DDA का मास्टरप्लान: दिल्ली में बनेंगे 12 लाख नए घर, 600 किमी नई सड़कों के साथ UER-2 पर लगेगा विकास का पंख

Delhi Master Plan: दिल्ली में घरों की बढ़ती मांग को पूरा करने और राजधानी के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक स्वरूप देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अपनी बहुप्रतीक्षित लैंड पूलिंग पॉलिसी पर काम तेज कर दिया है। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के मार्गदर्शन में डीडीए ने दिल्ली के देहाती इलाकों और गांवों में महीनेभर का विशेष जागरूकता और संवाद अभियान शुरू किया है।

इस अभियान के तहत किसानों, स्थानीय जमीन मालिकों और हितधारकों को लैंड पूलिंग के विकास मॉडल, वित्तीय फायदों और इसमें शामिल होने की आसान प्रक्रिया से अवगत कराया जा रहा है।

200 वर्ग किमी में फैलेगा नया शहर, बनेंगे 12 लाख घर

डीडीए के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, लैंड पूलिंग नीति के तहत राजधानी के बाहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 200 वर्ग किलोमीटर का बड़ा भूखंड विकसित किया जाएगा।

इस नीति के जरिए लगभग 12 लाख नए सुनियोजित घर तैयार करने की योजना है। इससे न केवल मध्यम और निम्न आय वर्ग को किफायती मकान मिलेंगे, बल्कि अवैध कॉलोनियों के बनने पर भी स्थायी रोक लगेगी।

मुख्य बिंदु विस्तृत जानकारी
कुल विकास क्षेत्रलगभग 200 वर्ग किलोमीटर
प्रस्तावित नए घरकरीब 12 लाख रेजिडेंशियल यूनिट्स
सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर600 किमी से अधिक का नया रोड नेटवर्क
प्रमुख कॉरिडोरअर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) के दोनों तरफ हाई डेंसिटी कॉरिडोर
विकास मॉडलटाउन प्लानिंग स्कीम्स (TPS) व पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप

इन्फ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट अप्रोच: 600 किमी से चौड़ी सड़कों का जाल

दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 के तहत ‘इन्फ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट’ नीति अपनाई जा रही है। यानी पहले सड़कों, सीवर, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का विकास होगा, उसके बाद ही आवासीय और व्यावसायिक सोसाइटियों का निर्माण शुरू किया जाएगा।

इस योजना में 600 किलोमीटर से अधिक अतिरिक्त सड़क नेटवर्क विकसित किया जाएगा। मुख्य फीडर और मुख्य सड़कों की राइट ऑफ वे (RoW) चौड़ाई 30 मीटर या उससे अधिक रखी जाएगी। कम से कम 20 हेक्टेयर जमीन एकत्र होने पर टाउन प्लानिंग स्कीम लागू कर निर्माण प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

UER-2 के किनारे बनेगा 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर

अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) दिल्ली की तीसरी रिंग रोड के रूप में जानी जाती है। मास्टर प्लान-2047 के तहत UER-2 के दोनों तरफ 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित करने का प्रावधान किया गया है।

Delhi Paster Plan: UER-2 के किनारे बनेगा 250 मीटर चौड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) का रूट मैप

400 तक FAR: इस कॉरिडोर के तहत उच्च फ्लोर एरिया रेशियो (FAR 400 तक) दिया जाएगा, जिससे गगनचुंबी इमारतें बनाई जा सकेंगी।

मल्टी-पर्पज यूज: यहां किफायती और प्रीमियम आवासों के साथ-साथ कमर्शियल सेंटर, लॉजिस्टिक्स हब, वेयरहाउसिंग और रोजगार सृजन वाले उद्योग स्थापित होंगे।

पहला नोटिफाइड सेक्टर: जोन P-II के अंतर्गत गढ़ी खसरो और इब्राहिमपुर गांव में स्थित सेक्टर 8B को इस मॉडल के कार्यान्वयन के लिए पहला तैयार सेक्टर अधिसूचित कर दिया गया है।

जमीन मालिकों को क्या होगा फायदा?

लैंड पूलिंग नीति में जमीन अधिग्रहण के बजाय साझेदारी मॉडल काम करता है। किसान या जमीन मालिक अपनी जमीन डीडीए को पूलिंग के लिए सौंपते हैं। डीडीए पूरी जमीन का टाउन प्लान तैयार कर सड़कों, पार्क और सार्वजनिक सुविधाओं का निर्माण करता है और कुल विकसित जमीन का एक बड़ा तय हिस्सा (लगभग 60%) विकसित प्लॉट के रूप में वापस मालिक को सौंप देता है।

इससे जमीन मालिकों की संपत्ति की बाजार कीमत कई गुना बढ़ जाती है और वे खुद बिल्डर या डेवलपर के साथ साझेदारी कर प्रोजेक्ट बना सकते हैं।

रांची के दुबलिया में बनेगा झारखंड का सबसे बड़ा मॉल! 7.36 लाख वर्गफुट में फैली होगी यह ग्रीन शॉपिंग डेस्टिनेशन

नगर विकास और आवास विभाग ने रिंग रोड के नजदीक दुबलिया में प्रस्तावित इंटर स्टेट बस टर्मिनल (ISBT) के साथ झारखंड का सबसे बड़ा मॉल बनाने की संकल्पना योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्रधान सचिव सुनील कुमार बताते हैं इस मॉल की खासियत यहां मिल रहा ओपन स्पेस और हरियाली होगी। लोग प्राकृतिक के बीच में शॉपिंग का आनंद ले पाएंगे।

शहर के ट्रैफिक और भीड़ भाड़ से दूर यह मॉल 5.59 लाख वर्गफुट (बेसमेंट सहित 7.36 लाख वर्गफुट), बेसमेंट, दो स्तर, पार्किंग व अन्य कई सुविधाओं से लैस है। हालांकि, अभी इसके लिए फाइनल बजट का ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन बस कुछ ही दिन में टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। बेंगलुरु की कंपनी ने अपना प्रेजेंटेशन भी पेश किया है।

बड़े मॉल के साथ ओपन स्पेस होगा खास

प्रधान सचिव सुनील कुमार बताते हैं कि यह मॉल काफी बड़ा है। साथ ही यहां पर ओपन स्पेस होगा, जहां तरह-तरह की कलाकृति, पेंटिंग्स, हमारा कल्चर और हरियाली भी होगी। इसमें बच्चों को खेलने कूदने के लिए काफी खुली जगह मिलेगी और यह सारी चीजें देखने को मिलेंगी। मॉल का मतलब होता है लग्जरी, पर यहां पर लग्जरी के साथ हरियाली के बीच सुकून भी होगा।

मॉल के ग्राउंड फ्लोर में करीब 28 दुकानें होंगी, 7 एट्रियम, ग्लास पैनल डिजाइन, प्रथम से तृतीय तल में प्रत्येक तल पर 29 दुकानें, 7 एट्रियम होगा। वहीं, चौथे तल पर 27 दुकानें, 7 एट्रियम होंगे। पांचवां तल 18 दुकानें, 7 एट्रियम, एक रेस्टोरेंट के लिए होगा। छठे तल पर 11 दुकानें, 7 एट्रियम, 4 मल्टीप्लेक्स, 2 रेस्टोरेंट होंगे। इस मॉल में फूड कोर्ट, एक्जीबिशन एरिया, इवेंट जोन, आधुनिक सुरक्षा सिस्टम भी होगा।

झारखंड का सबसे बड़ा मॉल होगा

करोड़ों की लागत से बनने वाला यह झारखंड का सबसे बड़ा मॉल होगा। यहां पर हर उम्र के लोगों को ध्यान में रखते हुए दुकान से लेकर अन्य सुविधाएं होंगी। सुनील कुमार बताते हैं, भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर लोग यहां पर खुद को रिफ्रेश कर पाएंगे। आने वाले 2 सालों में आपको काफी हद तक काम धरातल पर होते हुए नजर आयेगा।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

वाराणसी में बनेंगे बड़े ब्रांड्स के कपड़े, मिर्जामुराद में ₹100 करोड़ की लागत से तैयार हुई अरविंद मिल्स की यूनिट, यूं मिल रहा रोजगार

वाराणसी में बनेंगे बड़े ब्रांड्स के कपड़े, मिर्जामुराद में ₹100 करोड़ की लागत से तैयार हुई अरविंद मिल्स की यूनिट, यूं मिल रहा रोजगार

यूपी के वाराणसी में जाकी, यूएस पोलो, एरो पैंट-शर्ट, टी शर्ट के रेडीमेड ब्रांडेड कपड़े तैयार होंगे। इसके लिए मिर्जामुराद के खुचवां गांव में अरविंद मिल्स की नई इकाई स्थापित हुई है। इस पर करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। करीब 8 एकड़ जमीन पर इस यूनिट को लगाया गया है। इस यूनिट से सीधे तौर पर यहां की सैकड़ों महिलाओं को रोजगार मिलेगा। पूरे पूर्वांचल में अरविंद मिल्स की यह पहली मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट है।

फिलहाल इस विनिर्माण इकाई में जिन महिलाओं को रोजगार मिलेगा उन्हें ट्रेनिंग भी दी जा रही है। शुरुआती दौर में इस इकाई में आस पास के गांव की 300 महिलाओं को सीधे रोजगार का अवसर मिलेगा। बताया जा रहा है इस यूनिट की शुरुआत के बाद इसका विस्तार भी किया जाएगा। जिससे रोजगार के साधन भी बढ़ेंगे। अरविंद मिल्स गुजरात आधारित लोकप्रिय टेक्सटाइल कंपनी है।

पीएम मोदी करेंगे लोकार्पण

बीते दिनों यूपी इन्वेस्टर मीट के दौरान कंपनी ने वाराणसी में विनिर्माण इकाई शुरू करने का प्रस्ताव रखा था। साल 2024 में मिर्जामुराद में इसकी आधारशिला रखी गई थी। करीब 2 साल में यह यूनिट अब बनकर तैयार हो गई है। वाराणसी के डीएम सतेन्द्र कुमार ने बताया की 25 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब वाराणसी आएंगे तो वह इस यूनिट का लोकार्पण भी करेंगे। इस लिहाज से भी तैयारियां की जा रही हैं।

इन चींजो का होगा उत्पादन

जानकारी के मुताबिक, वाराणसी में स्थापित अरविंद मिल्स के इस मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में स्पोर्ट्स वियर, अंडर गारमेंट्स, शर्ट, टीशर्ट का उत्पादन होगा। दूसरे फेज में इसके विस्तार के बाद यहां जींस, पैंट और ब्रांडेड शर्ट भी तैयार होंगे। जिससे हजारों लोगों को सीधे रोजगार का मौका मिलेगा।

कपड़ों के अलावा धागे भी तैयार करती है कंपनी

अरविंद मिल्स सिर्फ ब्रांडेड रेडीमेड कपड़े ही नहीं, धागों और कपड़ों को भी तैयार करती है। डेनिम के जींस के धागों को भी तैयार करने का काम यह कंपनी सालों से करती चली आ रही है। इसके अलावा लिनेन के कपड़े, सादे कपड़ों और सूट के फैब्रिक्स को भी अरविंद मिल्स की यूनिट में तैयार किया जाता है।

वाराणसी से अभिषेक जायसवाल की रिपोर्ट

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वोट बंटवारे का नगांव व रेजिनगर मॉडल

एसआईआर, परिसीमन और महिला आरक्षण के बाद भाजपा को यह उम्मीद है कि विपक्ष का वोट बंटेगा, जिसका लाभ उसको मिलेगा। भाजपा के इस भरोसे को समझने के लिए पश्चिम बंगाल की रेजीनगर विधानसभा सीट और असम की नगांव लोकसभा सीट के उपचुनाव को मॉडल की तरह देखा जा सकता है। पिछले लोकसभा चुनाव में नगांव सीट कांग्रेस ने जीती थी। लेकिन उसके सांसद प्रद्योत बोरदोलोई पार्टी छोड़ कर भाजपा में चले गए और लोकसभा से इस्तीफा दे दिया। इसलिए वहां उपचुनाव हुआ। ऐसे ही रेजिनगर की सीट हुमायूं कबीर ने जीती थी। वे दो सीटों से जीते थे इसलिए उन्होंने रेजीनगर से इस्तीफा दिया। नगांव में 55 से 60 फीसदी औऱ रेजिनगर में करीब 70 फीसदी मतदाता मुस्लिम हैं। इसके बावजूद दोनों सीटों पर भाजपा जीती।

नगांव लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार को करीब 50 फीसदी वोट मिले और रेजिनगर में करीब 60 फीसदी वोट मिला। भाजपा ने हुमायूं कबीर के बेटे को 75 हजार वोट से हराया। नगांव लोकसभा सीट पर वोट बंटवारा एक बड़ा फैक्टर रहा। वहां ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के नेता बदरूद्दीन अजमल चुनाव लड़े थे। मुस्लिम मतदाता उनके पक्ष में एकजुट हुए फिर भी कांग्रेस को सवा लाख के करीब वोट मिला। जीत हार का अंतर डेढ़ लाख के करीब वोट का था। तभी माना जा रहा है कि अगर सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर लड़तीं तो शायद भाजपा नहीं जीत पाती। रेजिनगर का मामला अलग है। वहां विपक्ष के सभी उम्मीदवारों को मिला कर भी उतना वोट नहीं आया, जितने वोट से भाजपा जीती।

सो, ये दोनों मॉडल हैं। रेजिनगर में कहा गया कि राज्य के मुस्लिम मतदाता भी लेफ्ट और तृणमूल के शासन से ऊबे हुए थे और उनको भी विकास, रोजगार वाली राजनीति पसंद आ रही है। इसलिए मुसलमानों ने भी भाजपा को वोट दिया। नगांव का मॉडल विपक्ष के वोट बंटवारे का है। भाजपा को उम्मीद है कि विपक्ष एकजुट होकर चुनाव नहीं लड़ेगा। पिछली बार यानी 2024 में विपक्ष एकजुट होकर लड़ा था तो संगठन और नैरेटिव दोनों की साझा ताकत के दम पर उसने भाजपा को बहुमत से नीचे ला दिया था। आजादी के बाद पहली बार इतना मजबूत विपक्ष जीत कर आया। लेकिन उसके बाद अलग अलग कारणों से बिखराव है। आम आदमी पार्टी, डीएमके आदि अलग रास्ते पर चल रहे हैं। अगर ये सभी पार्टियां साथ नहीं आती हैं तो भाजपा विरोधी वोट बंटेगा। विपक्ष के अंदर विभाजन बढ़ाने के लिए भाजपा की ओर से भी साम, दाम, दंड और भेद सारे उपाय किए जाते हैं।

इस बीच मुस्लिम नेताओं की पार्टियां भी चुनाव लड़ेंगी। मुस्लिम नेताओं ने अपनी जिस तरह की छवि बनाई है या विपक्षी पार्टियों ने उनके बारे में जिस तरह के प्रचार किए हैं उसके बाद यह संभावना कम है कि विपक्ष के साथ उनका तालमेल होगा। चाहे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी हो या बदरूद्दीन अजमल की पार्टी हो या हुमायूं कबीर और नौशाद सिद्दीकी पार्टी हो। इनका तालमेल मुख्यधारा की विपक्षी पार्टियों के साथ नहीं होगा। ऐसे में ये पार्टियां अलग चुनाव लड़ेंगी। इनकी वजह से भी वोट का बंटवारा होगा, जिस लाभ भाजपा को मिल सकता है।

LDA Naimish Nagar Yojna: लखनऊ में नैमिष नगर योजना में रजिस्ट्रेशन की आखिरी तारीख पास, जानें जमीन के रेट और सुविधाओं का डिटेल

LDA Naimish Nagar Yojna: लखनऊ में अपना प्लॉट खरीदना चाहते हैं, तो एलडीए की नैमिष नगर योजना में आपको मौका मिल सकता है। LDA की नैमिष नगर योजना में 24 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। इस योजना में 1,673 प्लॉट उपलब्ध हैं, जिनकी शुरुआती कीमत ₹29.44 लाख है। इन प्लाटों के लिए ₹1.47 लाख में रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। यह योजना सीतापुर रोड पर प्रस्तावित है और 3681.6872 एकड़ क्षेत्र में फैली है।

लखनऊ के उत्तरी हिस्से को मिलेगी नई पहचान 

लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने इस योजना को पूरा करने का काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि यह योजना विकास का एक मॉडल बनेगी, जिससे लखनऊ के उत्तरी हिस्से को एक नई पहचान मिलेगी। योजना के पहले साइट ऑफिस का कंस्ट्रक्शन का काम बी.के.टी. तहसील के पुरवा गांव में पूरा हो गया है। इसके लिए बी.के.टी. तहसील के 18 गांवों में लगभग 1486.689 हेक्टेयर जमीन की पहचान की गई है।

24 अक्टूबर तक खुली रहेगी वेबसाइट 

एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि भूखंडों के लिए पंजीकरण सिर्फ प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट registration.ldalucknow.in के माध्यम से ही होगा। यह वेबसाइट 24 अक्टूबर तक खुली रहेगी। ज़मीन खरीदने की अनुमानित लागत लगभग ₹4,785 करोड़ है, जिसे अथॉरिटी बोर्ड ने मंज़ूरी दे दी है। नैमिषारण्य धाम और मां चंद्रिका देवी मंदिर से आध्यात्मिक जुड़ाव, इस योजना को आधुनिक, संतुलित और समृद्ध जीवन का नया केंद्र बनाएगा। योजना के पहले चरण में ब्रह्म खंड, भूमि खंड फेज-एक व भूमि खंड फेज- दो में कुल 1673 भूखंडों के लिए पंजीकरण खोला गया है। इस योजना में भूखंड की दर 3800 रुपये प्रति वर्गफीट है।

नैमिष नगर योजना में रह सकेंगे 3 लाख लोग

नैमिष नगर योजना लगभग 3 लाख लोगों को रहने की सुविधा देगी। इसमें कई तरह की सुविधाएं शामिल होंगी जैसे:

चौड़ी सड़कें

ग्रीन बेल्ट और पार्क

स्कूल और हॉस्पिटल

कम्युनिटी सेंटर

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सुविधाएं

कमर्शियल सेंटर

सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP)

खेल के मैदान और बारात घर (शादियों के लिए कम्युनिटी हॉल)

तालाब और कब्रिस्तान/कब्रिस्तान

स्कूल, पार्क और श्मशान घाट (शमशान)

नैमिष नगर योजना के विकास से शहर के उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अच्छा विकास होने का अनुमान है। इससे लखनऊ में बड़ा निवेश आने और बड़ी संख्या में रोजगार के मौके बनने की उम्मीद है।

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अल्बानिया में महंगी शिक्षा के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरे:सरकारी इमारतों और बैंकों में आग लगाई; अभी 11 देशों में छात्र आंदोलन चल रहा

अल्बानिया की राजधानी तिराना में महंगी शिक्षा और खराब सुविधाओं के खिलाफ अब छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। छात्र प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, सरकारी इमारतों और कई बैंकों की शाखाओं में आग लगा दी। भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और पानी का इस्तेमाल किया। इस दौरान दर्जनों पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए। अल्बानिया में जारी यह विरोध ऐसे समय हो रहा है, जब भारत, फ्रांस, जर्मनी समेत दुनिया के कुल 11 देशों में छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। अल्बानिया में प्रदर्शन से जुड़ी 5 तस्वीरें… कई महीनों से नाराज थे छात्र, सरकार पर अनदेखी का आरोप अल्बानिया में छात्रों की नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी है। वे कई महीनों से पढ़ाई के बढ़ते खर्च और डिग्री लेने के बाद नौकरी मिलने की कम संभावनाओं को लेकर आवाज उठा रहे हैं। छात्रों का कहना है कि शिक्षा महंगी होती जा रही है, जबकि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार के पर्याप्त मौके नहीं मिल रहे हैं। अल्बानिया के पत्रकार आर्लिस अलिकाज ने अल जजीरा से कहा कि मौजूदा प्रदर्शन कई महीनों से दबे गुस्से का नतीजा हैं। तिराना के इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिटिकल स्टडीज के प्रोफेसर और शोधकर्ता अफ्रिम क्रास्निकी के मुताबिक, छात्र और युवा करीब तीन महीने तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन करते रहे, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि सरकार ने बातचीत करने के बजाय कई बार छात्रों की छवि खराब करने की कोशिश की। अब लोगों का गुस्सा सिर्फ सरकार के खिलाफ नहीं है। सरकारी संस्थानों की जवाबदेही की कमी और लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने से भी नाराजगी बढ़ी है। ट्रम्प के दामाद के लग्जरी रिसॉर्ट बनाने का भी विरोध एदी रामा 2013 से अल्बानिया के प्रधानमंत्री हैं। पिछले साल मई में वे चौथी बार इस पद पर चुने गए थे। हालांकि, इसके बाद उनकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ी है। मौजूदा प्रदर्शन रामा के लिए अब तक के सबसे गंभीर जन विरोध में से एक माने जा रहे हैं। सरकार के खिलाफ विरोध कुछ महीने पहले ही शुरू हो गया था। इसकी एक वजह देश के दक्षिणी तट पर लग्जरी रिसॉर्ट बनाने की योजना भी है। इस परियोजना से अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर जुड़े हैं। गुरुवार को रॉयटर्स से बातचीत में रामा ने इस्तीफे की मांग खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि सरकारें लोकतांत्रिक चुनावों से बदलती हैं। पिछले साल देश में चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं। 2018 में भी शिक्षा के खर्च पर बड़ा आंदोलन हुआ था —————————- यह खबर भी पढ़ें… फ्रांस में शिक्षकों की कमी को लेकर आंदोलन हिंसक हुआ:धमाके में 15 साल के छात्र का हाथ उड़ा; 5 हजार गिरफ्तार, 87% गिरफ्तार नाबालिग फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर छात्र सड़कों पर उतर गए हैं। सितंबर में शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल गया है। छात्र स्कूलों में बढ़ती भीड़, जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी का विरोध कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

अगले 5 साल में क्रिटिकल मिनरल्स बिजनेस 5 गुना बढ़ाएगा वर्ल्ड बैंक ग्रुप, जानिए क्या है भारत और दुनिया के लिए प्लान

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि वह अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के कारोबार को पांच गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने शुक्रवार को बताया कि स्थानीय उद्योगों को विकसित करने के लिए संभावित साझेदारियों के वास्ते 20 देशों की पहचान की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के भीतर ही अधिक नौकरियां और इकोनॉमिक वैल्यू बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बैंकॉक में वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के एक सेशन को संबोधित करते हुए, अजय बंगा ने कहा, “हम अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपने कारोबार को पांच गुना करने की योजना पर काम कर हैं। इस सप्ताह, हमने अन्य MDB (मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक) साझेदारों के साथ मिलकर अपने पहले ‘कंट्री कॉम्पैक्ट्स'(देश-स्तरीय समझौते) शुरू किए हैं। इसका मकसद लोकल स्तर पर उद्योगों की स्थापना करना और खनिज कारोबार से मिलने वाले मूल्य और नौकरियों को संबंधित देश के भीतर ही बनाए रखना है।” उन्होंने आगे बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 20 देशों की पहचान की है, जिनके साथ वे साझेदारी करेंगे।

आर्थिक गलियारों के विकास पर दिया जा रहा जोर

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप आर्थिक गलियारों (economic corridors)पर अपना फोकस और बढ़ा रहा है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को निवेश के अवसरों के साथ जोड़ते हैं। इस संस्था ने पिछले साल 52 नई आर्थिक गलियारा परियोजनाएं शुरू कीं, जबकि इससे एक साल पहले इनकी संख्या सिर्फ 23 थी।

अजय बंगा ने एक ऐसे कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जिसे शुरू में मुख्य रूप से खनिजों के परिवहन के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में किसान अपनी फसलों को बाजारों तक पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे, जिससे इस रास्ते के किनारे बसे कस्बों और शहरों के विकास में मदद मिली।

विकास के लिए निजी पूंजी जुटाने पर फोकस बढ़ा

इन प्रयासों के साथ-साथ, वर्ल्ड बैंक ग्रुप विकास कार्यों के लिए निजी पूंजी जुटाने के अपने प्रयासों का विस्तार कर रहा है। बंगा ने बताया कि पिछले साल इस संस्था ने 112 अरब अमेरिकी डॉलर की निजी पूंजी जुटाई, जो वित्त वर्ष 2022 के लगभग 35 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।

उन्होंने कहा,”पिछले साल 112 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए गए,जो कि तीन गुना बढ़त है।” उन्होंने आगे बताया कि संस्था की अपनी फंडिंग को मिलाकर कुल फंडिंग 230 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में निजी पूंजी जुटाने की मात्रा लगभग तीन गुना हो गई, जबकि उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह चार गुना हो गई। वहीं, पूरे अफ्रीका में इसमें दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि,कम आय वाली,कमजोर और संघर्ष-ग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी जुटाने की स्थिति स्थिर रही है,जहां व्यावसायिक निवेश आकर्षित करना अब भी मुश्किल बना हुआ है।

विकास के लिए साझा सिस्टम विकसित करने पर जोर

अजय बंगा ने कहा कि यह संस्था गारंटी, इक्विटी और स्थानीय मुद्रा में फाइनेंसिंग के ज़रिए करेंसी रिस्क और फाइनेंस तक सीमित पहुंच जैसी बाधाओं को दूर कर रही है। यह अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ मिलकर ऐसे साझा सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है, जिससे निवेश को दूसरे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके और नई विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सके। इसका मेन मकसद उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है जो उत्पादकता में सुधार करते हैं और रोजगार पैदा करते हैं। इनमें बुनियादी ढांचा और ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्यूफैक्चरिंग (value-added manufacturing) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

नौकरी कोई आंकड़ा नहीं, नौकरी सम्मान है

अजय बंगा ने ग्लोबल लेवल पर लगभग 80 करोड़ नौकरियों की अनुमानित कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं के लिए अवसर पैदा नहीं किए गए,तो पूरी दुनिया में इसके खराब परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपना भविष्य बनाने में सक्षम बनाने के लिए रोज़गार के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा “नौकरी कोई आंकड़ा नहीं है। नौकरी सम्मान है।”

वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल है। पब्लिक फाइनेंलिंग (वहां,जहां बाजार नहीं पहुंच पाते), निजी पूंजी (वहां, जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की जा सकती हैं), शुरुआती जोखिमों में मदद के लिए परोपकारी निवेश और फाइनेंशिग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक शामिल हैं। अजय बंगा ने कहा,”नौकरियों की कमी केवल एक अनुमान है। जरूरी नहीं कि हमारा भविष्य भी ऐसा ही हो।” उन्होंने विकास से जुड़ी पहलों को और बड़े पैमाने पर तथा तेजी से लागू करने का आह्वान किया।

 

 

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यूरोप में युवाओं पर बुजुर्ग भारी पड़ रहे:पेंशन पर सरकारी खजाना खर्च; Gen Z नौकरी-घर और अच्छी शिक्षा मांग रहे

पिछले कुछ सालों में Gen Z यानी युवा पीढ़ी एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। बांग्लादेश, नेपाल, पेरू और मेडागास्कर में युवाओं के प्रदर्शनों ने सरकारें गिरा दीं। भारत में भी कई प्रदर्शनों में युवाओं की अहम भूमिका रही है। अब यूरोप में भी युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। फ्रांस में स्कूलों की बदहाली, स्पेन में बेरोजगारी और ब्रिटेन में पेंशन नीतियों को लेकर नाराजगी है। युवाओं के लिए नौकरी पाना, अच्छी शिक्षा हासिल करना और सस्ता घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। यूरोप में इस मुश्किल ने युवाओं और बुजुर्गों के बीच आर्थिक और राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। बुजुर्गों की आबादी बढ़ने के साथ राजनीति में उनका प्रभाव भी मजबूत हुआ है। वहीं, युवाओं की संख्या घट रही है। ऐसे में उनके लिए अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना और मुश्किल हो रहा है। फ्रांस: युवाओं को स्कूलों के लिए पैसा चाहिए, बुजुर्गों को पेंशन फ्रांस में युवाओं के सामने नौकरी की कमी है। बेरोजगारी 20% पहुंच चुकी है। इस साल दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ शून्य रही। दूसरी तरफ, सरकार के कुल खर्च का करीब 25% पेंशन पर जाता है। यानी बजट का बड़ा हिस्सा बुजुर्गों की पेंशन में खर्च हो रहा है। कुछ साल पहले राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 साल करने का फैसला किया था। इसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए और सरकार को फैसला निलंबित करना पड़ा। अब पक्ष हो या विपक्ष कोई भी पेंशन में कटौती को लेकर चर्चा भी नहीं करता। युवा चाहते हैं कि स्कूलों की हालत सुधरे और शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च हो। वामपंथी नेताओं का तर्क है कि पेंशन बचाते हुए शिक्षा का बजट भी बढ़ाया जा सकता है। लेकिन सवाल है कि पैसा आएगा कहां से? फ्रांस पर पहले से भारी कर्ज है, और अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने से भी सरकार को खास कमाई नहीं हुई है। ऐसे में दोनों वर्गों की मांगें पूरी करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्पेन: युवाओं के लिए घर खरीदना मुश्किल स्पेन में भी यही समस्या दिख रही है। वहां घरों की कमी और बढ़ते किराए को लेकर हाल में प्रदर्शन हुए। स्पेन में युवाओं की बेरोजगारी 22% से ज्यादा है और घरों की कीमतें वेतन के मुकाबले कहीं तेजी से बढ़ी हैं। नतीजा यह है कि कई युवा 30 साल की उम्र पार करने के बाद भी माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं। जो अलग रहते हैं, उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता है। ऐसे में बचत करना और अपना घर खरीदना मुश्किल है। दूसरी ओर, जिन बुजुर्गों के पास पहले से घर हैं, उन्हें बढ़ती कीमतों का फायदा मिल सकता है। उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ रही है, जबकि युवाओं के लिए घर खरीदना और मुश्किल होता जा रहा है। यही अंतर दोनों पीढ़ियों के बीच तनाव बढ़ा रहा है। ब्रिटेन में पेंशन पर खर्च को लेकर बहस ब्रिटेन में भी युवा बेरोजगारी और महंगे मकानों से परेशान हैं। युवाओं में बेरोजगारी करीब 16% है। खासकर लंदन और उसके आसपास घरों का किराया बहुत ज्यादा है। मुश्किल यह है कि रोजगार के नए मौके भी ज्यादातर इन्हीं इलाकों में पैदा होते हैं। ऐसे में युवाओं के लिए नौकरी मिलने के बाद भी घर का खर्च उठाना आसान नहीं है। ब्रिटेन में बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाने के लिए ‘ट्रिपल लॉक’ नाम की व्यवस्था है। इसके तहत पेंशन हर साल महंगाई, औसत वेतन में बढ़ोतरी या 2.5% में से जो भी ज्यादा हो, उतनी बढ़ाई जाती है। इससे बुजुर्गों की पेंशन घटने के बजाय बढ़ती रहती है। सरकार अगर पेंशन पर खर्च कम करने की कोशिश करती है, तो उसे राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने एक लोकल चुनाव से पहले इस व्यवस्था में बदलाव करने की बात कही थी। हालांकि विरोधी नेताओं ने इसे महज चुनावी जुमला बताया। उनका कहना है कि अगर वे ऐसा करते हैं तो ये उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। युवाओं पर बुजुर्गों का पलड़ा भारी क्यों? राजनीतिक पकड़ मजबूत होना: बुजुर्गों की राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियनों में अच्छी पकड़ है। वे चुनाव में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए नेताओं के लिए उनकी मांगों को नजरअंदाज करना मुश्किल होता है। पेंशन का फायदा पूरे परिवार को मिलना: कई युवा नौकरी या कमाई के बावजूद अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। ऐसे परिवारों में बुजुर्गों की पेंशन घर का खर्च चलाने में मदद करती है। अगर सरकार पेंशन घटाती है, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ सकता है। कामकाजी लोगों को यह चिंता भी रहती है कि पेंशन कम होने पर माता-पिता के खर्च की जिम्मेदारी उन पर बढ़ जाएगी। पेंशन को अपने भविष्य से जोड़कर देखना: युवाओं को लगता है कि आज बुजुर्गों को पेंशन मिलेगी, तो भविष्य में उन्हें भी इसका फायदा मिल सकता है। इसलिए वे पेंशन व्यवस्था के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते हैं। इसके उलट, बुजुर्गों को शिक्षा पर ज्यादा सरकारी पैसा खर्च करने के लिए मनाना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसका सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलता। यही वजह है कि पेंशन पर खर्च घटाने और शिक्षा जैसी सेवाओं पर खर्च बढ़ाने के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें…. इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ लड़ाई में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका के जरिए सऊदी अरब को भेजा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

यूरोप में युवाओं पर बुजुर्ग भारी पड़ रहे:पेंशन पर सरकारी खजाना खर्च; Gen Z नौकरी-घर और अच्छी शिक्षा मांग रहे

पिछले कुछ सालों में Gen Z यानी युवा पीढ़ी एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर उभरी है। बांग्लादेश, नेपाल, पेरू और मेडागास्कर में युवाओं के प्रदर्शनों ने सरकारें गिरा दीं। भारत में भी कई प्रदर्शनों में युवाओं की अहम भूमिका रही है। अब यूरोप में भी युवा अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। फ्रांस में स्कूलों की बदहाली, स्पेन में बेरोजगारी और ब्रिटेन में पेंशन नीतियों को लेकर नाराजगी है। युवाओं के लिए नौकरी पाना, अच्छी शिक्षा हासिल करना और सस्ता घर खरीदना मुश्किल होता जा रहा है। यूरोप में इस मुश्किल ने युवाओं और बुजुर्गों के बीच आर्थिक और राजनीतिक टकराव बढ़ा दिया है। बुजुर्गों की आबादी बढ़ने के साथ राजनीति में उनका प्रभाव भी मजबूत हुआ है। वहीं, युवाओं की संख्या घट रही है। ऐसे में उनके लिए अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाना और मुश्किल हो रहा है। फ्रांस: युवाओं को स्कूलों के लिए पैसा चाहिए, बुजुर्गों को पेंशन फ्रांस में युवाओं के सामने नौकरी की कमी है। बेरोजगारी 20% पहुंच चुकी है। इस साल दूसरी तिमाही में अर्थव्यवस्था की ग्रोथ शून्य रही। दूसरी तरफ, सरकार के कुल खर्च का करीब 25% पेंशन पर जाता है। यानी बजट का बड़ा हिस्सा बुजुर्गों की पेंशन में खर्च हो रहा है। कुछ साल पहले राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रिटायरमेंट की उम्र 62 से बढ़ाकर 64 साल करने का फैसला किया था। इसके खिलाफ देशभर में प्रदर्शन हुए और सरकार को फैसला निलंबित करना पड़ा। अब पक्ष हो या विपक्ष कोई भी पेंशन में कटौती को लेकर चर्चा भी नहीं करता। युवा चाहते हैं कि स्कूलों की हालत सुधरे और शिक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च हो। वामपंथी नेताओं का तर्क है कि पेंशन बचाते हुए शिक्षा का बजट भी बढ़ाया जा सकता है। लेकिन सवाल है कि पैसा आएगा कहां से? फ्रांस पर पहले से भारी कर्ज है, और अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाने से भी सरकार को खास कमाई नहीं हुई है। ऐसे में दोनों वर्गों की मांगें पूरी करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। स्पेन: युवाओं के लिए घर खरीदना मुश्किल स्पेन में भी यही समस्या दिख रही है। वहां घरों की कमी और बढ़ते किराए को लेकर हाल में प्रदर्शन हुए। स्पेन में युवाओं की बेरोजगारी 22% से ज्यादा है और घरों की कीमतें वेतन के मुकाबले कहीं तेजी से बढ़ी हैं। नतीजा यह है कि कई युवा 30 साल की उम्र पार करने के बाद भी माता-पिता के साथ रहने को मजबूर हैं। जो अलग रहते हैं, उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा किराए में चला जाता है। ऐसे में बचत करना और अपना घर खरीदना मुश्किल है। दूसरी ओर, जिन बुजुर्गों के पास पहले से घर हैं, उन्हें बढ़ती कीमतों का फायदा मिल सकता है। उनकी संपत्ति की कीमत बढ़ रही है, जबकि युवाओं के लिए घर खरीदना और मुश्किल होता जा रहा है। यही अंतर दोनों पीढ़ियों के बीच तनाव बढ़ा रहा है। ब्रिटेन में पेंशन पर खर्च को लेकर बहस ब्रिटेन में भी युवा बेरोजगारी और महंगे मकानों से परेशान हैं। युवाओं में बेरोजगारी करीब 16% है। खासकर लंदन और उसके आसपास घरों का किराया बहुत ज्यादा है। मुश्किल यह है कि रोजगार के नए मौके भी ज्यादातर इन्हीं इलाकों में पैदा होते हैं। ऐसे में युवाओं के लिए नौकरी मिलने के बाद भी घर का खर्च उठाना आसान नहीं है। ब्रिटेन में बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाने के लिए ‘ट्रिपल लॉक’ नाम की व्यवस्था है। इसके तहत पेंशन हर साल महंगाई, औसत वेतन में बढ़ोतरी या 2.5% में से जो भी ज्यादा हो, उतनी बढ़ाई जाती है। इससे बुजुर्गों की पेंशन घटने के बजाय बढ़ती रहती है। सरकार अगर पेंशन पर खर्च कम करने की कोशिश करती है, तो उसे राजनीतिक विरोध का सामना करना पड़ सकता है।प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने एक लोकल चुनाव से पहले इस व्यवस्था में बदलाव करने की बात कही थी। हालांकि विरोधी नेताओं ने इसे महज चुनावी जुमला बताया। उनका कहना है कि अगर वे ऐसा करते हैं तो ये उनके लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। युवाओं पर बुजुर्गों का पलड़ा भारी क्यों? राजनीतिक पकड़ मजबूत होना: बुजुर्गों की राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियनों में अच्छी पकड़ है। वे चुनाव में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए नेताओं के लिए उनकी मांगों को नजरअंदाज करना मुश्किल होता है। पेंशन का फायदा पूरे परिवार को मिलना: कई युवा नौकरी या कमाई के बावजूद अपने माता-पिता के साथ रहते हैं। ऐसे परिवारों में बुजुर्गों की पेंशन घर का खर्च चलाने में मदद करती है। अगर सरकार पेंशन घटाती है, तो इसका असर पूरे परिवार पर पड़ सकता है। कामकाजी लोगों को यह चिंता भी रहती है कि पेंशन कम होने पर माता-पिता के खर्च की जिम्मेदारी उन पर बढ़ जाएगी। पेंशन को अपने भविष्य से जोड़कर देखना: युवाओं को लगता है कि आज बुजुर्गों को पेंशन मिलेगी, तो भविष्य में उन्हें भी इसका फायदा मिल सकता है। इसलिए वे पेंशन व्यवस्था के खिलाफ खुलकर नहीं बोलते हैं। इसके उलट, बुजुर्गों को शिक्षा पर ज्यादा सरकारी पैसा खर्च करने के लिए मनाना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसका सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलता। यही वजह है कि पेंशन पर खर्च घटाने और शिक्षा जैसी सेवाओं पर खर्च बढ़ाने के बीच सहमति बनाना आसान नहीं है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें…. इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ लड़ाई में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। इजराइली अखबार हारेत्ज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने यह प्रस्ताव अमेरिका के जरिए सऊदी अरब को भेजा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

कुमाऊं से दिल्ली-एनसीआर पहुंचना हुआ आसान! पंतनगर से नोएडा एयरपोर्ट के बीच मिली सीधी फ्लाइट से ये सारे फायदे

कुमाऊ क्षेत्र को दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली हवाई यातायात से पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। पंतनगर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच इंडिगो की सीधी उड़ान सेवा से यात्रियों को आवागमन का एक सुविधाजनक विकल्प मिल रहा है। इससे हल्द्वानी, नैनीताल, भीमताल, मुक्तेश्वर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को दिल्ली-एनसीआर के प्रमुख आर्थिक, व्यावसायिक और शैक्षणिक केंद्रों तक पहुंचने में सहूलियत मिलेगी।

अब तक लंबी दूरी की यात्रा के लिए सड़क मार्ग पर निर्भर रहने वाले यात्रियों को हवाई सफर का एक अतिरिक्त विकल्प मिल रहा है। इससे कारोबारियों, पर्यटकों, विद्यार्थियों और परिवारों को समय के बेहतर प्रबंधन के साथ यात्रा की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर दिल्ली, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों से संपर्क बेहतर होने से कुमाऊं और एनसीआर के बीच आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।

पर्यटन और धार्मिक यात्राओं को मिलेगा बढ़ावा

कुमाऊं अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों, पहाड़ों और धार्मिक स्थलों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। नैनीताल, भीमताल और मुक्तेश्वर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए बेहतर हवाई संपर्क क्षेत्र की पर्यटन अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकता है। वहीं, कुमाऊं से दिल्ली और आसपास के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों, जैसे मथुरा, वृंदावन और आगरा, की यात्रा करने वालों को भी आगे की यात्रा की योजना बनाने में सुविधा मिल सकती है।

बेहतर कनेक्टिविटी से होटल, टैक्सी, स्थानीय परिवहन, रेस्तरां और पर्यटन से जुड़े दूसरे व्यवसायों के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय रोजगार और छोटे कारोबार को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।

देश के बड़े शहरों तक पहुंच का नया विकल्प

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के माध्यम से इंडिगो के व्यापक नेटवर्क से जुड़कर यात्री मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे प्रमुख महानगरों के लिए आगे की यात्रा के विकल्प तलाश सकते हैं। इससे कुमाऊं के व्यापारियों और उद्यमियों को देश के विभिन्न बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि, आगे की यात्रा की उपलब्धता संबंधित उड़ानों के कार्यक्रम और कनेक्शन पर निर्भर करेगी।

कार्गो सुविधाओं से कारोबार को नई उम्मीद

यात्री सुविधाओं के साथ नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का कार्गो इंफ्रास्ट्रक्चर भी क्षेत्रीय कारोबार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानीय व्यवसायों की जरूरतों के अनुरूप कार्गो सेवाओं का बेहतर उपयोग होने पर माल की आवाजाही को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। इससे क्षेत्र के उद्योगों, व्यापारियों और अन्य कारोबारी इकाइयों को व्यापक बाजारों से जुड़ने के अवसर मिल सकते हैं।

इसी दिशा में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, इंडिगो और एयर इंडिया सैट्स ने पंतनगर में ट्रैवल एवं ट्रेड समुदाय के प्रतिनिधियों के साथ रोडशो आयोजित किया। इसमें कुमाऊं गढ़वाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (केजीसीसीआई), ट्रैवल एजेंटों, फ्रेट फॉरवर्डर्स और कॉरपोरेट प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में यात्री कनेक्टिविटी, आगे की यात्रा के विकल्पों, एयरपोर्ट सुविधाओं और कार्गो संबंधी संभावनाओं पर चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने किफायती किराए, अधिक यात्रा विकल्पों और बेहतर कार्गो मूवमेंट की जरूरत पर जोर दिया।

यात्रियों को मिलेंगे विशेष ऑफर

पंतनगर से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की उड़ानों से यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए कुछ विशेष प्रमोशनल ऑफर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पंतनगर का बोर्डिंग पास दिखाने पर एयरपोर्ट के चुनिंदा डाइनिंग आउटलेट्स, जिनमें कोस्टा कॉफी, केएफसी, सबवे, चाय पॉइंट और स्मूर शामिल हैं, पर 10% तक की छूट मिलेगी, जिसकी अधिकतम सीमा 200 रुपये है। इसके अलावा, इलेक्ट्रिक टैक्सी और कार रेंटल सेवाओं पर 40% तक की छूट का भी प्रावधान है। इन ऑफर्स की लागू शर्तें संबंधित सेवा प्रदाताओं पर निर्भर करेंगी।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के वाइस प्रेसिडेंट क्रिस्टोफ श्नेलमैन के अनुसार, पंतनगर-नोएडा एयरपोर्ट मार्ग कुमाऊँ के यात्रियों के लिए यात्रा के विकल्प बढ़ाने के साथ दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख आध्यात्मिक एवं व्यावसायिक केंद्रों तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, पंतनगर और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बीच हवाई संपर्क कुमाऊं के लिए केवल यात्रा का नया विकल्प नहीं, बल्कि पर्यटन, व्यापार और क्षेत्रीय आर्थिक विकास की संभावनाओं को मजबूत करने वाला कदम भी साबित हो सकता है।

ग्रेटर नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट

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