Putrada Ekadashi 2026: कल किया जाएगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें साल में 2 बार क्यों किया जाता है पुत्रदा एकादशी व्रत

Putrada Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में पुत्रदा एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत संतान की सुख-समृद्धि, खुशहाली और अच्छी सेहत के लिए किया जाता है। पूरे साल में आने वाली सभी एकादशी व्रतों में यह अकेला उपवास है, जो साल में दो बार किया जाता है। एक बार श्रावण शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि और फिर पौष शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नि:संतान दंपति इस व्रत को संतान प्राप्ति की कामना से कर सकते हैं। इस एकादशी में भगवान विष्णु की बाल रूप में या श्री कृष्ण की पूजा जाती है।

पुत्रदा एकादशी 2026 में कब?

साल में दो बार पौष और सावन माह में पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाता है। दोनों ही व्रत संतान प्राप्ति या संतान की सुख-शांति के उद्देश्य से रखा जाता है। इस साल श्रावण मास की पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखा जाएगा।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को श्रावण पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। कई हिस्सों में इसे पवित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पापों का नाश करने वाली और पुण्य प्रदान करने वाली एकादशी बताया जाता है। श्रावण मास में इस एकादशी का महत्व इसलिए भी और बढ़ जाता है क्योंकि इस महीने में भगवान शिव की भी पूजा होती है। ऐसे में भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को खास लाभ मिलता है।

साल में 2 बार पुत्रदा एकादशी क्यों?

साल में दो बार पुत्रदा एकादशी व्रत होने का मुख्य कारण यह है कि, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में दोनों ही खास तिथियों का फल संतान प्राप्ति और संतान की सुरक्षा के लिए बताया गया है। दोनों ही एकादशियों का उद्देश्य और फल की समानता होने के कारण ही दोनों को पुत्रदा एकादशी (संतान प्रदान करने वाली) कहा जाता है।

दोनों एकादशियों का अलग-अलग महत्व

श्रावण एकादशी : यह विशेष रूप से संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और संकटों से रक्षा के लिए रखी जाती है।

पौष एकादशी : यह मुख्य रूप से योग्य, ज्ञानी और तेजस्वी संतान की प्राप्ति तथा उसकी उन्नति के लिए मानी जाती है।

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: हिंदू धर्म में पूरे दिन में कुछ विशेष समय को अशुभ माना जाता है। इस समय में कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसा ही एक समय है भद्रा का। हिंदू पौराणिक कथाओं और पंचांग का एक विशेष भाग है। इस समय में रक्षा बंधन का पर्व भी नहीं मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में राखी भी नहीं बांधनी चाहिए। इस साल रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनको तिलक लगाकर मुंह मीठा कराती हैं। साथ ही, उनकी शुभ और मंगल की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और भेंट देकर विदा करते हैं।

इस बार भद्रा का साया नहीं

इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा का साया नहीं रहीं हेगा। भद्रा रक्षा बंधन के दिन सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए भद्रा की अड़चन के बिना पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जा सकेगा।

कौन है भद्रा?

पौराणिक पहचान : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की पुत्री हैं, तथा भगवान शनिदेव की सगी बहन हैं।

स्वभाव : शनिदेव की तरह भद्रा का स्वभाव भी अत्यंत क्रोधी और उग्र माना जाता है। जन्म लेते ही वे यज्ञों और मांगलिक कार्यों में विघ्न डालने लगी थीं।

ज्योतिष/पंचांग में स्थान : उनके उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के 11 करणों में से 7वें करण (विष्टि करण) में स्थान दिया। भद्रा काल एक ऐसा समय होता है जब भद्रा का प्रभाव पृथ्वी पर रहता है।

भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं में भद्रा काल को अशुभ और किसी भी शुभ या नए कार्य के लिए वर्जित माना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :

अशुभ प्रभाव और अनिष्ट की आशंका : भद्रा के दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल नहीं मिलता या वे कार्य निष्फल हो जाते हैं। भाई-बहन का रिश्ता अटूट रहे, इसलिए इस उग्र काल को छोड़कर शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधा जाता है।

पौराणिक कथा : प्रचलित कथा के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी। इसके फलस्वरूप उसी वर्ष रावण के वंश और साम्राज्य का विनाश हो गया। इसी कारण से भद्रा के साये में राखी बांधने से बचा जाता है।

Putrada Ekadashi Date and Muhurat: 23 अगस्त को होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, खास संयोग में पूजा से पूरी होगी संतान की मनोकामना

Putrada Ekadashi Date and Muhurat: 23 अगस्त को होगा सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत, खास संयोग में पूजा से पूरी होगी संतान की मनोकामना

Sawan Putrada Ekadashi Date and Muhurat: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष स्थान है। यह व्रत हिंदू कैलेंडर के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। भगवान विष्णु को समर्पित यह व्रत जब सावन माह में होता है, तो श्री हरि के साथ ही भगवान विष्णु की पूजा का भी संयोग प्राप्त होता है। सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पुत्रदा एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल यह व्रत 23 अगस्त रविवार के दिन पड़ रहा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं या जिनकी संतान के जीवन में स्वास्थ्य या करियर से जुड़ी समस्याएं आ रही हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से समस्त पापों का नाश होता है और संतान सुख एवं सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से संतान से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और संतान के जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

खास बात यह है कि सावन का महीना होने के कारण इस दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की आराधना का विशेष महत्व बताया गया है। देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 को बताया कि रविवार के दिन पुत्रदा एकादशी का पड़ना भी एक बड़ा संयोग है। इस दिन विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन का महीना होने के कारण भगवान शिव की पूजा करने से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त और पारण का समय

इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 की रात 2 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त 2026 की सुबह 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। भगवान विष्णु की पूजा के लिए 23 अगस्त को सुबह 7 बजकर 32 मिनट से दोपहर 12 बजकर 24 मिनट तक का समय सबसे शुभ है।

पुत्रदा एकादशी व्रत पारण समय

व्रत का पारण 24 अगस्त 2026 को दोपहर 1 बजकर 41 मिनट से शाम 4 बजकर 16 मिनट के बीच किया जा सकेगा।

हरि और हर की पूजा का दुर्लभ संयोग

सावन की आखिरी एकादशी में भगवान शिव की आराधना के साथ पुत्रदा एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यही कारण है कि इस दिन शिव और विष्णु की संयुक्त आराधना को लेकर धार्मिक आस्था और भी बढ़ जाती है।

संतान इच्छुक दंपति जरूर रखें व्रत

पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर संतान की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। संतान इच्छुक दंपत्ति इस दिन श्रद्धा के साथ व्रत रखकर भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मान्यता है कि इससे संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपत्तियों की मनोकामना पूरी हो सकती है और संतान पर भगवान की कृपा बनी रहती है।

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को 3.18 घंटे रहेगा चंद्र ग्रहण, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और सूतक का समय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के दिन 28 अगस्त को 3.18 घंटे रहेगा चंद्र ग्रहण, जानें राखी बांधने का मुहूर्त और सूतक का समय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। यह पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक यह पर्व इस साल 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। लेकिन इस साल रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण लगने से एक अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि रक्षा बंधन पर चंद्र ग्रहण से क्या राखी का त्योहार प्रभावित होगा? इससे राखी बांधने के मुहूर्त पर क्या असर होगा? और सूतक काल कब से कब तक रहेगा?

बता दें, इस साल का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा। इस दौरान चंद्रमा कुंभ राशि में संचार करेंगे, जहां पहले से ही छाया ग्रह राहु विराजमान हैं और केतु की भी दृष्टि बनी रहेगी। साथ ही सूर्य भी केतु से पीड़ित रहेंगे क्योंकि सिंह राशि में सूर्य और केतु की युति बन रही है। यह चंद्र ग्रहण 3 घंटे और 18 मिनट तक चलेगा। आइए जानें चंद्र ग्रहण के साये में कैसे मनेगा राखी का पर्व?

चंद्रग्रहण 2026 तारीख और समय

भारतीय समय के अनुसार, रक्षाबंधन के दिन लगने वाले चंद्र ग्रहण की शुरुआत सुबह 8 बजकर 4 मिनट से होगी। चंद्र ग्रहण का मध्य काल 9 बजकर 43 मिनट पर होगा और समापन 11 बजकर 22 मिनट पर होगा। चंद्रग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 18 मिनट की रहने वाली है। चूंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला नहीं है इसलिए सूतक काल मान्य नहीं होगा।

28 अगस्त को होगा चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को लगने वाला चंद्र ग्रहण आंशिक होगा। इस दौरान चंद्रमा का बड़ा भाग पृथ्वी की छाया में ढक जाएगा, जिससे चंद्रमा गहरे लाल या तांबे के रंग जैसा नजर आने लगेगा, इसी वजह से इसे ब्लड मून भी कहा जाएगा। यह ग्रहण दक्षिणी-पश्चिमी एशिया (पाकिस्तान, अफगानिस्तान के दक्षिणी क्षेत्र समेत सऊदी अरब, शारजाह, ईराक, ईरान आदि), अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका, प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर में पूरी तरह दिखाई देने वाला है।

भारत में नहीं दिखेगा चंद्र ग्रहण

28 अगस्त को रक्षा बंधन के दिन लगने वाला साल का अंतिम चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इस ग्रहण का सूतक काल भी मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन के पर्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। ना ही राखी बांधने का मुहूर्त बदलेगा। आप बिना किसी बाधा के त्योहार मना सकते हैं।

भद्रा मुक्त रहेगा रक्षा बंधन का पर्व

इस बार रक्षाबंधन पर सबसे अच्छी बात यह है कि भद्राकाल नहीं है। भद्रा रक्षाबंधन से एक दिन पूर्व यानी 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से रात्रि 9:32 बजे तक रहेगी। इसलिए 28 अगस्त को सूर्योदय के बाद बिना किसी बाधा के पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

Sawan Purnima 2026 Date: 27 या 28 अगस्त, कब किया जाएगा श्रावण पूर्णिमा का व्रत? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Purnima 2026 Date: 27 या 28 अगस्त, कब किया जाएगा श्रावण पूर्णिमा का व्रत? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Purnima 2026 Date: सावन पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

यह श्रावण माह का अंतिम दिन होता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान होता है, जो पूर्णिमा के दिन जलाभिषेक और विशेष पूजा के साथ पूर्ण होता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन जनेऊ धारण करने वाले (द्विज) गंगा या पवित्र नदियों में स्नान करके पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं और नया जनेऊ धारण करते हैं। इसे ‘श्रावणी’ या ‘उपाकर्म’ कहा जाता है। साथ ही, अमरनाथ में पवित्र छड़ी मुबारक की रस्म भी श्रावण पूर्णिमा के दिन ही अमरनाथ गुफा पहुंचती है और वार्षिक यात्रा का समापन होता है।

श्रावण पूर्णिमा 2026: सही तारीख

दृक पंचांग के मुताबिक श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह करीब 9:08 बजे आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह लगभग 9:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मानी जाएगी।

स्नान और दान की सही तिथि

सावन पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक रहने के कारण स्नान और दान जैसे कार्य इस दिन सूर्योदय के बाद किए जाएंगे। व्रत और पूजा की तारीख स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

पूर्णिमा तिथि का समय

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ : 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से

पूर्णिमा तिथि का समापन : 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे तक

स्नान-दान और पूजन के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:28 बजे से सुबह 05:12 बजे तक

प्रातःकाल स्नान-दान मुहूर्त : सूर्योदय से लेकर सुबह 09:48 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक

चंद्र ग्रहण व भद्रा का प्रभाव

चंद्र ग्रहण : 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है, परंतु यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं रहेगा। इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, जिससे आप बिना किसी रुकावट के पूजा, स्नान, दान व रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं।

भद्रा काल : 27 अगस्त की रात में ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, इसलिए 28 अगस्त को पूरे दिन रक्षाबंधन एवं धार्मिक कार्यों के लिए भद्रा दोष नहीं रहेगा।

सावन पूर्णि 2026: पूजा विधि

स्नान व दान : इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

सत्यनारायण कथा : पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्री सत्यनारायण भगवान की कथा और पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

चंद्र देव की पूजा : रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

Putrada Ekadashi 2026: सावन की पुत्रदा एकादशी पर इन 5 बातों का रखें खास ध्यान, वर्ना नहीं मिलेगा व्रत और पूजा का पूरा फल

Putrada Ekadashi 2026: सावन की पुत्रदा एकादशी पर इन 5 बातों का रखें खास ध्यान, वर्ना नहीं मिलेगा व्रत और पूजा का पूरा फल

Putrada Ekadashi 2026: सावन माह में आने वाली पुत्रदा एकादशी का सभी व्रत और पर्व में विशेष स्थान है। यह व्रत माताएं और अभिभावक अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए करते हैं। कुछ दंपति संतान की प्राप्ति की कामना से भी यह व्रत करते हैं। पुत्रदा एकादशी व्रत सावन के अलावा पौष माह में भी किया जाता है। सावन माह के शुल्क पक्ष की एकादशी तिथि को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत होता है। एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन सावन का महीना होने की वजह से इस दिन भगवान शिव की पूजा का भी विशेष महत्व है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार एकादशी के दिन व्रत और पूजा करते समय कुछ बातों का खास ध्यान रखना चाहिए। आइए जानें इनके बारे में

कब है सावन पुत्रदा एकादशी 2026

पंचांग के अनुसार, सावन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 23 अगस्त 2026 को रात 2 बजे से शुरू होकर 24 अगस्त सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 23 अगस्त को पुत्रदा एकादशी का व्रत रखा जाएगा। लेकिन सावन पुत्रदा एकादशी व्रत पारण के दिन हरिवासर सूर्योदय के बाद तक रहने की वजह से 24 अगस्त को भी पुत्रदा एकादशी व्रत होगा।

इन 5 नियमों को भूल कर भी अनदेखा न करें

काले कपड़े न पहनें : एकादशी व्रत में पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग भगवान विष्णु का प्रिय रंग है। पूजा-पाठ के दौरान काले रंग के कपड़े पहनने से बचने की सलाह दी जाती है।

तुलसी की पत्तियां न तोड़ें : इस दिन तुलसी की पत्तियां तोड़ने से बचना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा में पहले से रखी तुलसी की पत्तियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

गुस्सा और विवाद न करें : उन्होंने कहा कि इस दिन किसी का अपमान करने, बहस करने या किसी का दिल दुखाने से बचें। शांत मन से भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है।

चावल खाने से बचें : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत के दिन चावल का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन और फलाहार को प्राथमिकता दी जाती है।

तामसिक भोजन से दूरी रखें : एकादशी के दिन मांस-मदिरा और अन्य तामसिक चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इससे पूजा और उपवास का पूरा फल नहीं मिलता है।

Sawan Fourth Somwar 2026: एकसाथ 5 शुभ संयोग लेकर आ रहा है सावन का अंतिम सोमवार व्रत, जानें शिववास योग का महत्व, तारीख और मुहूर्त

Sawan Fourth Somwar 2026: एकसाथ 5 शुभ संयोग लेकर आ रहा है सावन का अंतिम सोमवार व्रत, जानें शिववास योग का महत्व, तारीख और मुहूर्त

Sawan Fourth Somwar 2026: सावन का महीना अब धीरे-धीरे अपने समापन की ओर पहुंच रहा है। इस माह में सोमवार के व्रत का विशेष स्थान है। श्रद्धालु पूरी आस्था और विधि-विधान से सावन के सभी सोमवार का व्रत करते हैं। इस साल सावन का चौथा और अंतिम सोमवार 24 अगस्त 2026 को पड़ रहा है। इस दिन 5 शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है। साथ ही, सावन के चौथे सोमवार में भगवान शिव का वास कैलाश पर होगा, जिससे यह दिन रुद्राभिषेक के लिए अति उत्तम माना जा रहा है। जो लोग सावन सोमवार व्रत होंगे, वे अंतिम सोमवार को उद्यापन करेंगे। जो लोग अभी तक भगवान शिव का जलाभिषेक नहीं कर पाए हैं, उनके लिए भी यह एक अच्छा अवसर है, जिससे आपको भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त हो सकती है।

5 शुभ संयोग में अंतिम सावन सोमवार

सावन पुत्रदा एकादशी : अंतिम सावन सोमवार पर सावन पुत्रदा एकादशी व्रत का पारण है और वैष्णव भक्तों का व्रत भी है। यह दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का उत्तम अवसर है। शिव और हरि की पूजा से आपका कल्याण होगा।

प्रीति योग : सावन के अंतिम सोमवार पर प्रीति योग प्रात:काल से ही बन जाएगा, जो सुबह 07 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। यह एक शुभ, सकारात्मक और मंगलकारी योग है, जो शुभ कार्यों के लिए अच्छा है। इसके स्वामी ग्रह बुध और अधिपति देव भगवान विष्णु हैं।

आयुष्मान योग : उस दिन सुबह में 07 बजकर 04 मिनट से आयुष्मान योग का प्रारंभ होगा, जो पूरे दिन रहेगा। आयुष्मान योग भी एक शुभ योग है। इस योग के स्वामी ग्रह चंद्रमा और अधिपति देव गुरु बृहस्पति हैं। इस योग में दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता की प्राप्ति होती है।

कैलाश पर शिववास : सावन के अंतिम सोमवार पर भगवान शिव का वास कैलाश पर है। किसी भी दिन यदि शिवजी का वास कैलाश पर हो तो आप रुद्राभिषेक करा सकते हैं, इससे सुख-समृद्धि, शांति, सकारात्मक ऊर्जा में बढ़ोत्तरी होती है।

हंसराज योग : इस समय देवों के गुरु बृहस्पति अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिससे हंसराज योग का निर्माण हुआ है। यह व्यक्ति की उन्नति करने वाला योग है। सावन सोमवार पर हंसराज योग तो बना ही है, उस दिन चंद्रमा धनु राशि में और सूर्य सिंह राशि में विराजमान होंगे।

अंतिम सावन सोमवार पर जलाभिषेक का मुहूर्त

सावन के अंतिम सोमवार पर आप ब्रह्म मुहूर्त से ही जलाभिषेक कर सकते हैं। उस दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दिन में 11:57 ए एम से लेकर दोपहर 12:49 पी एम तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह में 05:55 ए एम से 07:32 ए एम तक है, वहीं शुभ-उत्तम मुहूर्त 09:09 ए एम से 10:46 ए एम तक रहेगा। वैसे तो शिव जी के जलाभिषेक के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती है, आप दिन में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं।

Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: सावन के दूसरे और अंतिम प्रदोष व्रत पर त्रिपुष्कर योग का संयोग, जानें कब होगा भौम प्रदोष व्रत और पूजा का मुहूर्त

Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: सावन के दूसरे और अंतिम प्रदोष व्रत पर त्रिपुष्कर योग का संयोग, जानें कब होगा भौम प्रदोष व्रत और पूजा का मुहूर्त

Bhauma Pradosh Vrat 2026 Date: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का अहम स्थान है। यह तिथि भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। माना जाता है कि भगवान शिव इस दिन कैलाश पर्वत पर प्रदोष काल में प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। और इस समय भगवान की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्रदोष व्रत हिंदू कैलेंडर के हर माह की कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को किया जाता है। इस व्रत में प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद पूजा का विधान है। प्रदोष व्रत का नाम उस दिन से तय होता है, जब यह तिथि पड़ रही हो। जैसे सोमवार को त्रयोदशी तिथि लगने पर सोम प्रदोष व्रत किया जाता है।

सावन माह का अंतिम प्रदोष व्रत मंगलवार के पड़ रहा है। सावन शुक्ल त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ने की वजह से यह भौम प्रदोष व्रत होगा। यह व्रत उन श्रद्धालुओं के लिए खासतौर से फलदायी होता है जिनकी कुंडली में मंगल दोष होता है। संतान की प्राप्ति के लिए भी प्रदोष व्रत रखा जाता है। इस दिन मंगला गौरी व्रत का भी सुंदर संयोग बनेगा। इस व्रत के दिन शिव पूजा के लिए करीब सवा दो घंटे का मुहूर्त है। सावन के भौम प्रदोष व्रत के दिन त्रिपुष्कर योग बन रहा है, जो तीन गुना फल प्रदान करने वाला माना जाता है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 तारीख

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 25 अगस्त को सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर प्रारंभ होगी। इस तिथि की समाप्ति 26 अगस्त को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर होगी। उदयातिथि के आधार पर त्रयोदशी तिथि 26 अगस्त को है, लेकिन सावन का अंतिम प्रदोष यानि भौम प्रदोष व्रत 25 अगस्त दिन मंगलवार को रखा जाएगा। क्योंकि प्रदोष काल का पूजा मुहूर्त 25 अगस्त को मिल रहा है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 मुहूर्त

इस बार भौम प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम को 6 बजकर 51 मिनट से है, जो रात 9 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। शिव पूजा के लिए भक्तों को 2 घंटे 13 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा। इसके अलावा प्रदोष के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात:काल 04:27 ए एम से 05:11 ए एम तक है, वहीं अभिजीत मुहूर्त दिन में 11 बजकर 57 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। उस दिन का निशिता मुहूर्त देर रात 12:01 ए एम से लेकर 26 अगस्त को 12:45 ए एम तक है।

भौम प्रदोष व्रत में त्रिपुष्कर योग का संयोग

सावन का यह भौम प्रदोष व्रत त्रिपुष्कर योग में किया जाएगा। त्रिपुष्कर योग सुबह 5 बजकर 55 मिनट से सुबह 6 बजकर 20 मिनट तक रहेगा। इस योग में किए गए शुभ कार्यों के तीन गुने फल प्राप्त होते हैं। प्रदोष के दिन रवि योग भी बन रहा है, जो रात में 10 बजकर 51 मिनट से 26 अगस्त को सुबह 5 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। रवि योग भी एक शुभ योग होता है। उस दिन सुबह में आयुष्मान् योग 07 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। इस योग में आयु लंबी होती है, उत्तम सेहत का आशीर्वाद मिलता है। सुबह 7:41 बजे से सौभाग्य योग बनेगा, जो रात तक रहेगा। त्रयोदशी व्रत पर उत्तराषाढा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:51 पी एम तक रहेगा, फिर श्रवण नक्षत्र का प्रारंभ होगा।

Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को चंद्रमा को लगेगा ग्रहण, जानें कैसा होगा रक्षा बंधन का त्योहार और किस समय बांधी जाएगी राखी

‘फूलों का तारों का…,’ गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

'फूलों का तारों का...,' गाते-गाते सीएम डॉ. मोहन ने लाड़ली बहनों को दिया गिफ्ट, 1500 के साथ मिला 250 रुपये का शगुन

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवरा को प्रेम के अलग ही रंग में रंगे नजर आए। उन्होंने मैहर जिले में आयोजित कार्यक्रम में लाड़ली बहनों को विख्यात गाना 'फूलों का तारों का सबका कहना है..,' सुनाया और उनके खातों में 2148 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। इस तरह राज्य की 1.25 करोड़ से ज्यादा लाड़ली बहनों को 1500 रुपये के साथ-साथ राखी का 250 रुपये का शगुन भी मिला। 

इसके अलावा सीएम डॉ. मोहन यादव ने 256 करोड़ से अधिक लागत के विकास कार्यों लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी किया। उन्होंने लाड़ली बहनों पर पुष्प वर्षा भी की और हितग्राहियों को हितलाभ वितरिए किया। उन्होंने यहां कई विभागों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। दूसरी ओर, जनअभियान परिषद की सखियों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को विशाल राखी भेंट की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कई घोषणाएं भी कीं। 

 

इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार हर महीने बहनों को लाड़ली बहना योजना की राशि प्रदान करती है। राखी त्योहार तो साल में एक बार आता है, लेकिन हम हर महीने इस उत्सव को मनाते हैं। आज लाड़ली बहनों के प्रेम को देखकर, उनकी संख्या देखकर आनंद आ रहा है। मैहर मां शारदा का अद्भुत स्थान है। बड़े लड़ैया महुआ वाले, जिनकी मार सही न जाए, एक को मारे दो मर जाए, तीसरा धौंस खाए मर जाए। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मां शारदा के अनन्य भक्त आला की अमरता की कहानी आज भी जीवंत है। जब तक आला दर्शन नहीं कर लेते, मां को भी आनंद नहीं आता। सनातन संस्कृति भी अपने आप में अद्भुत है।

उन्होंने कहा कि हमारे तीज-त्योहारों की वजह से हमारे कुटुम्ब जीवित हैं। हमारी संस्कृति में पूरी वसुधा को परिवार माना गया है। हम अपने पेड़-पौधे-नदी-पहाड़, सबको परिवार का हिस्सा मानते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश दुनिया के सामने सिर ऊंचा करके खड़ा है। पिछले साल आतंकवादियों ने माताओं-बहनों के सिंदूर पर हाथ डालने का प्रयास किया, उस वक्त हमारे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सेना ने दुश्मन के घर में घुसकर मारने का रिकॉर्ड बनाया। हमारी सेना हर तरह से दुश्मन से निपटने में सक्षम है।

बहनों को दिया अतिरिक्त उपहार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज मेरे दोनों हाथों में प्रेम का धागा है। मैं सौभाग्यशाली हूं। आज मैं मन में क्या महसूस कर रहा हूं, बताना मुश्किल है। मेरी सरकार और आपका जो संबंध है, वो अद्भुत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग दुर्भावना रखते हैं। हम जब भी लाड़ली बहनों को योजना की राशि ट्रांसफर करते हैं, तब कांग्रेसी हमें टोकते हैं। कांग्रेसी कहते हैं कि लाड़ली बहनों के खातों में पैसे मत डालो, ये शराब पी जाती हैं। कांग्रेसियों को डूब मरना चाहिए। सीएम डॉ. मोहन ने बहनों से अपील की, कि कांग्रेस की इस बात को गांठ बांधकर रखना। जिस दिन चुनाव आए, उस दिन कांग्रेस को बताना कि उसने क्या अपराध किया है। उनका हिसाब चुकता करना। लाड़ली बहनों का अपमान कोई बर्दाश्त नहीं करेगा।

उन्होंने कहा कि हमने चुनाव के पहले जो वादा किया और अभी तक हम महीने आपके खातों में राशि आ रही है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी एक बार जो वचन देती है, उसे निभाती है। आज मुझे वो गीत याद आ रहा है, 'फूलों का तारों का कहना है, सबका कहना है, एक हजार में मेरी बहना है….'। हमारी सरकार को 1.25 करोड़ बहनों का आशीर्वाद मिल रहा है। आज हमारी सरकार ने नियमित राशि के अलावा 250 रुपये अतिरिक्त सावन के महीने का उपहार दिया है। 

 

बहनें परिवार को बांधे रखती हैं-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बहनों से निवेदन किया कि ये राशि जब आपको मिले, तो अपने भाइयों को मिठाई खिलाना और टीका करना। मैं समझूंगा कि टीका मुझे लगा। मुझे आपका आशीर्वाद मिल गया। हमारी माताओं-बहनों में जो हिम्मत है, वो पुरुष में नहीं है। वे अपना परिवार छोड़कर अंजान परिवार को अपना भविष्य समर्पित कर देती हैं। उन्होंने कहा कि एक बार विश्व हिंदू परिषद का सम्मेलन विदेश में हुआ। उस समय मार्गरेट थ्रेचर वहां की प्रधानमंत्री थीं। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि भारत और लंदन में सबसे बड़ा अंतर कुटुम्ब परंपरा का है। आपके ऋषि-मुनियों ने परिवार की जो परंपरा खड़ी की है, इसकी धुरी माता है। माता अपने सारे बच्चों से जिस प्रकार प्रेम करती है, वह अद्भुत है। मां अपना पेट काटकर बच्चों की सारी मांग पूरी करती है। घर में भले कमाने वाला एक हो, लेकिन मां सबकी पूर्ति करती है। हमको खिलाते-खिलाते मां का पेट भर जाता है। यह संस्कृति केवल भारत में ही है। हमारी संस्कृति त्याग-परिवार की परंपरा को लेकर चलती है।

उन्होंने कहा कि हम लगातार विकास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2022 के बाद महाकाल लोक का लोकार्पण किया। उससे हमारा पूरा जिला बदल गया। हमने देव स्थान को धार्मिक स्थल बनाने का फैसला किया है। हमारी सरकार स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आय बढ़ाने का काम कर रही है। हमने फैसला किया है कि जो भी उद्योग बहनों को मौका देगा, वहां सरकार उसे प्रति बहन 5 हजार रुपये देगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार के लिए स्लोगन है, सच्चा वादा पक्का काम-प्रेम से बोलो सीताराम। चित्रकूट में हमने 3 हजार करोड़ से ज्यादा के काम मंजूर किए हैं। अब मां मैहर के लोक के पहले फेज का भूमि-पूजन आज यहां हुआ है। कल कैबिनेट में हमने फैसला किया कि लाड़ली बहनों को आने वाले 5 साल तक राशि देंगे। बहनें इस राशि से सिलाई मशीन खरीदती हैं, ब्यूटी पार्लर चलाती हैं। बहने इस राशि से परिवार की पूर्ति करती हैं। 

 

कांग्रेस को लिया आड़े हाथ-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहले नक्सलियों को खत्म किया, और अब नशा विरोधी अभियान चला रहे हैं। हमारी सरकार ने 19 धार्मिक शहरों में शराब की दुकानें बंद की हैं। भविष्य की पीढ़ियों को बचाने के लिए, हर तरह के नशे के खिलाफ लड़ने के लिए हमारी सरकार संकल्पबद्ध है। परिवार के परिवार नशे की वजह से बर्बाद हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि आप बच्चों को पढ़ाओ-लिखाओ, बड़ा अधिकारी बनाओ, लेकिन नशे के मामले में उसे सावधान करो। उन्होंने कहा कि पहले कहा जाता था कि मां नर्मदा विंध्याचल पर्वत की तरह आ नहीं सकती है, उसे लाने के लिए नहर बनाई जा रही थी। जिस मशीन से नहर बन रही थी, वह कंपनी ही बंद हो गई। मशीनें खराब हो गईं। यह योजना बंद होने के कगार पर थी। लेकिन, हमने कहा कि खुशहाली के लिए इस इलाके में पानी आना जरूरी है। 2 हजार करोड़ की योजना 800 करोड़ से शुरू हुई। हमने कहा कि इसके लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि अब वो नहर पूरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि अब इस क्षेत्र के हर गांव में नर्मदा का पानी पहुंचेगा। हमने फैसला किया कि किसानों को खाते पलटाने नहीं पड़ेंगे। इसके अलावा आने वाली फसल के समय सरकार दिन में बिजली देगी। जिन-जिन गरीबों के मकान रह गए हैं, उनका मकान बनेगा। मैहर में कलेक्टर सहित 16 बड़े पदों पर बहने हैं। 


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि अगर कांग्रेसी अनुचित आचरण नहीं करते, तो विधानसभा में भी बहनों के लिए 33 फीसदी का आरक्षण हो जाता। कांग्रेस को पता नहीं किस बात का डर है। अगर माताएं-बहनें लोकसभा-विधानसभा में आएंगी तो क्या गलत हो जाएगा।    

 

सीएम ने की ये प्रमुख घोषणाएं

– मैहर में 25 करोड़ की लागत से आधुनिक स्टेडियम बनेगा।

– लिलजी जलाशय का 50 करोड़ की लागत से नवीकरण किया जाएगा। 

– मैहर में बड़ा अस्पताल बनाया जाएगा।

– मैहर में 5000 गौवंश क्षमता की बड़ी गौशाला बनेगी।

– मैहर में आईटीआई संस्थान बनेगा, स्कूलों का उन्नय किया जाएगा।

– आल्हा गायकों की समितियों को 25-25 हजार रुपए देने की घोषणा।

Raksha Bandhan 2026: 28 अगस्त को चंद्रमा को लगेगा ग्रहण, जानें कैसा होगा रक्षा बंधन का त्योहार और किस समय बांधी जाएगी राखी

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन का पर्व हमारे देश में मनाए जाने वाले सभी प्रमुख पर्व और त्योहारों में विशेष स्थान रखता है। यह पर्व भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं, उनकी कलाई पर राखी बांधती हैं और आरती उतार कर मुंह मीठा कराती हैं। माना जाता है कि ऐसा करते हुए वे अपने भाई की सुख-समृद्धि, अच्छी सेहत और खुशहाली की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहन की सदैव रक्षा करने का वचन देते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस पर्व का इतिहास पौराणिक काल में भगवान कृष्ण और द्रौपदी से जुड़ा हुआ है।

इस साल भाई बहन का यह पवित्र पर्व रक्षा बंधन 28 अगस्त 2026 को पूरे देश में धूम धाम से मनाया जाएगा। लेकिन इसी दिन एक और दुर्लभ खगोलीय घटना भी घटने जा रही है, जिससे इस दिन का महत्व बढ़ गया है। दरअसल, इसी दिन साल 2026 का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण भी लगने जा रहा है। इस दिन चंद्र ग्रहण लगने से लोगों में इस बात का कंफ्यूजन हो रहा है कि बहनें अपने भाइयों को राखी कैसे बांधेंगीं, सूतक कब से कब तक रहेगा और ग्रहण का क्या समय रहेगा? आइए जानें इन सभी सवालों के जवाब।

रक्षाबंधन 2026

पंचांग के अनुसार, सावन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से होगी। इसका समापन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 48 मिनट पर होगा। तिथि के अनुसार, 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन 2026 शुभ मुहूर्त

28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ समय सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त सुबह 7 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 10 मिनट तक रहेगा। अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह 9 बजकर 10 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा का साया

इस साल 27 अगस्त को भद्रा का प्रभाव सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। इसलिए 28 अगस्त को बिना किसी बाधा के श्रद्धा और उल्लास के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया जा सकेगा।

चंद्र ग्रहण 2026

28 अगस्त 2026 को राखी के दिन साल का आखिरी चंद्र ग्रहण भी लगेगा। ग्रहण की शुरुआत 28 अगस्त को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर होगी। इसका समापन दोपहर 12 बजकर 31 मिनट पर माना जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसलिए इसका सूतक काल और ग्रहण से जुड़े नियम दोनों ही मान्य नहीं रहेंगे। ऐसे में बहनें बिना सूतक की बाधा के अपने भाई को राखी बांध सकती हैं।

कहां दिखाई देगा ग्रहण?

28 अगस्त का आंशिक चंद्र ग्रहण अफ्रीका, यूरोप, उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका तथा पश्चिमी एशिया के कई देशों में दिखाई देगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा।

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