Sawan Second Somwar 2026: दूसरे सोमवार पर बन रहे प्रदोष व्रत समेत 7 शुभ संयोग, जानें किस समय किया जाएगा भगवान शिव का जलाभिषेक

Sawan Second Somwar 2026: सावन माह के सोमवार पर श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक और विशेष पूजा-उपवास करना शुभ मानते हैं। इस साल सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को पड़ रहा है। इस दिन सावन माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि भी पड़ रही है, जिससे सावन सोमवार के साथ पहले प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। इस साल सावन के दूसरे सोमवार को प्रदोष व्रत के साथ ही कई दुर्लभ संयोग भी बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। उनके और माता पार्वती के आशीर्वाद से जल्द ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन के दूसरे सोमवार पर बनने वाले 7 शुभ संयोग

सावन के दूसरे सोमवार पर सोम प्रदोष व्रत, एकादशी पारण, कर्क राशि में त्रिग्रही योग, बुधादित्य योग, हंसराज योग, वज्र योग और सिद्धि योग का शुभ संयोग एक साथ बन रहा है।

प्रदोष व्रत : दूसरे सावन सोमवार पर सावन का पहला प्रदोष व्रत भी है। यह व्रत भगवान शिव के लिए रखते हैं और पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद होती है। उस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 07:05 बजे से है। प्रदोष व्रत करने से दुख, रोग, दोष, पाप, कष्ट आदि मिट जाते हैं।

एकादशी पारण : दूसरे सावन सोमवार को कामिका एकादशी व्रत का पारण है, जो सूर्योदय के बाद होगा। इस दिन द्वादशी तिथि सुबह 08:00 ए एम तक है, फिर शिव जी की तिथि त्रयोदशी प्रारंभ होगी।

त्रिग्रही योग : दूसरे सावन सोमवार को कर्क राशि में सूर्य, बुध और गुरु की युति से त्रिग्रही योग बना हुआ है। 5 अगस्त को जब कर्क में बुध का गोचर हुआ है, तब से यह त्रिग्रही योग बना है। इससे मिथुन, कर्क, कन्या वालों को बंपर लाभ होगा।

बुधादित्य योग : कर्क में ही सुर्य और बुध की युति से बुधादित्य राजयोग का निर्माण हुआ है, जो दूसरे सावन सोमवार पर भी विद्यमान होगा।

हंसराज योग : इस समय कर्क राशि में देव गुरु बृहस्पति विराजमान हैं। यह उनकी उच्च राशि है। इस वजह से हंसराज योग बन रहा है।

वज्र योग : दूसरे सावन सोमवार पर प्रात:काल से वज्र योग बनेगा, जो रात – 10:27 पी एम तक रहेगा। इस योग में नए काम नहीं करते हैं, वाहन, सोना आदि नहीं खरीदते हैं।

सिद्धि योग : दूसरे सावन सोमवार पर रात 10:27 पी एम से सिद्धि योग बन रहा है, जो अगले दिन सुबह तक रहेगा। इसमें किए गए कार्य सिद्ध होते हैं।

दूसरा सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

दूसरे सावन सोमवार पर जलाभिषेक ब्रह्म मुहूर्त से ही प्रारंभ हो जाएगा। वैसे तो आप सुबह में कभी भी जलाभिषेक कर सकते हैं। लेकिन नीचे सुबह के कुछ शुभ मुहूर्त दिए गए हैं। उस दिन प्रदोष है तो शाम के समय में भी जलाभिषेक होगा।

ब्रह्म मुहूर्त : प्रात: 04:22 बजे से 05:05 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 05:47 बजे से 07:27 बजे तक

शुभ-उत्तम मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक

Hariyali Teej 2026 Vastu tips: किसी दिशा में सबसे ज्यादा फलदायी होगी पूजा, यहां जानें हरियाली तीज के लिए वास्तु टिप्स

Hariyali Teej 2026 Vastu tips: किसी दिशा में सबसे ज्यादा फलदायी होगी पूजा, यहां जानें हरियाली तीज के लिए वास्तु टिप्स

Hariyali Teej 2026 Vastu tips: हरियाली तीज हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जो विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा पति की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए मनाया जाता है। कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 108 वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने सावन माह के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। यह पर्व शिव-पार्वती के पुनर्मिलन और अटूट प्रेम का प्रतीक माना जाता है।

कब किया जाएगा हरियाली तीज 2026 व्रत?

हरियाली तीज 2026 का व्रत 15 अगस्त 2026, शनिवार को रखा जाएगा।

तिथि और मुहूर्त विवरण

तृतीया तिथि प्रारंभ : 14 अगस्त 2026 को शाम 6:46 बजे से

तृतीया तिथि समाप्त : 15 अगस्त 2026 को शाम 5:28 बजे तक

उदया तिथि : 15 अगस्त 2026 को पड़ने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा।

शिव-पार्वती की मूर्ति रखने के लिए कौन सी दिशा है शुभ?

वास्तु शास्त्र में पूजा-पाठ, देवी-देवताओं के लिए शुभ दिशा का वर्णन किया गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हरियाली तीज के दिन शिव-पार्वती की मूर्ति को उत्तर-पूर्व दिशा में विराजमान करना चाहिए। यह दिशा को देवताओं की मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को विराजमान करने से घर में सुख-शांति का वास होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसलिए कहा जाता है कि मंदिर में देवी-देवताओं की मूर्ति को विराजमान करने से पहले शुभ दिशा के बारे में जरूर जान लें।

अगर घर में उत्तर-पूर्व दिशा में शिव-पार्वती की मूर्ति को रखना संभव नहीं है, तो ऐसे में उत्तर दिशा में मूर्ति को विरजमान करना शुभ माना जाता है। इस दिशा में मूर्ति को विराजमान करने से सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है। हरियाली तीज के दिन पूजा के दौरान पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुख होना चाहिए।

किस दिशा में न रखें मूर्ति?

वास्तु शास्त्र के अनुसार, भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति को दक्षिण दिशा में भूलकर भी विराजमान नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इस दिशा में पितरों का वास माना जाता है। इस दिशा में पूजा करने से शुभ फल प्राप्त नहीं होता है।

Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी का व्रत इस दिन होगा, नोट करें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Rekha: रेखा के जीजा जी ने उनके ट्रांसफॉर्मेशन और कड़ी मेहनत को किया याद किया, बोले- “पहले वह काफी मोटी थीं”

Rekha: रेखा बॉलीवुड की सबसे मशहूर स्टाइल और ब्यूटी आइकॉन में से एक हैं। 1970 की फ़िल्म ‘सावन भादों’ से लीड एक्ट्रेस के तौर पर डेब्यू करने वाली रेखा ने अगले कुछ सालों में अपने जबरदस्त ट्रांसफॉर्मेशन से दर्शकों का दिल जीत लिया था। हाल ही में, उनके जीजा और एक्टर तेज सप्रू ने फ़िल्म इंडस्ट्री में उनके शुरुआती दिनों के बारे में बात की। उन्होंने याद किया कि कैसे बॉलीवुड में आने के बाद रेखा का ज़बरदस्त मेकओवर हुआ।

‘रेडिफ़ ओरिजिनल्स’ के यूट्यूब चैनल के साथ बातचीत में तेज ने बताया कि उन्होंने 1987 में रेखा की सौतेली बहन धनलक्ष्मी से शादी की थी। उन्होंने यह भी बताया कि शादी से पहले ही वह रेखा को अपनी बहन मानते थे क्योंकि वह अक्सर उन्हें “लगभग राखी बांधती” थीं। धनलक्ष्मी एक्ट्रेस पुष्पावल्ली और सिनेमैटोग्राफर के. प्रकाश की बेटी हैं, जबकि रेखा, पुष्पावल्ली और एक्टर जेमिनी गणेशन की बेटी हैं।

रेखा के बारे में फैली गलतफहमियों पर बात करते हुए तेज ने कहा कि वह उन पर ज़्यादा कुछ नहीं कहना चाहते, लेकिन एक एक्ट्रेस के तौर पर उनके लिए बहुत सम्मान रखते हैं। उन्होंने याद करते हुए कहा, “मैं आपको बता सकता हूं कि एक एक्ट्रेस के तौर पर उन्होंने खुद को जिस तरह से संवारा, मुझे नहीं लगता कि कोई और ऐसा कर सकता है। मैं इसका पूरा श्रेय उन्हें देता हूं। जब उन्होंने फ़िल्मों में काम करना शुरू किया, तो उस समय वह मोटी थीं… यह बात सभी जानते हैं।”

1980 के दशक में सिमी गरेवाल के चैट शो में रेखा ने अपने ज़बरदस्त बदलाव के बारे में बात की और फ़िटनेस के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “खूबसूरत दिखने के लिए, एक पूरी तरह से खूबसूरत महिला बनने के लिए, आपको शारीरिक रूप से फ़िट रहना होगा। अगर आप स्लिम रह सकती हैं, तो अच्छा है। लेकिन मोटी बिल्कुल नहीं। मोटापा भद्दा लगता है।”

पचास साल से ज़्यादा के करियर में, रेखा ने 180 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम किया है। उनकी कुछ यादगार फ़िल्मों में ‘उमराव जान’, ‘सिलसिला’, ‘खून भरी माँग’, ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’, ‘खूबसूरत’ और कई अन्य फ़िल्में शामिल हैं।

Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी का व्रत इस दिन होगा, नोट करें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Kamika Ekadashi 2026: सावन माह में आने वाले पहले एकादशी व्रत को कामिका एकदशी व्रत के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करने वाले भक्तों के सारे पाप मिट जाते हैं। पुराणों अनुसार कामिका एकादशी का व्रत हजार गौ दान के बराबर पुण्य देता है। कहते हैं इस दिन तीर्थ स्थानों पर स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।

हिंदू कैलेंडर के प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को एकादशी व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे साल में 24 एकादशी व्रत का सौभाग्य मिलता है। सावन माह की पहली एकादशी तिथि को लेकर लोगों को भ्रम हो रहा है कि ये 8 अगस्त को किया जाएगा या 9 अगस्त को किया जाएगा। असल में एकादशी तिथि 8 अगस्त को दोपहर से शुरू हो रही है और हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत और त्योहार उदयातिथि को देखते हुए मनाए जाते हैं। इसलिए सावन माह की पहली एकादशी तिथि का व्रत 9 अगस्त को किया जाएगा। आइए जानें इसके बारे में

कामिका एकादशी 2026 सही तारीख

पंचांग अनुसार कामिका एकादशी तिथि 8 अगस्त की दोपहर 01:59 से शुरू होकर 9 अगस्त की सुबह 11:04 तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार कामिका एकादशी व्रत 9 अगस्त को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 10 अगस्त को किया जाएगा और पारण का समय सुबह 05:47 से 08 बजे तक रहेगा।

कामिका एकादशी शुभ मुहूर्त 2026

ब्रह्म मुहूर्त – 04:22 AM से 05:04 AM

प्रातः सन्ध्या – 04:43 AM से 05:47 AM

अभिजित मुहूर्त – 12:00 PM से 12:53 PM

विजय मुहूर्त – 02:40 PM से 03:33 PM

गोधूलि मुहूर्त – 07:06 PM से 07:27 PM

सायाह्न सन्ध्या – 07:06 PM से 08:10 PM

अमृत काल – 06:42 AM से 08:09 AM

द्विपुष्कर योग – 11:04 AM से 02:43 PM

इस दिन बन रहे हैं शुभ योग

कामिका एकादशी पर इस बार दो शुभ योगों का संयोग भी बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन सुबह 11 बजकर 4 मिनट से दोपहर 2 बजकर 43 मिनट तक द्विपुष्कर योग रहेगा। वहीं, पूरे दिन हर्षण योग प्रभावी रहेगा और इसका समापन 10 अगस्त को रात 2 बजकर 4 मिनट पर होगा। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ योगों में भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप और दान-पुण्य करने से भगवान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के हर दुख को हर लेते हैं।

कामिका एकादशी का महत्व

धार्मिक मान्यताओं अनुसार कामिका एकादशी का व्रत रखने से सभी बिगड़े काम बनने लगते हैं। साथ ही पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है। इस दिन तुलसी का पूजन भी जरूर करें। साथ ही भगवान विष्णु को तुलसी के पत्ते भी अवश्य चढ़ाएं, इससे आपके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। साथ ही मां लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होगी।

कामिका एकादशी व्रत पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान से निवृत्त होकर पहले व्रत का संकल्प लें और फिर भगवान विष्णु की विधि विधान पूजा करें। भगवान को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत, तुलसी आदि जरूर अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ करें। साथ ही कामिका एकादशी की कथा पढ़ें। दिन भर फलाहारी व्रत रहें और एकादशी के अगले दिन किसी ब्राह्मण को भोजन कराकर अपना व्रत खोलें।

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र में होगा स्नान-दान, जानें तारीख और पितरों को तर्पण देने का समय

Sawan Amavasya 2026 Date: सावन के महीने का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह भगवान विष्णु के चार माह की योगनिद्रा में जानें के बाद पहला हिंदू माह होता है। इस अवधि में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। सावन भगवान शिव का प्रिय माह है। इस माह में आने वाली अमावस्या को हरियाली अमावस्या कहते हैं, क्योंकि इस समय चारों तरफ हरियाली छायी रहती है और मानसून की फुहारों से वातावरण सराबोर रहता है।

हरियाली अमावस्या के दिन गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान और उसके बाद दान करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इसलिए हरियाली अमावस्या पर तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं। इस दिन पितृ दोष से मुक्ति के लिए विशेष उपाय भी किए जाते हैं। शाम के समय में पितरों के लिए दीपक जलाते हैं, ताकि पितृ लोक लौटते समय उनका मार्ग अंधकार में न रहे। इस साल की सावन अमावस्या पर पुष्य नक्षत्र रहेगा। आइए जानते हैं कि हरियाली अमावस्या कब है और पितृ तर्पण कब कर सकते हैं?

सावन अमावस्या 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के आधार पर देखा जाए तो इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि 12 अगस्त को 01:52 बजे से शुरू हो रही है और यह 12 अगस्त को रात 11:06 बजे तक रहेगी। उदयातिथि को देखते हुए सावन अमावस्या 12 अगस्त बुधवार का है।

सावन अमावस्या 2026 स्नान-दान मुहूर्त

सावन अमावस्या पर स्नान और दान के लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04 बजकर 23 ए एम से लेकर प्रात: 05 बजकर 06 मिनट तक है। जो लोग ब्रह्म मुहूर्त में स्नान न कर पाएं, वे लोग सूर्योदय के बाद स्नान, दान कर सकते हैं। उस दिन लाभ-उन्नति मुहूर्त 05:49 ए एम से 07:28 ए एम तक और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त 07:28 ए एम से 09:07 ए एम तक रहेगा। इन दोनों समयों में भी स्नान और दान किया जा सकता है। सावन अमावस्या पर साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगने वाला है।

सावन अमावस्या पर तर्पण कब करें?

सावन अमावस्या के दिन स्नान के बाद पितरों के लिए तर्पण कर सकते हैं। हाथ में जल, सफेद फूल और काले तिल लेकर कुशा की मदद से पितरों को तर्पण दे सकते हैं। तर्पण देने से पितर प्रसन्न होते हैं।

व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र में सावन अमावस्या

इस साल की सावन अमावस्या पर व्यतीपात योग और पुष्य नक्षत्र का योग है। व्यतीपात योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 26 मिनट तक रहेगा, उसके बाद वरीयान् योग बनेगा। व्यतीपात योग में किसी नए या शुभ कार्य की शुरूआत नहीं करते हैं।

पुष्य नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 7 बजकर 59 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्लेषा नक्षत्र है। पुष्य नक्षत्र को नक्षत्रों का राजा कहा जाता है। यह एक शुभ नक्षत्र है, इसमें आप शुभ कार्य कर सकते हैं, जिसमें सफलता प्राप्त होती है। स्थिर कार्य भी इस नक्षत्र में कर सकते हैं।

Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: सावन के महीने में बेल पत्र के ये उपाय करने से मिल जाएगा सभी तीर्थों का पुण्य फल, जानें इनके बारे में

Sawan Bel Patra Ke Upay: जिस तरह सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, उसी तरह उन्हें बिल्प पत्र यानी बेलपत्र भी प्रिय हैं। भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव की पूजा बेलपत्र के बिना अधूरी मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेल पत्र की जड़ में दुनिया में जितने सभी प्रसिद्ध तीर्थ निवास करते हैं। इसलिए इसकी जड़ के पास दीपक जलाने, दीपमाला दान करने से कई गुना फल मिलता है।

कहा जाता है कि जो व्यक्ति धूप-दीप, फूलों से बिल्ववृक्ष के मूल का पूजन करता है, वह शिवलोक को प्राप्त करता है और उसके सन्तान और सुख दोनों में वृद्धि होती है। ऐसे व्यक्ति को संतान से सुख मिलता है। शिवपुराण सावन के अनुसार, सावन के पवित्र महीने में बिल्व पत्र के पेड़ के नीचे दीपक जलाने का विशेष महत्व और अनेक लाभ बताए गए हैं। इसे प्रदोष काल या रात में जलाना अत्यंत फलदायी माना जाता है। सावन में बेलपत्र के पेड़ के नीचे दीया जलाने के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

भगवान शिव का आशीर्वाद : शिवपुराण के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष की जड़ में स्वयं महादेव का वास होता है। सावन में इसके नीचे दीपक जलाने से भगवान भोलेनाथ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और साधक को सुख-शांति तथा आरोग्य का वरदान देते हैं।

मां लक्ष्मी का वास और धन-धान्य की प्राप्ति : धार्मिक कथाओं के अनुसार, बेलपत्र के वृक्ष में माता लक्ष्मी का भी निवास माना गया है। मान्यता है कि शाम या रात के समय बेलपत्र के नीचे घी का दीपक जलाने से घर से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक संकटों से मुक्ति मिलती है।

पापों का नाश : माना जाता है कि बेलपत्र की जड़ में समस्त तीर्थों का वास होता है। इसके नीचे दीपदान करने से व्यक्ति के ज्ञात-अज्ञात पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

सकारात्मक ऊर्जा और वास्तु दोष से मुक्ति : घर में या आसपास लगे बेलपत्र के नीचे दीया जलाने से घर की नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और वातावरण शुद्ध एवं सकारात्मक बनता है।

पितृ दोष और कष्टों से राहत : बेलपत्र के पेड़ के पास शाम को दिया जलाने से ग्रह-दोष दूर होते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

दीपक जलाने का सही तरीका

दीपक के लिए गाय के शुद्ध घी या तिल के तेल का उपयोग करें।

दीपक मुख्य रूप से प्रदोष काल (सूर्यास्त के आसपास का समय) में बेलपत्र की जड़ के पास जलाएं।

दीपक जलाते समय भगवान शिव के मंत्र “ॐ नमः शिवाय” का मन में जाप करें।

Pradosh Vrat 2026: सावन के पहले प्रदोष व्रत पर बन रहा दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और सोम प्रदोष व्रत का मुहूर्त

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का दुर्लभ संयोग, जानें सही तारीख और शुभ मुहूर्त

Hariyali Amavasya 2026 Date: हरियाली अमावस्या श्रावण मास में मनाई जाती है। यह पर्व भगवान शिव की भक्ति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का विशेष अवसर है। सावन का महीना शिव जी को अति प्रिय है। ऐसे में हरियाली अमावस्या के दिन शिव-पार्वती की पूजा करने से सुख, समृद्धि और वैवाहिक जीवन में खुशहाली आती है। बारिश के इस मौसम में धरती पर चारों ओर हरियाली छा जाती है। इस दिन पौधे (जैसे नीम, पीपल, बरगद, तुलसी, आंवला आदि) लगाना बेहद शुभ माना जाता है और इसे पुण्य कर्म माना गया है। हरियाली अमावस्या को पितरों की शांति के लिए स्नान, दान और तर्पण करना बहुत फलदायी होता है।

हरियाली अमावस्या कब है ?

पंचांग के अनुसार, सावन मास की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 अगस्त, मंगलवार के दिन रात में 1 बजकर 54 मिनट से होगा। वहीं, अगले दिन यानी 12 अगस्त, बुधवार को रात में 11 बजकर 7 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, 12 अगस्त के दिन हरियाली अमावस्या का व्रत व पितृकर्म करना शास्त्र सम्मत होगा। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने के बाद दोपहर के समय पितरों की पूजा आदि कार्य किए जाते हैं।

हरियाली अमावस्या पर गौरी और गजकेसरी योग का संयोग

हरियाली अमावस्या के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है और साथ ही, इसी दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में रहेंगे। इसके चलते गौरी योग और गजकेसरी योग का शुभ संयोग भी बनेगा। इस शुभ संयोग में व्रत और पितृकर्म करने वाले श्रद्धालुओं के लिए हरियाली अमावस्या विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन फल देने वाले वृक्ष लगाने से उत्तम फल प्राप्त होता है।

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त

सूर्योदय : सुबह 5 बजकर 48 मिनट पर

लाभ चौघड़िया : सुबह 5 बजकर 48 मिनट से लेकर 7 बजकर 27 मिनट तक

अमृत चौघड़िया : सुबह 7 बजकर 27 मिनट से लेकर 9 बजकर 7 मिनट तक

शुभ चौघड़िया : सुबह 10 बजकर 46 मिनट से लेकर दोपहर के 12 बजकर 26 मिनट तक

लाभ चौघड़िया : शाम को 5 बजकर 24 मिनट से लेकर 7 बजकर 3 मिनट तक

हरियाली अमावस्या 2026 पूजा विधि

स्नान व संकल्प : सुबह जल्दी उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।

शिव पूजन : शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेलपत्र, धतूरा और सफेद फूल अर्पित करें। “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।

वृक्षारोपण : घर के आंगन या किसी सार्वजनिक स्थान/बगीचे में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं।

पीपल पूजा : पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाकर परिक्रमा करें।

दान-पुण्य : गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करें।

August 12 Total Solar Eclipse: इस देश में 100 साल बाद दिखेगा सूर्य ग्रहण का दुर्लभ नजारा, भारत में नहीं दिखेगा ग्रहण

August 12 Total Solar Eclipse: साल 2026 में दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण होने हैं। पहला सूर्य और चंद्र ग्रहण फरवरी और मार्च में हो चुका है। अब अगस्त के महीने में इस साल आखिरी सूर्य और चंद्र ग्रहण लगेगा। भारतीय पंचांग के अनुसार, इस साल का अंतिम सूर्य ग्रहण जहां सावन की अमावस्या के दिन 12 अगस्त को लगेगा, वहीं चंद्र ग्रहण सावन की पूर्णिमा को 28 अगस्त को होगा। यह दोनों ही ग्रहण भारत में नजर नहीं आएंगे, इसलिए इनका धार्मिक प्रभाव नहीं होगा। लेकिन ज्योतिष की दृष्टि से यह अहम होगा।

सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी जब एक सीध में आते हैं ग्रहण होता है। ग्रहण एक दुर्लभ खगोलीय घटना है, जो एक निश्चित अंतराल पर होती है। इस साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण में कुछ ही दिनों का समय बचा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा और इसमें 2 मिनट के लिए सूर्य को चंद्रा पूरी तरह ढक लेगा। इस ग्रहण का सबसे दुर्लभ और दिलचस्प नजारा स्पेन में दिखाई देगा। यहां 1905 के बाद पहली बार पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा।

स्पेन में 100 साल पर दिन में पूरी तरह छाएगा अंधेरा

12 अगस्त को लग रहा सूर्य ग्रहण वर्ष 2026 का दूसरा और अत्यंत महत्वपूर्ण पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा। इस ग्रहण के दौरान मुख्य रूप से स्पेन में लगभग 100 साल (1905 के बाद) बाद दिन के समय ही पूरी तरह अंधेरा छा जाएगा। इस ग्रहण में डायमंड का रिंग का नजारा भी देखने को मिल सकता है।

सूर्य ग्रहण तिथि, समय और सूतक काल

तिथि : 12 अगस्त 2026 (अमावस्या तिथि)

शुरुआत : 12 अगस्त 2026, रात लगभग 09:04 बजे

समाप्ति : 13 अगस्त 2026, सुबह लगभग 04:25 बजे

पूर्ण सूर्य ग्रहण 2026 सूतक काल

सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले प्रारंभ होकर ग्रहण समाप्ति तक रहता है। 12 अगस्त 2026 को लग रहा पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं रहेगा। मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे और नियमित पूजा-पाठ होगा।

कहां देखा जा सकता सूर्य ग्रहण

स्पेन (उत्तरी व मध्य हिस्से जैसे मैड्रिड, वालेंसिया, बेलिएरिक द्वीप समूह), आइसलैंड (पश्चिमी तट व रेक्याविक), ग्रीनलैंड, रूस के सुदूर उत्तरी/आर्कटिक क्षेत्र तथा उत्तरी अटलांटिक महासागर में पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई देगा। जबकि पश्चिमी यूरोप, कनाडा और उत्तरी अफ्रीका के कई देशों में आंशिक सूर्य ग्रहण का नजारा दिखाई देगा।

Kamika Ekadashi 2026: सावन की पहली एकादशी होती है कामिका एकादशी, सुख-समृद्धि और भाग्य को मजबूत बनाने के लिए जरूर करें ये 5 उपाय

ना भिगोने की झंझट, ना चिपकने का डर! सिर्फ 15 मिनट में बनाए उपवास वाली परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी

सावन के व्रत में साबूदाना खिचड़ी हर घर में पसंद की जाने वाली खास डिश है। लेकिन कई बार जल्दबाजी में साबूदाना भिगोना भूल जाते है। लेकिन कुकर ट्रिक से बिना लंबे समय तक भिगोए भी साबूदाना खिचड़ी को बिल्कुल खिली-खिली और स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। कुछ आसान स्टेप्स फॉलो करके आप कम समय में व्रत के लिए परफेक्ट और टेस्टी साबूदाना खिचड़ी तैयार कर सकते हैं।

 सबसे पहले साबूदाना को 2–3 बार साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उसका स्टार्च निकल जाए। इसके बाद पानी पूरी तरह निकालकर साबूदाना को एक स्टील के डिब्बे में रखें। इसमें थोड़ा सा देसी घी, स्वादानुसार सेंधा नमक, चुटकी भर चीनी और थोड़ा सा पानी डालकर हल्के हाथ से मिला दें। इससे स्टीम होने के बाद साबूदाना का स्वाद और टेक्सचर अच्छा बनता है।

This may contain: a bowl filled with corn and garnished with cilantro on a table

कुकर में स्टीम

अब प्रेशर कुकर में थोड़ा पानी डालें और उसके अंदर साबूदाने वाला डिब्बा रख दें। चाहें तो साथ में दो आलू भी रख सकते हैं, ताकि वे भी एक साथ उबल जाएं। कुकर का ढक्कन बंद करें और मध्यम आंच पर 3 सीटी आने तक पकाएं। इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें। इस तरीके से साबूदाना बिना भिगोए भी अच्छी तरह पक जाता है।

ठंडे पानी की ट्रिक

स्टीम होने के बाद साबूदाना थोड़ा चिपचिपा लग सकता है। इसे छलनी में निकालकर ऊपर से ठंडा पानी डालें और बहुत हल्के हाथ से धो लें। यह आसान ट्रिक साबूदाने के दानों को अलग-अलग कर देती है, जिससे खिचड़ी बनाते समय वह चिपकती नहीं और बिल्कुल खिली-खिली बनती है।

 

तड़का लगाएं

अब एक कड़ाही में देसी घी गर्म करें और उसमें जीरा डालें। इसके बाद बारीक कटी हरी मिर्च, कद्दूकस किया हुआ अदरक और व्रत में खाते हैं तो थोड़ा बारीक कटा टमाटर डालकर हल्का भून लें। फिर उबले हुए आलू के टुकड़े डालें। अब तैयार किया हुआ साबूदाना, सेंधा नमक, दरदरी काली मिर्च, चुटकी भर चीनी और भुनी हुई मूंगफली डालकर हल्के हाथ से मिलाएं, ताकि दाने टूटें नहीं। खिचड़ी तैयार होने के बाद ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया, थोड़ा नींबू का रस और चाहें तो भुना जीरा पाउडर छिड़क दें। इससे खिचड़ी का स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। ध्यान रखें कि खिचड़ी को ज्यादा देर तक न चलाएं, वरना साबूदाना टूट सकता है और चिपचिपा हो सकता है।

 

पौष्टिक आहार

साबूदाना शरीर को जल्दी एनर्जी देने वाला सोर्स है। जब इसमें मूंगफली, आलू और देसी घी मिलाया जाता है, तो यह ज्यादा पौष्टिक और पेट भरने वाला भोजन बन जाता है। इसलिए सावन, एकादशी या अन्य व्रत के दौरान यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है।

सिर्फ ग्रीन आउटफिट नहीं, सही मेकअप भी है जरूरी! सावन में ऐसे बनाएं परफेक्ट लुक

सावन का महीना आते ही हरे रंग की साड़ी, सूट और लहंगे का ट्रेंड हर तरफ देखने को मिलता है। इस मौसम में ट्रेडिशनल आउटफिट के साथ परफेक्ट मेकअप आपके पूरे फेस्टिव लुक को और भी खास बना सकता है। सही मेकअप स्टेप्स चेहरे की खूबसूरती को निखार देते हैं और आउटफिट में ग्लैमरस टच जोड़ते हैं। ग्रीन आउटफिट के साथ ये आसान ब्यूटी टिप्स अपनाकर सावन में पा सकती हैं खूबसूरत और एलिगेंट लुक।

सावन में ग्रीन आउटफिट के साथ ऐसे पाएं परफेक्ट फेस्टिव मेकअप लुकरेड लिपस्टिक

Lipstick shades: 5 new colours for office, home, outings with effortless style | Asianet Newsable

अगर आप शादी, पार्टी या शाम के किसी फंक्शन में ग्रीन साड़ी पहन रही हैं, तो क्लासिक रेड लिपस्टिक आपके लुक को रॉयल और ग्लैमरस बना सकती है। रेड शेड ग्रीन आउटफिट के साथ खूबसूरत कंट्रास्ट तैयार करता है और चेहरे की खूबसूरती को और निखारता है। इसके साथ आंखों का मेकअप हल्का रखें, ताकि पूरा लुक बैलेंस्ड और एलिगेंट नजर आए।

काजल और आईलाइनर

Eye Liner Stock Photos, Images and Backgrounds for Free Download

आंखों का मेकअप किसी भी ट्रेडिशनल लुक को और ज्यादा अट्रैक्टिव बना देता है। ग्रीन साड़ी या सूट के साथ गहरा काजल और पतला आईलाइनर आंखों को बड़ा और खूबसूरत दिखाता है। आप चाहें तो थोड़ा स्मज्ड काजल लगाकर सॉफ्ट और ट्रेडिशनल लुक भी पा सकती हैं।

गोल्डन आईशैडो

Planning To Wear Green Saree This Sawan? Try These Stunning Makeup Looks

ग्रीन आउटफिट के साथ गोल्डन, ब्रॉन्ज या शैंपेन शेड का आईशैडो बेहद खूबसूरत लगता है। यह आंखों में हल्की चमक जोड़ता है और फेस्टिव लुक को और ज्यादा खास बनाता है। रात के फंक्शन के लिए थोड़ा शिमर आईशैडो लगाकर ग्लैमरस टच दे सकती हैं।

ब्लश और हाइलाइटर

फ्रेश और ग्लोइंग फेस के लिए ब्लश और हाइलाइटर का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है। पीच या रोज पिंक ब्लश चेहरे पर नेचुरल निखार लाता है। इसके बाद गालों, नाक और ठुड्डी पर हल्का हाइलाइटर लगाने से चेहरा दमकता हुआ नजर आता है। ध्यान रखें कि हाइलाइटर ज्यादा न लगाएं, ताकि मेकअप नेचुरल लगे।

बिंदी का टच

ट्रेडिशनल मेकअप में बिंदी एक छोटा लेकिन बेहद खास हिस्सा होती है। ग्रीन साड़ी या सूट के साथ लाल, गोल्डन या मैचिंग ग्रीन बिंदी आपके लुक को पूरा कर सकती है। आप अपनी जूलरी या आउटफिट के हिसाब से बिंदी का चुनाव करें, इससे आपका पूरा फेस्टिव लुक और ज्यादा अट्रैक्टिव लगेगा।