इस म्यूचुअल फंड ने ₹1 लाख के निवेश को ₹46 लाख बना दिया, जानिए इस स्कीम के बारे में

म्यूचुअल फंड में निवेश से जोरदार रिटर्न में फंड सेलेक्शन का बड़ा हाथ है। अगर निवेश के लिए सही फंड का चुनाव हो जाए तो फिर पैसे बढ़ना तय है। आईसीआईसीआई एएमसी के फंड ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस फंड का नाम आईसीआआईसीआई वैल्यू प्रूडेंशियल फंड है। इस फंड ने सिर्फ 1 लाख रुपये के निवेश को 22 साल में 46.6 लाख रुपये बना दिया है।

इस फंड ने एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को किया मालामाल

ICICI Prudential Asset Management Company ने अपने इस फंड के बारे में बताया है। ICICI Prudential Value Fund की शुरुआत 22 साल पहले हुई थी। इस फंड ने शुरुआत में पैसे लगाने वाले एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को मालामाल किया है। इसका कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 19.11 फीसदी है। इसने Nifty Total Return Index (TRI) के मुकाबले काफी ज्यादा रिटर्न दिया है। इस अवधि में निफ्टी 50 टीआरआई का सीएजीआर 14.63 फीसदी है।

वैल्यू इनवेस्टिंग की स्ट्रेटेजी का करता है इस्तेमाल 

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू फंड की शुरुआत 16 अगस्त, 2004 को हुई थी। इस फंड ने हाल ही में 22 साल पूरे किए हैं। यह फंड वैल्यू ओरिएंटेड इक्विटी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। इस फंड का फोकस उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करने पर होता है, जिनमें उनके इंटिनसिक वैल्यू से कम पर ट्रेडिंग हो रही होती है। ऐसी कंपनी छोटी या बड़ी हो सकती है।

तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी अच्छा रिटर्न 

इस फंड का रिटर्न तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी बहुत अच्छा है। यह क्रमश: 13.44 फीसदी और 16.05 फीसदी है। अगर किसी निवेशक ने इस फंड की शुरुआत के समय इसमें हर महीने 10,000 रुपये का सिप शुरू किया होता तो उसका पैसा बढ़कर 2.37 करोड़ रुपये हो गया होता। यह 17.04 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न है। 31 जुलाई को इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 61,102.29 करोड़ रुपये था।

93 फीसदी पैसे का निवेश शेयरों में, फाइनेंशियल कंपनियों में ज्यादा निवेश 

इस फंड ने अपना 93.31 पैसा शेयरों में निवेश किया है। सबसे ज्यादा 38.10 फीसदी निवेश फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। इसके बाद 9.08 फीसदी का निवेश हेल्थकेयर सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। उसके बाद 9 फीसदी का निवेश एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में है। इस फंड ने 2022 में अपने बेंचमार्क को निफ्टी 500 वैल्यू 50 टीआरआई से बदलकर निफ्टी 500 टीआरआई कर दिया था।

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निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लें

अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देख भविष्य में उसके रिटर्न का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। निवेशक को रिस्क लेने की अपनी क्षमता, निवेश की अवधि और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रख निवेश का फैसला करना चाहिए।

Stocks to Watch: आज 21 अगस्त को Amagi Media Labs, RailTel, HAL, LIC Housing Finance समेत इन शेयरों में दिख सकती है बड़ी उठापटक

शुक्रवार, 21 अगस्त को कई शेयरों में तेज हलचल देखने को मिल सकती है। इनमें अमागी मीडिया लैब्स, मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज, रेलटेल, LIC हाउसिंग फाइनेंस जैसे नाम प्रमुख हैं। वजह हैं- तिमाही नतीजे, नई डील या कॉन्ट्रैक्ट, कारोबार से जुड़े डेवलपमेंट्स आदि। इसके अलावा शुक्रवार को SME सेगमेंट में 3 कंपनियों की लिस्टिंग होने वाली है। साथ ही 30 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड ट्रेड करने वाले हैं। आइए डिटेल में जानते हैं किन प्रमुख शेयरों पर रहेगी नजर…

आज इन कंपनियों के तिमाही नतीजे

इनोवा कैप्टैब, फ्लेक्सिटफ वेंचर्स इंटरनेशनल और ऑक्टेवियस प्लांटेशंस

22 अगस्त को ये कंपनियां जारी करेंगी रिजल्ट

हेरंबा इंडस्ट्रीज और लीडिंग लीजिंग फाइनेंस एंड इनवेस्टमेंट कंपनी

इन शेयरों पर रहेगी नजर

Manipal Health Enterprises: अप्रैल-जून 2026 तिमाही में कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 7.5% घटकर 231.65 करोड़ रुपये रह गया। रेवेन्यू 38.1% बढ़कर 3,090.6 करोड़ रुपये हो गया।

Saatvik Green Energy: कंपनी की सब्सिडियरी, सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज को सोलर फोटोवोल्टिक मॉड्यूल की सप्लाई के लिए एक जाने-माने इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर/EPC प्लेयर से 190 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है।

Amagi Media Labs: CNBC-TV18 को सूत्रों से पता चला है कि ट्रुडी होल्डिंग्स, AVP I फंड और एक्सेल मिलकर अमागी मीडिया लैब्स में 5% हिस्सेदारी बेच सकते हैं। यह बिक्री लगभग 600 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील के जरिए होगी। फ्लोर प्राइस 550 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।

RailTel Corporation of India: कंपनी को वेस्टर्न कोलफील्ड्स से 60 महीनों के लिए रेंटल बेसिस पर MPLS VPN नेटवर्क बनाने का 164.78 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिला है।

Krishna Institute of Medical Sciences: कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने एरेट हॉस्पिटल्स को चलाने, मैनेज करने, ऑपरेट करने, निर्देशित करने और कंट्रोल करने के लिए ऑरेविया हॉस्पिटल्स (AHPL) के साथ एक ऑपरेशंस एंड मैनेजमेंट एग्रीमेंट किया है। यह एग्रीमेंट अभी 5 साल के लिए है, जिसे विशेष आधार पर आगे और 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।

InterGlobe Aviation: जुलाई में इंडिगो ने 67.4% मार्केट शेयर के साथ घरेलू एविएशन मार्केट में दबदबा बनाए रखा और महीने के दौरान 80.82 लाख यात्रियों को यात्रा कराई।

Torrent Power: सौरभ मशरूवाला ने कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा उनके पहले से तय रिटायरमेंट के कारण 20 अगस्त, 2026 से प्रभावी होगा। कंपनी के बोर्ड ने विकास पोद्दार को कंपनी का चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है, जो 21 अगस्त से प्रभावी होगी।

Lemon Tree Hotels: लेमन ट्री होटल्स ने भरूच में 85 कमरों वाले नए होटल को खोलने की घोषणा की है। यह गुजरात में ग्रुप का 12वां चालू होटल है।

Hindustan Aeronautics: कंपनी और उसके पार्टनर के बीच बने जॉइंट वेंचर, ‘इन्फोटेक HAL’ को नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT), बेंगलुरु ने बंद कर दिया है। इन्फोटेक HAL में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स की 50% हिस्सेदारी थी।

Asian Market Today: एशिया बाजारों में दबाव, वॉल स्ट्रीट में बिकवाली का दिखा असर, निक्केई और कोस्पी में गिरावट

बल्क और ब्लॉक डील्स

Welspun Investments and Commercials: लॉयड्स एंटरप्राइजेज ने और 22,238 शेयर खरीदे हैं। ट्रांजेक्शन की कुल वैल्यू ₹4.11 करोड़ है।

Pfizer: क्वांट म्यूचुअल फंड ने फार्मा कंपनी फाइजर में 131.25 करोड़ रुपये के 2.67 लाख और शेयर खरीदे हैं।

Apollo Pipes: HR ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग ने 3.98 लाख शेयर बेचे हैं। डील 23.5 करोड़ रुपये की रही।

Amrutanjan Health Care: पारी वाशिंगटन इंडिया मास्टर फंड ने 5.83 लाख शेयर खरीदे हैं। इसके लिए 29.17 करोड़ रुपये खर्च किए गए। एनविजन इंडिया फंड ने 2.13 लाख शेयर 11.15 करोड़ रुपये में बेचे हैं। DSP म्यूचुअल फंड ने 5 लाख शेयर 25 करोड़ रुपये में बेचे हैं।

Credent Connect N Care: मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज ने 2.98 लाख शेयर ₹11.15 करोड़ में खरीदे हैं। OM ट्रेडिंग ने भी 1 लाख शेयर खरीदे हैं, जिनकी कुल कीमत ₹3.59 करोड़ है।

SME लिस्टिंग

टेक्नोक्रेट्स प्लाज्मा सिस्टम्स

ENS एंटरप्राइजेज

स्काईटेक इनफिनिट प्लेटफॉर्म

आज ये शेयर करेंगे एक्स-डिविडेंड ट्रेड

LIC हाउसिंग फाइनेंस

अल्फ्रेड हर्बर्ट इंडिया

अमरज्योति स्पिनिंग मिल्स

भाटिया कम्युनिकेशंस एंड रिटेल (इंडिया)

दीप इंडस्ट्रीज

जिंदल स्टेनलेस

कल्याणी फोर्ज

AK कैपिटल सर्विसेज

eClerx सर्विसेज

GE वर्नोवा T&D इंडिया

जिंदल स्टील

ओमैक्स ऑटोस

पंचशील ऑर्गेनिक्स

DMCC स्पेशिएलिटी केमिकल्स

KSE

मोनार्क नेटवर्थ कैपिटल

निक्को पार्क्स एंड रिसॉर्ट्स

मयूर यूनिकोटर्स

पतंजलि फूड्स

पटेल एयरटेम्प इंडिया

हिताची एनर्जी इंडिया

QGO फाइनेंस

सूर्या रोशनी

ZEN टेक्नोलॉजीज

अपसर्ज इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस

वाडीलाल इंडस्ट्रीज

यूनाइटेड ड्रिलिंग टूल्स

वेलजन डेनिसन

विष्णु केमिकल्स

सह्याद्रि इंडस्ट्रीज

राजापालयम मिल्स

श्रद्धा AI टेक्नोलॉजीज

सविता ऑयल टेक्नोलॉजीज

सीमेक

बाय-बैक के लिए ये शेयर करेगा एक्स-ट्रेड

गांधी स्पेशल ट्यूब्स

बोनस के लिए ये शेयर करेंगे एक्स-ट्रेड

गुडलक इंडिया

F&O बैन वाले स्टॉक्स

मणप्पुरम फाइनेंस

बंधन बैंक

SAIL

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stocks To Watch: रेलटेल, एचएएल से मणिपाल हेल्थ तक, 21 अगस्त को इन 13 शेयरों पर रहेगी मार्केट की नजर

Stocks to Watch 21 August: हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार 21 अगस्त को भारतीय शेयर बाजार में कई बड़ी कंपनियों के शेयरों में हलचल देखने को मिल सकती है। कॉर्पोरेट नतीजों, बड़े ऑर्डर्स, लीडरशिप बदलाव और ब्लॉक डील्स के चलते कई दिग्गज शेयर निवेशकों के रडार पर रहेंगे।

हमारी सहयोगी वेबसाइट CNBC TV18 की रिपोर्ट के अनुसार, 21 अगस्त के ट्रेडिंग सेशन के दौरान इन 13 प्रमुख शेयरों पर बाजार की नजर रहेगी:

1- मणिपाल हेल्थ (Manipal Health Enterprises)

मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। पहली तिमाही में कंपनी का नेट प्रॉफिर साल-दर-साल आधार पर 7.7% घटकर 231 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले समान अवधि में 250 करोड़ रुपये था। वैसे कंपनी का रेवेन्यू 38.1% बढ़कर 3091 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। EBITDA 25.6% बढ़कर 736.5 करोड़ रुपये रहा जबकि EBITDA मार्जिन घटकर 23.8% रह गई। ये पिछले साल 26.2 फीसदी थी।

2- सात्विक ग्रीन एनर्जी (Saatvik Green Energy)

सात्विक सोलर इंडस्ट्रीज को एक घरेलू स्वतंत्र बिजली उत्पादक/EPC प्लेयर से सोलर पीवी मॉडल्स की सप्लाई के लिए 190 करोड़ रुपये का कॉमर्शियल ऑर्डर मिला है। इस ऑर्डर को मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।

3- केआईएमएस (KIMS – Krishna Institute of Medical Sciences)

कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज ने हैदराबाद के गचीबोवली में 250 बिस्तरों वाले अरेते अस्पताल के विशेष संचालन और प्रबंधन (O&M) के लिए औरेविया हॉस्पिटल्स के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह शुरुआती समझौता 5 साल के लिए है, जिसे आगे 5 साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। केआईएमएस को अस्पताल के नेट रेवेन्यू का 9% शुल्क के रूप में मिलेगा।

4- रेलटेल (RailTel Corporation of India)

नवरत्न पीएसयू रेलटेल को वेस्टर्न कोलफील्ड्स से 164.79 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है। कंपनी को 60 महीनों के लिए किराए के आधार पर एमपीएलएस वीपीएन नेटवर्क स्थापित करना है। इस प्रोजेक्ट को सितंबर 2031 तक पूरा करना है।

5- टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स (Tata Motors PV)

कंपनी ने जानकारी दी है कि भारी बारिश और बाढ़ की वजह से गुजरात के साणंद प्लांट और आसपास के सप्लायर फैसिलिटीज में आई मुश्किलें खत्म हो गई हैं और कामकाज चालू हो गया है। कंपनी का अनुमान है कि इस प्राकृतिक आपदा से 35-40 करोड़ रुपये का नॉन मैटेरियरल नुकसान हुआ है, जबकि बीमा दावा 30 करोड़ रुपये से कम रहने की उम्मीद है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि इससे उत्पादन, संचालन या वित्तीय स्थिति पर कोई गंभीर प्रभाव नहीं पड़ा है।

6- लेमन ट्री होटल्स (Lemon Tree Hotels)

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की इस प्रमुख कंपनी ने गुजरात के भरूच में नया होटल खोलकर अपनी मौजूदगी को और मजबूत किया है। ये गुजराज में कंपनी का 12वां एक्टिव होटल है। कंपनी के 20 और होटल पाइपलाइन में हैं। नए होटल का प्रबंधन कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कार्नेशन होटल्स करेगी।

7- हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL)

NCLT की बेंगलुरु पीठ ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स और साइएंट (Cyient) के 50:50 हिस्सेदारी वाले डॉरमेंट जॉइंट वेंचर इन्फोटेक एचएएल लिमिटेड को बंद करने का आदेश दिया है। इसके लिक्विडेशन की प्रक्रिया मार्च 2024 में शुरू हुई थी और इस वेंचर के क्लोजर होने की वजह से एचएएल के रक्षा कार्यक्रमों या बैलेंस शीट पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

8- टॉरेंट पावर (Torrent Power)

टॉरेंट पावर के मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) सौरभ मशरूवाला ने 20 अगस्त 2026 से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कंपनी ने 21 अगस्त 2026 से विकास पोद्दार को नया सीएफओ नियुक्त किया है।

9- रैलिस इंडिया (Rallis India)

कंपनी ने बताया है कि उसके सीएफओ भास्कर स्वामीनाथन टाटा समूह की दूसरी कंपनी में शामिल होने के लिए 4 नवंबर 2026 से अपने पद से इस्तीफा देंगे। कंपनी उसी तारीख से श्रीधर राधाकृष्णन को नया सीएफओ नियुक्त करेगी।

10- एफएमसीजी शेयर (Adani Wilmar, Patanjali, Marico, Agro Tech)

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा उपभोक्ताओं को खुला खाद्य तेल न खरीदने की सलाह देने के बाद अडानी विल्मर, पतंजलि फूड्स, मैरिको और एग्रो टेक फूड्स के शेयर फोकस में रहेंगे। एफडीए ने मिलावट सहित दूसरे उल्लंघनों को देखते हुए खाद्य तेल क्षेत्र के लिए कंप्लायंस ऑर्डर भी जारी किया है।

11- निवा बूपा हेल्थ इंश्योरेंस (Niva Bupa Health Insurance)

हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी ने बताया है कि बीमा नियामक IRDAI ने FY25 के लिए लागू एक्सपेंस ऑफ मैनेजमेंट (EoM) सीमाओं का उल्लंघन करने के लिए उसे चेतावनी दी है। इसके साथ ही 19 अगस्त 2026 से 6 महीने की अवधि के लिए कंपनी के नए व्यावसायिक स्थान खोलने पर रोक लगा दी है।

12- अमागी मीडिया लैब्स (Amagi Media Labs)

क्लाउड-आधारित SaaS कंपनी अमागी मीडिया लैब्स के शेयर फोकस में रहेंगे क्योंकि कंपनी ने गुरुवार को 600 करोड़ रुपये का ब्लॉक डील लॉन्च किया है। यह डील कंपनी की कुल इक्विटी का 5% रिप्रेजेंट करती है।

13- केफिन टेक्नोलॉजीज (KFin Technologies)

केफिन टेक में एक बड़ी ब्लॉक डील देखने को मिली, जहां जनरल अटलांटिक सिंगापुर ने 925 रुपये प्रति शेयर के औसत मूल्य पर 1400 करोड़ रुपये में 1.51 करोड़ शेयर (8.8% हिस्सेदारी) बेचे। इस डील में इंवेस्को म्यूचुअल फंड ने 400 करोड़ रुपये में 2.5% हिस्सेदारी खरीदी, जबकि मिराए एसेट MF (1.5%), कोटक महिंद्रा MF (1.2%) और एचएसबीसी MF (1%) ने भी खरीदारी की।

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बच्चों को वसीयत में देनी चाहिए प्रॉपर्टी या जीवनकाल में कर देना चाहिए गिफ्ट? एक्सपर्ट से जानिए किसमें है ज्यादा फायदा

अपनी जीवनभर की कमाई और संपत्ति को बच्चों के नाम ट्रांसफर करना हर माता-पिता का एक बड़ा फैसला होता है। अक्सर विरासत या वसीयत से जुड़े फैसले माता-पिता के न रहने के बाद ही परिवार में चर्चा का विषय बनते हैं। लेकिन ऐसे में अक्सर प्रॉपर्टी को लेकर इसके दावेदारों, भाई-बहनों में विवाद और मतभेद पैदा होते भी हम देखते हैं। ऐसे में यह सवाल बहुत जरूरी हो जाता है कि क्या बच्चों को संपत्ति वसीयत के जरिए देनी चाहिए या अपने जीवनकाल में ही गिफ्ट (कर देनी चाहिए?

कानूनी और फाइनेंस एक्सपर्ट के मुताबिक अपने जीवनकाल में ही सरप्लस प्रॉपर्टी को गिफ्ट कर देना एक समझदारी भरा विकल्प हो सकता है। इससे माता-पिता अपने जीवनकाल में ही अपने इरादों को स्पष्ट कर सकते हैं, बच्चों की आशंकाओं को दूर कर सकते हैं और किसी भी मतभेद को समय रहते सुलझा सकते हैं।

…लेकिन सबसे पहले अपनी फाइनेंशियल सिक्यॉरिटी सुनिश्चित करें

अपने जीवनकाल में बच्चों को प्रॉपर्टी या धन गिफ्ट करने की योजना बनाते समय वरिष्ठ नागरिकों को सबसे पहले ये बुनियादी बात समझनी चाहिए कि देने से ज्यादा जरूरी उनके लिए ये सवाल है कि वो खुद के लिए कितना बचाकर रखें। एक्सपर्ट्स की साफ राय है कि माता-पिता को सबसे पहले अपना जीवनस्तर बनाए रखने, नियमित खर्चों को पूरा करने,भविष्य के स्वास्थ्य और इलाज संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त फंड और प्रॉपर्टी अलग रख लेनी चाहिए। इसके अलावा उम्र बढ़ने के साथ होने वाले अचानक के खर्चों और इमर्जेंसी के लिए एक बफर रखना बेहद जरूरी है। ऐसा इसलिए ताकि संपत्ति गिफ्ट करने के बाद उन्हें फाइनेंशियली अपने बच्चों पर निर्भर न होना पड़े।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील विनीता सेजवाल का कहना है कि लाइफटाइम गिफ्टिंग प्लान की नींव गिफ्ट देने वाले के अपने वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने पर टिकी होती है। वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनस्तर को बनाए रखने,नियमित खर्चों को पूरा करने और भविष्य की चिकित्सीय व स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पर्याप्त धनराशि अलग रखनी चाहिए। साथ ही अप्रत्याशित परिस्थितियों के लिए पर्याप्त रिजर्व भी रखना चाहिए।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसके लिए कोई तय मानक फॉर्मूला नहीं हो सकता। यह कैलकुलेशन वरिष्ठ नागरिक की आय, कुल संपत्ति, उनकी देनदारियों और वित्तीय जरूरतों पर निर्भर करती है। सिर्फ वही संपत्ति या धन बच्चों को गिफ्ट करने के लिए माना जाना चाहिए जो इन सभी जरूरतों को पूरा करने के बाद वास्तव में सरप्लस हो।

जीवनकाल में गिफ्ट देने से उत्तराधिकार क्यों आसान हो जाता है?

अपने जीवनकाल में संपत्ति ट्रांसफर करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि माता-पिता अपनी उपस्थिति में ही अपने फैसलों की वजह बता सकते हैं। यह बात तब और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है जब बच्चों को अलग-अलग मूल्य या अलग-अलग प्रकार की संपत्तियां दी जा रही हों।

दिल्ली हाई कोर्ट की वकील गुडीपति गायत्री कश्यप के मुताबिक,’मौत के बाद पूरी संपत्ति को बंटवारे के लिए छोड़ने की तुलना में जीवनकाल में गिफ्ट देना उत्तराधिकार का एक बहुत अधिक प्रभावी तरीका हो सकता है। यह माता-पिता को अपने इरादों को स्पष्ट करने, बच्चों के बीच की चिंताओं को दूर करने और अपनी मौजूदगी में मतभेदों को सुलझाने का मौका देता है।”

अक्सर माता-पिता के निधन के बाद विवाद सिर्फ कानूनी हक तक सीमित नहीं रहते बल्कि इस बात पर भी बहस होती है कि माता-पिता की सेवा किसने ज्यादा की, उन्हें किसने पैसा ज्यादा दिया, या किसी एक बच्चे को ज्यादा तरजीह दी गई या नहीं। इसीलिए ट्रांसपेरेंसी बहुत जरूरी है। अगर माता-पिता असमान रूप से गिफ्ट दे रहे हैं तो उन्हें इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करना चाहिए। साथ ही यह गिफ्टिंग प्लान वसीयत सहित अन्य व्यापक उत्तराधिकार योजनाओं से मेल खाता होना चाहिए।

कैश, शेयर्स या प्रॉपर्टी: क्या गिफ्ट करना ज्यादा बेहतर?

जीवनकाल में संपत्ति देने के लिए कोई एक एसेट क्लास सबसे बेहतर नहीं कहा जा सकता। यह फैसला लिक्विडिटी की जरूरत, टैक्स के नियमों और इस बात पर निर्भर करता है कि क्या वरिष्ठ नागरिक को खुद उस संपत्ति से आय या व्यक्तिगत उपयोग की जरूरत है या नहीं। कैश ट्रांसफर करने में सबसे आसान है और जिसे मिलता है उसे तुरंत लिक्विडिटी मिल जाती है। लिस्टेड शेयर्स और म्यूचुअल फंड को भी ट्रांसफर करना और इनके डॉक्युमंट्स तैयार करना आसान होता है। प्रॉपर्टी, जमीन और सोना की बात करें तो अगर आपका उद्देश्य ऐसी संपत्तियों को पास ऑन करना है जिनका मूल्य समय के साथ बढ़ता है तो इन्हें चुना जा सकता है।

हालांकि, अचल संपत्ति मामले में बेहद सावधानी बरतने की जरूरत होती है क्योंकि यह लिक्विड नहीं होती और न ही इसे आसानी से बांटा जा सकता है। इसके अलावा अचल संपत्ति के ट्रांसफर में वैल्युएशन, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन का खर्च आता है।

गांधी लॉ एसोसिएट्स के पार्टनर राहिल पटेल कहते हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवनकाल में धन या संपत्ति तभी ट्रांसफर करनी चाहिए जब वे अपने अपेक्षित रहने के खर्चों, स्वास्थ्य सेवा, आपात स्थितियों और दीर्घायु जोखिमों को आराम से पूरा करने के लिए पर्याप्त संपत्तियों को सुरक्षित कर लें। प्राथमिकता वित्तीय स्वतंत्रता होनी चाहिए, न कि संपत्ति देने के बाद बच्चों पर निर्भर हो जाना।

सही कानूनी डॉक्युमेंटेशन है बेहद जरूरी

जीवनकाल में दिए जाने वाले किसी भी गिफ्ट को महज एक अनौपचारिक पारिवारिक समझ नहीं मानना चाहिए। खासकर जब बड़ी संपत्ति शामिल हो, तो उसका सही डॉक्युमेंटेशन होना जरूरी है। राहिल पटेल के अनुसार, अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) के मामले में एक रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड की जरूरत होती है। इसके लिए राज्य के नियमों के अनुसार स्टाम्प ड्यूटी और पंजीकरण शुल्क देना पड़ सकता है।

दस्तावेजीकरण तब और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है जब बच्चों के बीच संपत्ति का असमान रूप से बांटी जा रही हो। सही लिखापढ़ी न होने पर भविष्य में जबरदस्ती संपत्ति लेने, दबाव डालकर प्रॉपर्टी ट्रांसफर कराने जैसे आरोप लग सकते हैं और मामला विवादित हो सकता है।

जीवनकाल में संपत्ति गिफ्ट करने का मतलब यह नहीं है कि आप अपनी सारी धन-दौलत बांट दें। इसका सही उद्देश्य यह है कि जब माता-पिता खुद वित्तीय रूप से सुरक्षित हों और अपने इरादों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने में सक्षम हों तब वे अपनी सरप्लस प्रॉपर्टी को प्लान बनाकर ट्रांसफर कर दें। जरूरत के हिसाब से फाइनेंशियल रिजर्व, ट्रांसपेरेंसी और सही लीगल डॉक्यूमेंटेशन के साथ किया गया ट्रांसफर अगली पीढ़ी को बिना किसी पारिवारिक कलह के प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने का एक सुरक्षित रास्ता बनाता है।

 

 

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

टैक्स बचाते-बचाते कहीं आप तो नहीं कर रहे ये 3 बड़ी गलतियां? समझें स्मार्ट सेविंग का गणित

Smart Financial Planning: अक्सर लोग टैक्स बचाने के लिए ऐसे फाइनेंशियल फैसले ले लेते हैं, जिनका नुकसान उन्हें सालों-साल उठाना पड़ता है। इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख की छूट पाने के चक्कर में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान या गलत जगह पैसा फंसा देते हैं।

अगर आप भी सिर्फ टैक्स की बचत को अपना एकमात्र मकसद मानकर निवेश कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। जानिए वे 3 बड़ी गलतियां जो आपकी वेल्थ को बढ़ाने के बजाय घटा रही हैं।

इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को एक साथ मिलाना

टैक्स बचाने के लिए लोग सबसे पहली गलती यह करते हैं कि वे एंडोमेंट या मनी-बैक पॉलिसी ले लेते हैं। इन पॉलिसियों में मिलने वाला रिटर्न महज 4% से 6% के आसपास होता है, जो महंगाई दर को भी मात नहीं दे पाता।

इसका दूसरा स्मार्ट ऑप्शन ये है कि इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को हमेशा अलग रखें। लाइफ कवर के लिए सिर्फ टर्म इंश्योरेंस लें, जो कम प्रीमियम में भारी-भरकम कवर देता है।

लॉक-इन और रिटर्न का गणित समझे बिना निवेश करना

केवल 80C की लिमिट भरने के लिए टैक्स-सेविंग एफडी (5 साल का लॉक-इन) या ऐसे प्रोडक्ट्स में पैसा लगा देना, जहाँ रिटर्न टैक्स-एडजस्टेड होने के बाद बेहद कम बचता है। इसका कड़वा सच ये है कि बैंक एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर आपकी टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है, जिससे आपका असल रिटर्न और कम हो जाता है।

अगर आपकी रिस्क क्षमता इजाजत देती है, तो इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम(ELSS) में निवेश करें। इसमें केवल 3 साल का लॉक-इन होता है और लंबे समय में 12% से 15% तक का संभावित रिटर्न मिल सकता है।

इंश्योरेंस कवर को ही वेल्थ क्रिएटर्स समझ लेना

कई लोग गारंटीड रिटर्न वाली पॉलिसियों में यह सोचकर सालों तक प्रीमियम भरते हैं कि उनका पैसा सुरक्षित है और टैक्स भी बच रहा है। 20-25 साल बाद मिलने वाला ₹20 लाख का फंड महंगाई के कारण आज के ₹5-6 लाख के बराबर भी नहीं होगा। यानी आप सुरक्षित रहकर भी अपनी खरीदारी की ताकत खो रहे हैं।

स्मार्ट सेविंग का आसान गणित

टैक्स बचाने और वेल्थ क्रिएट करने के लिए सही एसेट एलोकेशन बेहद जरूरी है। जहां ट्रेडिशनल इंश्योरेंस प्लान 10 से 20 साल के लंबे लॉक-इन के साथ महज 4% से 6% का औसत रिटर्न देते हैं, वहीं ELSS (टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड) सिर्फ 3 साल के सबसे कम लॉक-इन पीरियड में 12% से 15% तक का शानदार अनुमानित रिटर्न और 80C के तहत छूट देता है। इसके अलावा 15 साल की अवधि वाला PPF 7.1% का पूरी तरह टैक्स-फ्री रिटर्न देता है, जबकि सबसे स्मार्ट रणनीति यानी ‘टर्म प्लान + इंडेक्स फंड’ का कॉम्बिनेशन टर्म प्लान पर 80C की छूट के साथ-साथ लॉन्ग टर्म में 12%+ का तगड़ा रिटर्न हासिल करने में मदद करता है।

कैसे करें स्मार्ट शुरुआत?

टैक्स बचाना निवेश की प्रक्रिया का एक छोटा सा हिस्सा होना चाहिए, मुख्य लक्ष्य नहीं। सबसे पहले अपनी उम्र और जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस लें। इसके बाद बचे हुए पैसों को ELSS, PPF या NPS जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले साधनों में अपनी रिस्क प्रोफाइल के अनुसार बांटें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket Share Price: लगातार दूसरे दिन रॉकेट बने शेयर, IPO में निवेश का मौका चूक गए तो अब क्या करें?

Shiprocket Share Price: शिपरॉकेट के शेयर 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन रॉकेट बन गए। कंपनी के शेयर 19 अगस्त को 35 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए थे। उसके बाद शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी थी। कारोबार खत्म होने पर शेयर करीब 48 फीसदी तेजी के साथ बंद हुए। आज यानी 20 अगस्त को लगातार दूसरे दिन शेयरों में जबर्दस्त तेजी दिखी। खुलते ही शेयर करीब 8 फीसदी तक उछल गए। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ी। 11:00 बजे शेयर 5.26 फीसदी चढ़कर 150.78 रुपये पर चल रहा था।

गोल्डमैन सैक्स की कंपनी ने किया बड़ा निवेश

Shiprocket के शेयरों में आज (20 अगस्त) को आई तेजी की वजह एक खबर है। खबर है कि गोल्डमैन सैक्स की कंपनी गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने शिपरॉकेट के 40,24,040 शेयर खरीदे हैं। यह ट्रांजेक्शन प्रति शेयर 131 रुपये के प्राइस पर हुआ है। इससे लगातार दूसरे दिन शेयरों को पंख लग गए। जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे शेयरों में जबर्दस्त तेजी का जश्न मना रहे है।

आईपीओ को जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था

Shiprocket के आईपीओ को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 99 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था। आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग ग्रे मार्केट के संकेत के मुताबिक रही। कंपनी के शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम करीब 36-37 फीसदी चल रहा था।

निवेशक शेयरों में कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं

आनंदराठी शेयर्स के फंडामेंटल रिसर्च हेड नरेंद्र सोलंकी ने कहा कि शिपरॉकेट को इंडिया में ई-कॉमर्स ईकोसिस्टम की स्ट्रक्चरल ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। हालांकि, इस मार्केट में काफी प्रतियोगिता है। उन्होंने कहा कि जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ लिस्टिंग गेंस बुक कर सकते हैं। बाकी शेयर वे अपने पास रख सकते हैं। लंबी अवधि में शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है।

नए इनवेस्टर्स ‘वेट एंड वॉच’ की पॉलिसी अपना सकते हैं

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट महेश एम ओझा ने कहा कि जिन निवेशकों ने आईपीओ में अप्लाई नहीं किया था या जिन्हें अप्लाई करने के बाद भी शेयर एलॉट नहीं हुए, वे ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करो और देखो की पॉलिसी अपना सकते हैं। उन्हें अगली 1-2 तिमाही तक कंपनी के रिजल्ट्स को देखना चाहिए। रेवेन्यू ग्रोथ, ऑपेरेटिंग प्रॉफिट देखने के बाद ही निवेश का फैसला लेना चाहिए।

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो का इनवेस्टमेंट

शिपरॉकेट में टेमासेक और जोमैटो के पैसे लगे हैं। शुरुआत में यह कंपनी शिपिंग सर्विस देती थी। अब इसका फुल-स्टैक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जिससे जरिए यह डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर ब्रांड्स से लेकर MSME का शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है। इसके बिजनेस के दो सेगमेंट-कोर बिजनेस और इमर्जिंग बिजनेस हैं।

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कंपनी कई तरह की शिपिंग सर्विसेज ऑफर करती है

कंपनी के कोर बिजनेस में डोमेस्टिक शिपिंग और शिपिंग अप्लिकेशंस आते हैं। इमर्जिंग बिजनेसेज में कार्गो एंड फुलफिलमेंट, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, एडवर्टाइजिंग एंड मार्केटिंग सॉल्यूशंस, कैपिटल सॉल्यूशंस और हायपर लोकल डिलीवरीज आती हैं। इकोनॉमिक एक्टिविटीज बढ़ने का फायदा कंपनी को मिलेगा।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

 

Zerodha का बड़ा ऐलान: अब एक ही ऐप पर मिलेंगे शेयर और म्यूचुअल फंड, Kite में ही शुरू होगी डायरेक्ट SIP

Zerodha Kite Mutual Fund Trading: देश के सबसे बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स में शामिल जेरोधा ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा फैसला किया है। Zerodha बहुत जल्द अपने पॉपुलर स्टॉक ट्रेडिंग ऐप ‘Kite’ पर ही म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सुविधा देने जा रहा है। यानी अब निवेशकों को शेयर खरीदने और म्यूचुअल फंड/SIP में पैसा लगाने के लिए अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।

कंपनी के म्यूचुअल फंड हेड नीलेश वर्मा ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बताया कि अगले कुछ ही महीनों में यह नया फीचर Kite ऐप पर लाइव कर दिया जाएगा।

अभी क्या है व्यवस्था और क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?

अब तक Zerodha अपने यूजर्स के लिए दो अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल करता रहा है:

Kite App: एक्टिव ट्रेडिंग और शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए।

Coin App: लॉन्ग-टर्म और पैसिव इन्वेस्टमेंट्स जैसे म्यूचुअल फंड्स, NPS और FD के लिए।

फिलहाल, जब यूजर्स Kite ऐप पर म्यूचुअल फंड्स देखते हैं, तो उन्हें खरीदारी करने के लिए ऑटोमैटिकली Coin ऐप पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है। लेकिन Groww जैसे प्रतिस्पर्धी ब्रोकर्स द्वारा एक ही ऐप पर सभी सुविधाएं देने के कारण यूजर्स काफी समय से Zerodha से भी ‘ऑल-इन-वन ऐप’ की मांग कर रहे थे।

Kite ऐप में मिलेंगे 2 सबसे खास और नए फीचर्स

सिंगल ऐप एक्सपीरियंस: अब यूजर्स अपने इक्विटी पोर्टफोलियो और म्यूचुअल फंड निवेश को एक ही स्क्रीन से मैनेज और ट्रैक कर पाएंगे।

पोर्टफोलियो इंपोर्ट करने की सुविधा: यूजर्स किसी दूसरे प्लेटफॉर्म (जैसे- Groww, PayTM Money आदि) पर चल रहे अपने पुराने म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स को भी आसानी से Zerodha Kite पर इंपोर्ट कर सकेंगे।

आपको बता दें कि Zerodha अपने ‘Coin’ ऐप को बंद नहीं करेगा। Coin ऐप पैसिव इन्वेस्टर्स के लिए अलग से काम करता रहेगा, लेकिन Kite यूजर्स को अब ऐप बदलने की मजबूरी नहीं होगी।

Zerodha के इस कदम के पीछे के आंकड़े

Zerodha के पास Coin ऐप पर लगभग 30 लाख म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स और 56 लाख से ज्यादा एक्टिव SIP अकाउंट्स हैं। एसेट अंडर मैनेजमेंट(AUM) के मामले में Coin देश का दूसरा सबसे बड़ा डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म है।

Kite App गूगल प्ले स्टोर पर 1 करोड़+ डाउनलोड्स है और करीब 65 लाख+ एक्टिव यूजर बेस है। वही Coin App के 50 लाख+ डाउनलोड्स और 30 लाख से ज्यादा एक्टिव यूजर है।

Kite का यूजर बेस Coin से दोगुना से भी ज्यादा है। ऐसे में Kite के भीतर ही म्यूचुअल फंड्स का विकल्प मिलने से Zerodha के म्यूचुअल फंड कारोबार में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही क्यों?

Zerodha अपने दोनों प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही ऑफर करता है। इसमें निवेशकों को कोई डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन या अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ता, जिससे लॉन्ग-टर्म में निवेशकों को रेगुलर फंड्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न (CAGR) मिलता है।

Groww और Zerodha के बीच म्यूचुअल फंड और SIP ग्राहकों को जोड़ने की होड़ में, Zerodha का यह ‘ऑल-इन-वन’ दांव मार्केट में उसकी पकड़ को और मजबूत कर सकता है।

Stocks to Watch: BSE, HDFC Life और Hyundai समेत 21 स्टॉक्स; Sensex की वीकली एक्सपायरी पर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से मजबूत रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 144.00 प्वाइंट्स यानी 0.60% की बढ़त के साथ 24,234.00 पर है। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 19 अगस्त को सेंसेक्स (Sensex) 325.78 प्वाइंट्स यानी 0.42% की गिरावट के साथ 76,909.68 और निफ्टी 76.60 प्वाइंट्स यानी 0.32% की फिसलन के साथ 24,078.30 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

XtraNet Technologies Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर एक्स्ट्रानेट टेक्नोलॉजीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 77.9% बढ़कर ₹6.04 करोड़ और रेवेन्यू 10.5% उछलकर ₹50.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Lohia Corp Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर लोहिया कॉर्प का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 4 गुना बढ़कर ₹16.9 करोड़ से ₹66.3 करोड़ और रेवेन्यू 59.5% उछलकर ₹503 करोड़ पर पहुंच गया।

EMS

ईएमस ने राजस्थान सरकार के पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से कोटा में वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और उससे जुड़े दूसरे कामों के लिए सबसे कम बोली लगाई है। यह ऑर्डर ₹190.86 करोड़ का है।

Ramco Systems

एंटरप्राइज एविएशन सॉफ्टवेयर मुहैया कराने वाली रामको सिस्टम्स की सब्सिडरी रामको सिस्टम्स कॉर्पोरेशन ने ऐलान किया है कि इंजन एमआरओ सर्विसेज और एक्सेसरी रिपेयर मुहैया कराने वाली पेम-एयर (Pem-Air) ने अपने इंजन एमआरओ ऑपरेशंस के लिए तकनीकी आधार के रूप में रामको एविएशन सॉफ्टवेयर को चुना है।

Dr Lal PathLabs

डॉ लाल पैथलैब्स की दुबई की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी डॉ लाल पैथलैब्स एफजेडसीओ ने 19 अगस्त को उज्बेकिस्तान के ताशकंद में डॉ लाल पैथलैब्स इंडोमेड नाम से एक कंपनी बनाई है और इसकी 70% शेयर कैपिटल लेने पर सहमति जताई है।

Autoline Industries

ऑटोलाइन इंडस्ट्रीज को टाटा मोटर्स पैसेंजर वेईकल्स से हैचबैक गाड़ियों के लिए चार जरूरी पार्ट्स की सप्लाई का नया बिजनेस मिला है। इस बिज़नेस से कंपनी को सालाना लगभग ₹80 करोड़ का अतिरिक्त रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है, जबकि इससे जुड़े टूलिंग से लगभग ₹30 करोड़ का एक बार का रेवेन्यू मिलने की उम्मीद है।

HDFC Life Insurance Company

बीमा नियामक इरडा ने एचडीएफसी लाइफ की एमडी और सीईओ के तौर पर विभा पाडलकर की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। उनका अगला कार्यकाल 5 साल के लिए 12 सितंबर, 2026 से शुरू होगा। साथ ही 26 अप्रैल 2026 से पांच साल के लिए इरडा ने नीरज शाह की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर के तौर पर दोबारा नियुक्ति को भी मंजूरी दी है।

Hyundai Motor India

हुंडई मोटर इंडिया ने सितंबर 2026 से अपनी सभी गाड़ियों की कीमतों में 1% तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।

Kolte-Patil Developers

कोल्टे-पाटिल डेवलपर्स ने 24 अगस्त से ऋषिकेश परांडेकर को सीईओ बनाने का ऐलान किया है।

Aditya Infotech

आदित्य इन्फोटेक के बोर्ड ने पब्लिक इश्यू, क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशंस प्लेसमेंट (QIP) या किसी अन्य तरीके से सिक्योरिटीज जारी करके ₹1,500 करोड़ तक का फंड जुटाने को मंजूरी दे दी है।

United Spirits

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने यूनाइटेड स्पिरिट्स की बारामती यूनिट में बनने वाले एक प्रोडक्ट की बिक्री से जुड़े 29 जून 2026 के अपने आदेश को वापस ले लिया है।

BSE

बीएसई ने अपने कई इंडेक्स के लिए MSCI के साथ एक एग्रीमेंट किया है। एक्सचेंज रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर इन इंडेक्स से जुड़े F&O कॉन्ट्रैक्ट्स को भारत में लॉन्च करने पर विचार करेगा।

Dhenu Buildcon Infra

सेबी ने धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा के छह प्रेफरेंशियल अलॉटीज यानी शेयर पाने वालों को कंपनी के शेयर बेचने से रोक दिया है। यह कार्रवाई ₹1,000 करोड़ के कथित लोन से जुड़े फंड की राउंड-ट्रिपिंग के शुरुआती सबूत मिलने के बाद की गई है।

Aster DM Quality Care

TPG के निवेश वाली सेंटेला मॉरीशस होल्डिंग्स ने एस्टर डीएम क्वालिटी केयर में 6.66% हिस्सेदारी वाले 5.81 करोड़ इक्विटी शेयर ₹4,451.45 करोड़ में प्रति शेयर ₹766.17 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक कंपनी में सेंटेला की हिस्सेदारी 9.9% थी, जो हिस्सेदारी बेचने के बाद घटकर 3.24% रह गई है। वहीं चार घरेलू और ग्लोबल इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स-HDFC म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा म्यूचुअल फंड, इंटीग्रेटेड कोर स्ट्रैटेजीज़ एशिया और सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स सिंगापुर ने कुल मिलाकर ₹2,287.6 करोड़ में कंपनी के 2.98 करोड़ शेयर खरीदे।

Shiprocket

गोल्डमैन सैक्स फंड्स-गोल्डमैन सैक्स इंडिया इक्विटी पोर्टफोलियो ने लिस्टिंग के दिन शिपरॉकेट में 0.55% हिस्सेदारी वाले 40.24 लाख शेयर ₹52.7 करोड़ में प्रति शेयर ₹131 के भाव पर खरीदे।

Behari Lal Engineering

360 वन म्यूचुअल फंड ने लिस्टिंग के दिन बेहारी लाल इंजीनियरिंग में 1.19% हिस्सेदारी वाले अतिरिक्त 5.05 लाख शेयर ₹23.74 करोड़ में प्रति शेयर ₹470.13 के भाव और संजय पोपटलाल जैन ने ₹14.35 करोड़ में 3 लाख शेयर ₹478.55 के भाव पर खरीदे। लेटेस्ट शेयरहोल्डिंग पैटर्न के अनुसार 360 वन एसेट मैनेजमेंट के पास 360 वन इक्विटी अपॉर्चुनिटी फंड-सीरीज 2 के जरिए पहले से ही कंपनी में 1.08% हिस्सेदारी थी।

Updater Services

एसआईएस लिमिटेड ने प्रति शेयर ₹216.37 के भाव पर ₹113.5 करोड़ में अपडेटर सर्विसेज के अतिरिक्त 5.25 लाख शेयर (0.78% हिस्सेदारी) खरीदे। जून 2026 तक एसआईएस के पास कंपनी में 4.88% हिस्सेदारी थी।

Welspun Investments and Commercials

लॉयड्स एंटरप्राइजेज ने प्रति शेयर ₹1,797.12 के भाव पर वेलस्पन इंवेस्टमेंट्स एंड कमर्शियल्स के अतिरिक्त 29,960 शेयर म(0.81% हिस्सेदारी) ₹5.38 करोड़ में खरीदे। इससे पिछले सेशन में लॉयड्स ने कंपनी के 97,622 शेयर (2.67% हिस्सेदारी) खरीदे थे।

Waterways Leisure Tourism

बेल्ग्रेव इन्वेस्टमेंट फंड ने कॉर्डेलिया क्रूज की ऑपरेटर कंपनी वॉटरवेज लेजर टूरिज्म के 6.98 लाख शेयर (0.96% हिस्सेदारी) ₹57.65 करोड़ में प्रति शेयर ₹825.11 के भाव पर बेच दिए।

Tipco Engineering India

360 वन प्राइम ने टिप्को इंजीनियरिंग इंडिया के 1.56 लाख शेयर (0.75% हिस्सेदारी) ₹3.01 करोड़ में प्रति शेयर ₹192.28 के भाव पर खरीदे। वहीं इंटी कैपिटल वीसीसी-इंटी कैपिटल I ने कंपनी के 1.45 लाख शेयर (0.7% हिस्सेदारी) ₹2.79 करोड़ में प्रति शेयर ₹192 के भाव पर बेच दिए। जून 2026 तक इसकी कंपनी में 1.63% हिस्सेदारी थी।

Credent Connect N Care

आईपीओ को 153 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद क्रीडेंट कनेक्ट एन केयर के शेयरों की आज एनएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

इन स्टॉक्स पर भी फोकस

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज, एसपीईएल सेमीकंडक्टर, स्टैंडर्ड सरफैक्टेंट्स

एक्स-डिविडेंड: मजझगांव डॉक शिपबिल्डर्स, बीआर गोयल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोस्टल कॉर्पोरेशन, डाई-इची करकारिया (Dai-Ichi Karkaria), गोलकुंडा डायमंड्स एंड ज्वैलरी, कामा होल्डिंग्स, क्वांटम पेपर्स, ला ओपाला आरजी, मार्कसन्स फार्मा, मुंजाल ऑटो इंडस्ट्रीज, नैटको फार्मा, एनआईआईटी, एनआईआईटी लर्निंग सिस्टम्स, ओसीसीएल, शिवा टेक्सयार्न, सुखजीत स्टार्च एंड केमिकल्स

राइट्स की एक्स-डेट: वायसराय होटल्स

बोनस की एक्स-डेट: कहान पैकेजिंग, ऑर्गेनिक रीसाइक्लिंग सिस्टम्स

F&O Ban: बंधन बैंक, एलआईसी, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Mutual Funds: सोने ने दिया 9% रिटर्न, फिर भी निवेशकों ने इन फंड्स में लगाए ₹1.40 लाख करोड़

Mutual Funds: जुलाई 2026 में सोने ने करीब 9% का रिटर्न दिया। इसके बावजूद भारतीय निवेशकों ने सबसे ज्यादा भरोसा मनी मार्केट फंड्स पर जताया। Vallum Capital की अगस्त 2026 की Monthly Macro Grid Chartbook के मुताबिक, जुलाई में इन फंड्स में 1.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया। दिलचस्प बात यह है कि जून में इसी कैटेगरी से 65,530 करोड़ रुपये निकल गए थे।

सिर्फ मनी मार्केट फंड ही नहीं, फिक्स्ड इनकम फंड्स में भी वापसी देखने को मिली। जुलाई में इनमें 5,947 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जून में 53,006 करोड़ रुपये की निकासी हुई थी। दूसरी तरफ, सोने की कीमत बढ़ने के बावजूद प्रेशियस मेटल फंड्स में निवेश घटकर 4,084 करोड़ रुपये रह गया, जो जून में 8,680 करोड़ रुपये था।

SIP में लगातार बढ़ रहा निवेश

सुरक्षित निवेश की तरफ झुकाव का मतलब यह नहीं था कि निवेशकों ने शेयर बाजार से दूरी बना ली। Franklin Templeton India की रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई में SIP योगदान 12% बढ़कर 31,961 करोड़ रुपये पहुंच गया। वहीं SIP खातों की संख्या भी 12.5% बढ़कर 10.63 करोड़ हो गई।

हालांकि, औसत मासिक SIP योगदान में मामूली गिरावट आई। यह 3,012 रुपये से घटकर 3,007 रुपये रह गया।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

जुलाई में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड 85.8 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। इस दौरान इक्विटी फंड्स का AUM 15.3% बढ़कर 38.40 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं पैसिव फंड्स का AUM सालाना आधार पर 24% से ज्यादा बढ़ा।

सबसे ज्यादा पैसा कहां गया?

इक्विटी फंड्स के भीतर भी निवेशकों की पसंद साफ नजर आई। स्मॉलकैप फंड्स में जुलाई के दौरान 7,768 करोड़ रुपये आए, जबकि मिडकैप फंड्स में 6,192 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। Vallum Capital के मुताबिक, जुलाई में माइक्रोकैप शेयर 4.6% और स्मॉलकैप शेयर 2.8% चढ़े।

निवेशकों ने क्यों सुरक्षित विकल्प चुने?

डेटा बताता है कि जुलाई में निवेशकों ने सिर्फ सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाली एसेट क्लास का पीछा नहीं किया। एक तरफ SIP और इक्विटी में निवेश जारी रहा, तो दूसरी तरफ बड़ी रकम मनी मार्केट और फिक्स्ड इनकम फंड्स में गई। इससे साफ है कि निवेशक बेहतर रिटर्न के साथ-साथ लिक्विडिटी और कम जोखिम वाले विकल्पों को भी प्राथमिकता दे रहे थे।

Vallum Capital का कहना है कि जुलाई में सोने की तेजी की बड़ी वजह अमेरिका की उम्मीद से कमजोर जॉब्स रिपोर्ट रही। इससे फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद कुछ कमजोर पड़ी। साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी ने भी सोने की कीमतों को सहारा दिया।

SBI खाताधारकों को बड़ा झटका! 1 अक्टूबर से बैंक से कैश निकालना होगा महंगा, जानें ये नया नियम

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।