Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

Russia-Ukraine War : मॉस्को की ओर यूक्रेन के बड़े ड्रोन हमले, रूस का दावा- 1,600 से ज्यादा ड्रोन मार गिराए

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यूक्रेन ने मॉस्को की ओर अब तक के सबसे बड़े ड्रोन हमलों में से एक को अंजाम दिया है। रूस ने दावा किया है कि शनिवार से अब तक उसने 1,600 से ज्यादा यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए हैं, जिनमें करीब 450 ड्रोन मॉस्को की दिशा में बढ़ रहे थे। रूस में संसदीय चुनाव के आखिरी दिन मॉस्को में ड्रोन हमला हुआ है। मॉस्को की एक ऑइल रिफाइनरी को ड्रोन हमले में नुकसान पहुंचा है। हमले के बाद यहां आग लग गई। इस हमले के दौरान मॉस्को क्षेत्र में दो लोगों की मौत की भी जानकारी सामने आई है।

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मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने इसे क्षेत्र पर हुए सबसे बड़े यूक्रेनी ड्रोन हमलों में से एक बताया। रूसी अधिकारियों के मुताबिक, हमलों के बाद मॉस्को के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और कई इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया।

 

मॉस्को की तेल रिफाइनरी तक पहुंचे ड्रोन

 

रिपोर्ट के मुताबिक, कई ड्रोन मॉस्को ऑयल रिफाइनरी तक पहुंचने में सफल रहे। रॉयटर्स के प्रत्यक्षदर्शियों ने रिफाइनरी परिसर से धमाकों और धुएं के गुबार की जानकारी दी। हालांकि, संयंत्र को हुए नुकसान की वास्तविक स्थिति तत्काल स्पष्ट नहीं हो सकी है। यूक्रेन की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

 

मॉस्को की इस रिफाइनरी ने वर्ष 2024 में करीब 11.6 मिलियन मीट्रिक टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया था। इससे लगभग 2.9 मिलियन टन पेट्रोल और 3.2 मिलियन टन डीजल का उत्पादन हुआ था।

 

यूक्रेन के हमलों से पहले भी रूस की रिफाइनिंग क्षमता प्रभावित होने की खबरें सामने आती रही हैं। इन हमलों को रूस के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी और कीमतों में बढ़ोतरी से भी जोड़ा गया है।

 

रूस के संसदीय चुनाव के बीच हुआ हमला

 

यह ड्रोन हमला रूस में संसदीय चुनाव के अंतिम दिन हुआ। मॉस्को के मेयर सोबयानिन ने दावा किया कि ड्रोन अभियान का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को बाधित करना था। हालांकि, इस दावे पर यूक्रेन की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। मॉस्को क्षेत्र के रामेंस्कोये में हमलों के बाद 21 मंजिला एक अपार्टमेंट बिल्डिंग से करीब 400 लोगों को बाहर निकाला गया, जिनमें लगभग 70 बच्चे शामिल थे।

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यूक्रेन में रूसी ड्रोन हमले में चार की मौत

 

इसी बीच यूक्रेन में भी रूसी ड्रोन हमले में चार लोगों की मौत हुई है। कीव क्षेत्र में हुए रातभर के हमले में तीन बच्चों समेत चार लोगों की जान चली गई। आपातकालीन सेवाओं के अनुसार, एक ड्रोन के निजी मकान से टकराने के बाद एक महिला और उसके तीन साल के दो बच्चों की मौत हो गई। एक अन्य हमले में घायल हुई लड़की ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष के बीच दोनों देशों में ड्रोन हमलों का सिलसिला लगातार जारी है।

बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

बिहार की चार फिल्मी हस्तियों को वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। बिहार के लिए 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह खास होने जा रहा है। बिहार से जुड़ी चार फिल्मी हस्तियों अभिनेता संजय मिश्रा, निर्देशक कमलेश के. मिश्र, निर्माता मिंटी मिश्रा और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को गुजरात के एकता नगर (केवाड़िया) में आयोजित समारोह में पुरस्कार प्रदान करेंगी। दरभंगा निवासी अभिनेता संजय मिश्रा को फिल्म ‘भक्षक’ में बेहतरीन अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। ‘भक्षक’ की कहानी चर्चित मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड से प्रेरित है। गोपालगंज निवासी निर्देशक कमलेश के. मिश्र और निर्माता मिंटी मिश्रा को फिल्म ‘काकोरी’ के लिए सर्वश्रेष्ठ जीवनीपरक/ऐतिहासिक पुनर्निर्माण/संकलन फिल्म का रजत कमल प्रदान किया जाएगा। देशभक्ति पर आधारित यह फिल्म 1925 के ऐतिहासिक ‘काकोरी ट्रेन एक्शन’ के शताब्दी वर्ष पर काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि स्वरूप समर्पित है। फिल्म में काकोरी की ऐतिहासिक घटना और उससे जुड़े स्वतंत्रता सेनानियों के शौर्य, संकल्प और उनके अमिट योगदान को रेखांकित किया गया है।

कमलेश के. मिश्र की फ़िल्म को पहले भी राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त हो चुका हैं। उनकी फ़िल्म ‘मधुबनी: द स्टेशन ऑफ कलर्स’ के लिए गैर-फीचर फिल्म श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ कथन का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार मिला था। फिल्मकार कमलेश मिश्र की पहली निर्देशित फीचर फिल्म ‘आज़मगढ़’ है, जिसमें पंकज त्रिपाठी ने मुख्य नेगेटिव भूमिका निभाई है। यह फिल्म आतंकवाद के विषय पर आधारित है। अपनी फिल्मों में विशेष दृष्टिकोण से इतिहास और रिसर्च को प्रमुख स्थान देते हैं। हाल ही में उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों पर ‘दिल्ली दंगे…जलने और दोषारोपण की कहानी’ ( दिल्ली राइट्स- अ टेल ऑफ बर्न एंड ब्लेम) डॉक्यूमेंट्री बनाई थी, जो तब काफ़ी चर्चित हुई थी। उनकी पहली शोर्ट फ़िल्म “किताब” ने वैश्विक ख्याति अर्जित की। काकोरी के निर्माता जसविंदर सिंह दिल्ली से और मिंटी मिश्रा बिहार के गोपालगंज की हैं। यह फ़िल्म उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से बनी है। बिहार के दरभंगा के रहने वाले संजय मिश्रा देश के प्रसिद्ध अभिनेता हैं।

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तीन दशक से भी ज्यादा समय से अभिनय के क्षेत्र में सक्रिय हैं। प्रभावशाली अभिनय उनकी पहचान है। 1995 में फिल्म ओह डार्लिंग! ये है इंडिया! से अपने अभिनय करियर की शुरुआत की थी। ‘आंखों देखी ‘ (2015) और ‘वध’ (2022) में उन्हें उम्दा अभिनय के लिए दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवार्ड मिल चुका है। सीतामढ़ी निवासी पत्रकार, लेखक और फिल्म समीक्षक संजीव श्रीवास्तव को हिंदी में सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक के लिए स्वर्ण कमल प्रदान किया जाएगा। वह करीब ढाई दशक से दिल्ली में पत्रकारिता और फिल्मों पर लेखन कर रहे हैं। वह मुंबई में भी फिल्मों की रिपोर्टिंग कर चुके हैं। श्री श्रीवास्तव की सिनेमा पर कई पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें ‘समय सिनेमा और इतिहास’, ‘सिनेमा की समानांतर दुनिया’ और ‘आपातकाल का सिनेमा’ प्रमुख हैं।

उन्होंने ‘माधुरी’ पत्रिका के संस्थापक संपादक अरविंद कुमार से स्वर्णिम दौर के सिनेमा पर लंबी बातचीत भी की है, जिसे वह सिनेमाई अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। फिल्मकार कमलेश के मिश्र ने ‘काकोरी’ को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए अत्यंत गौरव और खुशी की बात है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार केवल किसी फिल्म या फिल्मकार का सम्मान नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और संवेदनाओं को ईमानदारी से सामने रखने वाले रचनात्मक प्रयास की राष्ट्रीय स्वीकृति है। श्री मिश्र ने कहा कि वह इस सम्मान को व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक काकोरी के अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं। काकोरी रेल एक्शन भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण पड़ाव था और फिल्म के माध्यम से इस ऐतिहासिक घटना को उचित महत्व के साथ आज की पीढ़ी तक पहुंचाना उनका उद्देश्य था।

उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्माण पूरी निष्ठा के साथ किया गया है। उन्होंने निर्माता जसविंदर सिंह, मिंटी मिश्रा, उत्तर प्रदेश सरकार तथा फिल्म से जुड़े सभी कलाकारों और तकनीशियनों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह पुरस्कार सामूहिक प्रयास और समर्पण की सफलता है। कमलेश के मिश्र ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक खुशी इस बात की है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के माध्यम से काकोरी के वीर क्रांतिकारियों की स्मृति और उनके बलिदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। उन्होंने यह सम्मान सभी अमर शहीदों को समर्पित किया। मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी जैसी ऐतिहासिक घटना पर फिल्म का हिस्सा बनना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण और सुखद अनुभव रहा। अब इस फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना इस पूरी यात्रा को और विशेष बना देता है।

मिंटी मिश्रा ने कहा कि काकोरी रेल एक्शन स्वतंत्रता आंदोलन का महत्वपूर्ण अध्याय है और काकोरी के अमर क्रांतिकारियों के साहस, त्याग और बलिदान को आज की पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि काकोरी के माध्यम से इतिहास की महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित घटना को प्रमुखता से सामने लाने का छोटा-सा प्रयास किया गया। उन्होंने उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के सहयोग से निर्मित फिल्म के मुख्य निर्माता जसविंदर सिंह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लेखक-निर्देशक कमलेश के मिश्र और पूरी टीम के समर्पण ने इस प्रयास को सार्थक बनाया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान पूरी टीम के लिए गर्व का क्षण है। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने पर श्री श्रीवास्तव ने कहा कि सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक का राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना उनके लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष बिहार की चार हस्तियों को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलना भी बड़ी बात है।

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सत्य, प्रेम, करुणा से लेकर राम हरि और जयजगत तक विनोबा भावे का सर्वोदय दर्शन!

सत्य, प्रेम, करुणा से लेकर राम हरि और जयजगत तक विनोबा भावे का सर्वोदय दर्शन!

Vinoba Bhave 131st Birth Anniversary

Vinoba Bhave 131st Birth Anniversary: आज ग्यारह सितंबर को संत विनोबा भावे का 131वां जन्मदिवस है। युवा विनोबा भावे के मन में हिमालय में जाने का भाव उठा पर शीघ्र ही विनोबा के कदम हिमालय के बजाय महात्मा गांधी के पास या सानिध्य में जाने की दिशा में चल पड़े और इस तरह विनोबा जी महात्मा गांधी के पास पहुंच गए। गांधी जी ने विनोबा भावे को पहला सत्याग्रही कहा ही नहीं घोषित भी किया। विनोबा ने तीन शब्दों में मनुष्य जीवन सूत्र का सार बताया “सत्य, प्रेम, करुणा।”

 

विनोबा सूत्र में संवाद करते थे। जिसका सुनने समझने वाले अपने अपने तरीके से अर्थ और भाष्य करते थे। पर विनोबा के सूत्र कालजयी एवं स्पष्ट हैं। 1974 में भारत में आपातकाल लगने से पहले ही विनोबा जी मौन ले चुके थे। विनोबा का मौन देश-दुनिया को आत्मचिंतन का स्पष्ट संदेश देता था, आपातकाल में विनोबा से पूछा गया कि क्या संदेश है तो विनोबा ने एक शब्द लिखा अनुशासन पर्व! आपातकाल के सन्नाटे में अनुशासन पर्व की गूंज समूची दुनिया में गूंजती रही। विनोबा के मौन की मुखरता की अभिव्यक्ति शब्दों की ध्वनि से से ज्यादा बोध्यगम्य रही। विनोबा की बौद्धिक क्षमता की सहजता और सरलता का जीवंत शब्द कर्म 'गीताई' के रूप में आज भी लोकसमाज को सत्य प्रेम और विश्वास को आत्मसात करने की असीम ऊर्जा देता है।

 

महाराष्ट्र की बिना पढ़ी-लिखी पर भक्ति ज्ञान और श्रद्धा-विश्वास से ओतप्रोत गुणवान मातृशक्ति को सहज सरल स्वरूप में 'गीताई' मिली। जगत के स्वरूप को जानने की जिज्ञासुओं को 'गीताई' के रूप में साकार रूप में सरल समाधान मिला। 1942 की अगस्त क्रांति के दौरान नागपुर केन्द्रीय जेल में विनोबा जी ने गीता पर प्रवचन दिए थे, जिसे साने गुरुजी ने लिपिबद्ध किया था जो आज भी देश दुनिया में पढ़ा जाता है।

 

जय जगत की उद्धोषणा का सहज सरल सूत्र देने वाले संत विनोबा अपने विचारों या जीवन दर्शन को सत्य, प्रेम और करुणा के त्रिवेणी संगम के माध्यम से व्यक्त करते रहे। विनायक नरहरि भावे से प्रारंभ हुए विनोबा के हस्ताक्षर 'बाबा' के स्वरूप तक आकर 'राम हरि' में परिवर्तित हो गए। विनोबा जी द्वारा दिया जयजगत शब्द समूचे जगत में व्याप्त हो गया। व्यक्ति नहीं जगत की जय ही जीवन का सार है।

 

संत विनोबा भावे ने अपने जीवन काल में सभी धर्मों के ग्रंथों का अध्ययन मनन और चिन्तन कर हम सब को सभी धर्मों का सार निकाल कर सबके सामने रखा और सभी ने उस सार सहजता और सरलता के साथ स्वीकार किया। विनोबा भावे ने मन और तन के समन्वय के साथ आजीवन लोकसागर से प्रत्यक्ष साक्षात्कार एवं प्रत्यक्ष संवाद करते हुए समूचे देश में पैदल यात्रा करते हुए सतत् संवाद का अद्भुत प्रयोग कर, पैदल लोक यात्री के रूप में बारह साल तक सतत् गतिशील रहकर यात्रा संपन्न की।

 

हर दिन नई जमीन हर समय नया आसमान। भारत भूमि के लोकमानस में दान की गहरी समझ और परम्परा मौजूद है इस सूत्र को सामने रखकर विनोबा जी ने भूदान, ग्राम दान से लेकर जीवन दान के विचार को जमीन पर साकार कर समूची मानव सभ्यता को आजाद भारत में एक दूसरे के साथ मिलकर रहने और मिल-जुलकर ज़ीने का मार्ग अपनी जीवन यात्रा और कृतित्व से समझाया।

 

चंबल घाटी के बागी भाइयों के मन में संत विनोबा भावे ने बागी जीवन को त्याग कर सामान्य मनुष्य की तरह जीवन जीने का भाव जागृत कर बागी भाई सामान्य रूप से जीने की राह के राहगीर बने और सत्य प्रेम करुणा को बचे हुए जीवन का सूत्र बना दिया। विनोबा भावे ने सर्वोदय दर्शन को समग्रता से समझने की राह चुनी। सर्वोदय पात्र की परिकल्पना को साकार स्वरूप प्रदान किया।

 

सबै भूमि गोपाल की सब सम्पत्ति भगवान की के शाश्वत जीवन दर्शन को समग्रता से समझने की दृष्टि विकसित की। जीवन का कार्य सम्पूर्ण हो गया तो बिनोबाजी सहजता से शून्य में विलीन हो गये। अपने जीवन के आखरी पड़ाव में विनोबा जी ने नये प्रयोग किए जैसे शून्य में प्रवेश, क्षेत्र संन्यास। विनोबा ने अपने सभी साथियों एवं लोगों को एक दूसरे से आपस में नाहक मिलने जुलने का सिलसिला अपने निजी एवं सार्वजनिक जीवन में बनाए रखने का रास्ता सुझाया।

 

हम सब एक दूसरे से कोई काम होता है तभी मिलते-जुलते हैं विनोबा जी ने यह सुझाया कि हम नाहक मिलने जुलने की संस्कृति को बढ़ावा देंगे तो हमें स्वतंत्र सहजीवन का आनंद जीवन भर लगातार बिना रुके और विशेष प्रयास के मिलता रहेगा। विनोबा भावे से मिलकर असीम आनन्द और शान्ति की अनुभूति होती थी। विनोबा जी ने देश और दुनिया की भाषाओं को सीखने का सिलसिला आजीवन जारी रखा। अंतिम समय में वे जापानी सीख रहे थे।

 

भारतीय भाषाओं को समझने में लोगों को सहजता और सरलता हो इसलिए विनोबा जी ने सभी भारतीय भाषाओं को देवनागरी लिपि में लिखने का न केवल सुझाव दिया वरन कई पत्र-पत्रिकाओं को देवनागरी लिपि में प्रकाशित करने की शुरुआत भी की और करवाईं। विनोबा जी का जीवन प्रकृति की प्रतिकृति की तरह ही आरंभ से अंत तक बना रहा। हर दिन प्रवाहमान और सरलता से परिपूर्ण संत विनोबा जी का जन्मदिन पर सादर स्मरण, जयजगत।

गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल ‘BHISHM Cube-R300’ की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार

गुजरात विधानसभा में अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की प्रदर्शनी, महज 12 मिनट में होता है तैयार

BHISM Cube R 300

गुजरात विधानसभा परिसर में अत्याधुनिक पोर्टेबल इमरजेंसी मेडिकल अस्पताल 'BHISHM Cube-R300' की विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया है। यह पोर्टेबल यूनिट 12 मिनट में तैनात होकर 300 मरीजों का इलाज करने में सक्षम है। ALSO READ: भूपेंद्र पटेल सरकार का बड़ा फैसला: मूंगफली, मूंग, उड़द और सोयाबीन की MSP पर खरीद के लिए पंजीकरण

 

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुजरात विधानसभा परिसर में ‘BHISHM Cube-R300’ की विशेष प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। भारत सरकार के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) के मार्गदर्शन में ‘आरोग्य मैत्री पहल’ के तहत यह अत्याधुनिक यूनिट तैयार की गई है, जो आपदा के समय चिकित्सा सेवाओं में क्रांति लाएगी।

महानुभावों की उपस्थिति और डॉक्यूमेंट्री फिल्म का प्रदर्शन

इस भव्य अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष शंकरभाई चौधरी, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया सहित मंत्रिमंडल के सदस्य एवं विधायक विशेष रूप से उपस्थित रहे। सभी महानुभावों ने इस दो दिवसीय प्रदर्शनी के तहत ‘भीष्म क्यूब’ की कार्यप्रणाली को दर्शाने वाली विशेष डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी देखी।

 

12 मिनट में तैनाती और 300 मरीजों के इलाज की क्षमता

स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल पानशेरिया ने बताया कि इस पोर्टेबल अस्पताल को महज 12 मिनट से भी कम समय में किसी भी स्थान पर कार्यान्वित किया जा सकता है। इस सिंगल यूनिट द्वारा एक साथ लगभग 300 घायलों को आपातकालीन उपचार दिया जा सकता है। पूरी प्रणाली 72 मॉड्यूलर मिनी-क्यूब्स में विभाजित है, जिसमें प्रत्येक क्यूब का वजन 20 किलोग्राम से कम होने के कारण इसे लाना-ले जाना बेहद आसान है।

 

पूर्णतः अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं और परिवहन क्षमता

इस अस्पताल में वेंटिलेटर, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, मिनी-लैब, सर्जिकल उपकरण और ऑक्सीजन आपूर्ति सहित लगभग 400 चिकित्सा सामग्रियां उपलब्ध हैं। जमीन, हवाई या समुद्री मार्ग से कहीं भी भेजी जा सकने वाली यह प्रणाली स्वयं की बिजली उत्पादन क्षमता रखती है और दुर्गम क्षेत्रों में इसे विमान या हेलीकॉप्टर के माध्यम से एयरड्रॉप भी किया जा सकता है।

 

गुजरात के लिए महत्व और वैश्विक स्तर पर मानवीय सहायता

आपदा के जोखिमों और लंबे समुद्री तट वाले गुजरात के लिए इस अस्पताल की तैनाती राज्य की राहत एवं बचाव क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। इससे पहले भारत सरकार द्वारा इन क्यूब्स को यूक्रेन, मालदीव, जमैका और श्रीलंका जैसे देशों में मानवीय सहायता के रूप में भेजा जा चुका है। इस उद्घाटन समारोह में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, GSDMA, SDRF के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।

 

हमारे राज्य में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक मजबूत और त्वरित बनाने वाली इस अत्याधुनिक पोर्टेबल अस्पताल की पहल वास्तव में सराहनीय है। चिकित्सा क्षेत्र में तकनीक का यह समन्वय कठिन समय में कई नागरिकों की अमूल्य जान बचाने में मददगार साबित होगा।

 

योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब 70 साल की उम्र तक सेवाएं देंगे सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टर

योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब 70 साल की उम्र तक सेवाएं देंगे सेवानिवृत्त विशेषज्ञ डॉक्टर

Yogi adityanath

Yogi Govt Decision Specialist Doctors: प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी को दूर करने और आमजन को बेहतर एवं समयबद्ध चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने बड़ा जनहितकारी फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रादेशिक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा (पीएमएचएस) संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों के पुनर्नियोजन की अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष से बढ़ाकर 70 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया है।

सरकार के इस फैसले से प्रदेश के अस्पतालों में अनुभवी विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी और बढ़ती जनसंख्या तथा अस्पतालों में मरीजों के बढ़ते दबाव के बीच चिकित्सा सेवाओं को मजबूती मिलेगी। विशेष रूप से गरीब और वंचित वर्ग को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा।

 

उपमुख्यमंत्री एवं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने कहा कि प्रदेश में चिकित्सकों, विशेषकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। अस्पतालों के बाह्य एवं अन्तः रोगी विभागों में लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

500 निःसंवर्गीय पदों पर होगा पुनर्नियोजन

अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष ने बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 500 निःसंवर्गीय पदों के सापेक्ष पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों का पुनर्नियोजन किया जाएगा। नियुक्ति वॉक-इन-इंटरव्यू के माध्यम से अनुबंध के आधार पर होगी। पुनर्नियोजन नियमित चिकित्साधिकारियों से पद भरे जाने अथवा एक वर्ष की अवधि, जो भी पहले हो, तक किया जाएगा। इसके बाद कार्य एवं आचरण, गुण-दोष तथा स्वास्थ्य प्रमाणपत्र के आधार पर वर्ष-दर-वर्ष अवधि बढ़ाई जा सकेगी, लेकिन इसकी अधिकतम सीमा 70 वर्ष की आयु तक होगी। विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियमित नियुक्ति होने के बाद संबंधित निःसंवर्गीय पद स्वतः समाप्त हो जाएंगे। किसी भी स्थिति में पुनर्नियोजन के कुल पदों की संख्या 500 से अधिक नहीं होगी।

कन्सलटेन्ट के रूप में देंगे सेवाएं

पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों को कोई प्रशासनिक पद नहीं दिया जाएगा और न ही उन्हें संवर्गीय पदनाम मिलेगा। वे ‘कन्सलटेन्ट’ अथवा ‘परामर्शी’ के रूप में अपनी सेवाएं देंगे। अस्पताल की आवश्यकता के अनुसार उन्हें आपातकालीन एवं आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं में भी योगदान देना होगा।

 

साथ ही, सैन्य सेवा से अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त होने वाले विशेषज्ञ एवं एमबीबीएस चिकित्सकों को भी पीएमएचएस संवर्ग के सेवानिवृत्त चिकित्सकों की भांति पुनर्नियोजित किए जाने का प्रावधान किया गया है। वहीं, एमबीबीएस चिकित्सकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद 65 वर्ष तक पुनर्नियोजन की वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।

प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूर्ण प्रतिबंध

पुनर्नियोजित विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए प्राइवेट प्रैक्टिस पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। अस्पताल में सरकारी नियमों के अंतर्गत उपलब्ध दवाओं की ही मरीजों के लिए संस्तुति की जा सकेगी। प्राइवेट प्रैक्टिस अथवा निर्धारित शर्तों के उल्लंघन की स्थिति में पुनर्नियोजन तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जा सकेगा। सरकार के अनुसार अनुभवी सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का उपयोग नियमित नियुक्तियों के साथ किए जाने से प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था को तत्काल मजबूती मिलेगी। योगी सरकार का यह निर्णय बढ़ती आबादी और मरीजों के दबाव के बीच सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाने तथा आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

Delhi traffic advisory: दिल्ली पुलिस ने जारी की ट्रैफिक एडवाइजरी! ब्रिक्स समिट के कारण 3 दिन बंद रहेंगी ये सड़कें, 22 डायवर्जन पॉइंट तय

Delhi traffic advisory: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 11 से 13 सितंबर 2026 यानी तीन दिन तक होने वाले ब्रिक्स नेताओं का शिखर सम्मेलन 2026 (BRICS Leaders Summit 2026) को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने डिटेल्स ट्रैफिक एडवाइजरी जारी की है। नई दिल्ली स्थित ‘भारत मंडपम’ में होने वाले इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय राष्ट्राध्यक्षों, शासनाध्यक्षों और वैश्विक प्रतिनिधियों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली और आसपास के इलाकों में कई मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित होगी। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि BRICS Summit के दौरान सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सहयोग करें और यात्रा से पहले अपना रूट जरूर जांच लें।

ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, VVIP काफिलों की सुचारु आवाजाही और आम जनता की सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष ट्रैफिक नियम और डायवर्जन लागू किए जाएंगे। एडवाइजरी में 22 डायवर्जन पॉइंट और 35 से ज्यादा ‘नियंत्रित (इन मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित होगी)’ सड़कों का उल्लेख किया गया है।

एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनल के लिए एडवाइजरी

एयरपोर्ट और नई दिल्ली/पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशनों की ओर जाने वाले यात्रियों को असुविधा से बचने के लिए मेट्रो सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, ट्रैफिक पुलिस ने वैकल्पिक सड़क रूट्स की लिस्ट भी जारी की है। हालांकि, इस दौरान एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों के लिए अलग रास्ता सुनिश्चित किया जाएगा। सिटी बस और ऑटो/टैक्सी सेवाओं के संचालन को नियंत्रित क्षेत्रों के बाहर डायवर्ट किया जा सकता है।

इन इलाकों और सड़कों पर यात्रा से बचने की सलाह

  • सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण मार्गों पर आम वाहनों की आवाजाही प्रभावित रह सकती है। ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से इन मार्गों पर अनावश्यक यात्रा नहीं करने और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
  • प्रमुख प्रभावित/नियंत्रित रूट्स में मथुरा रोड, तिलक मार्ग, जनपथ, सत्य मार्ग, पृथ्वीराज रोड, फिरोजशाह रोड, अशोक रोड, जंतर-मंतर मार्ग, पंचशील मार्ग, सुब्रमण्यम भारती मार्ग, मदर टेरेसा क्रिसेंट, तीन मूर्ति मार्ग, सफदरजंग रोड, रायसीना मार्ग, अकबर रोड, सरदार पटेल मार्ग, एपीजे अब्दुल कलाम रोड, भगवान दास रोड और शेरशाह सूरी मार्ग समेत कई सड़कें शामिल हैं।
  • ट्रैफिक पुलिस ने सम्मेलन की अवधि में यात्रियों से इन सड़कों पर जाने से पहले एडवाइजरी देखने और वैकल्पिक रूट्स चुनने को कहा है।

रेलवे स्टेशन जाने वालों के लिए भी रूट तय

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जाने वाले यात्रियों के लिए भी विशेष रूट सुझाए गए हैं। ट्रैफिक एडवाइजरी में अलग-अलग दिशाओं से स्टेशन पहुंचने के लिए वैकल्पिक रूट बताए गए हैं, ताकि वीआईपी मूवमेंट के कारण यात्रियों को परेशानी कम हो। इसी तरह पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन जाने वाले लोगों के लिए भी वैकल्पिक रूट निर्धारित किए गए हैं। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे ट्रेन के समय से पहले घर से निकलें और संभावित ट्रैफिक प्रतिबंधों को ध्यान में रखें।

एयरपोर्ट जाने वालों के लिए खास सलाह

दिल्ली एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को भी ट्रैफिक पुलिस ने विशेष सावधानी बरतने को कहा है। एडवाइजरी के अनुसार, एयरपोर्ट जाने के लिए मेट्रो को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है, ताकि सड़क पर वीआईपी मूवमेंट और संभावित ट्रैफिक प्रतिबंधों का असर कम हो। गुरुग्राम, द्वारका, महिपालपुर और दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से एयरपोर्ट पहुंचने के लिए वैकल्पिक रूट भी एडवाइजरी में बताए गए हैं। एयरपोर्ट जाने वाले यात्रियों को पर्याप्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।

मेट्रो से सफर करने की अपील

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा है कि ब्रिक्स समिट के दौरान सड़क ट्रैफिक पर दबाव कम करने के लिए मेट्रो का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए। खासतौर पर उन यात्रियों को मेट्रो को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है जिन्हें नई दिल्ली, मध्य दिल्ली, एयरपोर्ट या अन्य प्रमुख इलाकों में जाना है।

VVIP मूवमेंट के दौरान अचानक लग सकता है प्रतिबंध

BRICS सम्मेलन में विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की आवाजाही के दौरान सुरक्षा कारणों से कुछ मार्गों पर अस्थायी रूप से ट्रैफिक रोका या डायवर्ट किया जा सकता है। इसलिए ट्रैफिक पुलिस ने वाहन चालकों से अपील की है कि वे पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें और प्रतिबंधित रूट्स पर जाने की कोशिश न करें।

पार्किंग को लेकर भी एडवाइजरी

ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से कहा है कि वे निर्धारित स्थानों के अलावा सड़क पर वाहन पार्क न करें। एडवाइजरी में बताया गया है कि नियंत्रित क्षेत्रों में सड़क किनारे वाहन खड़े करने से ट्रैफिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है और ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा सकती है।

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एडवाइजरी की बड़ी बातें

  • BRICS Summit के दौरान 11 से 13 सितंबर तक ट्रैफिक प्रतिबंध लागू रहेंगे।
  • 35 से ज्यादा सड़कें बंद रहेंगी।
  • करीब 22 डायवर्जन पॉइंट बनाए गए हैं।
  • वीआईपी काफिले के दौरान कुछ मार्गों पर अस्थायी रोक लग सकती है।
  • एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन जाने वाले लोग पहले से समय लेकर चलें।
  • संभव हो तो मेट्रो का इस्तेमाल करें।
  • प्रतिबंधित मार्गों पर अनावश्यक यात्रा से बचें।
  • सड़क किनारे अनधिकृत पार्किंग न करें।ॉ
  • ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों और डायवर्जन का पालन करें।
  • रेलवे स्टेशन व एयरपोर्ट के लिए सलाह

यात्रियों और आम जनता के लिए सलाह

दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि ब्रिक्स समिट के दौरान वे अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाएं, अधिक से अधिक मेट्रो का उपयोग करें और सोशल मीडिया पर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी किए जा रहे रियल-टाइम अपडेट्स पर नजर रखें।

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सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

सत्या निकेतन बिल्डिंग हादसा : 7 मौतों के बाद CJP की बड़ी मांग, दिल्ली के सभी PG का होगा सेफ्टी ऑडिट

दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में पांच मंजिला हॉस्टल की इमारत गिरने की दर्दनाक घटना के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सरकार से राजनीतिक जवाबदेही तय करने और राजधानी के सभी पेइंग गेस्ट (PG) आवासों का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत की बात सामने आई है, जबकि कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी।

 

CJP के संस्थापक और संयोजक अभिजीत दिपके ने हादसे पर दुख जताते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि छात्रों को अक्सर असुरक्षित और खतरनाक आवासों में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि सरकारी बुनियादी ढांचे और राजनीतिक प्रतिष्ठानों पर बड़े पैमाने पर खर्च किया जाता है। CJP ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

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सत्या निकेतन हादसे पर CJP ने क्या कहा?

 

CJP की एक टीम संगठन के सह-प्रभारी और नॉर्थ जोन प्रमुख दीपक बालियान तथा राष्ट्रीय संयुक्त सचिव बालकृष्ण शुक्ला के नेतृत्व में घटनास्थल पर पहुंची। टीम ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास हादसे वाली जगह पर स्थानीय लोगों और आपातकालीन कर्मचारियों के साथ राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग किया।

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CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक दिन पहले दिल्ली विश्वविद्यालय का दौरा किया था और अपने राजनीतिक भाषण में 'दिमागी नक्सल' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, लेकिन शैक्षणिक बुनियादी ढांचे की स्थिति पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई। दिपके ने कहा कि साउथ कैंपस में हॉस्टल की इमारत गिर गई और छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। उन्होंने सवाल उठाया कि खराब और जर्जर बुनियादी ढांचे की कीमत छात्रों को आखिर कब तक चुकानी पड़ेगी?

 

उन्होंने छात्रों के लिए सुरक्षित क्लासरूम, हॉस्टल और बेहतर मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की मांग की।

मलबे में दबे छात्रों को लेकर चिंता

 

हादसे में गिरी इमारत को उसके मालिकों द्वारा 'Hostel Daze' नाम दिया गया था। हादसे के बाद राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। CJP ने कहा कि उसके स्वयंसेवक घटनास्थल पर मौजूद रहेंगे और सभी छात्रों का पता चलने तक प्रभावित परिवारों की मदद और बचाव अभियान की निगरानी करेंगे।

 

संगठन ने दिल्ली में छात्र आवासों की निगरानी में नगर निगम की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही राजधानी के सभी PG और हॉस्टल का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की गई है।

 

स्थानीय लोगों ने खुद शुरू किया था बचाव अभियान

 

घटनास्थल पर मौजूद CJP की टीम के मुताबिक, आपातकालीन सेवाओं के पहुंचने से पहले ही स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी थी। स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत में करीब 15 कमरे थे और प्रत्येक कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। बताया गया कि बेसमेंट में निर्माण या मरम्मत का काम भी चल रहा था।

 

अभिजीत दिपके ने कहा कि एक तरफ अलग-अलग राज्यों में भव्य बीजेपी भवन बनाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ छात्रों को असुरक्षित और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे में पढ़ने और रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य और उनकी सुरक्षा से जुड़ा सवाल है।

 

  • सत्या निकेतन हादसे की निष्पक्ष और तेज जांच हो।
  • हादसे के लिए जिम्मेदारी तय की जाए।
  • मृतकों के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा दिया जाए।
  • घायलों को 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिले।
  • दिल्ली के सभी PG और हॉस्टल का व्यापक सेफ्टी ऑडिट कराया जाए।
  • छात्र आवासों की निगरानी में लापरवाही की जांच हो।
  • PG और हॉस्टल में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

मियामी एयरपोर्ट पर बड़ा विमान हादसा, रनवे से बाहर निकला Amazon का कार्गो प्लेन, 5 की मौत

Miami Airport Plane Crash: रविवार दोपहर मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बड़ा हादसा हो गया। लैंडिंग के दौरान अमेजन प्राइम एयर का एक कार्गो विमान रनवे से आगे निकल गया और जमीन पर मौजूद कई वाहनों से टकरा गया। इसके बाद विमान में आग लग गई। बता दें कि इस हादसे में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई।

इस घटना की जानकारी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से देते हुए स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि प्राइम एयर की फ्लाइट 7598 दोपहर 2 बजे EDT (1800 GMT) से कुछ देर पहले एयरपोर्ट के तिरछे रनवे से आगे निकल गई। वहीं, हादसे के बाद आसमान में काले धुएं का घना गुबार दिखाई देने लगा।

मियामी-डेड फायर रेस्क्यू के चीफ राएड “रे” जदाल्लाह ने बताया कि इस हादसे में पांच और लोग घायल हुए। उनमें से तीन की हालत गंभीर थी और उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जबकि दो अन्य को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

जदाल्लाह ने बताया कि विमान की चपेट में आए कई वाहनों में लोग फंस गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। कम से कम दो लोग वाहनों के अंदर फंसे हुए थे। वहीं, हादसे के बाद विमान के पायलट और को-पायलट भी उसके अंदर फंस गए थे।

बता दें कि अधिकारियों ने मरने वालों की पहचान बताने से इनकार कर दिया है।

अमेजन का बयान

अमेजन की प्रवक्ता केली नेंटेल ने कहा, “हम पुष्टि कर सकते हैं कि 21 Air द्वारा संचालित अमेजन एयर का एक विमान आज मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरने की कोशिश के दौरान एक घटना का शिकार हो गया। यह स्थिति तेजी से बदल रही है और हम अभी भी जानकारी जुटा रहे हैं। हम स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि असल में क्या हुआ। अभी हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता इसमें शामिल सभी लोगों की सुरक्षा, भलाई और देखभाल है। हम प्रभावित लोगों की मदद के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं।”

रेस्क्यू ऑपरेशन

मियामी-डेड फायर रेस्क्यू ने एक बयान में बताया कि हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य के लिए 60 से ज्यादा रेस्क्यू यूनिट्स और करीब 200 कर्मियों को मौके पर भेजा गया।

जादल्लाह ने बताया कि रविवार देर दोपहर तक आपातकालीन कर्मी विमान से हो रहे सक्रिय ईंधन रिसाव से निपटने में लगे हुए थे।

दुर्घटना के तुरंत बाद हवाई अड्डे ने सभी उड़ानें रोक दीं। हालांकि, रविवार शाम तक इसके चार में से दो रनवे फिर से खोल दिए गए थे।

दुर्घटना के बाद रॉयटर्स द्वारा ली गई तस्वीरों में विमान का अगला हिस्सा जमीन पर और पिछला हिस्सा ऊपर की ओर झुका हुआ दिखाई दे रहा था। विमान के दाहिने हिस्से पर जलने के निशान जैसे दिख रहे थे।

Flightradar24 के अनुसार, विमान 112 समुद्री मील प्रति घंटे (129 मील प्रति घंटा) की गति से रनवे से बाहर निकल गया।

32 साल पुराना बोइंग 767 कार्गो विमान

यह विमान सैन जुआन, प्यूर्टो रिको से उड़ा था। फ्लाइट ट्रैकिंग सर्विस ‘Flightradar24’ के अनुसार, यह 32 साल पुराना बोइंग 767-300 कार्गो विमान था, जिसे 1994 और 2015 के बीच अलग-अलग एयरलाइंस ने पैसेंजर विमान के तौर पर इस्तेमाल किया था।

अमेजन के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि कार्गो एयरलाइन ’21 Air’ अमेजन के लिए इस विमान को ऑपरेट करती थी।

वहीं, ’21 Air’ ने अपनी वेबसाइट पर कहा, “आज मियामी में हमारे एक विमान के साथ हुए हादसे से हम बहुत दुखी हैं। जिन लोगों की जान गई है, उनके परिवारों और चाहने वालों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं हैं।”

अमेजन की प्रवक्ता केली नेंटेल ने कहा कि कंपनी अभी भी इस घटना के बारे में जानकारी इकट्ठा कर रही है।

नेंटेल ने एक बयान में कहा, “हम स्थानीय अधिकारियों और अफसरों के साथ मिलकर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि असल में क्या हुआ था। अभी हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता इसमें शामिल सभी लोगों की सुरक्षा, भलाई और देखभाल है।”

इसके अलावा, बोइंग और 21 Air ने कहा कि वे क्रैश की सरकारी जांच में सहयोग करेंगे।

जांच

US में सिविल एविएशन से जुड़े हादसों की जांच करने वाली संस्था, नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने कहा कि उसने इस क्रैश की जांच के लिए चेयरवुमन जेनिफर होमेंडी की अगुवाई में एक टीम भेजी है। यह एजेंसी सोमवार को मियामी में अपनी पहली मीडिया ब्रीफिंग करेगी।

बता दें कि रविवार को हुआ हादसा, Amazon Prime Air के विमान से जुड़ा पहला जानलेवा क्रैश नहीं था। फरवरी 2019 में, Amazon Prime Air के लिए मियामी से ह्यूस्टन जा रहा एटलस एयर फ्लाइट 3591 (एक बोइंग 767-300 फ्रेटर विमान) तेजी से नीचे गिरा और टेक्सास की ट्रिनिटी बे में क्रैश हो गया। इसमें सवार तीनों लोगों की मौत हो गई थी।

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गृहमंत्री शाह ने ली दिल्‍ली इमारत हादसे की जानकारी, 2 लोगों की हुई मौत, अब तक 8 का हुआ रेस्‍क्‍यू, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

गृहमंत्री शाह ने ली दिल्‍ली इमारत हादसे की जानकारी, 2 लोगों की हुई मौत, अब तक 8 का हुआ रेस्‍क्‍यू, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ FIR दर्ज

Home Minister Amit Shah took stock of Delhi building collapse incident

Delhi building collapse case : दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। हालांकि अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है। राहत की बात यह है कि अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। खबरों के अनुसार, हादसे में 2 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हैं। हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया है।

 

दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर एक इमारत अचानक ढह गई। पुलिस के मुताबिक, हादसे के बाद कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। हालांकि अभी तक मलबे में फंसे लोगों की सही संख्या का पता नहीं चल पाया है।

राहत की बात यह है कि अब तक 8 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। खबरों के अनुसार, हादसे में एक व्‍यक्ति की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य घायल हैं। हादसे के जिम्मेदार बिल्डिंग मालिक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। सरकार ने घटना की जांच के लिए एक विशेष कमेटी का गठन भी किया है।

 

गृहमंत्री अमित शाह ने ली हादसे की जानकारी

हादसे की जानकारी मिलते ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गोवा का अपना कार्यक्रम रद्द कर दिया। गृहमंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, दिल्ली के सत्य निकेतन में एक इमारत के ढहने से बहुत दुख हुआ है। मैंने मुख्यमंत्री, दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और NDRF के डायरेक्टर जनरल से बात की और जमीनी हालात का जायजा लिया। स्थानीय प्रशासन और NDRF मिलकर तेजी से बचाव कार्य कर रहे हैं। घायलों को हर जरूरी मेडिकल मदद दी जा रही है। मैं सभी घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करता हूं।

 

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर चिंता जताई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं कि वे समन्वय बनाए रखें और बचाव कार्य को तेज करें। स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।

दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद ने भी घटना पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दिल्ली फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। राहत-बचाव अभियान चल रहा है और टीमें जमीन पर आवश्यक सहायता मुहैया करा रही हैं।

दिल्ली फायर सर्विसेज को दोपहर करीब 1:30 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली, जिसके बाद तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घटना के संबंध में करीब 1:34 बजे साउथ कैंपस पुलिस स्टेशन को PCR कॉल भी मिली। कॉल में नानकपुरा गुरुद्वारे के पास एक इमारत के गिरने की जानकारी दी गई थी।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

मौके पर आठ फायर टेंडर तैनात किए गए हैं। दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, CAT एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं की टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की एक टीम भी मौके पर पहुंच गई है। मलबे में फंसे लोगों की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।

कांगो में शादी समारोह में आग, 22 की मौत:कई घायल; लोग भागने के दौरान संकरी गलियों में फंसे, सड़क किनारे शव मिले

कांगो की राजधानी किंशासा में शादी समारोह के दौरान बिल्डिंग में आग लगने से कम से कम 22 लोगों की मौत हो गई। कई अन्य लोग घायल हुए हैं। मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। आग शुक्रवार रात उत्तरी किंशासा के लिंगवाला इलाके में एक इमारत में लगी और शनिवार सुबह तक जारी रही। आग लगने के बाद शादी में मौजूद लोगों ने बाहर निकलने की कोशिश की। बिल्डिंग के संकरे रास्तों और गलियों में बड़ी संख्या में लोगों के जमा होने से हालात बिगड़ गए। लोग एक-दूसरे को धक्का देते हुए बाहर निकलने की कोशिश करते रहे। हादसे के बाद कुछ लोगों को सड़क किनारे लिटाकर उनकी मदद करने की कोशिश की गई। इनमें कुछ लोग जिंदा थे, जबकि कुछ की मौत हो चुकी थी। आग लगने की वजह साफ नहीं अधिकारियों ने अभी तक आग लगने की सही वजह की पुष्टि नहीं की है। कांगो के उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री जैक्वेमिन शाबानी ने घटनास्थल का शनिवार सुबह दौरा किया। उन्होंने हादसे को दुखद त्रासदी बताया। अधिकारियों ने फिलहाल आग के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या भी जांच के बाद स्पष्ट हो सकती है। किंशासा में आग की घटनाएं आम स्थानीय मीडिया के मुताबिक किंशासा के घनी आबादी वाले इलाकों में आग लगने की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। शहर में तेजी से हो रहे अनियोजित शहरी विकास के कारण कई जगह पर्याप्त अग्निशमन सेवाएं और आपातकालीन सुविधाएं मौजूद नहीं हैं। सूखी गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाएं और बढ़ जाती हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार इस साल भी किंशासा में आग लगने के कई हादसे सामने आ चुके हैं।