैं। उन्होंने आगे कहा, “इन जगहों पर इमारतें तो बन गईं लेकिन शहरीकरण के साथ चलने वाले मानदंडों को ठीक से व्यक्तिगत व्यवहार में नहीं अपनाया जा सका है।”

 

उत्तर भारत, खासकर दिल्ली और आसपास के शहरों में, सड़क पर होने वाली रोड रेज और महिलाओं की सार्वजनिक जगहों पर सुरक्षा को लेकर काफी चर्चा और शोध हुए हैं। लेकिन सिर्फ दर्ज किए गए मामलों की संख्या अधिक होने के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि उत्तर भारत में रोड रेज या महिलाओं के खिलाफ सड़क पर होने वाली लैंगिक हिंसा देश के दक्षिणी हिस्से से अलग है। अब तक ऐसा कोई भी अध्ययन सामने नहीं आया है जो क्षेत्रीय व्यवहार से जुड़े आंकड़े सटीकता से सामने रख सके। ALSO READ: क्या वाकई रोकी जा सकती है एआई के विकास की रफ्तार?

 

सड़कें हैं या मर्दानगी का मंच

यहीं पर शहरी नियोजन और जेंडर के बीच का संबंध महत्वपूर्ण हो जाता है। सड़क पर वाहन चलाना सिर्फ तकनीकी काम नहीं है। ड्राइविंग, सड़क इस्तेमाल कर रहे बाकी लोगों के साथ एक तरह का सामंजस्य भी है। इसे प्रतिस्पर्धा या किसी किस्म की रेस बना लेना, दूसरों को हॉर्न बजा बजाकर बाध्य करना, पदयात्रियों को कुछ ना समझना या फिर सब्र और संयम के साथ दूसरों का सम्मान करते हुए सही मौके का इंतजार करना, इस पूरी प्रक्रिया में एक तरह की सामाजिक बातचीत जैसे हैं।

 

दिल्ली में सार्वजनिक जगहों पर यौन उत्पीड़न के हॉटस्पॉट को मैप करने वाले 2026 के एक अध्ययन ने भी यह दिखाया कि पर्यावरण और जगह की विशेषताएं रोड रेज के पैटर्न को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। और शायद यही वह जगह है जहां सड़क का सवाल शहरी नियोजन और जेंडर के सवाल में बदल जाता है।

रिपोर्ट: ट्रम्प को भरोसा, जिनपिंग से अपनी बात मनवा लेंगे:चीनी राष्ट्रपति निजी रिश्तों से ज्यादा देशहित को देते हैं तरजीह

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। ट्रम्प को भरोसा है कि शी के साथ उनके अच्छे निजी रिश्ते बातचीत में अमेरिका के काम आएंगे। लेकिन द अटलांटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, शी निजी रिश्तों से ज्यादा चीन के हित को महत्व देते हैं। पिछले दो साल में इसके दो उदाहरण भी सामने आए। दोनों मामलों में चीन के जवाब के बाद अमेरिका को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। पहला मामला: टैरिफ अप्रैल 2025 में ट्रम्प ने चीन से आने वाले सामान पर बहुत ज्यादा टैरिफ लगा दिया। मकसद था चीन पर दबाव बनाना, ताकि वह अमेरिका की शर्तें मान ले। चीन ने भी अमेरिका के सामान पर जवाबी टैरिफ लगा दिए। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार पर असर पड़ने लगा। आखिरकार ट्रम्प को अपने लगाए कुछ टैरिफ कम करने पड़े। दूसरा मामला: रेयर अर्थ इसके बाद चीन ने रेयर अर्थ के निर्यात पर नए नियम लगा दिए। रेयर अर्थ ऐसी धातुएं हैं, जिनका इस्तेमाल मोबाइल, इलेक्ट्रिक गाड़ियों, इलेक्ट्रॉनिक्स और हथियारों में होता है। चीन इन धातुओं का बड़ा उत्पादक है। इसलिए उसके निर्यात पर रोक से अमेरिका की कई कंपनियों के लिए कच्चे माल की सप्लाई प्रभावित हो सकती थी। चीन के इस कदम के बाद अमेरिका ने भी चीन पर लगाए कुछ निर्यात प्रतिबंधों में ढील दे दी। दोनों की बातचीत में फर्क ट्रम्प को लगता है कि शी के साथ उनके अच्छे रिश्ते बातचीत में काम आएंगे। इसलिए पिछले एक साल में चीन से जुड़े कई बड़े मामलों में उन्होंने खुद शी से बात की। लेकिन शी के फैसलों में निजी रिश्तों का असर कम दिखाई देता है। उनका ध्यान चीन के लंबे समय के हितों पर रहता है। इसी फर्क को समझाने के लिए रिपोर्ट में शी के पुराने सहयोगी जनरल झांग यूशिया का उदाहरण दिया गया है। शी और झांग के परिवारों के रिश्ते कई दशक पुराने थे। दोनों के पिता चीन के गृहयुद्ध के दौरान साथ रहे थे। चार साल पहले शी ने झांग की रिटायरमेंट भी टाल दी थी। इसके बावजूद जनवरी में शी ने झांग को चीन के शीर्ष सैन्य पद से हटा दिया। उन्हें हटाने की असली वजह सार्वजनिक नहीं हुई। यह उदाहरण बताता है कि शी राजनीतिक फैसलों में पुराने निजी रिश्तों को भी प्राथमिकता नहीं देते। ट्रम्प जल्दी नतीजा चाहते हैं, शी इंतजार करते हैं ट्रम्प बातचीत में जल्दी दबाव बनाकर समझौता कराने की कोशिश करते हैं। शी का तरीका अलग है। वे लंबे समय तक इंतजार कर सकते हैं और सही समय आने पर दबाव बढ़ाते हैं। इसी वजह से दोनों नेताओं के बीच दोस्ताना बातचीत के बावजूद बड़े मुद्दों पर समझौता करना आसान नहीं रहा है। ट्रम्प एयरबेस जाकर जिनपिंग का स्वागत करेंगे ट्रम्प 24 सितंबर को सिर्फ जिनपिंग से मुलाकात ही नहीं करेंगे, बल्कि उनके वॉशिंगटन पहुंचने पर एंड्रयूज एयर फोर्स बेस जाकर खुद उनका स्वागत भी करेंगे। पोलिटिको के मुताबिक, ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में यह पहली बार होगा जब वे किसी विदेशी नेता का स्वागत करने एयरबेस जाएंगे। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसका मकसद जिनपिंग को सम्मान देना और बातचीत का माहौल बेहतर बनाना है। चीन के लिए भी यह खास संकेत है, क्योंकि इससे जिनपिंग को अमेरिकी राष्ट्रपति के बराबर सम्मान दिए जाने का संदेश जाता है। ट्रम्प इसके अलावा जिनपिंग के लिए स्टेट डिनर भी रख रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, राष्ट्रपति बनने के बाद यह ट्रम्प का सिर्फ दूसरा स्टेट डिनर होगा। इससे पहले उन्होंने ब्रिटेन के किंग चार्ल्स और क्वीन कैमिला के लिए ऐसा डिनर रखा था। मुलाकात में ये 5 मुद्दे अहम होंगे 1. ताइवान
चीन लगातार ताइवान को लेकर अमेरिका पर दबाव बनाता रहा है। जिनपिंग ने ट्रम्प से बातचीत में अमेरिकी हथियारों की बिक्री का मुद्दा भी उठाया है। ट्रम्प ने ताइवान के लिए आगे होने वाली करीब 14 अरब डॉलर की हथियार बिक्री को बातचीत में इस्तेमाल होने वाले कार्ड के तौर पर बताया था। 2. टैरिफ और व्यापार
अमेरिका-चीन के बीच टैरिफ, बाजार में पहुंच और व्यापार का संतुलन बड़ा मुद्दा रहेगा। दोनों देश तनाव कम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन व्यापार से जुड़े मतभेद अभी खत्म नहीं हुए हैं। 3. ईरान और होर्मुज स्ट्रेट
ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का मुद्दा भी दोनों नेताओं की बातचीत में आया था। ट्रम्प ने कहा था कि जिनपिंग ईरान से स्ट्रेट खोलने के लिए कहने पर सहमत हुए थे। हालांकि, चीन ने ऐसा कोई भरोसा देने की पुष्टि नहीं की थी। 4. AI की होड़
अब अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश एआई और एडवांस्ड चिप्स में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका चीन को अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर और चिप बनाने वाली तकनीक देने पर रोक लगा रहा है। 5. सोयाबीन और व्यापारिक समझौते
जिनपिंग के दौरे से पहले चीन ने अमेरिका से करीब 10 लाख टन सोयाबीन खरीदा है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश का संकेत मिलता है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… रिपोर्ट- ट्रम्प-जिनपिंग की मुलाकात से पहले ताइवान में डर ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली मुलाकात से पहले ताइवान में डर बढ़ गया है। ताइवान को आशंका है कि चीन के साथ कोई बड़ा आर्थिक समझौता करने के लिए ट्रम्प उसके मुद्दे पर नरम रुख अपना सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

इस रैंकिंग में गौतम अदाणी को बड़ा झटका! टिकटॉक के मालिक झांग यिमिंग ने कर दिया कमाल

Asia’s Richest Person: एशिया के सबसे अमीर व्यक्तियों की सूची में बड़ा फेरबदल हुआ है। टिकटॉक की मूल कंपनी बाइटडांस के 43 वर्षीय संस्थापक झांग यिमिंग (Zhang Yiming) भारतीय उद्योगपति गौतम अदाणी को पछाड़कर एशिया के सबसे अमीर शख्स बन गए हैं।

ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस क्षेत्र में आक्रामक विस्तार और बाइटडांस के बढ़ते वैल्यूएशन के दम पर झांग यिमिंग की कुल संपत्ति 105 अरब डॉलर के पार पहुंच गई है।

यिमिंग की संपत्ति में उछाल और अडानी का फिसलना

8 गुना बढ़ी संपत्ति: मार्च 2019 में ब्लूमबर्ग द्वारा झांग यिमिंग की संपत्ति $13 अरब डॉलर आंकी गई थी। अब महज कुछ ही सालों में इसमें 8 गुना से अधिक का इजाफा हुआ है। ब्लैकराक, फिडेलिटी और टी. रो प्राइस जैसे वैश्विक निवेश फर्मों द्वारा बाइटडांस के वैल्यूएशन में रिवीजन के बाद अकेले इस महीने यिमिंग की संपत्ति में $12 अरब डॉलर से ज्यादा का इजाफा दर्ज किया गया।

टिकटॉक ही नहीं, अब ‘AI’ बन रहा है कमाई का असली इंजन

झांग यिमिंग की संपत्ति का मुख्य स्रोत बाइटडांस में उनकी हिस्सेदारी है। हालांकि टिकटॉक कंपनी का प्रमुख वैश्विक प्लेटफॉर्म बना हुआ है, लेकिन यिमिंग ने अब अपना पूरा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर केंद्रित कर दिया है:

AI पोर्टफोलियो: बाइटडांस ने Doubao चैटबॉट और Seedance नामक वीडियो-जेनरेशन टूल लॉन्च किए हैं, जो शॉर्ट-वीडियो प्लेटफॉर्म के बाद कंपनी को ग्रोथ का नया जरिया दे रहे हैं।

सोशल मीडिया डेटा का फायदा: विशेषज्ञों के मुताबिक, बाइटडांस के पास मौजूद अरबों यूजर्स का सोशल मीडिया डेटा उसके एआई मॉडल्स को विकसित करने में बड़ी बढ़त देता है।

अमेरिकी दबाव से राहत और प्राइवेट वैल्यूएशन का गणित

अमेरिका में टिकटॉक पर लग रहे प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव के बीच, बाइटडांस ने इस साल की शुरुआत में अपने अमेरिकी ऑपरेशन्स के कुछ हिस्सों को अमेरिकी निवेशकों को ट्रांसफर किया था। इससे कंपनी पर बना अनिश्चितता का बादल काफी हद तक छट गया।

चूंकि बाइटडांस एक अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए ब्लूमबर्ग यिमिंग की संपत्ति का आकलन करते समय इसके कुल वैल्यूएशन में 10% का डिस्काउंट लागू करता है। इसके बावजूद वे चीन के साथ-साथ अब पूरे एशिया के सबसे अमीर इंसान बन चुके हैं।

गौतम अदाणी की संपत्ति क्यों घटी?

जून में गौतम अदाणी की संपत्ति लगभग $120 अरब डॉलर के स्तर पर थी। लेकिन MSCI शेयर वेटेज में बदलाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार में आए बिकवाली के दौर से अदाणी समूह के शेयरों में गिरावट आई, जिससे वे शीर्ष स्थान से खिसक गए।

Stocks to Watch: 9 लिस्टिंग्स और Sensex की एक्सपायरी; Groww, ITC और Fortis समेत 22 स्टॉक्स फोकस में

Stocks to Watch: अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों की बढ़ोतरी और आगे भी इसमें हाइक के आसार के बाद अधिकतर एशियाई बाजारों में रौनक दिखी। वहीं गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 27.00 प्वाइंट्स यानी 0.12% की गिरावट के साथ 23,240.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज उठा-पटक दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 16 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 332.63 प्वाइंट्स यानी 0.45% की बढ़त के साथ 74,336.45 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 99.00 प्वाइंट्स यानी 0.43% के उछाल के साथ 23,217.60 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Tempsens Instruments India Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर टेंपसेंस इंस्ट्रूमेंट्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 14.2% बढ़कर ₹15.2 करोड़ और रेवेन्यू 33.4% उछलकर ₹118.7 करोड़ पर पहुंच गया।

Infosys

इन्फोसिस ने मध्य भारत में अपनी स्थिति और मजबूत करने के लिए इंदौर डेवलपमेंट सेंटर (DC) के विस्तार का ऐलान किया है। इसमें एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी और अगली पीढ़ी की डिजिटल सर्विसेज की बढ़ी हुई कैपिबिलिटीज होंगी।।

Alembic Pharmaceuticals

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने गुजरात के वडोदरा में एलेम्बिक फार्मा की बॉयोइक्विवैलेंस फैसिलिटी की जांच के बाद एक EIR (एस्टेब्लिशमेंट इंस्पेक्शन रिपोर्ट (EIR) जारी किया है।

Highway Infrastructure

हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी से ₹220.66 करोड़ का ऑर्डर मिला है। इसमें गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लिए यूजर फीस वसूलना, टोल प्लाजा को चलाने और चार पेट्रोल-कम-सेफ्टी गाड़ियां लगाने का काम है।

Mazagon Dock Shipbuilders

मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स ने महाराष्ट्र के दिघी में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड शिपबिल्डिंग इंडस्ट्रियल क्लस्टर में एंकर शिपयार्ड के तौर पर शामिल होने के लिए नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क महाराष्ट्र (NSHIPML) के साथ एक एमओयू किया है। इस शिपयार्ड की सालाना जहाज निर्माण क्षमता कम से कम 1.2 मिलियन ग्रॉस टनेज होने का अनुमान है।

GR Infraprojects

जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स ने एनटीपीसी के मौदा सुपर थर्मल पावर स्टेशन पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) लगाने के ईपीसी पैकेज प्रोजेक्ट के लिए एनटीपीसी को कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने का नोटिस जारी किया है।

Fortis Healthcare

फोर्टिस हेल्थकेयर ने नई दिल्ली के अशोक विहार में 400 से अधिक बेड वाले सुपर-स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में हेल्थकेयर सर्विसेज देने के लिए सेठ सुंदर लाल जैन चैरिटेबल आई हॉस्पिटल के साथ डेफिनिटिव एग्रीमेंट किए हैं। अस्पताल के तीन से चार साल में काम शुरू करने की उम्मीद है।

Venus Pipes and Tubes

वीनस पाइप्स एंड ट्यूब्स ने प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए 18 निवेशकों को प्रति शेयर ₹1,670 के भाव पर ₹372 करोड़ में 22.27 लाख इक्विटी शेयर जारी करने का फैसला किया है।

Gujarat Narmada Valley Fertilizers & Chemicals

गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स ने संजीव कुमार को 9 सितंबर से पांच साल के लिए कंपनी का एमडी नियुक्त किया है।

ITC

आईटीसी ने दो ब्रांड्स- क्लासिक कनेक्ट और गोल्ड फ्लेक सुपरस्टार की कीमतें बढ़ा दी हैं। सीएनबीसी-टीवी18 के सूत्रों के अनुसार क्लासिक कनेक्ट के 20 के पैक की कीमत ₹390 से बढ़ाकर ₹428 तो गोल्ड फ्लेक सुपरस्टार के 10 के पैक की कीमत ₹79 से बढ़ाकर ₹89 कर दी है।

Billionbrains Garage Ventures (Groww)

वेंचर कैपिटल फर्म पीक XV पार्टनर्स के इन्वेस्टमेंट फंड पीक XV पार्टनर्स इंवेस्टमेंट्स VI-1 ने ग्रो में अपनी 1.46% हिस्सेदारी (9.17 करोड़ इक्विटी शेयर) ₹1,756.2 करोड़ में प्रति शेयर ₹191.49 के भाव पर बेच दी। यह Groww की पैरेंट कंपनी में पीक XV पार्टनर्स की 15.68% हिस्सेदारी का एक हिस्सा था।

Kanohar Electricals

ग्रो म्यूचुअल फंड ने ₹35.2 करोड़ में प्रति शेयर ₹740.38 के भाव पर पावर ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी कनोहर इलेक्ट्रिकल्स के 4.75 लाख शेयर (0.6% हिस्सेदारी) ₹35.2 करोड़ में खरीदे।

Glass Wall Systems India

प्राइवेट इक्विटी फर्म फर्स्ट ब्रिज इंडिया ग्रोथ फंड की प्रमोटेड फर्स्ट ब्रिज इंडिया ग्रोथ फंड ने लिस्टिंग के दिन ग्लास वाल सिस्टम्स के अतिरिक्त 6.03 लाख शेयर (0.68% हिस्सेदारी) ₹12 करोड़ में प्रति शेयर ₹198.75 के भाव पर खरीदे। लिस्टिंग के पहले इस फंड के पास कंपनी में 2.19% हिस्सेदारी थी। ऑथम इंवेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर ने प्रति शेयर ₹193.12 के भाव पर पर ₹19.13 करोड़ में 10 लाख शेयर, सीएसआईएम इंडिया अपॉर्च्यूनिटीज फंड 1 ने ₹194.31 के भाव पर ₹10.2 करोड़ में 5.25 लाख शेयर और एसआई इंवेस्टमेंट्स ब्रोकिंग ने ₹203.81 के भाव पर ₹10.19 करोड़ में 5 लाख शेयर खरीदे।

मेनबोर्ड लिस्टिंग: 6 स्टॉक्स

मणिपाल पेमेंट एंड आइडेंटिटी सॉल्यूशंस (Manipal Payment & Identity Solutions), रेंटोमोजो (Rentomojo), एसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी इंडिया (Asset Reconstruction Company India), स्टीम हाउस इंडिया (Steamhouse India), करमतारा इंजीनियरिंग (Karamtara Engineering) और एलसीसी प्रोजेक्ट्स (LCC Projects) के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे।

एसएमई लिस्टिंग: 3 स्टॉक्स

आज विनोद टेक्सवर्ल्ड (Vinod Texworld) की एनएसई एसएमई पर एंट्री होगी तो इंफ्राक्स रिन्यूएबल (Infrax Renewable) और एमटेक एस्टर्स (Amtech Esters) के शेयर बीएसई एसएमई पर लिस्ट होंगे।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: स्काईवेज एयर सर्विसेज, ओडिशा मिनरल्स डेवलपमेंट कंपनी

एक्स-डिविडेंड: एक्यूटस केमिकल्स, अग्रवाल इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन, एशियन एनर्जी सर्विसेज, ऑसम एंटरप्राइज, बाल फार्मा, भारत रसायन, क्राफ्टरूट रिटेल, एस्टर इंडस्ट्रीज, एक्सेल इंडस्ट्रीज, फिल्ट्रा कंसल्टेंट्स एंड इंजीनियर्स, गुजरात फ्लोरोकेमिकल्स, हिमतसिंगका साइड, एचपीएल इलेक्ट्रिक एंड पावर, इंडो एमाइन्स, इंटरनेशनल कन्वेयर्स, इरकॉन इंटरनेशनल, केसीपी शुगर एंड इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन, लैंडमार्क कार्स, मेघना इन्फ्राकॉन इंफ्रास्ट्रक्चर, एमएसटीसी, ओरिएंट सेराटेक, पटेल इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स, प्रीमियर पॉलीफिल्म, रॉसेल टेकसिस, रूबी मिल्स, सनसेरा इंजीनियरिंग, श्री जगदंबा पॉलिमर्स, स्टार पेपर मिल्स, सनटेक रियल्टी, तमिलनाडु पेट्रोप्रोडक्ट्स, तमिलनाडु न्यूज़प्रिंट एंड पेपर्स, वेल्थ फर्स्ट पोर्टफोलियो मैनेजर्स

F&O बैन: आज बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI MDR Charge: क्या आप एमडीआर चार्ज को लेकर चिंतित हैं? 42 FAQ से समझें कि क्यों चिंता करने की जरूरत नहीं है

UPI MDR Charge: यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर चार्ज के ऐलान के बाद कई लोग चिंतित हैं। उन्हें लग रहा है कि अब यूपीआई से पेमेंट करने पर उन्हें फीस चुकानी होगी। यूपीआई पर एमडीआर चार्ज 15 अक्टूबर से लागू होगा। सच यह है कि इसके लागू होने के बाद भी यूजर्स को यूपीआई से पेमेंट पर कोई फीस नहीं चुकानी होगी। एमडीआर चार्ज मर्चेंट यानी दुकानदार को देना होगा। इस पूरे मामले को समझने के लिए मनीकंट्रोल ने 42 FAQ तैयार किए हैं। इसकी मदद से आपकी पूरी उलझन दूर हो जाएगी।

 मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) अभी क्यों लागू किया जा रहा है?

यूपीआई के जरिए हर महीने अरबों रुपये के ट्रांजेक्शन होते हैं। एमडीआर चार्ज से वसूला गया पैसा सिर्फ यूपीआई इकोसिस्टम में डिस्ट्रिब्यूट होता है। इससे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत बनाने, इनोवेशन, साइबर सुरक्षा (बैंकों और नॉन-बैंकों के साथ यूपीआई इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा) और सर्विस बेहतर बनाने में मदद मिलती है। यूपीआई का शुल्क (एमडीआर) क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, वॉलेट आदि जैसे अन्य भुगतान साधनों के मुकाबले काफी कम हैं। शुल्क बहुत ही उचित रखे गए हैं और केवल ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर ही लागू होंगे, जिससे यूपीआई भुगतान स्वीकार करने हेतु सबसे किफायती जरिया बना रहे।

क्या कम राशि वाले यूपीआई लेनदेन प्रभावित होंगे?

₹2,000 तक की राशि वाले यूपीआई लेनदेन पर MDR का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जो कुल यूपीआई (पी2एम) लेनदेन के 95% से अधिक हैं। उचित एमडीआर लगाने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यूपीआई रोजमर्रा के लेनदेन के लिए सुलभ और सुविधाजनक बना रहे, साथ ही दीर्घकालिक इकोसिस्टम की स्थिरता को भी मजबूती मिले।

यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों के लिए कितना एमडीआर लागू किया जा रहा है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर 0.4% लागू होगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेनदेन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित होगा।

यूपीआई एमडीआर की तुलना पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड एमडीआर से कैसे की जा सकती है?

यूपीआई एमडीआर सभी पारंपरिक कार्ड-आधारित लेनदेन शुल्कों की तुलना में काफी कम है। सामान्य क्रेडिट कार्ड एमडीआर आमतौर पर प्रति लेनदेन 1.5% से 2.5% तक होता है, जबकि डेबिट कार्ड एमडीआर 0.90% तक सीमित होता है। ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर यूपीआई एमडीआर को 0.4% और उच्च राशि की खरीदारी पर इसे ₹300 तक सीमित किया गया है।

अपडेटेड एमडीआर संबंधी प्रावधान कब से प्रभावी होंगे?

अपडेटेड एमडीआर 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह समयसीमा अधिग्रहण करने वाले बैंकों, भुगतान एग्रीगेटरों, फिनटेक अनुप्रयोगों और कॉरपोरेट लेखा प्लेटफॉर्मों को अपने सॉफ्टवेयर इंजन और बिलिंग सिस्टम को अपडेट करने के लिए पर्याप्त समय प्रदान करती है।

इसकी तुलना अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों से किस प्रकार की जा सकती है?

दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसे आर्थिक मॉडल हैं जो इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार को सहयोग करते हैं। भारत का दृष्टिकोण सुगमता, विस्तार और समावेशन को प्राथमिकता देता है।

एमडीआर की लिमिट के अंतिम कार्यान्वयन और प्रवर्तन का निर्णय कौन करता है?

परिचालन संबंधी मापदंड, शुल्क वितरण मॉडल और श्रेणी सीमाएं भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अध्यक्षता वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति की ओर से तय किए जाते हैं।

एमडीआर के अंतर्गत प्रस्तावित छोटे व्यापारियों के लिए समर्पित निधि क्या है?

टियर-3 में पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू एवं कश्मीर तथा लद्दाख को मिलाकर कुल 6 केंद्रों और टियर-1 व 2 केंद्रों, जिनमें केंद्र सरकार की ओर से किसी अधिसूचित योजना (जैसे कि पीएम स्वनिधि, पीएम विश्वकर्मा इत्यादि) भी शामिल हैं, में डिजिटल भुगतान इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी बनाए रखने और सब्सिडी दिए जाने हेतु एक समर्पित कोष का निर्माण किया जाएगा। इस कोष का इस्तेमाल व्यापारियों को जोड़ने के लिए इकोसिस्टम के सदस्यों को वित्तीय मदद प्रदान करने और मौजूदा छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई लेन-देन को प्रोत्साहन देने के लिए भी किया जाएगा।

प्रस्तावित समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों को किस प्रकार मदद मिलेगी?

प्रस्तावित किया गया समर्पित कोष से छोटे व्यापारियों के बीच यूपीआई की स्वीकार्यता बढ़ाने में सहायता मिलेगी। इसके लिए अधिग्रहण बैंकों/ भुगतान एग्रीगेटरों को व्यापारी जुड़ाव पहलों के लिए वित्तीय मदद प्रदान की जाएगी और छोटे व्यापारियों की ओर से, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों, टियर-III केंद्रों और उससे आगे के क्षेत्रों में, किए गए यूपीआई लेन-देन हेतु प्रोत्साहन दिया जाएगा। इससे निरंतर इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा, डिजिटल भुगतान की पहुंच बढ़ेगी और छोटे व्यवसायों को डिजिटल भुगतान प्रणाली में शामिल करने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। विस्तृत रूपरेखा को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की सलाह से अगले तीन महीनों के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा।

यूपीआई के लिए केवल सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रहना पर्याप्त क्यों नहीं है?

वार्षिक सरकारी प्रोत्साहन/ सब्सिडी, हालांकि शुरुआती समय में डिजिटल को अपनाने में तेजी लाने में मददगार है, लेकिन इसे भुगतान इंडस्ट्री की ओर से किए गए खर्चों की भरपाई के लिए स्थायी उपाय के बजाय अल्पकालिक मदद के तौर पर तैयार किया गया था। इंडस्ट्री के अनुमानों के आधार पर, यूपीआई भुगतान के संचालन, सर्वर बैंडविथ, धोखाधड़ी रोकथाम प्रणालियों और बैंक तकनीकी सहायता को बनाए रखने में सालाना लगभग ₹20,000 करोड़ का खर्च आता है। केवल राजकोषीय बजट आवंटन पर निर्भर रहने से वित्तपोषण में अनिश्चितता पैदा होती है और बैंकों और फिनटेक कंपनियों की ओर से दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी निवेश सीमित हो जाते हैं। एक वाणिज्यिक, सीमा-आधारित मॉडल में बदलाव निरंतर तकनीकी नवाचार के लिए विश्वसनीय पूंजी प्रदान करता है।

यह कदम पेमेंट ऐप ऑपरेटरों के बीच बाजार प्रतिस्पर्धा को कैसे प्रोत्साहन देगा?

एक संपोषित व्यावसायिक फ्रेमवर्क स्थापित करने से नए फिनटेक स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी कंपनियों को डिजिटल भुगतान क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है। जब भुगतान प्रोसेसिंग शून्य-एमडीआर (डिजिटल डिलीवरी रेट) शर्तों के अंतर्गत संचालित होती है, तो केवल उच्च पूंजी वाली तकनीकी कंपनियां ही दीर्घकालिक परिचालन घाटे को वहन कर सकती हैं। एक पूर्वानुमानित व्यावसायिक राजस्व मॉडल सभी के लिए समान अवसर प्रदान करता है, जिससे छोटे, नवोन्मेषी स्टार्टअप प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं, विशेषीकृत भुगतान सॉफ्टवेयर तैयार कर सकते हैं और वित्तीय पहुंच का विस्तार कर सकते हैं। बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा आखिरकार बेहतर सेवाओं, ऐप की बेहतर विश्वसनीयता और उपभोक्ताओं के लिए अधिक विकल्पों की ओर ले जाती है।

यह नीति उभरते खतरों के खिलाफ साइबर सुरक्षा लचीलापन कैसे सुनिश्चित करती है?

एमडीआर के माध्यम से प्राप्त राजस्व का इस्तेमाल साइबर सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई-आधारित धोखाधड़ी का पता लगाने, एन्क्रिप्शन अपग्रेड आदि में निवेश हेतु किया जा सकता है।

2026 तक यूपीआई का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कितना विस्तार हो चुका है?

2026 तक, यूपीआई का वैश्विक विस्तार काफी बढ़ चुका है और दुनिया के 11 देशों में इसकी भुगतान सेवाएं सक्रिय हैं। एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर घरेलू आधार का निर्माण भारत को डिजिटल वित्तीय इंफ्रास्ट्रक्चर में वैश्विक नेतृत्व के तौर पर अपनी भूमिका को मजबूत करने में मददगार होगा।

वर्तमान में यूपीआई का लेन-देन की मात्रा और मूल्य का स्तर क्या है और इसे आत्मनिर्भर होने की आवश्यकता क्यों है?

अभूतपूर्व जन स्वीकृति का प्रदर्शन करते हुए, यूपीआई ने अकेले अगस्त 2026 में कुल ₹29.9 लाख करोड़ राशि के 2,451 करोड़ लेन-देन संसाधित किए। यह भारी मात्रा भारतीय अर्थव्यवस्था के प्राथमिक वित्तीय इंजन के रूप में यूपीआई की भूमिका को उजागर करती है, जो प्रतिदिन करोड़ों भुगतानों का प्रबंधन करता है। इस पैमाने को संभालने के लिए भारी संख्या में सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर, तेज गति वाली दूरसंचार लाइनें, बहुस्तरीय साइबर सुरक्षा निगरानी और विशेष बैंकिंग सॉफ्टवेयर की जरूरत होती है। लेन-देन के ये आंकड़े इस बात को पुष्ट करते हैं कि प्रणाली की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक आत्मनिर्भर वित्तपोषण फ्रेमवर्क स्थापित करना क्यों जरूरी था।

क्या यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने पर सामान्य उपभोक्ताओं से शुल्क लिया जाएगा?

नहीं, यूपीआई सेवाएं उपभोक्ताओं के लिए निःशुल्क जारी रहेंगी। उपभोक्ता अब तक की तरह ही यूपीआई का इस्तेमाल करके निःशुल्क लेन-देन कर सकते हैं। यूपीआई के माध्यम से भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को कोई शुल्क नहीं देना होगा। व्यक्तिगत खाताधारक बिना किसी शुल्क की चिंता किए अपने सभी नियमित दैनिक खर्चों के लिए यूपीआई एप्लिकेशन का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। एमडीआर नीति यह सुनिश्चित करती है कि यूपीआई पूरे भारत में सभी नागरिकों के लिए निःशुल्क और सुलभ बनी रहे।

क्या यूपीआई के पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) लेन-देन जैसे दोस्तों, परिवार या व्यक्तिगत संपर्कों को पैसे भेजने पर कोई शुल्क लगता है?

नहीं, पी2पी लेन-देन भुगतानकर्ता और प्राप्तकर्ता दोनों के लिए निःशुल्क रहेंगे। यूपीआई का इस्तेमाल कर किसी भी व्यक्ति की ओर से किसी अन्य व्यक्ति को कोई भी राशि हस्तांतरित करने या प्राप्त करने (या स्वयं को हस्तांतरित करने) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। फिर चाहे आप परिवार के किसी सदस्य को पैसे भेज रहे हों, दोस्तों के साथ बिल बांट रहे हों, या अपने लिंक किए गए बैंक खातों में स्वयं को हस्तांतरित कर रहे हों, इन पर कोई शुल्क लागू नहीं होगा। नागरिक बिना किसी लेन-देन शुल्क के यूपीआई पर किसी भी स्वीकृत राशि का हस्तांतरण कर सकते हैं।

क्या यूपीआई ऐप यूपीआई भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क लेना शुरू कर देंगे?

नहीं, यूपीआई ऐप प्रदाता यूपीआई के माध्यम से किए गए किसी भी भुगतान पर प्लेटफॉर्म शुल्क या कोई अन्य शुल्क नहीं लेंगे। यूपीआई एप्लिकेशन को यूपीआई लेन-देन पर प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित किया गया है।

क्या व्यापारियों की ओर से नाममात्र शुल्क का भुगतान शुरू करने पर दुकानों में उपभोक्ता कीमतों में बढ़ोतरी होगी?

नहीं, बाजार की गतिशीलता और ऐतिहासिक भुगतान रुझान दर्शाते हैं कि व्यापारी अधिक कारोबार बढ़ाने के लिए डिजिटल प्रोसेसिंग की मामूली लागत वहन करते हैं। भुगतान स्वीकार करने की लागत को मानक परिचालन खर्च माना जाता है, जिसकी भरपाई ग्राहकों की बढ़ती संख्या, उच्च औसत टिकट मूल्य और नकदी प्रबंधन के कम जोखिम से हो जाती है। चूंकि प्रस्तावित यूपीआई एमडीआर क्रेडिट कार्ड शुल्क से काफी कम है और केवल विशिष्ट लेन-देन सीमा से ऊपर ही लागू होता है, इसलिए दुकानदारों के पास खुदरा कीमतों को बढ़ाने का कोई आर्थिक प्रोत्साहन नहीं है। उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं के लिए निश्चित मूल्य का ही भुगतान करते रहेंगे।

क्या मुझे स्थानीय विक्रेता पर क्यूआर कोड स्कैन करते समय शुल्क देना होगा?

नहीं, स्थानीय बाजारों, स्ट्रीट वेंडरों या छोटी खुदरा दुकानों पर क्यूआर कोड स्कैन करना उपभोक्ताओं के लिए पूरी तरह से निःशुल्क रहेगा। क्यूआर लेन-देन के ग्राहक के सामने वाले हिस्से में कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे खरीदारी की राशि कितनी भी हो। यह नीति चाय की दुकानों और स्थानीय परिवहन जैसी दैनिक छोटी-मोटी खरीदारी को किसी भी प्रकार के अतिरिक्त शुल्क से बचाने के लिए बनाई गई है। उपभोक्ता पूरी तरह से आश्वस्त होकर क्यूआर कोड स्कैन करना जारी रख सकते हैं कि उनसे कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

क्या उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन के लिए कोई मासिक सीमा है?

नहीं, व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त यूपीआई लेन-देन पर कोई मासिक कोटा, मात्रा सीमा या स्तरित सीमा नहीं है। यूजर्स पूरे महीने में बिना किसी शुल्क सीमा तक पहुंचे, जितने चाहें उतने वैध पर्सन-टू-पर्सन (पी2पी) या पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) लेन-देन कर सकते हैं। हालांकि निजी बैंक और एनपीसीआई कुल लेन-देन राशि पर मानक दैनिक सुरक्षा सीमाएं लागू करते हैं (आमतौर पर लेनदेन श्रेणी के आधार पर ₹1 लाख से ₹5 लाख तक), ये जोखिम प्रबंधन मापदंड हैं, न कि व्यावसायिक शुल्क स्तर पर। किसी भी स्थिति में, उपभोक्ता यूपीआई का कितनी भी बार इस्तेमाल करें, उन्हें कोई लेन-देन शुल्क नहीं देना पड़ेगा।

सामान्य यूजर्स यूपीआई शुल्क के संबंध में आधिकारिक अपडेट कहां से सत्यापित कर सकते हैं?

नागरिकों को वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) या भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की ओर से सीधे प्रकाशित आधिकारिक सूचनाओं को देखने की सलाह दी जाती है। भुगतान शुल्कों के संबंध में सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों और भ्रामक रिपोर्टों के कारण, सरकार ने जनता से असत्यापित संदेशों को आगे न भेजने का आग्रह किया है। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी), आरबीआई या एनपीसीआई की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्तियां प्रामाणिक नियामक नीति का प्राथमिक स्रोत हैं। यूजर्स अपने प्राथमिक बैंकिंग एप्लिकेशन में भी सत्यापित सूचनाओं की जांच कर सकते हैं।

क्या एमडीआर की शुरुआत से ऑटो-डेबिट रिकरिंग पेमेंट जैसे यूटिलिटी बिल या ओटीटी/ म्यूचुअल फंड सब्सक्रिप्शन पर असर पड़ता है?

नहीं, स्वचालित रिकरिंग स्थायी निर्देश, जिन्हें यूपीआई मैंडेट या ऑटोपे के नाम से जाना जाता है, पर निर्धारित एमडीआर लेन-देन शुल्क नहीं लगता है। मासिक उपयोगिता बिल, ओटीटी स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन, सभी रिकरिंग निवेश आदि के लिए स्वचालित रिकरिंग हस्तांतरण का इस्तेमाल किए गए भुगतानों पर कोई निर्धारित एमडीआर शुल्क नहीं लगेगा।

क्या छोटे स्थानीय विक्रेताओं (पी2पीएम) से यूपीआई भुगतान पर एमडीआर शुल्क लिया जाएगा?

नहीं। पी2पीएम फ्रेमवर्क के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों के लिए शून्य एमडीआर (एमडीआर) लागू रहेगा। ये वे छोटे विक्रेता हैं जिन्हें यूपीआई क्यूआर के माध्यम से सीधे उनके खातों में प्रति माह 1 लाख रुपये तक की राशि प्राप्त होती है। पी2पीएम श्रेणी असंगठित खुदरा क्षेत्र में छोटे व्यापारियों के बीच डिजिटल भुगतान की स्वीकार्यता को प्रोत्साहन देती है। इसके साथ ही, छोटे विक्रेता विशेष सूक्ष्म व्यापारी खाता वर्गीकरण (पी2पीएम) के अंतर्गत काम करते हैं, जो उन्हें वाणिज्यिक शुल्कों से सुरक्षा प्रदान करता है। एमडीआर फ्रेमवर्क विशेष रूप से इस तरह से तैयार किया गया है कि असंगठित खुदरा क्षेत्र के छोटे व्यवसाय बिना किसी मार्जिन कटौती के डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकें।

पी2पीएम फ्रेमवर्क क्या है और यह छोटे व्यापारियों की सुरक्षा कैसे करता है?

पर्सन-टू-पर्सन-मर्चेंट (पी2पीएम) फ्रेमवर्क एनपीसीआई की ओर से तैयार की गई एक विशेष खाता श्रेणी है, जिसका उद्देश्य छोटे विक्रेताओं को सीधे उनके निजी बैंक खातों में भुगतान प्राप्त करने में मदद करना है। पी2पीएम दिशानिर्देशों के अंतर्गत, यूपीआई क्यूआर कोड के माध्यम से प्रति माह ₹1 लाख तक का भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों को अनिवार्य रूप से शून्य एमडीआर का लाभ मिलता है। यह वर्गीकरण अनौपचारिक स्ट्रीट वेंडर सेटअप और औपचारिक वाणिज्यिक मर्चेंट एक्वायरिंग खातों के बीच एक सेतु का काम करता है, जिससे सूक्ष्म व्यवसायों के लिए कोई लागत नहीं आती है। यह असंगठित क्षेत्र में डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहन देता है।

क्या छोटे व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर कोड को अपग्रेड करने या बदलने की जरूरत है?

नहीं। मौजूदा क्यूआर इंफ्रास्ट्रक्चर सामान्य तरीके से काम करता रहेगा। व्यापारियों को अपने मौजूदा क्यूआर स्टैंड या साउंडबॉक्स को बदलने, पुनः पंजीकृत करने या उनमें कोई बदलाव करने की जरूरत नहीं है। दुकानों में लगे हुए सभी यूपीआई क्यूआर कोड बिना किसी रुकावट के भुगतान प्रक्रिया जारी रखेंगे। व्यापारी बैंक शाखा में जाए बिना या सॉफ्टवेयर अपडेट किए बिना अपने मौजूदा सेटअप के माध्यम से ग्राहकों से भुगतान प्राप्त कर सकते हैं।

यदि किसी छोटे व्यापारी को ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त होता है तो क्या होता है?

एमडीआर की प्रयोज्यता समग्र व्यापारी खाता वर्गीकरण के माध्यम से निर्धारित की जाती है। ₹2,000 से अधिक का भुगतान प्राप्त करने पर पी2पीएम जैसे छूट प्राप्त श्रेणियों के अंतर्गत काम करने वाले छोटे व्यापारियों पर कोई शुल्क नहीं लगता है। ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का एमडीआर लागू होगा। ₹75,000 और उससे अधिक के लेन-देन के लिए, एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा।

समर्पित लघु व्यापारी कोष के लिए विस्तृत रूपरेखा को कब अंतिम रूप दिया जाएगा?

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के साथ सलाह मशविरा करके लघु व्यापारी निधि के लिए विस्तृत परिचालन फ्रेमवर्क को अगले तीन महीने के भीतर अंतिम रूप दिया जाएगा। इस सहयोगात्मक प्रक्रिया के माध्यम से पूंजी आवंटन के सटीक मानदंड, क्षेत्रीय प्राथमिकताएं और व्यापारी प्रोत्साहन संरचनाएं निर्धारित की जाएंगी। हितधारकों के साथ परामर्श से यह सुनिश्चित होगा कि योजना जमीनी स्तर पर वितरण संबंधी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से समाधान करे।

क्या शून्य एमडीआर का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारी को जीएसटी के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है?

नहीं, यूपीआई लेन-देन पर शून्य एमडीआर सुरक्षा का लाभ उठाने के लिए छोटे व्यापारियों को जीएसटी पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत शून्य-रेटेड प्रोसेसिंग की पात्रता मासिक संग्रहण सीमा (प्रति माह ₹1 लाख तक) और बैंक खाता वर्गीकरण की ओर से निर्धारित की जाती है, चाहे कर पंजीकरण की स्थिति कुछ भी हो। अनिवार्य वैधानिक कर सीमा से नीचे काम करने वाले सूक्ष्म उद्यम जीएसटी दस्तावेज प्रदान किए बिना डिजिटल भुगतान संसाधित कर सकते हैं। इससे अनौपचारिक सूक्ष्म व्यवसायों को डिजिटल भुगतान की ओर बढ़ने में आने वाली नियामक अनुपालन संबंधी बाधाओं से छूट मिलती है।

अधिग्रहण करने वाले बैंक शून्य एमडीआर के लिए पात्र छोटे व्यापारियों (पी2पीएम) की पहचान कैसे करेंगे?

अधिग्रहण करने वाले बैंक और भुगतान सेवा प्रदाता, पी2पीएम श्रेणी के अंतर्गत आने वाले व्यापारियों के लिए प्रति माह ₹1 लाख की आने वाले लेन-देन सीमा की निगरानी के लिए लेन-देन गति जांच का इस्तेमाल करते हैं। लगातार 3 महीने तक प्रति माह ₹1 लाख से अधिक यूपीआई भुगतान का आने वाला क्रेडिट प्राप्त करने वाले व्यापारियों को औपचारिक रूप से पी2एम श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया जाता है।

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है?

हां, ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में पी2पीएम व्यापारियों की ओर से स्वीकार किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतानों पर शून्य एमडीआर लागू होता है। ग्रामीण भारत में डिजिटल तकनीक को प्रोत्साहन देना एक प्रमुख नीतिगत उद्देश्य बना हुआ है। सभी ग्रामीण दुकानदारों को सीमा छूट (₹2,000 से कम के भुगतान पर शून्य एमडीआर) का लाभ मिलेगा और प्रस्तावित समर्पित भुगतान प्रोत्साहन कोष के माध्यम से उन्हें अतिरिक्त मदद भी मिलेगी। इसके साथ ही, अधिग्रहण करने वाले बैंकों को ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय दुकानदारों पर लागत का बोझ काफी कम हो जाएगा।

बड़े वाणिज्यिक लेन-देन के लिए कौन सा एमडीआर लागू होता है?

₹2,000/- से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई लेन-देन पर 0.4% का मामूली एमडीआर लागू किया जाएगा। ₹75,000/- और उससे अधिक के लेन-देन पर एमडीआर प्रति लेन-देन ₹300 तक सीमित रहेगा। यह 0.4% की दर क्रेडिट कार्ड या पेमेंट गेटवे जैसे वैकल्पिक भुगतान माध्यमों की तुलना में काफी कम है। इसके साथ ही, ₹2,000 की सीमा से कम के लेन-देन स्थापित व्यावसायिक संस्थाओं के लिए भी निःशुल्क रहेंगे। यह संतुलित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि उद्यम व्यापारी सिस्टम के रखरखाव में उचित योगदान दें, साथ ही दैनिक लेन-देन लागत को भी बेहद कम रखें।

क्या बहुत अधिक राशि वाले यूपीआई भुगतान पर अधिकतम शुल्क की कोई सीमा है?

हां, बड़े लेन-देन करने वाले उद्यमों की सुरक्षा के लिए, ₹75,000 और उससे अधिक के भुगतानों पर प्रति लेन-देन पर ₹300 की अधिकतम शुल्क सीमा निर्धारित की गई है। उदाहरण के लिए, ₹1,00,000 के लेन-देन पर ₹400 का प्रतिशत-आधारित शुल्क नहीं लगेगा; बल्कि, शुल्क ₹300 की निर्धारित सीमा पर ही समाप्त हो जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होता है कि उच्च मूल्य के लेन-देन की लागत पूर्वानुमानित और प्रतिस्पर्धी बनी रहे।

प्रतिशत दर के बजाय निश्चित एमडीआर के लिए कौन सी विशिष्ट श्रेणियां पात्र हैं?

रेलवे, दूरसंचार सेवाएं, बीमा और ईंधन जैसी विशिष्ट व्यापारी श्रेणियों के लिए, 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर प्रति लेन-देन 5 रुपये का एक समान मासिक दर (एमडीआर) लागू होगा। 0.4% की परिवर्तनीय दर लागू करने के बजाय, ये विशिष्ट क्षेत्र लेन-देन राशि की परवाह किए बिना 5 रुपये का निश्चित शुल्क अदा करेंगे। यह एक समान दर मॉडल महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं, उपयोगिता बिल संग्रह और ईंधन खुदरा जैसे कम लाभ वाले क्षेत्रों में लागत बढ़ोतरी को रोकता है। यह सुनिश्चित करता है कि आवश्यक उपभोक्ता सेवाएं कम लागत वाली और डिजिटल रूप से कुशल बनी रहें।

क्या एंटरप्राइज मर्चेंट एमडीआर का बोझ खरीददार पर डाल सकते हैं?

नहीं, यूपीआई के माध्यम से भुगतान स्वीकार करते समय पंजीकृत व्यापारी एमडीआर शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाल सकते। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ता केवल निर्धारित मूल्य का ही भुगतान करें।

सटीक लेन-देन (जैसे, ₹5,000 बनाम ₹1,00,000) पर एमडीआर की गणना कैसे की जाती है?

एमडीआर की गणना लेन-देन मूल्य सीमा के आधार पर एक स्पष्ट और अनुमानित सूत्र का पालन करती है। ₹3,000 की खरीदारी पर, 0.4% की दर लागू करने पर व्यापारी की ओर से अपने अधिग्रहण बैंक को ₹12 का एमडीआर शुल्क देना होता है। ₹50,000 की खरीदारी पर, 0.4% शुल्क ₹200 के बराबर होता है। हालांकि, ₹1,00,000 की उच्च-मूल्य वाली खरीदारी के लिए, 0.4% की गणना (जो ₹400 के बराबर है) ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा से अधिक हो जाती है (₹75,000 और उससे अधिक के भुगतान के लिए प्रति लेन-देन ₹300 की निश्चित अधिकतम सीमा है। ₹2,000 से कम के किसी भी लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं लगता है)।

मर्चेंट को भुगतान की गई राशिलागू एमडीआरमर्चेंट की ओर से भुगतान किया गया एमडीआर
₹ 2,000₹ 0
₹ 3,0000.40% ₹ 12
₹ 50,000 0.40% ₹ 200
₹ 75,000 और उससे अधिकनिश्चित ₹ 300 ₹ 300

क्या एमडीआर यूपीआई या क्रेडिट लाइन से जुड़े क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किए गए लेन-देन पर लागू होता है?

क्रेडिट-लिंक्ड यूपीआई भुगतान, जैसे कि यूपीआई से जुड़े रुपे क्रेडिट कार्ड या पूर्व-स्वीकृत बैंक क्रेडिट लाइनें, अलग क्रेडिट उत्पाद नियमों के अंतर्गत संचालित होते हैं। चूंकि क्रेडिट-लिंक्ड लेन-देन में जारीकर्ता बैंकों की ओर से वित्तपोषित अल्पकालिक लोन शामिल होते हैं, इसलिए वे मानक क्रेडिट कार्ड दिशानिर्देशों का पालन करते हैं। इस संशोधन में चर्चा की गई एमडीआर विशेष रूप से यूजर्स खाते से व्यापारी खाते में सीधे किए जाने वाले यूपीआई लेन-देन पर लागू होती है।

यूपीआई के माध्यम से पूंजी बाजार लेन-देन पर कौन सी विशिष्ट एमडीआर दरें और सीमाएं लागू होती हैं?

म्यूचुअल फंड, प्रतिभूतियों, स्टॉकब्रोकरों और डीलरों को किए जाने वाले भुगतानों सहित पूंजी बाजार लेन-देन के लिए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लेन-देन मूल्य का नाममात्र 0.02% निर्धारित किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 है। औपचारिक वित्तीय बाजारों में खुदरा भागीदारी को प्रोत्साहित करने के लिए यह शुल्क मानक वाणिज्यिक लेन-देन दरों से कम है।

इस पूंजी बाजार एमडीआर फ्रेमवर्क के अंतर्गत कौन सी संस्थाएं और लेन-देन के प्रकार शामिल हैं?

यह विशिष्ट एमडीआर श्रेणी पूंजी बाजारों में कार्यरत सभी विनियमित संस्थाओं को स्पष्ट रूप से कवर करती है, जिनमें एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (म्यूचुअल फंड), एसईबीआई-पंजीकृत स्टॉकब्रोकर, सिक्योरिटीज डीलर और निवेश प्लेटफॉर्म शामिल हैं। यह इक्विटी खरीद, डेट बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड खरीद और ब्रोकर वॉलेट टॉप-अप के लिए यूपीआई के माध्यम से किए गए फंड ट्रांसफर पर लागू होता है। इस श्रेणी को अलग से परिभाषित करके, यह सुनिश्चित किया जाता है कि पूंजी बाजार ट्रांसफर नियमित खुदरा खरीदारी या सामान्य सेवा भुगतानों से अलग हों।

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क्या बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष एमडीआर रियायतों के लिए पात्र हैं?

हां, यूपीआई के माध्यम से स्वीकार किए गए बीमा प्रीमियम भुगतान विशेष निश्चित-दर की छूट के पात्र हैं। ₹2,000 से अधिक के बीमा प्रीमियम भुगतान पर, प्रतिशत-आधारित शुल्क के बजाय प्रति लेन-देन ₹5 का निश्चित एमडीआर लागू होता है। यह रियायती मॉडल सुनिश्चित करता है कि उच्च मूल्य के वार्षिक या अर्ध-वार्षिक बीमा भुगतान करने वाले पॉलिसीधारकों को भारी बैकएंड शुल्क का सामना न करना पड़े। बीमा कंपनियों को कम लागत वाले डिजिटल संग्रह से लाभ होता है, जिससे पूरे भारत में बीमा कवरेज का विस्तार करने में मदद मिलती है।

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर ईंधन की खरीद के लिए एमडीआर कैसे काम करता है?

यूपीआई के माध्यम से पेट्रोल पंपों पर की गई ईंधन खरीद पर ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 की एक समान रियायती दर लागू होती है। यह ₹5 की एक समान फीस पेट्रोल पंप संचालकों को टैंक रिफिल पर लगने वाले उच्च प्रोसेसिंग शुल्क से बचाती है। ₹2,000 से कम के सभी ईंधन भुगतानों पर एमडीआर 0% रहता है, जिससे रोजमर्रा के यात्रियों के लिए ईंधन भरना पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हो जाता है, जबकि ईंधन स्टेशन संचालकों को ऐसे लेन-देन पर कोई एमडीआर नहीं देना पड़ता है।

क्या सरकारी उपयोगिता बिल संग्रह (बिजली, पानी) पर प्रतिशत एमडीआर लागू होगा?

बिजली वितरण, नगरपालिका जल शुल्क और पाइपलाइन की ओर से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस जैसे सार्वजनिक उपयोगिता भुगतान निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के उपयोगिता बिल भुगतानों पर 0.4% बदलाव दर के बजाय ₹5 का एक समान रियायती मासिक दर एमडीआर लागू होता है। ₹2,000 से कम के उपयोगिता लेन-देन पर कोई एमडीआर लागू नहीं होता है। यह फ्रेमवर्क सुनिश्चित करता है कि राज्य उपयोगिता बोर्ड और नगर निगम उच्च प्रसंस्करण शुल्क लगाए बिना बिल संग्रह को डिजिटल बना सकें, जिससे सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं सस्ती बनी रहें।

क्या शैक्षणिक संस्थान मानक एमडीआर प्रतिशत शुल्क से मुक्त हैं?

स्कूल ट्यूशन, विश्वविद्यालय सत्र शुल्क और संस्थागत प्रवेश परीक्षाओं सहित शैक्षणिक शुल्क संग्रह, निर्दिष्ट उद्योग कार्यक्रम श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर निश्चित-फीस संरचना या सीमित प्रोसेसिंग दरें लागू होती हैं, जिससे बड़ी राशि पर लगने वाले उच्च प्रतिशत-आधारित शुल्कों से बचा जा सकता है। ₹2,000 तक के शैक्षणिक लेन-देन पूरी तरह से एमडीआर से मुक्त हैं। यह उपाय सुनिश्चित करता है कि स्कूल, कॉलेज और छात्र भारी प्रशासनिक शुल्कों के बिना डिजिटल रूप से ट्यूशन फीस का भुगतान कर सकें।

गंगा में स्नान करती श्रद्धालु को AI से सेमीन्यूड बनाने वालों पर ऐक्शन की तैयारी; श्रीगंगा सभा ने कहा- धर्म पर आघात

हरकी पैड़ी घाट पर गंगा स्नान करती महिला श्रद्धालु को एआई से सेमीन्यूड बनाने वालों पर ऐक्शन की तैयारी है। एक महिला ने दावा किया कि यह उसका वीडियो है और उसने पुलिस में शिकायत की है।

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

हिंदी दिवस विशेष: जानिए कैसे हिंदी राष्ट्रभाषा के गौरव से वंचित रह गई?

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14 सितंबर को हिंदी दिवस का आगमन संपूर्ण हिंदी जगत के लिए उमंग, उत्साह और ऊर्जा से भरा उत्सव होता है। इसका समापन प्रायः 'हिंदी सप्ताह' या 'हिंदी पखवाड़े' के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत करने तथा हिंदी सेवियों, प्रेमियों एवं साधकों के श्रेष्ठ कार्यों के सम्मान के साथ एक औपचारिकता (कर्मकांड) के रूप में हो जाता है।

 

हिंदी दिवस पर हम अत्यंत आत्मविश्वास के साथ हिंदी की गरिमा, महिमा और उसके अप्रतिम गौरव का गुणगान तो करते हैं, किंतु वास्तव में हम इसकी वर्तमान दशा को लेकर अपेक्षित रूप से गंभीर नहीं होते। जबकि यह दिन हमारे आत्म-मूल्यांकन और आत्म-विश्लेषण का है कि हमने हिंदी के भविष्य को स्वर्णिम बनाने की दिशा में क्या महती योगदान दिया है।

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यह निर्विवाद है कि हिंदी हमारी अस्मिता की पहचान और भारत की आत्मा है। यह हमारी सांस्कृतिक चेतना को सूक्ष्मता से अभिव्यक्त करने वाली अनमोल संपदा है। यह हमारे सार्वभौमिक मूल्यों की संरक्षिका है, जो समग्र राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोती है। हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि एक समृद्ध, सांस्कृतिक, नैतिक और आध्यात्मिक विरासत की संवाहिका है। यह 'वसुधैव कुटुंबकम' अर्थात् वैश्विक बंधुत्व और एकता की भावना को जाग्रत कर जन-जन में आत्म-सम्मान का भाव भरती है। परस्पर सम्मान, जुड़ाव, विनम्रता, सहिष्णुता, संवेदनशीलता और समरसता हिंदी की अंतर्निहित प्रकृति है। इसी कारण यह जन-जन की अभिलाषा के अनुरूप पूरे राष्ट्र की संपर्क भाषा बनी है।

 

मध्यकाल में हिंदी भक्ति आंदोलन के धार्मिक और सामाजिक सुधारों का माध्यम बनी तथा स्वाधीनता संग्राम के राष्ट्रीय आंदोलनों को प्रेरित करने वाले आदर्शों को इसने सशक्त स्वर दिया। हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने के लंबे संघर्ष के बाद 14 सितंबर 1949 को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में यह प्रावधान किया गया कि 'संघ की आधिकारिक भाषा देवनागरी लिपि में हिंदी होगी।' हालांकि, संविधान लागू होने के समय से 15 वर्षों की अवधि तक संघ के उन सभी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति भी दी गई।

 

अनुच्छेद 343 की धारा 3 में यह व्यवस्था थी कि संसद 15 वर्ष की अवधि के पश्चात विधि द्वारा अंग्रेजी के प्रयोग को बढ़ा सकेगी। खेर आयोग और पंत समिति की रिपोर्टों के आधार पर 1963 में राजभाषा अधिनियम बनाकर यह प्रावधान कर दिया गया कि 26 जनवरी 1965 के बाद भी अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा। इसमें यह शर्त जोड़ दी गई कि अंग्रेजी तब तक बनी रहेगी जब तक हिंदी को राजभाषा अपनाने वाले सभी राज्यों के विधानमंडल इसे समाप्त करने का संकल्प पारित न कर दें। इस व्यवस्था ने अंग्रेजी के प्रयोग को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया और एक भी राज्य की असहमति पर हिंदी अनिवार्य राजकाज की भाषा बनने से वंचित रह गई।

 

डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भाषा के प्रश्न को केवल भावुकता से नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा। संस्कृत हो या हिंदी, उनका मानना था कि ये भाषाएं भारत को एकता के सूत्र में बांधकर भाषाई विवादों से बचा सकती हैं। 9 भाषाओं के ज्ञाता और 32 उपाधियों के धारक डॉ. आंबेडकर ने अंग्रेजी के बजाय हिंदी में समाचार पत्र निकाले, जिससे वे वंचित समाज की मुखर आवाज बन सके। वे प्रांतीय भाषाओं के विकास के पक्षधर थे, किंतु राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी का ही समर्थन करते थे। भाषाई आधार पर राज्यों के गठन के विरोधी डॉ. आंबेडकर ने 'एक भाषा-एक राज्य' के स्थान पर 'एक राज्य-एक भाषा' की अवधारणा का समर्थन किया था।

 

हमारे राष्ट्र-निर्माताओं ने बहुत सोच-समझकर हिंदी की स्वीकार्यता को रेखांकित किया था:

महात्मा गांधी: “यदि हम भारत को एक राष्ट्र बनाना चाहते हैं, तो हिंदी ही हमारी राष्ट्रभाषा हो सकती है। राष्ट्रभाषा के बिना राष्ट्र गूंगा है।”

नेताजी सुभाष चंद्र बोस: “प्रांतीय ईर्ष्या-द्वेष को दूर करने में जितनी सहायता हिंदी प्रचार से मिलेगी, उतनी किसी अन्य साधन से नहीं।”

महर्षि दयानंद सरस्वती: “हिंदी के माध्यम से संपूर्ण भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है।”

के. एम. मुंशी: “हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाना नहीं है, वह तो पहले से ही है।”

 

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने लिखा था—

“निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

पै निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को सूल॥”

 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में इसी मूलमंत्र को स्वीकारते हुए मातृभाषाओं और लोकभाषाओं को प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक विशेष स्थान दिया गया है। हालांकि, मातृभाषा में शिक्षा का क्रियान्वयन पर्याप्त मानवीय और भौतिक संसाधनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है। हिंदी के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह केवल प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रहकर वैश्विक विश्वविद्यालयों में उच्च स्तरीय शोध और ज्ञान की बुनियाद बने।

 

किसी भाषा का भविष्य केवल शासकीय आदेशों या तंत्र पर निर्भर नहीं होता; वह भाषा-भाषियों के सृजनात्मक समर्पण, अपनत्व और निस्वार्थ संकल्प-शक्ति से जीवंत रहता है। यदि हमारा हिंदी-प्रेम केवल 14 सितंबर के उत्सव तक सीमित है, तो हमें आत्मचिंतन की आवश्यकता है।

 

मनुस्मृति का कथन है- “धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः” (जो धर्म का नाश करता है, उसका नाश हो जाता है और जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है)। भाषा के संदर्भ में भी यही सत्य है—जो समाज अपनी भाषा की उपेक्षा करता है, उसकी संस्कृति का क्षरण निश्चित है।

 

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने कहा था कि “अन्य भारतीय भाषाएं नदियां हैं और हिंदी महानदी।” अतः हिंदी का यह दायित्व है कि वह अन्य भारतीय भाषाओं को सहेली मानकर परस्पर सम्मान, सहयोग और आदान-प्रदान का वातावरण बनाए।

 

आज सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के डिजिटल युग में हिंदी के समक्ष अनंत संभावनाएं हैं। एक तरफ जहां सूचनाओं का विशाल भंडार है, वहीं फर्जी व गुणवत्ताहीन सामग्री से बचकर प्रामाणिक ज्ञान का चयन करना एक बड़ी चुनौती है। डिजिटल दुनिया में अपनी उपादेयता बनाए रखने के लिए हिंदी में उच्चस्तरीय ज्ञान-कौशल और समृद्ध डिजिटल सामग्री का निर्माण अनिवार्य है।

 

हिंदी के सर्वांगीण विकास के लिए सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर एकीकृत प्रयासों की आवश्यकता है। आधुनिक विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग, एआई, अर्थशास्त्र, खगोल, भूगोल और दर्शन जैसे विषयों पर हिंदी में मौलिक व प्रामाणिक ग्रंथों का सृजन युद्ध स्तर पर होना चाहिए।

 

जिस दिन हिंदी रोजगार की कुंजी और अंतरराष्ट्रीय ज्ञान-विज्ञान का प्रवेश द्वार बन जाएगी, उसी दिन 'हिंदी दिवस' का आयोजन सही मायनों में सार्थक होगा।

 

कोटि-कोटि कंठों की भाषा,

जन-गण की मुखरित अभिलाषा।

हिंदी है पहचान हमारी,

हिंदी है हम सबकी परिभाषा॥

 

लेखक: डॉ. अशोक कुमार भार्गव (पूर्व आईएएस)

संपर्क: 9425427525 | ईमेल: dr.ak.bhargava2022@gmail.com

AI की सुस्त रफ्तार पर तेज गिरावट, 13% टूट गया SoftBank का शेयर, ये है कनेक्शन

सॉफ्टबैंक ग्रुप के शेयरों में बिकवाली की ऐसी आंधी आई कि यह करीब तीन महीने में सबसे तेज स्पीड से नीचे फिसल गया। यह दबाव ऐसे समय में आया है, जब एंथ्रॉपिक पीबीसी (Anthropic PBC) और चैटजीपीटी (ChatGPT बनाने वाली कंपनी ओपनएआई (OpenAI) ने डेवलपर्स से सुरक्षा कारणों से एआई डेवलपमेंट की स्पीड सुस्त करने को कहा है। इसके चलते जापान के टेक इंवेस्टर सॉफ्टबैंक (SoftBank) को लेकर मार्केट की चिंता बढ़ गई और धड़ाधड़ इसके शेयरों की बिक्री बढ़ गई। जापान के मार्केट में इसके शेयर आज सोमवार 14 सितंबर को 13% से अधिक टूट गए जोकि जून के आखिरी दिनों के बाद से इसके लिए सबसे बड़ी गिरावट है।

SoftBank को क्यों लगा झटका

एआई की रफ्तार सुस्त करने की अपील ने सॉफ्टबैंक के शेयरों को तगड़ा झटका दिया है। इसकी वजह ये है कि एआई इंडस्ट्री में निवेश के लिए सॉफ्टबैंक लगातार ताबड़तोड़ कर्ज ले रहा है और यह ओपनएआई के सबसे बड़े निवेशकों में शुमार है। इसमें सॉफ्टबैंक का कुल निवेश अक्टूबर तक करीब $6.5 हजार करोड़ तक पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि सॉफ्टबैंक के फाउंडर मासायोशी सोन (Masayoshi Son) के एआई की संभावनाओं पर अत्यधिक भरोसे को लेकर अब निवेशक चिंता जता रहे हैं। मासायोशी ने अरबों डॉलर के कई प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं, लेकिन रेवेन्यू कितना मिलेगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। उन्होंने ‘एआई बबल’ की आशंकाओं को खारिज कर दिया है लेकिन इस आक्रामक रणनीति के चलते सॉफ्टबैंक भारी-भरकम वोलैटिलिटी के रिस्क में आ गई है।

क्या है सॉफ्टबैंक की योजना?

सॉफ्टबैंक की योजना ¥1 ट्रिलियन ($6.5 बिलियन) यानी ₹62 हजार करोड़ से अधिक के रिटेल बॉन्ड जारी करने की है। इसके अलावा ओपनएआई के शेयरों से जुड़े करीब $1000 करोड़ के लोन हासिल करने की है। यह एबीबी रोबोटिक्स और डिजिटलब्रिज जैसी कंपनियों के अधिग्रहण के लिए फंड जुटा रही है। सॉफ्टबैंक की योजना दुनिया भर में डेटा सेंटर बनाने की भी है।

AI पर बहस तेज, Trump ने कहा निगेटिव ताकतें कर रही शिकायतें, इतना गंभीर है मामला

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।