कभी बनाया PM, अब क्यों बालेन शाह के ही खिलाफ सड़कों पर उतर गए नेपाल के Gen Z? जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

Nepal Balen Shah News: नेपाल की राजनीति में युवाओं और Gen-Z के दम पर पारंपरिक पार्टियों को उखाड़ फेंकने वाले प्रधानमंत्री बालेंद्र ‘बालेन’ शाह अब खुद उसी युवा पीढ़ी के निशाने पर आ गए हैं। जिस पीढ़ी ने उन्हें राजनीतिक बदलाव का प्रतीक मानकर सत्ता के शीर्ष पर बैठाया था आज वही उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। नेपाल में हुई आत्मदाह की एक चर्चित घटना, बस्तियों को उजाड़ा जाना और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों ने नेपाल के युवाओं में बालेन शाह सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। रविवार को काठमांडू में सिंहदरबार सचिवालय के बाहर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने भूमिहीन प्रवासियों के खिलाफ सरकार के बेदखली अभियान, कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन और युवा कार्यकर्ताओं के साथ हुए बर्ताव की कड़े शब्दों में आलोचना की।

आपको बता दें कि बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने प्रतिनिधि सभा में करीब दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। सत्ता में आने के बाद से उनके खिलाफ हो रहे ये प्रदर्शन पहली सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। आइए समझते हैं इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी और उन वजहों को जिससे नेपाल का युवा वर्ग अपनी ही चुनी सरकार के खिलाफ खड़ा होता नजर आ रहा है-

Gen-Z के विरोध से शुरू हुआ था बालेन शाह का सफर

पिछले साल सितंबर में नेपाल एक तरह से Gen-Z रिवोल्यूशन का गवाह बना। युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। ये प्रदर्शन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति देश के युवाओं के बढ़ते गुस्से का नतीजा माने गए थे। काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी लोकप्रियता स्थापित कर चुके बालेन शाह इस स्थापित राजनीति से अलग एक नए चेहरे के रूप में उभरे। उनकी पार्टी RSP ने चुनाव जीता और 27 मार्च को बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने 100 सूत्रीय एजेंडे के माध्यम से शासन, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक संस्थानों में बड़े सुधारों का वादा किया था। हालांकि सरकार के करीब 100 दिन पूरे होने के बाद अब उनके युवा समर्थकों के एक बड़े हिस्से का मानना है कि जमीन पर कोई खास बदलाव नहीं आया है और सरकार जनता की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।

सुकुम्बासी (भूमिहीन) बस्तियों को हटाना बना गुस्से की मुख्य वजह

इस ताजा विरोध प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह काठमांडू में नदियों के किनारों से अनौपचारिक बस्तियों को हटाने का सरकारी अभियान है। नेपाल के कानून के मुताबिक भूमिहीन सुकुम्बासी वे लोग हैं जिनके पास देश में कहीं भी जमीन नहीं है और वे संपत्ति हासिल करने में असमर्थ हैं। साल 2022 की एक रिपोर्ट के मुताबिक काठमांडू घाटी में नदी के किनारों पर बनी ऐसी बस्तियों में लगभग 3466 परिवार रह रहे थे। स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक अप्रैल में शुरू हुए इस बेदखली अभियान से करीब 2600 परिवार के 15 हजार लोग प्रभावित हुए।

प्रशासन ने इन बस्तियों को खाली कराने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों को तैनात किया। मानवाधिकार संगठनों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि सरकार ने किसी उचित पुनर्वास योजना के बगैर ही लोगों को बेघर कर दिया। विस्थापित परिवारों में से सिर्फ 325 परिवारों को ही काठमांडू के अस्थायी होल्डिंग सेंटरों में ट्रांसफर किया गया था। बाद में सरकार ने उन्हें भी 6 जुलाई तक इन शेल्टरों को खाली करने का आदेश दे दिया जिसके बाद 60 से अधिक परिवारों ने वहां से जाने से इनकार कर दिया क्योंकि उनके पास जाने के लिए कोई दूसरी जगह नहीं थी। प्रदर्शनकारी अब उचित पुनर्वास, मानवाधिकारों की सुरक्षा और जबरन बेदखली को रोकने की मांग कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार से भड़का माहौल

बाढ़ से प्रभावित विस्थापित परिवारों की मदद के लिए पिछले दिनों जब Gen-Z कार्यकर्ता कीर्तिपुर के एक अस्थायी शेल्टर में पहुंचे तो वहां स्थिति और बिगड़ गई। आरोप है कि पुलिस ने कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया। इसमें एक प्रदर्शनकारी के चेहरे पर गंभीर चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। इस घटना के बाद कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। कोशी प्रांत में भी जेन-जी कार्यकर्ताओं के साथ हुए इस कथित दुर्व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे 26 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार के इस रुख की आलोचना करते हुए उस पर नागरिक स्वतंत्रता को सीमित करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का पालन न करने का आरोप लगाया है।

राइड-हेलिंग ड्राइवर के आत्मदाह ने आग में घी का काम किया

जनता के गुस्से को भड़काने में एक और दुखद घटना ने बड़ी भूमिका निभाई। 25 वर्षीय राइड-हेलिंग ड्राइवर गणेश नेपाली की काठमांडू नगर पालिका पुलिस के साथ हुए विवाद के बाद आत्मदाह करने से मौत हो गई। गणेश नेपाली पासपोर्ट विभाग के बाहर अपनी मोटरसाइकिल खड़ी कर राइड का इंतजार कर रहे थे। कथित तौर पर पुलिस ने पार्किंग उल्लंघन के आरोप में उन पर जुर्माना लगा दिया। बहस होने के बाद उनके वाहन पर व्हील लॉक लगा दिया। इसके बाद गणेश नेपाली ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली। अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद उनके परिवार और समर्थकों ने न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिए। बाद में काठमांडू महानगर और पीड़ित परिवार के बीच एक 9-सूत्रीय समझौता हुआ। इसमें स्वतंत्र जांच समिति के गठन और जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने की बात शामिल है।

बालेन शाह की छवि के लिए बड़ी चुनौती

बालेन शाह ने अपनी राजनीतिक पहचान एक ऐसे आउटसाइडर के रूप में बनाई थी जो नेपाल की पुरानी और स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती दे सकता है। उनके इस उभार को युवा मतदाताओं का जबरदस्त समर्थन मिला था। अब आलोचक उनके प्रशासन पर उन्हीं उम्मीदों से दूर जाने का आरोप लगा रहे हैं जिनकी दम पर वे सत्ता में आए थे। बस्तियों को हटाना, कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां और जनता से कम संवाद इसके प्रमुख उदाहरण बताए जा रहे हैं। यह आंदोलन बालेन शाह की एक सुधारवादी नेता की छवि और उन युवाओं की वास्तविक चिंताओं के बीच बढ़ते फासले को दर्शाता है। ऐसे में एक ऐसा नेता के लिए जिसका उदय ही युवा आंदोलन से हुआ हो उसी पीढ़ी के गुस्से को शांत करना उनके राजनीतिक भविष्य की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।

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Bangkok Pub Fire: थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में रविवार (12 जुलाई) देर रात एक मशहूर लाइव म्यूजिक पब में भीषण आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई। जबकि 63 लोग घायल हो गए। अधिकारियों के मुताबिक यह हाल के वर्षों में देश की सबसे भयावह मनोरंजन स्थल अग्निकांड घटनाओं में से एक है। यह हादसा रविवार देर रात करीब 11:57 बजे बैंकॉक के चातुचक जिले स्थित रोंग बीयर ना लात फ्राओ (Rong Beer Na Lat Phrao) नामक लाइव म्यूजिक पब में हुआ।

दमकलकर्मियों ने करीब आधे घंटे में आग पर काबू पा लिया। लेकिन तब तक पूरा परिसर घने धुएं से भर चुका था और कई लोग अंदर ही फंस गए। प्रधानमंत्री अनुटिन चार्नवीराकुल ने घटनास्थल का दौरा कर 27 शव बरामद होने की पुष्टि की।

वहीं, बैंकॉक प्रशासन के अनुसार 63 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 22 की हालत गंभीर बनी हुई है। बैंकॉक मेट्रोपॉलिटन एडमिनिस्ट्रेशन के आपदा रोकथाम और शमन विभाग के निदेशक सुरियाचाई राविवन के अनुसार, मरने वालों की संख्या 27 पर स्थिर हो गई है।

स्टेज के पास सर्किट ब्रेकर से उठा धुआं, फिर हुआ धमाका

शुरुआती जांच में सामने आया है कि आग स्टेज के पास लगे सर्किट ब्रेकर से उठे धुएं के बाद लगी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले बिजली गुल हुई और फिर जोरदार धमाका हुआ। इसके बाद कुछ ही सेकंड में पूरा पब धुएं से भर गया। एक बैंड सदस्य ने बताया, “धमाके के बाद कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। चारों ओर धुआं ही धुआं था। लोग फर्श पर पड़े मदद की गुहार लगा रहे थे।”

धुएं के कारण नहीं मिल पाया बाहर निकलने का रास्ता

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि घना धुआं इतनी तेजी से फैला कि लोगों को बाहर निकलने का रास्ता तक नहीं मिला। अफरा-तफरी के बीच कई लोग गलत दिशा में भाग गए। लाओस के पर्यटक कान कुटिरात ने बताया कि उन्होंने स्टेज के पास धुआं देखा और कुछ ही पलों में पूरे पब में चीख-पुकार मच गई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “मैं सिर्फ एक व्यक्ति को ही बाहर निकाल सका। मैंने पूरी कोशिश की, मुझे माफ कर देना।”

बाथरूम के पास मिले कई शव

प्रधानमंत्री अनुटिन ने बताया कि आग लगने के बाद अधिकांश लोग घबराकर इमारत के पिछले हिस्से में स्थित बाथरूम की ओर भागे, जहां बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं था। बैंकॉक के गवर्नर चदचार्ट सिट्टिपुंट ने कहा कि कई शव फायर एग्जिट के पास मिले हैं। जांच की जा रही है कि कहीं आपातकालीन निकास अवरुद्ध तो नहीं था। बचाव दल को अंदर रखी मेज-कुर्सियों के कारण भी राहत कार्य में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। अधिकारियों ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा रहा है।