दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए दो भूकंप में अब तक 188 लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। जबकि 1500 से ज्यादा लोग घायल हैं। वेनेजुएला में बुधवार को सन् 1821 के काराबोबो युद्ध की याद में राष्ट्रीय अवकाश था। इसलिए अधिकतर लोग घरों में थे और फीफा वर्ल्ड कप मैच देख रहे थे। इससे मलबे में दबने वालों की संख्या ज्यादा होने की आशंका है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मलबे के अंदर से आवाजें आ रहीं हैं। सरकार ने देर रात बताया कि 39 हजार से अधिक लोग लापता हैं। भूकंप की भयावहता की असल तस्वीर अभी आना बाकी है। अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप से 10 हजार से ज्यादा लोगों के मारे जाने की 44% आशंका है। वहीं, 30% आशंका एक लाख लोगों के जान गंवाने की भी है। इस आपदा से वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को 9.5 लाख करोड़ रुपए के नुकसान की आशंका है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने आपातकाल लगा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोड्रिगेज से बात कर मदद की पेशकश की है। मैप में देखें, भूकंप की लोकेशन 126 साल में सबसे बड़ा भूकंप, देश में इमरजेंसी वेनेजुएला में यह पिछले 126 साल का सबसे बड़ा भूकंप है, इससे पहले 1900 में 7.7 का तीव्रता का भूकंप आया था। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज ने राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया। भूकंप से जुड़ी 3 तस्वीरें… वेनेजुएला भूकंप से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Passport fees hiked: विदेश मंत्रालय (MEA) ने पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी का ऐलान किया है। भारत सरकार द्वारा जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी। संशोधित नियमों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से पासपोर्ट बनवाने और री-इश्यू कराने के लिए अधिक शुल्क देना होगा। 36 पेज के नए या री-इश्यू पासपोर्ट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹2,500 और तत्काल कैटेगरी में ₹5,000 शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं, 60 पेज के पासपोर्ट के लिए सामान्य शुल्क ₹3,500 और तत्काल शुल्क 6,000 रुपये होगा।
रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी
खोए या क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट पर सबसे अधिक बढ़ोतरी की गई है। 36 पेज के पासपोर्ट के रिप्लेसमेंट के लिए सामान्य कैटेगरी में ₹5,000 और तत्काल में ₹7,500 देने होंगे। इसके अलावा पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट और अन्य प्रमाणपत्रों के लिए ₹750 फीस तय किया गया है। नए शुल्क 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होंगे।
नई दरों के तहत, एडल्ट कैटेगरी में अप्लाई करने वाले एडल्ट और 15-18 साल के नाबालिगों को नॉर्मल प्रोसेस के तहत नए 36-पेज के पासपोर्ट या री-इश्यू के लिए 2,500 रुपये देने होंगे। तत्काल कैटेगरी के तहत यह फीस बढ़कर 5,000 रुपये हो जाएगी।
60-पेज की पासपोर्ट
60-पेज की पासपोर्ट बुकलेट के लिए नॉर्मल कैटेगरी में 3,500 रुपये और तत्काल प्रोसेसिंग के तहत 6,000 रुपये की फीस लगेगी। सबसे अधिक बढ़ोतरी खोए या खराब हुए पासपोर्ट को बदलने पर की गई है। 36-पेज का रिप्लेसमेंट पासपोर्ट नॉर्मल प्रोसेसिंग के तहत 5,000 रुपये और तत्काल के तहत 7,500 रुपये का पड़ेगा। 60-पेज के रिप्लेसमेंट पासपोर्ट के लिए फीस नॉर्मल और तत्काल कैटेगरी के तहत क्रमशः 6,000 रुपये और 8,500 रुपये तय की गई है।
खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट
खोए या खराब हुए 36-पेज के पासपोर्ट को बदलने के लिए अप्लाई करने वाले नाबालिगों को नॉर्मल कैटेगरी के तहत 4,250 रुपये और तत्काल के तहत 6,750 रुपये देने होंगे। पासपोर्ट से जुड़ी अन्य सर्विस, जैसे पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट, सरेंडर सर्टिफिकेट, ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन और दूसरे सर्टिफिकेट के लिए भारत में फीस 750 रुपये तय की गई है।
सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी की कीमत
पहचान के सर्टिफिकेट (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 1,000 रुपये होगी। विदेश में दी जाने वाली सेवाओं के लिए इमरजेंसी सर्टिफिकेट की कीमत 15 डॉलर होगी। जबकि पहचान प्रमाण-पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी) की कीमत 50 USD होगी। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन सेवाओं के लिए कोई तत्काल सुविधा उपलब्ध नहीं होगी।
नए फीस स्ट्रक्चर पर एक नजर डालें
1. सामान्य और तत्काल पासपोर्ट (36 और 60 पेज) के रुल्स
36 पेज का नया/री-इश्यू पासपोर्ट (नॉर्मल): अब इसके लिए ₹2,500 देने होंगे।
36 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): तत्काल स्कीम के तहत यह फीस ₹5,000 होगी।
60 पेज का पासपोर्ट (नॉर्मल): इसके लिए ₹3,500 की फीस तय की गई है।
60 पेज का पासपोर्ट (तत्काल): इसके लिए आपको ₹6,000 चुकाने होंगे।
2. पासपोर्ट खोने या खराब होने पर (रिप्लेसमेंट)
36 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): ₹5,000 की फीस लगेगी।
36 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए ₹7,500 देने होंगे।
60 पेज का रिप्लेसमेंट (नॉर्मल): इसकी फीस ₹6,000 तय की गई है।
60 पेज का रिप्लेसमेंट (तत्काल): इसके लिए सबसे ज्यादा ₹8,500 चुकाने होंगे।
3. अन्य जरूरी सेवाएं
पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC) और सरेंडर सर्टिफिकेट जैसी अन्य मिसलेनियस सेवाओं के लिए भारत में ₹750 की फीस लगेगी।

भारत से बाहर आपातकालीन सर्टिफिकेट (Emergency Certificate) के लिए 15 USD और आइडेंटिटी सर्टिफिकेट के लिए 50 USD की फीस तय की गई है।
वैलिडिटी (वैधता) के नियम
भारत सरकार ने साफ किया है कि वयस्कों (Adults) के लिए जारी किए गए पासपोर्ट 10 साल के लिए वैध रहेंगे। वहीं, नाबालिगों (Minors) के लिए जारी पासपोर्ट की वैधता 5 साल या उनके 18 वर्ष के होने तक (जो भी पहले हो) मान्य रहेगी।
दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप ने कुछ ही सेकेंड में लोगों की जिंदगी तहस-नहस कर दी। तेज झटकों से घबराए लोग घरों, दफ्तरों और ऊंची इमारतों से बाहर निकल आए। कई शहरी इलाके मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। सड़कें रोते-बिलखते लोगों से भर गईं। इसके बाद शुरू हुई मलबे से लोगों को निकालने की जद्दोजहद। प्रभावित इलाकों में आपातकालीन टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी हुई हैं। आफ्टरशॉक की आशंका के कारण आम लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। VIDEO में देखें भूकंप के बाद का मंजर…
Emergency in NCERT textbook: भारत में इमरजेंसी लागू होने के पांच दशक से भी ज्यादा समय बाद राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने पहली बार क्लास 9 की किताब में इस ऐतिहासिक टॉपिक को शामिल किया है। इसे ‘बड़ी चुनौतियों में से एक’ के तौर पर पेश किया गया है, क्योंकि उस दौरान ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, इमरजेंसी का जिक्र नई बनी सोशल साइंस की किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में है।
इसमें भारतीय लोकतंत्र की खूबियों और चुनौतियों पर चर्चा करने वाले चैप्टर में इमरजेंसी को शामिल किया गया है। ‘अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ में 1975-77 के आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। NCERT के एक अधिकारी ने कंफर्म किया है कि यह पहली बार है जब क्लास 9 की किताब में इमरजेंसी पर कोई सेक्शन जोड़ा गया है।
स्कूल के सिलेबस में बदलाव
स्कूल के सिलेबस में यह एक अहम बदलाव है, क्योंकि हाल ही में देश ने 1975 में इमरजेंसी की घोषणा के 50 साल पूरे किए हैं। इस सेक्शन में लिखा है, “भारत में लोकतंत्र के सामने एक बड़ी चुनौती तब आई जब 1975-77 में इमरजेंसी लागू की गई। 1970 के दशक की शुरुआत में इंदिरा गांधी की सरकार के प्रति लोगों में असंतोष बढ़ रहा था। बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कुशासन के आरोपों के कारण बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शन हुए।”
इसमें आगे कहा गया है, “जून 1975 में सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय इमरजेंसी लागू की। इस दौरान, ज्यादातर मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए थे। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और एक्टिविस्टों को अरेस्ट किया गया। लोकतांत्रिक संस्थाओं पर भारी दबाव पड़ा और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।”
जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर
किताब में इमरजेंसी के ख़िलाफ आंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। किताब के एक हिस्से में लिखा है, “जयप्रकाश नारायण एक राजनीतिक नेता और समाजवादी विचारक थे और जिन्हें ‘लोक नायक’ के नाम से जाना जाता है। उनके नेतृत्व में चले जन-आंदोलनों ने छात्रों और नागरिकों, खासकर बिहार और गुजरात में लामबंद किया। 1977 में इमरजेंसी हटा ली गई और आम चुनाव हुए, जिससे लोगों को वोट के जरिए अपनी इच्छा जाहिर करने का मौका मिला। सत्ताधारी सरकार की हार ने भारतीय लोकतंत्र की ताकत को दिखाया और लोकतंत्र के महत्व को उजागर किया।”
इमरजेंसी वाला यह सेक्शन लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा है। इमरजेंसी के अलावा, यह किताब लोकतांत्रिक कामकाज के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे कि फेक न्यूज, गलत जानकारी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक नियमों का उल्लंघन, गरीबी, क्षेत्रीयता, सामाजिक भेदभाव और लैंगिक असमानता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा करती है।
‘लोकतंत्र और आप’
इस चैप्टर में “लोकतंत्र और आप” नाम का एक नया सेक्शन भी जोड़ा गया है। NCERT का कहना है कि इसे पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र क्लासरूम में सीखी गई बातों को एक नागरिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदार के तौर पर अपनी भूमिका से जोड़ सकें। इमरजेंसी के अलावा, नई किताब में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संस्थाओं पर भी काफी जोर दिया गया है। इसमें भारत में लोकतांत्रिक कामकाज की शुरुआत शुरुआती ऐतिहासिक दौर से ही बताई गई है और आज के शासन-प्रशासन में उनकी अहमियत को भी समझाती है।
लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका
इस किताब में लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर भी एक खास सेक्शन है, जिसमें मीडिया को “लोकतंत्र का चौथा स्तंभ” बताया गया है। लोगों की चिंताओं को उठाने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने में इसकी भूमिका पर जोर दिया गया है। भारत के लोकतांत्रिक सिस्टम के बड़े पैमाने को दिखाने के लिए, किताब में वोटरों की भागीदारी, वोटिंग से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े तथ्य और आंकड़े शामिल किए गए हैं। इसमें बताया गया है कि 2024 में भारत में 96.8 करोड़ से ज़्यादा रजिस्टर्ड वोटर थे और पूरे देश में फैले वोटिंग सेंटर्स के बड़े नेटवर्क का भी ज़िक्र किया गया है।
यह चैप्टर शासन-प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी दिखाने के लिए जमीनी स्तर के लोकतंत्र के उदाहरणों का भी इस्तेमाल करता है, जैसे गुजरात की एक पंचायत और त्रिपुरा की महिलाओं के अनुकूल पंचायत। महिलाओं के वोटिंग अधिकारों और स्थानीय निकायों में आरक्षण के लिए भी एक अलग सेक्शन दिया गया है।
भारत की नदियों के नाम भी शामिल
ANI के मुताबिक, NCERT ने अपनी भाषा की टेक्स्टबुक्स का नाम भारत की नदियों के नाम पर रखा है। ‘कृष्णा’ नाम कृष्णा नदी के नाम पर रखा गया है। हिंदी टेक्स्टबुक का नाम ‘गंगा’ रखा गया है, इंग्लिश टेक्स्टबुक का नाम ‘कावेरी’ रखा गया है, और उर्दू टेक्स्टबुक का नाम ‘जमुना’ रखा गया है। इसी तरह, कन्नड़ टेक्स्टबुक का नाम ‘कृष्णा’ रखा गया है क्योंकि यह कर्नाटक में बहने वाली मुख्य नदियों में से एक है।
इस टेक्स्टबुक के चैप्टर 6 में बैलेंस्ड डाइट के बारे में बताया गया है। इसे पेज 63 पर एक अलग हेडिंग, ‘बैलेंस्ड डाइट’ के तहत भी कवर किया गया है। पेज 63 पर दी गई तस्वीर में वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन दोनों तरह के खाने की चीज़ें शामिल हैं। टेक्स्टबुक में कहीं भी वेजिटेरियनिज़्म के बारे में बताया या उसे सही नहीं ठहराया गया है, न ही नॉन-वेजिटेरियन खाने का विरोध किया गया है।

