‘हनुमान चालीसा का कर रहा था पाठ, सबको मरने नहीं दे सकता था…’ स्मित मच्छार ने PM मोदी को सुनाई डरावने वक्त की कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाई दुबई के कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल पर बात की। फ्लाईदुबई की दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में को-पायलट के हमले में भारतीय स्मित मच्छार घायल हो गए हैं। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित काफी इमोशनल हो गए। पीएम मोदी ने पायलट की हिम्मत और धैर्य की तारीफ की। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि देशभर के लोग उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। वहीं पीएम से बात करते हुए स्मित मच्छार ने बताया कि कैसे उन्होंने मुश्किल वक्त में संयम बनाए रखा।

पीएम से बात हुए इमोशनल हुए कैप्टन

PM मोदी के सामने घटना को याद करते हुए मच्छार इमोशनल हो गए और कहा कि, वह उस मुश्किल वक्त में वह हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे। कैप्टन के लिए हनुमान चालीसा मुश्किल वक्त में हिम्मत देने का सहारा बनी। पीएम से बात करते हुए कैप्टन स्मित मच्छार ने कहा, वह उनके सबसे बड़े आदर्श हैं और उनसे बात करना उनके लिए बहुत खास है। मच्छार ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से सीधे बात करने का मौका मिलेगा। पीएम से बातचीत के दौरान स्मित मच्छार काफी भावुक थे।

‘हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मच्छार ने पीएम से कहा, “मुझे बहुत चोटें आईं, लेकिन मैंने खुद से कहा कि मुझे उठना होगा और कुछ करना होगा। उस समय, मैंने खुद को धक्का देकर कॉकपिट का दरवाजा खोला।” पीएम मोदी ने मच्छार से बातचीत के दौरान कहा कि, भारत को अपने उन लोगों पर गर्व है, जो किसी की जान लेने के बजाय दूसरों की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जान तक जोखिम में डालने का साहस रखते हैं। मच्छार ने बताया कि ‘जब मैं मुश्किल में होता हूं तो हनुमान चालीसा पढ़ता हूं’

मुश्किल हालत का किया सामना

मच्छार ने बताया कि, जब भी वह मुश्किल में होते हैं, तो हनुमान चालीसा पढ़ते हैं। फ्लाईदुबई विमान की घटना के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही किया। उनके को-पायलट ने कॉकपिट में उन पर हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बावजूद मच्छार ने हिम्मत नहीं छोड़ी और हालात को संभालने की कोशिश करते रहे। उन्होंने चोट लगने के बाद काफी कोशिश करके कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद केबिन क्रू और यात्रियों ने आगे आकर स्थिति को काबू में किया। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में हुई इस घटना के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित रूप से इमरजेंसी लैंड कराया गया। राहत की बात थी कि विमान में सवार सभी 174 लोगों की जान बच गई।

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चीनी महिला ने रोते हुए 4 महीने के अपने बेटे को सुनाया हनुमान चालीसा, 5 सेकंड में शांत हुआ बच्चा! वीडियो वायरल

Viral Video: बच्चे के रोने पर उसे चुप कराने के लिए अक्सर माता-पिता अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। कोई उसे गोद में लेकर टहलाता है, तो कोई लोरी सुनाता है। लेकिन कैलिफोर्निया के सबसे बड़े शहर लॉस एंजिल्स में रहने वाली 40 वर्षीय चीनी बिजनेसवुमन सारा जेन हो ने अपने चार महीने के बेटे के साथ अपनाई जाने वाली कुछ पेरेंटिंग आदतों को इंस्टाग्राम पर शेयर किया है। इन आदतों में बच्चे को रोजाना सुबह लूप में हनुमान चालीसा सुनाना, बच्चे को कुत्तों के आसपास रहने देना, और उसके नंगे पैरों को प्राकृतिक सतहों (घास या जमीन) के संपर्क में आने देना शामिल है।

इस दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरीए मां बनने के अपने अनुभव के बारे में भी बताया और दूसरे माता-पिता से अपने 4 महीने के बेटे की परवरिश को लेकर सुझाव भी मांगे। सारा ने पोस्ट में बताया कि वह अपने बेटे को Baby J कहकर बुलाती हैं।

सारा अपने बच्चे को सुनाती हैं ‘हनुमान चालीसा’

उन्होंने अपनी पोस्ट में बताया कि जब Baby J चिड़चिड़ा हो जाता है या रोने लगता है, तो वह उसे हनुमान चालीसा सुनाती हैं। हनुमान चालीसा एक हिंदू धार्मिक पाठ है। सारा के मुताबिक, जैसे ही वह हनुमान चालीसा चलाती हैं, उनका बेटा करीब 5 सेकंड में शांत हो जाता है और लगभग 2 मिनट में सो जाता है।

इंडियन दोस्त ने बताया ‘हनुमान चालीसा’ के बारे में

उन्होंने बताया कि हनुमान चालीसा के बारे में उन्हें एक इंडियन दोस्त से पता चला था, जिनसे उनकी मुलाकात Burning Man फेस्टिवल के दौरान हुई थी। जो लोग नहीं जानते उन्हें बताते चलें कि Burning Man अमेरिका के नेवादा के Black Rock Desert में होने वाला एक सालाना सांस्कृतिक फेस्टिवल है, जो करीब सात दिनों तक चलता है।

Sarah ने बताया कि अब वह हर सुबह हनुमान चालीसा को लूप पर चलाती हैं, यानी इसे बार-बार सुनाती हैं।

‘मैं उसे रोते हुए छोड़ने में यकीन नहीं रखती’

सारा ने यह भी बताया कि जब उनका बच्चा रोता है, तो वह कैसे रिएक्ट करती हैं।

उन्होंने बताया, “शुरुआती 9 महीनों में बच्चे को यह एहसास नहीं होता कि वह एक अलग इंसान है, इसलिए जब भी वह रोता है, मैं उसे तुरंत गोद में उठा लेती हूं। मैं उसे रोते-रोते सो जाने देने में यकीन नहीं रखती। अगर कुछ कोशिशों करने के बाद भी वह शांत नहीं होता, तो मैं तुरंत हनुमान चालीसा चला देती हूं, जिससे वह शांत हो जाता है।”

उनकी पोस्ट में उन दूसरे तरीकों का भी जिक्र था जिन्हें उन्होंने बेबी J की दिनचर्या में शामिल किया है।

सारा ने बताया कि वह अपने बेटे को रोजाना 8 मिनट तक ब्राह्म्स की लोरी (Brahms’ Lullaby) सुनाती हैं। उनका दावा है कि कुछ डेटा से पता चलता है कि यह म्यूजिक बच्चे के दिमाग के विकास की रफ्तार बढ़ाने में मदद कर सकता है।

40 की उम्र में सरोगेसी से मां बनी हैं सारा

अपनी पोस्ट में सारा बताती हैं वे 40 साल की उम्र में सरोगेसी की मदद से मां बनी हैं. वे बताती हैं कि बच्चा अभी सरोगेट मदर का ही दूध पीता है, इसीलिए वे उनको मूंगफली और सोया मिल्क भेज रही हैं ताकि बच्चे को इनकी आदत जल्दी हो जाए और उसे एलर्जी न हो। सारा बताती हैं कि वे अपनी समझ से ऐसा कर रही हैं, हालांकि साइंटिफिकली यह कितना सही है, इसका अंदाजा उन्हें नहीं है।’

उन्होंने अपने सरोगेसी के अनुभव में दिलचस्पी रखने वाले फॉलोअर्स को अपने पॉडकास्ट ‘हॉट वॉटर’ (Hot Water) के एपिसोड 69 को सुनने के लिए भी कहा।

एलर्जी से बचाने के लिए ये सब कर रहीं सारा

बेबी जे को किसी की तरह से की तरह की एलर्जी से बचाने के लिए सारा अभी से उसे दोस्तों और पड़ोसियों के कुत्तों के संपर्क में ले जाती हैं। साथ ही साथ रोजाना उसे बगीचे में ग्राउंडिंग भी करवाती हैं। वे कहती हैं कि बच्चे के पैरों में 2 लाख से ज्यादा नर्व एंडिंग्स होते हैं, और ऐसे करने से उसके न्यूरोलॉजिकल और शारीरिक विकास में मदद मिलती है।

सारा ने अपनी पोस्ट के आखिर में दूसरे माता-पिता से सुझाव मांगे कि वे अपने चार महीने के बच्चे के साथ क्या-क्या कर सकती हैं। उन्होंने लिखा, “क्या आप मेरे साथ कुछ और टिप्स शेयर कर सकते हैं जिन्हें मैं बेबी J के साथ आजमा सकूं?”

हनुमान चालीसा वाली पोस्ट पर यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया

इंस्टाग्राम पर इन तस्वीरों और फोटोज को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और कमेंट बॉक्स मेंज जमकर प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं:-

एक यूजर ने लिखा, “हनुमान चालीसा सिर्फ एक इंडियन सॉन्ग नहीं है। यह गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित एक पवित्र भक्ति ग्रंथ है, जिसे हिंदू बहुत सम्मान देते हैं। इसे भगवान हनुमान के प्रति भक्ति और प्रार्थना के रूप में पढ़ा और गाया जाता है। कृपया एक सांस्कृतिक गीत और एक ऐसे पवित्र ग्रंथ के बीच का अंतर समझें, जिसका लाखों हिंदुओं के लिए गहरा आध्यात्मिक महत्व है।”

एक अन्य यूजर ने हनुमान चालीसा को अपनी रोजाना की पूजा का हिस्सा बताया। साथ ही, उन्होंने इसके ज्योतिषीय फायदों को लेकर भी एक दावा किया। यूजर ने लिखा, “हनुमान चालीसा मेरा रोज का मंत्र है। जिन लोगों की कुंडली में 8वें भाव में केतु होता है, उनके लिए यह बहुत फायदेमंद है। यह एक तरह की प्राकृतिक दवा है।”

एक तीसरे यूजर ने सारा के मां बनने के तरीके की तारीफ की। उन्होंने लिखा, “Baby J बहुत खुशकिस्मत है कि उसे आप जैसी मां मिली हैं।”

एक अन्य यूजर ने भगवान हनुमान से जुड़े धार्मिक पाठ सुंदरकांड का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “सुंदरकांड नाम की एक खूबसूरत किताब है, जिसमें भगवान हनुमान की महिमा बताई गई है। मेरी मां गर्भावस्था के दौरान इसका पाठ करती थीं। इससे बच्चे में भक्ति और साहस की अच्छी भावना जागती है। यह सूर्य का ज्ञान रखने वाले एक दिव्य और निस्वार्थ प्रेम करने वाले देवता की कहानी है।”

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Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।