Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी शिवरात्रि? जानिए सही तारीख, पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है। भगवान शिव को समर्पित इस माह में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है शिवरात्रि का पर्व। यूं तो शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, लेकिन सावन के महीने में आने वाले शिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

सावन शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और शिव पूजन करते हैं। इस दिन पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से कई ग्रह दोष भी शांत होते हैं। आइए जानें इस साल सावन शिवरात्रि कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि का पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त 2026, सुबह 04:54 बजे से हो रहा है। सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समापन 12 अगस्त 2026, रात 01:52 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

निशिता काल पूजा मुहूर्त : 11 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक

जलाभिषेक का समय : 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे से लेकर 12 अगस्त रात 01:52 बजे तक

चार प्रहर की पूजा का समय

रात्रि में भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है:

प्रथम प्रहर : शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक

द्वितीय प्रहर : रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक

तृतीय प्रहर : रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक (12 अगस्त)

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा सामग्री

जल, कच्चा दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल, फल और भस्म।

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करें।
  • शिव आरती करें व प्रसाद वितरित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी का फूल, सिंदूर या हल्दी अर्पित न करें।

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