हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद पर संसद में सियासी बवाल! खड़गे ने BJP पर लगाया ‘छुआछूत’ का आरोप, नड्डा ने किया पलटवार

Haldwani Shuddhikaran Row: हल्द्वानी के रामलीला मैदान में आठ अगस्त को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद हुए ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान को लेकर गुरुवार (13 अगस्त) को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच राजनीतिक घमासान शुरू हो गया। गुरुवार को राज्यसभा में ‘शुद्धिकरण’ रस्म को लेकर राजनीतिक टकराव हुआ। खड़गे ने उच्च सदन में यह मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि उनके दौरे के बाद उस जगह पर शुद्धिकरण की रस्म निभाई गई। उन्होंने सवाल किया कि क्या ऐसा काम लोकतंत्र के अनुकूल है।

मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, “…मैं हल्द्वानी में था, जहां मैंने रामलीला मैदान में एक जनसभा को संबोधित किया। वहां लाखों लोग मौजूद थे। उस समय मैंने किसी समुदाय या धर्म का नाम नहीं लिया, मैंने केवल सरकार से जुड़े मुद्दों को दोहराया। लेकिन मेरे भाषण के बाद, बीजेपी के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहाँ हवन किया… क्या लोकतंत्र में ऐसा होता है? आप संविधान की रक्षा कैसे कर रहे हैं? मैं विपक्ष का नेता (LoP) हूं…।”

उन्होंने इस घटना को संविधान का अपमान करार देते हुए कहा कि वह इसे एक राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाना चाहते हैं। खड़गे ने कहा, “यह संविधान का अपमान है।” कांग्रेस प्रमुख ने यह भी कहा कि उन्होंने संसद में कई साल बिताए हैं। उन्होंने उस हरकत पर आपत्ति जताई जिसे उन्होंने अपने प्रति ‘छुआछूत’ का व्यवहार बताया।

उन्होंने आगे कहा, “मैं इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाना चाहता। मैं बरसों से इस सदन का सदस्य रहा हूं। मैं अनुसूचित जाति से आता हूं और दलित हूं… मैंने कभी किसी से यह नहीं कहा कि मेरी मदद करो या मेरी रक्षा करो। मुझमें लड़ने की ताकत है और मैं लड़ता भी हूं। लेकिन आप मेरे साथ छुआछूत जैसा व्यवहार करते हैं, ‘शुद्धिकरण’ करते हैं और मेरा अपमान करते हैं।”

नड्डा ने BJP का संबंध होने से इनकार किया

वहीं, खड़गे के आरोपों पर BJP के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने इस घटना को बेहद दुखद बताया। लेकिन खड़गे के इस दावे को खारिज कर दिया कि इसके पीछे BJP कार्यकर्ता थे। नड्डा ने कहा कि इसमें शामिल लोग BJP के सदस्य नहीं थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी ऐसे व्यवहार का समर्थन नहीं करती है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इस मामले की जांच की जाएगी।

उन्होंने कहा, “खड़गे जी ने जो कहा वह वाकई दुखद है… न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के लिए बल्कि हम सभी के लिए… बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। लेकिन हम इसकी जांच करेंगे। मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि वहां जो कुछ भी हुआ, उसकी निश्चित रूप से जांच की जाएगी। लेकिन मैं यह साफ करना चाहता हूं कि बीजेपी ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। मैं इसकी निंदा करता हूं। राष्ट्रीय अध्यक्ष इस मामले को देखेंगे। यह हम सभी के लिए बहुत खेद की बात है कि आपकी भावनाएं आहत हुईं।”

नड्डा ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पार्टी के शामिल होने से इनकार करने और जांच का वादा करने के बाद भी खड़गे BJP को ही जिम्मेदार ठहराते रहे। नड्डा ने कहा, “मैंने पहले ही कहा है कि BJP ऐसी गतिविधियों का समर्थन नहीं करती। यह हम सबके लिए, पूरे देश के लिए अफसोस की बात है। हम इसकी जांच करेंगे। लेकिन अगर खड़गे साहब कहते हैं कि आप ऐसा करते हैं, तो यह सही नहीं है।”

राज्यसभा सभापति ने भी घटना की निंदा की

बहस के दौरान राज्यसभा सभापति ने दखल देते हुए कहा कि खड़गे का कथित अपमान सदन में मौजूद हर व्यक्ति का अपमान माना जाएगा। सभापति ने कहा, “अगर खड़गे जी का अपमान होता है, तो सबका अपमान होता है।” सभापति ने यह भी कहा कि राजनीतिक जुड़ाव से ऊपर उठकर इस घटना की निंदा की जानी चाहिए। साथ ही जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दी जानी चाहिए। सभापति ने आगे कहा कि इस हरकत के पीछे जो लोग हैं, उन्हें पकड़ा जाना चाहिए और सजा मिलनी चाहिए।

हल्द्वानी में क्या हुआ था?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 8 अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के बाद कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ अनुष्ठान किया गया। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि जिस ‘श्री राम सेना’ संगठन ने यह ‘शुद्धिकरण’ किया। वह BJP से जुड़ा है। हालांकि, BJP ने इस आरोप का खंडन किया।

गोदियाल ने दावा किया कि यह अनुष्ठान इसलिए किया गया क्योंकि खरगे दलित समुदाय से आते हैं। उन्होंने BJP पर जाति के नाम पर समाज में बंटवारा करने का आरोप लगाया। इस अनुष्ठान को मानवता के खिलाफ अपराध बताते हुए गोदियाल ने दावा किया कि इससे कांग्रेस और BJP की विचारधारा में बुनियादी अंतर स्पष्ट होता है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दक्षिणपंथी संगठन के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।

बीजेपी का ‘श्री राम सेना’ से किनारा

वहीं, BJP ने ‘श्री राम सेना’ से किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया और कांग्रेस पर राजनीतिक फायदे के लिए पार्टी की छवि खराब करने का आरोप लगाया। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री खजान दास ने दावा किया कि रामलीला मैदान में खड़गे की रैली के दौरान कुछ ऐसे नारे लगाए गए जिनसे सनातन समुदाय की भावनाएं आहत हुईं। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान धार्मिक महत्व की जगह है। वहां किसी दूसरे धर्म से जुड़े नारे लगाने से लोग नाराज हुए।

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एक्टिविज्म करना है तो सजा के लिए तैयार रहें, नड्डा का खरगे पर पलटवार

JP Nadda statement Rajya Sabha: संसद के मॉनसून सत्र में नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर बुधवार को राज्यसभा में भारी हंगामा हुआ। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने पुलिस कार्रवाई और माकपा कार्यालय में पुलिस के प्रवेश को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। इस पर पलटवार करते हुए राज्यसभा में सदन के नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का बचाव किया और स्पष्ट कहा कि अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है, तो उसे इस तरह की कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

बुधवार को राज्यसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज का मुद्दा उठाकर जोरदार हंगामा किया। सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने माकपा कार्यालय में दिल्ली पुलिस के दाखिल होने और जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष को गिरफ्तार करने के प्रयास का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि 2021 के एक मामले में सादे कपड़ों में आई पुलिस टीम ने केवल इसलिए यह कार्रवाई की क्योंकि आइशी घोष ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन में भाग लिया था। ALSO READ: संसद में आर-पार, सपा सांसदों का दानपेटी प्रदर्शन, प्रियंका बोलीं मैंने कुछ गलत नहीं कहा

खरगे का सरकार पर हमला

कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि एक राष्ट्रीय पार्टी के कार्यालय में घुसकर किसी को गिरफ्तार करने की कोशिश करना बेहद शर्मनाक है। क्या इससे लोकतंत्र खतरे में नहीं पड़ता? खरगे ने पुलिस टीम पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे कदम देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर आघात हैं।

केन्द्रीय मंत्री नड्डा का पलटवार

खरगे के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता जेपी नड्डा ने पुलिस कार्रवाई का मजबूती से समर्थन किया। अपने छात्र जीवन का उदाहरण देते हुए नड्डा ने कहा कि ये बहुत ही सामान्य स्थिति है। मैं खुद स्टूडेंट एक्टिविस्ट रहा हूं। इमरजेंसी के दौरान मुझे कई बार क्लासरूम से उठाकर ले जाया गया, तब देश में कांग्रेस की सरकार थी। अगर किसी छात्र को एक्टिविज्म करना है तो उसे ये सब झेलना ही पड़ेगा। ALSO READ: Priyanka Gandhi : प्रियंका गांधी के बयान पर संसद में बवाल, प्रह्लाद जोशी पर टिप्पणी से मचा हंगामा, माफी की उठी मांग

 

नड्डा ने आगे कहा कि जब कोई कानून हाथ में लेता है, तो कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को अपनी जिम्मेदारी निभानी ही पड़ती है। इसे गैर-जरूरी तरीके से सनसनीखेज बनाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि मैंने खुद दो बार गिरफ्तारी झेली है, इसलिए छात्र राजनीति में ऐसी सजाओं के लिए तैयार रहना पड़ता है।

आखिर किन 3 शर्तों पर मान गए सोनम वांगचुक? 26 दिन बाद अनशन खत्म करने की असल वजह तो अब सामने आई

CJP Protest update: NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के विरोध में 26 दिनों से अनशन पर बैठे मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई की आधी रात के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया है। अनशन खत्म करने के बाद वांगचुक ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो जारी कर उन तीन प्रमुख शर्तों और वजहों का खुलासा किया है जिनके आधार पर उन्होंने अपना 26 दिनों का उपवास तोड़ा है। अस्पताल के बेड से जारी 3 मिनट के इस वीडियो में वांगचुक ने बताया कि केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई मुलाकात के बाद उन्होंने अनशन खत्म करने का फैसला लिया।

किन 3 शर्तों पर खत्म हुआ 26 दिन लंबा अनशन?

सोनम वांगचुक के मुताबिक सरकार की ओर से मिली तीन मुख्य गारंटियों के बाद ही उन्होंने अपना अनशन वापस लिया है। पहला है परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही पर संसद में चर्चा। केंद्रीय मंत्रियों ने वांगचुक को आश्वासन दिया है कि सरकार और सभी राजनीतिक दलों के सांसद संसद में असफल हो रही परीक्षा प्रणाली और जवाबदेही के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा करेंगे। दूसरा पीड़ित परिवारों को मुआवजा। वांगचुक के मुताबिक सरकार ने NEET परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के पीड़ित परिवारों को पर्याप्त मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। तीसरा शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज न करना। सरकार ने वादा किया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण ढंग से विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों और लोगों के खिलाफ कोई भी कानूनी मामला या केस दर्ज नहीं किया जाएगा।

पीएम मोदी ने रात में वीडियो जारी कर किया कड़े कानून का ऐलान

सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त करने और नीट-यूजी 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी और युवाओं के विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार देर रात एक सेल्फ-रिकॉर्डेड वीडियो संदेश जारी किया। पीएम मोदी ने एक्स पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में और सख्त कार्रवाई आएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल एक ड्राफ्ट बिल लाएगा जिसमें दोषियों के लिए सख्त सजा और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने का प्रावधान होगा। इसके लिए संबंधित विभागों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। दूसरी ओर विपक्ष संसद के जारी मानसून सत्र के भीतर और बाहर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहा है और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तथा नीट पेपर लीक मामले पर विस्तृत चर्चा की मांग पर अड़ा हुआ है।

कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आज सरकार और CJP के बीच वार्ता

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा तटस्थ स्थल की मांग स्वीकार किए जाने के बाद शुक्रवार को दोपहर करीब 12:30 बजे दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में सरकार और CJP के बीच बातचीत तय हुई है। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने बताया कि वे सरकार द्वारा न्यूट्रल वेन्यू की मांग मानने के फैसले का स्वागत करते हैं। इससे पहले 20 जुलाई को सीजेपी प्रवक्ताओं (सौरभ दास और आशुतोष रंका) की केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के आवास पर मुलाकात हुई थी। इसके बाद सीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें वर्चुअल डिटेंशन में रखा गया था। इसके बाद से ही सीजेपी किसी मंत्री के घर या दफ्तर के बजाय केवल न्यूट्रल वेन्यू पर ही वार्ता करने की शर्त पर अड़ी थी। सीजेपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक जंतर-मंतर पर उनका प्रदर्शन जारी रहेगा।

CJP की मुख्य मांगें

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।

प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी पर जवाबदेही तय करना और शिक्षा प्रणाली में सुधार।

नीट पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा।

आंदोलन में शामिल शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर (FIR) और कानूनी कार्रवाई को वापस लेना।