IRCTC ने सावन के महीने में दिया भक्तो को नया तोहफा, सिरडी के साई बाबा के दर्शन करे इस सस्ते पैकेज से!

IRCTC ने श्रद्धालुओं के लिए एक खास टूर पैकेज पेश किया है। इस पैकेज के जरिए ट्रैवलर को महाराष्ट्र के तीन प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन कराए जाएंगे। यह पैकेज आपके लिए सुविधाजनक है, क्योंकि इसमें यात्रा के दौरान टिकट, होटल और आने-जाने की व्यवस्था को लेकर आपको अलग से ज्यादा भागदौड़ नहीं करनी होगी। मतलब एक ही पैकेज में यात्रा और दर्शन से जुड़ी कई सुविधाएं मिलेंगी।

 

 

ट्रैवल शेड्यूल

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यह टूर कुल 5 दिन और 4 रातों का है। जर्नी हर गुरुवार को शुरू होगी और सोमवार को वापस लौटेंगे। सफर पुष्पक एक्सप्रेस (12533/12534) से होगा। पैसेंजर कानपुर सेंट्रल, उन्नाव, ऐशबाग, बादशाह नगर या गोमती नगर से ट्रेन पकड़ सकते हैं। गुरुवार शाम ट्रेन से निकलने के बाद रातभर सफर रहेगा और शुक्रवार दोपहर करीब 4:15 बजे मनमाड स्टेशन पहुंचेंगे।

 

 

दर्शनीय तीर्थ स्थल

Sanskar

मनमाड स्टेशन पहुंचने के बाद IRCTC की एसी गाड़ी पैसेंजर को शिरडी के होटल तक लेकर जाएगी। होटल में आराम करने के बाद शाम को साईं बाबा के दर्शन के लिए समय मिलेगा। शनिवार सुबह नाश्ते के बाद त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग और शनि शिंगणापुर मंदिर के दर्शन कराए जाएंगे। दर्शन के बाद वापस शिरडी के होटल में लौटकर आराम किया जा सकेगा। लेकिन दोपहर के खाने का खर्च पैसेंजर को खुद उठाना होगा।

 

 

 

पैकेज फैसिलिटीज

पैकेज में 2AC या थर्ड इकोनॉमी में आने-जाने का कन्फर्म ट्रेन टिकट शामिल है। शिरडी में दो रात होटल में ठहरने के साथ दोनों दिन सुबह का नाश्ता भी मिलेगा। स्टेशन से होटल और मंदिरों तक आने-जाने के लिए शेयरिंग बेस पर एसी गाड़ी की सुविधा रहेगी। पैसेंजर की सुरक्षा के लिए ट्रैवल इंश्योरेंस भी पैकेज में शामिल है। पैकेज की शुरुआती कीमत करीब ₹14,145 से ₹14,910 के बीच है।

 

 

कैंसिलेशन पॉलिसी

यात्रा से 15 दिन पहले टिकट कैंसिल करने पर सिर्फ ₹250 काटे जाएंगे। 8 से 14 दिन पहले कैंसिल करने पर कुल राशि का 25 प्रतिशत और 4 से 7 दिन पहले कैंसिल करने पर 50 प्रतिशत राशि काटी जाएगी। यदि ट्रिप में 4 दिन से कम समय बचा है, तो कैंसिलेशन पर कोई रिफंड नहीं मिलेगा। बुकिंग के लिए IRCTC Tourism की ऑफिशल वेबसाइट irctctourism.com पर जाकर सीट बुक की जा सकती है।

 

शिरडी, त्र्यंबकेश्वर और शनि शिंगणापुर जैसे पवित्र स्थलों के दर्शन करने के लिए यह टूर पैकेज परफेक्ट है। ट्रेन यात्रा, होटल, नाश्ता और घूमने की सुविधा एक ही पैकेज में मिलने से यात्रा की प्लानिंग आसान हो जाती है।

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन शिवरात्रि पर एक साथ बन रहे हैं 4 राजयोग, 4 राशियों पर बरसेगी भगवान की कृपा और मिलेगा मान-सम्मान

Sawan Shivratri 2026 Rajyog Sanyog: सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो कर इसी दिन भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इस दिन ढेरों शिवभक्त पवित्र नदियों से कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और भोलेनाथ का जलाभिषेक करते हैं। खास बात यह है कि इस साल शिवरात्रि पर एक साथ कई दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। एक तो सावन शिवरात्रि का पर्व दूसरे मंगला गौरी व्रत के साथ पड़ रहा है। इसके अलावा यह दिन ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास माना जा रहा है।

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज ने लोकल 18 को बताया कि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की विशेष स्थिति से 4 प्रभावशाली राजयोगों का निर्माण हो रहा है। इनमें हंस राजयोग, शशि आदित्य राजयोग, गजकेसरी राजयोग और बुधादित्य राजयोग शामिल हैं। इन शुभ योगों का प्रभाव सभी 12 राशियों पर देखने को मिल सकता है। लेकिन 4 राशि के जातकों के लिए यह समय विशेष फलदायी माना जा रहा है। इन राशियों को करियर में सफलता, कारोबार में लाभ, आर्थिक मजबूती और समाज में मान-सम्मान मिलने के योग बन सकते हैं। आइए जानते हैं कि वे शुभ राशियां कौन सी हैं।

इन चार राशियों को होगा लाभ

वृषभ राशि : इन शुभ योगों के बनने से वृषभ राशि के जातकों के लिए समय अनुकूल रहने वाला है। करियर में लंबे समय से अटके काम अब गति पकड़ सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां मिलने के साथ प्रमोशन के अवसर भी बन सकते हैं। व्यापारियों को नए ग्राहक मिलने और आर्थिक लाभ होने की संभावना है।

कर्क राशि : इस राशि के जातकों के लिए चारों राजयोगों का सबसे शुभ प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान आत्मविश्वास में बढ़ोतरी होगी और कार्यक्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा, जिससे महत्वपूर्ण कार्य आसानी से पूरे होंगे।

तुला राशि : इस राशि के जातकों को यह राजयोग सफलता की सीढ़ी चढ़ा सकता है। इस अवधि में व्यापार से जुड़े जातकों को अच्छे लाभ के अवसर मिल सकते हैं और करियर में आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। लंबे समय से अटके प्रोजेक्ट गति पकड़ेंगे और उन्हें पूरा करने में सफलता मिल सकती है।

कुंभ राशि : शुभ राजयोग से कुंभ राशि के जातकों की किस्मत चमक सकती है। नौकरी में बदलाव या करियर की नई शुरुआत करने की योजना बना रहे लोगों के लिए यह समय अनुकूल साबित हो सकता है। कार्यक्षेत्र में नए अवसर मिलेंगे और तरक्की के रास्ते खुल सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

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Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: आज सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर भद्रा का साया, जानें कब से कब तक रहेगी भद्रा और पूजा कैसे करें

Sawan Shivratri Mangla gauri vrat 2026: सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के साथ-साथ मां पार्वती का आशीष पाने के लिए भी सबसे उत्तम समय माना जाता है। इसमें सोमवार के दिन भोलेनाथ की पूजा, जलाभिषेक और उपवास किया जाता है। वहीं, इस माह के सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत भी करते हैं। इस साल सावन माह के दूसरे मंगलवार को मंगला गौरी व्रत के साथ बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। सावन का दूसरा मंगला गौर व्रत इस माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को पड़ रहा है, जिससे इस दिन सावन शिवरात्रि का संयोग बन रहा है। मंगला गौरी व्रत के साथ शिवरात्रि का संयोग अत्यंत शुभ माना जा रहा है। लेकिन चिंता की बात ये है इस दिन भद्रा भी रहेगी। इसलिए आइए जानें, आज भद्रा का क्या समय है और पूजा के लिए भद्रा रहित मुहूर्त क्या होगा ?

सावन चतुर्दशी तिथि और समय

सावन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि हिंदू पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त को सुबह 4.55 मिनट से लेकर रात में 1.52 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि में सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत 11 अगस्त को रखा जाएगा। सावन शिवरात्रि पर इस दिन भद्रा भी लग रही है। सावन शिवरात्रि पर पूजा और व्रत संकल्प करने के लिए सबसे उत्तम मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त होगा, जो सुबह 04:22 बजे से 05:05 बजे तक रहेगा। इस दिन इसके बाद भद्रा काल शुरू हो जाएगा।

कब से कब तक भद्रा का प्रभाव?

12 अगस्त के दिन चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। भद्रा का पृथ्वी पर निवास चंद्रमा से देखा जाता है। जब भी चंद्र ग्रह कर्क राशि में होते हैं तो पृथ्वी पर भद्रा निवास करती है। इस दिन भद्रा का वास पृथ्वी पर रहेगा और यह सुबह 5:48 बजे सूर्योदय से लेकर दोपहर 3:22 बजे तक रहेगी। सावन शिवरात्रि, मंगला गौरी व्रत पर 9 घंटे से भी ज्यादा देर तक भद्रा रहेगी।

सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत पर शुभ योग

इस दिन शाम 6.51 मिनट तक सिद्धि योग रहेगा। सुबह 10:09 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा, फिर पुष्य नक्षत्र रहेगा।

पूजा के उत्तम मुहूर्त

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07:04 से 07:26 बजे तक

सायाह्न सन्ध्या : शाम 07:04 से 08:09 बजे तक

निशिता काल : रात 12:05 से 12:48 बजे तक

कैसे करें पूजा?

स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करें। भगवान शिव और मां पार्वती की विधिवत पूजा करें। अगर व्रत रखना है तो हाथ में पवित्र जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत रखने का संकल्प लें। फिर संध्या के समय घर के मंदिर में गोधूलि बेला में दीपक जलाएं। फिर शिव मंदिर या घर में भगवान शिव का अभिषेक करें। शिव, गौरी सहित शिव परिवार की विधिवत पूजा करें। अब सावन शिवरात्रि और मंगला गौरी व्रत की कथा सुनें। फिर आरती करें। अंत में ॐ नमः शिवाय का मंत्र-जाप करें। अंत में क्षमा प्रार्थना भी करें।

आज ये उपाय होंगे शुभ फलदायी

सावन शिवरात्रि पर 11 बेलपत्र पर सफेद चंदन से ॐ नमः शिवाय लिखें और अपनी मनोकामना कहें। फिर शिवलिंग पर अर्पित कर दें।

मंगला गौरी व्रत पर देवी पार्वती को प्रसन्न करने से लिए शृंगार का सामान चढ़ाएं। शिव और गौरी चालीसा का पाठ करें।

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सुखी दांपत्य के लिए दूसरे मंगला गौरी व्रत पर करें ये 5 उपाय, जानें मुहूर्त और पूजा विधि

Second Mangla Gauri Vrat 2026: सावन के महीने में सोमवार व्रत के साथ ही मंगलवार को मंगला गौरी व्रत भी किया जाता है। कल यानी 11 अगस्त को इस साल का दूसरा मंगला गौरी व्रत किया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना शिव भक्ति के साथ मां पार्वती की असीम कृपा प्राप्त करने के लिए भी जाना जाता है। इसमें आने वाले हर मंगलवार को महिलाएं और कुंवारी कन्याएं दांपत्य जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन सुखी दांपत्य और जीवन में खुशहाली के लिए 5 खास उपाय विशेष रूप से फलदायी माने जाते हैं।

पूजन के शुभ मुहूर्त (11 अगस्त 2026)

पूजा के लिए सावन के इस पावन दिन पर निम्नलिखित शुभ मुहूर्त रहेंगे:

ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः साधना): सुबह 04:49 बजे से 05:34 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ समय): दोपहर 12:18 बजे से 01:09 बजे तक

विजय मुहूर्त (शुभ कार्य हेतु): दोपहर 02:52 बजे से 03:43 बजे तक

गोधूलि मुहूर्त: शाम 07:09 से 07:31 तक

संध्या पूजा: शाम 07:09 से 08:16 तक

पूजन विधि

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ व लाल/पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर निम्न मंत्र से व्रत का संकल्प लें।

एक साफ चौकी पर लाल या सफेद वस्त्र बिछाकर मां मंगला गौरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। मां के समक्ष आटे से बना 16 बत्तियों वाला घी का दीपक प्रज्वलित करें।

माँ का ध्यान करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें: “कुंकुमागुरुलिप्तांगा सर्वाभरणभूषिताम्। नीलकण्ठप्रियां गौरीं वन्देहं मंगलाह्वयाम्॥”

इसके बाद मां का विधि-विधान से षोडशोपचार पूजन करें।

मां मंगला गौरी की पूजा में 16 की संख्या का विशेष महत्व है। मां को 16 मालाएं, 16 लौंग, 16 सुपारियां, 16 इलायची, 16 चूड़ियां, सुहाग की 16 सामग्रियां, फल, पान, लड्डू और मिठाई अर्पित करें। साथ ही 5 प्रकार के सूखे मेवे और 7 प्रकार के अनाज (गेहूँ, उड़द, मूँग, चना, जौ, चावल और मसूर) अर्पित करें।

व्रत कथा का पाठ करें या श्रद्धापूर्वक सुनें। अंत में आरती करें। इस व्रत में एक ही समय शुद्ध सात्विक अन्न ग्रहण करने का विधान है।

भाग्य बदलने वाले 5 अचूक उपाय

16 श्रृंगार का दान : विवाह में रही बाधाएं दूर करने के लिए अविवाहित कन्याएं इस दिन मां मंगला गौरी को सुहाग की 16 वस्तुएं अर्पित करें और पूजा के बाद इन्हें किसी सुहागिन स्त्री को दान कर दें।

लाल पुष्प और शहद : यदि दांपत्य जीवन में तनाव या अनबन रहती है, तो मां मंगला गौरी को 16 लाल गुड़हल के फूल और शहद अर्पित करें। इसके बाद “ॐ ह्रीं मंगला गौर्यै नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।

16 बत्तियों का दीपक : इस दिन संध्या समय घर के मंदिर में आटे का 16 बत्तियों वाला दीपक जलाएं और उसमें थोड़ा-सा कपूर डाल दें। इससे घर की दरिद्रता दूर होती है और धन वृद्धि के योग बनते हैं।

अन्न व वस्त्र दान : पूजा के पश्चात 7 प्रकार के अनाज का मिश्रण बनाकर किसी जरूरतमंद को दान करें। साथ ही किसी वृद्ध सुहागिन स्त्री के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें।

मंगल दोष शांत करने का उपाय : यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष के कारण जीवन में परेशानियां आ रही हैं, तो मंगला गौरी पूजा के समय मां को 16 छोटी इलायची और 16 बताशे चढ़ाएं और बाद में इसे प्रसाद स्वरूप परिवार में बांट दें।

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कंधे पर खूब जच रही है ये 7 ट्रेंडी डिजाइन, सावन में आया मेहंदी का नया अंदाज!

सावन और त्योहारों के मौके पर मेहंदी लगाना हर किसी को पसंद आता है। इस बार हाथों और पैरों की मेहंदी से कुछ अलग ट्रेंड अपनाया जा सकता है। कंधे पर बनी मेहंदी डिजाइन इन दिनों काफी पसंद की जा रही है। स्लीवलेस ब्लाउज, ऑफ-शोल्डर ड्रेस और फ्यूजन आउटफिट के साथ कंधे की मेहंदी बहुत खूबसूरत लगती है।

 

मंडला फ्लोरल डिजाइन

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मंडला और फूलों से बनी मेहंदी कंधे पर बेहद सुंदर दिखाई देती है। डिजाइन की शुरुआत बीच में बने गोल मंडला से होती है, जिसके चारों तरफ छोटी पंखुड़ियां, पत्तियां और महीन बेलें बनाई जाती हैं। कंधे के गोल हिस्से पर यह पैटर्न खूबसूरत लगते है। हल्के रंग के कपड़ों या स्लीवलेस ब्लाउज के साथ यह डिजाइन खास तौर पर उभरकर दिखाई देता है।

 

मोर वाली मेहंदी

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सावन के मौसम में मोर का डिजाइन काफी खूबसूरत लगता है। कंधे पर गर्दन के पास मोर शेप बनाकर उसके पंखों को बारीक पैटर्न से सजाते है। इसके साथ छोटी बेलें, फूल और पत्तियां जोड़ने से डिजाइन और भी अट्रैक्टिव बन जाता है। मोर की लंबी आकृति कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बनाई जाए, तो पूरा पैटर्न ज्यादा स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

ज्वेलरी स्टाइल मेहंदी

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भारी गहनों के बजाय कंधे पर ज्वेलरी जैसा मेहंदी पैटर्न काफी अलग अंदाज देता है। इसमें नेकलेस, चेन, झूमर और मोतियों जैसी आकृतियां बनाई जाती हैं। कंधे के ऊपरी हिस्से से शुरू होकर डिजाइन को नीचे की ओर हल्का फैलाया जा सकता है। मेहंदी की बारीक लाइनें इसे ज्वेलरी लुक देती हैं। साड़ी, लहंगा या फ्यूजन आउटफिट के साथ यह डिजाइन काफी रॉयल नजर आता है।

 

बोहो मेहंदी डिजाइन

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बोहो स्टाइल मेहंदी में ट्रेडिशनल पैटर्न के साथ मॉडर्न मोटिफ्स का ब्लेंड देखने को मिलता है। मंडला, छोटी चेन, लटकन, पत्तियां और ज्योमेट्रिक आकृतियां इस डिजाइन का हिस्सा बन सकती हैं। कंधे पर इसे हल्के और खुले पैटर्न में बनाया जाता है। यह डिजाइन इंडो-वेस्टर्न या वेस्टर्न आउटफिट के साथ अच्छा लगता है।

 

अरैबिक फ्लोरल डिजाइन

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अरैबिक मेहंदी में बड़े फूल, पत्तियां और घुमावदार बेलें प्रमुख होती हैं। कंधे पर इस डिजाइन को एक तरफ से शुरू करके बांह की ओर बढ़ाया जा सकता है। मोटी आउटलाइन और बीच में खाली जगह होने के कारण यह डिजाइन दूर से भी साफ दिखाई देता है। ज्यादा भरी हुई मेहंदी पसंद न करने वालों के लिए यह स्टाइल अच्छा रहता है।

 

मिनिमल टैटू मेहंदीThis may contain: the back of a woman's shoulder with henna tattoos on it and flowers

छोटे और साफ डिजाइन पसंद करने वालों के लिए मिनिमल टैटू मेहंदी काफी अच्छी रहेगी। कंधे पर छोटा फूल, तितली, चांद, पत्ती, स्टार या कोई सुंदर प्रतीक बनाया जा सकता है। सावन के मौके पर बेलपत्र, त्रिशूल, डमरू या ॐ जैसे छोटे मोटिफ्स भी शामिल किए जा सकते हैं। डिजाइन छोटा होने के बावजूद कंधे पर काफी स्टाइलिश दिखाई देता है।

 

बेल और पत्तियों वाली डिजाइन

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कंधे से बांह की तरफ जाती हुई बेल और पत्तियों की मेहंदी बहुत नाजुक और खूबसूरत लगती है। इसमें छोटी पत्तियों, फूलों और घुमावदार बेलों को एक फ्लो में बनाया जाता है। डिजाइन को ज्यादा गहरा भरने के बजाय कुछ हिस्से खाली रखे जाते हैं, जिससे पैटर्न हल्का और क्लासी नजर आता है। स्लीवलेस सूट, ब्लाउज या ऑफ-शोल्डर ड्रेस के साथ यह डिजाइन खूबसूरत लगेगा।

 

चांद-सितारा डिजाइन

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कंधे पर चांद और सितारों वाली मेहंदी डिजाइन काफी खूबसूरत और अलग नजर आती है। इसमें एक छोटा सा चांद बनाकर उसके आसपास सितारे, छोटी पत्तियां और बारीक डॉट्स बनाए जा सकते हैं। डिजाइन को कंधे से थोड़ा नीचे तक फैलाने पर यह अच्छी लगती है। सावन के त्योहारों में यह डिजाइन स्टाइलिश लुक देती है

पुरानी साड़ियों को करें री-स्टाइल! एक ग्रीन ब्लाउज से बनाएं 7 खूबसूरत लुक

सावन के महीने में हरा रंग पहनना शुभ और खूबसूरत माना जाता है। इस समय महिलाएं हरे रंग की साड़ी, सूट और कुर्ती पहनना पसंद करती हैं। लेकिन हर बार नई साड़ी खरीदना जरूरी नहीं है। आपके पास रखा सिर्फ एक ग्रीन ब्लाउज भी कई अलग-अलग साड़ियों के साथ नया लुक दे सकता है। बस साड़ी के रंग के साथ सही ग्रीन शेड का कॉम्बिनेशन चुनना जरूरी है।

 

येलो-गोल्डन साड़ी

Charismatic Yellow Soft Silk Saree With Staring Blouse Piece – Kankaari

पीले या गोल्डन रंग की साड़ी के साथ डार्क ग्रीन ब्लाउज पहन सकती हैं। दोनों रंगों का कॉन्ट्रास्ट काफी खूबसूरत दिखाई देता है। खासकर सावन के मौके पर यह कॉम्बिनेशन ट्रेडिशनल होने के साथ थोड़ा हटके भी लगेगा। इसके साथ गोल्डन ज्वेलरी और हरी चूड़ियां पहनकर लुक को और सुंदर बनाया जा सकता है।

 

 

ब्लू-ग्रीन लुक

Latest Saree Blouse Types You Should Totally Checkout! - Bewakoof Blog

रॉयल ब्लू या गहरे नीले रंग की साड़ी के साथ लाइट ग्रीन ब्लाउज अच्छा लगेगा। ब्लाउज पर हल्का प्रिंट या डिजाइन है, तो यह लुक और भी खूबसूरत दिखाई देगा। ऑफिस, कॉलेज या किसी छोटे फंक्शन के लिए क्लासी लुक अच्छा ऑप्शन है। ज्यादा हैवी ज्वेलरी की जगह छोटी इयररिंग्स के साथ इसे स्टाइल कर सकती हैं।

 

 

व्हाइट-गोल्डन साड़ी

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व्हाइट और गोल्डन बॉर्डर वाली साड़ी के साथ डार्क ग्रीन ब्लाउज पहनकर खूबसूरत ट्रेडिशनल लुक पाया जा सकता है। केरल स्टाइल की सफेद और गोल्डन साड़ी पर इसे जरूर ट्राई करें। ग्रीन ब्लाउज इस सिंपल साड़ी में रंग जोड़ देगा और पूरा लुक काफी एलिगेंट दिखाई देगा।

 

 

पिंक-ग्रीन कॉम्बिनेशन

Rani Pink Paithani Silk Saree with Green Blouse

गुलाबी साड़ी के साथ लाइट ग्रीन ब्लाउज का कॉन्ट्रास्ट काफी प्यारा लगता है। पिंक हैवी या डिजाइनर साड़ी के साथ हल्के हरे रंग का ब्लाउज लुक को बैलेंस करता है। यदि साड़ी पहले से ही काफी हैवी है, तो ब्लाउज को सिंपल रखें।

 

 

ब्रोकेड ब्लाउज

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यदि ब्रोकेड ब्लाउज है, तो उसे भी दोबारा स्टाइल कर सकती हैं। इसे पिंक, पिस्ता ग्रीन या ऑलिव ग्रीन जैसे हल्के रंगों की साड़ी के साथ पहनें। ब्रोकेड का डिजाइन पूरे लुक को रिच और ट्रेडिशनल बना देगा। यह कॉम्बिनेशन शादी, पूजा या किसी त्योहार के लिए अच्छा रहेगा।

 

लाइट ग्रीन ब्लाउज

Search – City Center

लाइट ग्रीन ब्लाउज को सिर्फ एक रंग की साड़ी तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। इसे कई सिंगल कलर की साड़ियों के साथ कंट्रास्ट करके पहना जा सकता है। इससे पुरानी साड़ी भी नए लुक में नजर आएगी। सावन का टच देने के लिए इसके साथ हरी चूड़ियां, ग्रीन एक्सेसरीज और हरी बिंदी पहन सकती हैं।

 

ऑरेंज-सिंदूरी साड़ी

Orange and Green Floral Design Pure Silk Saree with Self Border

ब्राइट ऑरेंज या सिंदूरी रंग की साड़ी जिसे आप लंबे समय से नहीं पहन पाई हैं, तो उसके साथ डार्क ग्रीन ब्लाउज ट्राई करें। ग्रीन ब्लाउज ऑरेंज के ब्राइट रंग को थोड़ा बैलेंस करता है और दोनों रंगों का कॉन्ट्रास्ट काफी शानदार लगता है। सावन के लिए यह कॉम्बिनेशन ट्रेडिशनल के साथ-साथ स्टाइलिश भी नजर आएगा।

Gold Rate Today: सावन के दूसरे सोमवार को सोना हुआ सस्ता, 10 बड़े शहरों में इतनी रह गई कीमत

देश में सावन मास के दूसरे सोमवार यानि कि 10 अगस्त को सोने की कीमत में गिरावट है। राजधानी दिल्ली में सुबह के वक्त 24 कैरेट गोल्ड की कीमत गिरकर 152540 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गई। मुंबई में कीमत घटकर 152340 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई है। अन्य शहरों में भी ​सोने का भाव गिरा है। बीते एक सप्ताह में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 8180 रुपये तक ​बढ़ी। वहीं 22 कैरेट गोल्ड 7600 रुपये तक महंगा हुआ। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,336.02 डॉलर प्रति औंस पर है।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमतदिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 152540 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139840 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 139640 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 152340 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 151630 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 139000 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 152340 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 139640 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली139840152540
मुंबई139640152340
अहमदाबाद139740152440
चेन्नई138990151630
कोलकाता139640152340
हैदराबाद139640152340
जयपुर139840152540
भोपाल139740152440
लखनऊ139840152540
चंडीगढ़139840152540

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चांदी की कीमत

सोने की तरह चांदी की कीमत में भी गिरावट दिख रही है। 10 अगस्त की सुबह कीमत 244900 रुपये प्रति किलोग्राम है। बीते सप्ताह में चांदी का भाव 10000 रुपये ​बढ़ा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत 63.29 डॉलर प्रति औंस पर है।

Hariyali Teej: हरियाली तीज की थाली में जरूर रखें ये 5 मिठाइयां, घरवालों से लेकर मेहमान तक पूछेंगे रेसिपी

सावन की फुहारों के बीच आने वाला हरियाली तीज का त्योहार भारतीय परंपरा, आस्था और उत्साह का खूबसूरत संगम माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस पर्व पर महिलाएं सजने-संवरने के साथ व्रत, पूजा और कई पारंपरिक रस्मों में शामिल होती हैं। हरी साड़ी, चूड़ियों की खनक, हाथों में रची मेहंदी और झूलों की मस्ती इस दिन के माहौल को और खास बना देती है। परिवार और सहेलियों के साथ मिलकर त्योहार मनाने की खुशी के बीच खानपान का भी अपना अलग महत्व रहता है। खासकर घर में तैयार की गई पारंपरिक मिठाइयां तीज की थाली को पूरा करती हैं और उत्सव में मिठास घोलती हैं।

अगर आप इस बार हरियाली तीज पर कुछ स्वादिष्ट और पारंपरिक बनाना चाहती हैं, तो कुछ ऐसी मिठाइयां हैं जिन्हें आसानी से सेलिब्रेशन का हिस्सा बनाया जा सकता है। ये विकल्प त्योहार के स्वाद के साथ देसी परंपरा का अहसास भी कराएंगे।

घर की बनी मिठाइयों से बढ़ाएं त्योहार की खुशी

हरियाली तीज पर गुड़, नारियल, मावा और सूजी जैसी चीजों से तैयार होने वाली देसी मिठाइयों का खास महत्व है। घर पर तैयार की गई मिठाई में स्वाद के साथ शुद्धता का भरोसा भी रहता है। यही वजह है कि आज भी कई घरों में तीज के मौके पर पारंपरिक मिठाइयां जरूर बनाई जाती हैं।

ओट्स बर्फी

अगर आप पारंपरिक मिठाई में थोड़ा मॉडर्न टच देना चाहती हैं, तो ओट्स बर्फी ट्राई कर सकती हैं। ओट्स, दूध पाउडर, देसी घी, गुड़, दूध, इलायची, काजू, बादाम और नारियल के बुरादे से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वादिष्ट होने के साथ अलग विकल्प भी है। तीज पर परिवार वालों का मुंह मीठा कराने के लिए इसे बनाया जा सकता है।

नारियल लड्डू

हरियाली तीज के लिए नारियल के लड्डू भी बढ़िया विकल्प हैं। इन्हें बनाने में ज्यादा झंझट नहीं होती और स्वाद भी हल्का व स्वादिष्ट रहता है। अगर आप रिफाइंड चीनी से बचना चाहती हैं, तो लड्डुओं में गुड़ का इस्तेमाल कर सकती हैं। त्योहार के लिए यह झटपट तैयार होने वाली मिठाई है।

घेवर

हरियाली तीज और घेवर का रिश्ता काफी पुराना है। सावन आते ही बाजारों में घेवर की मांग बढ़ जाती है। कुरकुरा घेवर, ऊपर से मलाई या रबड़ी और ड्राई फ्रूट्स—त्योहार के मौके पर यह कॉम्बिनेशन मिठास को और खास बना देता है। हालांकि इसे घर पर बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन तीज की थाली में घेवर हो तो त्योहार का मजा दोगुना हो जाता है।

रबड़ी

सावन में रबड़ी का स्वाद भला कौन भूल सकता है। गाढ़े दूध से तैयार होने वाली यह पारंपरिक मिठाई खास मौकों पर खूब पसंद की जाती है। व्रत रखने वाली महिलाएं भी अपनी पसंद और व्रत के नियमों के अनुसार इसका सेवन कर सकती हैं। इसे तैयार करने में थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन इसका स्वाद मेहनत की पूरी भरपाई कर देता है।

मालपुआ

मालपुआ भी ऐसी पारंपरिक मिठाई है, जिसे कई जगह शुभ अवसरों से जोड़कर देखा जाता है। आटे या मैदे के घोल से तैयार होकर घी में सिकने वाला मालपुआ ऊपर से चाशनी या रबड़ी के साथ परोसा जाए तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है। हरियाली तीज पर घरवालों के लिए इसे बनाकर त्योहार की मिठास बढ़ाई जा सकती है।

इस तीज पर थाली में परोसें परंपरा और स्वाद

हरियाली तीज सिर्फ व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि परिवार के साथ खुशियां बांटने का अवसर भी है। ऐसे में घर पर तैयार की गई पारंपरिक मिठाइयां त्योहार के स्वाद को खास बना सकती हैं। चाहे आप ओट्स बर्फी जैसे नए विकल्प को चुनें या घेवर, रबड़ी और मालपुआ जैसी सदाबहार मिठाइयों को हर विकल्प तीज के जश्न में अपनी अलग मिठास घोल सकता है।

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Kamika Ekadashi 2026 Katha: आज द्विपुष्कर योग में कामिका एकादशी का व्रत आज, पूजा में जरूर सुनें ये व्रत कथा और जानें आज पूजा का मुहूर्त

Kamika Ekadashi 2026 Katha: कामिका एकादशी व्रत भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के बाद पहला एकादशी व्रत होता है। यह उपवास सावन में कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से ब्रह्म हत्या की दोष से मुक्ति मिलती है, पाप मिटते हैं और श्री हरि की कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत की पूजा में भक्तों को कामिका एकादशी की व्रत कथा जरूर सुननी चाहिए।

माना जाता है कि ऐसा करने वाले श्रद्धालुओं को वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल मिलता है। इस साल कामिका एकादशी का व्रत 9 अगस्त रविवार को है। इस दिन द्विपुष्कर योग बन रहा है। इस योग में व्रत, पूजा पाठ, जप, तप और शुभ काम करने का आपको दोगुना फल प्राप्त होगा। आइए जानें कामिका एकादशी की व्रत कथा, मुहूर्त और पारण समय के बारे में।

कामिका एकादशी 2026 मुहूर्त और पारण समय

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का प्रारंभ : 8 अगस्त, दोपहर 1:59 बजे से

सावन कृष्ण एकादशी तिथि का समापन : 9 अगस्त, 11:04 एम पर

कामिका एकादशी पूजा मुहूर्त : सुबह 07:27 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

लाभ-उन्नति मुहूर्त : सुबह 09:07 बजे से 10:47 बजे तक

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त : सुबह 10:47 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक

द्विपुष्कर योग : 11:04 ए एम से दोपहर 02:43 बजे तक

व्रत पारण समय : 10 अगस्त, सोमवार, सुबह 5:47 बजे से 8 बजे

द्वादशी तिथि का समापन : 10 अगस्त, सुबह 08:00 बजे

कामिका एकादशी व्रत कथा

एक बार धर्मराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी के बारे में बताने का निवेदन किया। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा कि एक बार ब्रह्मदेव ने नारद जी को एक कथा सुनाई थी, वही कथा मैं आपको सुनाता हूं-

ब्रह्माजी ने नारद मुनि को बताया कि श्रावण कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी भी कहा जाता है। जो लोग यह व्रत रखते हैं, उनको सुदर्शन चक्र धारण करने वाले भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस व्रत की कथा के अनुसार, एक गांव में एक ठाकुर रहता था। वह बड़ा ही क्रोधी था। एक दिन वो अपने घर से किसी काम के लिए निकला, तो उसका गांव के ही एक ब्राह्मण से किसी बात को लेकर वाद विवाद हो गया।

देखते ही देखते बात इतनी बिगड़ गई कि उसने क्रोध में आकर उस ब्राह्मण की हत्या कर दी। जब उसका गुस्सा शांत हुआ तो उसे अपने किए गए पाप का एहसास हुआ। उस अपराध बोध से मुक्ति के लिए उसने उस ब्राह्मण का अंतिम संस्कार करना चाहा, लेकिन गांव के अन्य ब्राह्मणों ने उसे इसकी अनुमति नहीं दी।

उस ठाकुर पर ब्रह्म हत्या का दोष था। समय व्यतीत होने के साथ-साथ उसके मन पर ब्रह्म हत्या के दोष और आत्म ग्लानि का भार बढ़ने लगा। एक दिन उसकी मुलाकात एक ऋषि से हुई। उसने ब्रह्म हत्या की घटना बताई और उससे मुक्ति का उपाय पूछा। तब उस ऋषि मुनि ने उससे कहा कि ब्रह्म हत्या से मुक्ति के लिए तुमको सावन कृष्ण एकादशी यानि कामिका एकादशी का व्रत विधिपूर्वक करना चाहिए। भगवान विष्णु की कृपा से ही तुम ब्रह्म हत्या दोष से मुक्ति पा सकते हो। इससे तुम्हारे अन्य पाप भी मिट जाएंगे।

जब श्रावण कृष्ण एकादशी आई तो उस ठाकुर ने विधिपूर्वक कामिका एकादशी व्रत किया और भगवान विष्णु की पूजा की। रात्रि जागरण के समय वह भगवान विष्णु की मूर्ति के पास सो गया। स्वप्न में भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उनकी कृपा से वह ब्रह्म हत्या दोष से मुक्त हो गया।

Sawan Shivratri 2026: सावन की शिवरात्रि पर रहेगा भद्रा का साया, जानें तारीख और क्या भद्रा में कर सकते हैं शिव-शंभु का जलाभिषेक

Sawan Shivratri 2026: इस समय भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण मास चल रहा है। यूं तो, सावन के सभी दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करने पर पुण्य मिलता है। लेकिन कुछ खास दिन ऐसे हैं, जब भगवान शिव की विशेष पूजा, उपवास और जलाभिषेक करने पर भोलेनाथ प्रसन्न होते हैं। शिवरात्रि का दिन भी इनमें से एक है। वैसे तो, हिंदू कैलेंडर के हर माह में शिवरात्रि मनाई जाती है, लेकिन सावन में आने वाली शिवरात्रि तिथि का विशेष महत्व है। शिवरात्रि का पर्व श्रावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है।

इस साल यह पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह से ही शिवालयों में शिव भक्तों की धूम रहेगी, कांवड़िये महादेव का जलाभिषेक करेंगे, कुछ लोग उपवास और विशेष पूजा या रुद्राभिषक का भी आयोजन करेंगे। पंचांग के अनुसार, माना जा रहा है कि इस साल शिवरात्रि पर भद्र लग रही है। ऐसे में श्रद्धालुओं के मन में सवाल उठ रहा है कि भद्रा काल में देवाधिदेव का जलाभिषेक किया जाएगा या नहीं? सावन शिवरात्रि की तिथि, शुभ मुहूर्त, जलाभिषेक का समय, भद्रा काल और पूजा विधि से जुड़ी संपूर्ण जानकारी नीचे दी गई है:

सावन शिवरात्रि 2026 तिथि

व्रत एवं पूजन तिथि : मंगलवार, 11 अगस्त 2026

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:43 AM

चतुर्दशी तिथि समाप्त : 12 अगस्त 2026, रात्रि 01:51 AM

भद्रा काल का समय

भद्रा का समय : 11 अगस्त 2026, प्रातः 04:56 AM से दोपहर 03:24 PM तक।

मान्यता : शास्त्रों के अनुसार भद्राकाल में शुभ या मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं, लेकिन भगवान शिव की पूजा, मंत्र जाप और भक्ति में भद्रा का दोष नहीं लगता। इसलिए भक्त पूरे दिन श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

आप पूरे दिन चतुर्दशी तिथि के दौरान जलाभिषेक कर सकते हैं। विशेष फलदाई मुहूर्त इस प्रकार हैं:

ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः 05:23 AM से 06:00 AM

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 PM से 12:58 PM

गोधूलि मुहूर्त : सायं 09:13 PM से 09:32 PM

निशिता काल (मुख्य मध्यरात्रि पूजा): 11-12 अगस्त की रात्रि 12:05 AM से 12:48 AM तक

चार प्रहर की पूजा का समय

प्रथम प्रहर : सायं 07:04 PM से रात्रि 09:45 PM

द्वितीय प्रहर : रात्रि 09:45 PM से मध्यरात्रि 12:26 AM

तृतीय प्रहर : मध्यरात्रि 12:26 AM से तड़के 03:07 AM (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : तड़के 03:07 AM से प्रातः 05:49 AM (12 अगस्त)

शिव पूजा विधि

  • सावन शिवरात्रि के दिन प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
  • मंदिर या घर पर शिवलिंग पर गंगाजल व शुद्ध जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, घी, शहद और शक्कर (पंचामृत) से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र (अखंडित), धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद आंकड़े के फूल, चंदन और भस्म चढ़ाएं।
  • पूजा करते समय ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।
  • अंत में धूप-दीप जलाकर शिव जी की आरती करें और सात्विक भोग या फल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी के पत्ते, सिंदूर, रोली, हल्दी और केतकी के फूल न चढ़ाएं।

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