‘तुझे पैदा करके गलती कर दी’, ₹95 हजार की नौकरी जाने के बाद बदल गया घर का माहौल, 22 साल के युवक ने बताया कैसे माता-पिता के तानों ने बढ़ाई मुश्किलें

एक अच्छी नौकरी और मोटी सैलरी होने के बावजूद जिंदगी हमेशा एक जैसी नहीं रहती। कभी-कभी हालात ऐसे बदलते हैं कि इंसान को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। लेकिन मुश्किलें तब और बढ़ जाती हैं, जब बाहर की परेशानियों के बीच अपने ही साथ देना छोड़ दें। सोशल मीडिया पर 22 साल के एक युवक की आपबीती कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। नौकरी छूटने के बाद उसकी जिंदगी में आए बदलाव और परिवार के कथित व्यवहार ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

युवक की पोस्ट पर कई लोग उसके दर्द को समझने की कोशिश कर रहे हैं, तो कुछ ने उसे आत्मनिर्भर बनने और भविष्य के लिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी है। इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि मुश्किल दौर में परिवार का साथ कितना मायने रखता है।

नौकरी छूटते ही घर में बदल गया व्यवहार

22 वर्षीय युवक ने बताया कि थर्ड-टियर कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद उसे आईटी सेक्टर में नौकरी मिली थी। उसकी मासिक सैलरी करीब 95,000 रुपये थी, लेकिन छह महीने बाद ही उसकी नौकरी चली गई। अब उसे बेरोजगार हुए दो महीने हो चुके हैं।

युवक के मुताबिक, पिछले एक महीने से माता-पिता उसे कथित तौर पर निकम्मा और दूसरों पर निर्भर रहने वाला कहकर ताने दे रहे हैं। उसने अपनी पोस्ट का शीर्षक रखा, ‘Parents said Galti kardi tujhe paida karke’। उसके अनुसार, एक दिन माता-पिता ने उसकी थाली से खाना हटा दिया और कहा कि उसे पैदा करके गलती कर दी।

दो दिन से खाना नहीं मिलने का दावा

युवक ने अपनी पोस्ट में दावा किया कि उसने पिछले दो दिनों से कुछ नहीं खाया था और घर में किसी ने उससे खाने के बारे में नहीं पूछा। उसने यह भी आरोप लगाया कि परिवार ने कूलर उससे ले लिया और पेट्रोल खत्म होने पर उसे अपनी बाइक करीब तीन किलोमीटर तक खींचनी पड़ी।

उसका कहना है कि आर्थिक परेशानी के साथ घर का माहौल भी उसकी मानसिक स्थिति पर असर डाल रहा है। वह नाइट गार्ड की नौकरी तलाश रहा था, ताकि काम के साथ भविष्य के इंटरव्यू की तैयारी कर सके। उसने फूड डिलीवरी का काम भी आजमाया, लेकिन उसके मुताबिक, इससे तैयारी के लिए समय नहीं मिल पा रहा था।

अच्छी कमाई के बावजूद नहीं की बचत

युवक ने बताया कि उसने अपनी कमाई से बाइक खरीदी थी और इसके लिए कोई ईएमआई नहीं चल रही थी। हालांकि, नौकरी जाने के बाद उसे महसूस हुआ कि भविष्य की मुश्किलों के लिए पर्याप्त बचत करना कितना जरूरी है।

उसने दूसरे युवाओं को सलाह दी कि बाइक या कार जैसी महंगी चीजें खरीदने से पहले कुछ पैसे आपातकालीन जरूरतों के लिए जरूर बचाकर रखें।

Parents said “Galti kardi tujhe paida karke”

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PataHaiAajKyaHua

Reddit यूजर्स ने बढ़ाया हौसला

युवक की कहानी पर कई लोगों ने उसे हिम्मत रखने और नौकरी की तलाश जारी रखने की सलाह दी। एक यूजर ने उसकी जॉब प्रोफाइल पूछते हुए अपने परिचितों के जरिए नौकरी के अवसर तलाशने में मदद की पेशकश की। कुछ लोगों ने उसे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और भविष्य में अपनी परिस्थितियों के अनुसार अलग रहने पर विचार करने को कहा। यह मामला युवक की Reddit पोस्ट में किए गए दावों पर आधारित है, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी उसकी कहानी एक अहम सवाल उठाती है मुश्किल समय में अपनों को तानों की जरूरत होती है या थोड़े सहारे और समझदारी की?

दिवाली पर मालदीव से भी महंगा हुआ घर जाना! दिल्ली से पटना-गोरखपुर फ्लाइट्स के किराए ने इंटरनेट को चौंकाया

राष्ट्रपति से मिले विपक्षी नेता

नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी पार्टियों के 10 सांसदों का एक दल शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिला। विपक्षी पार्टियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के लिए राष्ट्रपति को एक ज्ञापन सौंपा। विपक्ष ज्ञानेश कुमार के ऊपर वोट चोरी के आरोप लगा रहा है। राष्ट्रपति से विपक्षी पार्टियों के नेताओं की मुलाकात रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। विपक्षी नेताओं ने पहले कहा था कि सांसदों और अन्य लोगों का करीब तीन सौ लोगों का एक समूह राष्ट्रपति से मिलना चाहता है। लेकिन बाद में चुनिंदा नेता राष्ट्रपति से मिले।

इससे पहले विपक्षी सांसद और अन्य नेता संसद भवन से मार्च करते हुए रायसीना हिल्स पर स्थित राष्ट्रपति भवन पहुंचे। इस बीच प्रियंका गांधी वाड्रा की सुरक्षाकर्मियोंसे बहस हो गई, जिसके बाद वे सांसदों के साथ विजय चौक पर ही धरने पर बैठ गईं। बहरहाल, राहुल गांधी के साथ विपक्ष के कई नेता मार्च में शामिल हुए। ममता बनर्जी भी मार्च में शामिल थीं और राष्ट्रपति से मिलीं। ‘सेव डेमोक्रेसी’ का बैनर लेकर विपक्षी सांसदों ने मार्च किया।

राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने से पहले विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ब्लॉक के नेताओं ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इस बैठक में राहुल ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का 14 अगस्त 1947 को दिया भाषण पढ़ा। उन्होंने कहा, ‘एक नई उम्मीद जन्म ले रही है और लंबे समय से संजोया गया सपना साकार हो रहा है। उम्मीद है कि यह सितारा कभी अस्त न हो और यह उम्मीद कभी निराश न हो’।

इससे पहले कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘हम आगे क्या कदम उठाएंगे, इसकी जानकारी आपको देंगे। जैसा कि हमने कल कहा था, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। परसों तक हम अपने फैसले के मुताबिक आगे बढ़ते रहेंगे’। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति लागू है। सभी ट्रेनें और मेट्रो स्टेशन रोक दिए गए हैं। सरकार पूरी तरह डरी हुई है। लोकतांत्रिक देश में आंदोलन और जुलूस होते रहेंगे। सरकार को इन्हें उसी तरह संभालना चाहिए। लेकिन यह सरकार पूरी तरह तानाशाही तरीके से काम कर रही है’।

विदेश में लुढ़कता रुपया पर भारत में महंगा!

सात अक्टूबर को रिज़र्व बैंक ने रेपो दर 5.25 से बढ़ा कर 5.50 प्रतिशत कर दी। मतलब भारतीयों के लिए ब्याज दर बढ़ाई। जबकि कल, गुरुवार को प्रति डॉलर, रुपया 96.78 पर था। मेरा मानना है साल के आखिर तक यह रेट सौ पार होगी। अंतर देखें, विडंबना समझें कि जिस रुपए को भारतीय नागरिक कर्ज़ लेकर इस्तेमाल करता है, वह महंगा हो रहा है। जबकि उसी रुपए की अंतरराष्ट्रीय ख़रीद-शक्ति लगातार घटती हुई है। बतौर उदाहरण समझें किसी परिवार ने 50 लाख रुपए का घर कर्ज़ 20 वर्ष के लिए लिया है। यदि ब्याज 8.5 से बढ़ कर 8.75 प्रतिशत हो जाए और शेष अवधि 20 वर्ष हो, तो मासिक किस्त लगभग 43,391 रुपए से बढ़ कर 44,186 रुपए होगी। यानी लगभग 795 रुपए हर महीने बढ़ेगी।

ठीक दूसरी तरफ उसी परिवार का बच्चा यदि विदेश में पढ़ रहा हो तो डॉलर के महंगे होने से उसकी पढ़ाई और रहन-सहन का खर्च भी बढ़ेगा। मतलब एक ही परिवार पर घरेलू ब्याज और विदेशी मुद्रा, दोनों का दोतरफा दबाव।

ऐसी इकोनॉमी का एक और सत्य कि एक तरफ़ सरकार विकास, निवेश और विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की हवाबाजी कर रही है। वहीं रिज़र्व बैंक को रुपए को सहारा देने के लिए घरेलू ब्याज दर बढ़ानी पड़ रही है। इतना ही नहीं भागती विदेशी पूंजी से विदेशी मुद्रा कोष में घटते डॉलर या तेल आयात में डॉलर की आवश्यकता के तकाजे में भारत सरकार (रिज़र्व बैंक) ने प्रवासी भारतीयों से अधिक आकर्षक ब्याज दरों के साथ डॉलर का कलेक्शन किया है।

हां, यह फैसला इसी 2026 का है। इससे पहले ऐसा आपातकालीन निर्णय 1991 के भुगतान संकट में हुआ था। उसके बाद 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद तथा 2013 में रुपए पर दबाव बढ़ने की सूरत में एफसीएनआर (बी) जमा योजना के कदम से उठा था। जबकि आज सरकार का यह घर-घर पहुंचा नैरेटिव है कि भारत विकसित हो रहा है। दौड़ रहा है। सबको पछाड़ दिया केवल अमेरिका व चीन को पछाड़ना बाकी है, जिन्हें मोदीजी 2047 में पछाड़ देंगे।

गौर करें तथ्यों पर। आठ जून 2026 को रिज़र्व बैंक ने विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए विशेष एफसीएनआर (बी) स्वैप सुविधा शुरू की। कैसे एनआरआई भारतीयों को ललचाया? भारतीय बैंकों को प्रवासी भारतीयों से तीन से पांच वर्ष की विदेशी करेंसी, डॉलर जमा आकर्षित करने की स्कीम दी गई। ब्याज की सामान्य सीमा में छूट, ज्यादा ब्याज देने और रिज़र्व बैंक ने संबंधित विदेशी करेंसी जोखिम की हेजिंग लागत उठाने की व्यवस्था करके।

नतीजतन कुछ बैंकों ने तो डॉलर जमा कराने के लिए जमा दरें लगभग छह से सात प्रतिशत तक की। सरकार ने 24 अगस्त को घोषणा की कि लगभग ग्यारह सप्ताह में 73 अरब डॉलर भारतीय बैंकों ने जुटाए। इनमें 65.4 अरब डॉलर एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट एकत्र हुई। मतलब भारत का विदेशी मुद्रा कोष भरा। हिसाब से इससे भारत का रुपया मजबूत होना चाहिए। जब भारत के पास करेंसी रिजर्व है तब रुपया क्यों लुढ़के? विदेशी निवेशकों का भी भरोसा बनना या लौटना चाहिए था।

लेकिन विदेशियों ने याकि दुनिया ने भारत के शेयर बाजार (इकोनॉमी) को जस का तस भारी जोखिम का ठिकाना माने रखा। उनका पैसा निकालना थमा ही नहीं। परिणाम क्या है? कोई 133 अरब डॉलर के बड़े विदेशी मुद्रा जमा जुटाने के बाद भी रुपया अक्टूबर में 97 प्रति डॉलर के करीब है?

जाहिर है विदेशी संस्थागत निवेशकों का भारत पर भरोसा लौट नहीं रहा। सरकार, रिज़र्व बैंक कितना ही दम लगा लें अपने आयात बिल, महंगा तेल, वैश्विक ब्याज दरें, दुनिया की दूसरी इकोनॉमी (भले वे भारत जैसे फुलाए विकास आंकड़े न दें) के ठोस विकास का जवाब नहीं दे सकते। भारत और भारतीय कंपनियों की कमाई को साल-डेढ़ साल से वैश्विक निवेशक तौलते-तौलते उस मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जिससे खोखलापन जगजाहिर है। तभी दुनिया के नंबर एक खरबपति (जिसकी बात, उत्पादकता, सनक का हर शब्द दुनिया सुनती है) इलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कल भारत से पूछा, ‘क्या अंबानी भारत के असली बॉस हैं? भारत के कुछ बड़े बिजनेसमैन नहीं चाहते कि स्टारलिंक का सेटेलाइट इंटरनेट भारत आए, ताकि उनका एकछत्र राज बना रहे। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि वे कौन हैं…’। मस्क ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि यह भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है।

रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में तबाही

यूक्रेन पर हुए ताजा रूसी हमलों में पांच बच्चों सहित 36 लोगों की मौत हो गयी और कई लोग बुरी तरह घायल हुए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी। गुरुवार सुबह क्रामाटोर्स्क शहर में एक सामान्य सार्वजनिक बस स्टॉप को निशाना बनाया गया, जिसमें 12 लोगों की जान चली गयी।

इसके अलावा राजधानी कीव में एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में दो नागरिकों की मौत हो गयी और दो बच्चों सहित चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गये। ओडेसा क्षेत्र में ड्रोन हमले से एक पशु आश्रय स्थल क्षतिग्रस्त हुआ है, जबकि ऊर्जा बुनियादी ढांचा एक बार फिर हमलों की ज़द में आया है।

इस हमले से पहले प्रिलुकी शहर में एक पांच मंजिला आवासीय इमारत पर रूस के एक घातक मिसाइल हमले के बाद चलाये जा रहे खोज एवं बचाव अभियान को पूरा कर लिया गया है। इस दर्दनाक हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गयी है, जिनमें पांच बच्चे भी शामिल हैं। 

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राहत और बचाव कार्य के दौरान 54 लोग घायल हुए हैं, जिनमें सात बच्चे शामिल हैं। आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों ने मुस्तैदी से काम करते हुए मलबे से 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है, जिनमें एक पांच साल का बच्चा भी शामिल है।

यूक्रेनी नेतृत्व ने रूसी अपराधों के खिलाफ आवाज उठाने वाले अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। यह भी कहा गया कि केवल शाब्दिक समर्थन काफी नहीं है और इसे तत्काल नये सैन्य रक्षा पैकेजों के रूप में जमीनी स्तर पर लागू किया जाना चाहिए। एंटी-बैलिस्टिक क्षमताओं की आपूर्ति, लड़ाकू विमानों के लिए गोला-बारूद और इंटरसेप्टर तकनीक में निवेश प्रतिदिन निर्दोष नागरिकों की जान बचाने में सीधे तौर पर मददगार साबित हो रहा है।

अपनी रक्षा प्रणालियों को और अधिक मजबूत करने तथा ठोस परिणाम हासिल करने के उद्देश्य से यूक्रेन अपने वैश्विक साझेदारों के साथ उच्च स्तरीय वार्ता करेगा।

Pic Credit : UNI

डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड की टेंशन बरकरार, क्या भारतीय बाजारों पर दिखेगा इसका असर

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी से सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में बढ़त, नैस्डैक की रिकॉर्ड क्लोजिंग और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार का मूड बेहतर हुआ है। हालांकि, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जारी जियोपॉलिटिकल जोखिमों के कारण रिकवरी धीमी रह सकती है, खासकर तब जब निफ्टी ने सोमवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 54 अंक या 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,630 पर ट्रेड कर रहा था। सोमवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र में भारतीय शेयरों में रिकवरी दिखी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण लगातार चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला थम गया। सेंसेक्स 472.77 अंक या 0.66 प्रतिशत बढ़कर 72,382.47 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 133.80 अंक या 0.60 प्रतिशत बढ़कर 22,555.75 पर बंद हुआ।

ग्लोबल माहौल काफी हद तक सकारात्मक है। रात भर वॉल स्ट्रीट में तेजी के बाद एशिया में टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़त देखी जा रही है। पिछले सत्र में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, क्योंकि मध्य पूर्व से अधिक निर्यात और G7 द्वारा आपातकालीन स्टॉक जारी करने की योजना से सप्लाई की चिंताएं कम हुई हैं।

हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। FII ने 5 अक्टूबर को 4,699 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस बिकवाली को संभाला और 5,181 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदे।

नैस्डैक के रिकॉर्ड के बाद एशियाई बाजारों में तेजी

मंगलवार को एशियाई शेयरों में बढ़त देखी गई, जो अमेरिका में टेक्नोलॉजी शेयरों की रैली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से प्रेरित थी। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे व्यापक इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि जापान का निक्केई 0.7 प्रतिशत बढ़ा। यूरोपीय इक्विटी फ्यूचर्स में 0.5 प्रतिशत की तेजी आई।

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भी हल्की बढ़त देखी गई, जिसमें नैस्डैक फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत ऊपर रहे। हालांकि, लंबे समय वाले US ट्रेजरी यील्ड कई दशकों के उच्चतम स्तर के करीब बने रहे, जिससे ग्लोबल फाइनेंशियल हालात कड़े रहे और इक्विटी वैल्यूएशन के लिए लगातार जोखिम बना रहा।

Nvidia और Microsoft में तेजी से Nasdaq रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

सोमवार को वॉल स्ट्रीट बढ़त के साथ बंद हुआ। इसमें टेक्नोलॉजी शेयरों की अहम भूमिका रही, क्योंकि Nvidia और Microsoft ने Nasdaq को रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंचा दिया। Nasdaq कंपोजिट 1.05 प्रतिशत बढ़कर 27,477.31 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 0.66 प्रतिशत बढ़कर 7,773.95 पर बंद हुआ। Dow Jones इंडस्ट्रियल एवरेज 0.18 प्रतिशत बढ़कर 51,267.90 पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों को कुछ राहत मिली, जबकि अब ध्यान आने वाले तिमाही नतीजों के सीज़न की ओर बढ़ रहा है।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार से निकट अवधि में सहारा मिल रहा है, लेकिन लगातार जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और एनर्जी व शिपिंग रूट में फिर से रुकावट का जोखिम निवेशकों को सतर्क रखेगा।

पोनमुडी निफ्टी के लिए 22,600 को तत्काल रेजिस्टेंस मानते हैं। अगर यह स्तर लगातार टूटता है (ब्रेकआउट होता है), तो रिकवरी 22,800-23,000 तक बढ़ सकती है। नीचे की ओर, 22,400 तत्काल सपोर्ट है, और उसके बाद 22,200 का अहम स्तर है।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने कहा कि अच्छी शुरुआत के बाद निफ्टी नीचे आ गया क्योंकि इंडेक्स को 22,600 के आसपास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। डे ने कहा, “कुल मिलाकर, यह ऊपर बंद होने से पहले 200-पॉइंट की रेंज में रहा। RSI अभी भी ओवरसोल्ड ज़ोन में है और बेयरिश क्रॉसओवर बना हुआ है। सेंटीमेंट कमज़ोर बना हुआ है और सपोर्ट 22,400 पर है। अगर यह इस लेवल से नीचे गिरता है, तो बेयरिश ट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है। दूसरी ओर, अगर यह 22,600 से ऊपर बना रहता है, तो कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है।”

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

‘ओमान में था बैन…सीरिया कनेक्शन’, कैप्टन स्मित पर हमला करने वाले को-पायलट की हुई पहचान

फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान सामने आई है। नई रिपोर्टों के मुताबिक, आरोपी ओमानी को-पायलट की पहचान 29 वर्षीय हमाम अल-हम्मामी के रूप में हुई है। जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक वह पहले ओमान एयर में काम कर चुका था। साल 2024 में उसके पास कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री मिलने के बाद उसे उड़ान से हटा दिया गया था। वहीं कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि हमाम ने सीरिया में काफी समय बिताया था और इसी दौरान उसके संपर्क में कट्टरपंथी विचार आने की आशंका जताई गई। इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

CNN के मुताबिक, ओमान में कथित कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर अल-हम्मामी को उड़ान से रोका गया था। इसके बाद वह संयुक्त अरब अमीरात कैसे पहुंचा और वहां एक कमर्शियल पायलट के तौर पर उसे काम करने की अनुमति कैसे मिली, अब जांच एजेंसियां इसी पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।

बड़े हमले की थी साजिश

इजरायली न्यूज चैनल i24NEWS की रिपोर्ट में जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से एक बड़ा दावा किया। रिपोर्ट के अनुसार, पूछताछ के दौरान ओमानी को-पायलट ने कथित तौर पर बताया कि वह विमान को इजराइल में गिराने की योजना बना रहा था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, अगर यह योजना सफल हो जाती तो विमान में सवार लोगों के साथ-साथ जमीन पर भी बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता था। रिपोर्ट में इस संभावित घटना की तुलना 11 सितंबर के आतंकी हमलों जैसी गंभीर घटना से की गई है। वहीं को-पायलट के इस कथित बयान की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

काफी समय रहा है सीरिया में

अल अरबिया के हवाले से सूत्रों ने कहा कि, हमाम अल-हम्मामी ने अपने जीवन का काफी समय ओमान से बाहर बिताया, जिसमें सीरिया भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, सीरिया में रहने के दौरान उसके विचारों में बदलाव आया और उस पर कट्टरपंथी सोच से प्रभावित होने की बात सामने आई। बाद में ओमानी अधिकारियों ने इन चिंताओं को देखते हुए उसे विमान उड़ाने की जिम्मेदारी से हटा दिया। इसके बाद अल-हम्मामी ने ओमान छोड़ दिया और संयुक्त अरब अमीरात पहुंच गया। कुछ समय बाद उसने फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की और वहां को-पायलट के तौर पर काम करने लगा। हालांकि, उसके अतीत और विचारों से जुड़े दावे अभी जांच के दायरे में हैं।

अधिकारी कर रहे इन बातों की जांच

अल-हम्मामी के सीरिया में रहने और उसके कथित कट्टरपंथी विचारों को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में कई दावे सामने आए हैं। इजरायल के चैनल 12 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जांच एजेंसियों को शक है कि वह अल-कायदा की विचारधारा से प्रभावित हुआ था और सीरिया में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कुछ धार्मिक लोगों से भी हुई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इजरायली अधिकारी इस बात की जांच कर रहे हैं कि कहीं अल-हम्मामी का किसी चरमपंथी नेटवर्क से संपर्क या प्रभाव तो नहीं रहा।

30 सितंबर को क्या हुआ था

30 सितंबर को हुई इस घटना के दौरान, रिपोर्टों के मुताबिक अल-हम्मामी ने कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर हमला कर दिया, जिससे विमान का संतुलन बिगड़ गया और वह तेजी से नीचे जाने लगा। घायल होने के बावजूद कैप्टन मच्छर ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया, जिसके बाद चालक दल और यात्रियों ने स्थिति संभालने में मदद की। इसी दौरान विमान में मौजूद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने भी फ्लाइट का कंट्रोल संभालने में सहयोग किया। बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक स्थित एयरपोर्ट पर सुरक्षित आपातकालीन लैंडिंग कराई गई।

घटना के बाद आरोपी को पूछताछ और जांच के लिए यूएई ले जाया गया है। हालांकि, उसकी पहचान और पुराने रिकॉर्ड को लेकर कई रिपोर्टें सामने आई हैं, लेकिन यूएई के अधिकारियों ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की जांच जारी है और पूरी जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आने की उम्मीद है।

मिड-एयर हाइजैक के बाद सऊदी में हुई लैंडिंग, डर के बीच गूंजा ‘Od Avinu Chai’, जानें इसका मतलब

FlyDubai Flight Emergency Landing: दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ 1073 में हवा में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में हड़कंप मच गया। कॉकपिट में पायलटों के बीच विवाद के बाद हाइजैक का डिस्ट्रेस सिग्नल ट्रिगर हो गया, जिसके चलते प्लेन को तुरंत सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।

विमान के सुरक्षित जमीन पर उतरते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान पूरा केबिन ‘Od Avinu Chai’ गा रहा था जिसका मतलब यानी हमारा पिता अभी जीवित है जो एक हिब्रू प्रार्थना गीत है।

कॉकपिट में पायलटों की भिड़ंत और गलत सिग्नल का खौफ

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ते विमान के कॉकपिट में ही पायलटों के बीच आपस में तीखी बहस और हाथापाई हो गई थी। इसी घटनाक्रम के दौरान विमान से पहले सामान्य इमरजेंसी कोड 7700 भेजा गया, लेकिन इसके तुरंत बाद डिस्ट्रेस सिग्नल 7500 में बदल गया। यह कोड विमान के गैर-कानूनी कब्जे या ‘हाईजैकिंग’ को दर्शाता है।

हाइजैक कोड मिलते ही इजराइली वायुसेना एक्शन में आ गई और फाइटर जेट्स को हवा में तैनात कर दिया गया। हालांकि, बाद में सिग्नल को फिर से 7700 में स्विच किया गया और हाइजैकिंग की आशंका को खारिज कर दिया गया।

सऊदी अरब में लैंडिंग के बाद गूंजा ‘Od Avinu Chai’

तमाम आशंकाओं के बीच विमान को उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट की तरफ डाइवर्ट किया गया, जहां प्लेन सुरक्षित लैंड हो गया। फ्लाईदुबई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर पुष्टि की कि विमान में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

लैंडिंग के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में खौफ के साये से बाहर निकले यात्री खुशी से तालियां बजाते और मशहूर हिब्रू प्रार्थना गीत ‘Od Avinu Chai’ गाकर ईश्वर का शुक्रिया अदा करते नजर आ रहे हैं।

नेतन्याहू ने की आपातकालीन समीक्षा

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय तुरंत सक्रिय हो गए। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थिति की समीक्षा के लिए आपातकालीन बैठक की और पूरे घटनाक्रम पर सीधे नजर रखी।

पीएमओ ने बयान जारी कर कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी इज़राइली यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इजराइल की परिवहन मंत्री मिरियम रेगेव ने सुरक्षा स्थिति का आकलन किया, जबकि फ्लाईदुबई एयरलाइन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

विश्व हृदय दिवस 2026: दिल के संकेतों को अनदेखा न करें- डॉ. वत्सल कयाल

विश्व हृदय दिवस 2026: दिल के संकेतों को अनदेखा न करें- डॉ. वत्सल कयाल

Heart Attack

इंदौर। विश्व हृदय दिवस 2026 के अवसर पर यूनिक हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वत्सल कयाल ने लोगों से दिल की बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचानने और उन पर तुरंत ध्यान देने की अपील की है।

 

डॉ. कयाल ने कहा, “दिल का दौरा कभी समय देखकर नहीं आता। मैंने अपने अनुभव में कई लोगों को इलाज में देरी करते देखा है। किसी को लगा कि तकलीफ अपने आप ठीक हो जाएगी, किसी ने उसे एसिडिटी समझा, तो किसी को लगा कि इस उम्र में दिल की बीमारी नहीं हो सकती। मेरा संदेश स्पष्ट है- दिल की तकलीफ को समय रहते पहचानें और उस पर तुरंत ध्यान दें।”

 

इस वर्ष विश्व हृदय दिवस का मुख्य संदेश “Don’t Miss a Beat” है। यह संदेश दिल की बीमारी के उन लक्षणों की ओर ध्यान दिलाता है जिन्हें अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। दिल के दौरे के दौरान सीने में दर्द, दबाव या भारीपन महसूस हो सकता है। इसके साथ ही सांस फूलना, अत्यधिक पसीना आना, जी मिचलाना अथवा बांह, पीठ और जबड़े में दर्द या खिंचाव भी हो सकता है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण एक जैसे नहीं होते। यदि ऐसी कोई तकलीफ नई हो, लगातार बनी रहे या चिंता बढ़ा रही हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें; घर पर बैठकर इसके खुद-ब-खुद ठीक होने का इंतज़ार न करें।

 

डॉ. कयाल ने आगे बताया कि दिल की देखभाल किसी आपात स्थिति के आने से बहुत पहले ही शुरू हो जाती है। उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), मधुमेह (शुगर) और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल बिना किसी स्पष्ट लक्षण के वर्षों तक दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ाते रहते हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं, अपनी जांच रिपोर्ट को समझें और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाइयों का नियमित सेवन करें—भले ही आप पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे हों।

 

हमारी दिनचर्या और आदतें भी दिल की सेहत पर गहरा असर डालती हैं। तंबाकू के किसी भी रूप से दूर रहें और दैनिक शारीरिक गतिविधियों के लिए समय निकालें। अपने भोजन में फल, हरी सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें तथा नमक और पैकेटबंद (प्रोसेस्ड) भोजन का सेवन कम करें। सभी बदलाव एक साथ करना आवश्यक नहीं है; रोज़ टहलना, खान-पान में एक अच्छा सुधार करना और समय पर स्वास्थ्य जांच कराना जैसी छोटी-छोटी शुरुआत भी बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।

 

विश्व हृदय दिवस के इस अवसर पर डॉ. कयाल ने परिजनों की सेहत का भी ध्यान रखने की सलाह दी। अपने प्रियजनों को ब्लड प्रेशर जांचने के लिए प्रेरित करें, तंबाकू छोड़ने में उनकी मदद करें और दिल के दौरे के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सीय कदम उठाएं।

 

अंत में डॉ. कयाल ने कहा, “दिल की सेहत रोज़मर्रा के छोटे-छोटे निर्णयों से बनती है, और किसी ख़तरे का संकेत मिलने पर समय पर लिया गया सही फैसला किसी की जान बचा सकता है।”

ब्रिटेन में अमेरिकी एयरबेस के पास आतंकी साजिश का शक:5 गिरफ्तार, 85 घर खाली कराए; ईरान पर हमलों में इस्तेमाल होता है बेस

ब्रिटेन में अमेरिकी वायुसेना के इस्तेमाल वाले एयरबेस के पास आतंकी साजिश की आशंका में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को रविवार तड़के एयरबेस की ओर जा रही 3 संदिग्ध गाड़ियों की सूचना मिली थी। इसके बाद इलाके में अलर्ट जारी किया गया और आसपास के गांव में 85 घर खाली कराए गए। यह एयरबेस इंग्लैंड के ग्लॉस्टरशायर में RAF फेयरफोर्ड के नाम से जाना जाता है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार लोगों पर आतंकी हमला करने की तैयारी और विस्फोटक से जुड़े अपराधों का शक है। रविवार शाम तक पांचों पुलिस की हिरासत में थे। अमेरिकी वायुसेना मार्च से RAF फेयरफोर्ड एयरबेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने के लिए कर रही है। हाल के दिनों में अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने यहां से ईरान के खिलाफ हमलों के लिए उड़ान भरी थी। स्थानीय महिला ने पुलिस को संदिग्ध गतिविधि की सूचना दी BBC के मुताबिक, एक स्थानीय महिला ने रविवार तड़के एयरबेस के पास संदिग्ध गतिविधि देखकर पुलिस को सूचना दी थी। महिला ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि उसने पहले रक्षा मंत्रालय की पुलिस को फोन किया, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद उसने आपातकालीन नंबर 999 पर कॉल किया। महिला के मुताबिक, उसने तीन वैन खड़ी देखी थीं। वहां कुछ लोग मास्क पहने हुए थे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। सेना ने रोबोट से वैन की जांच कराई AP की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के बाद सेना की बम निरोधक टीम ने रोबोट की मदद से तीनों वैन की जांच की। सोमवार सुबह तक ग्रामीणों को घर लौटने की अनुमति नहीं मिली थी और वैन को भी वहां से हटाया नहीं गया था। अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि RAF फेयरफोर्ड पर तैनात उसके कर्मचारी सतर्क हैं। हालांकि, उसने सुरक्षा कारणों से सुरक्षा व्यवस्था के विशेष तरीकों की जानकारी देने से इनकार कर दिया। लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने भी ब्रिटेन में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने और अपनी सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी। ईरान के खिलाफ हमलों में इस्तेमाल होता है एयरबेस RAF फेयरफोर्ड ब्रिटेन का एयरबेस है, जिसका संचालन अमेरिकी वायुसेना करती है। यह लंदन से करीब 160 किलोमीटर पश्चिम में है। मध्य पूर्व में कई दशकों से चल रहे सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिकी सेना ने इसका इस्तेमाल किया है। 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की जंग शुरू होने के बाद इस एयरबेस की भूमिका फिर बढ़ गई। अमेरिकी B-1 और B-52 बमवर्षक विमानों ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियानों के लिए यहां से उड़ान भरी है। ब्रिटेन ने शुरुआत में ईरान पर हमले करने के लिए अपने एयरबेस इस्तेमाल करने की ट्रम्प की मांग ठुकरा दी थी। हालांकि, मार्च में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ईरान की मिसाइलों और उनके लॉन्च ठिकानों के खिलाफ रक्षात्मक कार्रवाई के लिए अमेरिकी सेना को ब्रिटिश एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी। यह फैसला ईरान की ओर से ब्रिटेन के हितों और खाड़ी क्षेत्र में उसके सहयोगियों पर हमलों के बाद लिया गया था। ईरान पहले कह चुका है कि उसके क्षेत्र पर हमले के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई भी सैन्य अड्डा उसके लिए वैध निशाना है।

केरल में भारी बारिश से भूस्खलन और अचानक बाढ़ से छह लोगों की मौत, चार लापता

केरल में भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाओं में छह लोगों की मौत हो गई और चार अन्य लापता हो गए। राज्य के कई हिस्सों, खासकर इडुक्की, कोट्टायम और मलप्पुरम जिलों के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश हुई।

इडुक्की जिले के वट्टावडा में भूस्खलन से दो लोगों की मौत हो गई, जबकि मलप्पुरम में टीके कॉलोनी के पास कोट्टाप्पुझा में अचानक आई बाढ़ की चपेट में आने से दो अन्य लोगों की जान चली गई। कल रात कोट्टायम जिले में बारिश से जुड़ी अलग-अलग घटनाओं में दो और लोगों की मौत हो गई।

कोट्टाप्पुझा में अचानक आई बाढ़ के कारण तीन पर्यटकों और एक स्थानीय महिला समेत चार लोग लापता हो गए हैं; बचाव दल उन्हें खोजने की कोशिशें तेज कर रहे हैं। यह घटना तब हुई जब घने जंगलों वाले इलाकों में भारी बारिश के कारण पानी का स्तर अचानक बढ़ गया।

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भारत मौसम विज्ञान विभाग ने आने वाले कुछ घंटों में पथानामथिट्टा, इडुक्की, एर्नाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड़ और कोझिकोड ज़िलों में मध्यम बारिश और 40 किमी प्रति घंटे तक की तेज़ हवाओं का अनुमान लगाया है।

बारिश तेज़ होने के बाद, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को हर घंटे स्थिति का जायज़ा लेने का निर्देश दिया। आपदा प्रबंधन आयुक्त की अध्यक्षता में इडुक्की और कोट्टायम ज़िला कलेक्टरों के साथ हुई एक आपातकालीन बैठक में स्थिति और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने के उपायों की समीक्षा की गई।

जोखिम वाले इलाकों में एसएमएस के ज़रिए अलर्ट और निर्देश भी जारी किए गए हैं। मलप्पुरम के अमरमबलम में टीके कॉलोनी इलाके में कुछ लोगों के लापता होने की ख़बरों के बाद वहाँ एक विशेष आपदा-प्रतिक्रिया टीम तैनात की गई है।

Pic Credit : UNI