Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।

Yash: ‘इस रोल के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया है’, रणबीर कपूर की तारीफ में यश ने कही ये बड़ी बात

Yash: शनिवार को नई दिल्ली में ‘रामायण प्रथम संकल्प’ के ट्रेलर लॉन्च का कार्यक्रम एक यादगार शाम बन गया। ऐसा न सिर्फ़ फ़िल्म की शानदार पहली झलक की वजह से हुआ, बल्कि यश के अचानक वहां पहुंचने से भी हुआ। इस इवेंट में प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा, डायरेक्टर नितेश तिवारी और फ़िल्म की कास्ट के सदस्य मौजूद थे, जिनमें रणबीर कपूर, साई पल्लवी, अरुण गोविल, सनी देओल, रवि दुबे, शोभना, रकुल प्रीत सिंह, कुणाल कपूर, अजिंक्य देव और कुमार विश्वास शामिल थे।

इस शानदार इवेंट में फिल्म की कास्ट और क्रिएटिव टीम एक साथ आई। यश, जो रावण का किरदार निभा रहे हैं और नमित मल्होत्रा ​​के साथ फिल्म को प्रोड्यूस भी कर रहे हैं, ने स्टेज पर आकर इस प्रोजेक्ट का जश्न मनाया, जिसे उन्होंने एक ‘साझा सपना’ बताया। फिल्म के ट्रेलर को मीडिया से भी ज़बरदस्त रिस्पॉन्स मिला, खासकर इसके बड़े पैमाने, विज़ुअल इफेक्ट्स और भगवान राम और रावण के बीच की टक्कर को लेकर।

दर्शकों को संबोधित करते हुए यश ने कहा, “मैं इस शानदार प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर वाकई बहुत खुश हूं। इसका पूरा श्रेय नमित मल्होत्रा ​​को जाता है। उन्होंने मुझे यह किरदार निभाने का जो मौका दिया, उसके लिए मैं उन्हें धन्यवाद देता हूं। मुझे हिंदी सीखने का भी मौका मिला। मुझे लगता है कि यह भारत का सपना है। इस फिल्म से जुड़े सभी लोग एक ही विजन और एक ही पक्के इरादे के साथ आए हैं—अपनी कहानी को ग्लोबल प्लैटफ़ॉर्म पर ले जाना। हम सभी अपने निजी हितों को एक तरफ रखकर यहां आए हैं। हमारा मकसद सिर्फ़ एक है—प्रभु श्री राम की कहानी को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाना और अपने देश में भी उनका जश्न मनाना। आप सभी का धन्यवाद।”

उन्होंने आगे कहा, “हम सब एक साथ आए हैं। इस फ़िल्म से जुड़े हर व्यक्ति का एक ही विज़न और एक ही पक्का इरादा रहा है – अपनी कहानी को ग्लोबल लेवल पर ले जाना। इसलिए हम सब अपने निजी हितों को एक तरफ़ रखकर यहां आए हैं। हमारा एकमात्र मकसद भगवान श्री राम की कहानी को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाना और अपने देश में उनका सम्मान करना है।”

यश ने इस प्रोजेक्ट पर भरोसा करने के लिए प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​को श्रेय दिया और रावण के किरदार को आकार देने में मदद के लिए डायरेक्टर नितेश तिवारी का धन्यवाद किया। उन्होंने पूरी कास्ट, खासकर रणबीर कपूर (भगवान राम) और साई पल्लवी (सीता) की तारीफ की और भरोसा जताया कि दर्शक उनके बेहतरीन काम को देखेंगे।

अपने को-स्टार्स के बारे में बात करते हुए यश ने कहा, “रणबीर, तुमने कमाल का काम किया है। मुझे लगता है कि पूरा भारत समझ जाएगा कि तुमने इस रोल के लिए खुद को कैसे समर्पित किया और कैसा जादू रचा है। वहीं, साईं तो एक शानदार एक्ट्रेस हैं ही। उन्हें सीता का रोल निभाते हुए देखना… उनकी आँखें ही सब कुछ बयां कर देती हैं। उन्होंने फिल्म की टीम का भी शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा कि नमित मल्होत्रा ​​में इतने बड़े प्रोजेक्ट को शुरू करने का साहस और पक्का इरादा था, जबकि नितेश तिवारी ने उन्हें उनके किरदार की बारीकियों को समझने में गाइड किया।

दिल्ली में हुए लॉन्च के साथ ही फिल्म के इंटरनेशनल प्रमोशन कैंपेन की शुरुआत हो गई है। इसके बाद मेकर्स 23 जुलाई को सैन डिएगो कॉमिक-कॉन में ‘रामायण’ को पेश करेंगे। ‘कल्कि 2898 AD’ के बाद यह दूसरी भारतीय फिल्म होगी जिसे ग्लोबल पॉप कल्चर इवेंट में स्पेशल प्रेजेंटेशन का मौका मिलेगा। उम्मीद है कि रणबीर कपूर, यश और प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​वहां फिल्म को रिप्रेजेंट करेंगे।