पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी ने मंगलवार को अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। करीब 9 महीने बाद हुई इस मुलाकात के लिए नोरीन सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद जेल पहुंचीं, जिसमें इमरान को परिवार से हर हफ्ते मिलने की अनुमति दी गई है। करीब 15 मिनट चली मुलाकात में नोरीन ने इमरान की सेहत के बारे में पूछा। उन्होंने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की जानकारी भी दी, जिसमें इमरान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने को कहा गया है। दोनों ने कुछ कानूनी मामलों पर भी बात की। इमरान ने अपनी पत्नी बुशरा बीबी से भी मुलाकात की। दोनों करीब 30 से 35 मिनट साथ रहे। इससे पहले बुशरा ने अपनी बेटी मुबाशरा शेख और ननद मेहरुन्निसा से मुलाकात की थी। पुलिस सिर्फ ने नोरीन को मिलने दिया नोरीन अपनी बहनों अलीमा खान और उजमा खान के साथ अडियाला जेल के रास्ते में डहगल चेकपॉइंट पहुंची थीं। पुलिस ने तीनों को रोक लिया, लेकिन बाद में सिर्फ नोरीन को इमरान से मिलने के लिए जेल जाने दिया। करीब 15 मिनट की मुलाकात के बाद नोरीन ने इमरान से मिलने की पुष्टि की। हालांकि, कोर्ट में दिए भरोसे के मुताबिक उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की। कोर्ट ने कहा- परिवार से मिलना अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इमरान के परिवार से हर हफ्ते मुलाकात कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि परिवार से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले 3 साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई मुलाकातों का रिकॉर्ड भी मांगा है। उनके बेटों से हुई बातचीत और फोन कॉल की जानकारी देने को भी कहा गया है। इमरान को अस्पताल भेजने का भी आदेश सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को इलाज और मेडिकल जांच के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने उनके इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है, जिसमें उनके निजी डॉक्टर और बहन डॉ. उजमा खान को शामिल किया जाएगा। अडियाला जेल की मेडिकल रिपोर्ट में इमरान के ब्लड प्रेशर और तनाव को लेकर चिंता जताई गई थी। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… PAK सुप्रीम कोर्ट बोला-इमरान को 2 दिन में अस्पताल भेजें:कहा- बहनों से मिलना उनका अधिकार; 2023 से जेल में हैं पूर्व PM पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को 48 घंटे में शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने उन्हें इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अदियाला जेल में बंद इमरान को इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराने का आदेश दिया है। उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का निर्देश दिया गया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस फैसले का स्वागत किया है।
पीटीआई और इमरान खान का परिवार लंबे समय से उनकी खराब सेहत को लेकर चिंता जताता रहा है। PTI प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है लेकिन उनकी पार्टी चाहती है कि इमरान खान को तब तक अस्पताल में रखा जाए, जब तक डॉक्टर उनकी सेहत को पूरी तरह ठीक न मान लें।
आंखों की रोशनी जाने का खतरा
गौरतलब है कि 73 वर्षीय इमरान खान अगस्त, 2023 से जेल में हैं। उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई है। इमरान इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके वकीलों के मुताबिक जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है। उनके बेटों ने भी पिछले साल उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई थी।
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को आज ही अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। उनकी सेहत की जांच और इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड भी बनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से इमरान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट के बजाय सिर्फ उसकी समरी पेश की गई है। तीन जजों की बेंच इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। इसमें जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे। रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत पर चिंता जताई जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में एंजियोग्राफी कराने की सलाह का जिक्र था। इस पर इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने बताया कि यह जांच जेल के बाहर अस्पताल में कराई जा सकती है। PTI के वकील ने इमरान के शरीर में ब्लड क्लॉट बनने की वजह पता लगाने और उनके निजी डॉक्टरों से जांच कराने की मांग भी की। कोर्ट बोला- इमरान की सेहत पर राजनीति न करें सुप्रीम कोर्ट ने PTI से इमरान की मेडिकल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा। कोर्ट ने मुलाकात के बाद PTI नेताओं और परिवार की ओर से मीडिया में दिए जाने वाले बयानों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अफगान ने कहा कि पार्टी को यह तय करना चाहिए कि इमरान की सेहत को लेकर राजनीति न हो। कोर्ट ने इमरान की बहनों से मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाया। जस्टिस वहीद ने कहा कि बहनों से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले तीन साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी। इमरान के बेटों से उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जानकारी भी देने को कहा गया है। जेल रिपोर्ट में आंखों की बीमारी का जिक्र अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इमरान की दो पेज की मेडिकल रिपोर्ट जमा की थी। इसमें उनकी आंख की बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान का इस बीमारी का इलाज चल रहा है और उनकी प्रभावित आंख की नजर लगभग सामान्य हो गई है। रिपोर्ट में 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 के बीच 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है। 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उन पर कई मामले दर्ज हुए। इनमें सरकारी तोहफों और गैरकानूनी शादी से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इमरान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजने की मांग से जुड़ी याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई तय की है। तीन जजों की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। इसमें जस्टिस शाहिद वाहिद, जस्टिस नईम अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल हैं। कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी संबंधित पक्षों और उनके वकीलों को नोटिस जारी कर दिया है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन पर भ्रष्टाचार से लेकर आतंकवाद तक के कई मामले चल रहे हैं। 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिरने के बाद से उनकी राजनीतिक पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) लगातार उनकी रिहाई और मुलाकात की मांग करती रही है। पाकिस्तानी पत्रकार ने इमरान की मौत का दावा किया था अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने एक वीडियो जारी कर इमरान की मौत की आशंका जाहिर की थी। वजाहत ने कहा कि इमरान की मौत की आशंका सेना के अफसरों की सूचनाओं के आधार पर किया गया एक आकलन था। इमरान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। पाकिस्तानी पत्रकार के दावे के बाद इमरान की बहनों ने भी सवाल उठाया कि उन्हें भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इमरान की पार्टी बोली- सड़कों पर उतरेंगे इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा है कि अगर उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो 20 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी ने कहा कि PTI का केंद्रीय और प्रांतीय लीडरशिप और उसके सहयोगी दल इस फैसले पर साथ हैं। उन्होंने कहा कि मार्च का मकसद सिर्फ इमरान खान की रिहाई नहीं, बल्कि पार्टी संस्थापक तक पहुंच और उनसे मुलाकात सुनिश्चित करना है। नवंबर 2025 में इमरान से मिली थीं बहनें इमरान खान की बहन उज्मा खान ने नवंबर 2025 में अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। जेल से बाहर आकर उज्मा ने बताया था कि भाई इमरान पूरी तरह ठीक हैं। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई थी। उन्होंने कहा था- इमरान खान की सेहत बिल्कुल ठीक है, लेकिन वे बेहद गुस्से में हैं। उन्हें मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है और इस सब के लिए आसिम मुनीर जिम्मेदार हैं। उनकी बाहरी दुनिया तक कोई पहुंच नहीं है। पिछली बार मई 2024 में नजर आए थे इमरान इमरान खान पिछली बार 16 मई 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम चुनाव से 5 दिन पहले मुझे अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया, जिससे मैं चुनाव से दूर रहूं। इमरान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- केजरीवाल को भी भारत में चुनाव के दौरान कैंपेन के लिए जमानत दी गई थी। इमरान पर चल रहे केस के बारे में जानिए… ————– यह खबर भी पढ़ें… लाल किला धमाका अलकायदा ने कराया:UN की रिपोर्ट में दावा, NIA की जांच में भी यही निकला था; 11 मौतें हुई थीं लाल किले के पास हुए धमाके में अलकायदा से जुड़े संगठन का हाथ था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात और उनके इलाज से जुड़ी याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई तय की है। मामले की सुनवाई तीन जजों की बेंच करेगी। कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने सभी संबंधित पक्षों और उनके वकीलों को नोटिस जारी कर दिए हैं। बेंच में जस्टिस शाहिद वाहिद, जस्टिस नईम अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल हैं। इमरान खान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, आतंकवाद समेत कई मामलों की सुनवाई चल रही है। अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए उनकी सरकार गिरने के बाद से उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) लगातार उनकी रिहाई और उनसे मुलाकात की मांग करती रही है। इमरान ने अरविंद केजरीवाल का जिक्र किया था इमरान खान जब आखिरी बार सुनवाई के लिए पेश हुए थे तब उन्होंने आरोप लगाया था कि आम चुनाव से पांच दिन पहले अलग-अलग मामलों में उन्हें दोषी ठहराया गया, ताकि वे चुनाव से बाहर हो जाएं। इमरान ने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी गई, जबकि उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में चुनाव के दौरान सभी नेताओं के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। पाकिस्तानी पत्रकार ने जताई थी मौत की आशंका अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने इस हफ्ते एक वीडियो जारी कर इमरान खान की मौत की आशंका जताई थी। इस दावे के बाद इमरान खान की बहनों ने भी सवाल उठाए थे कि उन्हें अपने भाई से मिलने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। बाद में वजाहत ने सफाई दी कि इमरान खान की मौत की खबर की उन्होंने पुष्टि नहीं की थी। यह सिर्फ सेना के कुछ अधिकारियों से मिली जानकारी के आधार पर लगाया गया उनका अनुमान था। इमरान की पार्टी ने दी आंदोलन की चेतावनी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा है कि यदि इमरान खान से मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई तो वह बड़े पैमाने पर आंदोलन करेगी। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च का भी ऐलान किया है। पार्टी का दावा है कि जरूरत पड़ने पर 20 लाख से ज्यादा समर्थक सड़कों पर उतर सकते हैं। खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहैल अफरीदी ने कहा कि PTI की केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व इस फैसले के साथ है। उनके मुताबिक, लॉन्ग मार्च का मकसद सिर्फ इमरान खान की रिहाई नहीं, बल्कि उनसे मुलाकात का अधिकार सुनिश्चित कराना भी है। नवंबर 2025 में बहनों को मिलने की मिली थी अनुमति इमरान खान की बहन उज्मा खान ने नवंबर 2025 में अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की थी। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने कहा था कि इमरान खान शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ हैं, लेकिन उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उज्मा ने आरोप लगाया था कि इमरान की बाहरी दुनिया तक पहुंच लगभग खत्म कर दी गई है और इसके लिए उन्होंने सेना प्रमुख आसिम मुनीर को जिम्मेदार ठहराया था। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान इमरान खान अगस्त 2023 से अडियाला जेल में बंद हैं। उनके खिलाफ कई मामलों में मुकदमे चल रहे हैं। उनकी गिरफ्तारी के बाद से PTI लगातार उनकी रिहाई, नियमित मुलाकात और बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग करती रही है। इमरान पर चल रहे केस के बारे में जानिए… ————– यह खबर भी पढ़ें… लाल किला धमाका अलकायदा ने कराया:UN की रिपोर्ट में दावा, NIA की जांच में भी यही निकला था; 11 मौतें हुई थीं लाल किले के पास हुए धमाके में अलकायदा से जुड़े संगठन का हाथ था। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की 38वीं रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की मौत की आशंका जताने वाला पाकिस्तानी पत्रकार दावे से पलट गया है। अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान ने मंगलवार रात 11 बजे एक वीडियो जारी कर इमरान की मौत की आशंका जाहिर की थी। वजाहत ने बुधवार दोपहर कहा कि इमरान की मौत की आशंका सेना के अफसरों की सूचनाओं के आधार पर किया गया एक आकलन था। इमरान अगस्त 2023 से रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद हैं। पाकिस्तानी पत्रकार के दावे के बाद इमरान की बहनों ने भी सवाल उठाया कि उन्हें भाई से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने चेतावनी दी है कि अगर इमरान से मिलने नहीं दिया गया, तो समर्थक सड़कों पर उतर जाएंगे। पाकिस्तानी पत्रकार का वीडियो देखिए… पत्रकार वजाहत सईद खान ने इमरान की मौत का दावा करने वाले वीडियो में कहा था- रावलपिंडी स्थित सेना मुख्यालय के कम से कम तीन वरिष्ठ अधिकारियों को डर है कि इमरान खान अब जिंदा नहीं हैं। बाद में उन्होंने कहा कि यह कोई पक्की खबर नहीं, बल्कि केवल सेना के अंदर की आशंकाओं के आधार पर एक आकलन था। इमरान की पार्टी बोली- सड़कों पर उतरेंगे पत्रकार के दावे के बाद इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने कहा है कि अगर उनसे मिलने की अनुमति नहीं दी गई, तो 20 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च का ऐलान किया है। नवंबर 2025 में इमरान से मिली थीं बहनें इमरान खान की बहन उज्मा खान ने नवंबर 2025 में अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। जेल से बाहर आकर उज्मा ने बताया था कि भाई इमरान पूरी तरह ठीक हैं। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक मुलाकात हुई थी।
उन्होंने कहा था- इमरान खान की सेहत बिल्कुल ठीक है, लेकिन वे बेहद गुस्से में हैं। उन्हें मेंटली टॉर्चर किया जा रहा है और इस सब के लिए आसिम मुनीर जिम्मेदार हैं। उनकी बाहरी दुनिया तक कोई पहुंच नहीं है। प्रशासन ने नहीं मिलने दिया तो फैली थी अफवाह नवंबर 2025 की शुरुआत में ही इमरान खान से मिलने उनके समर्थक और परिवार वाले पहुंचे थे, लेकिन जेल प्रशासन ने उन्हें इजाजत नहीं दी। इसके बाद यह अफवाह फैल गई थी कि इमरान की मौत हो गई है और पाकिस्तान सरकार इसे छिपा रही है। इसके बाद पाकिस्तान में बड़ा प्रदर्शन किया गया था, जिसे देखते हुए रावलपिंडी से लेकर इस्लामाबाद तक हाई अलर्ट जारी कर दिया गया था। पिछली बार मई 2024 में नजर आए थे इमरान इमरान खान पिछली बार 16 मई 2024 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए थे। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम चुनाव से 5 दिन पहले मुझे अलग-अलग मामलों में दोषी ठहराया गया, जिससे मैं चुनाव से दूर रहूं। इमरान ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा- केजरीवाल को भी भारत में चुनाव के दौरान कैंपेन के लिए जमानत दी गई थी। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। भ्रष्टाचार मामले में उन्हें 14 साल की सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें सरकारी गिफ्ट (तोशाखाना केस) बेचने और सरकारी सीक्रेट लीक करने जैसे आरोप शामिल हैं। इमरान पर आरोप है कि उन्होंने अल-कादिर ट्रस्ट के लिए पाकिस्तान सरकार की अरबों रुपए की जमीन को सस्ते में बेच दिया था। इस मामले में इमरान को 9 मई 2023 को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पूरे मुल्क में फौज के कई अहम ठिकानों पर हमले हुए थे। पाकिस्तान के नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने अल-कादिर ट्रस्ट केस में दिसंबर 2023 में इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी और अन्य 6 व्यक्तियों पर मामला दर्ज किया था। हालांकि जब इमरान के खिलाफ ये केस दर्ज हुआ, उससे पहले से ही वे तोशाखाना केस में अडियाला जेल में बंद थे। 50 अरब का स्कैम है अल-कादिर ट्रस्ट केस
—————– यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा:हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किये में ईरान के डर से प्लेन बदला था। उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था। पूरी खबर पढ़ें…
Donald Trump Statement: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को उन खबरों को खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ महीनों के टकराव के बाद अमेरिका के पास अहम मिसाइलों का स्टॉक कम हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सेना के पास हथियारों की पर्याप्त आपूर्ति है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि कुछ हथियारों का स्टॉक “थोड़ा कम” हो गया है।
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि पेंटागन (अमेरिकी रक्षा विभाग) के पास अभी भी हथियारों का पर्याप्त भंडार है। उन्होंने उन मीडिया रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया जिनमें कहा गया था कि ईरान के साथ पांच महीने के संघर्ष के दौरान देश ने अपनी सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलों का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल कर लिया है।
ट्रंप ने हथियारों की कमी के दावों को किया खारिज
हथियारों की व्यापक कमी के दावों को खारिज करते हुए, उन्होंने माना कि कुछ तरह के हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, “कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”
हालांकि, उन्होंने बड़े स्तर पर हथियारों की कमी की खबरों को खारिज करते हुए माना कि हथियारों की सप्लाई दूसरों की तुलना में कम थी। उन्होंने कहा, कुछ मामलों में सप्लाई थोड़ी कम है।”
उन्होंने कहा कि अमेरिका “बहुत अच्छी स्थिति” में है और जaर देकर कहा, “हमारे पास सचमुच भारी मात्रा में गोला-बारूद है।”
“We have literally massive amounts of ammunition.”
President Trump pushed back on reports that the U.S. was running low on missile stockpiles after months of conflict with Iran, insisting the military remains fully supplied.
Speaking to reporters, Trump said the U.S. is “in… pic.twitter.com/W2pXecgJK1
— Fox News (@FoxNews) August 6, 2026
रक्षा कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि रक्षा कंपनियां अपना प्रोडक्शन बढ़ा रही हैं, जिसमें पैट्रियट और टॉमहॉक मिसाइलें बनाने के लिए नई सुविधाएं तैयार करना भी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम हमेशा और ज्यादा चाहते हैं। हमारे पास और ज्याद होना चाहिए।”
वहीं, कई अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ईरान के साथ चले युद्ध के दौरान पेंटागन ने अपनी वैश्विक मिसाइल भंडार का एक बड़ा हिस्सा इस्तेमाल किया है। इनमें बेहद सटीक मारक क्षमता वाली लंबी दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं।
ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा
ट्रंप ने भरोसा जताया कि ईरान के साथ चल रहा युद्ध जल्द ही खत्म हो जाएगा।
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि यह बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। मुझे नहीं लगता कि वे इसे ज़्यादा देर तक खींच पाएंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि वे तेहरान के साथ बातचीत में शामिल हैं। “सब ठीक चल रहा है। जल्द ही कोई समझौता हो सकता है।”
यह भी पढ़ें: इमरान खान के बेटों ने 7 महीने से नहीं देखा अपने पिता को, पाकिस्तान जेल में क्या हुआ पूर्व PM के साथ? अब मिला ये जवाब
पाकिस्तान के जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटों ने एक बार फिर अपने पिता की सेहत को लेकर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने पिछले सात महीनों से परिवार के सदस्यों, वकीलों और डॉक्टरों को उनसे मिलने नहीं दिया है।
बता दें कि इमरान खान की गिरफ्तारी के तीन साल पूरे होने पर CNN से बात करते हुए कासिम खान और सुलेमान ईसा खान ने कहा कि उन्हें अपने पिता की हालत के बारे में कोई भरोसेमंद जानकारी नहीं मिली है, क्योंकि उनसे मिलने-जुलने पर बहुत ज्यादा पाबंदियां लगा दी गई हैं।
दोनों भाइयों ने कहा, “हमें कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है क्योंकि पिछले सात महीनों से उनके परिवार, डॉक्टरों और वकीलों को उनसे मिलने की इजाजत नहीं दी गई है।”
इमरान खान के बेटों का यह बयान ऐसे समय आया है, जब खान की पार्टी ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ’ (PTI) के हजारों समर्थकों ने पूरे पाकिस्तान में प्रदर्शन करके पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की रिहाई की मांग की।
इमरान खान, जो 2018 से 2022 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटाए जाने तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे, 2023 से जेल में हैं। उन्हें भ्रष्टाचार और सरकारी राज जाहिर करने समेत कई मामलों में दोषी ठहराया गया है।
खान और उनके समर्थकों का हमेशा से यह कहना रहा है कि उन पर चल रहे मामले राजनीतिक मकसद से प्रेरित हैं और इनका मकसद उन्हें दोबारा सत्ता में आने से रोकना है।
वहीं, पद से हटाए जाने के बाद, खान ने देश भर में कई रैलियां कीं। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार पर आरोप लगाया कि उसने उन्हें पद से हटाने के लिए पाकिस्तान की सेना और अमेरिका के साथ मिलकर काम किया है। हालांकि, पाकिस्तानी सेना और वॉशिंगटन, दोनों ने ही इन आरोपों से इनकार किया है।
बाद में, पाकिस्तानी सरकार ने PTI नेताओं और समर्थकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की और पार्टी को 2024 के आम चुनाव लड़ने से रोक दिया।
बेटों ने कहा- पाकिस्तान जाने की कोशिशें नाकाम रहीं
कासिम और सुलेमान, जो 2004 में इमरान खान और उनकी मां जेमिमा गोल्डस्मिथ के अलग होने के बाद से यूनाइटेड किंगडम में रह रहे हैं, ने कहा कि उन्होंने अपने पिता से मिलने के लिए पाकिस्तान जाने की कई बार कोशिश की।
CNN के मुताबिक, भाइयों का दावा है कि जब भी उन्होंने खान की जेल की सजा के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की, तो पाकिस्तानी अधिकारियों ने वीजा में देरी करके और प्रशासनिक अड़चनें पैदा करके उनके लिए वहां जाना और मुश्किल बना दिया।
कासिम ने कहा, “हम कोशिश कर रहे हैं, हम जाना चाहते हैं, लेकिन कुछ हो नहीं पा रहा है।”
उन्होंने आगे कहा “ऐसा कोई कारण नहीं है कि हमें वीजा न मिले।”
वहीं दूसरी तरफ, पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने CNN को दिए एक बयान में उन आरोपों को खारिज कर दिया। मंत्रालय ने कहा कि दोनों भाइयों के पास ‘ओवरसीज पाकिस्तानियों’ के लिए नेशनल आइडेंटिटी कार्ड हैं, जिनकी वजह से उन्हें बिना वीजा के पाकिस्तान में एंट्री मिलनी चाहिए।
मंत्रालय ने उनके दावों को “गुमराह करने वाला” बताया और कहा कि ऐसा लगता है कि वे एक प्रशासनिक प्रक्रिया को राजनीतिक फायदा उठाने के मुद्दे में बदलने की कोशिश कर रहे हैं।
हालांकि, कासिम और सुलेमान ने CNN को बताया कि उनके आइडेंटिटी कार्ड की मियाद खत्म हो गई थी और उन्हें रिन्यू नहीं कराया गया था। मंत्रालय ने इस दावे पर सीधे तौर पर कोई बात नहीं की।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने पहुंच की मांग की
इस मामले ने एमनेस्टी इंटरनेशनल का भी ध्यान खींचा है। इस हफ्ते जारी एक बयान में, मानवाधिकार संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे “बिना किसी शर्त के इमरान खान और बुशरा बीबी खान को अपने परिवार और वकीलों से मिलने का अधिकार बहाल करें।“
एमनेस्टी ने आगे कहा कि दोनों को “बेहतर इलाज की सुविधा मिलनी चाहिए और उन्हें अकेले रखने (solitary confinement) की व्यवस्था, जो गैर-कानूनी है, तुरंत खत्म की जानी चाहिए।“
पाकिस्तान सरकार ने आरोपों को खारिज किया
वहीं, पाकिस्तान सरकार ने इमरान खान को अलग-थलग रखने या उन्हें चिकित्सा सुविधा नहीं देने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
CNN को दिए एक बयान में सरकार ने कहा कि वह “साफ तौर पर इस दावे को खारिज करती है कि मिस्टर इमरान खान नियाजी को सात महीने तक संचार-संपर्क से दूर रखा गया या उन्हें अपने परिवार, वकीलों और डॉक्टरों से मिलने नहीं दिया गया।” सरकार ने यह भी कहा कि “सबूत बताते हैं कि (कैदी को) बार-बार और पर्याप्त रूप से मिलने-जुलने की सुविधा दी गई है।”
सरकार ने कहा कि खान ने हाल ही में 21 मार्च, 2026 को अपने एक बेटे से बात की थी। इससे पता चलता है कि बातचीत बंद नहीं की गई थी, बल्कि इसे “पाकिस्तान जेल नियमों, लागू अदालती आदेशों, मंजूर शेड्यूल और हाई-प्रोफाइल कैदी के लिए सुरक्षा जरूरतों के तहत रेगुलेट” किया गया था।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि खान की मेडिकल हालत “ठीक और स्थिर” बनी हुई है और इसमें “कोई गंभीर या अनियंत्रित गिरावट” नहीं आई है।
सरकार के बयान के मुताबिक, इमरान खान को डॉक्टरों की सलाह, जेल नियमों और अदालत के निर्देशों के अनुसार इलाज, दवाएं और नियमित मेडिकल जांच की सुविधा दी जा रही है।
पाकिस्तान की सरकार ने जेल की खराब स्थितियों के दावों को भी खारिज कर दिया। उसने कहा कि खान को “लगभग 30 से 35 कैदियों के लिए बनाए गए एक खास सात-सेल वाले कंपाउंड” में रखा गया है।
सरकार के बयान के अनुसार, इस परिसर में “57 x 14 फीट का एक गलियारा और 35 x 37 फीट का एक लॉन” शामिल है। इसके अलावा वहां इमरान खान के लिए बिस्तर, गद्दा, चार तकिए, कंबल, टेबल, कुर्सी, शौचालय की सुविधा और व्यायाम के उपकरण भी उपलब्ध हैं।
सरकार ने आगे कहा कि ये व्यवस्थाएं उस तस्वीर से बिल्कुल अलग हैं, जिसमें सार्वजनिक रूप से इमरान खान को अलग-थलग रखने, उपेक्षा करने या सजा के तौर पर सुविधाओं से वंचित करने की बात कही जा रही है।
बेटे खान की हालत को लेकर परेशान
सरकार द्वारा भरोसा दिलाने के बावजूद, कासिम ने कहा कि परिवार बहुत परेशान है क्योंकि उन्हें खान की सेहत के बारे में कोई स्वतंत्र जानकारी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, “वे हमें किसी भी तरह की हेल्थ रिपोर्ट दिखाने से इनकार कर रहे हैं। इसलिए हो सकता है कि तब से उनकी सेहत काफी खराब हो गई हो।”
भाइयों ने इस बात को भी खारिज कर दिया कि उनके पिता सरकार के साथ कोई राजनीतिक समझौता कर सकते हैं।
सुलेमान ने कहा कि खान “ऐसा कोई समझौता नहीं करेंगे जिससे दूसरे राजनीतिक कैदी वहीं रह जाएं… जब तक कि उनके लिए भी कोई समाधान न निकल आए।”
कासिम को भी ऐसी संभावना कम ही लगी, हालांकि उन्होंने कहा कि “कुछ कहना मुश्किल है।”
कासिम ने अंत में अपनी बात खत्म करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान में हो रही घटनाओं पर ध्यान देने की अपील की।
उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन यह सबसे निराशाजनक बातों में से एक है। सिर्फ बेटों के तौर पर नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए, उन 35 करोड़ लोगों के लिए जिन्होंने उन्हें वोट दिया है, जो उनका समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि वे देश का नेतृत्व करें। लेकिन इसके बजाय, उन्हें दरकिनार किया जा रहा है और जिस व्यक्ति को वे सत्ता में देखना चाहते हैं, वह बिना किसी ठोस वजह के जेल में है।”
पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगान तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट… बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाकिस्तानी सेना कितने विद्रोहियों को मार रही है या पकड़ रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार यहां पुलिस थाने चला पा रही है? क्या हाईवे सुरक्षित हैं? क्या बाजार खुल रहे हैं? और क्या लोग बिना डर के एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। गुस्सा… खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर…यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगाेरा और मर्दन में ‘लोया जिरगा’ के जरिए ही कानून चलता है। ये जिरगा असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका संरक्षक है। अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) संगठन को अपने ठिकानों में पनाह देता है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में TTP के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही TTP ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब TTP काबिज है। आए दिन TTP के हमलों के कारण स्कूल और काॅलेज बंद रहते हैं। पंजाब और सिंध के मूल निवासी कर्मचारी खैबर में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते हैं। खौफ… हमलों से पाक की 50 फौजी चौकियां खाली खैबर पख्तूनख्वा में TTP के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल TTP फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है। स्वात में रहने वाले सगीर (22) का कहना है कि खैबर के लोग अपनी हुकूमत चाहते हैं। पाक सरकारों ने यहां पंजाबियों और सिंध के रिटायर्ड फौजियों को मुफ्त जमीन देकर बसाने की कोशिशें भी कीं। ये हमारी कबिलाई पहचान को मिटाने की साजिश थी। एक रणनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि TTP और इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसकेपी जैसे संगठन हमलों में आपसी सहयोग कर रहे हैं। इन दोनों संगठनों की ताकत से अब खैबर में पाक सरकार के पांव उखड़ रहे हैं।
पाकिस्तान के चार सूबे हैं। इनमें से बलूचिस्तान सूबे में अलगाववादी बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने विद्रोह का झंडा बुलंद किया हुआ है। खैबर पख्तूनख्वा सूबे में अफगान तालिबान का दबदबा है। आए दिन तालिबान के हमलों से यहां पाक फौज के पांव उखड़ रहे हैं। पढ़िए बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से भास्कर संवाददाता सिकंदर सूरी की ग्राउंड रिपोर्ट… बलूचिस्तान- PAK के हाथ से 70% क्षेत्र गया बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा सूबा है। यह देश के करीब 45% हिस्से में फैला है और इसकी सीमा ईरान से लगती है। दूर-दूर तक रेगिस्तान और वीरान पहाड़ हैं। लेकिन इन दिनों इस वीराने में सबसे ज्यादा गूंज गोलियों की सुनाई देती है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) के लड़ाके अलग देश की मांग को लेकर लड़ रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि बलूच लड़ाकों और पश्तून (पठान) विद्रोहियों का सूबे के करीब 70% हिस्से पर कब्जा है। अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि पाकिस्तानी सेना कितने विद्रोहियों को मार रही है या पकड़ रही है। असली सवाल यह है कि क्या सरकार यहां पुलिस थाने चला पा रही है? क्या हाईवे सुरक्षित हैं? क्या बाजार खुल रहे हैं? और क्या लोग बिना डर के एक शहर से दूसरे शहर जा सकते हैं? बलूचिस्तान के कई इलाकों में हथियारबंद लड़ाके बेखौफ होकर क्वेटा, खुजदार और मस्तुंग जैसे शहरों में घुसते हैं। पुलिस थानों और सरकारी दफ्तरों पर हमले करते हैं। कई जगह BLA के लड़ाके और पश्तून गुट सड़कों पर अपने नाके लगा लेते हैं। वहां से गुजरने वाले वाहनों की तलाशी लेते हैं और खुलेआम वसूली करते हैं। यही पैसा BLA के फंड में जाता है। गुस्सा… खनिज और पोर्ट पर चीन-अमेरिका का कब्जा है बलूचिस्तान को पाकिस्तान के खनिजों की खदान भी कहते हैं। बात शुरू की तो खुजदार शहर के युवक मोमिन का पाक सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। मोमिन कहते हैं यहां के ग्वादर पोर्ट पर चीन का कब्जा है। चीन ने सीपैक के नाम पर यहां लगभग 3 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया है। ग्वादर पोर्ट पर चीन की फिशिंग बोट्स का कब्जा है। स्थानीय बलूच मछुआरों को चीनी बोट्स खदेड़ देती हैं। इनकी बोट्स बड़ी और ज्यादा पावर वाली होती हैं। ज्यादातर बलूच मछुआरों के पास अब भी पालदार नौकाएं हैं। बलूच बेरोजगार हो रहे हैं। 55 साल के असलम का कहना है कि यहां के रेयर अर्थ मिनरल पर अमेरिका का कब्जा है। पाक आर्मी चीफ मुनीर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने मिनरल की नुमाइश करते हैं। इस खजाने पर केवल बलूचों का हक है। खैबर…यहां तालिबानी शरिया सरकार काबिज
खैबर पख्तूनख्वा पाकिस्तान का फ्रंटियर यानी सरहदी इलाका है। डूरंड लाइन पाक और अफगानिस्तान को अलग करती है। अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के पांच साल में खैबर के अधिकांश इलाके में इन्हीं का दबदबा है। खैबर में पाक सरकार के कानून नहीं तालिबान का शरिया चलता है। दरअसल, इस इलाके में विभाजन के समय से ही कबिलाई व्यवस्था लागू रही है। स्वात, सैदू, मिंगाेरा और मर्दन में ‘लोया जिरगा’ के जरिए ही कानून चलता है। ये जिरगा असल में शरिया कानून को लागू करती है। अफगान तालिबान इसका संरक्षक है। अफगान तालिबान तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) संगठन को अपने ठिकानों में पनाह देता है। इमरान खान की सरकार ने 2021 में TTP के साथ सुलह की कोशिश की, लेकिन इमरान की गद्दी जाते ही TTP ने खैबर में अपने दबदबे को और बढ़ा लिया है। खैबर के वजीरिस्तान में पाकिस्तानी सेना कई सैन्य ऑपरेशन कर चुकी है, लेकिन यहां अब TTP काबिज है। आए दिन TTP के हमलों के कारण स्कूल और काॅलेज बंद रहते हैं। पंजाब और सिंध के मूल निवासी कर्मचारी खैबर में अपनी पोस्टिंग नहीं चाहते हैं। खौफ… हमलों से पाक की 50 फौजी चौकियां खाली खैबर पख्तूनख्वा में TTP के आए दिन होने वाले हमलों से पाक सेना में खौफ है। इस साल TTP फौज पर 145 से ज्यादा हमले कर चुकी है, इनमें 48 सैनिक मारे गए। खैबर में डूरंड लाइन पर अभी पाक सेना की 50 फौजी चौकियां खाली हैं। 22 पोस्ट पर ही पाक फौज तैनात है। स्वात में रहने वाले सगीर (22) का कहना है कि खैबर के लोग अपनी हुकूमत चाहते हैं। पाक सरकारों ने यहां पंजाबियों और सिंध के रिटायर्ड फौजियों को मुफ्त जमीन देकर बसाने की कोशिशें भी कीं। ये हमारी कबिलाई पहचान को मिटाने की साजिश थी। एक रणनीतिक विशेषज्ञ का कहना है कि TTP और इस्लामिक स्टेट खुरासान यानी आईएसकेपी जैसे संगठन हमलों में आपसी सहयोग कर रहे हैं। इन दोनों संगठनों की ताकत से अब खैबर में पाक सरकार के पांव उखड़ रहे हैं।


