सनातन चेतना में पुरुषार्थ और मनुष्य

‘पुरुषार्थ’ का अर्थ है— पुरुषेण अर्थ्यते इति पुरुषार्थः, अर्थात विवेकशील मनुष्य द्वारा अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए किया गया श्रेष्ठ प्रयास। भारतीय वाङ्मय में मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ बताए गए हैं— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। धर्म नैतिक आधार है, अर्थ जीवन के लिए आवश्यक संसाधन है, काम इच्छाओं और आनंद का क्षेत्र है, जबकि मोक्ष आत्म-मुक्ति का सर्वोच्च लक्ष्य है।

वैदिक जीवन-दृष्टि की सबसे बड़ी विशेषता यह रही है कि उसने भौतिक उन्नति और आध्यात्मिक कल्याण को कभी एक-दूसरे का विरोधी नहीं माना। जहां पाश्चात्य दर्शन अक्सर या तो भौतिकवाद की ओर झुकता है या फिर पूर्ण वैराग्य की ओर, वहीं भारतीय मनीषियों ने मानव जीवन की संपूर्णता के लिए एक संतुलित, व्यावहारिक और वैज्ञानिक व्यवस्था दी, जिसे चतुर्विध पुरुषार्थ कहा जाता है।

‘पुरुषार्थ’ का अर्थ है— पुरुषेण अर्थ्यते इति पुरुषार्थः, अर्थात विवेकशील मनुष्य द्वारा अपने जीवन को सार्थक बनाने के लिए किया गया श्रेष्ठ प्रयास। भारतीय वाङ्मय में मानव जीवन के चार प्रमुख पुरुषार्थ बताए गए हैं— धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। धर्म नैतिक आधार है, अर्थ जीवन के लिए आवश्यक संसाधन है, काम इच्छाओं और आनंद का क्षेत्र है, जबकि मोक्ष आत्म-मुक्ति का सर्वोच्च लक्ष्य है। इन चारों का क्रम भी अत्यंत अर्थपूर्ण है। यह मानव चेतना के क्रमिक विकास का मार्ग दिखाता है।

इन चारों में धर्म सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण पुरुषार्थ है। महाभारत के कर्णपर्व में कहा गया है—

धारणाद्धर्ममित्याहुर्धर्मो धारयते प्रजाः।

अर्थात धर्म वही है, जो समाज को धारण करता है। यहां धर्म का अर्थ किसी संकीर्ण पूजा-पद्धति या संप्रदाय से नहीं है। धर्म वह नैतिक विवेक और आचार-संहिता है, जो मनुष्य के जीवन को संतुलित रखती है तथा अर्थ और काम को अनियंत्रित होकर विनाशकारी बनने से रोकती है।

अर्थ का संबंध धन, संपत्ति और संसाधनों से है। जीवन के निर्वाह, परिवार के पालन-पोषण, समाज की सेवा और अपने कर्तव्यों के निर्वहन के लिए अर्थ आवश्यक है। सनातन दर्शन धन या समृद्धि का विरोध नहीं करता, बल्कि उसे जीवन का आवश्यक पुरुषार्थ मानता है।

इसी प्रकार काम केवल इंद्रिय-सुख का नाम नहीं है। इसमें मनुष्य की सभी स्वाभाविक इच्छाएं, भावनाएं, सौंदर्य-बोध, प्रेम, कला, सृजनशीलता और वंश की निरंतरता का भाव भी शामिल है। जीवन में आनंद, संवेदना और रचनात्मकता के लिए काम का संतुलित और मर्यादित होना आवश्यक है।

इन सबका अंतिम लक्ष्य मोक्ष है। यही मानव जीवन का परम पुरुषार्थ है। जब मनुष्य अपने सांसारिक कर्तव्यों का पालन करते हुए अज्ञान, मोह और बंधनों से मुक्त होकर आत्मानंद को प्राप्त करता है, तब वह मोक्ष की अवस्था तक पहुंचता है।

इस दर्शन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये चारों पुरुषार्थ एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। शास्त्र स्पष्ट कहते हैं कि अर्थ और काम का उपभोग सदैव धर्म की मर्यादा के भीतर होना चाहिए। श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—

बलं बलवतां चाहं कामरागविवर्जितम्।
धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोऽस्मि भरतर्षभ।।

अर्थात— हे भरतश्रेष्ठ! मैं बलवानों का आसक्ति और स्वार्थ से रहित बल हूं तथा प्राणियों में धर्म के अनुकूल, मर्यादित काम हूं।

यह श्लोक स्पष्ट करता है कि जब अर्थ और काम धर्म से अलग हो जाते हैं, तब वे समाज में विकृति, अपराध और पतन का कारण बनते हैं। अधर्म से कमाया गया धन शोषण का रूप ले लेता है और मर्यादा से मुक्त इच्छाएं अंततः हिंसा, स्वार्थ और क्रूरता में बदल जाती हैं। इसलिए धर्म इन दोनों को सही दिशा देने वाला नियंत्रण है।

प्राचीन ऋषियों ने पुरुषार्थ चतुष्टय को केवल दार्शनिक विचार के रूप में नहीं छोड़ा, बल्कि उसे आश्रम-व्यवस्था के सामाजिक ढांचे से भी जोड़ा।

ब्रह्मचर्य आश्रम अर्थात विद्यार्थी जीवन में मनुष्य का पूरा ध्यान धर्म पर रहता है। इस समय वह अनुशासन, कर्तव्य, ज्ञान और चरित्र का निर्माण करता है। यही उसके आगे के जीवन की नींव बनता है।

गृहस्थ आश्रम समाज का आधार है। इसी अवस्था में मनुष्य अर्थ अर्जित करता है, परिवार का पालन करता है और काम का मर्यादित उपभोग करता है। लेकिन इन दोनों का आधार ब्रह्मचर्य में सीखा गया धर्म ही होता है।

वानप्रस्थ आश्रम में मनुष्य धीरे-धीरे सांसारिक आसक्ति से ऊपर उठना शुरू करता है। वह अपने अनुभव समाज को समर्पित करता है और मन को मोक्ष की दिशा में तैयार करता है।

संन्यास आश्रम में मनुष्य लौकिक बंधनों का त्याग कर परम सत्य और आत्म-मुक्ति की साधना में प्रवृत्त होता है। इस अवस्था में मोक्ष ही उसका एकमात्र लक्ष्य होता है।

आज इक्कीसवीं सदी का विश्व मानसिक तनाव, सामाजिक विघटन और नैतिक संकट से जूझ रहा है। इसका एक बड़ा कारण यही है कि पुरुषार्थों का संतुलन बिगड़ गया है। आधुनिक सभ्यता ने धर्म और मोक्ष को लगभग भुला दिया है और अर्थ तथा काम को ही जीवन का अंतिम लक्ष्य मान लिया है। परिणाम हमारे सामने है। अपार धन होने पर भी मनुष्य अवसाद से घिरा है, परिवार टूट रहे हैं, समाज में असंतोष बढ़ रहा है और युद्धों की विभीषिका गहराती जा रही है। मनुष्य के पास भौतिक साधन तो हैं, लेकिन जीवन का नैतिक मार्गदर्शन और अंतिम उद्देश्य धुंधला पड़ गया है।

चतुर्विध पुरुषार्थ का यह शाश्वत सिद्धांत हमें बताता है कि जीवन केवल भोग के लिए नहीं है और न ही संसार से भाग जाने के लिए। जीवन का उद्देश्य संसार में रहते हुए, मर्यादा और कर्तव्य के साथ कर्म करना तथा अंततः परम सत्य की ओर बढ़ना है। इसलिए पुरुषार्थ चतुष्टय कोई काल्पनिक दर्शन नहीं, बल्कि मानव जीवन को संतुलन, दिशा और पूर्णता देने वाला कालजयी जीवन-दर्शन है।

जब मनुष्य का कर्म धर्म से प्रेरित होगा, उसका अर्थ लोककल्याण में लगेगा और उसकी कामनाएं मर्यादा तथा सृजनशीलता से जुड़ी होंगी, तब वह स्वाभाविक रूप से मोक्ष की दिशा में अग्रसर होगा। यही सनातन संस्कृति का शाश्वत संदेश है।

उल्लेखनीय है कि सनातन दर्शन का एक मूल सिद्धांत यह भी है कि इस दिखाई देने वाले जगत में जो कुछ भी है, वह जड़ और चेतन के रहस्यमय संयोग का परिणाम है। सांख्य दर्शन और श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार प्रकृति निष्क्रिय या शून्य नहीं है। वह तीन मूल शक्तियों के संतुलन और असंतुलन से निरंतर संचालित होती रहती है। इन तीन शक्तियों को सत्त्व, रज और तम, अर्थात त्रिगुण, कहा गया है।

यहाँ ‘गुण’ का अर्थ किसी वस्तु के सामान्य गुण या विशेषता से नहीं है, बल्कि उन मूल प्रवृत्तियों से है, जो जीवात्मा को प्रकृति और संसार से बाँधे रखती हैं। संपूर्ण सृष्टि और मनुष्य का मन इन तीनों गुणों के अलग-अलग अनुपात से निर्मित है। श्रीमद्भगवद्गीता के चौदहवें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण इन तीनों गुणों का अत्यंत सरल और गहन वर्णन करते हैं। ये हैं— सत्त्व (प्रकाश, ज्ञान और शांति), रज (गति, इच्छा और कर्म) तथा तम (अज्ञान, आलस्य और प्रमाद)।

सत्त्वगुण का वर्णन करते हुए भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं—

तत्र सत्त्वं निर्मलत्वात्प्रकाशकमनामयम्।

अर्थात सत्त्वगुण अत्यंत निर्मल, प्रकाश देने वाला और शांति प्रदान करने वाला है। यह मनुष्य के भीतर ज्ञान, संतोष, करुणा, विवेक और एकाग्रता का विकास करता है। जब मन शांत हो, बुद्धि स्पष्ट हो और सही-गलत का निर्णय सहज रूप से होने लगे, तब समझना चाहिए कि सत्त्वगुण प्रबल है।

रजोगुण के विषय में श्रीकृष्ण कहते हैं—

रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम्।

अर्थात रजोगुण आसक्ति, इच्छा और तृष्णा को उत्पन्न करता है। यही मनुष्य को कर्म, परिश्रम, महत्वाकांक्षा और उपलब्धि की ओर प्रेरित करता है। संसार का अधिकांश निर्माण, व्यापार, उद्योग और आर्थिक उन्नति रजोगुण के कारण ही संभव होती है। लेकिन जब यही रजोगुण नियंत्रण से बाहर हो जाता है, तब वही लोभ, बेचैनी और अंतहीन दौड़ का कारण बन जाता है।

तमोगुण के बारे में श्रीकृष्ण कहते हैं—

तमस्त्वज्ञानजं विद्धि मोहनं सर्वदेहिनाम्।

अर्थात तमोगुण अज्ञान से उत्पन्न होता है और सभी प्राणियों को मोह में डाल देता है। यह आलस्य, प्रमाद, अज्ञान, भ्रम और अत्यधिक निद्रा को बढ़ाता है। तमोगुण चेतना की ऊँची अवस्थाओं को रोककर मनुष्य को जड़ता की ओर ले जाता है।

प्रकृति में ये तीनों गुण कभी अलग-अलग नहीं रहते। वे हमेशा साथ रहते हैं और निरंतर एक-दूसरे पर प्रभाव डालते रहते हैं। श्रीकृष्ण कहते हैं—

रजस्तमश्चाभिभूय सत्त्वं भवति भारत।
रजः सत्त्वं तमश्चैव तमः सत्त्वं रजस्तथा।।

अर्थात कभी सत्त्व, रज और तम पर प्रभावी हो जाता है, कभी रज सत्त्व और तम पर, और कभी तम सत्त्व तथा रज पर हावी हो जाता है।

मनुष्य के दैनिक जीवन में भी यह क्रम स्पष्ट दिखाई देता है। प्रातःकाल ध्यान, प्रार्थना और स्वाध्याय के समय मन शांत रहता है, इसलिए सत्त्वगुण प्रमुख होता है। दिन में जब मनुष्य कार्य करता है, तब रजोगुण सक्रिय रहता है। रात में जब शरीर विश्राम की ओर जाता है, तब तमोगुण प्रभावी हो जाता है।

समस्या तब पैदा होती है, जब गुण अपने उचित समय और स्थान से हट जाते हैं। यदि काम के समय आलस्य आ जाए, तो तमोगुण हावी है। यदि साधना या विश्राम के समय मन अत्यधिक चंचल रहे, तो रजोगुण बढ़ गया है। यही असंतुलन जीवन में अनेक कठिनाइयों का कारण बनता है।

यदि आधुनिक मनोविज्ञान और न्यूरोसाइंस की दृष्टि से देखें, तो त्रिगुण सिद्धांत आज भी अत्यंत प्रासंगिक दिखाई देता है। जिसे आज अवसाद, मानसिक जड़ता और निराशा कहा जाता है, वह काफी हद तक तमोगुण की अधिकता का रूप है। इसी प्रकार अत्यधिक तनाव, अनिद्रा, बेचैनी और निरंतर प्रतिस्पर्धा रजोगुण के असंतुलन का परिणाम हैं, जहाँ मनुष्य कर्म के फल से इतना बँध जाता है कि उसे विश्राम नहीं मिल पाता।

आज आधुनिक चिकित्सा भी यह स्वीकार करने लगी है कि मानसिक संतुलन, सजगता (माइंडफुलनेस), करुणा और आंतरिक शांति मानसिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। सनातन दर्शन इन्हीं गुणों को सत्त्वगुण का स्वरूप मानता है।

यद्यपि सनातन दर्शन तम से रज और रज से सत्त्व की ओर बढ़ने की प्रेरणा देता है, फिर भी उसका अंतिम लक्ष्य केवल सत्त्वगुण तक पहुँचना नहीं है। अंतिम लक्ष्य गुणातीत होना है। श्रीकृष्ण कहते हैं कि सत्त्व भी मनुष्य को सुख और ज्ञान के अहंकार से बाँध सकता है। वास्तविक मुक्ति तब मिलती है, जब मनुष्य इन तीनों गुणों को प्रकृति का स्वाभाविक खेल समझकर स्वयं को उनका साक्षी बना लेता है।

इस प्रकार त्रिगुण सिद्धांत केवल ब्रह्मांड की व्याख्या करने वाला दार्शनिक विचार नहीं है, बल्कि स्वयं को समझने और बदलने का एक व्यावहारिक विज्ञान है। मनुष्य को पहले तमोगुण पर विजय पाकर रजोगुण को जागृत करना चाहिए। फिर उसी रजोगुण को धर्म और लोककल्याण की दिशा देकर सत्त्वगुण में रूपांतरित करना चाहिए। अंततः सत्त्व से भी ऊपर उठकर गुणातीत अवस्था की ओर बढ़ना ही मानव चेतना की सर्वोच्च यात्रा है।

जेलर 2 को मिला यू/ए 16 प्रमाणपत्र

दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत एक बार फिर अपने लोकप्रिय किरदार मुथुवेल पांडियन उर्फ टाइगर के रूप में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार हैं। नेल्सन दिलीपकुमार के निर्देशन में बनी बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जेलर 2’ को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) से यू/ए 16 प्रमाणपत्र मिल गया है। फिल्म 15 अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘जेलर 2’ की अवधि 165 मिनट यानी करीब पौने तीन घंटे है। फिल्म का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर भी जारी कर दिया गया है, जिसमें मुथुवेल पांडियन के नए मिशन और जबरदस्त एक्शन की झलक देखने को मिली है।

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फिल्म में रजनीकांत के साथ राम्या कृष्णन, योगी बाबू और मिर्ना प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगी। इसके अलावा एस.जे. सूर्या, विद्या बालन, सूरज वेंजारामूडु, मिथुन चक्रवर्ती, अन्ना राजन और जतिन सरना भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। मोहनलाल और शिवा राजकुमार विशेष भूमिका में दिखाई देंगे, जबकि विजय सेतुपति भी फिल्म में खास अंदाज में नजर आएंगे।

वर्ष 2023 में प्रदर्शित ‘जेलर’ की सफलता के बाद इसके दूसरे भाग को लेकर दर्शकों में खासा उत्साह है। अनिरुद्ध रविचंदर फिल्म का संगीत दे रहे हैं। विजय कार्तिक कन्नन ने छायांकन, जबकि आर. निर्मल ने संपादन का जिम्मा संभाला है।

कलानिधि मारन के निर्माण में सन पिक्चर्स के बैनर तले बनी ‘जेलर 2’ 15 अक्टूबर को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म की रिलीज से पहले ‘जेलर 2 सुपर शो’ नौ अक्टूबर से सन नेक्स्ट पर प्रसारित किया जाएगा।

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भाजपा जुटा लेगी दो तिहाई बहुमत

महिला आरक्षण कानून यानी नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन और परिसीमन बिल पास कराने के लिए भारतीय जनता पार्टी दो तिहाई बहुमत की तलाश में लगी है। इस साल अप्रैल में हुए संसद के विशेष सत्र में सरकार के तीन बिल पास नहीं होने के बाद से ही इसकी कोशिश हो रही है। संसद के मानसून सत्र का अभी तक सत्रावसान नहीं किया गया है तो उसके पीछे भी यही कारण बताया जा रहा है। सवाल है कि क्या भाजपा अगले कुछ दिन में दो तिहाई बहुमत जुटा लेगी ताकि वह संविधान संशोधन के विधेयक पास करा सके? यह सवाल इसलिए है क्योंकि चुनाव आयोग के खिलाफ लगातार चल रहे प्रदर्शन और देश बन रहे माहौल के कारण भाजपा के लिए नई पार्टियों का समर्थन हासिल करना मुश्किल होता जा रहा है। पहले जो काम आसान दिख रहा था उसमें भी नई पेचीदगियां पैदा हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस व दूसरी विपक्षी पार्टियों का गठबंधन है तो दूसरी ओर कॉकरोच जनता पार्टी है, जिसको आम आदमी पार्टी का समर्थन मिल रहा है। इनके लगातार प्रदर्शनों से सरकार विरोधी माहौल बन रहा है।

भाजपा के एक जानकार नेता के मुताबिक इन पार्टियों के विरोध प्रदर्शनों के बीच भी दो तिहाई बहुमत जुटाना संभव हो जाएगा क्योंकि कांग्रेस से नाराज पार्टियां  प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सरकार का साथ देने को तैयार हैं। इसमें भाजपा को सबसे ज्यादा उम्मीद एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके से है। गौरतलब है कि डीएमके ने मंगलवार, छह अक्टूबर को हुए प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया। बीजू जनता दल का भी कांग्रेस से विरोध है लेकिन उसके नेता प्रदर्शन में शामिल हुए। डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बढ़ाई है तो भाजपा को लग रहा है कि डीएमके के 22 सांसदों का समर्थन उसको मिल जाएगा। अगर ये 22 सांसद सीधे तौर पर सरकार के विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे तो सदन से गैरहाजिर रह कर भी सरकार की मदद कर सकते हैं। वैसे भी तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के ‘इंडिया’ ब्लॉक में शामिल होने के बाद डीएमके के पास ज्यादा विकल्प नहीं हैं।

इस बीच भाजपा का हिसाब किताब इस बात से मजबूत होता दिख रहा है कि तृणमूल कांग्रेस और एनसीपी दोनों में टूट हो गई है। तभी ममता बनर्जी को साथ लेकर जिस ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत पहले 233 सीट की थी वह घट कर 178 सीट की रह गई है। विपक्षी गठबंधन की ओर से ही यह आंकड़ा दिया गया है कि 19 पार्टियों के 178 लोकसभा सांसद और 62 राज्यसभा सांसद चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं। इसका अर्थ है कि ‘इंडिया’ ब्लॉक की ताकत में 47 सांसदों की कमी आई है। अगर यह संख्या भाजपा के साथ जुड़ जाती है तो संसद में दो तिहाई बहुमत का आंकड़ा पूरा करने में उसे समस्या नहीं आएगी। कुछ अन्य सांसदों को गैरहाजिर करा कर भाजपा यह काम कर सकती है।

Dussehra Long Weekend 2026: दशहरे पर मिलेगा 4 दिन का लॉन्ग वीकेंड, घूमने के लिए ये 6 जगहें रहेंगी बेस्ट; अभी बना लें प्लान

अगर आप कहीं पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो दशहरे के आसपास कहीं घूमने का प्लान बना सकते हैं। अक्टूबर में दशहरे पर आपको चार दिन का लॉन्ग वीकेंड मिल सकती है। इन चार दिन की छुट्टी में ऐसी जगह जाना बेहतर रहेगा, जहां कम समय में ज्यादा घूम सकें। इन चार दिनों की छुट्टियों में आप राजस्थान के ऐतिहासिक शहर, हम्पी के पुराने मंदिर और खंडहर या गोवा के खूबसूरत समुद्र तटों पर जा सकते हैं। ये सभी जगहें छोटी छुट्टी के दौरान घूमने के लिए अच्छे विकल्प हो सकती हैं। आइए जानते हैं दशहरे के लॉन्ग वीकेंड में आप कहां-कहां पर घूम सकते हैं।

कब से कब तक होगी छुट्टी

2026 में दशहरा यानी विजयादशमी 20 अक्टूबर, मंगलवार को मनाई जाएगी। इससे पहले 17 अक्टूबर को शनिवार और 18 अक्टूबर को रविवार है। ऐसे में अगर आप 19 अक्टूबर, सोमवार की छुट्टी ले लेते हैं तो 17 से 20 अक्टूबर तक लगातार चार दिन का ब्रेक मिल जाएगा। इस दौरान आप परिवार या दोस्तों के साथ छोटी ट्रिप प्लान कर सकते हैं।

राजस्थान

अक्टूबर में राजस्थान घूमने के लिए मौसम काफी अच्छा रहता है। इस दौरान गर्मी कम होने लगती है और सर्दियों की शुरुआत के साथ यात्रा करना आरामदायक हो जाता है। चार दिन की छुट्टी में जयपुर और उदयपुर को ट्रिप में शामिल किया जा सकता है। जयपुर में अंबर फोर्ट, सिटी पैलेस, हवा महल और जंतर-मंतर देख सकते हैं, जबकि उदयपुर अपनी खूबसूरत झीलों, महलों और पुराने शहर की गलियों के लिए जाना जाता है। कम समय में आराम से घूमने के लिए बेहतर होगा कि दोनों शहरों में करीब दो-दो दिन बिताएं और ज्यादा जगहों को एक साथ कवर करने की कोशिश न करें।

दार्जिलिंग

अक्टूबर की छुट्टी में अगर आप ठंडे मौसम और पहाड़ों की खूबसूरती का आनंद लेना चाहते हैं तो दार्जिलिंग अच्छा ऑप्शन हो सकता है। मॉनसून के बाद यहां मौसम साफ रहने की वजह से हिमालय के शानदार नजारे देखने को मिलते हैं। इस दौरान दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे में सफर करने, चाय के बागानों की सैर करने और खूबसूरत व्यू पॉइंट्स देखने का मौका मिल सकता है। चार दिन की छोटी ट्रिप के लिए भी दार्जिलिंग एक बेहतर डेस्टिनेशन है। लेकिन, पहाड़ी सफर पर निकलने से पहले मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी जरूर ले लें।

ऋषिकेश

अगर आप चार दिन की छुट्टी में प्रकृति के साथ एडवेंचर और सुकून का मजा लेना चाहते हैं तो ऋषिकेश एक अच्छा विकल्प हो सकता है। अक्टूबर में मॉनसून के बाद यहां मौसम सुहावना हो जाता है और घूमने के साथ योग व आउटडोर एक्टिविटीज का आनंद लिया जा सकता है। इस दौरान तापमान आमतौर पर 15 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रहता है। चार दिन की यात्रा में गंगा घाट, राम झूला, बीटल्स आश्रम, स्थानीय कैफे और आसपास के झरने व नेचर ट्रेल्स देखे जा सकते हैं।

हम्पी

अगर आप इतिहास और पुरानी विरासत को करीब से देखना चाहते हैं तो दशहरे की छुट्टी में हम्पी घूमने का प्लान बना सकते हैं। अक्टूबर से फरवरी तक यहां मौसम घूमने के लिए काफी आरामदायक रहता है। हम्पी अपने प्राचीन मंदिरों, विजयनगर साम्राज्य के खंडहरों, पत्थरों से बनी ऐतिहासिक इमारतों और अनोखे प्राकृतिक नजारों के लिए मशहूर है। यहां विरुपाक्ष मंदिर, विजया विट्ठल मंदिर, स्टोन रथ, लोटस महल और मतंगा हिल जैसी जगहें देखी जा सकती हैं। हम्पी की प्रमुख जगहों को घूमने के लिए आमतौर पर दो से तीन दिन काफी होते हैं, इसलिए चार दिन की छुट्टी में यह एक अच्छा ट्रैवल ऑप्शन हो सकता है।

गोवा

चार दिन की छुट्टी में अगर आप समुद्र, अच्छा खाना और आराम का मजा लेना चाहते हैं तो गोवा एक बढ़िया विकल्प हो सकता है। अक्टूबर से यहां मौसम धीरे-धीरे बेहतर होने लगता है और मॉनसून के मुकाबले आसमान साफ रहने की संभावना ज्यादा रहती है। इस दौरान दिसंबर और नए साल के पीक सीजन जैसी ज्यादा भीड़ भी नहीं होती। चार दिन की यात्रा में नॉर्थ गोवा के बीच और नाइटलाइफ का आनंद लेने के साथ साउथ गोवा की शांत जगहों पर भी समय बिताया जा सकता है।

केरल

अगर आप छुट्टी में प्रकृति और शांति का मजा लेना चाहते हैं तो केरल अच्छा विकल्प है। अक्टूबर के बाद यहां मौसम घूमने के लिए बेहतर हो जाता है। केरल में पहाड़, बैकवाटर्स, समुद्र तट और ऐतिहासिक जगहें देखने को मिलती हैं। चार दिन की छुट्टी में पूरे केरल को घूमना मुश्किल है, इसलिए कोच्चि और अलाप्पुझा जैसी एक-दो जगहों को ही ट्रिप में शामिल करना बेहतर रहेगा। इससे कम समय में आराम से घूम सकेंगे।

दिल्ली-NCR से जयपुर या ऋषिकेश की रोड ट्रिप की जा सकती है। वहीं, बेंगलुरु से हम्पी और मुंबई से गोवा या राजस्थान जाना भी अच्छा विकल्प रहेगा। दशहरे के समय ट्रैवल सीजन रहता है, इसलिए ट्रेन, फ्लाइट और होटल की बुकिंग पहले ही कर लेना बेहतर होगा।

Tata Sons AGM: टाटा संस में चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की असली लड़ाई अभी बाकी, शेयरहोल्डर्स के वोट पर टिकी नजर

Tata Sons AGM: एन चंद्रशेखरन ने 17 सितंबर को टाटा संस के बोर्डरूम में वोट जीत लिया था। लेकिन उनका बतौर CEO तीसरा कार्यकाल अभी पक्का नहीं है। अब असली फैसला टाटा संस की सालाना आम बैठक यानी AGM में होगा। यहां शेयरहोल्डर्स वोट करेंगे।

बोर्ड के वोट और शेयरहोल्डर्स के वोट में बड़ा फर्क है। बोर्डरूम में चंद्रशेखरन के पक्ष में फैसला हो चुका है। लेकिन AGM का वोट अभी खुला है। अगले कुछ हफ्ते इस पूरे मामले में काफी अहम रहने वाले हैं।

महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर भी टाटा ट्रस्ट्स के विवाद पर कोई फैसला या रुख अपना सकता है। कुछ ट्रस्टियों का कार्यकाल खत्म होने वाला है। वहीं टाटा संस में करीब 13% हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ग्रुप की कंपनियों को भी अपना वोट तय करना होगा।

टाटा ट्रस्ट्स के वोट सबसे अहम

इस पूरी लड़ाई के बीच टाटा ट्रस्ट्स सबसे बड़ा खिलाड़ी है। उसके पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह हिस्सेदारी सात अलग-अलग ट्रस्ट्स में बंटी है। इसलिए यह मान लेना ठीक नहीं होगा कि सभी ट्रस्ट एक साथ एक ही तरफ वोट करेंगे।

SDTT और SRTT सबसे अहम ट्रस्ट हैं। दोनों के पास मिलकर टाटा संस की 51.54% हिस्सेदारी है। ऐसे में इन दोनों ट्रस्ट्स के भीतर चल रहा विवाद सीधे AGM की वोटिंग को प्रभावित कर सकता है।

Tata leadership change unlikely to hurt listed stocks, but TCS faces its own growth headache

9 नवंबर को बदल सकता है पहला समीकरण

9 नवंबर एक अहम तारीख है। इसी दिन वरिष्ठ वकील दारियस खंबाटा का सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट यानी SDTT में तीन साल का कार्यकाल खत्म होगा। SDTT के पास टाटा संस की 27.98% हिस्सेदारी है।

SDTT में छह ट्रस्टी हैं। इनमें नोएल टाटा, दारियस खंबाटा, भास्कर भट्ट, नेविल टाटा, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह शामिल हैं। ट्रस्ट के भीतर मतभेद अब खुलकर सामने आ चुके हैं।

खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा मौजूदा विवाद में मोटे तौर पर नोएल टाटा के साथ हैं। 5 अक्टूबर को इन चारों ने श्रीनिवासन और विजय सिंह के रुख का विरोध किया था। मामला टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन और ट्रस्ट्स के अधिकारों से जुड़ा है।

खंबाटा का कार्यकाल 9 नवंबर को खत्म हो रहा है। खबर से जुड़े लोगों के मुताबिक, वह शायद दूसरा कार्यकाल न मांगें। अगर वह दोबारा ट्रस्टी बनना चाहते हैं तो सभी ट्रस्टियों की सहमति जरूरी होगी।

SRTT में दिसंबर में बड़ा बदलाव संभव

सर रतन टाटा ट्रस्ट यानी SRTT के पास टाटा संस की 23.56% हिस्सेदारी है। यहां किसी नए ट्रस्टी को शामिल करने के लिए सभी मौजूदा ट्रस्टियों की सहमति जरूरी है। इसलिए यहां साधारण बहुमत से काम नहीं चलता।

यह नियम पहले भी परेशानी पैदा कर चुका है। नेविल टाटा को SRTT में शामिल करने की कोशिश हुई थी। लेकिन 2024 के आखिर में प्रस्तावित बैठक टाल दी गई थी। श्रीनिवासन ने इस पर आपत्ति जताई थी।

अब श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल दिसंबर में खत्म हो रहा है। अगर उनका कार्यकाल आगे नहीं बढ़ता है तो ट्रस्ट के भीतर समीकरण बदल सकते हैं। इससे SRTT का रुख नोएल टाटा के करीब जा सकता है।

हालांकि, इसके लिए ट्रस्ट को अपना कामकाज ठीक से चलाने और AGM में वोट करने की स्थिति में होना जरूरी होगा। SRTT पर महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की तरफ से कुछ पाबंदियां भी लागू हैं।

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SRTT की वजह से टाटा संस की AGM टली थी

SRTT की स्थिति का असर पहले ही टाटा संस की AGM पर पड़ चुका है। 18 अगस्त की AGM टालनी पड़ी थी। वजह यह थी कि SRTT SDTT के साथ मिलकर AGM के लिए प्रतिनिधि नामित करने की जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं कर सका था।

इसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने टाटा संस को AGM कराने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया। अब AGM की तारीख खुद इस पूरे विवाद में काफी अहम हो गई है।

वहीं श्रीनिवासन और विजय सिंह ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने SDTT के कामकाज को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने टाटा संस के मामलों में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका को लेकर चिंता जताई है।

नोएल टाटा गुट का क्या कहना है?

नोएल टाटा, खंबाटा, भट्ट और नेविल टाटा ने इस रुख का विरोध किया है। उनका कहना है कि ट्रस्ट्स टाटा संस का मैनेजमेंट अपने हाथ में लेने की कोशिश नहीं कर रहे हैं।

उनके मुताबिक, ट्रस्ट्स सिर्फ उन अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो उन्हें टाटा संस के कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर होने के नाते मिले हैं। इस विवाद पर चैरिटी कमिश्नर ने SDTT से जवाब भी मांगा है।

66% हिस्सेदारी दिखती एकजुट, लेकिन है नहीं

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66% हिस्सेदारी है। लेकिन यह सात अलग-अलग चैरिटेबल ट्रस्ट्स में बंटी हुई है। हर ट्रस्ट में ट्रस्टियों की संरचना भी अलग है।

नोएल टाटा और उनके तीन बच्चे नेविल, लिया और माया इन सात ट्रस्ट्स में कुल 36 में से 17 ट्रस्टी पदों पर हैं। लेकिन इस ताकत का बड़ा हिस्सा छोटे ट्रस्ट्स में है। असली वजन SDTT और SRTT के पास है।

इसलिए AGM में सभी ट्रस्ट्स का एक ही लाइन पर आना जरूरी नहीं है। हर ट्रस्ट को अपनी बैठक करके अपने वोट पर फैसला करना पड़ सकता है।

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टाटा ग्रुप की कंपनियों के वोट भी अहम

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा टाटा ग्रुप की नौ कंपनियों के पास टाटा संस की कुल 12.83% हिस्सेदारी है। इनमें सात लिस्टेड कंपनियां हैं। इन सात की कुल हिस्सेदारी 11.92% है। टाटा स्टील और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स के पास 3.06-3.06% हिस्सेदारी है। टाटा केमिकल्स के पास 2.53% और टाटा पावर के पास 1.65% हिस्सेदारी है।

इंडियन होटल्स के पास 1.11%, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के पास 0.43% और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के पास 0.08% हिस्सेदारी है। इन कंपनियों के वोट को अभी किसी एक पक्ष के साथ जोड़ना मुश्किल है। हर कंपनी का अपना बोर्ड है। उसे अपनी हिस्सेदारी को लेकर अलग फैसला करना होगा।

चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों का असर

चंद्रशेखरन कई ऐसी टाटा कंपनियों के चेयरमैन हैं, जिनके पास टाटा संस में हिस्सेदारी है। इनमें टाटा स्टील, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, इंडियन होटल्स और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स शामिल हैं। वहीं नोएल टाटा टाटा स्टील के वाइस चेयरमैन हैं। वह टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और टाटा इंटरनेशनल के चेयरमैन भी हैं।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ये कंपनियां किसी एक व्यक्ति के पक्ष में वोट करेंगी। इन कंपनियों के बोर्ड को अपनी-अपनी हिस्सेदारी को लेकर फैसला करना होगा।

शापूरजी पलोनजी ग्रुप भी बड़ा शेयरहोल्डर

टाटा ट्रस्ट्स के अलावा शापूरजी पलोनजी ग्रुप के पास भी टाटा संस की 18% से ज्यादा हिस्सेदारी है। इसलिए AGM में उसके वोट भी काफी अहम हो सकते हैं।

खासकर तब, जब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर किसी एक रुख पर सहमति नहीं बनती है। ऐसी स्थिति में दूसरे बड़े शेयरहोल्डर्स की भूमिका बढ़ सकती है।

अब AGM की तारीख सबसे अहम

जब AGM होगी, तब तक टाटा ट्रस्ट्स की स्थिति कुछ बदल सकती है। खंबाटा का SDTT में कार्यकाल खत्म हो चुका होगा। वहीं दिसंबर में श्रीनिवासन का SRTT में कार्यकाल भी खत्म होना है।

चैरिटी कमिश्नर की कार्रवाई भी दोनों बड़े ट्रस्ट्स की स्थिति पर असर डाल सकती है। दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की कंपनियों के बोर्ड को अपनी हिस्सेदारी के वोट पर फैसला करना होगा।

इसलिए मामला अब सिर्फ चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल का नहीं है। असली सवाल यह है कि AGM से पहले टाटा संस के शेयरहोल्डर्स के बीच ताकत का संतुलन किस तरफ जाता है।

यही वजह है कि AGM की तारीख बेहद अहम होगी। उस समय तक ट्रस्ट्स की संरचना, नियामकीय स्थिति और टाटा ग्रुप की कंपनियों के रुख में बदलाव इस वोट को पूरी तरह बदल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: शारदीय नवरात्रि में कब होगी महा अष्टमी और महा नवमी? जानें तारीख, पूजा मुहूर्त और पारण का समय

Maha Ashtami & Maha Navami 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्री के पर्व का विशेष स्थान है। यह पव हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व के आठवें दिन यानी अश्विन शुक्ल अष्टमी तिथि को महा अष्टमी और अश्विन शुक्ल नवमी तिथि को महा नवमी का पर्व मनाया जाता है। नौ दिनों तक मां दुर्गा की उपासना करने वाले सभी भक्त इन दिनों में कन्या पूजन, उपवास और विशेष अनुष्ठान आदि का आयोजन करते हैं। शारदीय नवरात्री के नौ दिन मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। आइए जानें इस साल महा अष्टमी और महा नवमी का पर्व किस दिन मनाया जाएगा? इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होकर 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होगी।

19 अक्टूबर को होगी महाष्टमी की पूजा

इस वर्ष अष्टमी तिथि का आरंभ 18 अक्टूबर 2026 को सुबह 8:27 बजे होगा और इसका समापन 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:51 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 19 अक्टूबर को अष्टमी मानी जाएगी। इसलिए जिन लोगों के यहां अष्टमी के दिन विशेष पूजा, हवन या कन्या पूजन की परंपरा है, वे 19 अक्टूबर को यह अनुष्ठान कर सकते हैं। अगर आप अष्टमी का व्रत रखते हैं तो 19 अक्टूबर को व्रत रखें और विधि-विधान से मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा करें।

महा अष्टमी 2026 कन्या पूजन समय

कन्या पूजन या कन्या भोजन कराने वाले लोग भी 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि के दौरान यह अनुष्ठान कर सकते हैं। कोशिश करें कि अष्टमी से जुड़े पूजा-पाठ और कन्या पूजन सुबह 10:51 बजे से पहले कर लिया जाए। कुछ परिवारों में महाष्टमी के दिन कुलदेवी या मां चामुंडा की पूजा रात के समय की जाती है। ऐसे परिवार 18 अक्टूबर की रात को अष्टमी तिथि लगने के बाद अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।

महानवमी 2026 कब है?

19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे अष्टमी तिथि समाप्त होगी और इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इसलिए 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद महानवमी की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जा सकता है। अगर आपके परिवार में नवमी के दिन कन्या पूजन करने की परंपरा है, तो आप 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे के बाद कन्या पूजन और हवन कर सकते हैं। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी दोनों का कन्या पूजन किया जा सकता है।

20 अक्टूबर को भी कर सकते हैं नवमी का कन्या पूजन

जो श्रद्धा उदया तिथि को विशेष महत्व देते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं। हालांकि, इस दिन नवमी तिथि दोपहर 12:50 बजे तक ही रहेगी। इसलिए 20 अक्टूबर को नवमी के अनुसार पूजा, हवन और कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को दोपहर 12:50 बजे से पहले यह अनुष्ठान पूरा कर लेना चाहिए। इस तरह, जो लोग उदया तिथि को मानते हैं, वे 20 अक्टूबर को भी महानवमी की पूजा और कन्या पूजन कर सकते हैं।

महानवमी का व्रत कब रखें और पारण कब करें?

महानवमी का व्रत 19 अक्टूबर को व्रत रख सकते हैं। नवमी के दिन मां दुर्गा की पूजा करें और पूरे दिन व्रत रखें। व्रत का पारण अगले दिन यानी विजयादशमी के दिन करना उचित माना जाता है।

संधि पूजा का शुभ मुहूर्त

इस वर्ष संधि पूजा का मुहूर्त 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10:27 बजे से 11:15 बजे तक रहेगा। यह कुल 48 मिनट का समय होगा। अष्टमी के अंतिम 24 मिनट और नवमी के शुरुआती 24 मिनट को मिलाकर कुल 48 मिनट का यह समय संधि काल कहलाता है। इसी दौरान संधि पूजा की जाती है। शास्त्रों में संधि काल को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी समय मां दुर्गा ने चामुंडा स्वरूप धारण करके चंड और मुंड नामक असुरों का संहार किया था। इसी वजह से संधि पूजा में मां दुर्गा के चामुंडा स्वरूप की विशेष आराधना की जाती है। मान्यता है कि इस विशेष समय में मां चामुंडा की पूजा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।

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तमिलनाडु: मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव में 80 प्रतिशत से अधिक हुआ मतदान

तमिलनाडु की मदुरंतकम और धारापुरम (सुरक्षित) विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में 80 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। मंगलवार शाम 6 बजे दोनों विधानसभा क्षेत्रों के सभी 605 पोलिंग बूथों पर मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गई।

सुबह 7 बजे मतदान शुरू होते ही दोनों क्षेत्रों में मतदाताओं का उत्साह देखने को मिला। शुरुआती दौर में सुबह 9 बजे तक धीमी गति (15-17 फीसदी) से शुरू हुआ मतदान दिन ढलने के साथ तेजी पकड़ता गया। दोपहर 3 बजे तक मदुरंतकम में 70.31 प्रतिशत और धारापुरम में 68.08 प्रतिशत वोट पड़ चुके थे, जो शाम 5 बजे बढ़कर क्रमशः 83.86 और 78.53 प्रतिशत तक पहुंच गया।

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चुनाव आयोग के अनुसार, शाम 6 बजे कतार में लगे सभी मतदाताओं द्वारा वोट डाले जाने के बाद अंतिम मतदान प्रतिशत 80 से 85 प्रतिशत से भी अधिक रहने का अनुमान है। मतदान के बाद सभी ईवीएम मशीनों को सील कर कड़ी सुरक्षा और अर्धसैनिक बलों के पहरे में स्ट्रांग रूम भेज दिया गया है। मतों की गिनती 9 अक्टूबर को होगी, जिसके बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।

यह उपचुनाव तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली लगभग पांच महीने पुरानी ‘टीवीके’ सरकार के लिए एक बड़े राजनीतिक परीक्षण और जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है। अन्नाद्रमुक के बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद खाली हुई इन दो सीटों पर 4.35 लाख कुल मतदाताओं ने अपने अधिकार का इस्तेमाल किया। मदुरंतकम से 27 और धारापुरम से 22 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। मुख्य मुकाबला टीवीके, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, वामपंथी दलों और नाम तमिलर काची के बीच देखने को मिल रहा है।

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‘नई नवेली’ का दूसरा गाना ‘फटा पटाखा’ रिलीज

अमेजन एमजीएम स्टूडियोज और कलर येलो की फैंटेसी फैमिली एंटरटेनर फिल्म ‘नई नवेली’ का दूसरा गाना ‘फटा पटाखा’ रिलीज हो गया है। जी म्यूजिक कंपनी द्वारा प्रस्तुत इस गाने को जी.वी. प्रकाश कुमार ने संगीतबद्ध और प्रोड्यूस किया है, जबकि इसके बोल वायु ने लिखे हैं और मधुबंती बागची ने अपनी आवाज दी है। विजय गांगुली ने गाने की कोरियोग्राफी की है।

गाने में यामी गौतम धर जॉम्बीज के साथ अनोखी डांस पार्टी करती नजर आ रही हैं। हाई-एनर्जी बीट्स, कैची हुक स्टेप और भव्य कोरियोग्राफी से सजा यह गाना फिल्म की फैंटेसी दुनिया में मनोरंजन का नया रंग जोड़ता है।

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जी.वी. प्रकाश कुमार ने कहा कि ‘फटा पटाखा’ के जरिए ‘नई नवेली’ की दुनिया के लिए ऐसा ट्रैक तैयार करने की कोशिश की गई है, जो शुरू से ही जश्न और ऊर्जा का अहसास कराए। वायु के बोल, मधुबंती की आवाज और यामी की प्रस्तुति ने गाने की ऊर्जा को और बढ़ाया है।

मधुबंती बागची ने कहा कि ‘फटा पटाखा’ हास्य और जबरदस्त ऊर्जा से भरपूर है और इसे रिकॉर्ड करना उनके लिए बेहद मजेदार अनुभव रहा।

बालाजी मोहन के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी हिमांशु शर्मा और दिव्य निधि शर्मा ने लिखी है। फिल्म में अड्डिनाथ एम. कोठारे, अनुराग ठाकुर, सुनीता राजवार, मीता वशिष्ठ, आदित्य कुलश्रेष्ठ, सुस्मिता मुखर्जी और प्रतीक पचौरी भी अहम भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्माण आनंद एल. राय और हिमांशु शर्मा ने किया है।

‘नई नवेली’ 16 अक्टूबर को दशहरा के अवसर पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

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तमिलनाडु में दुल्हनों पर बरसेगी सौगात, सोने का सिक्का और सिल्क साड़ी देगी सरकार! जानें क्या है अन्नन सीर योजना

तमिलनाडु, 6 अक्टूबर 2026: तमिलनाडु सरकार ने नई दुल्हनों के लिए ‘अन्नन सीर’ योजना लागू करने को मंजूरी दे दी है। इसके लिए सरकार ने 812 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। योजना के तहत पात्र दुल्हनों को 8 ग्राम सोने का सिक्का और एक सिल्क साड़ी दी जाएगी।

योजना में परिवार की सालाना आय सीमा में भी बदलाव किया गया है। पहले 5 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले परिवारों को इसका लाभ देने की बात कही गई थी। अब इस सीमा को घटाकर 2.5 लाख रुपये कर दिया गया है।

जानें क्या है अन्नन सीर योजना?

  • अन्नन सीर योजना तमिलनाडु सरकार की एक कल्याणकारी योजना है, जिसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में सहायता करना है।
  • योजना के तहत पात्र दुल्हनों को 8 ग्राम का 22 कैरेट सोने का सिक्का दिया जाएगा।
  • इसके अलावा लाभार्थी दुल्हनों को एक सिल्क साड़ी भी दी जाएगी।
  • योजना का नाम तमिल परंपरा में बड़े भाई द्वारा बहन की शादी में दिए जाने वाले उपहार ‘सीर’ की परंपरा से जुड़ा है।

आय सीमा में भी अब हुआ बदलाव

पहले इस योजना के लिए ₹5 लाख तक की वार्षिक पारिवारिक आय वाले परिवारों को पात्र बनाने का वादा किया गया था। हालांकि, अब सरकार ने पात्रता के लिए आय सीमा को घटाकर ₹2.5 लाख प्रति वर्ष कर दिया है।

इस बदलाव के बाद ₹2.5 लाख से अधिक और ₹5 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे।

दूसरी कल्याणकारी योजनाओं से समानता

गौरतलब है कि अन्नन सीर योजना तमिलनाडु में हाल ही में शुरू की गई नवजात शिशुओं के लिए कल्याणकारी योजना ‘थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ से काफी मिलती-जुलती है। यह योजना मुख्यमंत्री विजय द्वारा शुरू की गई थी।

इस योजना के जरिए तमिलनाडु सरकार आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी में मदद पहुंचाने की कोशिश कर रही है। 8 ग्राम सोना और सिल्क साड़ी जैसी सहायता से शादी के खर्च का बोझ कम करने का लक्ष्य है। हालांकि, ₹5 लाख से घटाकर ₹2.5 लाख की गई आय सीमा के कारण अब यह योजना पहले के मुकाबले कम परिवारों तक पहुंच पाएगी।

उपचुनाव नए मुख्यमंत्रियों की परीक्षा

मंगलवार, छह अक्टूबर को एक लोकसभा और सात विधानसभा सीटों के उपचुनाव हैं। हालांकि इनके नतीजों से किसी भी सरकार की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन कम से कम दो राज्यों के उपचुनावों के नतीजे मुख्यमंत्रियों के लिए बहुत अहम होंगे। पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के सी जोसेफ विजय की परीक्षा उपचुनावों में होने वाली है। दोनों राज्यों में दो दो सीटों के उपचुनाव हो रहे हैं। बंगाल में एक सीट तो मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की अपनी है। वे नंदीग्राम और भबानीपुर दोनों सीटों से जीते थे और नंदीग्राम खाली कर दी थी। दूसरी सीट रेजिनगर की है। एजेपी नाम से पार्टी बना कर चुनाव लड़े हुमायूं कबीर रेजिनगर और नौदा से जीते थे। उन्होंने रेजीनगर सीट पर अपने बेटे को लड़ाया है। वहां एजेपी, कांग्रेस, तृणमूल के दोनों गुट और लेफ्ट से पांच मुस्लिम उम्मीदवार लड़ रहे हैं।

हालांकि फिर भी भाजपा के हिंदू उम्मीदवार के जीतने के चांस कम हैं। तभी शुभेंदु अधिकारी का पूरा फोकस नंदीग्राम पर है। वे बड़े अंतर से इस सीट को जीतना चाहते हैं। उधर तमिलनाडु की दो सीटों मदुरंतकम और धारापुरम में उपचुनाव हो रहा है। दोनों सीटें पिछले चुनाव में अन्ना डीएमके ने जीती थी। उसके विधायक पाला बदल कर विजय की पार्टी टीवीके में शामिल हो गए विजय ने दोनों को टिकट देकर मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि विजय की पार्टी के पास अकेले बहुमत नहीं है। वे दूसरी पार्टियों के विधायकों के इस्तीफे करा कर उन्हें अपनी पार्टी से लड़ा रहे हैं और बहुमत हासिल करना चाहते हैं। अगर ये दोनों सीटें उनकी पार्टी जीतती है तो विजय की स्थिति मजबूत होगी। दिलचस्प यह है कि विजय की सरकार को समर्थन देने वाली लेफ्ट पार्टियों के उम्मीदवार इन दोनों सीटों पर लड़ रहे हैं।