Video: होम गार्ड भर्ती में साड़ी पहन नंगे पैर दौड़ने वाली कविता की कहानी! पति नहीं रहे तो बच्चों, ससुराल का बोझ उठाने का ये जज्बा इमोशनल कर देगा

रामगढ़ की सुबह इन दिनों सिर्फ सूरज की पहली किरणों से नहीं, बल्कि उन महिलाओं के हौसले से भी रोशन होती है, जो अपने सपनों के लिए मैदान में पसीना बहा रही हैं। इन्हीं में 32 वर्षीय कविता कुमारी की कहानी सबसे अलग नजर आती है। दुलमी प्रखंड के सोसो गांव की रहने वाली कविता विधवा हैं और दो बच्चों की मां भी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच उन्होंने अपने लिए एक ऐसा लक्ष्य चुना है, जो उनकी जिंदगी बदल सकता है। हर सुबह घर के जरूरी काम निपटाने के बाद कविता करीब 8 किलोमीटर दूर रामगढ़ के सिदो-कान्हू मैदान पहुंचती हैं। उनके पास महंगे रनिंग शूज, ट्रैकसूट या स्पोर्ट्स टी-शर्ट नहीं हैं।

ऐसे में साड़ी ही उनका अभ्यास का पहनावा बन गई है। तेज धूप, लंबा रास्ता और सीमित साधन भी उनके कदम नहीं रोक पाए। कविता की कोशिश सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने बच्चों के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य तैयार करना चाहती हैं।

पहले देखने पहुंचीं, फिर खुद दौड़ने लगीं

कविता शुरुआत में मैदान पर दूसरे अभ्यर्थियों को ट्रेनिंग करते हुए देखने पहुंची थीं। धीरे-धीरे उन्होंने खुद भी दौड़ लगाने का फैसला किया। शुरुआत में 1.6 किलोमीटर की दूरी पूरी करने में उन्हें करीब 8 मिनट लगते थे। अब वह यही दूरी लगभग 7 मिनट में पूरी कर लेती हैं।

भर्ती परीक्षा के दौरान साड़ी पहनकर दौड़ते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। खास बात यह है कि कविता को काफी समय तक पता ही नहीं था कि उनका वीडियो इंटरनेट पर चर्चा में आ चुका है।

दो बच्चों की मां, परिवार की जिम्मेदारी भी कंधों पर

कविता के पति का निधन हो चुका है और वह अपने दो बच्चों के साथ बुजुर्ग ससुरालवालों की जिम्मेदारी भी संभालती हैं। आर्थिक परेशानियों के बावजूद उन्होंने तैयारी का रास्ता नहीं छोड़ा। वह बताती हैं कि उनका मकसद सिर्फ नौकरी हासिल करना नहीं है। वह होमगार्ड बनकर अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को सुरक्षित करना चाहती हैं।

मैदान पर सिर्फ कविता नहीं, सैकड़ों संघर्ष की कहानियां

सिदो-कान्हू मैदान में हर सुबह का नजारा किसी कहानी से कम नहीं। ट्रैकसूट पहने युवतियों के साथ कई महिलाएं साड़ी और चप्पलों में दौड़ती दिखाई देती हैं। इनमें कई ऐसी हैं, जो घर का काम, बच्चों की देखभाल या खेतों का काम निपटाकर सीधे मैदान पहुंचती हैं।

बूढ़ा-खुखरा गांव की 30 वर्षीय सुनीता कुमारी भी साड़ी में दौड़ती हैं। उनका कहना है कि गरीब किसान परिवार से होने के कारण परिवार ट्रैकसूट और जूते नहीं खरीद सका, लेकिन इससे उनका हौसला कम नहीं हुआ।

किसी के लिए नौकरी, तो किसी के लिए बच्चों का भविष्य

गोला की मोनिका कुमारी ने 1.6 किलोमीटर की दौड़ करीब 6 मिनट 4 सेकंड में पूरी की। वहीं कई अन्य महिला अभ्यर्थियों के लिए यह भर्ती सिर्फ रोजगार का मौका नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने की उम्मीद है। फिटनेस कोच सिकंदर पांडेय और एक मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षक अभ्यर्थियों को मुफ्त प्रशिक्षण दे रहे हैं। 2 अक्टूबर को आयोजित एक बड़ी दौड़ में करीब 2,500 अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया।

284 पदों ने जगाई नई उम्मीद

रामगढ़ में 284 होमगार्ड पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया 24 अक्टूबर से 5 नवंबर तक प्रस्तावित है। इसमें 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए और अतिरिक्त 5 प्रतिशत सीटें विधवा व तलाकशुदा महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भर्ती में 1.6 किलोमीटर की दौड़ के अलावा लंबाई, सीना और अन्य शारीरिक परीक्षण होंगे। प्रशासन ने पारदर्शी तरीके से योग्यता और फिटनेस के आधार पर चयन की तैयारी की है।

Video: ‘हिंदी सीखो वरना नौकरी छोड़ दो’… Zomato सुपरवाइजर का वीडियो वायरल, अब मांगी माफी

UP Shiksha Mitra: दिवाली से पहले यूपी के 1.27 लाख शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा, इस बार डबल से ज्यादा आएगी सैलरी

UP Shiksha Mitra Mandeya 2026: उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों के लिए दिवाली से पहले बड़ी खुशखबरी आई है। सीएम योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार ने बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए ₹460.23 करोड़ का बजट जारी कर दिया है। इसके बाद प्रदेश के 1,27,841 शिक्षामित्रों को सितंबर और अक्टूबर महीने का बढ़ा हुआ मानदेय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। खास बात यह है कि दोनों महीनों की सैलरी एक साथ उनके बैंक खातों में भेजी जा सकती है।

₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार हुआ मानदेय

सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को ₹10,000 से बढ़ाकर ₹18,000 प्रति माह करने की घोषणा की थी। अब सितंबर और अक्टूबर के बढ़े हुए मानदेय के भुगतान के लिए बजट जारी किया गया है। यानी पात्र शिक्षामित्रों को दो महीने के लिए कुल ₹36,000 तक का भुगतान मिल सकता है, जो पहले के दो महीने के ₹20,000 मानदेय से ₹16,000 अधिक है।

सभी जिलों को भेजा गया बजट

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा विभाग की ओर से जारी बजट सभी जिलों को भेज दिया गया है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि शिक्षामित्रों के खातों में राशि भेजने में किसी तरह की लापरवाही न हो।

दूसरे कर्मचारियों को भी मिल सकता है दिवाली गिफ्ट

शिक्षामित्रों के बाद यूपी सरकार के अन्य कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों को करीब ₹3,000 से 7,000 रुपये तक बोनस मिलने की भी संभावना है। इससे प्रदेश के लाखों कर्मचारी और पेंशनर्स राहत की सांस लेंगे।

स्थायी नौकरी की मांग अब भी जारी

मानदेय बढ़ने के बावजूद शिक्षामित्रों की स्थायी रोजगार की मांग खत्म नहीं हुई है। शिक्षामित्र लंबे समय से नियमितीकरण और शिक्षक भर्ती में उचित लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे वर्षों से सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। लेकिन उन्हें स्थायी नियुक्ति या विशेष TET में उचित अवसर नहीं दिया जा रहा।

ये भी पढ़ें- France protests: ‘फ्रांस पर कब्जा करना चाहता है इस्लाम’; ट्रंप ने पेरिस में छात्रों के प्रदर्शन को बताया बेकाबू माइग्रेशन का नतीजा

हालांकि, हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों को विशेष TET में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। शिक्षामित्रों का आरोप है कि सालों की सेवा के बावजूद उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है। उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया में पर्याप्त वेटेज या अवसर नहीं मिल रहा है। इस नाराजगी को देखते हुए योगी सरकार की तरफ से आगामी यूपी चुनाव से पहले शिक्षामित्रों को मनाने की कोशिश जारी है।

CM Youth Conclave MP 2026: अगले साल से दो बार होंगी एमपीपीएससी परीक्षा, यूथ कॉन्क्लेव में मुख्यमंत्री यादव का बड़ा ऐलान

CM Youth Conclave MP 2026: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य में आयोजित युवा महोत्सव 2027 के दौरान कई बड़ी और प्रमुख पहल की घोषणा की है। एमपी यूथ कॉन्क्लेव 2026 में उन्होंने कहा कि 2027 से एमपी लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा साल में दो बार कराई जाएगी। साथ ही, उन्होंने 12 नए मेडिकल कॉलेज और इतनी ही स्किल यूनिवर्सिटी बनाने का ऐलान किया है।

“CM यूथ कॉन्क्लेव-2026” में बोलते हुए, यादव ने कहा कि हायर एजुकेशन में रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए, शोधकर्ताओं के लिए स्टाइपेंड 16,000 रुपये प्रति महीने से बढ़ाकर 25,000 रुपये किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगले साल से मध्य प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (MPPSC) की परीक्षाएं साल में दो बार होंगी और राज्य भर के सरकारी कॉलेजों में कॉम्पिटिटिव परीक्षाओं के लिए फ्री कोचिंग क्लास शुरू की जाएंगी।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की योजना 12 नए मेडिकल कॉलेज और 12 स्किल यूनिवर्सिटी बनाने की तैयारी कर रही है। राज्य में यह संस्थान रोजगार देने वाले कोर्स ऑफर करेंगे। कॉन्क्लेव में राज्य भर के मेधावी लोग मुख्यमंत्री के साथ बातचीत के लिए इकट्ठा हुए थे। एक छात्रा मायशा खान ने पूछा कि सरकार युवाओं के बीच खेती को कैसे बढ़ावा देने की योजना बना रही है? इस सवाल पर यादव ने कहा कि सरकार भविष्य में फूड-प्रोसेसिंग से लेकर खेतों तक एक वैल्यू चेन बनाने की योजना बना रही है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और स्टार्टअप सेक्टर में सरकार के काम पर भी ज़ोर दिया, भोपाल में AI सिटी पर चल रहे काम और स्टार्टअप के लिए युवाओं को दी जाने वाली 5 लाख रुपये की सब्सिडी का ज़िक्र किया। यादव ने आगे कहा कि 2027 में खेल सरकार की टॉप प्रायोरिटी में से एक होगा, उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश के खिलाड़ियों ने हाल ही में हुए एशियन गेम्स में पाँच मेडल जीते।

उन्होंने कहा, “हमने खेलों को एक सब्जेक्ट के तौर पर शामिल किया है और कोचों के प्रमोशन का इंतज़ाम किया है। हमारी सरकार हर असेंबली सीट पर स्टेडियम बनाएगी। अब, हम शूटिंग और आर्चरी में भी मेडल जीत रहे हैं। 2027 में खेल टॉप प्रायोरिटी में रहेगा।”

Gold silver Price: MCX पर सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, एक्सपर्ट्स से जानें अब क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Gold silver Price: वायदा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में उछाल देखने को मिल रहा है। सितंबर में आई भारी गिरावट के बाद सोने-चांदी की कीमतों में रिकवरी आई। MCX पर सोने के दिसंबर फ्यूचर्स 0.32% बढ़कर ₹1.49 लाख प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहे थे, जबकि चांदी के दिसंबर फ्यूचर्स 0.11% बढ़कर ₹2.26 लाख प्रति किलोग्राम पर थे।

सोने में यह रिकवरी तब आई है जब बाजार US फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर अपनी उम्मीदों का फिर से आकलन कर रहे हैं। US में रोजगार के कमजोर आंकड़ों ने तुरंत ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदों को कम कर दिया है, हालांकि मजबूत डॉलर और US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी अभी भी बुलियन (सोने-चांदी) के लिए चुनौती बनी हुई है।

अब क्या हो रणनीति

बोनान्ज़ा के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट निरपेंद्र यादव ने कहा कि सितंबर के आखिर में आई गिरावट के बाद सोने ने हफ्ते की शुरुआत मजबूती के साथ की है। उन्हें उम्मीद है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और MCX पर सोने के लिए ₹1.46 लाख प्रति 10 ग्राम एक अहम सपोर्ट लेवल होगा, जबकि ₹1.53–1.55 लाख प्रति 10 ग्राम शुरुआती रेजिस्टेंस ज़ोन का काम कर सकता है।

उन्होंने ने कहा, “ऊंचे लेवल पर रिकवरी के पीछे भागने के बजाय, कीमतों में गिरावट आने पर नई खरीदारी करने पर विचार करना चाहिए।”

लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग ने कहा कि डॉलर और US यील्ड (yields) के ऊंचे स्तरों के कारण सोने और चांदी दोनों पर दबाव है, जबकि वेस्ट एशिया में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने कहा कि US डॉलर के मुकाबले रुपया 96.32 के करीब होना भी भारतीय कमोडिटी की कीमतों के लिए एक अहम फैक्टर है।

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटीज और करेंसी) वेदिका नार्वेकर ने कहा कि सोना $4,140 प्रति औंस के आसपास बना हुआ है, क्योंकि बाजार मजबूत डॉलर और बढ़ती यील्ड की तुलना फेड के ब्याज दर आउटलुक से कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बाजार अक्टूबर में ब्याज दरें बढ़ने की 21% संभावना मानकर चल रहे हैं, जो एक हफ्ते पहले 50% से अधिक थी।

इंटरनेशनल मार्केट के लिए, नार्वेकर $4,100 प्रति औंस को अहम सपोर्ट और $4,200 को रेजिस्टेंस मानती हैं। MCX पर, वह तुरंत सपोर्ट ₹1.48 लाख प्रति 10 ग्राम और रेजिस्टेंस ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर देखती हैं।

इस बीच, चांदी की कीमतों में तुलनात्मक रूप से ज्यादा मजबूती दिख रही है। Giottus.com के CEO विक्रम सुब्बुराज ने कहा कि MCX का दिसंबर का चांदी का कॉन्ट्रैक्ट ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम से ऊपर बना हुआ है और खरीदार निचले स्तरों पर इसे सहारा दे रहे हैं। उनके अनुसार, ₹2.28–2.30 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर अगला अहम ज़ोन है जिस पर नज़र रखनी होगी, जबकि ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट बना हुआ है।

सोने के बारे में सुब्बुराज ने कहा कि ₹1.50–1.51 लाख प्रति 10 ग्राम का दायरा ऐसा ज़ोन बन गया है जहां 5 अक्टूबर को कॉन्ट्रैक्ट के ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम से ऊपर जाने के बाद बिकवाली देखी जा रही है।

Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे दिन चांदी हुई सस्ती, जानें आपके अपने शहर में क्या है ताजा भाव

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Navratri 2026: ‘भगवान ने बनाया, हम उनका रूप गढ़ते हैं…’; नवरात्रि से पहले मूर्तिकारों की दुनिया, 1500 रुपये रोज कमाई और बढ़ती लागत की पूरी कहानी

Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि शुरू होने से पहले नोएडा के सेक्टर-21 मुख्य मार्ग पर मां दुर्गा और शेरावाली माता की मूर्तियां तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। सड़क के किनारे कई जगह झुग्गी झोपड़ी में कारीगर दिन-रात मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। यहां धान की फसल से निकलने वाले अपशिष्ट यानी पराली, मिट्टी और बांस की मदद से मूर्तियों का ढांचा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद मिट्टी लगाकर शरीर और चेहरे का आकार दिया जाता है। फिर रंग, कपड़े और श्रृंगार से मूर्ति को अंतिम रूप दिया जाता है। मूर्तिकार विश्वजीत पिछले 12 साल से यह काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने यह हुनर अपने क्षेत्र से सीखने के बाद कोलकाता जाकर भी सीखा और अब खुद मूर्तियां तैयार करते हैं।

किसी मूर्ति के चेहरा का रूप देने में है सबसे बड़ी कला

एक मूर्ति को तैयार करने में करीब एक सप्ताह का समय लग जाता है। इसमें सबसे पहले ढांचा और फ्रेम तैयार किया जाता है। फिर घास बांधकर उसके ऊपर मिट्टी लगाई जाती है। इसके बाद चेहरे का काम, रंग-रोगन और अंतिम सजावट की जाती है। विश्वजीत ने MoneyControl हिंदी टीम को बताते हुए कहा कि मूर्ति का चेहरा तैयार करने के लिए सांचे का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन अगर चेहरा उम्मीद के मुताबिक नहीं बनता तो उसे दोबारा तोड़कर तैयार करना पड़ता है। उनका कहना है कि मूर्ति को बेहतर रूप देने के लिए काफी सोच-समझकर काम करना पड़ता है। अलग-अलग कारखानों में मूर्तियों को अलग शैली और बेहतर फिनिश देने की कोशिश की जाती है।

1500 रूपये तक हर कमा लेते हैं मूर्तिकार

मूर्तिकारों के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की कीमत बढ़ी है। विश्वजीत ने बताया कि जिस घास की कीमत पहले करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल थी, वह अब करीब 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई है। मिट्टी की कीमत भी बढ़ी है। पहले करीब 1000 रुपये में 15 बोरी मिट्टी मिल जाती थी। जबकि अब इसके लिए 2000 से 2500 रुपये देने पड़ते है। मूर्तियों में इस्तेमाल होने वाला रंग, कपड़ा और श्रृंगार का सामान पश्चिम बंगाल से मंगाया जाता है। महंगे कच्चे माल के बीच कारीगरों की कमाई भी मौसम पर निर्भर है। विश्वजीत ने बताया कि उन्हें कारीगर के तौर पर करीब 1000 से 1500 रुपये प्रतिदिन मिल जाते हैं। लेकिन मूर्ति बनाने का काम मुख्य रूप से सीजन पर निर्भर रहता है।

शंकर अपने परिवार के साथ 20 साल से बना रहे हैं मूर्तियां

वहीं, शंकर पिछले करीब 20 साल से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं। वह मूल रूप से राजस्थान जोधपुर जिले के रहने वाले हैं। वह अपनी पत्नी के साथ मिलकर खुद मूर्तियां तैयार करते हैं। उनके मुताबिक 5 फीट की एक मूर्ति को बनाने में करीब 10 से 15 दिन तक लग सकते हैं, अगर पूरा ध्यान एक ही मूर्ति पर दिया जाए।

शंकर ने बताया कि नवरात्रि के लिए मूर्तियों की मांग काफी बढ़ गई है। ग्राहक नोएडा के अलग-अलग इलाकों के साथ दूर-दराज से भी यहां पहुंचते हैं। उनके मुताबिक इस सीजन में तैयार की गई ज्यादातर मूर्तियां बिक जाती हैं। हालांकि, बढ़ती लागत के बावजूद आमदनी इतनी नहीं है कि बड़ी बचत हो सके। उनका कहना है कि मूर्ति बनाने से बस बच्चों का पालन-पोषण और परिवार का गुजारा चल जाता है। कच्चे माल और मेहनत की लागत काफी बढ़ गई है। लेकिन उसके हिसाब से भुगतान नहीं बढ़ा है।

सौभाग्य के साथ जुड़ी है परिवारों की रोजी रोटी

नवरात्रि से पहले अब इन मूर्तिकारों के पास लगातार काम का दबाव है। कुछ कारीगरों ने नए ऑर्डर लेना बंद कर दिया है, क्योंकि पहले से मिले ऑर्डर को समय पर पूरा करना जरूरी है। सेक्टर-21 मुख्य मार्ग पर एक तरफ बांस और पराली से मूर्तियों के शुरुआती ढांचे तैयार हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ कई मूर्तियां पूरी तरह बनकर बिक्री के लिए तैयार खड़ी हैं। माता शेरावाली की इन मूर्तियों को नवरात्रि शुरू होने के साथ लोग अपने घरों और पूजा स्थलों के लिए खरीदकर ले जाएंगे।

इन मूर्तियों के पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि कारीगरों की कई दिनों की मेहनत और पूरे परिवार की रोजी-रोटी भी जुड़ी हुई है। विश्वजीत के लिए भगवान की मूर्ति बनाना सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि सौभाग्य की बात है। उनका कहना है कि जिस भगवान ने इंसान को बनाया, उनका रूप बनाने का अवसर मिलना अपने आप में बहुत अच्छी और सौभाग्य वाली बात है।

(नोएडा से पवन गुप्ता की रिपोर्ट)

ये भी पढ़ें- ग्रेटर नोएडा के 4500 किसानों की बल्ले-बल्ले! 500 करोड़ से ज्यादा का मिलेगा अतिरिक्त मुआवजा, 64.7% भुगतान का रास्ता साफ

Gold Silver Prices Today: सोना ₹1020 सस्ता हुआ, ₹1.50 लाख से नीचे आया भाव; चांदी भी ₹2887 टूटी

Gold Silver Prices Today: सोने की कीमतों में सोमवार को करीब 1% की गिरावट आई। मजबूत अमेरिकी डॉलर के कारण सोने की तेजी पर दबाव बना हुआ है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना ₹1,020 गिरकर ₹1,49,370 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।

पिछले हफ्ते छुट्टियों के कारण कम कारोबार वाले सत्र में भी सोने की कीमतों में गिरावट आई थी। सोना ₹2,887 यानी करीब 2% टूटकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर रहा। शुक्रवार को महात्मा गांधी जयंती के कारण घरेलू कमोडिटी बाजार बंद था।

मजबूत डॉलर से सोने पर दबाव

Choice Broking की कमोडिटी टेक्निकल एनालिस्ट कावेरी मोरे ने कहा कि सोने की कीमतें फिलहाल एक दायरे में बनी हुई हैं। मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण सोने में तेजी की रफ्तार सीमित है। डॉलर इंडेक्स 102.37 के आसपास 18 महीने के ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। इससे सोने पर दबाव बढ़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना

अंतरराष्ट्रीय बाजार में न्यूयॉर्क के कॉमेक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना मामूली बढ़त के साथ 4,163.50 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

निवेश प्लेटफॉर्म Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,150 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बना हुआ है। शुक्रवार को यह थोड़े समय के लिए 4,200 डॉलर के पार चला गया था।

अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों से फेडरल रिजर्व की अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ाने की उम्मीद घटकर 20% से नीचे आ गई है। हालांकि, दिसंबर में दर बढ़ने की संभावना अभी करीब 70% मानी जा रही है।

पिछले हफ्ते सोना और चांदी दोनों टूटे

पिछले हफ्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 158.9 डॉलर यानी 3.7% गिरकर 4,162.3 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। वहीं, चांदी 4.38 डॉलर यानी 6.7% गिरकर 60.41 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटी एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची रहने के कारण सोने की रिकवरी पर दबाव बना हुआ है। 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड करीब 5.2% पर बनी हुई है। लगातार महंगाई, राजकोषीय चिंताएं और सरकार की ज्यादा उधारी इसके पीछे प्रमुख कारण हैं।

आगे किन आंकड़ों पर नजर?

एनालिस्ट के मुताबिक, इस हफ्ते प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के सर्विसेज PMI आंकड़े, अमेरिका के व्यापार आंकड़े और महीने के मध्य में आने वाले कंज्यूमर सेंटिमेंट के आंकड़े सोने की दिशा के लिए अहम होंगे।

इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव भी कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकता है।

PPF vs NPS: किसमें निवेश पर ज्यादा फायदा मिलेगा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

बेंगलुरु की तर्ज पर रांची में बनेगी 100 एकड़ की टेक सिटी, फर्स्ट फेज में क्रिएट होगी 77000 जॉब्स, जानिए क्या है ये मेगा प्लान

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने RMZ Infrastructure के अध्यक्ष दीपक छाबड़िया से मुलाकात की। इस दौरान झारखंड में अत्याधुनिक IT Park, Global Capability Centre (GCC) की स्थापना और तकनीकी एवं औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

बैठक में रांची में करीब 100 एकड़ क्षेत्र में बेंगलुरु मॉडल पर IT Park/टेक सिटी विकसित करने की योजना पर चर्चा हुई। इसे वर्ष 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना के पहले चरण में करीब 75 हजार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित करने की बात कही गई है। बाद के चरण में 20 हजार और रोजगार जोड़ने का लक्ष्य है, जिससे कुल एक लाख नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है।

युवाओं को नौकरी के लिए नहीं जाना पड़ेगा बाहर

आइटी एवं ई-गवर्नेस विभाग की सचिव पूजा सिंघल ने बताया, आईटी पार्क बनने से युवाओं को बाहर नौकरी के लिए जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस पार्क में खासतौर पर मल्टीनेशनल कंपनियों के लिये आइटी और एआइ सेवाओं के साथ सेमीकंडक्टर, मैन्युफैक्चरिंग, न्यूक्लियर एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उच्च-कौशल वाले काम सारे यहां से किया जायेंगे।

झारखंड के पास वातावरण भी काफी अच्छा

पूजा सिंघल ने बताया कि झारखंड के पास वातावरण भी काफी अच्छा है। हमारे पास इंडस्ट्रियल पॉलिसी है, जमीन भी है और आईटी पार्क के लिए जिस तरह के मौसम की जरूरत होती है वह भी खासतौर पर रांची में देखी जाती है और उसके साथ ही यहां पर मेहनत करने वाली युवाओं की भी कमी नहीं है।

बेंगलुरु जाएगी टीम

आइआइएम रांची, नये विधानसभा और हाइकोर्ट परिसर के आसपास उपलब्ध करीब 100 एकड़ भूमि को आइटी पार्क के लिये संभावित आधार के रूप में देखा जा रहा है। आइटी और ई-गवर्नेस विभाग का प्रतिनिधिमंडल अक्तूबर में बेंगलुरु जाकर वहां के आइटी पार्क और जीसीसी मॉडल का अध्ययन करेगी। इसके बाद रांची में इस तरह के इको सिस्टम की ब्लूप्रिंट तैयार की जायेगी।

रांची से शिखा श्रेया की रिपोर्ट

Dussehra 2026: कब मनाया जाएगा इस साल दशहरा? जानें तारीख, समय, विजय मुहूर्त और महत्व

Gold Silver Price: सोने में मामूली तेजी, विदेश में चांदी 2% हुई महंगी, इस हफ्ते बुलियन मार्केट के लिए अहम संकेत

Gold Silver Price: इंटरनेशनल मार्केट में सोमवार (5 अक्टूबर) को शुरुआती कारोबार में सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। बुलियन मार्केट अमेरिकी डॉलर, ट्रेजरी यील्ड और जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) घटनाक्रमों पर नजर बनाए हुए है। 5 अक्टूबर के मार्केट डेटा के अनुसार, COMEX पर सोना 0.47% बढ़कर $4,182 प्रति औंस पर ट्रेड कर रहा था, जबकि चांदी 1.96% बढ़कर $61.60 प्रति औंस पर थी।

यह बढ़त पिछले हफ्ते आई भारी गिरावट के बाद हुई है। दिसंबर डिलीवरी के लिए COMEX गोल्ड फ्यूचर्स पिछले हफ्ते 3.7% गिरकर $4,162.3 प्रति औंस पर बंद हुआ था, जबकि चांदी 6.7% गिरकर $60.41 प्रति औंस पर आ गई थी।

पिछले हफ्ते मजबूत अमेरिकी डॉलर और ऊंची बॉन्ड यील्ड का असर बुलियन पर पड़ा, जिससे प्रॉफिट-बुकिंग हुई। इससे पहले, कमजोर अमेरिकी रोजगार डेटा और मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर उम्मीदों से सोने को सपोर्ट मिला था।

सोने के लिए, डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड निकट भविष्य में अहम कारक बने रहेंगे। डॉलर में लगातार बढ़ोतरी या यील्ड में और वृद्धि से सोने पर दबाव पड़ सकता है, जबकि इनमें से किसी में भी बदलाव से कुछ सपोर्ट मिल सकता है।

जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों से भी कीमतों में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। अगर तनाव बढ़ता है, तो अमेरिका-ईरान के बीच अनसुलझे हालात ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) के तौर पर सोने की मांग को फिर से बढ़ा सकते हैं, हालांकि तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं कम होने से पिछले हफ्ते बुलियन में जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम कुछ कम हुआ था।

कीमती और इंडस्ट्रियल मेटल (औद्योगिक धातु) के तौर पर दोहरी भूमिका के कारण चांदी में अपेक्षाकृत अधिक उतार-चढ़ाव रह सकता है। हाल ही में इसमें सोने की तुलना में अधिक गिरावट आई थी, और इंडस्ट्रियल कमोडिटीज में व्यापक कमजोरी का असर भी इसकी कीमतों पर पड़ा।

घरेलू मोर्चे पर, निवेशक इस हफ्ते के आखिर में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के मॉनेटरी पॉलिसी के फैसले पर नज़र रखेंगे। साथ ही, वे ब्याज दरों, डॉलर और बुलियन के बारे में और संकेतों के लिए ग्लोबल इकोनॉमिक डेटा – जिसमें सर्विसेज PMI रीडिंग, अमेरिकी व्यापार के आंकड़े और कंज्यूमर सेंटीमेंट डेटा शामिल हैं – पर भी ध्यान देंगे। MCX पर, दिसंबर डिलीवरी के लिए सोने के फ़्यूचर्स पिछले हफ़्ते के आखिर में लगभग ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए, जिसमें करीब 2% की गिरावट आई, जबकि चांदी की कीमत लगभग 4% गिरकर ₹2.25 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास आ गई।

जानकारों का मानना ​​है कि डॉलर, बॉन्ड यील्ड और जियोपॉलिटिकल घटनाक्रम में बदलाव का असर बुलियन (सोने-चांदी) की कीमतों पर पड़ेगा और निकट भविष्य में इनकी चाल दोनों तरफ़ (ऊपर-नीचे) रहने की संभावना है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

संडे प्रोफाइल : लुइज लूला दा सिल्वा:ट्रम्प को चेताने वाले लूला ब्राजील में चौथी बार मैदान में

ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा इन दिनों राष्ट्रपति चुनाव को लेकर चर्चा में हैं। उधर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी इस चुनाव में दिलचस्पी दिखा रहे है। हालांकि लूला ने अमेरिका को चुनाव से दूर रहने को कहा है। 80 वर्षीय लूला दा सिल्वा चौथी बार राष्ट्रपति बनने के लिए चुनाव लड़ रहे हैं। उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो हैं, जो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं। ट्रम्प ने फ्लावियो का औपचारिक समर्थन नहीं किया है, लेकिन बोल्सोनारो परिवार से उनकी नजदीकी रही है। मई में फ्लावियो ने व्हाइट हाउस में ट्रम्प से मुलाकात भी की थी। इसी बीच अमेरिका के डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रम्प प्रशासन पर ब्राजील के चुनाव को प्रभावित करने के लिए आर्थिक और राजनीतिक दबाव डालने के आरोप लगाए हैं। लूला ने इसे ब्राजील की संप्रभुता का मुद्दा बनाया है। उन्होंने कहा कि ब्राजील का चुनाव ब्राजील के लोगों का मामला है और अमेरिका को इसमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। 27 अक्टूबर 1945 को पर्नाम्बुको में जन्मे लूला ने 12 साल की उम्र में जूते पॉलिश किए, ऑफिस बॉय रहे और तकनीकी प्रशिक्षण के बाद मेटल वर्कर बने। फैक्ट्री में काम करते हुए मजदूर आंदोलन से जुड़े और 1975 में मेटल वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने। सैन्य शासन के दौरान बड़ी हड़तालों का नेतृत्व किया। 1980 में गिरफ्तार हुए और 31 दिन जेल में रहे। इसी साल दूसरे नेताओं के साथ वर्कर्स पार्टी बनाई। 1986 में लूला सांसद बने। 1989 में पहली बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 1994 और 1998 में भी हार मिली। 2002 में चौथे प्रयास में राष्ट्रपति बने और 2006 में दोबारा चुने गए। उनके पहले दो कार्यकाल के दौरान ब्राजील में गरीबी और आय-असमानता में कमी आई। बोल्सा फैमिलिया जैसे नकद सहायता कार्यक्रम का विस्तार हुआ, रोजगार और वास्तविक न्यूनतम वेतन बढ़ा। विश्व बैंक के अनुसार इस दौर के बदलावों में इन नीतियों के साथ आर्थिक वृद्धि और अनुकूल वैश्विक परिस्थितियों की भी भूमिका रही। इसके बाद लूला का राजनीतिक सफर पलटा। भ्रष्टाचार के मामलों में दोषी ठहराए जाने के बाद 2018 में जेल गए। 2019 में रिहा हुए। 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अदालत के पास इन मामलों की सुनवाई का अधिकार नहीं होने के आधार पर उनकी दोषसिद्धियां रद्द कर दीं। इससे उनके चुनाव लड़ने का रास्ता खुला और 2022 में तीसरी बार राष्ट्रपति बने। अब 80 साल के लूला चौथा कार्यकाल चाहते हैं। उनके सामने उसी बोल्सोनारो परिवार की अगली पीढ़ी है, जिसके जायर बोल्सोनारो को उन्होंने हराया था। अर्थव्यवस्था, महंगाई और अपराध जैसे घरेलू मुद्दों के बीच अमेरिकी दबाव और संप्रभुता भी इस चुनावी बहस का हिस्सा बन चुके हैं। इसलिए यह चुनाव केवल चौथी जीत नहीं, बल्कि यह भी तय करेगा कि चार दशक से ब्राजील की राजनीति के केंद्र में रहे लूला का राजनीतिक प्रभाव आगे कितना कायम रहता है।

ड्राइवर को 53,000 रुपये महीना देने पर बोले अंकुर वारिकू, बताया इसे ‘बेहतरीन निवेश’ क्यों मानते हैं

नौकरी की शुरुआत अक्सर सैलरी से होती है, लेकिन कई बार सालों के साथ रिश्ता सिर्फ काम और पैसे तक सीमित नहीं रहता। लेखक और उद्यमी अंकुर वारिकू ने अपने परिवार के ड्राइवर दयानंद की कहानी शेयर करते हुए कुछ ऐसा ही अनुभव बताया। दयानंद पिछले 13 साल से उनके परिवार के साथ हैं और इस दौरान उनकी भूमिका एक ड्राइवर से बढ़कर भरोसेमंद साथी जैसी हो गई।

13 साल पहले 15 हजार थी सैलरी

वारिकू के मुताबिक, दयानंद ने करीब 13 साल पहले उनके परिवार के साथ 15,000 रुपये महीने की सैलरी पर काम शुरू किया था। आज उन्हें 53,350 रुपये प्रति माह मिलते हैं। इसके अलावा उनके परिवार को हेल्थ इंश्योरेंस, दिवाली पर एक महीने की अतिरिक्त सैलरी और एक स्कूटी जैसी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

ड्राइवर से बढ़कर परिवार का भरोसेमंद सदस्य

वारिकू ने बताया कि समय के साथ दयानंद का काम सिर्फ गाड़ी चलाने तक नहीं रहा। वह परिवार के बच्चों को उनकी क्लास और दूसरी गतिविधियों तक ले जाते हैं, जरूरी काम संभालते हैं और घर की डुप्लीकेट चाबियां भी उनके पास रहती हैं।

यानी परिवार ने उन्हें सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि ऐसा व्यक्ति माना जिस पर घर और परिवार की सुरक्षा को लेकर आंख बंद करके भरोसा किया जा सके।

सुबह 4:30 बजे उठना और समय की पाबंदी

वारिकू ने दयानंद की दिनचर्या और काम के प्रति रवैये की भी तारीफ की। उनके अनुसार, दयानंद सुबह करीब 4:30 बजे उठते हैं और रात 8:30 बजे तक सो जाते हैं। वह समय के बेहद पाबंद हैं और काम में कभी देर नहीं करते। उनकी जिम्मेदारी और सकारात्मक रवैये ने परिवार का भरोसा और मजबूत किया।

‘वह हमारा समय और मानसिक तनाव बचाते हैं’

वारिकू के मुताबिक, दयानंद की अहमियत सिर्फ उनके द्वारा किए जाने वाले काम में नहीं है। वह परिवार के कई रोजमर्रा के काम संभालकर उनका समय और मानसिक बोझ कम करते हैं। इसी वजह से वारिकू ने उन्हें परिवार के पैसों का सबसे अच्छा निवेश बताया। उनका कहना था कि मेहनती लोगों के साथ उदार होना जिंदगी में आगे बढ़ने के सबसे भरोसेमंद तरीकों में से एक है।

सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछ लिया- निवेश किसका?

वारिकू की पोस्ट को जहां कई लोगों ने पसंद किया, वहीं कुछ यूजर्स ने उनके ‘इन्वेस्टमेंट’ वाले नजरिए पर सवाल भी उठाए। एक यूजर ने कहा कि असल निवेश दयानंद का है, जिन्होंने 13 साल तक लगातार मेहनत करके यह भरोसा कमाया। उसके मुताबिक, हर दिन अपनी जिम्मेदारी निभाना और परिवार का विश्वास बनाए रखना दयानंद की असली मेहनत है।

13 साल की वफादारी के बाद 53 हजार पर भी सवाल

एक अन्य यूजर ने यह सवाल उठाया कि 13 साल तक लगातार काम करने और कभी देर न करने वाले कर्मचारी की सैलरी को लेकर ‘उदारता’ की बात क्यों की जा रही है। इस प्रतिक्रिया में सवाल किया गया कि इतने लंबे समय तक सेवा देने के बाद 53,350 रुपये मासिक वेतन वास्तव में कितना उचित है।

असली कहानी सैलरी से ज्यादा भरोसे की है

इस पूरी चर्चा ने एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है क्या लंबे समय तक चलने वाले रोजगार रिश्ते की कीमत सिर्फ सैलरी से तय की जा सकती है? वारिकू के लिए दयानंद भरोसे, जिम्मेदारी और मानसिक सुकून का हिस्सा हैं। वहीं आलोचना करने वालों के लिए यह कहानी कर्मचारी की मेहनत और उसके उचित मेहनताने पर सवाल उठाती है।

अमृतसर में बना मैगी का पहाड़! 1000 पैकेट से तैयार हुआ लंगर, देखें वायरल वीडियो