यूपीएससी के सवाल क्या एआई बना रहा है?

यह बहुत परेशान करने वाला सवाल है क्योंकि संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी एकमात्र ऐसी संस्था है, जिस पर प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले अभ्यर्थी आज भी आंख मूंद कर भरोसा करते हैं। इसका भरोसा इतना गहरा है कि सुप्रीम कोर्ट ने दो बार अपनी सुनवाई में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए और भारत सरकार से कहा कि वह यूपीएससी की तरह का सिस्टम बनाए। लेकिन अब यूपीएससी पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि सवाल पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी का नहीं है। लेकिन प्रश्न पत्र तैयार करने में होने वाली गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं और यह सवाल उठ रहा है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सवाल तैयार कराए जा रहे हैं?

एआई से सवाल तैयार कराने का आरोप इसलिए लगा है क्योंकि इस साल प्रीलिम्स में पूछे गए कई प्रश्न ऐसे थे, जिनमें एक से ज्यादा विकल्प सही हो सकते थे। सवाल उलझा हुआ था और जवाब में जो विकल्प दिए गए थे वो भी उलझे हुए थे। कम से कम 27 सवालों के बारे में ऐसी शिकायत मिली है। इनके बारे में छात्रों ने कहा कि या तो सवाल गलत थे या विकल्पों में कोई सही जवाब नहीं था या विकल्पों में एक से ज्यादा सही जवाब थे। चार छात्रों ने इस साल की परीक्षा के आठ सवालों को चुनौती दी है, जबकि 63 छात्रों ने 27 सवालों को चुनौती दी है। उनके 27 सवालों में चार छात्रों वाले आठ सवाल भी शामिल है। कैट में इस मामले की सुनवाई हो रही है।

चार महीने में सुलझाएं तृणमूल विवाद

नई दिल्ली। राजनीतिक दलों में विभाजन को लेकर संभवतः पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के सामने एक समय सीमा रखी है। सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग से कहा है कि तृणमूल कांग्रेस में विभाजन और उनके नाम व चुनाव चिन्ह पर दावेदारी से जुड़े विवाद को चुनाव आयोग चार महीने में सुलझाए। सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों को एक महीने में अपनी दलीलें पूरी करने और इसके बाद चुनाव आयोग को तीन महीने में फैसला देने का निर्देश दिया है। यानी पूरी प्रक्रिया तार महीने में पूरी करनी होगी।

इससे पहले सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने विवाद को सुलझाने के लिए छह महीने का समय देने की अपील की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। गौरतलब है कि तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी ने यह याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने समय सीमा तय की। असल में चुनाव आयोग ने एक अंतरिम फैसले में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न का इस्तेमाल रोक दिया गया था। पश्चिम बंगाल की दो सीटों पर हो रहे उपचुनाव में चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग अलग नाम और अलग चुनाव चिन्ह आवंटित किए हैं।

गौरतलब है कि शिव सेना के नाम और चुनाव चिन्ह से जुड़ा विवाद करीब चार साल से लंबित है, जबकि एनसीपी का मामला भी तीन साल से पेंडिंग है। दोनों मामलों में अलग अलग गुटों ने पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर दावा किया है। बहरहाल, सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया है कि वह तृणमूल कांग्रेस के विवाद को जल्दी सुलझाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करें। कोर्ट ने कहा कि इन आधुनिक तकनीकों की मदद से जटिल कानूनी दस्तावेजों को पढ़ने और समझने का काम बहुत तेजी से हो सकता है।

₹6 करोड़ बना ₹433 करोड़! इस IPO ने आशीष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल को किया मालामाल

ESDS Software Solution Multibagger Returns: शेयर बाजार में 4 सितंबर को ESDS Software Solution के शेयरों की लिस्टिंग हुई। लिस्टिंग के बाद इसमें आई आतिशी तेजी ने दलाल स्ट्रीट में तहलका मचा दिया है। ब्लॉकबस्टर लिस्टिंग और रिकॉर्ड रैली से बाजार के दो सबसे दिग्गज बिग-बुल निवेशकों आशीष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल को मल्टीबैगर रिटर्न मिला है।

अक्टूबर 2024 में कंपनी में बेहद मामूली रकम लगाने वाले आशीष कचोलिया का निवेश महज दो साल से भी कम समय में 70 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है, जबकि मुकुल अग्रवाल के होल्डिंग की वैल्यू भी ₹1,100 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है।

आशीष कचोलिया का ₹6.14 करोड़ का निवेश बना ₹433 करोड़

स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों के पारखी माने जाने वाले दिग्गज निवेशक आशीष कचोलिया ने ESDS Software Solution में प्री-आईपीओ चरण के दौरान ही दांव लगा लिया था। कचोलिया ने अक्टूबर 2024 में इस कंपनी में ₹164 प्रति शेयर के भाव पर ₹6.14 करोड़ का शुरुआती निवेश किया था। कंपनी के आईपीओ तक उनके पास करीब 24.6 लाख शेयर थे। ₹429 प्रति शेयर के इश्यू प्राइस पर उनकी इस हिस्सेदारी की वैल्यू करीब ₹103 करोड़ तय हुई थी।

लिस्टिंग के बाद शेयर में आई तूफानी तेजी के चलते कछोलिया के इसी पोर्टफोलियो की वैल्यू अब बढ़कर ₹433 करोड़ हो चुकी है। यानी उन्हें अपने मूल निवेश पर 70 गुना से अधिक का रिटर्न मिला है।

मुकुल अग्रवाल का ₹302 करोड़ का दांव अब ₹1,176 करोड़ के पार

बाजार के एक और दिग्गज निवेशक मुकुल अग्रवाल की होल्डिंग में भी इस आईपीओ की लिस्टिंग के बाद जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है। ESDS के ऑफर डॉक्यूमेंट्स के अनुसार, आईपीओ से पहले मुकुल अग्रवाल के पास कंपनी के 70.3 लाख शेयर थे, जो कुल इक्विटी का लगभग 7% हिस्सा था।

आईपीओ के ₹429 के अपर प्राइस बैंड पर उनके इस 7% शेयर की कुल वैल्यू करीब ₹302 करोड़ थी। शेयर में लिस्टिंग के बाद आए 240% के उछाल के बाद, मुकुल अग्रवाल के इस स्टेक की वैल्यू बढ़कर ₹1,176 करोड़ के स्तर पर पहुंच चुकी है।

136 गुना सब्सक्रिप्शन और 240% की गदर रैली

ESDS Software Solution का ₹720 करोड़ का आईपीओ प्राइमरी मार्केट में 28 अगस्त से 1 सितंबर 2026 के बीच खुला था। कंपनी ने इसके लिए ₹408 से ₹429 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया था।

प्राइमरी मार्केट में बंपर मांग: निवेशकों की भारी मांग के चलते यह इश्यू ओवरऑल 136 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

240% का रिटर्न: 4 सितंबर को धमाकेदार डेब्यू करने के बाद से यह शेयर अपने इश्यू प्राइस ₹429 से करीब 240% चढ़ चुका है।

₹20,000 करोड़ का मार्केट कैप: शेयर में आई इस ऐतिहासिक तेजी से कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (M-Cap) ₹20,000 करोड़ के बेहद करीब पहुंच गया है।

टाटा और केपीआईटी को पछाड़ा: बाजार पूंजीकरण के इस आंकड़े के साथ ESDS Software ने अपनी सेक्टर की कई बड़ी लिस्टेड कंपनियों जैसे- Tata Elxsi, Firstsource Solutions और KPIT Technologies को पीछे छोड़ दिया है।

क्या करती है ESDS Software Solution?

ESDS Software Solution देश की अग्रणी एआई-इनेबल्ड क्लाउड, मैनेज्ड सर्विसेज, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस प्रोवाइडर कंपनी है। भारत में डेटा लोकलाइजेशन, क्लाउड अडॉप्शन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के बीच कंपनी का बिजनेस मॉडल बेहद मजबूत स्थिति में माना जा रहा है, यही वजह है कि दलाल स्ट्रीट के दिग्गज निवेशकों ने इसमें भारी दांव लगाया था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चीन के रूट से हट रहे इंटरनेट केबल:अब ये हिंद महासागर में बिछ रहे, भारत को फायदा; दुनिया का 99% डेटा समुद्र के नीचे चलता है

दुनिया भर में इंटरनेट का 99% डेटा समुद्र के नीचे बिछे केबलों के जरिए चलता है। पिछले दस सालों तक चीन के पास मौजूद दक्षिण चीन सागर और लाल सागर इसके मुख्य रास्ते थे। लेकिन युद्ध, तनाव और लालफीताशाही के कारण अब कंपनियां इन रास्तों से बच रही हैं। नए इंटरनेट केबल सीधे हिंद महासागर से बिछाए जा रहे हैं, ताकि एआई जैसी सेवाओं के लिए बिना रुकावट तेज इंटरनेट मिल सके। इस बड़े बदलाव से भारत को बड़ा फायदा हो रहा है और मुंबई के बाद अब चेन्नई भी दुनिया का नया बड़ा इंटरनेट हब बन रहा है। भारत साउथ एशिया में सुरक्षित ‘डिजिटल हब’ बनकर उभर रहा भारत द. एशिया में सुरक्षित ‘डिजिटल हब’ बनकर उभर रहा है। लक्षद्वीप सागर का केबल कॉरिडोर के रूप में महत्व बढ़ने से भारत को हिंद महासागर में नई रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साथ ही, वैश्विक टेक कंपनियों के भारी निवेश और बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। किसी देश की अर्थव्यवस्था को बना सकता है अपाहिज सबमरीन केबल्स दुनिया के 99% इंटरनेट ट्रैफिक को संभालते हैं, जिसके बिना वैश्विक बैंकिंग, संचार व अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी। आने वाले समय में एआई, क्लाउड डेटा और सुपरकंप्यूटिंग की भारी जरूरतों के कारण इनकी रणनीतिक अहमियत और कई गुना बढ़ेगी। यह स्थिति एक ‘अदृश्य युद्ध’ जैसी ही है, जहां किसी देश के केबल काट देना बिना मिसाइल चलाए उसकी अर्थव्यवस्था को अपाहिज बना सकता है। सबमरीन केबल कैसे काम करती है? फाइबर ऑप्टिक तकनीक: सबमरीन केबल बिजली के तारों जैसी नहीं होतीं। इनमें बेहद पतले ग्लास फाइबर होते हैं, जिनसे डेटा लाइट पल्स के रूप में हजारों किलोमीटर तक जाता है। रिपीटर: लंबी दूरी में सिग्नल कमजोर न हो, इसलिए केबल में जगह-जगह रिपीटर लगाए जाते हैं। इन्हें केबल के अंदर मौजूद धातु की परत के जरिए बिजली मिलती है। सुरक्षा: केबल को समुद्र के दबाव और नुकसान से बचाने के लिए कई सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है। तट के पास इन्हें ज्यादा मजबूत बनाया जाता है और कई जगह समुद्र तल में दबाया जाता है। सबमरीन केबल कटने पर क्या होता है? इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होता। केबल कटने पर डेटा दूसरी केबलों से भेज दिया जाता है। इसे नेटवर्क रिडंडेंसी कहते हैं। कंपनियां डेटा ट्रैफिक को कई केबलों में बांटकर रखती हैं, ताकि एक केबल खराब होने पर दूसरी काम कर सके। जहां केबल कम होती हैं, वहां इंटरनेट धीमा हो सकता है या कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी जरूरी सेवाओं के लिए बैकअप का काम कर सकती है। लेकिन अगर किसी क्षेत्र में सिर्फ एक ही केबल है और वह कट जाए, तो वहां इंटरनेट पूरी तरह बंद हो सकता है। ————————- ये खबर भरी पढ़ें… TRAI का नया DCR प्लेटफॉर्म और एप लॉन्च: घर-ऑफिस में नेटवर्क और इंटरनेट स्पीड पता चल सकेगी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग यानी DCR प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप लॉन्च किया है। इससे अब इमारतों को डिजिटल कनेक्टिविटी की रेटिंग मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…

चीन के रूट से हट रहे इंटरनेट केबल:अब ये हिंद महासागर में बिछ रहे, भारत को फायदा; दुनिया का 99% डेटा समुद्र के नीचे चलता है

दुनिया भर में इंटरनेट का 99% डेटा समुद्र के नीचे बिछे केबलों के जरिए चलता है। पिछले दस सालों तक चीन के पास मौजूद दक्षिण चीन सागर और लाल सागर इसके मुख्य रास्ते थे। लेकिन युद्ध, तनाव और लालफीताशाही के कारण अब कंपनियां इन रास्तों से बच रही हैं। नए इंटरनेट केबल सीधे हिंद महासागर से बिछाए जा रहे हैं, ताकि एआई जैसी सेवाओं के लिए बिना रुकावट तेज इंटरनेट मिल सके। इस बड़े बदलाव से भारत को बड़ा फायदा हो रहा है और मुंबई के बाद अब चेन्नई भी दुनिया का नया बड़ा इंटरनेट हब बन रहा है। भारत साउथ एशिया में सुरक्षित ‘डिजिटल हब’ बनकर उभर रहा भारत द. एशिया में सुरक्षित ‘डिजिटल हब’ बनकर उभर रहा है। लक्षद्वीप सागर का केबल कॉरिडोर के रूप में महत्व बढ़ने से भारत को हिंद महासागर में नई रणनीतिक बढ़त मिलेगी। साथ ही, वैश्विक टेक कंपनियों के भारी निवेश और बेहतर डिजिटल कनेक्टिविटी के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। किसी देश की अर्थव्यवस्था को बना सकता है अपाहिज सबमरीन केबल्स दुनिया के 99% इंटरनेट ट्रैफिक को संभालते हैं, जिसके बिना वैश्विक बैंकिंग, संचार व अर्थव्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी। आने वाले समय में एआई, क्लाउड डेटा और सुपरकंप्यूटिंग की भारी जरूरतों के कारण इनकी रणनीतिक अहमियत और कई गुना बढ़ेगी। यह स्थिति एक ‘अदृश्य युद्ध’ जैसी ही है, जहां किसी देश के केबल काट देना बिना मिसाइल चलाए उसकी अर्थव्यवस्था को अपाहिज बना सकता है। सबमरीन केबल कैसे काम करती है? फाइबर ऑप्टिक तकनीक: सबमरीन केबल बिजली के तारों जैसी नहीं होतीं। इनमें बेहद पतले ग्लास फाइबर होते हैं, जिनसे डेटा लाइट पल्स के रूप में हजारों किलोमीटर तक जाता है। रिपीटर: लंबी दूरी में सिग्नल कमजोर न हो, इसलिए केबल में जगह-जगह रिपीटर लगाए जाते हैं। इन्हें केबल के अंदर मौजूद धातु की परत के जरिए बिजली मिलती है। सुरक्षा: केबल को समुद्र के दबाव और नुकसान से बचाने के लिए कई सुरक्षात्मक परतों से ढका जाता है। तट के पास इन्हें ज्यादा मजबूत बनाया जाता है और कई जगह समुद्र तल में दबाया जाता है। सबमरीन केबल कटने पर क्या होता है? इंटरनेट पूरी तरह बंद नहीं होता। केबल कटने पर डेटा दूसरी केबलों से भेज दिया जाता है। इसे नेटवर्क रिडंडेंसी कहते हैं। कंपनियां डेटा ट्रैफिक को कई केबलों में बांटकर रखती हैं, ताकि एक केबल खराब होने पर दूसरी काम कर सके। जहां केबल कम होती हैं, वहां इंटरनेट धीमा हो सकता है या कुछ सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी जरूरी सेवाओं के लिए बैकअप का काम कर सकती है। लेकिन अगर किसी क्षेत्र में सिर्फ एक ही केबल है और वह कट जाए, तो वहां इंटरनेट पूरी तरह बंद हो सकता है। ————————- ये खबर भरी पढ़ें… TRAI का नया DCR प्लेटफॉर्म और एप लॉन्च: घर-ऑफिस में नेटवर्क और इंटरनेट स्पीड पता चल सकेगी टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को डिजिटल कनेक्टिविटी रेटिंग यानी DCR प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप लॉन्च किया है। इससे अब इमारतों को डिजिटल कनेक्टिविटी की रेटिंग मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें…

शेयर बाजार में 1,248 अंक की भारी गिरावट

नई दिल्ली। गुरुवार को शेयर बाजार में भारी गिरावट हुई। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न की खबरों ने निवेशकों को चिंता में डाला है। गुरुवार, 24 सितंबर को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई के 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक 1,248 अंक यानी 1.67 फीसदी गिरकर 73,581 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 384 अंक यानी 1.64 फीसदी की गिरावट रही। ये 23,063 पर आ गया।

गुरुवार को बैंकिंग, मेटल और ऑटो शेयर्स में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। बताया जा रहा है कि कच्चे तेल के दाम सौ डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचने और ईरान व अमेरिका के बीच तनाव के कारण होर्मुज की खाड़ी बंद होने को लेकर चिंता से तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर है। सो, तेल महंगा होने से हर चीज की महंगाई बढ़ेगी। इस चिंता में शेयर बाजार लगातार टूट रहा है।

इसके अलावा अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने से भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है। पिछले 10 साल में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11 फीसदी पर पहुंच गई है जो 2007 के बाद का उच्चतम स्तर है। गौरतलब है कि जब निवेशक बॉन्ड बेचते हैं तो बॉन्ड की कीमत घटती है और यील्ड यानी रिटर्न बढ़ जाती है। यह रिटर्न बढ़ने से डॉलर में निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाता है, जिससे विदेशी निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका में लगाने लगते हैं।

दूसरी ओर बीमा नियामक संस्था आईआरडीएआई के प्रस्तावित बदलावों से बीमा कंपनियों की कमाई घट सकती है। इसका असर बीमा, बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयरों पर दिखा। बीमा कंपनी पीबी फिनटेक करीब 10 फीसदी तक गिर गया, जबकि एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व भी दबाव में रहे। भारतीय शेयर बाजार में आई तेज बिकवाली से निवेशकों की संपत्ति चार लाख करोड़ रुपए घट गई है।

पहली बार AI एजेंट ने सरकारी पोर्टल हैक किया:जानकारी चुराई, ऑस्ट्रेलियाई हेल्थ पोर्टल में घुसा ओपनएआई एजेंट

दुनिया में पहली बार किसी एआई एजेंट के सरकारी वेबसाइट में सेंध लगाने का मामला सामने आया है। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में हुई, जहां ओपनएआई के एजेंट ने हेल्थकेयर सर्विस पोर्टल में सेंध लगा कर फाइलों तक पहुंच बना जानकारी हासिल की इनमें हेल्थ खर्च और दवा सब्सिडी से जुड़ा डेटा था। ओपनएआई ने इस घटना की सूचना 54 दिन बाद सरकार को दी। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने न्यूयॉर्क में ओपनएआई प्रमुख सैम ऑल्टमैन से फोन पर बात कर देरी पर नाराजगी जताई। ऑस्ट्रेलिया अब जांच करेगा कि कंपनी पर आपराधिक मामला बनता है या नहीं और ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां इस घुसपैठ को पहले क्यों नहीं पकड़ सकीं। ओपनएआई ने भी माना कि उसके मॉडलों ने ऐसे कदम उठाए, जिनका इरादा कंपनी का नहीं था। क्लॉड ने खोजा नया एंजाइम सिस्टम, जीन शोध में खुलेंगे रास्ते एंथ्रोपिक के एआई मॉडल क्लॉड ने डीएनए डेटा खंगालकर एआरटी नाम का एंजाइम सिस्टम खोजा है। वैज्ञानिक पहले इसकी पहचान नहीं कर पाए थे। क्लॉड की इस रिसर्च से जीन शोध में नए रास्ते खुलेंगे। डीएनए एडिट कर बीमारी पैदा करने वाली चीजें हटाई व कोशिका में मनचाही खासियतें जोड़ी जा सकेंगी। एआरटी जीन एडिटिंग में इस्तेमाल होने वाली क्रिस्पर तकनीक के पैटर्न जैसा है। 950 एआई एजेंट्स ने 2 लाख से ज्यादा एंजाइम खंगालकर यह सिस्टम 21 घंटे में खोजा। इसकी अहमियत यह है कि एआई भविष्य में रिसर्च की रफ्तार काफी बढ़ाएगा। यूएन में एआई दिग्गज बोले- अब वैश्विक नियंत्रण जरूरी एआई के बढ़ते खतरों पर यूएनएससी में टेक दिग्गजों ने अपनी चिंताएं रखीं। सभी बोले कि अब वैश्विक नियंत्रण जरूरी है। ओपनएआई: सीईओ सैम बोले, एआई पर नियंत्रण खोने का खतरा है। देश मिलकर सुरक्षा मानक तय करें, ताकि तकनीक ज्यादा शक्तिशाली होने पर भी नियंत्रण में रहे। एंथ्रोपिक: सीईओ अमोडेई ने चेताया कि गलत तरीके से संभाला गया एआई पूरी मानवता के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने जैविक हथियार बनाने में एआई के इस्तेमाल को रोकने के साझा नियम मांगे। हगिंग फेस: सीईओ क्लेमेंट डेलांग ने एआई की ताकत किसी एक कंपनी या देश तक सीमित न रहने देने पर जोर दिया। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… एआई से पूछ रहे अमेरिकी- क्या खाएं: चटपटे स्नैक्स की मांग बढ़ी अमेरिका में हल्की भूख लगने पर क्या खाएं, इसका जवाब अब लोग एआई से भी मांग रहे हैं। ग्राहक किसी खास उत्पाद को खोजने के बजाय ज्यादा प्रोटीन या फाइबर वाले स्नैक्स के विकल्प पूछ रहे हैं। खाद्य कंपनी कोनाग्रा ब्रांड्स के मुताबिक, यह बदलाव ज्यादा प्रोटीन, चटपटे स्वाद और खास स्वास्थ्य जरूरतों के हिसाब से बने उत्पादों की मांग बढ़ाने में मदद कर रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

पहली बार AI एजेंट ने सरकारी पोर्टल हैक किया:जानकारी चुराई, ऑस्ट्रेलियाई हेल्थ पोर्टल में घुसा ओपनएआई एजेंट

दुनिया में पहली बार किसी एआई एजेंट के सरकारी वेबसाइट में सेंध लगाने का मामला सामने आया है। यह घटना ऑस्ट्रेलिया में हुई, जहां ओपनएआई के एजेंट ने हेल्थकेयर सर्विस पोर्टल में सेंध लगा कर फाइलों तक पहुंच बना जानकारी हासिल की इनमें हेल्थ खर्च और दवा सब्सिडी से जुड़ा डेटा था। ओपनएआई ने इस घटना की सूचना 54 दिन बाद सरकार को दी। प्रधानमंत्री अल्बनीज ने न्यूयॉर्क में ओपनएआई प्रमुख सैम ऑल्टमैन से फोन पर बात कर देरी पर नाराजगी जताई। ऑस्ट्रेलिया अब जांच करेगा कि कंपनी पर आपराधिक मामला बनता है या नहीं और ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसियां इस घुसपैठ को पहले क्यों नहीं पकड़ सकीं। ओपनएआई ने भी माना कि उसके मॉडलों ने ऐसे कदम उठाए, जिनका इरादा कंपनी का नहीं था। क्लॉड ने खोजा नया एंजाइम सिस्टम, जीन शोध में खुलेंगे रास्ते एंथ्रोपिक के एआई मॉडल क्लॉड ने डीएनए डेटा खंगालकर एआरटी नाम का एंजाइम सिस्टम खोजा है। वैज्ञानिक पहले इसकी पहचान नहीं कर पाए थे। क्लॉड की इस रिसर्च से जीन शोध में नए रास्ते खुलेंगे। डीएनए एडिट कर बीमारी पैदा करने वाली चीजें हटाई व कोशिका में मनचाही खासियतें जोड़ी जा सकेंगी। एआरटी जीन एडिटिंग में इस्तेमाल होने वाली क्रिस्पर तकनीक के पैटर्न जैसा है। 950 एआई एजेंट्स ने 2 लाख से ज्यादा एंजाइम खंगालकर यह सिस्टम 21 घंटे में खोजा। इसकी अहमियत यह है कि एआई भविष्य में रिसर्च की रफ्तार काफी बढ़ाएगा। यूएन में एआई दिग्गज बोले- अब वैश्विक नियंत्रण जरूरी एआई के बढ़ते खतरों पर यूएनएससी में टेक दिग्गजों ने अपनी चिंताएं रखीं। सभी बोले कि अब वैश्विक नियंत्रण जरूरी है। ओपनएआई: सीईओ सैम बोले, एआई पर नियंत्रण खोने का खतरा है। देश मिलकर सुरक्षा मानक तय करें, ताकि तकनीक ज्यादा शक्तिशाली होने पर भी नियंत्रण में रहे। एंथ्रोपिक: सीईओ अमोडेई ने चेताया कि गलत तरीके से संभाला गया एआई पूरी मानवता के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने जैविक हथियार बनाने में एआई के इस्तेमाल को रोकने के साझा नियम मांगे। हगिंग फेस: सीईओ क्लेमेंट डेलांग ने एआई की ताकत किसी एक कंपनी या देश तक सीमित न रहने देने पर जोर दिया। ——————————- ये खबर भी पढ़ें… एआई से पूछ रहे अमेरिकी- क्या खाएं: चटपटे स्नैक्स की मांग बढ़ी अमेरिका में हल्की भूख लगने पर क्या खाएं, इसका जवाब अब लोग एआई से भी मांग रहे हैं। ग्राहक किसी खास उत्पाद को खोजने के बजाय ज्यादा प्रोटीन या फाइबर वाले स्नैक्स के विकल्प पूछ रहे हैं। खाद्य कंपनी कोनाग्रा ब्रांड्स के मुताबिक, यह बदलाव ज्यादा प्रोटीन, चटपटे स्वाद और खास स्वास्थ्य जरूरतों के हिसाब से बने उत्पादों की मांग बढ़ाने में मदद कर रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

Nifty और Sensex में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट, क्रूड में उछाल से सहमा बाजार

भारतीय शेयर बाजारों में 24 सितंबर को बीते 10 हफ्तों की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसमें क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का बड़ा हाथ है। ब्रेंट क्रूड का प्राइस गुरुवार को उछलकर 105 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गया है। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया है। इसका असर शेयर बाजारों पर पड़ रहा है।

इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयर क्रैश

सबसे ज्यादा गिरावट फाइनेंशियल खासकर इंश्योरेंस और इंश्योरेंस डिस्ट्रिब्यूशन कंपनियों के शेयरों में आई। इसकी वजह इंश्योरेंस सेक्टर के रेगुलेटर आईआरडीएआई का एक प्रस्ताव है, जिसके लागू होने पर इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स की बिक्री पर मिलने वाला कमीशन कम हो जाएगा। इसका सीधा असर बीपी फिनटेक जैसी कंपनियों की कमाई पर पड़ेगा। पीबी फिनटेक का शेयर 36 फीसदी क्रैश कर गया।

सेंसेक्स, निफ्टी में 8 जुलाई के बाद सबसे बड़ी गिरावट

निफ्टी 1.64 फीसदी यानी 383 अंक गिरकर 23,063 पर बंद हुआ। सेंसेक्स 1.67 फीसदी यानी 1,247 अंक लुढ़कर 73,580 अंक पर क्लोज हुआ। दोनों ही सूचकांकों में 8 जुलाई के बाद एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड 2.4 फीसदी चढ़कर 105 डॉलर के पार जाने की वजह ईरान के राष्ट्रपति पेजेश्कियान का संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में दिया गया भाषण है। 23 सितंबर को उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे कभी नहीं झुकेगा।

क्रूड की ऊंची कीमतें बढ़ा सकती हैं महंगाई

ईरान के राष्ट्रपति के भाषण से यह साफ हो गया है कि मध्यपूर्व का संकट जल्द खत्म होने नहीं जा रहा है। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की कोशिशें जारी हैं। अगर मध्यपूर्व की यह क्राइसिस जल्द खत्म नहीं होती है तो क्रूड ऑयल की कीमत लंबे समय तक हाई बनी रह सकती है। इसका सीधा असर दुनियाभर में इनफ्लेशन पर पड़ेगा। इनफ्लेशन को काबू में करने के लिए फेडरल रिजर्व सहित दूसरे केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकते हैं। इसका असर कंपनियों के पूंजीगत निवेश पर पड़ेगा।

निफ्टी के 23500 से नीचे रहने तक बेयरिश ट्रेंड बना रहेगा

एक्सिस डायरेक्ट में सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमंग गोर ने कहा, “भारत के लिए क्रूड की कीमतें काफी अहम हैं। कुछ समय तक 100 डॉलर से नीचे जाने के बाद फिर से क्रूड में उछाल दिख रहा है। इससे क्रूड की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, जिसका असर बाजार की रिकवरी पर पड़ा है।” उन्होंने कहा कि निफ्टी जब तक 23,500 से नीचे बना रहता है, मार्केट का ट्रेंड बेयरिश बना रहेगा।

इन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट 

24 सितंबर को सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस (6.16 फीसदी), बजाज फिनसर्व (5.87 फीसदी), चोलामंडलम इनवेस्ट (5.20 फीसदी), एक्सिस बैंक (4.56 फीसदी), बजाज फिनसर्व (4.56 फीसदी), टाटा कैपिटल (3.94 फीसदी) और अदाणी एंटरप्राइजेज शामिल रहे।

ट्रंप ने शी के स्वागत में बिछाया रेड कार्पेट, अमेरिका-चीन शिखर वार्ता शुरू

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का बुधवार को सैन्य हवाई अड्डे पर व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया। इसी के साथ व्यापार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ताइवान और ईरान युद्ध को लेकर तनाव के बीच तीन दिवसीय अमेरिका-चीन शिखर वार्ता शुरू हो गई।

श्री ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने मैरीलैंड स्थित ज्वाइंट बेस एंड्रयूज पर श्री शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का भव्य स्वागत किया। इस दौरान करीब 30 मीटर लंबा लाल कालीन बिछाया गया, सैन्य विमानों ने फ्लाईपास्ट किया, 21 तोपों की सलामी दी गई और अमेरिकी वायुसेना के बैंड ने प्रस्तुति दी।

श्री शी का एयर चाइना विमान स्थानीय समयानुसार शाम 5:39 बजे हवाई अड्डे पर उतरा। इसके बाद लाल कालीन के दोनों ओर सैन्य गार्ड तैनात किए गए। श्री ट्रंप और सुश्री मेलानिया राष्ट्रपति की आधिकारिक कार ‘द बीस्ट’ से वहां पहुंचे और विमान के पास जाकर चीनी राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी का स्वागत किया।

दोनों दंपतियों ने हाथ मिलाया और संक्षिप्त बातचीत के बाद साथ-साथ लाल कालीन पर चले तथा तस्वीरें खिंचवाईं। अमेरिकी सेना और वायुसेना के बैंड द्वारा राष्ट्रगान बजाए जाने के दौरान दो बी-1 बमवर्षक विमानों ने ऊपर से उड़ान भरी। इसके अलावा छह एफ-16 और छह एफ-22 लड़ाकू विमान भी हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के हिस्से के रूप में तैनात किए गए थे।

सैन्य अड्डे पर श्री शी का व्यक्तिगत रूप से स्वागत करने का श्री ट्रंप का फैसला इस यात्रा को दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है। वर्ष 1962 के बाद यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने सैन्य अड्डे पर किसी विदेशी नेता का व्यक्तिगत रूप से स्वागत किया है। वर्ष 1962 में तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री हेरोल्ड मैकमिलन का स्वागत किया था।

वर्ष 2015 के बाद श्री शी की यह पहली वाशिंगटन यात्रा है। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कई वर्षों से चले आ रहे व्यापार तनाव के बाद संबंधों को स्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, जबकि उन्नत प्रौद्योगिकी और रणनीतिक प्रभाव को लेकर दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी है।

दोनों नेता गुरुवार को व्हाइट हाउस में बंद कमरे में बातचीत करेंगे और इसके बाद राजकीय रात्रिभोज आयोजित किया जाएगा। वार्ता में शुल्क, एआई, ताइवान और ईरान युद्ध के व्यापक प्रभाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों पक्ष मौजूदा नाजुक व्यापार समझौते को बनाए रखने की भी कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका और चीन ने शुल्क संबंधी अस्थायी समझौते को जनवरी तक बढ़ाने पर सहमति जताई है। यह व्यवस्था मूल रूप से 10 नवंबर को समाप्त होने वाली थी। इसके तहत कुछ वस्तुओं पर शुल्क कम किए गए हैं और चीन की ओर से दुर्लभ खनिजों के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को फिलहाल रोक दिया गया है।

श्री बेसेंट ने चीनी उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग के साथ बैठक के बाद कहा कि दोनों पक्षों ने इस अस्थायी व्यवस्था को व्यापक व्यापार समझौते में बदलने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

उन्होंने कहा हम केवल बुसान समझौते को जारी रखने या किसी बड़े समझौते पर विचार करने, दोनों विकल्पों के लिए तैयार हैं।

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व्यापार संबंधी यह अस्थायी समझौता 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के बाद हुआ था। उस समय दोनों देशों द्वारा लगाए गए शुल्क कुछ समय के लिए 100 प्रतिशत से अधिक हो गए थे, जिसके बाद वाशिंगटन और बीजिंग ने तनाव कम करने के लिए कई उपायों पर बातचीत शुरू की। इस बीच, चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ में प्रकाशित बयान में श्री शी ने दोनों देशों के बीच सहयोग का आह्वान किया।

उन्होंने कहा दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार होना चाहिए।” उन्होंने अमेरिका और चीन को “महान राष्ट्र और उनकी जनता को महान लोग” बताया।

श्री शी ने कहा कि चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान और अमेरिका को फिर से महान बनाने के लक्ष्य साथ-साथ चल सकते हैं और एक-दूसरे को मजबूत करते हुए दुनिया को लाभ पहुंचा सकते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी यात्रा “फलदायी परिणाम” देगी।

श्री शी के साथ चीन के वरिष्ठ अधिकारी भी वाशिंगटन पहुंचे हैं। इनमें कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सदस्य काई ची, उप प्रधानमंत्री हे लिफेंग और विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है। दोनों देश उन्नत चिप और एआई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। श्री बेसेंट ने कहा है कि अमेरिका ने एक ऐसी सूचना प्रणाली का प्रस्ताव रखा है जिसके तहत दोनों देश राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संभावित खतरा पैदा करने वाली एआई घटनाओं के बारे में एक-दूसरे को सूचित कर सकेंगे।

व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि उन्नत कंप्यूटर चिप के व्यापार पर प्रतिबंध भी बैठक का महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने एनवीडिया को कुछ स्वीकृत चीनी ग्राहकों को चिप बेचने की अनुमति दी है।

श्री शी के लिए गुरुवार को व्हाइट हाउस में पूर्ण सैन्य सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसमें सैन्य बैंड, सशस्त्र बलों की पूर्ण सम्मान टुकड़ी और बी-2 स्पिरिट बमवर्षक तथा चार एफ-22 रैप्टर विमानों का फ्लाईपास्ट शामिल होगा।

श्री ट्रंप और श्री शी ओवल ऑफिस में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इसके बाद श्री शी और सुश्री पेंग राष्ट्रपति और प्रथम महिला द्वारा आयोजित राजकीय रात्रिभोज में शामिल होंगे। सुश्री मेलानिया ट्रंप के भी दोनों नेताओं की बैठक के दौरान सुश्री पेंग के साथ स्मिथसोनियन नेशनल म्यूजियम ऑफ एशियन आर्ट जाने की उम्मीद है।

राजकीय रात्रिभोज में अमेरिका के कई प्रमुख प्रौद्योगिकी और कारोबारी अधिकारियों के शामिल होने की संभावना है। इनमें एनवीडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी जेंसन हुआंग, क्वालकॉम के सीईओ क्रिस्टियानो अमोन, ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन और जेपी मॉर्गन के सीईओ जेमी डिमोन शामिल हैं।

श्री शी की यात्रा शुक्रवार को समाप्त होगी। उस दिन श्री ट्रंप और सुश्री मेलानिया उनके और सुश्री पेंग के लिए चाय का आयोजन करेंगे। इसके बाद चीनी दंपति नेशनल आर्काइव्स का दौरा करेगा और चीन के लिए रवाना होगा।

Pic Credit : UNI