Devshayani Ekadashi 2026: हिंदू धर्म एकादशी तिथि को अत्यंत महत्वपर्णू माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित है और माना जाता है कि यह व्रत करने वाले भक्तों पर सदैव श्री हरि की कृपा बनी रहती है। हिंदी महीनों के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को यह व्रत किया जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी के बाद अब शुक्ल पक्ष का देवशयनी या हरिशयनी एकादशी व्रत आने वाला है। इस तिथि को हिंदू धर्म में बहुत खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु इस दिन से चार माह की योग निद्रा में चले जाते हैं। इसके बाद से चतुर्मास शुरू हो जाता है और मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। इसे हम आषाढ़ी एकादशी, देवशयनी एकादशी, हरिशयनी या पद्मनाभा एकादशी के नाम से जानते हैं।
हरिशयनी एकादशी 2026: तिथि, मुहूर्त और पारण का समय
एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जुलाई 2026 को सुबह 09:12 बजे से
एकादशी तिथि का समापन: 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:34 बजे तक।
अभिजीत मुहूर्त (पूजा का श्रेष्ठ समय): दोपहर 12:19 बजे से दोपहर 01:11 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:17 बजे से शाम 07:39 बजे तक।
व्रत पारण का समय: 26 जुलाई 2026 को सुबह 06:13 बजे से सुबह 08:50 बजे के बीच।
देवशयनी एकादशी पर इस विधि से कराएं श्री हरि को शयन
चूंकि इस दिन के बाद भगवान चार महीनों के लिए विश्राम करने जाते हैं, इसलिए उनका शयन प्रारंभ होने से ठीक पहले पूरे विधि-विधान से विदाई-पूजन करने का बड़ा महत्व है।
- देवशयनी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं।
- इसके बाद अपने घर के मंदिर की साफ-सफाई करें।
- एक पवित्र चौकी पर भगवान विष्णु की सुंदर प्रतिमा या तस्वीर को आसन देकर विराजमान करें।
- भगवान नारायण को पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें।
- उन्हें पीला चंदन लगाएं, पीले फूल चढ़ाएं और तुलसी दल (जो एक दिन पहले तोड़ा गया हो) अर्पित करें।
- भगवान के हाथों में शंख, चक्र, गदा और पद्म सुशोभित करें।
- इसके बाद प्रभु को पान और सुपारी भेंट करें।
- धूप-दीप जलाकर श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु की आरती उतारें।
- सामर्थ अनुसार ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।
- इसके बाद ही स्वयं फलाहार या व्रत का सात्विक भोजन ग्रहण करें।
- देवशयनी एकादशी की रात को भगवान के भजनों और स्तुति का कीर्तन करना चाहिए।
- अंत में, स्वयं के सोने से पहले प्रभु को प्रतीकात्मक रूप से विश्राम (शयन) कराएं।
पूजा में करें इस मंत्र का जाप
पूजा में भगवान को शयन कराने के लिए इस विशेष मंत्र का जाप करें।
‘सुप्ते त्वयि जगन्नाथ जमत्सुप्तं भवेदिदम्।
विबुद्धे त्वयि बुद्धं च जगत्सर्व चराचरम्।।’
मंत्र का अर्थ: हे संपूर्ण जगत के स्वामी! आपके सो जाने पर यह पूरा संसार सो जाता है और आपके जाग जाने पर ही यह संपूर्ण सृष्टि तथा समस्त चराचर जीव जाग उठते हैं।


