दिल्ली के एक एक्सिडेंट में पैर गंवाने वाली 26 साल की रीना को मिलेगा 2.55 करोड़ का मुआवजा! ट्रिब्यूनल ने सुनाया गजब का फैसला

दिल्ली में एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने 2024 में हुई दुर्घटना में पैर गंवाने वाले महिला उद्यमी के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। इस दुर्घटना में 26 साल की एंटरप्रेन्योर रीना के स्कूटर को एक ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसके बाद घुटने के नीचे उसका बायां पैर कट गया था। दिल्ली की ट्रिबयूनल ने इस मामले में 2.55 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का फैसला किया है।

पीठासीन अधिकारी गुंजन गुप्ता रीना की दावा याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने ट्रक की बीमा कंपनी नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को 22 फरवरी, 2025 से 30 दिनों के अंदर 9% सालाना ब्याज के साथ 2.55 करोड़ रुपये देने का निर्देश दिया। 15 अक्टूबर के अपने आदेश में, ट्रिब्यूनल ने कहा, “इस फैसले के पहले के हिस्से में याचिकाकर्ता की फंक्शनल डिसेबिलिटी को 100% माना गया है। बताई गई डिसेबिलिटी और उससे होने वाली दिक्कतों के साथ, सुधार की कोई संभावना नहीं होने पर, याचिकाकर्ता वैसी जिंदगी नहीं जी पाएगी जैसी वह एक्सीडेंट से पहले जीती थी।”

यह एक्सीडेंट 5 नवंबर, 2024 को पीरागढ़ी चौक पर हुआ था। रीना अपने दो साल के बेटे के साथ पीछे बैठी थी, तभी ट्रक ने स्कूटर को टक्कर मार दी। ट्रक का एक पहिया उसके बाएं पैर पर चढ़ गया, जिसे बाद में काटना पड़ा। उसकी तीन सर्जरी हुईं। बीमा कंपनी ने स्कूटर चलाने वाले को दोषी ठहराया और कहा कि महिला ने हेलमेट नहीं पहना था। ट्रिब्यूनल ने इन बातों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि रैश ड्राइविंग पर रीना की गवाही का कोई जवाब नहीं था। ट्रक का ड्राइवर-कम-मालिक, महिंदर सिंह, ट्रिब्यूनल के सामने पेश नहीं हुआ और उसके खिलाफ एक उल्टा नतीजा निकाला गया।

ट्रिब्यूनल ने भविष्य में कमाने की क्षमता के नुकसान के लिए याचिकाकर्ता रीना को 1.68 करोड़ रुपये का बड़ा हिस्सा अवॉर्ड किया। हालांकि बाएं निचले अंग के लिए विकलांगता 80% सर्टिफाइड थी, ट्रिब्यूनल ने फंक्शनल विकलांगता को 100% माना क्योंकि रीना को अपना कारोबार बंद करना पड़ा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया गया।

घटना के समय याचिकाकर्ता परिवार की महीने की इनकम 58,915 रुपये थी, जिसमें एक होममेकर के तौर पर उसके योगदान के 6,000 रुपये शामिल थे। उसके दो से चार साल के तीन बच्चे हैं। ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिल न होने की वजह से मेडिकल खर्च से मना नहीं किया जा सकता और गलत काम करने वाले को पीड़ित की मेडिक्लेम पॉलिसी का फायदा नहीं मिल सकता। ट्रिब्यूनल ने पीड़ित को अलग-अलग मदों में कुल 2.55 करोड़ रुपये दिए।

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मिलती है सभी पापों से मुक्ति, 21 या 22 अक्टूबर कब है अश्विन एकादशी व्रत

Papankusha Ekadashi 2026: पापांकुशा एकादशी का व्रत करने से मिलती है सभी पापों से मुक्ति, 21 या 22 अक्टूबर कब है अश्विन एकादशी व्रत

Papankusha Ekadashi 2026: हिंदू कैलेंडर में हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। इस दिन भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी व्रत किया जाता है। माना जाता है कि पूरे साल में आने वाले एकादशी व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और उनकी कृपा से वैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है। हर माह की तरह अश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का व्रत भी बेहद महत्वपूर्ण है। इसे पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखकर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। माना जाता है कि एकादशी व्रत में विष्णु सहस्रनाम और भगवद्गीता का पाठ करने से सुख-शांति की प्राप्ति होती है। आइए जानें इस साल पापांकुशा एकादशी का व्रत 21 या 22 अक्टूबर किस दिन किया जाएगा?

कब है पापांकुशा एकादशी का व्रत?

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज ने नेटवर्क 18 को बताया कि अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी। इसका समापन 22 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा।

सभी पापों से मिलती है मुक्ति

पापांकुशा एकादशी व्रत में भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पद्म पुराण और भागवत पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत करने से मनुष्य के सभी जाने-अनजाने पाप नष्ट हो जाते हैं और भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत खास तौर पर उन लोगों के लिए फलदायक माना गया है जो आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और जीवन के अंतिम लक्ष्य मोक्ष की प्राप्ति की कामना रखते हैं।

एकादशी व्रत में जरूर करें ये कार्य

  • एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि के बाद व्रत संकल्प लें।
  • पूजा में भगवान विष्णु को पीली मिठाई का भोग लगाएं। पीला रंग उनका प्रिय माना जाता है।
  • भगवान विष्णु के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी पूजा करें।
  • इस दिन पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाना भी शुभ माना जाता है।

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Ekadashi October 2026: अक्टूबर में आएंगी इंदिरा और पापांकुशा एकादशी, जानें तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Ekadashi October 2026: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इसे श्री हरि की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय भी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूरे साल में आने वाली 24 एकादशी तिथियों का व्रत करने वाले भक्तों पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा होती है। उनके आशीर्वाद से व्रतियों के सभी कष्ट दूर होते हैं और उन्हें बैकुंठ में स्थान प्राप्त होता है।

हर माह की तरह अश्विन माह में भी दो एकादशी व्रत किए जाते हैं इंदिरा एकादशी और पापांकुशा एकादशी। इस साल यह दोनों उपवास अक्टूबर माह में किए जाएंगे। इंदिरा एकादशी का खास महत्व है क्योंकि यह पितृ पक्ष के दौरान आती है, जब पुरखों के लिए प्रार्थना और पूजा-पाठ किए जाते हैं। यहां इंदिरा एकादशी की तारीखें, तिथि का समय और पारण की जानकारी दी गई है, साथ ही अश्विन में पापांकुशा एकादशी की तारीख भी दी गई है।

इंदिरा एकादशी 

अश्विन कृष्ण पक्ष में पितृ पक्ष मनाया जाता है और यह पुरखों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे रीति-रिवाजों से जुड़ा है। इंदिरा एकादशी इसी समय पड़ती है। माना जाता है कि इंदिरा एकादशी का व्रत रखने से पूर्वजों को मोक्ष मिलता है।

इंदिरा एकादशी 2026 तारीख और समय

इस साल इंदिरा एकादशी 6 अक्टूबर को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे खत्म होगी। हिंदू त्योहारों की तारीखें आमतौर पर सूर्योदय के समय की तिथि से तय होती हैं, इसलिए व्रत 6 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

इंदिरा एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त

वैदिक कैलेंडर के अनुसार, अश्विन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2:07 बजे शुरू होगी और 7 अक्टूबर को रात 12:34 बजे खत्म होगी। भक्त 6 अक्टूबर तक पूरे दिन व्रत रख सकते हैं और दिन में भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।

पंचांग के अनुसार सूर्योदय सुबह 6:17 बजे और सूर्यास्त शाम 6:01 बजे होगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:39 बजे से 5:28 बजे तक रहेगा, जबकि विजय मुहूर्त दोपहर 2:06 बजे से 2:53 बजे तक रहेगा। गोधूलि बेला शाम 6:01 बजे से 6:26 बजे तक और निशिता मुहूर्त रात 11:45 बजे से 12:34 बजे तक रहेगा।

इंदिरा एकादशी 2026 पारण समय

इंदिरा एकादशी का व्रत बुधवार, 7 अक्टूबर को तोड़ा जाएगा। दिए गए समय के अनुसार, भक्त सुबह की रस्में, प्रार्थना और शास्त्रों का पाठ पूरा करने के बाद सुबह 6:17 बजे से 8:38 बजे के बीच पारण कर सकते हैं।

पापांकुशा एकादशी 2026: यह कब मनाई जाएगी?

पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल पक्ष में आती है और गुरुवार, 22 अक्टूबर, 2026 को मनाई जाएगी। एकादशी तिथि 21 अक्टूबर को दोपहर 2:11 बजे शुरू होगी और 22 अक्टूबर को दोपहर 2:47 बजे खत्म होगी। इसलिए व्रत की तारीख 22 अक्टूबर है।

पापांकुशा एकादशी का व्रत रखने वाले भक्तों के लिए, पारण 23 अक्टूबर को किया जाता है। पारण का सही समय जगह के हिसाब से अलग हो सकता है क्योंकि एकादशी मनाने और पारण समय की गणना स्थानीय सूर्योदय और तिथि के हिसाब से होती है।

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Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश भगवान अपने भक्तों के बीच आते हैं और 10 दिन तक रहने के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन वापस लौट जाते हैं। इस बीच भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हो चुका है और 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। इससे पहले 22 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। ऐसे भक्तों में इस बात को लेकर दुविधा रहती है कि परिवर्तनी एकादशी के दिन गणेश भगवान को किस चीज का भोग लगाना चाहिए? बप्पा के प्रिय मोदक चावल के आटे से बनते हैं और एकादशी के दिन चावल तो क्या व्रत करने वाले भक्त कोई उपवास करते हैं। आइए जानें गणपति बप्पा को उस दिन सामान्य मोदक या अनाज से बनी मिठाई का भोग लगाया जाए या नहीं?

गणेश उत्सव के दौरान कब है परिवर्तिनी एकादशी?

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन का मुख्य दिन 25 सितंबर रहेगा। यानी दस दिनों तक गणपति स्थापना रखने वाले घरों और पंडालों में 22 सितंबर को भी बप्पा विराजमान होंगे। पंचांग के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9:43 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह किया जाएगा।

एकादशी के दिन गणपति को क्या भोग लगाएं?

महाराष्ट्र में लोकप्रिय उकड़ीचे मोदक मुख्य रूप से चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं। वहीं कई जगह गेहूं का आटा, मैदा, सूजी या बेसन इस्तेमाल करके भी मोदक बनाए जाते हैं। मगर एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त इस दिन अन्न का सेवन नहीं करते हैं। इसलिए एकादशी व्रत करने वाले भक्त बप्पा को अर्पित इस भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं कर सकते। गणेश भगवान को भोग लोग अपनी परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर अर्पित करते हैं। इसलिए मोदक अर्पित करने को लेकर कोई कठोर नियम नहीं हैं। एकादशी व्रत करने वाले भक्तों के लिए फलाहारी भोग रखना सबसे सरल विकल्प है।

परिवर्तिनी एकादशी पर गणपति को कौन-कौन से भोग लगाएं?

  • केला, सेब, अमरूद और दूसरे मौसमी फल
  • नारियल
  • मखाना
  • काजू, बादाम, अखरोट और दूसरे सूखे मेवे
  • दूध से बनी ऐसी मिठाइयां जिनमें अनाज न हो
  • मावा, नारियल और मेवों से तैयार मोदक
  • मिश्री और सूखे मेवों से बने फलाहारी नैवेद्य
  • नारियल, मावा और ड्राई फ्रूट्स से बिना अनाज वाला मोदक तैयार किया जा सकता है
  • साबूदाना, राजगिरा या सिंघाड़े के आटे से भी मोदक बनाए जा सकते हैं।

एकादशी पर पहले गणपति की पूजा करें या भगवान विष्णु की?

पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से करने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है। इसलिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले गणपति बप्पा का स्मरण और पूजन किया जा सकता है। गणपति को दूर्वा, फूल, फल और फलाहारी नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा कर एकादशी व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, फल और पंचामृत अर्पित करें। एकादशी के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ते हैं। इसलिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना बेहतर माना जाता है।

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Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: योग निद्रा में जब करवट लेंगे भगवान विष्णु तब होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें तारीख और समय

Parivartini Ekadashi 2026 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। श्रीहरि के भक्त इस दिन उपवास करते हैं और विधि-विधान से भगवान की पूजा करते हैं। पूरे साल में हर माह दो एकादशी आती है। इन्हीं में से एक है भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि, जिसे परिवर्तनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह दिन चातुर्मास में विशेष स्थान रखता है, क्योंकि इस समय भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और परिवर्तिनी एकादशी के दिन करवट बदलते हैं। माना जाता है कि हरि कृपा से इस दिन व्रत करने वाले भक्तों के सभी पाप और कष्ट मिट जाते हैं। परिवर्तनी एकादशी का व्रत करने पर वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 21 सितंबर को रात में 8 बजे से प्रारंभ हो रही है। यह तिथि अगले दिन 22 सितंबर को रात 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन पाताल लोक की भद्रा भी रहेगी।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पर रहेगा रवि योग

परिवर्तिनी एकादशी के दिन रवि योग बन रहा है। उस दिन रवि योग सुबह 6 बजकर 9 मिनट पर प्रारंभ होगा और सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव अधिक होने से कोई दोष नहीं रह जाता है। इस दिन रवि योग के अलावा अतिगंड और सुकर्मा योग भी बनेंगे। अतिगंड योग प्रात:काल से शुरू होकर शाम 04 बजकर 29 पी एम तक रहेगा। इसे शुभ योग नहीं मान जाता है, लेकिन अतिगंड योग के बाद सुकर्मा योग प्रारंभ होगा। सुकर्मा योग पूरी रात तक रहेगा। यह एक शुभ योग है, इसमें कोई भी शुभ काम कर सकते हैं। व्रत के दिन उत्तराषाढ़ा नक्षत्र प्रात:काल से सुबह 07:06 ए एम तक है, उसके बाद से श्रवण नक्षत्र प्रांरभ है।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 मुहूर्त

परिवर्तिनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:35 ए एम से 05:22 ए एम के बीच है। इसमें स्नान आदि से निवृत होकर व्रत और पूजा का संकल्प करना उत्तम माना जाता है। पूजा के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 09:11 ए एम से दोपहर 01:45 पी एम के बीच हैं।

एकादशी को लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह में 10:43 ए एम से दोपहर 12:14 पी एम तक है, उसके बाद अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:14 पी एम से 01:45 पी एम तक रहेगा। उस दिन का अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 49 ए एम से लेकर दोपहर 12 बजकर 38 पी एम तक रहेगा।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 पारण

परिवर्तिनी एकादशी व्रत का पारण 23 सितंबर बुधवार को होगा। श्रद्धालु सुबह 06:10 ए एम से लेकर 08:35 ए एम के बीच कभी भी पारण करके व्रत को पूरा कर सकते हैं। उस दिन द्वादशी तिथि का समापन रात में 10 बजकर 50 मिनट पर होगा।

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Aja Ekadashi 2026: 6 या 7 सितंबर, कब किया जाएगा अजा एकादशी का व्रत? नोट करें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Aja Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल मार्ग माना जाता है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। हर एकादशी व्रत का अलग नाम और महत्व होता है। इस दिन बहुत से भक्त फलाहार उपवास करते हैं, तो कुछ निर्जला व्रत भी करते हैं। एकादशी व्रत के नियम दशमी तिथि से लेकर द्वादशी तिथि तक माने जाते हैं। हर माह की तरह भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी या अन्नदा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना के लिए समर्पित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। पौराणिक काल में चक्रवर्ती राजा हरिश्चंद्र ने अपने वचन और सत्य की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण राज्य, पत्नी और पुत्र तक त्याग दिया था। जब वे अत्यंत कष्ट झेल रहे थे, तब महर्षि गौतम के बताए अनुसार उन्होंने अजा एकादशी का निष्काम भाव से व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से उनके सभी पाप नष्ट हो गए, उनका मृत पुत्र जीवित हो गया और उन्हें पुनः अपना खोया हुआ राज्य प्राप्त हुआ।

अजा एकादशी व्रत 2026 की तारीख

अजा एकादशी व्रत तारीख : 7 सितंबर 2026 (सोमवार)

एकादशी तिथि प्रारंभ : 6 सितंबर 2026, शाम 07:29/07:30 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 7 सितंबर 2026, शाम 05:03/05:05 बजे तक

व्रत पारण समय : 8 सितंबर 2026, सुबह 06:02 से 08:33 बजे तक

अजा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त: 04:52 AM से 05:38 AM तक

प्रातः सन्ध्या: 05:15 AM से 06:25 AM तक

अभिजित मुहूर्त: 12:12 PM से 01:01 PM तक

गोधूलि मुहूर्त: 06:48 PM से 07:11 PM तक

अमृत काल: 03:59 PM से 05:29 PM तक

सायाह्न सन्ध्या: 06:48 PM से 07:58 PM तक

पूजा विधि

  • ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (विशेष रूप से पीले) पहनकर व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान की सफाई कर पीले कपड़े पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
  • भगवान को पीला चंदन, अक्षत, पीले फूल, फल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। भोग में तुलसी दल (पत्ते) अनिवार्य रूप से शामिल करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें, “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और अंत में आरती करें।
  • अगले दिन द्वादशी को शुभ समय में पूजा और दान-पुण्य के बाद ही व्रत खोलें।

अजा एकादशी व्रत के मुख्य नियम

एकादशी के दिन चावल (अक्षत), तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांसाहार) और शराब का सेवन पूर्णतः वर्जित है।

फलाहार में दूध, फल, मखाने या सेंधा नमक से बनी चीजें ली जा सकती हैं।

इस दिन किसी की निंदा न करें और घर में शांति बनाए रखें।

September Ekadashi Vrat Date: सितंबर में किया जाएगा अजा एकादशी और परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें दोनों की सही तारीख और पारण समय

September Ekadashi Vrat Date: हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह में कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। प्रत्येक माह 2 एकादशी व्रत को देखते हुए साल में कुल 24 एकादशी आती हैं। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है और इस व्रत का श्री हरि की कृपा पाने के सबसे सरल उपायों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि एकादशी व्रत करने से जातक को सुख-समृद्धि मिलने के साथ ही अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है। हर माह की तरह भाद्रपद माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाएगा। आइए जानें सितंबर माह में आने वाले एकादशी व्रत किस दिन किए जाएंगे।

सितंबर 2026 में दो एकादशी व्रत आएंगे

अजा एकादशी : 7 सितंबर 2026, सोमवार, भाद्रपद कृष्ण पक्ष

अजा एकादशी का पारण : 8 सितंबर 2026

परिवर्तिनी एकादशी : 22 सितंबर 2026, मंगलवार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष

परिवर्तिनी एकादशी का पारण : 23 सितंबर 2026

अजा एकादशी व्रत 2026

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अजा एकादशी व्रत किया जाता है। इस दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने का विधान है। इस साल यह व्रत 7 सितंबर 2026 को किया जाएगा। भाद्रपद कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 6 सितंबर 2026 को शाम 07:29 बजे से प्रारंभ होगी और 7 सितंबर 2026 को शाम 05:03 बजे समाप्त होगी। इस व्रत का पारण 8 सितंबर 2026 को सुबह 06:02 से 08:33 के बीच कर सकेंगे।

महत्व और धार्मिक मान्यता

अजा एकादशी का व्रत रखने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज-पाट, परिवार और मान-सम्मान को पुनः प्राप्त करने के लिए महर्षि गौतम के कहने पर यही व्रत किया था।

परिवर्तिनी एकादशी 2026 

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के दौरान योगनिद्रा में लीन भगवान श्री हरि विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए इसे परिवर्तिनी एकादशी कहते हैं। इस साल यह व्रत 22 सितंबर 2026 को किया जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 21 सितंबर 2026 को रात 10:15 बजे से प्रारंभ होकर 22 सितंबर 2026 को रात 08:40 बजे समाप्त होगी। इस व्रत का पारण 23 सितंबर 2026 (बुधवार) को सुबह 06:10 से 08:35 के बीच कर सकते हैं।

महत्व और धार्मिक मान्यता

इस दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य प्राप्त होता है और अनजाने में हुए सभी पाप मिट जाते हैं।

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Aja Ekadashi 2026 Date: भादों की पहली एकादशी होगी अजा एकादशी, इस दिन बन रहे दुर्लभ संयोग में पूजा और व्रत का मिलेगा राजसुख

Aja Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हर हिंदू माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से सभी कष्टों का निवारण होता है। ऐसा ही एक व्रत है अजा एकादशी का भी। यह व्रत भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। यह भादों माह की पहली एकादशी होती है। यह भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है। सनातन धर्म में इस एकादशी का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है। आइए जानें इस साल ये व्रत कब किया जाएगा, किस दुर्लभ योग में पूजा और व्रत करने से मिलेगा राजसुख और इसका महत्व क्या है?

अजा एकादशी 2026 तारीख

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 6 सितंबर को शाम 07:29 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर को शाम 5 बजकर 3 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर अजा एकादशी का व्रत 7 सितंबर दिन सोमवार को रखा जाएगा। इस व्रत का पारण 8 सितंबर मंगलवार को सुबह में 6 बजकर 2 मिनट से सुबह 8 बजकर 33 मिनट के बीच कर सकते हैं।

सर्वार्थ सिद्धि योग में अजा एकादशी

इस बार की अजा एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग शाम को 06 बजकर 14 मिनट पर बनेगा और यह अगले दिन 8 सितंबर को सुबह 06 बजकर 02 मिनट तक रहेगा। व्रत वाले दिन प्रात:काल से लेकर सुबह 06:41 ए एम तक व्यतीपात योग है, उसके बाद से वरीयान् योग बनेगा, जो 8 सितंबर को तड़के 03:38 ए एम तक है, फिर परिघ योग होगा।

अजा एकादशी 2026 मुहूर्त

यदि आपको अजा एकादशी का व्रत रखना है तो पूजा का मुहूर्त सुबह में 06:02 ए एम से 07:36 ए एम तक है, उसके बाद सुबह में 09:10 ए एम से 10:45 ए एम तक है। इस समय में आप भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:31 ए एम से 05:16 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:54 ए एम से दोपहर 12:44 पी एम तक है।

अजा एकादशी महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र ने अपने खोए हुए राज्य, परिवार और सम्मान को वापस पाने के लिए महर्षि गौतम के सुझाव पर अजा एकादशी का व्रत किया था। इस व्रत के प्रभाव से उन्हें उनका सब कुछ पुनः प्राप्त हो गया था। माना जाता है कि जो व्यक्ति सच्चे मन से अजा एकादशी का व्रत रखता है और भगवान विष्णु की पूजा करता है, उसके समस्त पाप और पूर्व जन्म के बुरे कर्म नष्ट हो जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से अश्वमेध यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पूजा विधि

  • एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान विष्णु के ऋषिकेश स्वरूप की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें पीले फूल, तुलसी दल, फल, धूप और दीप अर्पित करें।
  • अजा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें।
  • इस दिन गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या तिल का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण किया जाता है।

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: सावन की अंतिम एकादशी का व्रत आज, इस व्रत में जरूर सुनें महिष्मती पुरी के राजा महीजित की ये कथा

Shravan Putrada Ekadashi Vrat Katha: आज श्रावण मास की अंतिम एकादशी पुत्रदा या पवित्रा एकादशी का व्रत है। यह व्रत हर साल श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। पूरे साल में आज वाले सभी एकादशी व्रतों में इसका विशेष स्थान है, क्योंकि यह व्रत संतान के सुखी और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए किया जाता है। साथ ही, नि:संतान दंपति इसे संतान प्राप्ति की कामना से भी करते हैं। हिंदू धर्म में यह अकेला ऐसा एकादशी व्रत है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार सावन में और फिर पौष के महीने में। पुत्रदा एकादशी हिंदू धर्म में भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है। इस दिन भगवान विष्णु और उनके कृष्ण रूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। इस साल सावन पुत्रदा एकादशी पर मूल नक्षत्र के साथ सिद्धि योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवियोग का संयोग बन रहा है।

एकादशी तिथि रात 3:56 बजे तक

एकादशी की तिथि रात 3:56 बजे तक रहेगी। इस दिन चर-लाभ-अमृत मुहूर्त सुबह 7:03 बजे से 11:52 बजे तक रहेगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 11:26 बजे से 12:18 बजे तक रहेगा। इसके अलावा शुभ योग मुहूर्त दोपहर 1:28 बजे से 3:04 बजे तक रहेगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत कथा

द्वापर युग में महिष्मती पुरी के राजा महीजित अत्यंत धर्मात्मा, दानवीर और प्रजापालक थे। उनके राज्य में प्रजा हर तरह से सुख-समृद्धि से परिपूर्ण थी, लेकिन राजा महीजित की कोई संतान नहीं थी। संतान न होने के कारण राजा और उनकी पत्नी अत्यंत दुःखी और चिंतित रहते थे।

जब राजा वृद्धावस्था की ओर बढ़ने लगे, तो उन्होंने राज्य के ऋषि-मुनियों और पंडितों को बुलाकर अपनी इस व्यथा का समाधान मांगा। उन्होंने ऋषियों से कहा, “मैंने जीवन में कभी कोई अधर्म नहीं किया, प्रजा को पुत्र समान माना, फिर भी मुझे संतान सुख क्यों नहीं मिला?”

राजा की व्यथा सुनकर सभी ऋषि-मुनि जंगल में लोमश ऋषि के आश्रम पहुंचे। लोमश ऋषि परम ज्ञानी और त्रिकालदर्शी थे। ऋषियों के निवेदन पर लोमश ऋषि ने ध्यान लगाकर राजा के पूर्व जन्म का वृत्तांत देखा और बताया कि राजा महीजित पूर्व जन्म में एक निर्धन वैश्य थे। एक बार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को वे दो दिनों से भूखे-प्यासे भटक रहे थे।

रास्ते में एक जलाशय देखकर वे पानी पीने पहुंचे। उसी समय एक प्यासी गाय भी वहां पानी पीने आई। वैश्य ने उस गाय को हटाकर स्वयं पहले पानी पी लिया। अनजाने में एकादशी के दिन प्यासी गाय को जल से वंचित करने के कारण उन्हें इस जन्म में राजा बनने का सुख तो मिला, परंतु संतानहीन रहने का श्राप भी मिला।

ऋषि लोमश ने इस पाप के निवारण का उपाय बताते हुए कहा कि यदि राजा और उनकी प्रजा श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विधिवत व्रत रखें और उसका पुण्य फल राजा को अर्पित करें, तो उन्हें निश्चित ही संतान की प्राप्ति होगी।

राजा महीजित, उनकी पत्नी और समस्त प्रजाजनों ने ऋषियों के बताए अनुसार श्रावण पुत्रदा एकादशी का निष्ठापूर्वक व्रत रखा और उसका संपूर्ण पुण्य राजा को दे दिया। इस व्रत के प्रभाव से रानी गर्भवती हुईं और समय आने पर उन्होंने एक सुंदर, तेजस्वी तथा योग्य पुत्र को जन्म दिया। तभी से इस एकादशी का नाम ‘पुत्रदा एकादशी’ पड़ा।

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

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