Assam Flood: असम में बाढ़ के हालात गंभीर! 5.65 लाख लोग प्रभावित, अब तक 31 लोगों की मौत

Assam Flood: असम में लगातार हो रही बारिश के कारण बाढ़ की चपेट में आने से बुधवार (22 जुलाई) को 21 और लोगों की मौत हो गई। जबकि लगभग 5.65 लाख लोग इससे प्रभावित हुए है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की मंगलवार मध्यरात्रि को जारी बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के विश्वनाथ, चराइदेव, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग, नागांव, शिवसागर और तिनसुकिया जिलों में बाढ़ से 5,64,600 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान शिवसागर जिले में चार महिलाओं और दो बच्चों समेत 13 लोगों की बाढ़ के पानी में डूबने से मौत हो गई। इसके अलावा चराइदेव में दो बच्चों समेत पांच, गोलाघाट में दो और जोरहाट में एक महिला की जान चली गई। इन मौतों के साथ ही इस साल राज्य में बाढ़ से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 31 हो गई है।

‘येलो अलर्ट’ जारी

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने असम के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। अगले चार दिनों के दौरान कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ भारी बारिश का अनुमान जताया है। आईएमडी के अनुसार, ‘येलो अलर्ट’ का अर्थ सतर्क रहने और स्थिति से संबंधित अद्यतन जानकारी पर नजर बनाए रखना है। शिवसागर बाढ़ से सबसे अधिक प्रभावित जिला है, जहां करीब 3.6 लाख लोग प्रभावित हैं। इसके बाद जोरहाट में लगभग 88,000 और चराइदेव में 72,500 से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।

6000 लोगों को बचाया गया

राज्य में बाढ़ की स्थिति सोमवार रात की तुलना में और खराब हुई है। सोमवार रात तक 15 जिलों में लगभग 3.63 लाख लोग प्रभावित थे। रिपोर्ट के अनुसार, सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा, पुलिस और अन्य नागरिक एजेंसियों ने चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर के विभिन्न इलाकों से 6,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला है।

10 जिलों में राहत कैंप

ASDMA ने बताया कि प्रशासन 10 ज़िलों में 273 राहत कैंप और राहत वितरण केंद्र चला रहा है, जहां अभी 12,284 विस्थापित लोगों की देखभाल की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सेना, NDRF, SDRF, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस, पुलिस और सिविल एजेंसियों जैसे कई विभागों ने चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट और शिवसागर के अलग-अलग इलाकों से 6,000 से ज्यादा लोगों को बचाया है।

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अथॉरिटी ने पिछले 24 घंटों में बाढ़ पीड़ितों के बीच 5,011.07 क्विंटल चावल, 956.53 क्विंटल दाल, 265.18 क्विंटल नमक और 20,115.42 लीटर सरसों का तेल बांटा है। ASDMA ने बताया कि अभी 872 गांव पानी में डूबे हुए हैं। पूरे असम में 24,210.35 हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है। राज्य के अलग-अलग जिलों में बाढ़ के पानी से तटबंध, सड़कें, पुल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर क्षतिग्रस्त हुए हैं।

Health Tips: बॉड़ी में शुगर कम होने पर क्या-क्या परेशानियां होती हैं, जानें काम की बातें

The image depicts the problems that occur when blood sugar levels drop

Signs of Low Blood Sugar: शरीर में शुगर यानी ग्लूकोज का स्तर कम होना एक ऐसी स्थिति है जिसे मेडिकल भाषा में हाइपोग्लाइसीमिया (Hypoglycemia) कहा जाता है। हमारे दिमाग और शरीर को ठीक से काम करने के लिए ग्लूकोज की लगातार जरूरत होती है। जब इसका स्तर 70 mg/dL से नीचे चला जाता है, तो शरीर तुरंत खतरे के संकेत भेजने लगता है।

 

आमतौर पर यह समस्या मधुमेह (डायबिटीज) के मरीजों में अधिक देखी जाती है, लेकिन कई बार लंबे समय तक भूखे रहने, अत्यधिक व्यायाम, कुछ दवाओं के सेवन या अन्य स्वास्थ्य कारणों से गैर-डायबिटिक लोगों में भी हो सकती है। शुरुआत में हल्की कमजोरी, पसीना आना या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं, लेकिन यदि समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह स्थिति गंभीर भी हो सकती है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि शुगर कम होने पर शरीर में क्या-क्या परेशानियां हो सकती हैं, उनके शुरुआती संकेत क्या हैं और ऐसी स्थिति में तुरंत क्या करना चाहिए।

 

शरीर में शुगर कम होने पर दिखने वाले लक्षणों को हम इस तरह समझ सकते हैं:ALSO READ: Monsoon Health Tips: बारिश के मौसम के लिए जानें खास 7 डाइट प्लान और इम्युनिटी बढ़ाने वाले घरेलू उपाय

 

1. जब शुगर कम होना शुरू होती है, जानें शुरुआती लक्षण

जैसे ही ब्लड शुगर का लेवल गिरता है, शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) हार्मोन बढ़ने लगता है, जिससे ये शुरुआती परेशानियां होती हैं:

 

अचानक तेज भूख लगना: शरीर ऊर्जा की कमी को पूरा करने के लिए तुरंत खाने के संकेत देता है।

 

चक्कर आना या कमजोरी: सिर हल्का महसूस होने लगता है और पैर डगमगाने लगते हैं।

 

चिड़चिड़ापन या मूड बदलना: अचानक बिना बात के गुस्सा आना, रोने का मन करना या घबराहट होना।

 

हाथ-पैरों में कंपन या घबराहट: बिना किसी कारण के शरीर में कंपकंपी महसूस होने लगती है।

 

अत्यधिक पसीना आना और ठंड लगना: बिना गर्मी के भी अचानक विशेषकर गर्दन के पीछे ठंडा पसीना आने लगता है।

 

दिल की धड़कन तेज होना: ऐसा महसूस होना कि दिल बहुत तेजी से धड़क रहा है (Palpitations)।

 

2. जब शुगर बहुत ज्यादा गिर जाएल जानें गंभीर लक्षण

यदि शुरुआती लक्षणों पर ध्यान न दिया जाए और दिमाग को पर्याप्त ग्लूकोज न मिले, तो स्थिति गंभीर हो सकती है:

 

आंखों के सामने धुंधलापन आना: साफ दिखाई न देना या एक की जगह दो चीजें दिखना।

 

भ्रम की स्थिति: बात समझने में दिक्कत होना या लड़खड़ाती आवाज में बोलना या सही से बोल न पाना।

 

नींद न खुलना या सुस्ती: बहुत ज्यादा सुस्ती छा जाना और सोने की इच्छा होना।

 

दौरे पड़ना या बेहोशी: यह सबसे खतरनाक स्थिति है, जहां व्यक्ति अचानक अचेत (Unconscious) हो सकता है।ALSO READ: पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

 

आपातकालीन स्थिति में क्या करें? 

यदि आपको या आपके आस-पास किसी को शुगर कम होने के लक्षण दिखें, तो तुरंत '15:15 का नियम' अपनाएं:

 

1. तुरंत करें ये उपाय

15 ग्राम तुरंत पचने वाला कार्बोहाइड्रेट लें: जैसे ही लक्षण दिखें, मरीज को 3-4 चम्मच चीनी/ग्लूकोज पाउडर, 1/2 कप फ्रूट जूस, या 4-5 टॉफी चूसने के लिए दें। ध्यान रखें: चॉकलेट या बिस्कुट न दें, क्योंकि इनमें मौजूद फैट शुगर को जल्दी बढ़ने नहीं देता।

 

2. 15 मिनट का इंतजार करें

कुछ भी मीठा खिलाने के बाद मरीज को शांत बैठने दें या आराम करने दें और 15 मिनट तक इंतजार करें ताकि शुगर शरीर में एब्जॉर्ब हो सके।

 

3. ब्लड शुगर दोबारा चेक करें

15 मिनट बाद ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल दोबारा मापें। यदि लेवल अभी भी 70 mg/dL से कम है, तो स्टेप 1 को दोबारा दोहराएं।

 

4. नॉर्मल खाना या स्नैक दें

जब शुगर लेवल 70 mg/dL से ऊपर आ जाए, तो मरीज को एक रोटी या बिस्कुट जैसी ठोस चीज खिलाएं ताकि शुगर लेवल दोबारा नीचे न गिरे। यह शुगर लेवल को स्थिर रखने में मदद करेंगा।

 

महत्वपूर्ण चेतावनी: यदि व्यक्ति बेहोश हो गया हो या कुछ भी निगलने की स्थिति में न हो, तो उसके मुंह में जबरदस्ती पानी, जूस या चीनी बिल्कुल न डालें। इससे वह उसकी सांस की नली में फंस सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाएं ताकि उसे ग्लूकोज का इंजेक्शन (IV Fluids) दिया जा सके।

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पाकिस्तान की इस साइकिल एंबुलेंस का उड़ाया जा रहा मजाक लेकिन इसके पीछे की असली वजह जानकर बदल जाएगी राय

सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर वीडियो की कहानी वैसी नहीं होती, जैसी पहली नजर में दिखाई देती है। इन दिनों पाकिस्तान के कराची से सामने आया एक वीडियो इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोर रहा है, जिसमें एक साइकिल एंबुलेंस सड़क पर दौड़ती नजर आती है। वीडियो देखते ही कई लोगों ने इसे आधुनिक मेडिकल तकनीकों से जोड़कर मजाक बनाना शुरू कर दिया और तरह-तरह के मीम्स शेयर किए। हालांकि, इस पहल के पीछे की वजह महज दिखावा नहीं, बल्कि शहर की एक बड़ी समस्या का समाधान तलाशना है।

कराची जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में ट्रैफिक जाम और संकरी गलियों के कारण पारंपरिक एंबुलेंस अक्सर समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पातीं। ऐसे में यह साइकिल एंबुलेंस आपात स्थिति में शुरुआती इलाज पहुंचाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहल का हिस्सा है, जिसने अब सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।

नया नहीं, पहले से चल रहा है यह प्रोजेक्ट

वायरल पोस्ट में दावा किया गया कि कराची के मेयर ने हाल ही में इस साइकिल एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की है। हालांकि, यह दावा सही नहीं है। यह सेवा कोई नई पहल नहीं है, बल्कि 2025 से एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संचालित की जा रही है।

ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए निकाला गया समाधान

स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, इस पहल की शुरुआत Sindh Integrated Emergency and Health Services (SIEHS-1122) यानी Rescue 1122 ने की थी। कराची में भारी ट्रैफिक और संकरी गलियों के कारण कई बार सामान्य एंबुलेंस समय पर मरीजों तक नहीं पहुंच पातीं। इसी समस्या को देखते हुए साइकिल एंबुलेंस का इस्तेमाल शुरू किया गया।

छोटी साइकिल, लेकिन जरूरी मेडिकल सुविधाओं से लैस

यह कोई साधारण साइकिल नहीं है। इसमें प्राथमिक उपचार के लिए जरूरी मेडिकल किट, ऑक्सीजन मास्क, नेबुलाइज़र और ब्लड शुगर जांच उपकरण जैसे जरूरी सामान मौजूद रहते हैं। प्रशिक्षित रेस्पॉन्डर सबसे पहले मरीज तक पहुंचकर प्राथमिक उपचार देते हैं और मरीज की स्थिति संभालते हैं, जब तक सामान्य एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंच जाती।

महिला वॉलंटियर्स संभाल रही हैं जिम्मेदारी

इस पहल की एक खास बात यह भी है कि इसे प्रशिक्षित महिला स्वयंसेवकों द्वारा संचालित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य न सिर्फ आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है, बल्कि महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा देना है।

सोशल मीडिया पर बंटी राय

वीडियो वायरल होने के बाद इंटरनेट पर इसे लेकर दो तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक तरफ कई लोगों ने इसका मजाक उड़ाया, वहीं दूसरी ओर कई यूजर्स ने इसे भीड़भाड़ वाले इलाकों के लिए एक व्यावहारिक और कम लागत वाला समाधान बताया। उनका कहना है कि जहां बड़ी एंबुलेंस पहुंचने में समय लेती है, वहां साइकिल एंबुलेंस शुरुआती इलाज देकर मरीज की जान बचाने में मदद कर सकती है।

मीम्स से आगे, जरूरत पर पहल

भले ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर हंसी-मजाक का कारण बन गया हो, लेकिन साइकिल एंबुलेंस का उद्देश्य तेज और आसान आपातकालीन सहायता पहुंचाना है। भीड़भाड़ वाले शहरों में ऐसी पहल कई बार मरीजों तक समय पर पहुंचने का प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।

रोबोट पहनाएगा आपकी ड्रेस! जानिए कैसे बिना हाथ लगाए काम करती है ये स्मार्ट टेक्नोलॉजी

तकनीक लगातार इंसानी जिंदगी को आसान बनाने के लिए नए रास्ते खोल रही है। इसी कड़ी में एक ऐसा रोबोटिक आविष्कार सामने आया है, जो भविष्य में कपड़े पहनने की पूरी प्रक्रिया को बदल सकता है। दक्षिण कोरिया के KAIST और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा स्मार्ट रोबोटिक कपड़ा सिस्टम विकसित किया है, जो बिना हाथों का इस्तेमाल किए कुछ ही सेकंड में व्यक्ति को कपड़े पहनाने में मदद कर सकता है। यह तकनीक खासतौर पर बुजुर्गों, दिव्यांगों और उन लोगों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें शारीरिक सीमाओं के कारण रोजमर्रा के कामों में परेशानी होती है।

शोधकर्ताओं ने इसमें खास लचीली रोबोटिक ट्यूब का इस्तेमाल किया है, जो कपड़े को धीरे-धीरे शरीर पर चढ़ाने का काम करती हैं। यह खोज न सिर्फ सुविधा बढ़ाने वाली है, बल्कि भविष्य के सहायक रोबोटिक्स की नई दिशा भी दिखाती है।

कपड़े के अंदर लगे हैं खास वाइन रोबोट

इस रोबोटिक सिस्टम की सबसे खास बात इसमें इस्तेमाल किए गए सॉफ्ट एयर-पावर्ड रोबोट हैं। इन्हें कपड़ों के अंदर सिल दिया जाता है। ये लचीली ट्यूब जैसी संरचनाएं हवा भरने पर फैलती हैं और धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए कपड़े को शरीर के चारों ओर खींच लेती हैं। यह प्रक्रिया कुछ ऐसी होती है जैसे कपड़ा अंदर से बाहर की ओर पलटते हुए शरीर पर चढ़ता जाता है। खास बात यह है कि इस दौरान व्यक्ति को बिल्कुल स्थिर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।

आइडिया आया बारिश में फंसे अनुभव से

इस अनोखी तकनीक के पीछे एक दिलचस्प कहानी भी है। शोधकर्ता किम नाम ग्यून ने बताया कि उन्हें यह विचार तब आया, जब वे साइकिल चलाते समय बारिश में फंस गए थे। उस समय उनके मन में आया कि अगर रेनकोट खुद ही शरीर पर चढ़ जाए तो कितना आसान हो जाएगा। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए टीम ने ऐसा पहनने योग्य रोबोटिक सिस्टम तैयार किया।

बेल की तरह काम करता है यह रोबोट

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को पौधों की बेल, खासकर चढ़ने वाली आइवी से प्रेरित होकर बनाया है। जैसे बेल अपनी नोक से बढ़ते हुए सतह के करीब रहती है, वैसे ही ये रोबोटिक ट्यूब कपड़े के अंदर आगे बढ़ती हैं। यह सिस्टम संकरी जगहों से गुजर सकता है, मुड़ी हुई सतहों के हिसाब से खुद को ढाल सकता है और फिसलन या ढलान वाली सतहों पर भी काम करने की क्षमता रखता है।

AI नहीं, मैकेनिकल डिजाइन है इसकी ताकत

आमतौर पर रोबोटिक सिस्टम के लिए जटिल सॉफ्टवेयर और कंट्रोल एल्गोरिदम की जरूरत होती है, लेकिन इस तकनीक की खासियत इसका सरल डिजाइन है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह सिस्टम अपने खास भौतिक ढांचे के कारण काम करता है, जिससे इसे ज्यादा आसान, लचीला और उपयोगी बनाया जा सकता है।

दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए बन सकता है सहारा

यह आविष्कार उन लोगों के लिए बड़ी मदद साबित हो सकता है, जिन्हें रोजमर्रा के कामों में दूसरों की सहायता लेनी पड़ती है। बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को इससे कपड़े पहनने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। इसके अलावा यह तकनीक अस्पतालों, आपातकालीन सेवाओं और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकती है।

फायरफाइटर्स और मेडिकल स्टाफ को भी मिलेगा फायदा

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह सिस्टम उन जगहों पर भी काम आ सकता है, जहां लोगों को जल्दी से सुरक्षात्मक कपड़े पहनने पड़ते हैं।

सेमीकंडक्टर क्लीनरूम, फायर ब्रिगेड, हेल्थकेयर और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीमों के लिए यह तकनीक समय बचाने वाला समाधान बन सकती है।

अभी शुरुआती चरण में है तकनीक

हालांकि यह आविष्कार काफी प्रभावशाली है, लेकिन अभी इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए तैयार नहीं किया गया है। शोधकर्ता इस तकनीक को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं। यह खोज दिखाती है कि जहां एक ओर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं रोबोटिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में नए प्रयोग भी लोगों की जिंदगी आसान बनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

38 हजार रुपये की नौकरी छोड़ चाय बेचने लगा शख्स, अब कमाई सुनकर लोग बोले- ये तो कमाल हो गया

कमाई तगड़ी पर बचत जीरो! क्या आप भी फंस चुके हैं ‘लाइफस्टाइल क्रीप’ के इस मायाजाल में? जानें बचने के 5 आसान उपाय

Financial Planning and Budgeting Tips: नौकरी में प्रमोशन होना, बंपर सैलरी हाइक मिलना या बिजनेस से होने वाली कमाई का बढ़ना हर किसी को एक सुखद अहसास देता है। इसे देखकर लगता है कि हमारे वित्तीय लक्ष्य बिल्कुल सही रास्ते पर हैं। इसके बावजूद, एक कड़वी हकीकत यह भी है कि समाज में ‘मोटी सैलरी’ कमाने वाले कई लोग भी महीने का अंत आते-आते पैसों की तंगी से जूझने लगते हैं।

असल में दिक्कत यह नहीं है कि वे हर महीने कितना कमा रहे हैं, बल्कि समस्या उस अंतर में है जो उनके बैंक खाते में आने वाले पैसे और चुपके से जेब से बाहर जाने वाले खर्चों के बीच होता है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि आज के दौर में ‘अफोर्डेबिलिटी’ का मतलब केवल यह नहीं है कि आप आज कोई चीज खरीद सकते हैं या नहीं, बल्कि इसका मतलब यह है कि क्या आप अपनी बचत को नुकसान पहुंचाए या बिना कर्ज लिए उसे लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।

आइए जानते हैं कुछ ऐसे प्रैक्टिकल बजटिंग टिप्स, जो आपकी अच्छी सैलरी को असल मायने में आपकी ‘आर्थिक सुरक्षा’ में बदल सकते हैं।

1. CTC के भ्रम से बाहर निकलें, ‘इन-हैंड सैलरी’ से बनाएं बजट

ज्यादातर लोग अपने सालाना कॉस्ट-टू-कंपनी (CTC) या ग्रॉस सैलरी के हिसाब से अपने खर्चों की प्लानिंग करने की गलती कर बैठते हैं। सीटीसी का आंकड़ा नौकरी बदलते समय या सैलरी नेगोशिएशन के दौरान तो बहुत काम आता है, लेकिन घर का बजट चलाने में इससे कोई मदद नहीं मिलती।

आपको हमेशा इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि टैक्स (TDS), प्रोविडेंट फंड (PF) और अन्य कटौतियों के बाद हर महीने आपके बैंक अकाउंट में वास्तविक रूप से कितना पैसा क्रेडिट हो रहा है। अगर आप खाते में आने वाली रकम से बड़े आंकड़े पर अपना बजट तैयार करेंगे, तो महीने के आखिरी हफ्ते में निराशा ही हाथ लगेगी।

2. फिक्स्ड खर्चे बयां करते हैं आपके बजट का सच

अपने वित्तीय स्वास्थ्य को समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप उन खर्चों की एक लिस्ट बनाएं जिन्हें आप किसी भी कीमत पर टाल नहीं सकते। इसमें आपके घर का किराया या होम लोन की EMI, बच्चों की स्कूल फीस, इंश्योरेंस प्रीमियम, कार लोन, राशन का खर्च और बिजली-पानी के यूटिलिटी बिल शामिल होते हैं।

इन अनिवार्य खर्चों को अलग करने के बाद जो रकम बचती है, वही आपके बजट की असली ‘फ्लेक्सिबिलिटी’ तय करती है। इस एक्सरसाइज को करने के बाद बहुत से लोगों को यह देखकर हैरानी होती है कि अपनी मर्जी से खर्च करने के लिए उनके पास उतनी बड़ी रकम बची ही नहीं है, जितना वे मानकर चल रहे थे।

3. ‘लाइफस्टाइल अपग्रेड’ करने से पहले दो बार सोचें

सैलरी में बढ़ोतरी होते ही अक्सर लोग बड़े वित्तीय कमिटमेंट कर लेते हैं। जैसे ही आय बढ़ती है, एक बड़ा घर किराए पर लेना, महंगी कार खरीदना या हर वीकेंड पर महंगे रेस्टोरेंट में जाना बहुत आसान और किफायती लगने लगता है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि ये लाइफस्टाइल अपग्रेड धीरे-धीरे आपके स्थायी फिक्स्ड खर्चों में बदल जाते हैं।

अगर भविष्य में कभी नौकरी में कोई बदलाव होता है, बिजनेस में मंदी आती है या किसी आपातकालीन स्थिति के कारण आपकी आय कम होती है, तो इन बढ़े हुए फिक्स्ड कमिटमेंट्स को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि फाइनेंशियल प्लानर्स हमेशा सैलरी हाइक मिलने के कम से कम 3 से 6 महीने बाद तक कोई बड़ा लाइफस्टाइल अपग्रेड न करने की सलाह देते हैं।

4. पहले बचत करें, फिर बचे हुए पैसों को खर्च करें

मिडिल क्लास और नौकरीपेशा लोगों में बजटिंग की सबसे आम गलती यह होती है कि वे महीने भर खुलकर खर्च करते हैं और सोचते हैं कि महीने के अंत में जो कुछ बचेगा, उसे बचा लेंगे। हकीकत में महीने के अंत तक बचने वाली यह रकम या तो बेहद मामूली होती है या फिर शून्य होती है।

वित्तीय सलाहकार हमेशा यह सुझाव देते हैं कि आपको अपनी बचत और निवेश (जैसे- म्यूचुअल फंड एसआईपी या पीपीएफ) को महीने के किसी अन्य जरूरी बिल की तरह देखना चाहिए। जैसे ही सैलरी अकाउंट में आए, सबसे पहले इमरजेंसी फंड, रिटायरमेंट या लॉन्ग टर्म गोल्स के लिए पैसे अलग कर दें। ऐसा करने से फिजूलखर्ची के चक्कर में आपकी बचत कभी नहीं छूटेगी।

5. अनचाहे खर्चों और आपातकाल के लिए रखें जगह

एक ऐसा बजट जो केवल तभी काम करता है जब सब कुछ आपकी प्लानिंग के मुताबिक चल रहा हो, असल में एक बेहद कमजोर बजट है। जिंदगी में कभी भी मेडिकल इमरजेंसी, घर या गाड़ी की अचानक मरम्मत, पारिवारिक संकट या कुछ समय के लिए नौकरी छूटने जैसी परिस्थितियां आ सकती हैं।

इसी वजह से एक मजबूत इमरजेंसी फंड का होना और खुद पर बहुत ज्यादा कर्ज (EMIs का बोझ) न लादना समझदारी की निशानी है। यही एक छोटी सी तैयारी एक सामान्य वित्तीय असुविधा और एक बड़े वित्तीय संकट के बीच का अंतर तय करती है।

कुल मिलाकर आपकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी इस बात से तय नहीं होती कि आपकी सैलरी कितनी बड़ी है। यह इस बात से तय होती है कि क्या आप बिना क्रेडिट कार्ड या कर्ज के जाल में फंसे अपने सभी मासिक खर्चों को पूरा कर पा रहे हैं और भविष्य के लिए पर्याप्त बचत कर रहे हैं या नहीं। हर दो-तीन महीने में अपने खर्चों का रिव्यू करना आपको चौंकाने वाले नतीजे दे सकता है। कई बार फायदा ज्यादा कमाने से नहीं, बल्कि यह समझने से होता है कि आप उसे खर्च कैसे कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ChatGPT से दिनभर करती थी बातचीत! महिला की हुई मौत, परिवार ने OpenAI पर लगाए गंभीर आरोप

अमेरिका में एक महिला की मौत के मामले में AI चैटबॉट को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। अलबामा की 29 साल की क्रिश्चियन फेथ मैडिसन के परिवार ने OpenAI के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। परिवार का आरोप है कि ChatGPT के साथ हुई लंबी बातचीत ने महिला की मानसिक परेशानियों को बढ़ाया और वह धीरे-धीरे इस तकनीक पर भावनात्मक रूप से निर्भर हो गईं।परिवार ने दावा किया है कि चैटबॉट ने उनकी चिंताओं और भ्रमित विचारों को चुनौती देने के बजाय उन्हें बढ़ावा दिया।

इस मामले ने AI की भूमिका, सुरक्षा उपायों और मानसिक संकट से गुजर रहे लोगों के साथ बातचीत करते समय तकनीकी कंपनियों की जिम्मेदारी को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। हालांकि, लगाए गए आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं और मामले पर कानूनी प्रक्रिया जारी है।

ChatGPT पर लगाए गए ये आरोप

मुकदमे में दावा किया गया है कि चैटबॉट ने महिला के कुछ भ्रमित विचारों को चुनौती देने के बजाय उन्हें मजबूत किया। परिवार का आरोप है कि ChatGPT ने खुद को एक भरोसेमंद साथी की तरह पेश किया और महिला को यह विश्वास दिलाया कि उसके जीवन का कोई विशेष आध्यात्मिक उद्देश्य है। परिवार का कहना है कि बातचीत के दौरान महिला की मानसिक स्थिति बिगड़ती गई और चैटबॉट ने उसे सही मदद लेने के लिए सही ढ़ंग से प्रोत्साहित नहीं किया।

2025 में हुई थी महिला की मौत

शिकायत के अनुसार, क्रिश्चियन फेथ मैडिसन की मौत 9 जून 2025 को अलबामा में इंटरस्टेट-22 पर ट्रैफिक के बीच आने से हुई। परिवार का आरोप है कि ChatGPT के साथ हुई बातचीत इस दुखद घटना में एक अहम कारण बनी।  इस केस में OpenAI और उसके CEO सैम ऑल्टमैन का नाम भी शामिल किया गया है।

 AI कंपनियों की जिम्मेदारी पर उठे सवाल

यह मामला इस बात पर बड़ी बहस शुरू कर सकता है कि मानसिक तनाव या भावनात्मक संकट से गुजर रहे लोगों के साथ बातचीत करने वाले AI सिस्टम की कानूनी जिम्मेदारी कितनी होनी चाहिए।महिला के परिवार के वकीलों का कहना है कि AI कंपनियों को ऐसे यूजर्स के लिए ज्यादा मजबूत सुरक्षा उपाय बनाने चाहिए, जो मानसिक परेशानी के संकेत दिखाते हैं।

OpenAI ने क्या कहा?

OpenAI ने अभी अदालत में अपना औपचारिक जवाब दाखिल नहीं किया है और लगाए गए आरोप साबित नहीं हुए हैं। कंपनी पहले कह चुकी है कि वह संकट में मौजूद यूजर्स की पहचान करने और उन्हें भरोसेमंद लोगों या आपातकालीन सेवाओं से मदद लेने के लिए प्रेरित करने वाले सुरक्षा फीचर्स को बेहतर बना रही है।

AI और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ रही कानूनी चुनौतियां

यह मामला उन बढ़ती कानूनी चुनौतियों में शामिल हो गया है, जिनमें AI चैटबॉट्स की भूमिका और उनकी जिम्मेदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों के फैसले भविष्य में AI सुरक्षा नियमों, कंपनियों की जिम्मेदारी और चैटबॉट डिजाइन के लिए नए मानक तय कर सकते हैं।

Zomato पर महिला कर्मचारी के गंभीर आरोप, वायरल पोस्ट ने कंपनी के वर्क कल्चर पर उठाए सवाल

सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता (फिर इंदौर) हमारा

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Trip To London: मेरा कथन न तो आत्म मुग्धता है, न अतिशयोक्ति। हर किसी को अपनी माटी, अपना घर, अपने लोग पसंद होते हैं। वह उन सबके साथ सुविधाजनक स्थिति में होता है। फिर भी कोई तो ऐसी बात है कि सैकड़ों साल की गुलामी और लाखों सितम के बाद भी हमारे अभिमान के लिए एक वाक्य ही काफी है कि 'हस्ती मिटती नहीं हमारी'। इसका मतलब यह भी नहीं कि दुनिया में कहीं कुछ हमसे अच्छा नहीं, हमसे बेहतर नहीं। बेहतर तो बहुत है। तकनीक, विज्ञान, शिल्प, शिक्षा, शिष्टाचार, प्राकृतिक संसाधन, व्यवहार वगैरह बहुत कुछ भिन्न और उम्दा बहुत सारी जगह है।

फिर भी हम 140 करोड़ की चिल्लर जैसी आबादी के साथ, मामूली-सी प्राकृतिक और खनिज संपदा (मुगल और अंग्रेज अधिकांश तो लूट ले गए) के साथ, बैसाखी वाली शिक्षा के सहारे, लोकतंत्र के नाम पर लूटमार वाली राजनीतिक व्यवस्था के बीच, जातिवाद, भेदभाव, तुष्टिकरण, भाई-भतीजावाद के नासूर के बावजूद यदि आज दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच पा रहे हैं तो यह है फिनिक्स जैसी जिजीविषा, चट्‌टान जैसी दृढ़ता और पानी जैसी प्रकृति की वजह से, जो किसी भी तरह आगे बढ़ने का रास्ता निकाल लेता है। तो आइए, इस किस्त में कुछ अन्य पहलुओं को टटोलते हैं। ALSO READ: Trip To London : लंदन में न सड़क पर धरने-प्रदर्शन, न चक्का जाम

 

मेरी यह दृढ़ मान्यता है कि जहां से जो अच्छा मिले, उसे ग्रहण करें। यह भी कि जिसने भी इस ब्रह्मांड की रचना की, उसने किसी एक की झोली में सब कुछ नहीं डाला। कमीबेशी के साथ जीवन दिया है। यदि उत्तर, पश्चिम को ठंडा माहौल, बर्फ से ढंकी वादियां दीं तो पूरब को प्रचुर जल संपदा, विविध भौगोलिक संरचना, नदियां, दुनिया में सर्वाधिक बोलियां, विभिन्न संस्कृतियां, रस्म, त्यौहार, परंपराओं वाली प्रकृति दी। इसलिए किसी को कमतर व किसी को बेहतर हम बताते रहें, लेकिन वे सब अपने आप में भिन्न और कुछ विशेषता लिए हैं। ALSO READ: Trip To London: पाउंड को रुपए में गिनेंगे तो चाय भी नहीं पी सकेंगे

 

ब्रिटेन का प्रमुख शहर व राजधानी लंदन 90 लाख से अधिक आबादी वाला है, लेकिन यहां अंग्रेज केवल 36.8 प्रतिशत हैं। शेष एशियाई, अरब, अफ्रीकन, यहूदी व दुनिया भर के अन्य लोग हैं। लंदन में साढ़े 6 लाख भारतीय, 3 लाख 22 हजार बांग्लादेशी व 2 लाख 90 हजार पाकिस्तानी हैं। आपको किसी भी मॉल, शॉपिंग सेंटर, कार टैक्सी, सिक्यूरिटी सर्विस, एअरपोर्ट ग्राउंड टी, रेस्टारेंट, ग्रासरी स्टोर्स पर मालिक या कर्मचारी के तौर पर भारत, पाक, बांग्लादेश के चेहरे मिल जाएंगे। आप इस चक्कर में न रहें कि कोई भारतीय आपकी ओर देखकर मुस्कराएगा। जबकि, हम इंदौरियों को कोई भटिंडा में भी दिख जाए तो चेहरा खिल उठता है। फिर इंदौर में उससे कभी न मिले हों, बस कहीं देखा भर हो। ALSO READ: London Trip: प्रधानमंत्री से पब्लिक तक मेट्रो, सिटी बस में सफर करते हैं

 

लंदन में यहूदी भी भरपूर नजर आते हैं और मुस्लिमों की तरह अपनी स्पष्ट पहचान के साथ रहते हैं। जैसे मुस्लिम को टोपी-दाढ़ी से परहेज नहीं, वैसे ही ये लांग काला कोट और काली पेंट, सफेद शर्ट पहनते हैं, जिसमें से डोरियां बाहर लटकती रहती हैं। सिर पर हैट भी पहनते हैं। शनिवार को अपने पूजा स्थल सपरिवार जाएंगे। ये आम तौर पर किसी से बात नहीं करते। इनमें भी अधिक बच्चों का चलन है। तीन-चार बच्चे आम बात है। इस शहर में भिखारी, स्ट्रीट डॉग, मच्छर व मक्खियां नहीं हैं। यहां मांगने का तरीका थोड़ा हटकर है। जैसे, कोई फुटपाथ पर कोई स्वांग रचकर लेट-बैठ जाएगा। कोई संगीत पेश करेगा। कोई मेट्रो स्टेशन पर बाकायदा पूरा बैंड सजाकर गाएगा-बजाएगा। आपकी इच्छा हो तो दो नहीं तो निकल लो। ALSO READ: London Trip: सड़कें संकरी, फुटपाथ चौड़े, फिर भी जाम नहीं लगता

 

जब ब्रिटिश हुकूमत के तहत दुनिया के करीब 60-65 देश गुलाम थे, तब कहा जाता था कि विक्टोरिया के राज में कभी सूर्य अस्त नहीं होता। यह दुनिया के करीब 35 प्रतिशत हिस्से पर कब्जे के समय की बात है, लेकिन भौगोलिक कारणों से आज भी ब्रिटन में नाम को ही सूर्यास्त होता है। रात साढ़े नौ बजे तक उजाला रहता है और सुबह 4 बजे फिर से प्रकाश फैल जाता है। यूरोप में भी प्राय: ऐसा होता है।

 

लंदन या ब्रिटेन में टेलिफोन, ऑप्टिकल फाइबर या किसी भी तरह की केबल सड़क के ऊपर नजर नहीं आएगी। सब अंडरग्राउंड। इनके चैंबर पर लिखा भी होगा कि कौन-सी लाइन है। सिवरेज, वाटर सप्लाय, पोस्टल सर्विस, स्ट्राम वाटर लाइन के अलग-अलग चैंबर हैं, जिन पर स्पष्ट अक्षरों में अंकित रहता है। यहां टेलिफोन का उपयोग अभी-भी बहुतायत से होता है- खासकर वरिष्ठ नागरिक इसका उपयोग करते हैं। उनके लिए आपातकालीन सेवा के नंबर याद रखना आसान होता है। यहां सौ-दो सौ साल पुराने भवन मिलना सामान्य बात है। तमाम मकान लाल ईंट व कवेलू के होते हैं और समूचे ब्रिटेन, यूरोप में मकान की छत ढलान वाली होती है, ताकि बर्फ व पानी बहकर नीचे गिर जाए। 

 

इनमें टैरेस या गच्ची नहीं होती, जहां खड़े होकर पतंग उड़ाई जा सके। न छत पर पानी की टंकी या अवैध पेंट हाउस होता है। वास्तु शिल्प बेजोड़ होता है। 400 से एक हजार साल पुराने विशालकाय भवन हैं, जो पत्थरों के बने हैं। ये प्रमुखत: चर्च हैं। स्कॉटलैंड का चर्च 900 साल पुराना और लंदन का सैंट पॉल कैथेड्रल 400 साल पुराना है। जबकि वेस्टमिंस्टर चर्च 1066 से अभी तक कायम है। इसमें ब्रिटिश राजाओं के राज्याभिषेक होते रहे हैं तथा शादियां भी होती हैं। यहां राजा, रानियों, आइजैक न्यूटन व स्टीफन हाकिंग जैसे वैज्ञानिकों, कवियों को दफनाया गया है।

 

यहां आपको दो सौ, तीन सौ साल पुराने रेस्टारेंट भी मिल जाएंगे, जिनके संचालक तो काफी बदल गए, लेकिन रंगत वही बनी रही। ये रेस्टारेंट किसी प्रतीक से पहचाने जाते हैं। जैसे पैवैलियन, फोर सिस्टर्स, हेलमेट। तब इनसे रास्ता बताना आसान होता था। यहां की प्रसिद्ध नदी टेम्स का पानी साल भर मटमैला होता है, जबकि यूरोप में आम तौर पर नदियां साफ पानी वाली होती हैं। टेम्स की तलहटी मिट्‌टी वाली है, जो उसे साफ नहीं रहने देती।

 

यहां लंदन से अन्यत्र जाने वाली ट्रेन भी मेट्रो या वंदे भारत जैसी होती हैं, जिनमें हवाई जहाज जैसी सुविधाएं होती हैं। इनमें बैठने के लिए सीट होती हैं और भारत की तरह कुछ बोगियां और आरक्षित बोगी में भी कुछ सीट बिना आरक्षण के होती हैं। उन पर लिखा रहेगा- अवेलेबल। पूरे रास्ते उद्घोषणा होती रहती है। बस, मेट्रो, ट्रेन में दिव्यांग, बुजुर्ग के लिए सीट अलग होती हैं। उन पर आप बैठ सकते हैं, लेकिन किसी के आने पर उठना होता है।

 

बातें तो काफी हैं, लेकिन हर एक का उल्लेख जरूरी नहीं। मैंने अभी तक ब्रिटेन, यूरोप के सात देश, मॉरीशस, दुबई, थाईलैंड की यात्रा की है। अपने इस भ्रमण के मद्देनजर एक ही बात कह सकता हूं- सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारा और हिंदोस्ता में सबसे अच्छा इंदौर हमारा। दुनिया घूमें, लेकिन इंदौर जैसा खान-पान, आत्मीयता, शांति-सद्भाव, उल्लास, उत्सवप्रियता, सुरक्षित वातावरण, दिलदार लोग, आसपड़ोस, पता पूछने पर गली या मकान तक छोड़ने आने का उत्साह जैसे अनेक कारण हैं, जिनकी वजह से इंदौर लाजवाब है। (समाप्त) 

कनाडा में जंगल की आग के बीच फंसी ट्रेन:ट्रक से भिड़ंत, कर्मचारियों ने पैदल भागकर जान बचाई; घटना का वीडियो वायरल

कनाडा के ओंटारियो प्रांत में भीषण जंगल की आग के बीच कैनेडियन नेशनल रेलवे के कर्मचारी मौत के बेहद करीब पहुंच गए। धुएं के कारण विजिबिलिटी लगभग खत्म हो गई थी। इसी दौरान एक ट्रक में आग लग गई और वह ट्रेन से टकरा गया। हालांकि, सभी कर्मचारी सुरक्षित बाहर निकल आए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंजन के चारों ओर धधकती आग, वीडियो में कैद हुआ खौफनाक मंजर वायरल वीडियो में ट्रेन के इंजन की खिड़कियों के बाहर चारों ओर जंगल में आग की ऊंची लपटें दिखाई देती हैं। आसमान नारंगी रंग का नजर आता है और कर्मचारी तत्काल निकासी की मांग करते सुनाई देते हैं। वीडियो ने सोशल मीडिया पर रेलवे सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। ट्रक में लगी आग, ट्रेन से टकराया CN रेलवे के अनुसार, घने धुएं के बीच एक ट्रक आग की चपेट में आ गया और ट्रेन से टकरा गया। इसके बाद सभी कर्मचारी पैदल ही सुरक्षित स्थान पर पहुंचे। हालांकि, किसी भी कर्मचारी को चोट नहीं आई। रेल संचालन रोका, कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को निकाला घटना के बाद CN रेलवे ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाके में सभी रेल सेवाएं अस्थायी रूप से रोक दीं। कंपनी ने आर्मस्ट्रॉन्ग कस्बे के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। यह इलाका उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में जंगल की आग से प्रभावित है। विपक्ष ने उठाए सुरक्षा पर सवाल ओंटारियो की NDP के विधायक सोल ममाक्वा ने कहा कि वीडियो रिकॉर्ड करने वाले कर्मचारी को कंपनी की कार्रवाई का डर है, क्योंकि ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाना कंपनी की नीति के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि उस समय कर्मचारी की प्राथमिकता अपनी जान बचाना थी और कंपनी को दंडात्मक कार्रवाई के बजाय उनका सहयोग करना चाहिए। तीन ट्रेनें जंगल की आग वाले इलाके में खड़ीं ओंटारियो प्रांतीय पुलिस (OPP) ने बताया कि कॉलिन्स फर्स्ट नेशन के पास ज्वलनशील सामग्री ले जा रही तीन ट्रेनें जंगल की आग के कारण रोक दी गई हैं। फिलहाल आम लोगों के लिए तत्काल खतरा नहीं बताया गया है, लेकिन रेलवे और आपातकालीन एजेंसियां लगातार हालात की निगरानी कर रही हैं। उत्तर-पश्चिमी ओंटारियो में 150 जगहों में जंगल की आग प्रदेश में करीब 150 जगहों पर जंगल की आग जल रही हैं। कई समुदायों में अनिवार्य निकासी के आदेश जारी किए गए हैं। प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में प्रतिबंधित अग्नि क्षेत्र (Restricted Fire Zone) लागू कर दिया है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने तथा आपातकालीन जरूरत का सामान तैयार रखने की अपील की है।

US-Iran War: अमेरिका-ईरान जंग के बीच रूस ने क्यों भेजा ‘तबाही वाला प्लेन’? जानिए इसके पीछे की बड़ी वजह

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ सीजफायर ज्यादा समय तक नहीं टिक सका। एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है और लगातार सैन्य हमले किए जा रहे हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। इसी बीच रूस की गतिविधियों ने भी दुनिया का ध्यान खींचा है। रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन ईरान भेजा है।

रूस ने भेजा ये खतरनाक विमान

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने अपना स्पेशल कमांड प्लेन टीयू-214पीयू (Tu-214PU) ईरान की सीमा के पास भेजा है। यह विमान किसी भी बड़े संकट या युद्ध जैसी स्थिति में सरकार के शीर्ष नेतृत्व के लिए कमांड और नियंत्रण केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। टीयू-214पीयू को अक्सर अमेरिका के उन स्पेशल प्लेन जैसा माना जाता है, जिनका इस्तेमाल आपातकालीन हालात में सरकार और सेना के संचालन के लिए किया जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच जारी तनाव के दौरान यह विमान तेहरान पहुंचा।

रिपोर्ट के मुताबिक, जून में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर के ऐलान के बाद भी अमेरिका ने ईरान से जुड़े कुछ ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी। वहीं, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ गया। बताया जा रहा है कि युद्धविराम ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और पिछले सप्ताह इस अहम समुद्री मार्ग पर हुए हमलों के बाद हालात फिर बिगड़ गए। रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि रूसी कमांड विमान की यह तैनाती रूस और ईरान के बीच मजबूत रणनीतिक संबंधों का संकेत है। उनके अनुसार, ईरान में इस विमान की मौजूदगी दिखाती है कि क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात के बावजूद दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग जारी है।

Tu-214PU की खासियतें

टीयू-214पीयू (Tu-214PU) रूस के टुपोलेव Tu-214 यात्री विमान का विशेष सैन्य और कमांड संस्करण है। इसे अनौपचारिक तौर पर “डूम्सडे प्लेन” यानी संकट या युद्ध जैसी आपात स्थिति में इस्तेमाल होने वाला विमान भी कहा जाता है। यह विमान रूस के राष्ट्रपति और देश के शीर्ष अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है। इसमें अत्याधुनिक संचार (कम्युनिकेशन) और कमांड सिस्टम लगाए गए हैं, जिनकी मदद से बड़े अधिकारी हवा में रहते हुए भी सरकारी और सैन्य कामकाज का संचालन कर सकते हैं।

इस विमान के नाम में “पीयू (PU)” का मतलब रूसी भाषा में उड़ता हुआ कमांड पोस्ट होता है। दिखने में यह सामान्य यात्री विमान जैसा लगता है, लेकिन इसके अंदर पूरी तरह अलग और सुरक्षित कमांड सेंटर बनाया गया है। इसमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और विशेष उपकरण लगाए गए हैं, जिससे किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित तरीके से कमांड और नियंत्रण किया जा सके।

आसमान में उड़ता कमांड सेंटर

इस विमान को रूस के शीर्ष नेतृत्व के लिए एक चलता-फिरता कमांड सेंटर बनाया गया है। इसमें ऐसे आधुनिक रेडियो और कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं, जिनकी मदद से राष्ट्रपति और वरिष्ठ अधिकारी यात्रा के दौरान भी सरकारी और सैन्य कामकाज संभाल सकते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इस विमान की अधिकतम क्रूज़िंग स्पीड करीब 850 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी उड़ान क्षमता लगभग 6,500 किलोमीटर तक बताई जाती है, जिससे यह बिना रुके लंबी दूरी तय कर सकता है। इसी वजह से इसे दुनिया के दूसरे वीआईपी कमांड विमानों की श्रेणी में रखा जाता है। इसका एक और उन्नत सैन्य संस्करण Tu-214PU-SBUS भी है, जिसमें और बेहतर तथा सुरक्षित संचार प्रणाली लगी होने की बात कही जाती है।

पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा तनाव

रूस के इस विशेष विमान के पहुंचने के बीच पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने सोमवार, 13 जुलाई को दावा किया कि उसने कुवैत में मौजूद अली अल-सलेम एयर बेस पर ईंधन भंडारण टैंक और पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया। इसके अलावा अहमद अल-जाबेर एयर बेस पर लगे एक रडार सिस्टम पर भी हमला करने का दावा किया गया। कुवैत को अमेरिका का करीबी सहयोगी देश माना जाता है।

अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआरजीसी ने कहा कि ये हमले अमेरिका के खिलाफ चलाए जा रहे उसके “आंख के बदले आंख” अभियान के तीसरे चरण का हिस्सा हैं। ईरान का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाई के जवाब में की गई है। साथ ही उसने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसे अभियान जारी रह सकते हैं।

Bangkok Pub Fire: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के पब में लगी भीषण आग! 27 लोगों की मौत, स्टेज के पास धमाके के बाद मची भगदड़

Bangkok Pub Fire: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में रविवार (12 जुलाई) देर रात एक मशहूर लाइव म्यूजिक पब में भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई। जबकि 63 लोग घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक यह हाल के वर्षों में देश की सबसे भयावह मनोरंजन स्थल अग्निकांड घटनाओं में से एक है। यह हादसा रविवार देर रात करीब 11:57 बजे बैंकॉक के चातुचक जिले स्थित रोंग बीयर ना लात फ्राओ (Rong Beer Na Lat Phrao) नामक लाइव म्यूजिक पब में हुआ।

दमकलकर्मियों ने करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया। लेकिन तब तक पूरा परिसर घने धुएं से भर चुका था और कई लोग अंदर ही फंस गए। प्रधानमंत्री अनुटिन चार्नवीराकुल ने घटनास्थल का दौरा कर 27 शव बरामद होने की पुष्टि की।

वहीं, बैंकॉक प्रशासन के अनुसार 63 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 22 की हालत गंभीर बनी हुई है। बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के आपदा रोकथाम और शमन विभाग के निदेशक सुरियाचाई राविवन के अनुसार, मरने वालों की संख्या 27 पर स्थिर हो गई है।

स्टेज के पास सर्किट ब्रेकर से उठा धुआं, फिर हुआ धमाका

शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से उठे धुएं के बाद लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले बिजली गुल हुई और फिर जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद कुछ ही सेकंड में पूरा पब धुएं से भर गया। एक बैंड सदस्य ने बताया, “धमाके के बाद कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। चारों ओर धुआं ही धुआं था। लोग फर्श पर पड़े मदद की गुहार लगा रहे थे।”

धुएं के कारण नहीं मिल पाया बाहर निकलने का रास्ता

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घना धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं मिला। अफरा-तफरी के बीच कई लोग गलत दिशा में भाग गए। लाओस के पर्यटक कान कुटिरात ने बताया कि उन्होंने स्टेज के पास धुआं देखा और कुछ ही पलों में पूरे पब में चीख-पुकार मच गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं सिर्फ एक व्यक्ति को ही बाहर निकाल सका। मैंने पूरी कोशिश की, मुझे माफ कर देना।”

बाथरूम के पास मिले कई शव

प्रधानमंत्री अनुटिन ने बताया कि आग लगने के बाद अधिकांश लोग घबराकर इमारत के पिछले हिस्से में स्थित बाथरूम की ओर भागे, जहां बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। बैंकॉक के गवर्नर चदचार्ट सिट्टिपुंट ने कहा कि कई शव फायर एग्जिट के पास मिले हैं। जांच की जा रही है कि कहीं आपातकालीन निकास अवरुद्ध तो नहीं था। बचाव दल को अंदर रखी मेज-कुर्सियों के कारण भी राहत कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।