Shani Pradosh Vrat 2026: शनि प्रदोष व्रत का सभी प्रदोष यानी त्रयोदशी व्रत में अहम स्थान है। शनि देव को भगवान शिव का भक्त माना जाता है। शनिवार के दिन त्रयोदशी तिथि पड़ने पर भगवान शिव के साथ-साथ शनि देव की कृपा पाने का दुर्लभ संयोग बनता है। इस साल ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि शनि प्रदोष व्रत किया जाएगा।
हिंदू कैलेंडर के हर माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है। इस दिन भक्त प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-उपासना करते हैं। इसलिए इस तिथि के व्रत को प्रदोष व्रत कहते हैं। यह तिथि जिस दिन पड़ती है उसके अनुसार व्रत का नाम होता है। जैसे ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी तिथि शनिवार 27 जून को पड़ रही है, इसलिए यह शनि प्रदोष व्रत होगा। इस दिन शनि देव को प्रसन्न करने के लिए यहां बताए जा रहे 5 उपाय करने से शनि दोष शांत होगा और उनका आशीर्वाद मिलेगा।
शनि प्रदोष व्रत के दिन करें ये उपाय
- शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित लोगों को ‘दशरथकृत शनि स्तोत्र’ का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
- शनि प्रदोष व्रत के दिन प्रदोष काल में भगवान शिव का जल में काले तिल मिलाकर जलाभिषेक करना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से भगवान शिव के साथ शनिदेव प्रसन्न होते हैं।
- पूजा के समय भगवान शिव को बेलपत्र, शमी के पत्ते और चंदन अर्पित करने से शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
- शनि मंदिर में या पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
- शनि प्रदोष के दिन हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए। मान्यता है कि इससे शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
इन राशियों के लिए खास है शनि प्रदोष व्रत
कर्म फलदाता शनि इस समय मीन राशि के गोचर में हैं। शनि के मीन राशि में होने से मेष, कुंभ और मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है, जबकि सिंह और धनु राशि पर शनि ढैय्या चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के दौरान व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक तौर पर परेशानी का सामना करना पड़ता है। मान्यता है कि शनि प्रदोष व्रत के दिन साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित राशियां कुछ उपाय करती हैं, तो उन्हें शनि के अशुभ प्रभावों से राहत मिलती है।
