Yogini Ekadashi Vrat 2026: कब है योगिनी एकादशी व्रत? इस दिन धन का मार्ग खोलने और कष्टों से मुक्ति के लिए जरूर करें ये आसान उपाय

Yogini Ekadashi Vrat 2026: हिंदू धर्म एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। इसे भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। हर माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे हिंदू वर्ष में 24 एकादशी व्रत करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इनमें से एक है योगिनी एकादशी का व्रत। यह एकादशी व्रत हर साल आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विशेष पूजा-अर्चना और व्रत करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। योगिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से धन लाभ और कष्टों से मुक्ति मिल सकती है। आइए जानें इसके बारे में

योगिनी एकादशी व्रत और पारण की तारीख

एकादशी तिथि प्रारंभ : 10 जुलाई 2026, शुक्रवार को सुबह 08:10 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 11 जुलाई 2026, शनिवार को सुबह 05:23 बजे तक

व्रत पारण का समय (11 जुलाई): दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच

योगिनी एकादशी के दिन करें ये 3 उपाय

विष्णु जी का पूजन करें : योगिनी एकादशी के दिन माता लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से जीवन में धन लाभ के योग बन सकते हैं। इस उपाय से श्री हरि की संपूर्ण कृपा दृष्टि बनी रहेगी। इस एकादशी के दिन व्रत का पालन करना और ज्यादा फलदायी हो सकता है। इस दिन व्रत करके फलाहार करें और विष्णु जी को भोग में पीले फल अथवा पीली मिठाई अर्पित करें।

जरूरतमंदों को धन का दान : योगिनी एकादशी के दिन किसी जरूरतमंद को धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन आप प्रातः जल्दी उठकर स्नान आदि से मुक्त हो जाएं और विष्णु जी का पूजन करने के बाद किसी गरीब व्यक्ति को अन्न-धन दान स्वरूप दें। इस दिन पीले वस्त्रों का दान भी बहुत शुभ हो सकता है। इस उपाय से सभी बाधाएं दूर होंगी और जीवन में कभी भी अन्न और धन की कमी नहीं होगी।

तुलसी की पूजा : तुलसी के पौधे को विष्णु प्रिया के रूप में पूजा जाता है। योगिनी एकादशी के दिन तुलसी की पूजा विधि-विधान से करने पर भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की कृपा दृष्टि भी बनी रहेगी। लेकिन इस दिन तुलसी में भूलकर भी जल अर्पित न करें।

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Guru Purnima 2026: गुरु को समर्पित होती है साल की ये पूर्णिमा तिथि, जानें गुरु पूर्णिमा की सही तारीख, मुहूर्त और महत्व

Guru Purnima 2026: हिंदी कैलेंडर में पूरे साल में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं। पूर्णिमा तिथि माता लक्ष्मी को समर्पित है, लेकिन इस दिन भगवान सत्यनारायण और चंद्र देव की भी पूजा की जाती है। पूरे साल में आने वाली सभी पूर्णिमा तिथियों में आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि गुरु को समर्पित की गई है। इस दिन अपने आराध्य के साथ-साथ गुरु का भी सम्मान करने की प्राचीन परंपरा है। यह दिन पूरे देश में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, गुरु पूर्णिमा आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो आमतौर पर जून और जुलाई के बीच आती है। यह त्योहार भारत, नेपाल और भूटान में हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के लोग मनाते हैं। हिंदू अपने गुरुओं की पूजा करते हैं, बौद्ध इसे भगवान बुद्ध को समर्पित करते हैं। वहीं, जैन धर्म के अनुयायी अपने आध्यात्मिक गुरुओं का सम्मान करते हैं।

गुरु पूर्णिमा 2026 कब है?

गुरु पूर्णिमा बुधवार, 29 जुलाई, 2026 को है

पूर्णिमा तिथि शुरू – 28 जुलाई, 2026 को शाम 06:18 बजे

पूर्णिमा तिथि खत्म – 29 जुलाई, 2026 को रात 08:05 बजे

गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि यह महाभारत के रचयिता और वेदों को इकट्ठा करने वाले महर्षि वेद व्यास की जयंती है। इससे इस मौके का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व और बढ़ जाता है।

गुरु पूर्णिमा कैसे मनाई जाती है?

गुरु पूर्णिमा को बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठें और घर की साफ-सफाई करें, स्नान करके साफ कपड़े पहनें, अपने माता-पिता और बड़ों का आशीर्वाद लें और सूर्य भगवान को जल यानी अर्घ्य अर्पित करें। इस दिन भक्त मंदिरों, आश्रमों और मठों में आशीर्वाद लेने जाते हैं। कई लोग व्रत भी रखते हैं और अपने गुरुओं को समर्पित भजन और श्लोक पढ़ते हैं।

गुरु पूर्णिमा पूजा विधि

सबसे पहले भगवान गणेश की पूजा करें, क्योंकि वे ज्ञान और बुद्धि के देवता हैं। अगर, आपने किसी गुरु से दीक्षा ली है, तो गुरु मंत्र का जाप करें। अपने आध्यात्मिक या जीवन के गुरु से मिलकर उनका आशीर्वाद लें।

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

ॐ वक्रतुंड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ, निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा…

गुरु पूर्णिमा का महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा का दिन बहुत शुभ माना जाता है, इस दिन लोग भगवान विष्णु और चंद्र देव की पूजा करते हैं। साल में 12 पूर्णिमा आती हैं, लेकिन गुरु पूर्णिमा खास है, क्योंकि यह दिन गुरु के सम्मान के लिए समर्पित होता है।

Yogini Ekadashi 2026 Date: ये होगी आषाढ़ मास की पहली एकादशी, जानें योगिनी एकादशी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

Yogini Ekadashi 2026 Date: ये होगी आषाढ़ मास की पहली एकादशी, जानें योगिनी एकादशी व्रत की तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

Yogini Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दिन सच्च मन से श्री हरि की पूजा करने पर साधक को जीवन के कष्टों से छुटकारा मिलता है और सुख-समृद्धि आती है। हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु को समर्पित व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। हर एकादशी तिथि का अपना महत्व और स्थान होता है।

योगिनी एकादशी 2026 तारीख

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 10 जुलाई शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है। यह 11 जुलाई शनिवार को प्रात: 5 बजकर 22 मिनट तक मान्य रहेगी।

दो दिन होगा योगिनी एकादशी व्रत

11 जुलाई को हरि वासर सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर खत्म हो रहा है, इस वजह से योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जाएगा। 10 जुलाई को गृहस्थ लोग योगिनी एकादशी का व्रत रहेंगे, वहीं 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग यह व्रत रखेंगे।

योगिनी एकादशी 2026 मुहूर्त

10 जुलाई को योगिनी एकादशी की पूजा सुबह 08:16 बजे से 10 बजकर 42 मिनट तक कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 07:15 ए एम से 08:59 ए एम तक है, वहीं अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 08:59 ए एम से 10:42 ए एम तक रहेगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:10 ए एम से 04:50 ए एम है, वहीं अभिजीत मुहूर्त 11:59 ए एम से दोपहर 12:54 पी एम तक है।

योगिनी एकादशी 2026 शुभ योग

योगिनी एकादशी व्रत पर 10 जुलाई धृति योग सुबह 07:15 ए एम तक है, उसके बाद शूल योग है, जो 11 जुलाई को 03:51 ए एम तक रहेगा। फिर गण्ड योग बनेगा। व्रत के दिन भरणी नक्षत्र दोपहर 01:15 पी एम तक है, उसके बाद से कृत्तिका नक्षत्र है।

योगिनी एकादशी पर रहेगा भद्रा का साया

10 जुलाई को भद्रा काल प्रात:काल में 05:31 बजे से प्रारंभ होगा और सुबह 08:16 ए एम तक रहेगी। यह भद्रा 2 घंटे से अधिक समय तक है, लेकिन इसका वास स्वर्ग में है, ऐसे में इसका कोई अशुभ प्रभाव धरती पर नहीं होगा।

योगिनी एकादशी 2026 पारण समय

यदि आप 10 जुलाई को योगिनी एकादशी व्रत रखते हैं, तो व्रत का पारण 11 जुलाई को दोपहर 01:50 पी एम से शाम 04:36 पी एम के बीच कर सकते हैं। वहीं जो लोग 11 जुलाई को यह व्रत रखेंगे, वे पारण 12 जुलाई को प्रात: 05:32 ए एम से लेकर सुबह 08:18 ए एम के बीच कर सकते हैं।

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Sawan 2026: अभी से कर लें नोट भगवान शिव का प्रिय माह सावन इस दिन से होगा शुरू, इस माह में आएंगे सावन के 4 सोमवार

Sawan 2026: हिंदी कैलेंडर का पांचवा महीना सावन का होता है। मानसून जब पीक पर पहुंचता है, तब इस मौसम की शुरुआत होती है। चारों तरफ हरियाली और बोल बम के नारों की गूंज होती है। हिंदू धर्म में सावन का महीना आध्यात्मिक और धार्मिक रूप से बहुत अहम माना जाता है। माना जाता है कि यह महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में माता पार्वती के साथ भगवान शिव की पूजा विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है।

सावन महीने के सोमवार विशेष महत्व रखते हैं। यूं तो पूरा सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित है, लेकिन सोमवार के दिन शिवालयों में भक्तों का उत्साह देखते ही बनता है। भोलेनाथ की भक्ति में लीन श्रद्धालु पूरे माह व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और कांवड़ यात्रा जैसी धार्मिक गतिविधियां आयोजित करते हैं। ऐसे में सावन 2026 का इंतजार कर रहे शिव भक्तों के लिए अच्छी खबर है कि अब ये पवित्र महीना बहुत दूर नहीं है। आइए जानें ये कब से शुरू होगा और इसमें कितने सोमवार आएंगे।

कब से शुरू होगा सावन 2026

लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान पुजारी शुभम तिवारी ने बताया कि उत्तर भारतीय पंचांग के अनुसार सावन माह की शुरुआत 30 जुलाई 2026, गुरुवार से होगी और इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को होगा। मान्यता है कि इस पूरे महीने भगवान शिव की सच्चे मन से की गई भक्ति भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है और जीवन में सुख-समृद्धि लाती है।

4 सोमवार और 4 मंगला गौरी व्रत

सावन 2026 में चार सोमवार और चार मंगला गौरी व्रत पड़ रहे हैं, जिससे भक्तों को भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के कई विशेष अवसर मिलेंगे। यदि आप भी सावन में व्रत, पूजा या जलाभिषेक करने की योजना बना रहे हैं, तो अभी से इसकी तैयारी शुरू कर सकते हैं।

सावन 2026 के 4 सोमवार

सावन के दौरान सोमवार का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन माना जाता है। इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र तथा धतूरा अर्पित करने से विशेष फल प्राप्त होता है। साल 2026 में सावन के कुल चार सोमवार पड़ेंगे।

पहला सावन सोमवार : 3 अगस्त

दूसरा सावन सोमवार : 10 अगस्त

तीसरा सावन सोमवार : 17 अगस्त

चौथा सावन सोमवार : 24 अगस्त

4 मंगला गौरी व्रत

महिलाओं के लिए सावन में मंगला गौरी व्रत का भी विशेष महत्व बताया गया है। यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है और विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि और पति की लंबी आयु के लिए इसे रखती हैं। अविवाहित कन्याएं यह व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने की कामना से करती हैं। सावन 2026 में मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त, 11 अगस्त, 18 अगस्त और 25 अगस्त को रखा जाएगा। इन दिनों माता गौरी की पूजा का विशेष विधान रहेगा।

Nirjala Ekadashi Vrat Paran 2026: आज इस विधि से करें निर्जला एकादशी व्रत का पारण, जानें एकादशी व्रत पारण शुभ समय कब से कब तक है

Nirjala Ekadashi Vrat Paran 2026: आज इस विधि से करें निर्जला एकादशी व्रत का पारण, जानें एकादशी व्रत पारण शुभ समय कब से कब तक है

Nirjala Ekadashi Vrat Paran 2026: निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इसके बाद इस व्रत का पारण द्वादशी तिथि में शुभ मुहूर्त में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करने से उसका पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख-शांति आती है। निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन और महत्वपूर्ण व्रतों में से एक माना जाता है। इस व्रत का पारण 26 जून, शुक्रवार को किया जाएगा। पारण का सटीक समय और इसकी संपूर्ण विधि नीचे दी गई है :

निर्जला एकादशी 2026: पारण का शुभ समय

धार्मिक पंचांग के अनुसार, द्वादशी तिथि पर पारण करने का सबसे उत्तम मुहूर्त इस प्रकार है :

पारण की तारीख : 26 जून 2026, शुक्रवार

शुभ मुहूर्त : सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे तक

एकादशी व्रत का पारण हमेशा सूर्योदय के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर ही कर लेना चाहिए। हरि वासर के दौरान व्रत खोलना वर्जित होता है, इसलिए सुबह 5:25 के बाद का यह समय पूरी तरह शुद्ध और शुभ है।

व्रत पारण की संपूर्ण विधि

निर्जला एकादशी के व्रत का फल तभी पूर्ण मिलता है जब इसका पारण पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ किया जाए। इसकी विधि नीचे दी गई है :

सुबह जल्दी उठें और स्नान करें : पारण के दिन (26 जून) सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो पीले रंग के) धारण करें।

पूजा और आरती : घर के मंदिर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले फूल, फल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करते हुए विष्णु जी की आरती करें।

तुलसी दल और भोग : भगवान विष्णु को भोग लगाते समय उसमें तुलसी का पत्ता जरूर रखें, क्योंकि तुलसी के बिना नारायण भोग स्वीकार नहीं करते।

दान-पुण्य : चूंकि यह ज्येष्ठ मास की एकादशी है, इसलिए पारण से पहले ब्राह्मणों या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान देना बेहद फलदायी माना जाता है। इस दिन पानी से भरा घड़ा (कलश), कलश के ऊपर खरबूजा या आम, पंखा, छतरी, वस्त्र और दक्षिणा दान करना बहुत शुभ होता है।

व्रत कैसे खोलें : दान करने के बाद भगवान का चरणामृत लेकर या मुख में तुलसी का पत्ता और थोड़ा सा जल डालकर अपने व्रत का पारण करें। इसके बाद ही सात्विक भोजन ग्रहण करें। भोजन में प्याज, लहसुन या चावल का प्रयोग न करें।

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Nirjala Ekadashi 2026: आज निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती पर बन रहे 5 शुभ संयोग, आज इन 5 चीजों का दान माना जाता है सबसे शुभ

Nirjala Ekadashi 2026: आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का व्रत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्र माता भी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन प्रकट हुई थीं। इसलिए हर साल इस दिन गायत्री जयंती का पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से पाप मिटते हैं, मोक्ष के साथ सालभर की सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य लाभ मिलता है। इस व्रत में जल और अन्न का सेवन नहीं करते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पांडु पुत्र भीम ने सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत किया था, इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस साल निर्जला एकादशी और गायत्री जयंती के मौके पर 5 बेहद शुभ संयोग बन रहे हैं। इस दिन गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में गोचर कर रहे हैं और हंस महापुरुष राजयोग का निर्माण कर रहे हैं। माना जा रहा है कि यह शुभ योग 200 साल बाद बना है।

निर्जला एकादशी 2026 मुहूर्त

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का प्रारंभ : 24 जून, शाम 06:12 बजे से

ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का समापन : 25 जून, रात 08:09 बजे पर

निर्जला एकादशी पूजा मुहूर्त : सुबह 05:25 बजे से 07:10 बजे तक, 10:39 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक

निर्जला एकादशी पारण समय : 26 जून, सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे तक

द्वादशी का समापन : 26 जून, रात 10:22 बजे

निर्जला एकादशी पर बन रहे 5 शुभ और दुर्लभ महासंयोग

निर्जला एकादशी पर इस बार ज्योतिषीय गणना के अनुसार 5 बेहद शुभ और दुर्लभ महासंयोग बन रहे हैं। इन शुभ योगों की वजह से इस दिन की गई पूजा, व्रत और दान का महत्व कई गुना बढ़ गया है।

हंस राजयोग : इस बार ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण कुंडली में हंस महापुरुष राजयोग जैसे बड़े और शुभ राजयोग का निर्माण हो रहा है। यह योग जातकों के जीवन में सुख, वैभव और भाग्य की वृद्धि करने वाला माना जाता है।

शिव योग : पंचांग के अनुसार, इस दिन शिव योग का निर्माण हो रहा है, जो सुबह से शुरू होकर पूरे दिन प्रभावी रहेगा। शिव योग को साधना, मंत्र जाप और धार्मिक कार्यों के लिए बेहद मंगलकारी माना जाता है। इसमें किए गए कार्यों से मानसिक शांति मिलती है।

सिद्ध योग : शिव योग के साथ ही इस दिन सिद्ध योग भी बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में सिद्ध योग को बेहद शुभ माना गया है। इस योग में शुरू किया गया कोई भी कार्य या किया गया व्रत-अनुष्ठान निश्चित रूप से सफलता और सिद्धि प्रदान करता है।

रवि योग : 25 जून को सूर्योदय से लेकर दोपहर तक रवि योग का प्रभाव रहेगा। रवि योग को सभी प्रकार के दोषों को नष्ट करने वाला और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने वाला माना जाता है। इस योग में पूजा करने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

लक्ष्मी नारायण राजयोग : निर्जला एकादशी के दिन कर्क राशि में बुध और शुक्र ग्रह गोचर कर रहे हैं, जिससे लक्ष्मी नारायण राजयोग का निर्माण हो रहा है। यह योग कुछ विशेष राशियों के लिए भाग्य बदलने वाला साबित होगा।

आज इन 5 चीजों का दान माना जाता है बेहद शुभ

जल से भरा घड़ा : ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में प्यासे लोगों को राहत देने के उद्देश्य से जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। यह दान जीवन में शांति और पुण्य प्रदान करने वाला माना जाता है।

सत्तू का दान : निर्जला एकादशी पर सत्तू का दान विशेष फलदायी बताया गया है। गर्मी के मौसम में सत्तू शरीर को शीतलता प्रदान करता है और जरूरतमंदों की सहायता का माध्यम बनता है।

गुड़ का दान : धार्मिक ग्रंथों में गुड़ दान को सुख-समृद्धि और शुभ फल देने वाला माना गया है। निर्जला एकादशी के दिन गुड़ दान करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

छाता और पंखा : भीषण गर्मी से राहत दिलाने वाली वस्तुओं जैसे छाता और हाथ का पंखा दान करना भी इस दिन अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह दान सेवा और परोपकार का प्रतीक माना जाता है।

वस्त्र और अन्न : गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र, फल और अन्न का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इससे जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत आज, व्रत के संपूर्ण फल के लिए पूजा में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: निर्जला एकादशी व्रत आज, व्रत के संपूर्ण फल के लिए पूजा में जरूर पढ़ें ये व्रत कथा

Nirjala Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत सभी एकादशी व्रतों में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के भक्त बिना और जल के श्री हरि की भक्ति में लीन रहते हैं। हर साल निर्जला एकादशी का यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की संपूर्ण विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए और कथा कहनी या सुननी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे दिन व्रत करने के बावजूद एकादशी व्रत की कथा नहीं सुनने पर व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त नहीं हो पाता है। इसलिए श्री हरि के सभी भक्तों के लिए निर्जला एकादशी की ये व्रत कथा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

निर्जला एकादशी व्रत तारख और मुहूर्त

इस साल ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जून को शाम 6:12 बजे से लेकर 25 जून को रात 8:09 बजे तक है। 25 जून को प्रात:काल में स्नान आदि करके व्रत और पूजा का संकल्प करें। निर्जला एकादशी पर विष्णु पूजा शुभ-उत्तम मुहूर्त 05:25 ए एम से 07:10 ए एम के बीच कर सकते हैं।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

निर्जला एकादशीकी व्रत कथा के अनुसार, एक बार भीम ने व्यास जी से कहा कि उनकी मां कुंती और अन्य 4 भाई व्रत, स्नान, दान, पुण्य आदि करते हैं, लेकिन वे उपवास नहीं करते हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो उनको मोक्ष कैसे प्राप्त होगा? उन्होंने जब वेद व्यास जी को अपनी चिंता बताई तो व्रत न रखने का कारण भी बताया। उन्होंने कहा कि वे बिना भोजन के नहीं रख सकते हैं क्योंकि उनको भूख बहुत लगती है।

इस पर व्यास जी ने कहा कि तुमको हर मास की दोनों एकादशी का व्रत रखना चाहिए। तब भीम ने कहा कि उनके पेट में वृक नामक आग है, जो भोजन से ही शांत होती है। उसे शांत करने के लिए दिनभर में कई बार भोजन करना पड़ता है। ऐसे व्रत रखना कैसे संभव है?

उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर व्यास जी से निवेदन किया कि आप कोई ऐसा व्रत बता दें, जिसे सालभर में एक बार ही करना हो और उससे सभी पाप खत्म हो जाएं। व्यास जी ने कहा कि साल भर में 24 एकादशी व्रत होते हैं, जिसमें भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। ये बातें सुनकर भीम और चिंतित हो गए कि वे बिना भोजन 24 एकादशी व्रत कैसे करेंगे। क्या वे पाप मुक्त नहीं हो पाएंगे, उनको मोक्ष नहीं मिलेगा? उन्होंने व्यास जी से मुक्ति का मार्ग पूछा, लेकिन यह भी कहा कि वे साल की सभी एकादशी का उपवास नहीं कर सकते हैं। कोई एक ऐसा व्रत बताएं, जो एक ही बार करने से मोक्ष की प्राप्ति हो।

इस पर व्यास जी ने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी का व्रत एक मात्र ऐसा व्रत है, जो साल में एक बार पड़ता है, इसे निर्जला एकादशी कहते हैं। इस व्रत में न जल पीना है और न ही अन्न ग्रहण करना है। यदि गलती से भी जल ग्रहण कर लिया तो व्रत टूट जाएगा, निष्फल हो जाएगा, उसका कोई पुण्य लाभ नहीं मिलेगा। निर्जला एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी के सूर्योदय तक अन्न और जल ग्रहण नहीं करते हैं। द्वादशी को सूर्योदय के बाद दान-पुण्य करें और पारण करके व्रत को पूरा करें। जो यह व्रत इस नियम और विधि से करता है, उसे साल की सभी 24 एकादशी व्रतों का पुण्य मिलता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

यह सुनकर भीम प्रसन्न हो गए कि साल में केवल निर्जला एकादशी का व्रत करके मोक्ष पाया जा सकता है। जब निर्जला एकादशी का व्रत आया तो भीम ने विधि विधान से व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की। द्वादशी को दान के बाद पारण किया और व्रत पूरा किया। इससे उन पर श्रीहरि की कृपा हुई और उनके पाप मिट गए, उनको स्वर्ग की प्राप्ति हुई।

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Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी व्रत की तारीख पर कंफ्यूजन करें दूर, जानें क्यों माना जाता है इसे पूरे साल में श्रेष्ठ एकादशी व्रत

Nirjala Ekadashi 2026 Date: निर्जला एकादशी के व्रत में भगवान विष्णु के भक्त व्रत करते हैं और इसके लिए वे पूरे 24 घंटों के लिए अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। इसलिए इसे सबसे कठिन एकादशी व्रत माना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है, जब भीषण गर्मी पड़ती है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। शास्त्रों में निर्जला एकादशी के व्रत को पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशी व्रतों में श्रेष्ठ और पवित्र माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी व्रत को करने से सभी एकादशी व्रतों के बराबर पुण्य फल की प्राप्ति होती है। पद्म पुराण में इस व्रत की महिमा के बारे में बताया गया है। इसके अनुसार, इस दिन पानी के नियम का पालन करने और विष्णुजी की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने वाले भक्त को मेरु पर्वत के समान पापों से भी मुक्ति मिल जाती है और मोक्ष प्राप्त होता है। इस दिन किए स्नान, दान, जप का अक्षय फल मिलता है। आइए जानें इस साल निर्जला एकादशी का व्रत कब है और क्यों इस सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना जाता है?

निर्जला एकादशी 2026 कब है?

पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 24 जून, बुधवार के दिन शाम को 6 बजकर 13 मिनट पर होगा। वहीं, अगले दिन यानी 25 जून, गुरुवार को शाम के समय 8 बजकर 10 मिनट तक एकादशी तिथि व्याप्त रहेगी। इसके उपरांत द्वादशी तिथि का आरंभ होगा। ऐसे में उदया तिथि की गणना के अनुसार, 25 जून को ही निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा।

क्यों श्रेष्ठ माना जाता है निर्जला एकादशी व्रत

पद्म पुराण के अनुसार, एक बार पांचों पांडवों में से भीमसेन ने वेद व्यासजी से पूछा कि मैंने एक भी व्रत नहीं किया है क्योंकि मेरे उदर में वृक नामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती है। जिसके कारण मुझे सदैव भूख महसूस होती है। ऐसे में मुझे कोई ऐसा व्रत बताइए जो केवल एक बार करने से मेरा भी उद्धार हो सके और मुझे स्वर्ग लोक की प्राप्ति हो।

तब व्यासजी ने भीमसेन को ज्येष्ठ मास में पड़ने वाली एकादशी को निर्जल रहकर व्रत करने को कहा। एक ऐसा महीना जो अधिक गर्म होता उसमें निर्जल रहना अत्यंत कठिन है। इसीलिए इस एकादशी के व्रत को अत्यंत कठिन माना जाता है। व्यासजी ने बताया केवल इस एक एकादशी के व्रत को करने से वर्ष भर में पड़ने वाली सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो जाता है।

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Nirjala Ekadashi 2026: इस दिन किया जाएगा निर्जला एकाशी का व्रत, अभी नोट करें पूजा के लिए ये जरूरी व्रत सामग्री

Nirjala Ekadashi 2026: पूरे साल में हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को व्रत किया जाता है। इस तरह साल में 24 एकादशी व्रत होते हैं। इन सभी में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को सबसे अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस एक व्रत को करने से पूरे साल की सभी एकादशी तिथियों का फल मिल जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। एकादशी के दिन श्रद्धा भाव से और विधि-विधान से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फल की प्रप्ति होती है। श्री हरि की कृपा से सभी परेशानियां दूर होती हैं और जीवन सुख-समृद्धि से भर जाता है।

इस साल ज्येष्ठ माह में अधिक मास का दुर्लभ संयोग बना था, जिसका समापन 15 जून 2026 को हुआ है। इसके बाद से शुद्ध ज्येष्ठ माह का शुक्ल पक्ष शुरू हुआ। अब ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाएगा। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि भीम से भी इस एकादशी का व्रत किया था। जैसा कि नाम से ज्ञात होता है कि इस व्रत में भक्त अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग करते हैं। इसलिए इसे साल की सबसे कठिन एकादशी व्रत माना जाता है। इस व्रत में पूजा के लिए कुछ जरूरी सामग्री की आवश्यकता होती है, जिसके बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। आइए जानें निर्जला एकादशी व्रत की तारीख और पूजा सामग्री की लिस्ट।

निर्जला एकादशी 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष एकादशी तिथि का समय इस प्रकार है—

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जून 2026, शाम 06:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जून 2026, रात 08:09 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत : 25 जून 2026 (गुरुवार)

व्रत पारण का समय : 26 जून 2026, सुबह 05:25 बजे से 08:13 बजे के बीच

पूजा सामग्री

मुख्य आवश्यक सामग्री

  • भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर
  • चौकी पर बिछाने के लिए पीला कपड़ा
  • लकड़ी की चौकी
  • अभिषेक और तिलक के लिए
  • गंगाजल
  • कच्चा दूध
  • पंचामृत
  • रोली
  • गोपी चंदन या पीला चंदन

अर्पण हेतु सामग्री

  • तुलसी दल
  • पीले फूल
  • फूलों की माला
  • मौली
  • धूप-दीप के लिए
  • शुद्ध घी
  • मिट्टी या पीतल का दीपक
  • रुई की बत्ती
  • धूपबत्ती
  • माचिस
  • प्रसाद और भोग
  • मौसमी फल
  • मिठाई
  • घर का बना हुआ हलवा

निर्जला एकादशी 2026 पूजा विधि

निर्जला एकादशी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर उसे फूलों से सजाएं। भगवान विष्णु की मूर्ति का शुद्ध जल और पंचामृत से अभिषेक करें तथा उन्हें नए वस्त्र अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाएं, चंदन का तिलक लगाएं और भगवान विष्णु को पीले फूल तथा तुलसी दल अर्पित करें। तुलसी दल एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें। अंत में भगवान की आरती करें और जाने-अनजाने में हुई सभी भूलों के लिए क्षमा याचना करें।

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Nirjala Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो लोग पूरे साल एकादशी का व्रत नहीं कर पाते हैं, वे अगर इस एक एकादशी का व्रत कर लें तो उन्हें सभी 24 एकादशियों के व्रत का फल मिल जाता है। इस एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पांडु पुत्र भीम ने भी इस एकादशी का व्रत किया था।

निर्जला एकादशी का व्रत करने वाले भक्त अन्न के साथ-साथ जल का त्याग भी करते हैं। जैसा कि इस एकादशी का नाम है, यह व्रत निर्जला किया जाता है और इसकी शुरुआत एकादशी तिथि पर सुबह व्रत का संकल्प के साथ होती है। इसके बाद पूरे दिन व्रत करते हैं, रात्रि जागरण करने के बाद अगले दिन हरि वासर के बाद व्रत का पारण करते हैं और उसके बाद अन्न-जल ग्रहण करते हैं। जून के महीने में जब भीषण गर्मी पड़ती है, तब यह व्रत किया जाता है। इसलिए इसे सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इस साल यह व्रत 25 जून को किया जाएगा। इस दिन गुरुवार है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है, साथ ही 3 अन्य शुभ योगों का भी निर्माण हो रहा है।

निर्जला एकादशी व्रत की तारीख

एकादशी तिथि 24 जून की शाम 6:14 बजे से शुरू होकर 25 जून की रात 8:10 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत और पूजा 25 जून को की जाएगी। संयोग से यह व्रत बृहस्पतिवार के दिन पड़ रहा है, जो भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है, जिससे इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है।

एकादशी व्रत पारण

व्रत रखने वाले श्रद्धालु अगले दिन यानी 26 जून 2026 को अपने व्रत का पारण करेंगे। पारण करने के लिए शुभ समय 5 बजकर 25 मिनट से लेकर 8 बजकर 13 मिनट तक है। धार्मिक परंपराओं के मुताबिक, निर्धारित पारणा अवधि के अंदर ही उपवास तोड़ना शुभ मान जाता है।

निर्जला एकादशी पर बन रहे ये तीन शुभ योग

रवि योग : 25 जून सुबह 5:25 से शाम 4:29 बजे तक।

शिव योग : 24 जून सुबह 10:24 से 25 जून सुबह 10:54 बजे तक।

सिद्ध योग : 25 जून सुबह 10:55 से 26 जून सुबह 11:39 बजे तक।

निर्जला एकादशी व्रत पूजा विधि

  • इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है।
  • एकादशी के दिन सुबह स्नान के बाद सर्वप्रथम भगवान विष्णु की विधि विधान से पूजा करें।
  • इसके बाद भगवान का ध्यान करते हुए “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें।
  • इस दिन भक्ति भाव से कथा सुनना और भगवान का कीर्तन करना चाहिए।
  • इस दिन व्रती को चाहिए कि वह जल से कलश भरे व सफेद वस्त्र को उस पर ढककर रखें और उस पर चीनी तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
  • इसके बाद दान, पुण्य आदि कर इस व्रत का विधान पूर्ण होता है।

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