Vishal Chaturvedi: ‘हनुमान अंश’ के बाद विशाल चतुर्वेदी ने नई फिल्म का किया ऐलान, गोस्वामी तुलसीदास पर बेस्ड होगी ‘रामबोला’

Vishal Chaturvedi: ‘हनुमान अंश’ में नीम करौली बाबा की कहानी सुनाने के बाद, फिल्ममेकर विशाल चतुर्वेदी अब गोस्वामी तुलसीदास की जिंदगी को बड़े पर्दे पर लाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने ‘रामबोला’ के लिए महावीर जैन फिल्म्स के साथ हाथ मिलाया है। यह फिल्म महान संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास के जीवन पर आधारित है।

विशाल चतुर्वेदी ने अपनी अगली फिल्म ‘रामबोला’ की घोषणा की

विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित, ‘रामबोला’ तुलसीदास के सफर को दिखाएगी और उन अनुभवों को उजागर करेगी, जिन्होंने उन्हें भारतीय इतिहास के सबसे प्रभावशाली आध्यात्मिक व्यक्तित्वों में से एक बनाया। गोस्वामी तुलसीदास का प्रभाव पीढ़ियों से बना हुआ है, खासकर उनकी रचनाओं और भारत की भक्तिपूर्ण और साहित्यिक परंपराओं में उनके योगदान के माध्यम से। इस फिल्म का मकसद उस बड़ी विरासत को आज के दर्शकों तक पहुंचाना है।

गणेश चतुर्थी पर फिल्म की घोषणा करते हुए विशाल चतुर्वेदी और महावीर जैन फिल्म्स ने इंस्टाग्राम पर लिखा- “बप्पा के आशीर्वाद से इस शुभ दिन पर विनम्रता और कृतज्ञता के साथ हम आपके लिए “रामबोला” लेकर आए हैं – गोस्वामी तुलसीदास की अमर कहानी। विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित। महावीर जैन, विशाल चतुर्वेदी, अमित उपाध्याय और रघुवेंद्र सिंह द्वारा निर्मित। महावीर जैन फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत।”

विशाल चतुर्वेदी का दूसरा प्रोजेक्ट

‘रामबोला’ डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी के लिए आध्यात्मिक क्षेत्र में एक और प्रोजेक्ट है। उनकी पिछली फिल्म ‘हनुमान अंश’, नीम करौली बाबा पर केंद्रित थी और उनके जीवन और आध्यात्मिक सफर को दिखाती थी। ‘रामबोला’ के साथ, फिल्ममेकर एक बार फिर भारतीय संत परंपरा से गहराई से जुड़े व्यक्तित्व को चुन रहे हैं, इस बार आध्यात्मिकता, कविता और भारतीय साहित्य की दुनिया को एक साथ ला रहे हैं। फिल्म का निर्माण महावीर जैन, विशाल चतुर्वेदी, अमित उपाध्याय और रघुवेंद्र सिंह कर रहे हैं और इसे महावीर जैन फिल्म्स द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।

‘हनुमान अंश’ के बारे में

इस बीच, ‘हनुमान अंश’ बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। 7 अगस्त को रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस पर शुरुआत औसत रही, लेकिन दूसरे हफ्ते में फिल्म ने रफ्तार पकड़ी। अब छठे हफ्ते में फिल्म ने 200 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। अपनी रिलीज के 38वें दिन फिल्म ने भारत में 22.50 करोड़ रुपये की नेट कमाई की।

‘हनुमान अंश’ का निर्देशन और निर्माण विशाल चतुर्वेदी ने अपने बैनर स्वयंभू मीडिया नेटवर्क के तहत किया है। यह फिल्म उनकी किताब ‘डिवाइन डिटूर दैट चेंज्ड माई लाइफ’ पर आधारित है, जिसमें नीम करौली बाबा के जीवन की कहानी बताई गई है। शोभिनव सत्या और चंदन आनंद ने इसमें मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। कहानी लक्ष्मी नारायण नाम के एक युवा लड़के की है, जो आजादी से पहले के भारत में रहता था और अपनी मां की मौत के बाद भगवान की खोज में घर छोड़ देता है। उत्तर भारत में उसकी यात्रा आखिरकार उसे नीम करौली बाबा के रूप में बदल देती है।

Tulsidas Jayanti: रामभक्ति शाखा के मशहूर संत कवि तुलसीदास ने जन-जन को समझाया राम नाम परमार्थ, उनके ये 5 दोहे जिंदगी संवार देंगे

तुलसीदास जयंती 2026 आज, 19 अगस्त को पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है। यह दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास की 529वीं जयंती के रूप में मनाया जा रहा है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी रचनाओं से श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और भक्ति का संदेश लोगों तक पहुंचाया। उनकी आसान भाषा में लिखी रचनाएं आज भी लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर लोग मंदिरों में रामचरितमानस पाठ, हनुमान चालीसा, भजन-कीर्तन और सत्संग किए जाते हैं। इस दिन लोग तुलसीदास जी की शिक्षाओं से प्रेरणा लेते हैं और भगवान श्रीराम की भक्ति के साथ दया, अच्छे कर्म और परोपकार का महत्व समझते हैं। उनकी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस आज भी घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है।

तुलसीदास जी का जीवन

गोस्वामी तुलसीदास के पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी बताया जाता है। जन्म के बाद उनके माता-पिता ने उन्हें छोड़ दिया था। इसके बाद एक दासी ने उनका पालन-पोषण किया, लेकिन जब तुलसीदास जी करीब पांच साल के थे, तब उस दासी का निधन हो गया और वे अनाथ हो गए। इसके बाद नरहरिदास ने उन्हें अपनाया और अपने साथ अयोध्या ले गए। नरहरिदास ने उन्हें राम मंत्र की शिक्षा दी और भगवान श्रीराम की भक्ति का मार्ग दिखाया। आगे चलकर तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना की, जिससे रामायण की कथा आम लोगों तक आसानी से पहुंची।तुलसीदास जयंती का महत्व

तुलसीदास जयंती पंचांग के अनुसार, सप्तमी तिथि 18 अगस्त को शाम 5:50 बजे शुरू होगी और 19 अगस्त को शाम 7:19 बजे समाप्त होगी। तुलसीदास जयंती हिंदू धर्म में खास महत्व रखती है। इस दिन महान संत और कवि गोस्वामी तुलसीदास जी को याद किया जाता है। इस साल उनकी 529वीं जयंती मनाई जा रही है। तुलसीदास जी भगवान श्रीराम के बड़े भक्त थे। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना रामचरितमानस के जरिए श्रीराम की कथा और उनके आदर्शों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया। उनकी रचनाओं में भक्ति के साथ अच्छे व्यवहार, सत्य, दया, न्याय और सही रास्ते पर चलने की सीख भी मिलती है।

इस दिन भक्त भगवान श्रीराम और हनुमान जी की पूजा करते हैं। कई जगहों पर रामचरितमानस और रामायण का पाठ किया जाता है। भक्त हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने के साथ भजन-कीर्तन और सत्संग में भी शामिल होते हैं। पूजा के बाद प्रसाद बांटा जाता है। तुलसीदास जयंती पर जरूरतमंदों और ब्राह्मणों को भोजन, कपड़े और धन का दान करने की परंपरा भी है। कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। इस दिन तुलसीदास जी की शिक्षाओं को याद करते हुए लोगों को दया, सेवा और अच्छे कर्म करने की प्रेरणा दी जाती है।तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे-

1. तुलसी सब छल छांड़िकै, कीजै राम-सनेह।

अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि इंसान को अपने जीवन से छल, कपट और झूठ जैसी चीजों को दूर करके भगवान श्रीराम से सच्चा प्रेम करना चाहिए। जिस तरह कोई व्यक्ति अपने मन की बात किसी से छिपा नहीं सकता, उसी तरह भगवान भी हमारे मन के विचारों और भावनाओं को जानते हैं। वे हमारे हर अच्छे-बुरे कर्म से परिचित हैं। इसलिए भगवान की भक्ति दिखावे के लिए नहीं, बल्कि साफ मन और सच्ची श्रद्धा के साथ करनी चाहिए।2. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।

तुलसी तहां न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

अर्थ: तुलसीदास जी समझाते हैं कि जिस घर या स्थान पर पहुंचने पर लोगों के मन में हमारे लिए खुशी न हो और उनकी आंखों में प्रेम और अपनापन दिखाई न दे, वहां बार-बार नहीं जाना चाहिए। भले ही उस जगह से कितना भी धन, सम्मान या फायदा मिलने की उम्मीद हो, लेकिन जहां अपनापन और सम्मान न मिले, वहां रहना उचित नहीं है। रिश्तों में केवल लाभ नहीं, बल्कि प्रेम और स्नेह भी जरूरी होता है।

3. तुलसी काया खेत है, मनसा भयौ किसान।

पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: तुलसीदास जी ने इंसान के जीवन को एक खेत और उसके मन को किसान के समान बताया है। जिस तरह किसान खेत में जैसा बीज बोता है, उसे आगे चलकर वैसा ही फल मिलता है, उसी तरह इंसान के कर्म भी उसके जीवन का फल तय करते हैं। अच्छे काम और पुण्य करेंगे तो अच्छे परिणाम मिलेंगे, जबकि गलत काम और पाप करने पर उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ेगा। इसलिए व्यक्ति को अपने विचारों और कर्मों पर हमेशा ध्यान देना चाहिए।

4. लोग मगन सब जोग हीं, जोग जायं बिनु छेम।

त्यों तुलसी के भावगत, राम प्रेम बिनु नेम॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि लोग अपने जीवन में अलग-अलग चीजों को पाने और अपनी इच्छाओं को पूरा करने में लगे रहते हैं। लेकिन केवल किसी चीज को हासिल करना ही पर्याप्त नहीं होता, उसे संभालकर रखना भी जरूरी है। इसी तरह धार्मिक नियमों और पूजा-पाठ का पालन करना तभी सार्थक है, जब मन में भगवान श्रीराम के प्रति सच्चा प्रेम और भक्ति हो। केवल बाहरी नियमों को निभाने के बजाय मन से ईश्वर को याद करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

5. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।

बरषत वारिद-बूंद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम और भक्ति का सहारा लिए बिना जीवन के सबसे बड़े उद्देश्य को पाने की उम्मीद करना मुश्किल है। वे इसकी तुलना बारिश की बूंदों को पकड़कर आसमान पर चढ़ने की कोशिश से करते हैं, जो संभव नहीं है। इसका भाव यह है कि इंसान को अपने जीवन में भगवान की भक्ति, अच्छे कर्म और सही आचरण का सहारा लेना चाहिए। केवल इच्छा करने से जीवन का उद्देश्य पूरा नहीं होता, उसके लिए सही मार्ग पर चलना और ईश्वर के प्रति विश्वास रखना भी जरूरी है।