Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशयनी एकादशी व्रत 24 या 25 जुलाई 2026 कब किया जाएगा? जानें तारीख, पूजा विधि और मुहूर्त

Devshayani Ekadashi Vrat 2026: देवशनी एकादशी का व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के आनुसार, इस दिन से सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु चाह माह की योगनिद्र में पाताल लोक चले जाते हैं और चतुर्मास आरंभ हो जाता है। इस अवधि में विवाह, मुंडन, जनेऊ, गृह प्रवेश आदि शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। श्री हरि सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी तक योग निद्रा में लीन रहते हैं। इस दौरान सृष्टि का कामकाज भगवान शिव के पास रहता है।

हिंदू धर्म में देवशयनी एकादशी का विशेष स्थान है। इसे साल की कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण एकादशी तिथियों में से एक माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन को बड़ी श्रद्धा और विधि-विधान से मनाते हैं। आइए जानें इस साल देव शयनी एकादशी तिथि का व्रत किस दिन किया जाएगा।

कब है हरिशयनी एकादशी?

साल 2026 में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी या हरिशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026, शनिवार को किया जाएगा। चूंकि उदयातिथि 25 जुलाई को मिल रही है, इसलिए वैष्णव और सामान्य श्रद्धालु दोनों ही इस दिन व्रत रखेंगे। इसी दिन से चातुर्मास की शुरुआत होगी और अगले 4 महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे।

देवशयनी एकादशी 2026 तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि की शुरुआत और समाप्ति का समय इस प्रकार है :

एकादशी तिथि प्रारंभ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक

उदयातिथि के अनुसार व्रत की तारीख : 25 जुलाई 2026 (शनिवार)

अभिजीत मुहूर्त (पूजा के लिए श्रेष्ठ): दोपहर 12:19 PM से 01:11 PM तक

व्रत पारण का समय : 26 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:39 AM से 08:22 AM के बीच।

देवशयनी एकादशी 2026 पूजा विधि

देवशयनी एकादशी के दिन भगवान श्री हरि विष्णु योग निद्रा में जाते हैं। इस दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है :

सुबह की तैयारी : एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या पीले रंग के वस्त्र धारण करें।

व्रत का संकल्प : मंदिर के सामने हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।

पूजा स्थापना : भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।

सामग्री अर्पित करें : भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।

तुलसी दल : भगवान विष्णु को तुलसी दल अत्यंत प्रिय हैं, उन्हें भोग में तुलसी जरूर शामिल करें। लेकिन ध्यान रखें, एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें।

मंत्र और कथा : भगवान विष्णु के मंत्र “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें और देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।

शयन कराना : पूजा के अंत में भगवान विष्णु को एक सुंदर छोटे गद्दे और तकिये वाले बिस्तर पर प्रतीकात्मक रूप से सुलाया जाता है यानी योग निद्रा में भेजा जाता है।

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Yogini Ekadashi 2026 Upay: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि सभी तिथियों अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकदशी व्रत किया जाता है। इनमें से ही एक है योगिनी एकादशी, जो आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। आज किया जा रहा योगिनी का व्रत सभी पापों का शमन करने वाला है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत करने वाले भक्तों को 88000 ब्रह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है। माना जाता है कि इस दिन तुलसी के पौधे के कुछ उपाय करना शुभ होता है। इससे लक्ष्मीनारायण की कृपा से जीवन में पैसा और तरक्की आती है। दुख, तकलीफें और दरिद्रता दूर हो जाते हैं।

ये हैं तुलसी से करें 5 उपाय

तुलसी मंजरी से विष्णु जी का अभिषेक : एकादशी के दिन कच्चे दूध में तुलसी की मंजरी मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से लक्ष्मी-नारायण कृपा प्राप्त होती है और सुख-संपत्ति में वृद्धि होती है।

तुलसी माता को श्रृंगार का सामान : एकादशी के दिन तुलसी माता को लाल चुनरी और सुहाग सामग्री अर्पित करनी चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

विष्णु जी की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग : इस दिन भगवान विष्णु को भोग लगाते समय तुलसी का पत्ता रखें। कहते हैं कि ऐसा करने से भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा से धन-धान्य बढ़ता है। मगर, एकादशी के दिन तुलसी स्पर्श नहीं करना चाहिए और न ही तोड़ना चाहिए। एक दिन पहले तोड़े हुए तुलसी दल या जमीन पर पड़ी पत्तियों का प्रयोग करना चाहिए।

तुलसी माता के नामों का जाप : करियर या व्यापार में आ रही अड़चनों से मुक्ति पाने के लिए तुलसी माता के 8 नामों (मों वृंदा, विश्वपूजिता, पुष्पसारा, वृंदानी, विश्वपावनी, नंदिनी, कृष्णजीवनी और तुलसी) का एकादशी के दिन कम से कम 108 बार जाप करना चाहिए। मान्यता है कि तुलसी माता के नामों का जाप करने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर पर उनका वास होता है।

तुलसी के पास जलाएं दीपक : एकादशी की शाम को तुलसी के सामने घी का दीपक जलाना चाहिए। दीपक जलाते समय ऊं नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। इसके बाद तुलसी की 5,7, 11 या 21 बार परिक्रमा करें। मान्यता है कि ऐसा करने से भाग्य का साथ मिलने के साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

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Yogini Ekadashi 2026 Vrat Katha: हिंदू धर्म हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। योगिनी एकादशी का व्रत भी इनमें से एक है। यह व्रत हर साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस साल योगिनी एकादशी का व्रत 10 जुलाई और 11 जुलाई दो दिन किया जाएगा। 10 जुलाई को श्री हरि के गृहस्थ भक्त योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे, जबकि 11 जुलाई को वैष्णव लोग व्रत रहेंगे। व्रत के दिन पूजा के समय व्रती को योगिनी एकादशी व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए। इससे स्वर्ग की प्राप्ति होती है और 80 हजार ब्राह्मणों को भोज कराने के बराबर पुण्य लाभ मिलता है।

अलकापुरी के राजा और हेममाली की कथा

योगिनी एकादशी की व्रत कथा भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी। स्वर्ण नगरी अलकापुरी में धनपति कुबेर राजा करते थे। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और रोज उनकी पूजा के लिए मानसरोवर से सुंदर और ताजे फूल लाने का कार्य हेममाली नाम का एक यक्ष करता था।

हेममाली की पत्नी का नाम विशालाक्षी था, जो अत्यंत रूपवान थी और हेममाली उससे अगाध प्रेम करता था। एक दिन हेममाली रोज की तरह मानसरोवर से शिव पूजा के लिए पुष्प लेकर आया, लेकिन महल जाने के बजाय वह अपनी पत्नी के पास घर पर ही रुक गया। पत्नी के साथ आमोद-प्रमोद में व्यस्त हेममाली को समय का भान ही नहीं रहा। उधर, भगवान शिव की पूजा के लिए फूलों का इंतजार करते रहे। जब बहुत देर हो गई, तो राजा ने क्रोध में आकर अपने सेवकों से हेममाली के बारे में पूछा।

सेवकों ने पता लगाकर राजा को बताया, “महाराज! हेममाली अपनी पत्नी के प्रेम में अंधा होकर अपने घर पर ही रुक गया है और वहीं रमण कर रहा है।” यह सुनकर राजा कुबेर अत्यंत क्रोधित हो गए और उन्होंने तुरंत हेममाली को दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया। डर से कांपता हुआ हेममाली राजा के सामने उपस्थित हुआ। क्रोधित कुबेर ने उससे कहा, “अरे पापी! तूने मेरे परम आराध्य देवों के देव महादेव की पूजा का अनादर किया है। तू कर्तव्यच्युत हुआ है, इसलिए मैं तुझे श्राप देता हूं कि तू स्त्री के वियोग को भोगेगा और मृत्युलोक (पृथ्वी) पर जाकर कोढ़ी (कुष्ठ रोगी) हो जाएगा।”

राजा कुबेर के श्राप के प्रभाव से हेममाली उसी क्षण स्वर्ग से पृथ्वी पर गिर पड़ा। उसका सुंदर शरीर कुष्ठ रोग से ग्रसित हो गया और उसकी त्वचा गलने लगी। उसकी पत्नी भी उससे बिछड़ गई। वह पृथ्वी पर भूख, प्यास और भयंकर शारीरिक पीड़ा से तड़पता हुआ जंगलों में भटकने लगा। शिव पूजा के प्रभाव के कारण उसकी याददाश्त नष्ट नहीं हुई थी, इसलिए वह अपने पाप पर निरंतर पश्चाताप करता रहता था।

घूमते-घूमते एक दिन वह हिमालय पर्वत पर मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम पहुंचा। हेममाली की दयनीय स्थिति देखकर ऋषि मार्कण्डेय ने दयापूर्वक उससे पूछा, “तुमने ऐसा कौन सा घोर पाप किया है, जिसके कारण तुम्हारी यह दुर्दशा हुई है?” हेममाली ने रोते हुए अपनी पूरी कहानी और राजा कुबेर के श्राप के बारे में ऋषि को सच-सच बता दिया। उसने कहा, “हे मुनिवर! मैंने अज्ञानता और काम के वश में आकर भूल की है। कृपया मुझ पर कृपा करें और इस कष्ट से मुक्ति का कोई उपाय बताएं।”

ऋषि मार्कण्डेय ने कहा, “तुमने मेरे सामने सच बोला है, इसलिए मैं तुम्हें एक उपाय बताता हूँ। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की ‘योगिनी एकादशी’ का व्रत करो। इस व्रत के पुण्य प्रभाव से तुम्हारे सभी पाप नष्ट हो जाएंगे और तुम पुनः अपने पुराने स्वरूप को प्राप्त कर लोगे।”

हेममाली ने विधि-विधान और निष्ठा के साथ योगिनी एकादशी का व्रत रखा और रात्रि जागरण किया। इस व्रत के प्रभाव से हेममाली का कुष्ठ रोग पूरी तरह ठीक हो गया। वह पहले की तरह अत्यंत सुंदर और दिव्य स्वरूप वाला हो गया। इसके बाद वह वापस अलकापुरी लौट गया और अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ पुनः सुखपूर्वक रहने लगा।

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Yogini Ekadashi 2026: 10 या 11 जुलाई कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत? जानें सही तारीख और पूजा का शुभ मुहूर्त

Yogini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है। हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है और उनके सभी दुख तकलीफें भगवान की कृपा से दूर हो जाती हैं। ऐसा ही एक व्रत है योगिनी एकादशी का, जो आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। पद्म पुराण में बताया गया है कि इस व्रत का फल 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के समान पुण्य देता है। इस साल योगिनी एकादशी व्रत का संयोग दो दिन, 10 और 11 जुलाई को पड़ रहा है। 10 जुलाई को एकादशी तिथि सूर्योदय के बाद लग रही है, जबकि 11 जुलाई को एकादशी तिथि में सूर्योदय तो हो रहा है, लेकिन यह बहुत जल्दी समाप्त हो जा रही है। इसलिए इस व्रत की तारीख को लेकर भक्तों में कंफ्यूजन है। आइए जानें इसकी सही तारीख

दो दिन होगा योगिनी एकादशी व्रत

पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ 10 जुलाई शुक्रवार को सुबह 8 बजकर 16 मिनट पर हो रहा है। यह 11 जुलाई शनिवार को प्रात: 5 बजकर 22 मिनट तक मान्य रहेगी। 11 जुलाई को हरि वासर सुबह 10 बजकर 32 मिनट पर खत्म हो रहा है, इस वजह से योगिनी एकादशी का व्रत दो दिन रखा जाएगा। 10 जुलाई को गृहस्थ लोग योगिनी एकादशी का व्रत रहेंगे, वहीं 11 जुलाई को वैष्णव संप्रदाय के लोग यह व्रत रखेंगे।

योगिनी एकादशी 2026 पूजा का मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त (पूजन के लिए): सुबह 04:54 बजे से सुबह 05:26 बजे तक

अभिजित मुहूर्त: दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:28 बजे तक

पारण का समय

शास्त्रों के नियमों के अनुसार, एकादशी व्रत का पारण हरि वासर समाप्त होने के बाद और द्वादशी तिथि के भीतर किया जाता है।

10 जुलाई को व्रत रखने वालों के लिए पारण समय : 11 जुलाई 2026 (शनिवार) को दोपहर 01:50 बजे से शाम 04:36 बजे के बीच। इस दिन सुबह 10:32 बजे तक हरि वासर रहेगा, इसलिए पारण दोपहर के इस शुभ समय में करना श्रेष्ठ है।

11 जुलाई को व्रत रखने वालों के लिए पारण समय : 12 जुलाई 2026 (रविवार) को सुबह 05:32 बजे से सुबह 08:18 बजे के बीच।

Yogini Ekadashi 2026 Date: योगिनी एकादशी पर त्रिपुष्कर योग के साथ रहेगा भरिणी नक्षत्र, जानें कब किया जाएगा योगिनी एकादशी का व्रत

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Yogini Ekadashi 2026 Date: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि श्री हरि भगवान विष्णु को समर्पित है। माना जाता है कि पूरे साल में आने वाली सभी 24 एकादशी का व्रत करने वाले भक्तों के भगवान विष्णु के आशीर्वाद से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। योगिनी एकादशी का व्रत भी इनमें से एक है। यह व्रत आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है।

यह व्रत बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस एकादशी का व्रत रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। यह व्रत भक्तों को रोग, दरिद्रता, दुख व कलंक से दूर करता है। इस अवसर पर ठाकुरजी का आकर्षक शृंगार, विशेष पूजन, भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण का आयोजन किया जाएगा।

कब है योगिनी एकादशी?

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 8.16 बजे से एकादशी तिथि शुरू होगी। एकादशी तिथि 11 जुलाई को सुबह 5:00 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गृहस्थजन 10 जुलाई को ही योगिनी एकादशी का व्रत रखेंगे। व्रती अगले दिन द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के बाद पारण करेंगे।

त्रिपुष्कर योग और भरिणी नक्षत्र का शुभ संयोग

इस बार योगिनी एकादशी के दिन भरणी नक्षत्र और त्रिपुष्कर योग का संयोग बन रहा है। यह संयोग भगवान विष्णु की पूजा के लिए बहुत खास माना जाता है। इसमें भगवान विष्णु की पूजा करने से श्रीहरि प्रसन्न होते हैं और सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

योगिनी एकादशी पूजा विधि

योगिनी एकादशी व्रत के दिन प्रात:काल गंगा स्नान करें या घर में नहाने के पाने में गंगा जल मिला कर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। भगवान सूर्य को जल अर्पित करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद एक चौकी पर मां लक्ष्मी और विष्णु जी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। प्रतिमाओं को शंख से स्नान करवाकर उन्हें मंजरी युक्त तुलसी अर्पित करें। ध्यान रहे तुलसी एकादशी के दिन न तोड़ें, इससे एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें। एकादशी व्रत के दिन पीपल के पेड़ पर दीपक जलाना चाहिए और इस दिन तुलसी की पूजा भी की जाती है। इस व्रत में चावल नहीं खाया जाता है। चावल से श्रीहरि की पूजा भी नहीं की जाती है।

Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ शुक्ल एकादशी को होगा देवशयनी एकादशी व्रत और शुरू होंगे चतुर्मास, जानें क्या है और क्यों लगता है चतुर्मास

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Devshayani Ekadashi 2026: आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी का व्रत किया जाता है। हिंदू धर्म में इस तिथि का खास महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस संसार के संचालक भगवान विष्णु इस दिन से चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इसे देवशयनी या हरिशयनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन के बाद से चतुर्मास शुरू होते हैं और अगले चार माह तक मांगलिक कार्य रुक जाते हैं। यानी इस दौरान शादी, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्यो के मुहूर्त नहीं होते। चतुर्मास देवशयनी एकादशी से लेकर देवउठनी एकादशी तक की अवधि को कहा जाता है। आइए जानें इस साल हरिशयनी एकादशी कब है और इसका धार्मिक/आध्यात्मिक महत्व क्या है?

कब है देवशयनी एकादशी 2026?

देवशयनी एकादशी : शनिवार, 25 जुलाई, 2026

देवशयनी एकादशी तिथि का प्रारम्भ : 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे

एकादशी तिथि समाप्त : 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे

व्रत पारण का समय : 26 जुलाई, सुबह 05:39 बजे से सुबह 08:22 बजे तक

26 जुलाई 2026 द्वादशी समापन : दोपहर 01:57 बजे

देवशयनी एकादशी 2026: धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

देवशयनी एकादशी के बाद से चतुर्मास प्रारंभ होता है। देवशयनी एकादशी तिथि और चतुर्मास का बहुत गहरा धर्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक महत्व है। इसे समझने के लिए आइए जानें ये 3 कारण

श्री हरि ने दिया था दानवीर राजा बलि को वचन

वामन अवतार में भगवान विष्णु ने दानवीर दैत्यराज बली से तीन पग में तीनों लोक नाप लिए थे। तब बली की दानवीरता से प्रसन्न होकर उन्होंने बली को पाताल लोक का राजा बना दिया और खुद भी उसके साथ पाताल चलने का वचन दे दिया। इससे चिंतित माता लक्ष्मी ने राजा बली को रक्षासूत्र (राखी) बांधकर उनसे उपहार स्वरूप भगवान विष्णु को मांग लिया। लेकिन भगवान विष्णु अपने भक्त बली को निराश नहीं करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने बली को वरदान दिया कि वे हर साल आषाढ़ शुक्ल एकादशी यानी देवशयनी एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी अर्थात् देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल लोक में रहकर राजा बली के महल का पहरा देंगे। इसी समय को भगवान विष्णु का शयनकाल माना जाता है।

चतुर्मास का वैज्ञानिक और प्राकृतिक कारण

चातुर्मास का आरंभ आषाढ़ महीने के अंत में होता है, जब बारिश का मौसम होता है। बारिश के कारण हवा और पानी में कई संक्रामक बीमारियां तेजी से पनपती हैं। हमारी पाचन शक्ति भी इस दौरान कमजोर हो जाती है। इस मौसम में नदियां भी उफान पर होती हैं और रास्ते बंद हो जाते हैं। इसलिए पहले के समय में साधु-संतों और लोगों को एक ही स्थान पर रुककर ईश्वर भक्ति करने की सलाह दी गई, ताकि वे सुरक्षित रह सकें।

मांगलिक कार्यों पर रोक का कारण

माना जाता है कि चतुर्मास में ब्रह्मांडीय ऊर्जा और मौसम में काफी बदलाव होते हैं। सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु का प्रभाव इस दौरान आंतरिक साधना की ओर मुड़ जाता है, इसलिए शादी, मुंडन, गृह प्रवेश आदि मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं।

August 2026 eclipse: अगस्त में 15 दिनों के अंतर पर लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं, तारीख और सूतक काल

August 2026 eclipse: अगस्त में 15 दिनों के अंतर पर लगेंगे सूर्य और चंद्र ग्रहण, जानें भारत में दिखेगा या नहीं, तारीख और सूतक काल

August 2026 eclipse: इस साल का अगला महीना अगस्त का होगा, जो दो बड़ी खगोल घटनाओं का गवाह बनेगा। इस माह में साल 2026 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण लगेगा। ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जो सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के एक सीधी रेखा में आ जाने पर लगता है। लेकिन यह धार्मिक और ज्योतिष रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण 15 दिनों के अंतराल पर लगेंगे। यह खगोलीय घटना सावन के महीने लगने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

सूर्य ग्रहण जहां 12 अगस्त 2026 को हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण 28 अगस्त को सावन पूर्णिमा पर रक्षा बंधन के दिन लगेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के दौरान सूतक काल लग जाता है और इस दौरान पूजा-पाठ और शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। सूतक काल खत्म होने के बाद ही दोबारा मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ आदि धार्मिक कार्य शुरू होते हैं। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण का असर सभी 12 राशियों पर पड़ता है और विशेषज्ञ ग्रहण के प्रभावों का अध्ययन करते हैं।

अगस्त 2026 में दूसरा सूर्य ग्रहण

साल 2026 का दूसरा और आखिरी सू्र्य ग्रहण 12 अगस्त सावन अमावस्या के मौके पर लगेगा। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन भारत में नहीं दिखाई देगा। इसलिए भारत में इसका सूतक काल नहीं माना जाएगा।

अगस्त 2026 में दूसरा चंद्र ग्रहण

अगस्त 2026 में साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण, श्रावण मास की पूर्णिमा पर 28 अगस्त 2026 को लगेगा। इस दिन भारत में रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सूर्य ग्रहण की तरह चंद्र ग्रहण भी भारत में दिखाई नहीं देगा। इस वजह से इस दिन रक्षाबंधन का त्योहार अप्रभावित रहेगा।

सूतक काल के नियम

सावन के माह में लगने वाले साल के अंतिम सूर्य और चंद्र ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे और इनका सूतक भी नहीं रहेगा। इसलिए इन दोंनों दिनों के पर्व और धार्मिक अनुष्ठानों पर कोई प्रभाव नहीं होगा। हालांकि इसके ज्योतिषीय प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

ग्रहण काल में अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय?

  • सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होने के साथ सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • ग्रहण काल के बाद पूजा-पाठ और इच्छा के अनुसार दान करना चाहिए।
  • ग्रहण काल के बाद नहाना चाहिए और शिवलिंग पर जला अर्पित करना चाहिए।

Yogini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: योगिनी एकादशी व्रत में इन 4 में से एक भी काम किया, तो टूट जाएगा आपका व्रत, जानें योगिनी एकादशी व्रत के नियम और तारीख

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Yogini Ekadashi 2026 Vrat Niyam: योगिनी एकादशी का व्रत आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस व्रत में बहुत से भक्त उपवास करते हैं और कुछ लोग तो सभी 24 एकादशी तिथियों पर निर्जला उपवास भी करते हैं। इस व्रत को भगवान विष्णु की कृपा पाने का सबसे सरल उपाय माना जाता है। माना जाता है कि इस व्रत को करने से श्री हरि और माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी तकलीफें दूर करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और व्यक्ति को अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।

हर हिंदी माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष में एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल साल में 24 एकादशी तिथियां आती हैं। एकादशी व्रत भले भगवान विष्णु को प्रसन्न करने का सबसे सरल मार्ग है, लेकिन इसे करने के नियम बहुत सख्त हैं। इस व्रत की शुरुआत एकादशी तिथि से एक दिन पहले यानी दशमी तिथि से होती है, जबकि इसका समापन द्वादशी तिथि को व्रत पारण के बाद होता है। इस व्रत के कुछ ऐसे नियम भी हैं, जिनका पालन न करने से आपका उपवास खंडित हो सकता है। आइए जानें इनके बारे में

कब है योगिनी एकादशी 2026

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगा। वहीं, इस तिथि का समापन 11 जुलाई को सुबह 05 बजकर 22 मिनट पर होगा। ऐसे में योगिनी एकादशी व्रत 10 जुलाई को किया जाएगा।

भूलकर भी न करें ये काम

  • एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ने से तुलसी माता का व्रत खंडित हो सकता है। इसलिए एकादशी के दिन भूलकर भी तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तुलसी माता एकादशी का व्रत करती हैं।
  • एकादशी के दिन लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि इन चीजों का सेवन करने से व्रत टूट सकता है। साथ ही चावल खाने से बचना चाहिए।
  • एकादशी व्रत में नमक का पूरी तरह से त्याग कर देना चाहिए। व्रत के समय सेंधा नमक का ही सेवन करना चाहिए। सामान्य नमक खाने से व्रत टूट सकता है।
  • एकादशी के दिन किसी से लड़ाई-झगड़ा करना या फिर बातचीत के दौरान किसी को अपशब्द नहीं बोलना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस तरह की गलती को करने से व्रत का फल क्षीण हो जाता है।

Ashadh Pradosh Vrat 2026 upay: आषाढ़ माह का पहला प्रदोष व्रत होगा कब, इस दिन खास उपाय करने वालों के घर जल्द बजेगी शादी की शहनाई

Chaturmas 2026: 25 जुलाई को योग निद्रा में जाएंगे श्री हरि, मगर दिवाली तक चांदी काटेंगे 5 राशि के जातक

Chaturmas 2026: आषाढ़ का महीना 5 राशियों के जातकों के लिए बहुत शुभ संदेश लेकर आया है। ज्योतिषविदों का कहना है कि आषाढ़ से शुरू होने वाले चतुर्मास की अवधि पांच राशियों के लिए बहुत शुभ मानी जा रही है। इस माह में इन जातकों के जीवन में नई खुशियों का संचार होगा और धनधान्य की स्थिति बेहतर होगी। आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवशयनी एकादशी व्रत किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान 4 माह के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद वह कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। इस दिन देवउठानी एकादशी मनाई जाती है। यह लगभग 4 महीने का समय होता है। इस साल चातुर्मास 25 जुलाई से लेकर 20 नवंबर तक रहने वाला है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, यह समय 5 राशियों के लिए बहुत शुभ रहेगा। आइए जानें कौन सी हैं ये राशियां

वृष राशि : चातुर्मास की अवधि आपके लिए आर्थिक मजबूती का आधार बन सकती है। पिछले कुछ समय से अटके हुए कार्य गति पकड़ेंगे। नौकरीपेशा लोगों की जिम्मेदारियां बढ़ने के साथ प्रतिष्ठा भी बढ़ेगी। परिवार का सहयोग रहेगा। धन संचय के लिए भी यह समय अनुकूल रहेगा।

कर्क राशि : चार महीनों में आपको नौकरी में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और व्यापार में नए संपर्क लाभ पहुंचा सकते हैं। छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी यह समय उत्साहजनक रहेगा। आत्मविश्वास बढ़ेगा और रुके हुए काम पूरे होने लगेंगे।

तुला राशि : यह चार महीने रिश्तों और करियर दोनों के लिए सकारात्मक संकेत दे सकते हैं। आर्थिक स्थिति में सुधार के नए रास्ते खुल सकते हैं। इस समय में साझेदारी में काम करने वालों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। इस राशि के जातकों की सामाजिक प्रतिष्ठा भी बढ़ सकती है।

धनु राशि : भाग्य का संतुलन इस अवधि में आपके पक्ष में रहेगा। करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और धार्मिक तथा आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए यह समय अनुकूल रहेगा। विदेश से जुड़े कार्यों में भी सकारात्मक परिणाम मिलने की संभावना है।

मीन राशि : परिवार में खुशियों का माहौल बनेगा और करियर में नई संभावनाएं बनेंगी। रचनात्मक कार्यों में सफलता मिल सकती है। आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर होगी और भविष्य की योजनाओं पर आत्मविश्वास के साथ काम कर पाएंगे। व्यापार में लाभ बढ़ेगा और कारोबार में विस्तार होगा।

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Panchak 2026: जुलाई में ये 10 दिन होंगे भारी, दो बार लग रहे पंचक की जानें सही तारीख और नियम

Panchak 2026: जुलाई 2026 का महीना धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस महीने में हिंदी माह आषाढ़ रहेगा और इसमें कई प्रमुख व्रत और पर्व आएंगे। इसके अलावा इस माह में दो बार पंचक का संयोग भी बनेगा। हिंदू धमें में कुछ ऐसे दिन बताए गए हैं, जब कोई भी शुभ काम नहीं किया जाता है। इनमें से एक है पंचक, जो पांच दिनों तक रहता है। ज्योतिष के अनुसार, चंद्रमा जब कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हुए धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र में रहता है तो उसे पंचक कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जुलाई 2026 के महीने में दो बार पंचक लग रहा है। जुलाई 2026 में पंचक की सही तारीखें, समय और इसके नियम नीचे दिए गए हैं :

जुलाई 2026 में पंचक की तिथियां

पहला पंचक (मृत्यु पंचक): 04 जुलाई 2026, शनिवार से प्रारंभ होकर 08 जुलाई 2026, बुधवार तक रहेगा। इस पंचक की शुरुआत शनिवार से होने के कारण इसे ‘मृत्यु पंचक’ कहा जाता है। ज्योतिष में इसे बेहद संवेदनशील और अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

दूसरा पंचक (चोर पंचक): 31 जुलाई 2026, शुक्रवार को प्रारंभ होकर अगले महीने यानि 04 अगस्त 2026 को समाप्त होगा। यह पंचक शुक्रवार से शुरू होगा, इसलिए ये ‘चोर पंचक’ कहा जाता है। इस दौरान धन हानि या चोरी का खतरा रहता है।

पंचक में ये न करें

शास्त्रों के अनुसार पंचक के दौरान 5 कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान किए गए गलत काम का प्रभाव 5 गुना बढ़ जाता है:

  • पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है।
  • पंचक काल में मकान का लेंटर या छत डलवाने का काम पूरी तरह वर्जित होता है। ऐसा करने से धन हानि और घर में अशांति हो सकती है।
  • इन 5 दिनों में घर के निर्माण के लिए लकड़ी खरीदना, काटना या घास-फूस और ईंधन इकट्ठा करना अशुभ माना जाता है। इससे आग का भय रहता है।
  • पंचक के दौरान नया पलंग, चारपाई बनाना या खरीदना शास्त्रों में मना है।
  • यदि पंचक काल में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो शव के अंतिम संस्कार के समय किसी योग्य पंडित की सलाह पर पांच कुश (घास) या आटे के पुतले बनाकर साथ में जलाने का विधान है, ताकि पंचक दोष शांत हो सके।

दिन के अनुसार तय होता है पंचक का नाम

पंचक कुल पांच प्रकार का होता है और इसका नाम दिन के अनुसार तय होता है। ज्योतिष के अनुसार, रविवार के दिन शुरू होने वाला पंचक रोग पंचक कहलाता है। इसी तरह सोमवार से लग रहा पंचक राज पंचक, मंगलवार को शुरू होने वाला अग्नि पंचक, शुक्रवार से प्रारंभ होने वाला रोग पंचक और शनिवार को प्रारंभ होने वाला मृत्यु पंचक कहलाता है।

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