DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी मुनाफा बढ़ा, लेकिन रेवेन्यू घटकर आधा हुआ; शेयरों पर रहेगी नजर

DLF Q1 Results: रियल एस्टेट कंपनी DLF ने जून तिमाही के नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 4.1% बढ़कर ₹793.9 करोड़ हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹762.7 करोड़ था।

हालांकि, कंपनी का रेवेन्यू 52.9% घटकर ₹1,280.3 करोड़ रह गया। एक साल पहले यह ₹2,716.7 करोड़ था।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन रहा कमजोर

जून तिमाही में DLF का EBITDA 58.7% घटकर ₹150.3 करोड़ रह गया, जो पिछले साल ₹364.2 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 13.4% से घटकर 11.7% पर आ गया।

इसके बावजूद कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 51% रहा। तिमाही के दौरान DLF ने ₹1,317 करोड़ का ऑपरेटिंग कैश फ्लो बनाया। इससे कंपनी की नेट कैश पोजिशन बढ़कर ₹15,200 करोड़ हो गई।

लॉन्च में देरी से घटी बिक्री

जून तिमाही में DLF की नई सेल्स बुकिंग ₹657 करोड़ रही। DLF ने कहा कि कुछ प्रोजेक्ट्स के लॉन्च में देरी की वजह से यह आंकड़ा प्रभावित हुआ। कंपनी को उम्मीद है कि जरूरी मंजूरियां जल्द मिलेंगी और नए प्रोजेक्ट्स लॉन्च किए जाएंगे।

कंपनी का कहना है कि मजबूत ब्रांड, ग्राहकों की लगातार मांग और आने वाले प्रोजेक्ट्स की पाइपलाइन के दम पर वह मध्यम अवधि के ग्रोथ लक्ष्य हासिल करने को लेकर आश्वस्त है।

रेंटल कारोबार बना मजबूत

DLF का करीब 5 करोड़ वर्ग फुट का रेंटल पोर्टफोलियो 95% ऑक्यूपेंसी के साथ मजबूत बना हुआ है। कंपनी का फोकस लंबे समय में अपने रेंटल बिजनेस को और बढ़ाने पर है।

चालू वित्त वर्ष में DLF करीब 15 लाख वर्ग फुट के तीन नए रिटेल प्रोजेक्ट शुरू करेगी। इनमें DLF Midtown Plaza (नई दिल्ली), DLF Summit Plaza (गुरुग्राम) और DLF Promenade (गोवा) शामिल हैं।

DCCDL का प्रदर्शन भी मजबूत

DLF की सहयोगी कंपनी DLF Cyber City Developers Limited (DCCDL) का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू ₹1,917 करोड़ रहा। EBITDA 9% बढ़कर ₹1,474 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 21% बढ़कर ₹717 करोड़ हो गया।

DLF ने क्या कहा?

DLF का कहना है कि मजबूत लैंड बैंक, नए प्रोजेक्ट्स की बड़ी पाइपलाइन, मजबूत बैलेंस शीट और लगातार बढ़ता कैश फ्लो कंपनी को रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी का फायदा उठाने में मदद करेगा। कंपनी का फोकस आगे भी लाभदायक और टिकाऊ ग्रोथ पर रहेगा।

DLF का शेयर सोमवार को 0.62% की बढ़त के साथ ₹663 पर बंद हुआ।

Vijay Kedia : ₹80 का शेयर बना ₹16400, विजय केडिया ने बताया मल्टीबैगर स्टॉक का सीक्रेट

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Vijay Kedia : ₹80 का शेयर बना ₹16400, विजय केडिया ने बताया मल्टीबैगर स्टॉक का सीक्रेट

Vijay Kedia Investment Tips: कई निवेशक हमेशा सिर्फ मल्टीबैगर स्टॉक खोजने की कोशिश करते हैं। इसके चक्कर में कई बार ऐसे शेयरों में भी पैसे लगा बैठते हैं, जहां भारी नुकसान हो जाता है। दिग्गज निवेशक विजय केडिया का कहना है कि बड़ी कमाई करने का राज अगला मल्टीबैगर शेयर ढूंढने में नहीं, बल्कि अच्छे बिजनेस में लंबे समय तक टिके रहने में है।

उन्होंने कहा, “जब लोग 10, 20 या 50 गुना रिटर्न देने वाले शेयरों की बात करते हैं, तो मैं कभी यह सोचकर शेयर नहीं खरीदता कि यह मल्टीबैगर बनेगा। मुझे पहले से ये पता नहीं होता।”

टॉर्च की रोशनी जैसा है निवेश

केडिया निवेश की तुलना रात में टॉर्च लेकर चलने से करते हैं। उनका कहना है, ‘टॉर्च सिर्फ 25 मीटर आगे तक रास्ता दिखाती है। आप पहले उतना चलते हैं, फिर अगले 25 मीटर दिखाई देते हैं। निवेश भी बिल्कुल ऐसा ही है।’

उनके मुताबिक, निवेश से पहले वह सिर्फ एक सवाल पूछते हैं, ‘क्या मैं इस कंपनी के शेयर को अगले 10 साल तक अपने पास रख सकता हूं?’

एक निवेश की कहानी

केडिया ने अपने एक सफल निवेश का उदाहरण भी दिया। उन्होंने 2005 में करीब ₹80 के भाव पर एक कंपनी के शेयर खरीदे। अगले कई सालों में शेयर कभी ₹250 पहुंचा, फिर ₹50-60 तक गिर गया। इसके बाद यह ₹600, ₹1,000 और ₹1,500 तक गया और फिर गिरा।

कोविड-19 के दौरान भी शेयर करीब ₹4,200 से गिरकर ₹1,700 तक आ गया। लेकिन उन्होंने अपने शेयर नहीं बेचे।

सिर्फ डिविडेंड से निकल गई लागत

केडिया के मुताबिक, 16 साल में कंपनी ने करीब ₹250 प्रति शेयर का कुल डिविडेंड दिया। यानी उन्हें खरीद कीमत से तीन गुना ज्यादा डिविडेंड मिल चुका था। उन्होंने कहा, “एक तरह से मेरे शेयर मुफ्त हो गए थे।”

बाद में कंपनी ने 1:1 बोनस शेयर भी दिया। बोनस को शामिल करने के बाद केडिया ने करीब ₹16,400 प्रति शेयर के एडजस्टेड भाव पर अपना निवेश बेचा। यह उनके सबसे सफल निवेशों में शामिल रहा।

50-60% गिरावट भी झेली

केडिया का कहना है कि असली चुनौती मल्टीबैगर ढूंढना नहीं, बल्कि 50-60% की गिरावट के दौरान भी निवेश बनाए रखना है। उनके मुताबिक, “यही सबसे बड़ी समस्या है। ज्यादातर निवेशक गिरावट देखकर घबरा जाते हैं।”

ट्रेन यात्रा से समझाया निवेश

केडिया ने निवेश की तुलना मुंबई से अहमदाबाद जाने वाली ट्रेन से की। उन्होंने कहा, “अगर ट्रेन मुंबई से देर से निकले या दादर स्टेशन पर ज्यादा देर रुक जाए, तो मुझे फर्क नहीं पड़ता। मेरी नजर मंजिल पर होती है, हर स्टेशन पर नहीं।”

उनका कहना है कि शेयर अगर 50% भी गिर जाए, लेकिन बिजनेस पर भरोसा कायम हो, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बल्कि जब शेयर फिर से खरीद कीमत तक लौटता है, तो उनका भरोसा और मजबूत हो जाता है।

केडिया के मुताबिक, मल्टीबैगर बनने का राज पहले से उसकी पहचान करना नहीं है, बल्कि सही बिजनेस में इतना लंबा टिके रहना है कि कंपाउंडिंग अपना कमाल दिखा सके।

Ather Energy Q1 Results: घाटे में बड़ी कमी, रेवेन्यू 88% उछला; 1 साल में 223% चढ़ा स्टॉक

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

मांजलपुर उपचुनाव परिणाम : गढ़ बचाने में कामयाब रही भाजपा, वडोदरा की इस सीट पर सतीश पटेल की बंपर जीत

satish patel

Manjalpur Bypoll Election Result 2026 : वडोदरा की मांजलपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी सतीश पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,000 से ज्यादा वोटो से हराया। ALSO READ: बांकीपुर में प्रंशात किशोर ने कर दिया 'खेला', भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन को झटका

 

20 दौर तक चली मतगणना सतीश पटेल को 55,481 वोट हासिल हुए जबकि कांग्रेस के भीखा भाई रबारी को मात्र 24,851 वोट ही हासिल हुए। इस तरह भाजपा ने यह चुनाव 30,630 वोटों से जीत लिया। इस चुनाव में 37.05 फीसदी जैसा कम मतदान दर्ज किया गया था। कम मतदान के चलते भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत को लेकर आशान्वित थे। 

 

कौन हैं सतीश पटेल?

सतीश गोविंदभाई पटेल (सतेन्द्रभाई पटेल) वर्तमान में गुजरात के वडोदरा शहर की मांजलपुर विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। वे मुख्य रूप से कृषि और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े रहे हैं तथा वडोदरा नगर निगम में पार्षद के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

बांकीपुर जनसुराज पार्टी के प्रशांत किशोर और दतिया में कांग्रेस के घनश्याम सिंह भाजपा उम्मीदवारों से काफी आगे चल रहे हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि 3 राज्यों के 3 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में केवल मांजलपुर में ही भाजपा जीतती नजर आ रही है।

 

मांजलपुर में क्यों हुए उपचुनाव?

गौरतलब है कि वडोदरा की मांजलपुर सीट से लगातार आठ बार चुनाव जीतने वाले भाजपा के वरिष्ठ विधायक योगेश पटेल का जून में 80 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। साल 1990 से लेकर 2022 के विधानसभा चुनाव तक वे लगातार आठ बार अजेय रहे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार में राज्यमंत्री के रूप में भी अपनी सेवाएं दी थीं। 

Rashmika Mandanna: शूटिंग के दौरान रश्मिका मंदाना के हिप टेंडन में चोट लगी, डॉक्टरों ने छह हफ्ते आराम करने की दी सलाह

Rashmika Mandanna: खबरों के मुताबिक, रश्मिका मंदाना अपनी आने वाली फिल्म के सेट पर एक डांस सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान बुरी तरह घायल हो गईं। कई रिपोर्ट्स के अनुसार, एक मुश्किल डांस और एक्शन सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान गिरने से उनके हिप का टेंडन पूरी तरह से अलग हो गया।

बताया जा रहा है कि यह घटना ‘रणबाली’ या ‘मैसा’ इनमें से किसी एक फिल्म के सेट पर हुई। पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। हादसे के तुरंत बाद शूटिंग रोक दी गई और क्रू मेंबर्स उन्हें इलाज के लिए पास के अस्पताल ले गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठीक होने में उन्हें कई हफ़्ते लगेंगे और उसके बाद ही वह काम पर लौट पाएंगी।

डॉक्टरों का कहना है कि एक्टर्स के मामले में ऐसी चोट कम ही देखने को मिलती है। उन्हें चोट की गंभीरता देखकर हैरानी हुई। उन्होंने बताया कि टेंडन को इस तरह का नुकसान अक्सर उन प्रोफेशनल एथलीट्स को होता है, जो बहुत ज़्यादा ट्रेनिंग करते हैं।

उनकी पूरी मेडिकल जांच हो चुकी है और उन्हें छह हफ़्ते तक पूरी तरह आराम करने की सलाह दी गई है। इसके बाद एक खास रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम से गुजरना होगा, ताकि शूटिंग फिर से शुरू करने से पहले टेंडन ठीक से ठीक हो जाए। उनके बिज़ी शूटिंग शेड्यूल और कमर्शियल असाइनमेंट को अब रोक दिया जाएगा क्योंकि डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। रश्मिका और उनकी टीम ने सेट पर लगी चोट के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

यह एक्ट्रेस कई एंडोर्समेंट कैंपेन में भी व्यस्त हैं। वह ‘रणबाली’ और ‘मैसा’ जैसी कुछ बड़े बजट की फ़िल्मों पर भी काम कर रही हैं। रश्मिका ने एक्टर विजय देवरकोंडा से शादी के बाद अपनी आने वाली फ़िल्म ‘मैसा’ की शूटिंग फिर से शुरू की। नए डायरेक्टर रविंद्र पुल्ले के निर्देशन में बनी और अनफ़ॉर्मूला फ़िल्म्स द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म को गोंड जनजाति की सांस्कृतिक रूप से समृद्ध पृष्ठभूमि पर आधारित एक इमोशनल एक्शन थ्रिलर बताया जा रहा है। रश्मिका इस फ़िल्म में एक गोंड महिला की मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जिसे उनके पिछले किरदारों से बिल्कुल अलग और बोल्ड भूमिका के तौर पर पेश किया जा रहा है।

जहां तक ‘रणबाली’ की बात है, तो इस फ़िल्म के डायरेक्टर राहुल सांकृत्यायन हैं। ब्रिटिश राज के समय पर आधारित यह तेलुगु पीरियड ड्रामा भारतीय इतिहास के कम ज्ञात अध्यायों से प्रेरित एक काल्पनिक कहानी है। 11 सितंबर को रिलीज़ होने वाली इस फ़िल्म में विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह उनकी एक साथ तीसरी फ़िल्म होगी।

Vijay Varma: ‘वह गलत तरीके से छूने की कोशिश कर रहा था’, विजय वर्मा ने मॉडल कोऑर्डिनेटर के साथ हुए डरावने एक्सपीरिएंस को किया याद

Vijay Varma: विजय वर्मा ने हिंदी सिनेमा में सबसे भरोसेमंद कलाकारों में से एक के तौर पर अपनी खास जगह बनाई है। इतने सालों में, उन्होंने अपनी अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाने की काबिलियत से दर्शकों को प्रभावित किया है और वे आसानी से बिल्कुल अलग-अलग किरदारों में ढल जाते हैं। चाहे मुख्य किरदार हो या सहायक भूमिका, इस एक्टर ने हमेशा अपनी एक्टिंग से लोगों पर गहरी छाप छोड़ी है। हालांकि, उनकी कामयाबी का सफ़र आसान नहीं था। हाल ही में एक इंटरव्यू में, विजय ने शोहरत मिलने से पहले के मुश्किल दिनों को याद किया और बताया कि कैसे करियर की शुरुआत में एक मॉडलिंग कोऑर्डिनेटर के साथ हुए बुरे अनुभव ने लगभग उनका आत्मविश्वास तोड़ दिया था।

अपने YouTube चैनल पर प्रखर गुप्ता से बात करते हुए, विजय वर्मा ने बताया कि कैसे एक “अजीब मॉडल कोऑर्डिनेटर” ने उनके साथ बदतमीज़ी शुरू कर दी और उन्हें गलत तरीके से छूने की कोशिश करने लगा। एक्टर ने कहा, “मैंने हैदराबाद में मॉडलिंग करने की कोशिश की, बस छोटे-मोटे, शौकिया लेवल का काम था। लेकिन मेरी मुलाक़ात एक अजीब मॉडल कोऑर्डिनेटर से हुई। उसने मेरे साथ थोड़ी बदतमीज़ी शुरू कर दी, जैसे मुझे गलत तरीके से छूने की कोशिश करना। मैंने कहा, ‘भाई, यह क्या है? तुम क्या कर रहे हो?’ तो मैं तुरंत निराश हो गया। जब आप नए होते हैं, तो बहुत जल्दी निराश हो जाते हैं। फिर मैंने सोचा कि मुझे इसका डटकर सामना करना चाहिए। अगर मुझे एक्टिंग ही करनी है, तो मुझे यह करना ही होगा।”

विजय ने आगे बताया कि उन्होंने एक बार एक्टिंग सीखने के लिए हैदराबाद के ‘सूत्रधार स्कूल ऑफ़ एक्टिंग’ से संपर्क किया था, लेकिन उनकी रिक्वेस्ट ठुकरा दी गई। एक्टर के मुताबिक, इंस्टीट्यूट ने उनसे कहा कि एक्टिंग के लिए कमिटमेंट और डेडिकेशन की ज़रूरत होती है; यह ऐसी चीज़ नहीं है जिसे कुछ दिन करके छोड़ दिया जाए। उस घटना को याद करते हुए विजय ने माना कि उस समय उन्हें निराशा हुई थी, क्योंकि उन्हें लगा कि उन्हें खुद को साबित करने का मौका भी नहीं दिया जा रहा है।

उन्होंने आगे कहा, “फिर मैंने FTII में अप्लाई किया। मुझे पता चला कि वहां दो साल का एक्टिंग कोर्स होता है। मैंने अप्लाई किया, फ़ाइनल राउंड तक पहुंचा, लेकिन रिजेक्ट हो गया। और पहली बार मुझे एहसास हुआ कि आपके सपने पूरी तरह आपके हाथ में नहीं होते। ऐसा नहीं है कि आप कुछ चाहें और वह आपको अपने-आप मिल जाए। ऐसा नहीं होता।”

शुरुआती मुश्किलों से मिले सबक को याद करते हुए विजय ने कहा कि इन अनुभवों से उन्हें यह समझने में मदद मिली कि बाहरी दुनिया घर के आरामदायक माहौल से बहुत अलग तरह से काम करती है। उन्होंने बताया, “जब आप बड़े हो रहे होते हैं, तो आपको एक तरह का हक महसूस होता है। आपके माता-पिता और परिवार आपके साथ होते हैं, और हर चीज़ का ध्यान रखा जाता है। आपको जो चाहिए होता है, वह मिल जाता है। आखिरकार, आपको अपनी मनचाही चीज़ मिल ही जाती है। लेकिन फिर आपको एहसास होता है कि बाहरी दुनिया में अपनी मनचाही चीज़ पाना आसान नहीं है, चाहे वह कॉलेज में सीट पाना हो या अपनी पसंद का काम करना हो।”

बाद में विजय ने ‘फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया’ (FTII) में फिर से अप्लाई किया और आखिरकार उन्हें इसके एक्टिंग प्रोग्राम में दाखिला मिल गया। यह उनके एक्टर बनने के सफ़र में एक बहुत बड़ा मोड़ साबित हुआ।

भुवनेश्वर कुमार को फिर मिले टीम इंडिया में मौका? 2027 वर्ल्ड कप को लेकर अश्विन ने की

साल 2027 का वनडे वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया तीनों देशों की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। इस बड़े टूर्नामेंट के लिए आईसीसी ने हाल ही में मेजबान शहरों की लिस्ट जारी कर दी है। विश्व कप के दौरान कुल 54 मुकाबले खेले जाएंगे, जिनका आयोजन 12 अलग-अलग शहरों में किया जाएगा। 2027 वनडे विश्व कप के लिए संभावित भारतीय टीम को लेकर पूर्व खिलाड़ी रविचंद्रन अश्विन ने अपनी राय रखी है। रविचंद्रन अश्विन ने भारतीय टीम के अनुभवी तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार की वनडे टीम में वापसी को लेकर समर्थन किया है।

अश्विन के मुताबिक, भुवनेश्वर का अनुभव भारत के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। खासकर 2027 वनडे विश्व कप में साउथ अफ्रीका की तेज और उछाल वाली पिचों पर भुवनेश्वर जैसे अनुभवी गेंदबाज टीम के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं।

 

 

वनडे वर्ल्ड कप में इनको दी जगह

क्रिकइन्फो पर बातचीत के दौरान वनडे वर्ल्ड के लिए संभावित टीम की चर्चा पर रविचंद्रन अश्विन ने कहा कि, “वह भुवनेश्वर कुमार को 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों का हिस्सा देखना चाहते हैं। भुवनेश्वर को फर्स्ट क्लास क्रिकेट और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे घरेलू टूर्नामेंट लगातार खेलने चाहिए, ताकि वह पूरी तरह फिट होकर दक्षिण अफ्रीका की परिस्थितियों के लिए तैयार रहें।” अश्विन के मुताबिक, “वहां भारत को भुवनेश्वर जैसे अनुभवी तेज गेंदबाज की जरूरत पड़ेगी।” इसके अलावा उन्होंने अपनी संभावित टीम में रोहित शर्मा, विराट कोहली, शुभमन गिल, हार्दिक पांड्या, कुलदीप यादव और मोहम्मद सिराज का सपोर्ट किया, जबकि संजू सैमसन और शिवम दुबे को जगह नहीं दी।

कब खेला था आखिरी वनडे

भुवनेश्वर कुमार ने भारत के लिए अपना आखिरी वनडे मैच जनवरी 2022 में दक्षिण अफ्रीका के दौरे पर खेला था। इसके बाद से वह वनडे टीम से बाहर हैं। उन्होंने साल 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ वनडे डेब्यू किया था और अपनी पहली ही गेंद पर विकेट लेकर शानदार शुरुआत की थी। भुवनेश्वर ने अब तक भारत के लिए 121 वनडे मैच खेले हैं, जिनमें 141 विकेट अपने नाम किए हैं। उनके अनुभव और नई गेंद से शानदार गेंदबाजी की वजह से उन्हें भारत के सबसे भरोसेमंद तेज गेंदबाजों में गिना जाता है।

कहां-कहां पर होगा मुकाबला

साल 2027 का वनडे विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया की संयुक्त मेजबानी में खेला जाएगा। आईसीसी ने टूर्नामेंट के लिए 12 मेजबान शहरों का ऐलान कर दिया है, जहां कुल 54 मुकाबले होंगे। इनमें जोहान्सबर्ग, सेंचुरियन, डरबन, गेकेबरहा, कुगोम्पो सिटी, केप टाउन, पार्ल, ब्लोमफोंटेन, हरारे, बुलावायो, विक्टोरिया फॉल्स और विंडहोक शामिल हैं। इनमें सबसे ज्यादा मुकाबले साउथ अफ्रीका में खेले जाएंगे, जहां की तेज और उछाल वाली पिचें आमतौर पर तेज गेंदबाजों के लिए मददगार मानी जाती हैं।

आईपीएल और घरेलू टीम में खेलते हैं

भले ही भुवनेश्वर कुमार इस समय भारतीय वनडे टीम की योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन वह घरेलू और आईपीएल क्रिकेट में लगातार सक्रिय हैं। हाल ही में उन्होंने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से खेलते हुए शानदार प्रदर्शन किया और टीम के खिताब बचाने के अभियान में अहम भूमिका निभाई। उनके अनुभव और लगातार अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए उनकी वापसी की चर्चा फिर से तेज हो गई है।

मलेशिया को मात देकर भारत की पुरुष और महिला टीम ने जीता गोल्ड मेडल

भारत की पुरुष और महिला टेबल टेनिस टीम ने स्कॉटलैंड के ग्लासगो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में मलेशिया की टीम को हराकर स्वर्ण पदक हासिल कर लिया है। भारत की महिली टीम ने मलेशिया को 3-0 से हराया वहीं भारत की पुरुष टीम ने मलेशिया को 3-2 से हराया। यह जीत एक ही दिन और एक ही प्रतिद्वंदी के खिलाफ आई इस कारण से यह जीत टीम के लिए खास है।

भारत की पुरुष टीम ने पिछली बार भी स्वर्ण पदक जीता था जबकि महिला टीम ने 12 साल बाद स्वर्ण पदक जीता है। भारतीय पुरुष टीम में मानव ठक्कर, मानुष शाह, साथियन गणानाशेकरन, हरमीत देसाई और पायस जैन शामिल थे।

भारत ने इससे पहले ग्रुप स्टेज में भी जिमबाब्वे और मलेशिया को 3-0 से हराया था। इसके बाद टीम ने श्रीलंका, वेल्स, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, सिंगापुर और इंग्लैंड पर विजय हासिल की।

खिताबी मुकाबले में मानव ठक्कर, मानुष शाह विजेता रहे जबकि साथियन गणानाशेकरन को हार मिली।

वहीं दूसरी वरीयता प्राप्त महिला टीम ने दबदबा बनाकर छठी वरीयता प्राप्त मलेशिया को  3-0 से हराकर खिताब पाया। भारत की महिला टीम में सिंड्रेला दास, श्रीजा अकुला, यशस्वी घोरपड़े, सुतीर्था मुखर्जी और स्वस्तिका घोष शामिल थीं।

पुरषों की भांति इस टूर्नामेंट में महिला टीम भी बिना कोई मैच हारे खिताब जीती। महिला टीम ने मालदीव, दक्षिण अफ्रीका, उत्तरी आयरलैंड, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के खिलाफ बिना कोई सेट गंवाए 3-0 से जीत दर्ज की। वहीं सेमीफाइनल में इंग्लैंड को 3-1 से हराया।

57 ODI विश्वकप मैच होंगे 3 देशों के इन खूबसूरत 12 स्टेडियमों में (Video)

दक्षिण अफ्रीका में होने वाले एकदिवसीय विश्वकप 2027 के लिए सभी टीमें अपनी टीमों को अंतिम रूप दे रही हैं। अगले साल यह विश्वकप अक्टूबर और नवंबर के बीच खेला जाएगा। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने भी प्रबंधन से जुड़ी सारी व्यवस्थाओं पर सहमति देना शुरु कर दिया है।

ना केवल अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल ने  एकदिवसीय विश्वकप के लिए लोगो की घोषणा कर दी है बल्कि 57 कहां कहां खेले जाएंगे इसकी घोषणा भी कर दी है। कुल 3 देश दक्षिण अफ्रीका-जिम्बाब्वे और नामिबिया देशों के 12 स्टेडियम पर मुहर लगाई गई है जिनमे से 8 दक्षिण अफ्रीका के हैं, जिम्बाब्वे के 3 और नामिबिया का एक स्टेडियम है।

दक्षिण अफ्रीका के 8 स्टेडियम और शहर इस प्रकार है। कुगोम्पो सिटी में बफौलो पार्क, केपटाउन में न्यूलैंड मैदान, जोहन्सबर्ग में वॉन्डर्स स्टेडियम, टश्वाने का सेंचुरियन, गेब्रिया का सेंट जोर्ज पार्क, ब्लोमेफोटीन का मैंगाउंग ओवल, डरबन का किंग्समीड पार्क, पार्ल का बोलैंड पार्क चुनिंदा स्टेडियमों में है जिनमें मैच खेले जाने हैं।

वहीं जिम्बाब्वे की राजधानी हरारे के हरारे स्पोर्ट्स क्लब, बुलवायो के क्वीन्स स्पोर्ट्स क्लब और विक्टोरिया फॉल्स के मोसी ओआ टुनिया अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में विश्वकप मैच खेले जाएंगे। नामिबिया का एकमात्र नामिबिया क्रिकेट ग्राउंड जो विंडहोक में स्थित है उसको चुना गया है।गौरतलब है कि यह विश्वकप क्रिकेट में खेला गया सर्वाधिक मैचों का विश्वकप होने जा रहा है।

साल 2003 के बाद यह देश एकदिवसीय विश्वकप का आयोजन कर रहे हैं। इस विश्वकप में मेजबान टीमों को खास सफलता नहीं मिली थी और ग्रुप स्टेज में ही विदाई लेनी पड़ी थी। वहीं इसका फाइनल ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच हुआ था जिसमें ऑस्ट्रेलिया विजयी हुई थी।

कैसे BGT 19-20 के बाद अजिंक्य रहाणे की टेस्ट कप्तानी खा गए थे रोहित शर्मा

Ajinkya Rahane

अजिंक्य रहाणे ने बतौर कप्तान भारत को ऑस्ट्रेलिया की धरती पर 2019-20 में एतिहासिक 2-1 से सीरीज जीत दिलवाई लेकिन इसके बाद उन्हें कप्तानी से तो क्या धीरे धीरे टीम से अलग कर दिया गया। यह बात सही है कि उनका फॉर्म बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज के बाद लगातार ढलान की ओर गया लेकिन अगर बतौर कप्तान ही उनको टीम की बागडोर थमा दी जाती तो शायद भारतीय टेस्ट टीम को नई ऊंचाइया मिलती।

साल 2020 में एडिलेड टेस्ट में जब भारत 36 रनों पर ऑलआउट हुआ था तो कप्तान विराट कोहली पितृत्व अवकाश के लिए भारत लौट गए थे। इसके बाद सबका यह मानना था कि यह दौरा भारत के लिए बहुत कठिन होने वाला है लेकिन जब दौरा खत्म हुआ तो भारत 2-1 से विजयी रहा था।इसका काफी कुछ श्रेय अजिंक्य रहाणे की कप्तानी को मिला जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर युवाओं पर विश्वास दिखाया।

विराट कोहली के कप्तानी के इस्तीफे के बाद अजिंक्य रहाणे की जगह रोहित शर्मा को टेस्ट की कप्तानी दी गई जिसकी सजा भारतीय टेस्ट क्रिकेट आज तक भुगत रहा है। लेकिन समय का फेर कुछ ऐसा रहा कि रणजी ट्रॉफी में रोहित शर्मा को करियर के अंतिम पड़ाव पर अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में खेलना पड़ा।

खराब फॉर्म के बाद अजिंक्य रहाणे ने बल्ले से 2023 में कमाल की वापसी की।अजिंक्य रहाणे ने 18 महीने बाद विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2023 फाइनल में टेस्ट टीम में जगह बनाई थी। उन्होंने पहली पारी में 89 और दूसरी पारी में 46 रन बनाए थे और कुल 165 रन बनाकर उन्होंने एक बार फिर अपनी जगह पक्की की। कैरिबियाई दौरे पर अजिंक्य रहाणे पुनः टेस्ट टीम के उपकप्तान बने। उपकप्तान बनाने के पीछे टीम ने एक बार फिर इशारा किया कि शायद वह फिर कप्तान बन जाए लेकिन ऐसा हो ना सका और वह टेस्ट टीम से किनारे कर दिए गए।

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इससे पहले अजिंक्य रहाणे अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू धरती पर टेस्ट मैच में भारत की अगुवाई कर चुके हैं जिसमें भारत महज 3 दिनों में यह मैच जीत चुका था।

टेस्ट टीम से बाहर होकर भी बतौर कप्तान मुंबई को दिलाई रणजी ट्रॉफी

अजिंक्य रहाणे के लिए बल्ले से रणजी ट्रॉफी का 2024 सत्र बेहद ही खराब रहा था लेकिन वह वानखेड़े स्टेडियम में वह ‘सबसे खुश खिलाड़ी’ थे, जिनकी कप्तानी में टीम 42वीं बार शीर्ष घरेलू टूर्नामेंट की चैम्पियन बनीं। मुंबई ने विदर्भ को 169 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया था।Ajinkya Rahane ने इस दौरान सत्र में महज 214 रन बनाये।