Viral Post: साल में 1 करोड़ से ज्यादा कमाने के बाद भी नहीं मिल रही खुशी! टेक प्रोफेशनल ने बताया क्यों

एक टेक प्रोफेशनल का सैलरी को लेकर किया गया पोस्ट सोशल मीडिया पर चर्चा में है। 14 साल के करियर में 14,300 रुपये की शुरुआती सैलरी से 1.05 करोड़ रुपये सालाना कमाने तक टेक प्रोफेशनल ने अपनी कमाई में बड़ा बदलाव देखा। दिलचस्प बात ये है कि करोड़ों की कमाई के बावजूद वह अपनी सबसे खुशहाल सैलरी 20 हजार रुपये महीना मानते हैं। टेक प्रोफेशनल ने बताया कि, टियर-3 कॉलेज से पढ़ाई के बाद पहली नौकरी पाना आसान नहीं था। उनकी सैलरी जब 14,300 रुपये से बढ़कर 20,000 रुपये महीना हुई, तो उन्हें जितनी खुशी मिली, उतनी बाद में मिलने वाली बड़ी सैलरी बढ़ोतरी से भी नहीं मिली। सोशल मीडिया पर ये काफी वायरल हो रहा है।

14,300 रुपये थी शुरुआती सैलरी

Reddit पर शेयर की गई पोस्ट में टेक प्रोफेशनल ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया। 2012 में ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद इस टेक प्रोफेशनल को पहली नौकरी पाने में करीब छह महीने लग गए। उनकी शुरुआती मासिक सैलरी 14,300 रुपये थी, जो पहले बढ़कर 20,000 रुपये, फिर 32,000 रुपये और 60,000 रुपये हो गई। बेंगलुरु जाने के बाद उनकी सालाना सैलरी 13 लाख रुपये पहुंची और धीरे-धीरे बढ़कर 25 लाख, 40 लाख, 60 लाख, 80 लाख और आखिर में 1.05 करोड़ रुपये हो गई। उन्होंने बताया कि उनके पास 50 लाख रुपये से ज्यादा के ESOPs भी हैं, लेकिन उनका मानना है कि जब तक उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, तब तक उन्हें संपत्ति नहीं माना जा सकता।

ज्यादा खुशी 20 हजार सैलरी में थी

आज उनकी कमाई 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है, लेकिन उनके लिए सबसे खास सैलरी 20 हजार रुपये महीना रही। उन्होंने बताया कि 14,300 रुपये से बढ़कर 20,000 रुपये होने पर उनकी जिंदगी में बड़ा बदलाव आया। इस बढ़ोतरी के बाद उन्होंने पब्लिक बस से सफर करना छोड़ दिया और अपनी पसंद की “ड्रीम बाइक” खरीदी। उन्होंने ये भी बताया कि अपने 13 साल के करियर में उन्हें सिर्फ एक बार प्रमोशन मिला। उनके मुताबिक, ज्यादा सैलरी बढ़ने के साथ उनकी लाइफस्टाइल में भी बदलाव आया। अपने अनुभव के आधार पर इस टेक प्रोफेशनल ने कहा, “प्रमोशन के लिए किसी कंपनी के साथ मत रहो, यह इसके लायक नहीं है।”

निवेश करने में होती है मदद

उनका मानना है कि एक तय स्तर तक पहुंचने के बाद सैलरी बढ़ने का असर रोजमर्रा की जिंदगी पर कम पड़ता है। उन्होंने कहा, “जब आपकी सालाना कमाई करीब 25-30 लाख रुपये से ज्यादा हो जाती है, तो इसके बाद मिलने वाली हर अतिरिक्त बढ़ोतरी आपकी लाइफस्टाइल से ज्यादा आपके निवेश को बेहतर बनाने में मदद करती है। कम से कम, मेरे मामले में ऐसा ही हुआ है।” उन्होंने कहा, “मानसिक तनाव सच है, लेकिन ज्यादा सैलरी मिलने से यह कुछ कम हो जाता है।”

खुद का कुछ करना चाहते हैं

इस टेक प्रोफेशनल ने माना कि, अच्छी कमाई के बावजूद वह अपने काम से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने लिखा, “मुझे एहसास हुआ है कि अब मैं ज्यादा सैलरी के पीछे नहीं भाग रहा हूं। मैं आजादी के पीछे भाग रहा हूं।” उनका कहना है कि किसी दूसरी कंपनी में ज्यादा सैलरी के लिए काम करने के बजाय वह खुद की बनाई किसी चीज से हर महीने 1 लाख रुपये कमाना पसंद करेंगे। अच्छी कमाई के बावजूद यह टेक प्रोफेशनल सादा जीवन जीते हैं। वह 10 साल पुरानी कार चलाते हैं और बेंगलुरु में अपार्टमेंट के बजाय विला कम्युनिटी में प्लॉट खरीदा है। उनकी कमाई रियल एस्टेट, शेयर, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो और कमर्शियल प्रॉपर्टी में लगी है।

इस टेक प्रोफेशनल के फाइनेंशियल सफर में नुकसान भी शामिल रहा है। उन्होंने बताया कि क्रिप्टो ट्रेडिंग में उन्हें करीब 20-25 लाख रुपये का नुकसान हुआ। उनके लिए अब मकसद सिर्फ ज्यादा पैसा कमाना नहीं है। उन्होंने कहा, “ऐसा इसलिए नहीं है कि मुझे पैसे से नफरत है, बल्कि इसलिए कि मैं 60 साल की उम्र में पीछे मुड़कर यह नहीं सोचना चाहता कि अगर मैंने सच में कोशिश की होती तो क्या होता।”

नौकरी के साथ-साथ उन्होंने छोटे प्रोडक्ट और माइक्रो-SaaS प्रोजेक्ट्स पर भी काम शुरू किया है। फिलहाल उनके प्रोजेक्ट्स के कोई यूजर नहीं हैं, लेकिन वह मार्केटिंग सीख रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि आगे चलकर इनसे हर महीने 1,000-2,000 डॉलर की कमाई हो सकेगी। अगर ऐसा होता है, तो वह नौकरी छोड़ने या कुछ महीनों का ब्रेक लेने पर विचार कर सकते हैं।

Stocks to Watch: इंट्रा-डे में आज कहां बनेगा प्रॉफिट? दो लिस्टिंग और L&T, Manappuram समेत इन स्टॉक्स पर फोकस

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुले रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 45.50 प्वाइंट्स यानी 0.19% की बढ़त के साथ 24,561.00 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 11 अगस्त को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 388.19 प्वाइंट्स यानी 0.49% की गिरावट के साथ 78,154.25 और निफ्टी 112.10 प्वाइंट्स यानी 0.46% की फिसलन के साथ 24,471.70 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

आज इन कंपनियों के नतीजे होंगे पेश

टाटा मोटर्स, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइज, लेन्सकार्ट सॉल्यूशंस, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), अरविंद, एस्ट्रल, आदित्य इन्फोटेक, EID पैरी इंडिया, EMS, GMR एयरपोर्ट्स, इंडिक्यूब स्पेस, IRCTC, ज्योति लैब्स, नेशनल फर्टिलाइजर्स, पेट्रोनेट एलएनजी, एसकेएफ इंडिया, सन टीवी नेटवर्क, टीटागढ़ रेल सिस्टम्स, VIP इंडस्ट्रीज, वीके टेक वाबाग और यात्रा ऑनलाइन आज कारोबारी नतीजे पेश करेंगी।

इन कंपनियों के रिजल्ट पेश

Bata India Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर बाटा इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 23.04% उछलकर ₹63.98 करोड़ और रेवेन्यू 3.9% बढ़कर ₹978.9 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने हर शेयर पर ₹25 के अंतरिम डिविडेंड को मंजूरी दी है।

Manappuram Finance Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर मणप्पुरम फाइनेंस का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 4 गुना से अधिक बढ़कर ₹138.4 करोड़ से ₹584.6 करोड़ और NII (नेट इंटेरेस्ट इनकम) 28.1% बढ़कर ₹1,723.7 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स पर इमपेयरमेंट 60.6% घटकर ₹225.5 करोड़ पर आ गया।

RHI Magnesita India Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर आरएचआई मैग्नेसिटा इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 83.2% उछलकर ₹64.6 करोड़ और रेवेन्यू 5.6% बढ़कर ₹1,014 करोड़ पर पहुंच गया।

Tribhovandas Bhimji Zaveri Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर त्रिभोवनदास भीमजी जावेरी का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 50.8% उछलकर ₹33.92 करोड़ और रेवेन्यू 34.8% बढ़कर ₹840.97 करोड़ पर पहुंच गया।

PI Industries Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर पीआई इंडस्ट्रीज का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 39% घटकर ₹244.2 करोड़ और रेवेन्यू 10.4% फिसलकर ₹1,702.3 करोड़ पर आ गया।

Linde India Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर लिंडे इंडिया का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 2.4% घटकर ₹104.6 करोड़ पर आ गया लेकिन इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 21.6% फिसलकर ₹694.4 करोड़ पर पहुंच गया। साथ ही बोर्ड ने विकास डोकनिया को सीएफओ बनाया है जोकि 15 सितंबर से प्रभावी होगा।

Landmark Cars Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर लैंडमार्क कार्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 110.5% उछलकर ₹14.5 करोड़ और रेवेन्यू 22.7% बढ़कर ₹1,302.4 करोड़ पर पहुंच गया।

JSW Dulux Q1 (Consolidated YoY)

जून तिमाही में सालाना आधार पर जेएसडब्ल्यू ड्यूलक्स का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 12.4% गिरकर ₹79.7 करोड़ और रेवेन्यू 2.8% फिसलकर ₹965 करोड़ पर आ गया।

Stocks To Watch: इन स्टॉक्स पर भी रहेगी नजर

Tenneco Clean Air India

सीएनबीसी-टीवी18 की सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट के मुताबिक टेनेको क्लीन एयर इंडिया की प्रमोटर एंटिटी टेनेको मॉरीशस ब्लॉक डील्स के जरिए अपनी 8% हिस्सेदारी बेच सकती है जिसमें 2% हिस्सेदारी बेचने का विकल्प भी शामिल है। इसका फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹515 और बेस ऑफर साइज ₹1663 करोड़ है।

Zydus Lifesciences

जाइडस लाइफसाइंसेज की सब्सिडियरी सेंटिनल थेरेप्यूटिक्स और मेरेओ बायोफार्मा ग्रुप पीएलसी ने AATD-LD के लिए एल्वेलेस्टैट (Alvelestat) के अमेरिकी कमर्शियलाइजेशन और ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग राइट्स के लिए एक ऑप्शन और लाइसेंस एग्रीमेंट किया है। एल्वेलेस्टैट एक न्यूट्रोफिल इलास्टेस इनहिबिटर है, जिसके फेज 3 ट्रायल की तैयारी चल रही है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है, तो यह फेफड़ों की रेयर और तेजी से बढ़ने वाली जेनेटिक बीमारी के लिए पहला ओरल ट्रीटमेंट होगा। इस ऑप्शन और लाइसेंस एग्रीमेंट के तहत सेंटिनल को अमेरिका में AATD-LD के लिए एल्वेलेस्टैट को कमर्शियलाइज करने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस राइट्स मिलेगा, जबकि मेरेओ के पास बाकी दुनिया में कमर्शियल राइट्स बने रहेंगे।

BEML

बीईएमएल को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) के फ्यूजलेज एयरोस्ट्रक्चर के निर्माण और सप्लाई के लिए ₹184.25 करोड़ का ऑर्डर मिला है।

HG Infra Engineering

एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग को राजस्थान सरकार से पीएम सेतु के कंपोनेंट-1 के तहत आईटीआई भिवाड़ी क्लस्टर के O&M (ऑपरेशन एंड मैनेजमेंट) के लिए लेटर ऑफ अवार्ड (LoA) मिला है। ₹241 करोड़ की अनुमानित लागत में इसकी हिस्सेदारी 17.10% है।

Larsen and Toubro (L&T)

एलएंडटी ने अपनी सब्सिडियरी Vyoma.AI के साथ एक बिजनेस ट्रांसफर एग्रीमेंट किया है। इसके तहत यह अपना डेटा सेंटर और क्लाउड सर्विस बिजनेस ₹1,400 करोड़ में व्योमा को गोइंग-कंसर्न बेसिस पर स्लंप सेल के जरिए ट्रांसफर करेगी।

KFin Technologies

केफिन टेक ने वित्तीय संस्थानों की बेहतरीन फर्जीवाड़े को गलत तरीके से सही मान लेना या सही सिग्नेचर को भी गलत तरीके से रिजेक्ट करने जैसी ऑपरेशनल खामियों को दूर करने के लिए एक एजेंटिक एआई सॉल्यूशन Klarity लॉन्च किया है।

Diamond Power Infrastructure

डायमंड पावर इंफ्रा को को राजेश पावर सर्विसेज से कुल ₹195.48 करोड़ के दो ऑर्डर मिले हैं। इसके तहत कंपनी को गुजरात में SDMF (स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड) स्कीम और सिस्टम इंप्रूवमेंट (अर्बन अंडरग्राउंड) प्रोग्राम के तहत PGVCL (पश्चिम गुजरात विज कंपनी लिमिटेड) के प्रोजेक्ट्स के लिए 11 kV मीडियम वोल्टेज (MV) अंडरग्राउंड पावर केबल की सप्लाई करना है। इस पर कंपनी को 12 महीनों में काम पूरा करना है।

बल्क और ब्लॉक डील्स

Metropolis Healthcare

प्रमोटर एंटिटी डुरू शाह फैमिली ट्रस्ट और मेट्ज एडवाइजरी ने मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर के 10.5-10.5 लाख शेयर कुल ₹118.44 करोड़ में ₹564 के भाव पर बेचे। ये शेयर कुल मिलाकर कंपनी में 1.01% हिस्सेदारी के बराबर थे। इनमें से आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड ने ₹59.16 करोड़ में 10.49 लाख शेयर, ICICI प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड और मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर ने कुल ₹59.26 करोड़ में 5.25-5.25 लाख शेयर खरीदे। जून 2026 तक आदित्य बिड़ला सन लाइफ फ्लेक्सी कैप फंड के पास मेट्रोपोलिस हेल्थकेयर में पहले से ही 1.95% हिस्सेदारी थी।

Univastu India

टौरस म्यूचुअल फंड ने हर शेयर ₹130 के भाव पर ₹4.9 करोड़ में यूनिवास्तु इंडिया के 3.77 लाख शेयर (0.99% हिस्सेदारी) खरीदी।

Rolex Rings

जर्मन इन्वेस्टमेंट फर्म बायर्नइन्वेस्ट ने ईआरआई बायर्नइन्वेस्ट फोंड्स एक्टियन एशियन की तरफ से ₹15.33 करोड़ में हर शेयर ₹170.59 के भाव पर ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनी रोलेक्स रिंग्स के 8.98 लाख शेयर खरीदे।

RPP Infra Projects

चेन्नई की कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी दीवा प्रोजेक्ट्स ने आरपीपी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स के 8.48 लाख शेयर (1.71% हिस्सेदारी) ₹4.99 करोड़ में ₹58.90 के भाव पर हासिल किए। वहीं प्रमोटर अरुल सुंदरम नित्या ने ₹58.74 के भाव पर 5.13 लाख शेयर ₹3.01 करोड़ में तो पी अरुल सुंदरम ने ₹59.21 के भाव पर 3.59 लाख शेयर ₹2.13 करोड़ में बेचे। प्रमोटर्स ने कुल मिलाकर 1.76% होल्डिंग के बराबर शेयर बेचे।

लिस्टिंग

एर्डी इंडस्ट्रीज के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे तो जीवी इलेक्ट्रिकल्स की आज बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

एक्स-डेट

CAMS, KPIT टेक्नोलॉजीज, NHPC, ASM टेक्नोलॉजीज, धुनसेरी टी एंड इंडस्ट्रीज, गैब्रिएल इंडिया, गुजरात कंटेनर्स, एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग, इंडस्ट्रियल एंड प्रूडेंशियल इन्वेस्टमेंट कंपनी, KCP, नीलमलाई एग्रो इंडस्ट्रीज, संडूर मैंगनीज एंड आयरन ओर्स, नर्मदा जिलेटिन्स, यूनिपार्ट्स इंडिया, वैभव ग्लोबल और वोइथ पेपर फैब्रिक्स इंडिया के शेयर आज एक्स-डिविडेंड ट्रेड करेंगे तो नेशनल हाईवेज इंफ्रा ट्रस्ट के इनकम डिस्ट्रीब्यूशन की भी आज एक्स-डेट है।

F&O Ban

एसएआईएल और बंधन बैंक में आज एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

34 की उम्र में 1 करोड़ से ज्यादा की नेट वर्थ, फिर भी बेंगलुरु में घर खरीदना मुश्किल! जानें क्यों

बेंगलुरु में रहने वाले एक प्रोफेशनल की कहानी काफी वायरल हो रही है। 34 साल की उम्र में 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति जुटाना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। लेकिन बेंगलुरु में रहने वाले एक प्रोफेशनल की कहानी थोड़ी अलग है। अच्छी नेट वर्थ होने के बावजूद उनके लिए अपना घर खरीदना अभी भी आसान नहीं है। बढ़ती प्रॉपर्टी की कीमतों और बड़े खर्चों के कारण करोड़पति बनने के बाद भी घर खरीदने का सपना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। सोशवल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

कई जगह पर किए है निवेश

करीब 12 साल की नौकरी के दौरान इस व्यक्ति ने परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ अलग-अलग तरह के लोन भी लिए और नियमित रूप से निवेश करता रहा। इसी रणनीति से उन्होंने करीब 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ बना ली। उनकी जमा पूंजी कई जगह निवेश है, जिसमें लगभग 45 लाख रुपये म्यूचुअल फंड, 14 लाख रुपये अमेरिकी शेयरों, 35 लाख रुपये EPF, 8 लाख रुपये सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड और 15 लाख रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में हैं।

व्यक्ति के पास मैसूर में करीब 90 लाख रुपये की कीमत वाली एक प्रॉपर्टी भी है। खास बात ये है कि इस प्रॉपर्टी के लिए लिया गया लगभग 45 लाख रुपये का लोन वह पूरा चुका चुके हैं। लोन खत्म होने के बाद अब उन पर किसी तरह का कर्ज नहीं है और वह पूरी तरह कर्ज-मुक्त हैं।

बेंगलुरु में घर खरीदना मुश्किल

फिलहाल वह बेंगलुरु में रहते हैं और हर महीने करीब 40 हजार रुपये किराया देते हैं। अब उन्हें तय करना है कि किराए के घर में रहकर अपनी बचत और निवेश जारी रखें या बेंगलुरु में अपना घर खरीदें। घर खरीदने पर उन्हें बड़ा होम लोन लेना पड़ेगा, जिसकी EMI लंबे समय तक चुकानी होगी। इससे उनकी बचत और निवेश पर भी असर पड़ सकता है। करीब 1 करोड़ रुपये की नेट वर्थ बनाने के बाद अब वह इस बात को लेकर सोच रहे हैं कि अगला 1 करोड़ रुपये कैसे तैयार किया जाए और घर खरीदने में कितनी रकम लगाई जाए।

लोगों ने किया कमेंट

इस स्थिति ने ऑनलाइन एक बड़ी बहस भी छेड़ दी है। लोगों ने इस पर कई तरह से कमेंट किए हैं। एक व्यक्ति ने कहा, “1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ होने पर भी, सबसे मुश्किल फैसला यह होता है कि इन्वेस्ट करते रहें या घर खरीद लें, क्योंकि ज़िम्मेदारी पैसे के बाद शुरू होती है।” दूसरे व्यक्ति ने कहा, “34 साल की उम्र में 1.2 करोड़ रुपये की नेट वर्थ बनाने के बावजूद बेंगलुरु में घर खरीदना इतना मुश्किल क्यों लगता है, क्योंकि नया लोन इन्वेस्टमेंट की रफ़्तार को धीमा कर सकता है।”

SIP for Child: 18 साल का होने से पहले बच्चा बन जाएगा करोड़पति! समझिए कितना निवेश करना होगा और कैसे करें प्लानिंग

SIP for Child: इस वित्तीय अनिश्चितता के दौर में अपने बच्चों को आर्थिक तौर पर आत्मनिर्भर बनाना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि बहुत से लोग बच्चे के पैदा होने के साथ निवेश की प्लानिंग शुरु कर देते हैं। इसके लिए जरूरी नहीं कि शुरुआत से ही बहुत बड़ी रकम लगाई जाए। सही निवेश, लंबी अवधि और कंपाउंडिंग की ताकत से छोटी-छोटी रकम भी बड़ा फंड बना सकती है। सवाल है कि हर महीने कितना निवेश करना होगा और अलग-अलग रिटर्न पर कितना पैसा बनेगा?

मान लीजिए आपका बच्चा अभी पैदा हुआ है। आपके पास पूरे 18 साल हैं। अगर आप हर महीने एक तय रकम SIP में लगाते हैं और औसतन 10%, 12% या 15% सालाना रिटर्न मिलता है, तो कितना पैसा बन सकता है, इसे समझते हैं।

1 करोड़ के लिए हर महीने कितना निवेश?

18 साल में कुल 216 महीने होते हैं। 1 करोड़ रुपये का लक्ष्य पाने के लिए अनुमानित मंथली SIP इस तरह होगी।

अनुमानित सालाना रिटर्न18 साल में 1 करोड़ के लिए मंथली SIPकुल निवेशअनुमानित फायदा
10%₹17,487₹37.77 लाख₹62.23 लाख
12%₹14,184₹30.64 लाख₹69.36 लाख
15%₹10,298₹22.24 लाख₹77.76 लाख

यहां एक बात समझना जरूरी है। 15% रिटर्न मानकर चलना ज्यादा आक्रामक अनुमान है। शेयर बाजार आधारित निवेश में रिटर्न तय नहीं होता। इसलिए प्लान बनाते समय बहुत ज्यादा रिटर्न मानकर चलना ठीक नहीं है।

12% रिटर्न पर ₹10,000 की SIP से कितना पैसा बनेगा?

अब दूसरा उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आप बच्चे के जन्म से हर महीने 10,000 रुपये निवेश करते हैं। 18 साल तक निवेश जारी रखते हैं।

अगर औसत रिटर्न 10% रहा तो करीब 57.2 लाख रुपये बनेंगे। 12% रिटर्न पर यही रकम करीब 70.5 लाख रुपये हो जाएगी। वहीं, 15% औसत रिटर्न मिला तो फंड करीब 97.1 लाख रुपये पहुंच सकता है। यानी सिर्फ 10,000 रुपये की मासिक SIP से भी 18 साल में 1 करोड़ के काफी करीब पहुंचा जा सकता है।

अलग-अलग SIP से कितना फंड बनेगा?

12% सालाना औसत रिटर्न मानकर देखें तो तस्वीर और साफ हो जाती है।

मासिक SIP18 साल में कुल निवेशअनुमानित फंड
₹5,000₹10.80 लाख₹35.3 लाख
₹10,000₹21.60 लाख₹70.5 लाख
₹15,000₹32.40 लाख₹1.06 करोड़
₹20,000₹43.20 लाख₹1.41 करोड़

इस हिसाब से 15,000 रुपये की मासिक SIP 12% औसत रिटर्न पर 18 साल में करीब 1 करोड़ रुपये का फंड बना सकती है।

बच्चा 5 साल का हो चुका है तो?

मान लीजिए आपने निवेश जन्म के समय शुरू नहीं किया और बच्चा अब 5 साल का है। आपके पास 18 साल की उम्र तक सिर्फ 13 साल बचे हैं।

12% सालाना औसत रिटर्न मानें तो 1 करोड़ रुपये के लिए करीब 28,200 रुपये हर महीने निवेश करना होगा। समय कम होने की वजह से मासिक निवेश काफी बढ़ जाता है।

अगर बच्चा 10 साल का हो चुका है तो सिर्फ 8 साल बचेंगे। ऐसे में इसी अनुमानित रिटर्न पर करीब 64,300 रुपये महीने की SIP चाहिए होगी। यही वजह है कि बच्चे के लिए निवेश में जल्दी शुरुआत सबसे बड़ा फायदा देती है।

₹1,000 या ₹2,000 की SIP करें तो?

अगर शुरुआत में बड़ी रकम निवेश करना संभव नहीं है, तो ₹1,000 या ₹2,000 की SIP से भी शुरुआत की जा सकती है। मान लीजिए 18 साल तक हर महीने ₹1,000 निवेश करते हैं और औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है, तो करीब ₹7.6 लाख का फंड बन सकता है।

वहीं, ₹2,000 की SIP से करीब ₹15.2 लाख हो सकते हैं। 15% औसत रिटर्न मिलने पर यही रकम क्रमशः करीब ₹10.9 लाख और ₹21.8 लाख हो सकती है। शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन कम उम्र से निवेश शुरू करने का फायदा यह है कि समय के साथ SIP बढ़ाई जा सकती है।

पैसा कहां निवेश करें?

लंबे समय का लक्ष्य है तो निवेश का तरीका भी उसी हिसाब से चुनना चाहिए। 18 साल का समय होने पर इक्विटी म्यूचुअल फंड की SIP एक विकल्प हो सकती है। लेकिन इसमें बाजार का जोखिम रहता है।

जैसे-जैसे बच्चा 18 साल के करीब पहुंचे, पूरे पैसे को इक्विटी में रखना सही नहीं होगा। लक्ष्य से कुछ साल पहले धीरे-धीरे रकम को कम जोखिम वाले विकल्पों में शिफ्ट किया जा सकता है।

एक और तरीका हर साल SIP बढ़ाना है। उदाहरण के लिए शुरुआत 10,000 रुपये महीने से करें और हर साल इसे 10% बढ़ाते जाएं। इससे शुरुआती वर्षों में कम रकम से शुरुआत होगी और समय के साथ निवेश बढ़ता जाएगा।

SIP Calculator: सिर्फ ₹500 और ₹1,000 की मंथली SIP से बना सकते हैं लाखों का फंड! जानिए 10, 15 और 25 सालों का पूरा कैलकुलेशन

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

ITR Notice: टाइम पर ITR भर दिया? फिर भी आ सकता है इनकम टैक्स का नोटिस! जानिए बचाव का सही तरीका

Income Tax Notice After Filing ITR: अगर आपने 31 जुलाई या तय समयसीमा के भीतर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई। समय पर ITR फाइल करने से सिर्फ डेडलाइन पूरी होती है, लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं है कि आपका रिटर्न पूरी तरह सही और सटीक है।

इनकम टैक्स विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों (AIS/फॉर्म 26AS) और आपके द्वारा दी गई जानकारी में जरा सी भी गड़बड़ी पाई जाने पर आपको इनकम टैक्स का नोटिस आ सकता है।

समय पर ITR भरने के बाद भी क्यों आता है टैक्स नोटिस?

विशेषज्ञों के मुताबिक, टैक्स रिटर्न दाखिल करना पहला कदम है। नोटिस आने के ये कुछ प्रमुख कारण हैं:

  • TDS और टैक्स क्रेडिट मिसमैच: फॉर्म 26AS या AIS में दिख रहा TDS/TCS और रिटर्न में क्लेम किया गया TDS आपस में मेल न खाना।
  • छूटी हुई आय: सेविंग्स अकाउंट का ब्याज, FD का ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड से मिला डिविडेंड और कैपिटल गेंस को ITR में न दर्शाना।
  • हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन: जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री, क्रेडिट कार्ड का भारी बिल या बड़े कैश डिपॉजिट का ब्योरा रिटर्न से अलग होना।
  • गलत ITR फॉर्म चुनना: अपनी आय के स्रोतों के हिसाब से सही फॉर्म (ITR-1, 2, 3 या 4) की जगह गलत फॉर्म चुनना।
  • गलत डिडक्शन या क्लेम: बिना किसी पक्के सबूत के फर्जी HRA, 80C या अन्य टैक्स छूट का क्लेम करना।

इनकम टैक्स नोटिस के प्रकार

विभाग अलग-अलग कारणों से अलग-अलग धाराओं के तहत नोटिस भेजता है:

सेक्शन 143(1) इंटिमेशन नोटिस: यह रिटर्न प्रोसेस होने के बाद आता है। अगर विभाग को आपकी आय, टैक्स क्रेडिट या डिडक्शन की गणना में कोई गणितीय गलती मिलती है, तो यह इंटिमेशन जारी किया जाता है।

सेक्शन 139(9) डिफेक्टिव रिटर्न: रिटर्न में कोई जानकारी अधूरी रहने या गलत फॉर्म चुनने पर ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ का नोटिस मिलता है।

धारा 142(1) इंक्वायरी नोटिस: जब असेसिंग ऑफिसर (AO) को आपके रिटर्न के संबंध में कोई अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज चाहिए होते हैं।

धारा 143(2) स्क्रूटनी नोटिस: जब आपका रिटर्न विस्तृत जांच के लिए चुना जाता है। इसमें आपको अपने दावों के समर्थन में सबूत देने होते हैं।

धारा 148 – Income Escaped असेसमेंट: जब टैक्स अधिकारी के पास यह मानने की वजह हो कि आपकी कोई आय टैक्स के दायरे से छूट गई है।

धारा 156 – डिमांड नोटिस: अगर जांच के बाद विभाग यह पाता है कि आप पर टैक्स, ब्याज या पेनल्टी की कोई देनदारी बनती है, तो यह नोटिस भेजा जाता है।

नोटीस मिलने पर क्या करें? अपनाएं ये स्टेप्स

अगर आपको इनकम टैक्स विभाग से कोई नोटिस मिलता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। ये स्टेप्स को फॉलो करें:

सबसे पहले इनकम टैक्स के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल (incometax.gov.in) पर लॉगिन करें। नोटिस का DIN, असेसमेंट ईयर और PAN नंबर जरूर वेरीफाई करें। नोटिस में उठाए गए मुद्दे की तुलना अपने ITR, Form 26AS, AIS/TIS और बैंक स्टेटमेंट्स से करें।

अगर गलती आपकी तरफ से हुई है, तो तय समय में रिवाइज्ड रिटर्न या अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) दाखिल करें। अगर आपका रिटर्न बिल्कुल सही है, तो पोर्टल पर ही मांगे गए कागजात और सबूत अपलोड करके अपना पक्ष रखें।

नोटिस में दी गई डेडलाइन को कभी नजरअंदाज न करें। क्योंकि नोटिस का जवाब न देने पर भारी पेनल्टी, अतिरिक्त ब्याज या कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

पहली बार मार्केट में पैसा लगाने से पहले नोट कर लें ये 5 पॉइंट्स, नुकसान से बचाएगी समझदारी

First Time Investor Tips: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पहली बार निवेश करना काफी रोमांचक हो सकता है, लेकिन बिना तैयारी के बाजार में उतरा गया एक गलत कदम आपकी मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकता है। अगर आप भी एक नए निवेशक हैं और पहली बार मार्केट में पैसा लगाने का मन बना रहे हैं, तो शुरुआत करने से पहले वित्तीय विशेषज्ञों के ये 5 सबसे जरूरी नियम जरूर नोट कर लें।

1. सबसे पहले बनाएं अपना फाइनेंशियल गोल

निवेश केवल पैसा लगाने का नाम नहीं है, बल्कि यह आपके भविष्य की जरूरतों को पूरा करने का माध्यम है। पैसा लगाने से पहले यह स्पष्ट करें कि आप रिटायरमेंट, घर खरीदने, बच्चों की पढ़ाई या वेल्थ क्रिएशन में से किस उद्देश्य के लिए निवेश कर रहे हैं। आपका लक्ष्य अल्पकालिक या दीर्घकालिक ही यह तय करेगा कि आपको इक्विटी, डेट या हाइब्रिड फंड में से किसमें पैसा लगाना चाहिए।

2. इमरजेंसी फंड तैयार रखें और जल्दी शुरुआत करें

बाजार में बड़ा दांव लगाने से पहले अपने पास एक सुरक्षा कवच यानी इमरजेंसी फंड जरूर रखें। अपनी किसी भी बड़ी इन्वेस्टमेंट से पहले 3 से 6 महीने के लिविंग एक्सपेंस को किसी आसानी से निकलने वाले सेविंग्स या लिक्विड अकाउंट में रखें। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव के दौरान आपको पैनिक में अपने शेयर बेचने नहीं पड़ेंगे। इसके साथ ही जितनी जल्दी संभव हो छोटे-छोटे अमाउंट से इन्वेस्ट करना शुरू कर दें। शुरुआती निवेश से आपको पावर ऑफ कंपाउंडिंग का ज्यादा समय तक फायदा मिलता है।

3. ‘डाइवर्सिफिकेशन’ अपनाएं, सारा पैसा एक जगह न लगाएं

शेयर बाजार का सबसे पहला नियम है कि, ‘कभी भी अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें’। अपने पैसे को किसी एक कंपनी या सिर्फ एक सेक्टर में लगाने के बजाय अलग-अलग एसेट क्लासेज इक्विटी, गोल्ड, डेट और अलग-अलग सेक्टर्स में बांटें। अगर आपका एक इन्वेस्टमेंट खराब परफॉर्म करता है, तो दूसरे स्टॉक्स या फंड्स आपके पोर्टफोलियो को बैलेंस रखेंगे।

4. सोशल मीडिया की टिप्स से बचें, रीसर्च पर भरोसा करें

सोशल मीडिया फिनफ्लुएंसर्स, वॉट्सऐप टिप्स या मार्केट की अफवाहों के आधार पर कभी भी आंख बंद करके पैसा न लगाएं। किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, बैलेंस शीट, कर्ज की स्थिति और वैल्यूएशन को समझें।म्यूचुअल फंड चुनते वक्त फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड, एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) और एक्सपेंस रेशियो की जांच करें।

5. मार्केट टाइम करने के बजाय SIP का रास्ता चुनें

मार्केट में ‘बॉटम’ पर खरीदना और ‘टॉप’ पर बेचना लगभग असंभव है। इसलिए मार्केट टाइमिंग के चक्कर में न पड़ें। बाजार की चाल का अंदाजा लगाने के बजाय SIP या नियमित पीरियोडिक इन्वेस्टमेंट का जरिया अपनाएं। इससे बाजार के उतार-चढ़ाव में आपकी खरीदारी की लागत औसतन कम हो जाती है और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न पाने की संभावना बढ़ती है।

अन्य महत्वपूर्ण बातें जिन पर ध्यान देना जरूरी है

ब्रोकरेज चार्ज, एक्सपेंस रेशियो, एसटीटी (STT) और कैपिटल गेन टैक्स जैसे खर्चों को नजरअंदाज न करें, क्योंकि ये आपके कुल रिटर्न को प्रभावित करते हैं। बाजार में गिरावट देखकर पैनिक में आकर अपने एसेट्स न बेचें और न ही ट्रेंडिंग शेयर्स के पीछे भागें। साथ ही साथ हर 6 महीने या एक साल में अपने पोर्टफोलियो को रीबैलेंस करें ताकि वह आपके फाइनेंशियल गोल्स के हिसाब से अलाइन रहे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Rajeev Thakkar: ‘AUM को कोसना बंद कीजिए…’, कमजोर रिटर्न पर बोले राजीव ठक्कर, याद दिलाया ₹100 करोड़ वाले फंड का किस्सा

PPFAS Flexi Cap Fund Underperformance: जब भी कोई बड़ा म्यूचुअल फंड प्लान हाल के दिनों में कमजोर प्रदर्शन करती है, तो अक्सर उसके विशालकाय फंड साइज या AUM को जिम्मेदार ठहराया जाता है। लेकिन देश के सबसे लोकप्रिय फंड्स में से एक PPFAS Mutual Fund के मुख्य निवेश अधिकारी राजीव ठक्कर इस दलील से इत्तेफाक नहीं रखते।

निवेशकों को लिखे अपने मैसेज में राजीव ठक्कर ने कहा, ‘जो लोग शॉर्ट टर्म में हमारी स्कीम के कमजोर प्रदर्शन का कारण हमारे बड़े AUM को मानते हैं, वे हम पर ‘कुछ ज्यादा ही मेहरबान’ हो रहे हैं।’

आइए आपको बताते हैं कि ₹1.43 लाख करोड़ के बड़े फंड को संभालने वाले फंड मैनेजर ने स्कीम के अंडरपरफॉर्मेंस, बाजार के रुख और 2007 के उस दौर के बारे में क्या-क्या बातें कही हैं।

जब ₹100 करोड़ के PMS में भी झेलना पड़ा था बड़ा अंडरपरफॉर्मेंस

राजीव ठक्कर ने अपने पुराने दिनों का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि किसी फंड का साइज छोटा या बड़ा होना उसके प्रदर्शन की इकलौती वजह नहीं होता। उन्होंने बताया, ‘मैंने साल 2007 में PMS में महज ₹100 करोड़ से थोड़े अधिक के AUM बेस पर आज से भी बड़े अंडरपरफॉर्मेंस का दौर देखा और संभाला है।’

उनका मानना है कि शॉर्ट टर्म में फंड का रिटर्न कैसा रहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किन शेयरों में निवेश किया है और वे उस समय बाजार के ट्रेंड में हैं या नहीं।

कैसा रहा है हालिया प्रदर्शन?

राजीव ठक्कर देश की सबसे बड़ी फ्लेक्सी कैप स्कीम PPFAS Flexi Cap Fund का प्रबंधन करते हैं, जिसका कुल AUM करीब ₹1.43 लाख करोड़ पहुंच चुका है। पिछले एक साल में इस फंड ने लगभग 0.4% का रिटर्न दिया है। इसकी तुलना में इसी कैटेगिरी का औसत रिटर्न लगभग 7% रहा है। बाजार में चल रहे कंसोलिडेशन और कुछ सेक्टर्स में आई तेज गिरावट का असर इस फंड पर भी देखने को मिला है।

आउट ऑफ फेवर सेक्टर्स में खरीदारी: क्यों बिगड़ता है शॉर्ट टर्म रिटर्न?

अंडरपरफॉर्मेंस के कारणों पर बात करते हुए ठक्कर ने अपनी निवेश शैली पर प्रकाश डाला:

बाजार के रुझान से अलग सोच: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड अक्सर उन सेक्टर्स या शेयरों में खरीदारी करता है जो उस समय बाजार की पसंद नहीं होते या डिस्काउंट पर मिल रहे होते हैं।

शॉर्ट टर्म में अस्थिरता: जब फंड ऐसे सेक्टर्स में पैसा लगाता है जो फिलहाल बाजार की रेस में पीछे हैं, तो 3 महीने, 1 साल या उससे अधिक समय के लिए पोर्टफोलियो के रिटर्न कमजोर दिख सकते हैं।

‘ट्रेंड’ के पीछे न भागना: उन्होंने साफ किया कि फंड सिर्फ इसलिए किसी लोकप्रिय शेयर या सेक्टर में पैसा नहीं लगाएगा क्योंकि वह उस समय काफी चल रहा है। फंड का पूरा फोकस केवल रिस्क-रिवॉर्ड के आधार पर सही वैल्यू तलाशने पर रहता है।

निवेशकों के लिए राजीव ठक्कर का संदेश

राजीव ठक्कर के मुताबिक, अगर आपने किसी फंड को उसकी लंबी अवधि की रणनीति को देखकर चुना है, तो शॉर्ट टर्म में कमजोर रिटर्न मिलने पर किसी आसान बहाने की तलाश करने के बजाय धैर्य बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।

उनका मानना है कि मौजूदा अंडरपरफॉर्मेंस का दौर न तो समय के लिहाज से बहुत लंबा है और न ही नुकसान के आंकड़े के हिसाब से कोई अभूतपूर्व घटना है। लंबी अवधि में प्रक्रिया और रिस्क मैनेजमेंट ही निवेशकों के लिए सही वैल्यू जनरेट करता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Retirement Planning: हर महीने चाहिए ₹25,000 की पेंशन? जानें कितना बड़ा होना चाहिए रिटायरमेंट फंड

Retirement Planning Corpus Calculator: रिटायरमेंट के बाद रेगुलर इनकम बनी रहे, यह हर नौकरीपेशा व्यक्ति की सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। अगर आप भी अपने रिटायरमेंट के बाद हर महीने ₹25,000 यानी सालाना ₹3 लाख की पेंशन पाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको कितना बड़ा रिटायरमेंट कॉर्पस बनाना होगा, आइए समझते हैं इसका आसान गणित।

वित्तीय सलाहकारों के मुताबिक, रिटायरमेंट फंड की गणना करते समय आपकी मौजूदा उम्र, रिटायरमेंट की उम्र, अनुमानित लाइफ एक्सपेक्टेंसी और महंगाई दर सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

4% रूल (Rule of 25) से समझिए फंड का गणित

फाइनेंशियल प्लानिंग में 4% रूल का काफी इस्तेमाल किया जाता है। इस नियम के अनुसार, रिटायरमेंट के समय आपके पास जितना फंड होता है, उसका 4% आप पहले साल निकालते हैं और आगे महंगाई के हिसाब से इसे एडजस्ट करते हैं।

सालाना पेंशन की जरूरत: ₹25,000 × 12 महीने = ₹3,00,000

4% रूल के हिसाब से जरूरी कॉर्पस: ₹3,00,000 ÷ 4% (यानी सालाना पेंशन का 25 गुना) = ₹75 लाख

अगर आप आज ही रिटायर हो रहे हैं और बिना महंगाई दर के प्रभाव के सुरक्षित निवेश (जैसे- SWP, SCSS या एन्युटी) से रिटर्न चाहते हैं, तो आपको कम से कम ₹75 लाख से ₹80 लाख का रिटायरमेंट कॉर्पस चाहिए होगा।

महंगाई को जोड़ेंगे तो कितना होगा फंड?

अगर आपकी उम्र अभी 30 साल है और आप 60 साल की उम्र में रिटायर होना चाहते हैं यानी रिटायरमेंट में 30 साल बाकी हैं, तो 6% की औसत महंगाई दर के हिसाब से आज के ₹25,000 की वैल्यू 30 साल बाद काफी बदल जाएगी:

30 साल बाद ₹25,000 की वैल्यू: लगभग ₹1,43,000 प्रति महीने हो जाएगी।

महंगाई एडजस्टेड रिटायरमेंट फंड: 30 साल बाद ₹1.43 लाख प्रति महीने की पेंशन पाने के लिए आपको लगभग ₹3.5 करोड़ से ₹4 करोड़ का फंड तैयार करना होगा।

₹25,000 पेंशन के लिए हर महीने कितनी SIP करनी होगी?

अगर आप 60 साल की उम्र में ₹75 लाख से ₹1 करोड़ का फंड बनाना चाहते हैं, तो आपको अपनी मौजूदा उम्र के हिसाब से म्यूचुअल फंड SIP में निवेश शुरू करना होगा (12% औसत सालाना रिटर्न के अनुमान पर):

अगर आपकी उम्र 25 साल है (35 साल बाकी): आपको हर महीने केवल ₹1,200 से ₹1,500 की SIP से शुरुआत करनी होगी।

अगर आपकी उम्र 35 साल है (25 साल बाकी): आपको हर महीने लगभग ₹4,500 से ₹5,000 की SIP करनी होगी।

अगर आपकी उम्र 45 साल है (15 साल बाकी): आपको हर महीने लगभग ₹16,000 से ₹18,000 की SIP करनी होगी।

रिटायरमेंट के बाद ₹25,000 पेंशन पाने के विकल्प

सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान (SWP): म्यूचुअल फंड के बैलेंस/हाइब्रिड फंड में अपनी एकमुश्त राशि जमा करके आप हर महीने निश्चित ₹25,000 निकाल सकते हैं, जबकि बचा हुआ पैसा फंड में ग्रो करता रहता है।

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS): एनपीएस मैच्योरिटी पर 40% राशि से एन्युटी प्लान खरीदकर आप आजीवन हर महीने निश्चित पेंशन हासिल कर सकते हैं।

सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS): 60 साल की उम्र के बाद सरकार की इस स्कीम में एकमुश्त निवेश कर सुरक्षित तिमाही ब्याज के रूप में पेंशन पा सकते हैं।

कुल मिलाकर रिटायरमेंट प्लानिंग में देरी करना सबसे महंगा पड़ता है। आप जितनी कम उम्र में निवेश शुरू करेंगे, कम्पाउंडिंग के जादू से उतना ही कम मासिक निवेश करके बड़ा रिटायरमेंट फंड आसानी से बना पाएंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SIP Step-Up Magic: हर साल ₹1,000 की मामूली बढ़ोतरी से बनेगा ₹1.18 करोड़ का एक्स्ट्रा फंड! जानिए स्टेप-अप SIP का ये गणित

Step-Up SIP Returns Calculation: म्यूचुअल फंड में निवेश की शुरुआत तो बहुत से लोग करते हैं, लेकिन सालों-साल अपनी SIP की रकम को बढ़ाना भूल जाते हैं। अगर आप अपनी मासिक एसआईपी में हर साल सिर्फ ₹1,000 का स्टेप-अप करते हैं, तो 25 वर्षों में आपके पास फिक्स्ड एसआईपी के मुकाबले ₹1.18 करोड़ का अतिरिक्त फंड तैयार हो सकता है।

व्हाइटओक कैपिटल के एक ताजा विश्लेषण में यह सामने आया है कि कैसे आमदनी बढ़ने के साथ निवेश में की गई छोटी-सी सालाना बढ़ोतरी लंबी अवधि में आपकी वेल्थ को कई गुना बढ़ा सकती है।

फिक्स्ड SIP बनाम स्टेप-अप SIP: जानिए आंकड़ों का खेल

अगर आप हर महीने ₹10,000 की फिक्स्ड एसआईपी करते हैं और उसमें कभी बदलाव नहीं करते, तो 25 साल बाद आपका फंड और रिटर्न इस प्रकार होगा:

फिक्स्ड ₹10,000 SIP: 25 साल में आपकी जेब से कुल ₹30 लाख का निवेश होगा, जो बढ़कर लगभग ₹2.30 करोड़ हो जाएगा।

₹1,000 टॉप-अप SIP: अगर आप ₹10,000 से शुरुआत कर हर साल ₹1,000 बढ़ाते हैं, तो कुल निवेश ₹66 लाख होगा, लेकिन आपका फाइनल फंड बढ़कर ₹3.49 करोड़ पहुंच जाएगा।

नेट फायदा: मात्र ₹1,000 की सालाना बढ़ोतरी से आपको ₹1.18 करोड़ का अतिरिक्त रिटर्न मिलेगा।

कैसे काम करता है ₹1,000 सालाना टॉप-अप?

इस फॉर्मूले में आपको एक बार में कोई बड़ा निवेश नहीं करना होता, बल्कि अपनी बढ़ती सैलरी के साथ इसे थोड़ा-थोड़ा बढ़ाना होता है:

  • पहले साल: ₹10,000 हर महीने
  • दूसरे साल: ₹11,000 हर महीने
  • तीसरे साल: ₹12,000 हर महीने
  • 25वें साल तक: आपकी मासिक SIP ₹34,000 हो जाएगी।

शुरुआत में कम, लेकिन आखिरी सालों में दिखता है कंपाउंडिंग का असली जादू

स्टेप-अप एसआईपी का असली फायदा समय बीतने के साथ तेजी से सामने आता है. आइए देखें कि फिक्स्ड और टॉप-अप SIP का अंतर सालों के साथ कैसे चौड़ा होता जाता है:

  • 5 साल बाद: दोनों के बीच अंतर केवल ₹1.25 लाख होता है।
  • 10 साल बाद: अतिरिक्त वेल्थ बढ़कर ₹7.38 लाख हो जाती है।
  • 15 साल बाद: फायदा बढ़कर ₹22.59 लाख पहुंच जाता है।
  • 20 साल बाद: अंतर ₹53.47 लाख तक पहुंच जाता है।
  • 25 साल बाद: यह अंतर ₹1 करोड़ का आंकड़ा पार करते हुए ₹1.18 करोड़ हो जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि निवेशक ने 25 साल में कुल एक्स्ट्रा ₹36 लाख ही जमा किए, लेकिन उसे फाइनल वेल्थ में ₹1.18 करोड़ का फायदा मिला। यानी अतिरिक्त मिले ₹1.18 करोड़ में से ₹82.48 लाख सिर्फ और सिर्फ चक्रवृद्धि ब्याज से आए हैं।

टॉप-अप SIP का XIRR थोड़ा कम क्यों दिखता है?

अक्सर निवेशक यह देखकर हैरान हो जाते हैं कि टॉप-अप SIP का XIRR (13.34%) फिक्स्ड SIP (13.81%) से थोड़ा कम दिखता है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि रिटर्न कम मिल रहा है। टॉप-अप एसआईपी में आपकी बड़ी रकम निवेश के आखिरी सालों में जमा होती है, जिससे उस अतिरिक्त रकम को कंपाउंड होने के लिए समय कम मिलता है। लेकिन क्योंकि आपका कुल निवेश किया गया मूलधन काफी बड़ा होता है, इसलिए अंत में मिलने वाला फंड काफी बड़ा हो जाता है।

इन्वेस्टर्स के लिए टेक-अवे

जैसे-जैसे हमारी आमदनी और महंगाई बढ़ती है, हमारे खर्चे तो बढ़ जाते हैं लेकिन हम SIP बढ़ाना भूल जाते हैं। ‘स्टेप-अप एसआईपी’ आपके निवेश को आपकी इनकम के साथ ऑटोमेटिकली सिंक कर देता है। अगर आप भी अपनी संपत्ति तेजी से बनाना चाहते हैं, तो आज ही अपनी चालू SIP में सालाना स्टेप-अप का विकल्प जरूर चुनें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।