CM धामी ने की बालेश्वर मंदिर आने की अपील, जानिए क्यों खास है चंपावत का यह शिवधाम?

baleshwar temple champawat

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सावन के पहले सोमवार को श्रद्धालुओं को चंपावत के प्राचीन बालेश्वर मंदिर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने लोगों से चंपावत आगमन पर इस शिवधाम दर्शन करने की भी अपील की। 

 

सीएम धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड के चंपावत जनपद में स्थित प्राचीन बालेश्वर मंदिर भगवान शिव की दिव्य आस्था, समृद्ध इतिहास और अद्भुत स्थापत्य कला का अनुपम संगम है। पत्थरों पर उकेरी गई इसकी बेजोड़ नक्काशी और प्राचीन शिल्पकला सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत की गौरवगाथा सुनाती है।

उन्होंने कहा कि पने चंपावत आगमन पर इस पावन शिवधाम के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति और हमारी समृद्ध विरासत का अविस्मरणीय अनुभव अवश्य प्राप्त करें।

 

क्यों खास है यह मंदिर

उत्तराखंड के चंपावत जिले में स्थित बालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक अत्यंत प्राचीन और कलात्मक मंदिर है। इसका निर्माण चंद वंश के राजाओं द्वारा 10वीं से 13वीं शताब्दी के बीच कराया गया था। अपनी बेजोड़ पत्थर की नक्काशी और अद्भुत वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध यह ऐतिहासिक स्थल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संरक्षण में एक राष्ट्रीय धरोहर है।

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में बाली ने यहां असुरों से शांति के लिए शिव जी की पूजा की थी, इसलिए इसे 'बालेश्वर' कहा जाता है। बालेश्वर मंदिर के अलावा इस परिसर में रत्नेश्वर मंदिर और चंपावती दुर्गा मंदिर भी स्थित हैं। मंदिर परिसर के पास एक प्राचीन प्राकृतिक जल स्रोत है, जिसके पवित्र जल का विशेष धार्मिक महत्व माना गया है।

Solah Somwar Vrat 2026: आज से ही शुरू होंगे 16 सोमवार के व्रत, जानें इस व्रत के संकल्प से लेकर उद्यापन के नियम और क्या है प्रसाद बांटने की विधि

Solah Somwar Vrat 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है और आज इस माह का पहला सोमवार है। सावन के सोमवार का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। माना जाता है कि इस दिन व्रत और शिव पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सावन के सोमवार उन भक्तों के लिए अहम माने जाते हैं, जो 16 सोमवार व्रत की इच्छा रखते हैं। सावन के सोमवार से 16 सोमवार व्रत भी शुरू होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 16 सोमवार व्रत खासतौर से मनोकामना पूर्ति, सुखी वैवाहिक जीवन, योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति, संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। शिव पुराण में बताया गया है कि इस व्रत की पूजा में कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है, तभी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए जानें 16 सोमवार व्रत से जुड़े विशेष नियम

सोलह सोमवार व्रत में इस तरह करें संकल्प

आज से 16 सोमवार व्रत शुरू करने वाले भक्तों को सबसे पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेने के लिए स्नान व ध्यान करें। इसके बाद शिवजी के सामने हाथ में जल, बेलपत्र, अक्षत और फूल लेकर श्रद्धा व विश्वास के साथ लगातार 16 सोमवार का व्रत करने का संकल्प करें। भगवान शिव से प्रार्थना करें, हे प्रभु आप मुझे शक्ति दें। अगर मुझसे कोई गलती हो जाए तो उसके लिए क्षमा भी करें।

सोलह सोमवार व्रत विधि

सोलह सोमवार व्रत के लिए स्नान करें और स्वच्छ या सफेद वस्त्र धारण करें। पास के शिवालय में शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक भी करें। अभिषेक के बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, भस्म, चंदन और मौसमी फल अर्पित करें। पूजा में भगवान शिव के समक्ष पांच देसी घी के दीपक जलाएं। दीपक पूजा समाप्त होने तक जलता रहे, इसका विशेष ध्यान रखें। धूप और अगरबत्ती अर्पित करने के बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इस व्रत में शिव चालीसा, रुद्राष्टक या सोलह सोमवार व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

तीन भागों में बांटे सोलह सोमवार व्रत का प्रसाद

सोलह सोमवार के व्रत में प्रसाद को तीन बराबर भागों में बांटने की परंपरा है। प्रसाद का पहला भाग गाय को, दूसरा भाग परिवार के सदस्यों के लिए और तीसरे भाग को स्वयं ग्रहण करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से सभी देवी-देवताओं को प्रसाद अर्पित हो जाता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें और सुबह व प्रदोष काल में पूजा अवश्य करें।

17वें सोमवार को करते हैं 16 सोमवार व्रत का उद्यापन

16 सोमवार व्रत तभी संपूर्ण माना जाता है, जब इसका उद्यापन 17वें सोमवार को विधि विधान से किया जाए। पंडितों के अनुसार, सोलह सोमवार व्रत का उद्यापन सुबह 11 बजे तक कर लेना चाहिए। इस दिन विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करें और हवन व तर्पण करें। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराएं और दक्षिण देकर आशीर्वाद लें। इस तरह सोलह सोमवार व्रत का समापन होता है।

Sawan First Somwar 2026: सच्ची श्रद्धा के साथ आज दिन में इस समय करें भगवान शिव का जलाभिषेक, जानें विधि और जरूरी नियम

Sawan First Somwar 2026: सच्ची श्रद्धा के साथ आज दिन में इस समय करें भगवान शिव का जलाभिषेक, जानें विधि और जरूरी नियम

Sawan First Somwar 2026: भगवान शिव के अनेक नामों में से एक नाम ‘भोलेनाथ’ भी है, यानी महादेव अपने भक्त की सच्ची श्रद्धा और संपूर्ण समर्पण चाहते हैं। जो भक्त महादेव की सच्च दिल से आराधना करते हैं, शिव सदा उनके सहायक रहते हैं। भगवान शिव का प्रिय समय यानी सावन का महीना शुरू हो चुका है और आज इस माह का पहला सोमवार है। इस दिन बहुत से भक्त उपवास करते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं।

माना जाता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में खुशहाली आती है। आज के दिन छोटे-बड़े सभी शिवालयों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लग जाती है। आज श्रद्धालु भांग, बेलपत्र, धतूरा और जल से शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और सोमवार का उपवास करते हैं। अक्सर भक्त सावन के सोमवार को महादेव के जलाभिषेक के सही समय को लेकर दुविधा में रहते हैं। ऐसे में आइए जानें भगवान का जलाभिषेक किस समय करना चाहिए।

शिवलिंग जलाभिषेक का समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सुबह का समय पूजा के लिए सबसे अचछा माना जाता है। इसिलए भगवान का जलाभिषेक सूर्योदय के समय करने की कोशिश करनी चाहिए। लेकिन किसी वजह से सुबह मंदिर नहीं जा पाते ह तो दिन में भी श्रद्धा से पूजा कर सकते है। भगवान शिव के लिए सबसे जरूरी सच्ची श्रद्धा मानी गई है।

पूजा विधि

सुबह स्नानादि के बाद साफ कपड़े पहनें और भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर साफ जल जढ़ाएं। अगर घर में गंगाजल है तो उसकी कुछ बूंद भी मिला सकते हैं। इसके बाद दूध, बेलपत्र, धतूरा, सफेद फूल और चंदन अर्पित करें। पूजा के दौरान ‘ॐ नमः शिवायʼ मंत्र का जाप करें। आखिर में आरती करें और भगवान शिव से परिवार की खुशहाली की प्राथना करें।

पूजा के जरूरी नियम

जल्दबाजी में पूजा न करें, पूजा करते समय मन शांत रखें। शिवलंग पर ताजे बेलपत्र और ताजे फूल ही चढ़ाएं। अगर व्रत रख रहे हैं तो अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। मंदिर में साफ-सफाई का ध्यान रखें।

शिव पूजा में ध्यान रखें कि शिवलंग पर तुलसी के पत्ते और केतकी का फूल नहीं चढ़ाया जाता। टूटे हुए बेलपत्र, बासी फूल या खराब फल भी भगवान को अर्पित नहीं करने चाहिए। पूजा के दौरान गुस्सा या किसी का अपमान करने से भी बचना चाहिए।

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Silver Price Today: चांदी की कीमतों में उछाल, खरीदारी से पहले जानें अपने शहर के ताजा भाव

Silver Price Today: हफ्ते के पहले दिन सोमवार 3 जुलाई को चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिला। दिल्ली में चांदी की कीमत में हल्की गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 234.90 रुपये प्रति ग्राम और 2,34,900 रुपये प्रति किलोग्राम है। वहीं मुंबई में भी चांदी का भाव 234.90 रुपये प्रति ग्राम और 2,34,900 रुपये प्रति किलोग्राम है। हालांकि मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी 10.34 बजे 1.12 फीसदी यानी 2428 रुपये की बढ़त के साथ 2,19,147 रुपये पर ट्रेड कर रहा है।

इंटरनेशनल मार्केट में कैसी है चाल

इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने-चांदी में बढ़त देखी जा रही है। सोने का भाव आज 0.24 फीसदी चढ़कर कॉमैक्स पर 4117 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा है। चांदी 1.04 फीसदी उछलकर 58.385 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है।

भारत के शहरों में चांदी के ताजा भाव

शहर10 ग्राम चांदी का भाव100 ग्राम चांदी का भाव1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹234.90₹23,900₹2,34,900
कोलकाता₹2,350₹24000₹2,35,000
मुंबई₹2,350₹23,500₹2,35,000
चेन्नई₹2,350₹23,500₹2,35,000
पटना₹2,350₹23,500₹2,35,000
लखनऊ₹2,350₹23,500₹2,35,000
मेरठ₹2,350₹23,500₹2,35,000
अयोध्या₹2,350₹23,500₹2,35,000
कानपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
गाजियाबाद₹2,350₹23,500₹2,35,000
नोएडा₹2,350₹23,500₹2,35,000
गुरुग्राम₹2,350₹23,500₹2,35,000
चंडीगढ़₹2,350₹23,500₹2,35,000
जयपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
लुधियाना₹2,350₹23,500₹2,35,000
गुवाहाटी₹2,350₹23,500₹2,35,000
इंदौर₹2,350₹23,500₹2,35,000
अहमदाबाद₹2,350₹23,500₹2,35,000
सूरत₹2,350₹23,500₹2,35,000
वडोदरा₹2,350₹23,500₹2,35,000
पुणे₹2,350₹23,500₹2,35,000
नागपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
नासिक₹2,350₹23,500₹2,35,000
बैंगलोर₹2,350₹23,500₹2,35,000
भुवनेश्वर₹2,350₹23,500₹2,35,000
रायपुर₹2,350₹23,500₹2,35,000
हैदराबाद₹2,350₹23,500₹2,35,000

पिछले कारोबारी दिन कैसा रहा चांदी का भाव?

दिल्ली के सर्राफा बाजार में पिछले कारोबारी दिन शुक्रवार को चांदी की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। चांदी 2,24,700 रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स सहित) के स्तर पर स्थिर रही। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी पर दबाव देखने को मिला। हाजिर चांदी (स्पॉट सिल्वर) की कीमत लगभग 2% गिरकर 57.98 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

कहां होगी नजर

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते सोने और चांदी की कीमतों पर दुनिया भर के कई बड़े इकोनॉमिक डेटा का असर पड़ सकता है। निवेशकों की नजर अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोजोन और जापान के पीएमआई (PMI) आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा अमेरिका के जुलाई महीने के रोजगार के आंकड़े, जैसे नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी दर भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। वहीं अमेरिका-ईरान से जुड़े फैक्टर्स और कच्चे तेल की सप्लाई की स्थिति पर भी बाजार की नजर रहेगी।

Gold Price Today: सावन के पहले सोमवार को सोना फिसला, दिल्ली में ₹132240 पर आया 22 कैरेट

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Yogi Adityanath Kanwar Yatra vision: सनातन धर्म में आस्था रखने वाले यह मानते हैं कि शिव कहीं बाहर नहीं, वे हर उस जीव में विद्यमान हैं जो प्रेम, त्याग और तप से जीवन को साधता है। यही कारण है कि सनातन परंपरा भक्त और भगवान के बीच कोई दूरी नहीं मानती। जो शिव का ध्यान करता है, वह स्वयं शिवमय हो जाता है। सावन में जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए नंगे पांव सैकड़ों किलोमीटर चलते हैं, तो वे केवल जल चढ़ाने नहीं जाते, वे स्वयं उस तप की जीवंत छवि बन जाते हैं जिसे शिव ने कैलाश की एकांत साधना में साकार किया था। उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दृष्टि में यही भाव सबसे गहरा है, कांवड़िया केवल एक श्रद्धालु नहीं, चलता-फिरता शिव का प्रतिरूप है और अब जबकि जल्द ही कांवड़ यात्रा शुरू होने वाली है, उत्तर प्रदेश इन तपस्वियों के स्वागत और उन पर पुष्प वर्षा को तैयार है। 

 

निर्विघ्न कांवड़ यात्रा के लिए योगी सरकार ने समय रहते ही सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इसकी देखरेख कर रहे हैं। यह आस्था के प्रति ऐसी सम्वेदना है जिसमें शासन श्रद्धालु के साथ खड़ा दिखाई देता है। सड़कों की मरम्मत, बिजली-पानी की सुचारु व्यवस्था, चिकित्सा शिविरों की तैनाती, इन सबके पीछे यह भाव है कि किसी श्रद्धालु के पांवों में छाले न पड़ें। सरकार जब सड़क को शिव-पथ मानकर संवारती है, तो वह प्रशासन और आस्था के बीच की दीवार गिरा देती है। इसी भाव से सुरक्षा की चिंता भी उपजी है। मार्ग पर सीसीटीवी और ड्रोन निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल, महिला श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुरक्षा घेरा, गंगा घाटों पर गोताखोरों और जल पुलिस की तैनाती, ये सब उस भावना का विस्तार हैं जिसमें राज्य स्वयं को श्रद्धालु के सेवक के रूप में पाता है। 

 

इसी सोच ने चिकित्सा और स्वच्छता से जुड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित किया है। एंटी वेनम और एंटी रैबीज इंजेक्शन की उपलब्धता, जगह-जगह शिविरों में विश्राम और पेयजल की व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और मार्ग की रोशनी, इन सबका उद्धेश्य यही है कि भक्त किसी कष्ट में न पड़े l मार्ग पर मांस और मदिरा की दुकानें बंद रखने का निर्णय, दुकानों पर संचालक का नाम प्रदर्शित करने की अनिवार्यता, यह सब केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, यह पवित्रता के सम्मान का प्रश्न है। शुद्ध आचरण और संयम ही तप की पहली शर्त है और योगी सरकार ने इस दिशा में कदम उठाए हैं तो कहा जा सकता है कि वह भक्तों के संकल्प में भागीदार बन चुकी है।

Kanwar Yatra UP 2026

इसी सहभागिता ने डीजे की ध्वनि को निर्धारित मानकों में बांधा है। भक्ति में उल्लास स्वाभाविक है, पर यह कोलाहल नहीं बनने पाए, इसके लिए स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं। लाखों श्रद्धालुओं की सुगमता को केंद्र में रखते हुए ही यातायात प्रबंधन के तहत वैकल्पिक मार्ग, डायवर्जन प्वाइंट, आरक्षित पार्किंग और आपातकालीन कॉरिडोर बनाए गए हैं। इसी तरह अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं पर दृष्टि रखने वाली विशेष टीमें, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वालों के विरुद्ध कठोरता की चेतावनी, यह दिखाती हैं कि सरकार आस्था की इस विराट धारा को किसी भी विघ्न से बचाने के लिए सतर्क है। हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और उत्तराखंड के प्रशासन से समन्वय और कांवड़ संघों से नियमित संवाद यह सुनिश्चित करते हैं कि यह सुरक्षा-चक्र किसी एक राज्य की सीमा में सिमटा न रहे।

 

नौ वर्षों के अनुभव ने योगी सरकार को यह सिखाया है कि आस्था की सेवा निरंतर परिष्कृत होने वाली प्रक्रिया है। हर वर्ष व्यवस्था में नई तकनीक, नए संसाधन और नए अनुभव जुड़ते हैं, ड्रोन निगरानी हो या डिजिटल हेल्पलाइन, ये सब पारंपरिक आस्था को आधुनिक प्रशासनिक कुशलता से जोड़ने के प्रयास हैं। पर इन सबके मूल में वही भाव है जिससे यह लेख शुरू हुआ था, कांवड़िया शिव का प्रतिरूप है, और उसकी सेवा शिव की ही आराधना है। 

 

शिव को औघड़दानी कहा जाता है। वे भक्त की भावना देखते हैं, उसकी हैसियत या साधन-संपन्नता नहीं। राजा हो या रंक, भस्म रमाए वनवासी हो या नगर का साधारण मजदूर, कांवड़ मार्ग पर शिव के लिए सब समान हैं। यही समानता की भावना उस प्रशासनिक निर्देश में झलकती है जिसमें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि प्रदेश के हर जिले में व्यवस्था का स्तर एक जैसा होना चाहिए, चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बड़ा नगर हो या पूर्वांचल का दूरस्थ कस्बा। जब शासन खुद को इस समभाव में ढालता है, तो वह शिव-तत्व की उसी मूल भावना को आत्मसात करता है जिसमें भेदभाव के लिए कोई स्थान नहीं।

 

कांवड़ यात्रा की तैयारियों में जिस तरह पूर्व अनुभवों से सीख ली गई है, वह किसी योगी की साधना-प्रक्रिया जैसी ही लगती है। प्रशासन ने बीते नौ वर्षों में यात्रा को शनैः-शनैः क्रमबद्ध ढंग से सुगम बनाया है। निरंतर सुधार की प्रक्रिया ही किसी भी बड़े जनआयोजन को सफल बनाती है, और यही प्रक्रिया कांवड़ यात्रा को साल-दर-साल अधिक सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाती जा रही है। इस पूरी तैयारी का सबसे अधिक भावनात्मक पक्ष यह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे स्वतः आत्मसात कर लिया है। जब कोई मुख्यमंत्री स्वयं अधिकारियों को यह निर्देश देता है कि हर श्रद्धालु की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है, तो वह यह संदेश देता है कि राज्य की संवेदना आस्था के साथ खड़ी है। यही कारण है कि उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा की तैयारियां अब सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का रूप ले चुकी हैं। 

 

योगी सरकार के प्रयासों की वजह से ही उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा अब राज्य और समाज के साझा संकल्प का प्रतीक है। जब लाखों कांवड़िए कंधे पर गंगाजल लिए उत्तर प्रदेश की सड़कों पर उतरेंगे, तो उनके पीछे एक ऐसा तंत्र सक्रिय रहेगा जो हर कदम पर उनकी सुरक्षा, सुविधा और सम्मान का ध्यान रखेगा, क्योंकि सरकार जानती है कि वह किसी सामान्य यात्री की नहीं, शिव के उस अंश की सेवा कर रही है जो हर कांवड़िए के भीतर बसता है।

यही भाव इस यात्रा को निर्विघ्न बनाने की सबसे बड़ी गारंटी है, और यही भाव उत्तर प्रदेश को हर वर्ष इस दायित्व के लिए और अधिक तैयार करता जा रहा है और इसी भाव की वजह से उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में लोगों को इंतजार है सावन के पहले दिन का। श्रद्धालुओं का मन श्रद्धा-आस्था से सराबोर है। जोश अभी से ही हिलोंरे लेने लगा है कि कब वह वक्त आए कि वे कंधे पर कांवड़ लेकर बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार, गोमुख और गंगोत्री की ओर बढ़ चलें। (लेखक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी में प्रोफेसर हैं) 

 

 

भारी चूड़ियों से हो गई हैं परेशान! इस सावन ट्राई करें कांच के ये 7 स्टाइलिश कंगन

सावन जैसे ही शुरू होता है हरे रंग की चूड़ियों और कंगनों की रौनक बाजारों में बढ़ जाती है। ऐसे में मार्केट में अब हल्के, स्टाइलिश और कम्फर्टेबल कांच के कंगन महिलाओं और कॉलेज-ऑफिस जाने वाली गर्ल्स को खूब भा रही हैं।

कर्व कंगन (Curve Bangles)

इस सावन कर्व डिजाइन वाले कंगन महिलाओं और गर्ल्स को खूब पसंद आ रहे हैं। इनका हल्का टेढ़ा-मेढ़ा पैटर्न इन्हें दूसरे कंगनों से अलग और स्टाइलिश लुक देता है। ऑफिस जाने वाली महिलाएं और कॉलेज गर्ल्स इन्हें सिंगल पहनना ज्यादा पसंद कर रही हैं। इनकी शुरुआती कीमत करीब 80 रुपये से शुरू होती है।

 

मल्टी कलर कंगन (Multicolor Bangles)

एक ही कंगन में कई रंगों का खूबसूरत कॉम्बिनेशन परफेक्ट लगते हैं, मल्टी कलर कंगन भी अच्छा ऑप्शन हैं। इनकी अट्रैक्टिव डिजाइन हर तरह के एथनिक और फ्यूजन आउटफिट के साथ आसानी से मैच हो जाती है। महिलाएं इन्हें जोड़ी बनाकर पहनना पसंद करती हैं। इनकी कीमत 150 रुपये से शुरू होती है।

स्टार-स्टोन कंगन (Star & Stone Bangles)

ये कंगन देखने में काफी अट्रैक्टिव लगते हैं जो स्टार और स्टोन वर्क से सजे होते है। हल्के कांच से बने होने के कारण इन्हें लंबे समय तक पहनने में भी कोई परेशानी नहीं होती। ये त्योहारों के साथ-साथ ऑफिस और छोटी-छोटी फैमिली फंक्शन के लिए भी परफेक्ट हैं। इनकी शुरुआती कीमत 100 रुपये जोड़ी से शुरू होती है।

हरे बोरोसिल कंगन (Green Borosil Bangles)

सावन में हरे रंग के कंगनों की मांग सबसे ज्यादा रहती है। बोरोसिल कांच से बने ये कंगन हल्के, मजबूत और कम्फर्टेबल होते हैं। महिलाएं इन्हें रोजाना पहन सकती हैं और ये आसानी से हर तरह के ट्रेडिशनल आउटफिट के साथ मैच हो जाते हैं। इनकी शुरुआती कीमत 50 रुपये से शुरू होती है।

वाटर कलर कंगन (Water Color Bangles)

वाटर कलर कंगन ट्रांसपेरेंट और यूनिक लुक की वजह से तेजी से ट्रेंड में आ रहे हैं। इनका ग्लासी फिनिश कलाई की खूबसूरती को और बढ़ा देता है। इन्हें सिंगल पहनने का ट्रेंड भी पॉपुलर हो रहा है, जिससे सिंपल लुक भी स्टाइलिश नजर आता है।

सिंगल कंगन स्टाइल (Single Bangle Style)

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कई महिलाएं और गर्ल्स दोनों हाथों में ज्यादा चूड़ियां पहनने की बजाय सिर्फ एक स्टाइलिश कंगन पहनना पसंद कर रही हैं। यह स्टाइल ऑफिस, कॉलेज और डेली वियर के लिए परफेक्ट होते है।

बोरोसिल ग्लास कंगन (Borosil Glass Bangles)

This may contain: green and yellow bangies with gold accents

बोरोसिल ग्लास से बने कंगन हल्के वजन वाले और मजबूत होते हैं। ये जल्दी टूटते नहीं हैं और लंबे समय तक आराम से पहने जा सकते हैं। बाहर काम करने वाली और ऑफिस जाने वाली महिलाओं के बीच इनकी बहुत डिमांड है।

Gold Price Today: सावन के पहले सोमवार को सोना फिसला, दिल्ली में ₹132240 पर आया 22 कैरेट

देश में सोने की कीमत में गिरावट नजर आ रही है। सावन के पहले सोमवार को ज्यादातर शहरों में दाम फिसला है। 3 अगस्त की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत घटकर 144360 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। मुंबई में कीमत 144210 रुपये प्रति 10 ग्राम है। बीते एक सप्ताह में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 710 रुपये तक ​गिरी। वहीं 22 कैरेट गोल्ड का भाव 750 रुपये तक नीचे आया।

रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना महंगा हुआ है। कीमत बढ़कर 4,067.06 डॉलर प्रति औंस हो गई है। इसकी वजह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जल्द समझौते की उम्मीद जताई है और नया हमला करने का फैसला टाल दिया है। इसके कारण महंगाई और ऊंची ब्याज दरों को लेकर चिंताएं कुछ कम हुईं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 144360 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132240 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 132190 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 144210 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 144600 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 132550 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 144210 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 132190 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली132240144360
मुंबई132190144210
अहमदाबाद132240144260
चेन्नई132550144600
कोलकाता132190144210
हैदराबाद132190144210
जयपुर132240144360
भोपाल132240144260
लखनऊ132240144360
चंडीगढ़132240144360

Silver Price Outlook: चांदी इस साल ₹65000 सस्ती हुई, एक्सपर्ट्स से जानिए अब दाम घटेंगे या बढ़ेंगे

चांदी का भाव

चांदी की कीमत में भी देश के अंदर गिरावट है। 3 अगस्त की सुबह चांदी 234900 रुपये प्रति किलोग्राम पर है। बीते एक सप्ताह में इसका भाव 5000 रुपये ​लुढ़का। रॉयटर्स के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत बढ़कर 58.02 डॉलर प्रति औंस हो गई है।

LIVE: दतिया, बांकीपुर और मांजलपुर उपचुनाव के लिए मतगणना

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Latest News Today Live Updates in Hindi : मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना कुछ ही देर में शुरू होगी। पल पल की जानकारी…

-मध्यप्रदेश की दतिया, बिहार की बांकीपुर और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के लिए मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होगी।

-दतिया उपचुनाव में नतीजों से पहले कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती सस्पेंड, भितरघात के आरोपों के बाद कार्रवाई।

सावन के पहले सोमवार पर देशभर के शिव मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु। पूजा-अर्चना और अभिषेक का दौर जारी।

योगी सरकार ने महिला कावड़ियों के लिए किए विशेष प्रबंध, जलाभिषेक करने उमड़ पड़ी नारीशक्ति

Yogi government makes special arrangements for female Kanwariyas

– प्रयागराज में महिला शिवभक्तों के लिए संगम और गंगा के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए

– सुविधा और सुरक्षा के वातावरण में नदियों का पवित्र जल लेकर काशी के लिए प्रस्थान कर रहीं हैं महिला शिवभक्त 

– आपदा सखियों ने भी महिला शिवभक्तों की मदद के लिए घाटों और मार्गों पर संभाला मोर्चा

– महिला शिव भक्तों के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम, महिला पुलिस फोर्स की हुई तैनाती

Uttar Pradesh News : कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा, उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की प्राथमिकता है। इसका असर श्रावण मास में चल रही कांवड़ यात्रा पर भी दिख रहा है। कांवड़ यात्रा कर रहे शिवभक्तों में महिला शिवभक्तों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। इन महिला शिव भक्तों की सुरक्षा और सुविधाओं को विशेष प्राथमिकता दी गई है। 

 

घाटों में महिला पुलिस कर्मियों की तैनाती

पवित्र श्रावण मास में शिवभक्त कावड़ियों की कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम एवं सकुशल संपन्न कराने के योगी सरकार के निर्देश के क्रम में प्रयागराज में भी यात्रा मार्ग, कांवड शिविरों, भंडारों एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिगत व्यवस्था की गई है।

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संगम नगरी प्रयागराज में कांवड़ लेकर चलने वाली शिवभक्त महिला कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने महिला शिवभक्तों के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। प्रयागराज में दशाश्वमेध और संगम घाट से सबसे अधिक महिला कांवड़ियां जल लेकर काशी के लिए निकलती हैं। डीएम प्रयागराज मनीष कुमार वर्मा बताते हैं कि महिला शिव भक्तों के लिए संगम और गंगा नदी के प्रमुख घाटों पर चेंजिंग रूम और महिला सहायता केंद्र बनाए गए हैं।

घाटों पर महिला पुलिस कर्मियों के दस्ते तैनात हैं। आजीविका मिशन की 44 आपदा सखियां भी महिला कांवड़ियों की मदद के लिए मुस्तैद हैं। इसके अलावा प्रयागराज से वाराणसी के बीच बनाए गए कांवड़ पथ में भी प्रमुख स्थानों में जगह-जगह महिला पुलिस एवं वॉलिंटियर्स मुस्तैद हैं। मनकामेश्वर, सोमेश्वर महादेव , ब्रह्मेश्वर महादेव सहित शहर के सभी प्रमुख शिव मंदिरों में महिला सुरक्षा कर्मी मुस्तैद हैं। 

 

नारी शक्ति ने उठाई कांवड़, निर्भय होकर कर रहीं जलाभिषेक

 भगवान शंकर की आराधना के लिए श्रावण मास में महिलाओं की जितनी लंबी कतारें शिवालयों में लगती थीं, अब उतनी ही उनकी भागीदारी अब कांवड़ यात्रा में भी दिख रही है। छोटे कस्बों और गांवों से बड़ी संख्या में महिला शिवभक्त घरों से निकल कर कांवड़ यात्रा पर जा रही हैं।

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प्रयागराज के दारागंज के दशाश्वमेध घाट में गंगा जी से जल लेकर काशी के लिए कांवड़ यात्रा पर निकली ज्योति कहती हैं कि अब महिलाएं रास्ते में सुरक्षित हैं, किसी तरह का भय नहीं है इसलिए उनके कस्बे भरवारी से कई महिलाएं कांवड़ यात्रा में जा रही हैं। 
 

सदियापुर की मीरा देवी भी परिवार के आठ सदस्यों के साथ प्रयागराज के दशाश्वमेध घाट से जल लेकर बैजनाथ धाम कांवड़ यात्रा के लिए निकली हैं। मीरा देवी बताती हैं कि उनके साथ उनकी तीन पीढ़ियां इस बार यात्रा में जा रही है। उनके साथ उनकी दो बहुएं, एक बेटी और तीन नातिन भी जा रहीं हैं। इसके अलावा उनका बेटा भी साथ है। मीरा बताती हैं कि अब कांवड़ मार्गों में किसी तरह की असुरक्षा और असुविधा नहीं दिखती।

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योगी जी की सरकार आने के बाद महिला शिवभक्त हर स्थान पर सुरक्षित हैं। कांवड़ मार्ग में जगह -जगह महिला शिवभक्तों के विश्राम शिविर बनाए गए हैं। सामूहिक यात्रा में भोले बाबा का भजन और कीर्तन करते हुए पूरी उत्साह और हर्ष के साथ महिलाएं कांवड़ यात्रा में निकल रही हैं।

Traffic Diversion: सावन का पहला सोमवार कल, कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली समेत यूपी में ट्रैफिक डायवर्जन, CCTV-ड्रोन से होगी निगरानी

हिंदू धर्म के पवित्र त्योहार सावन के महीने की शुरुआत हो गई है। सावन के महीने में सोमवार को भगवान शिव की पूजा होती है। वहीं सावन का पहला सोमवार 3 अगस्त को है। सावन के पहले सोमवार और कांवड़ यात्रा को ध्यान में रखते हुए कई राज्यों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कांवड़ यात्रा शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के राज्यों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए कई जगह ट्रैफिक ट्रैफिक डायवर्जन किए गए हैं। वहीं लोगों की सुविधा के लिए जरूरी दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं, ताकि कांवड़ियों और आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनी रहे।

सावन के पहले सोमवार पर शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में भक्तों के पहुंचने की उम्मीद रहती है। प्रशासन ने श्रद्धालुओं से भीड़ कम होने के समय मंदिर आने और पुलिस व सुरक्षा कर्मियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

इन जगहों पर किया गया डायवर्जन

कांवड़ यात्रा और सावन के पहले सोमवार पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए कई राज्यों में ट्रैफिक व्यवस्था में बदलाव किया गया है। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर के कई इलाकों में कुछ रास्तों पर वाहनों का रूट बदला गया है, जबकि कांवड़ियों के लिए कई मार्ग रिजर्व किए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से यात्रा से पहले स्थानीय ट्रैफिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी है। वहीं, मेरठ सहित कई जिलों में भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कुछ समय के लिए स्कूल और कॉलेज बंद रखने का फैसला भी लिया गया है।

सीसीटीवी से की जाएगी निगरानी

सावन और कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है। बड़े शिव मंदिरों और कांवड़ मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन और विशेष सुरक्षा टीमों की मदद से लगातार निगरानी की जा रही है। हाल ही में मिली सुरक्षा संबंधी सूचनाओं को देखते हुए उत्तर प्रदेश में प्रशासन और पुलिस को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश भी दिए गए हैं।