Gold Price Today: सोने-चांदी की कीमतों में आया बड़ा उछाल! कमजोर डॉलर और US Fed के फैसले से रॉकेट बने दाम, देखें नया भाव!

Gold Price Today: कमजोर डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीद घटने से सोमवार को सोने की कीमतों में तेजी आई। स्पॉट गोल्ड 0.5% चढ़कर 4,398.58 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं दिसंबर डिलीवरी वाला अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% बढ़कर 4,455.50 डॉलर प्रति औंस हो गया।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 0.2% गिरावट आई। इससे दूसरी मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना सस्ता हो गया। Saxo Bank के कमोडिटी स्ट्रैटेजी हेड ओले हैनसेन का कहना है कि अमेरिका में महंगाई, रोजगार और उपभोक्ता खर्च के नरम आंकड़ों से फेड की अगली बड़ी चाल अब ब्याज दर बढ़ाने की बजाय कटौती की तरफ झुकती दिख रही है।

सितंबर में रेट बढ़ने की उम्मीद घटी

हाल में आए कमजोर पेरोल डेटा और नियंत्रित महंगाई के बाद बाजार की धारणा बदली है। CME FedWatch Tool के मुताबिक, सितंबर में फेड के ब्याज दर बढ़ाने की संभावना अब 31% रह गई है। एक महीने पहले यह 51% थी।

UBS के विश्लेषक जियोवानी स्टाउनोवो ने कहा कि अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें अब भी 4 डॉलर प्रति गैलन से ऊपर हैं। इससे अगले महंगाई आंकड़ों पर कुछ दबाव बना रह सकता है।

इस हफ्ते किन स्तरों पर रहेगी नजर?

LKP Securities में VP रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी) जतीन त्रिवेदी के मुताबिक, COMEX पर सोना 4,395 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इसके लिए 4,410-4,415 डॉलर का दायरा नजदीकी रेजिस्टेंस है। 4,375 डॉलर के आसपास मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। वहीं MCX Gold में ₹1,54,750 का स्तर अहम सपोर्ट और ₹1,55,500 का स्तर रेजिस्टेंस माना जा रहा है।

दूसरे कीमती धातुओं का हाल

दूसरी कीमती धातुओं में भी तेजी दिखी। चांदी 1.5% बढ़कर 65.61 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई। प्लैटिनम 0.7% चढ़कर 1,759.72 डॉलर और पैलेडियम 1.6% बढ़कर 1,333.25 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।

निवेशक अब बुधवार को आने वाली फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहे हैं। इससे आगे की मौद्रिक नीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

(रॉयटर्स से इनपुट के साथ)

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

नहीं थम रही सोने-चांदी की तेजी, रुपया और ग्लोबल फैक्टर्स कैसे डाल रहे है असर, अब क्या करें निवेशक!

Gold Silver price: भारत में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी देखी गई। इसकी वजह ग्लोबल मार्केट में मजबूती का ट्रेंड था, जिसमें कमज़ोर अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदलती उम्मीदों ने कीमती धातुओं की मांग को सहारा दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर, अक्टूबर डिलीवरी के लिए सोने के वायदा भाव ₹676 या 0.44% बढ़कर ₹1.55 लाख प्रति 10 ग्राम हो गए। सितंबर डिलीवरी के लिए चांदी के वायदा भाव ₹2,270 या 0.96% बढ़कर ₹2.38 लाख प्रति किलोग्राम हो गए।

ग्लोबल स्तर पर, सोने के वायदा भाव लगभग 0.40% बढ़कर $4,394.01 प्रति औंस हो गए, जबकि चांदी के वायदा भाव 1.64% बढ़कर $65.74 प्रति औंस हो गए।

क्यों बढ़ रही कीमतें हैं?

इसका एक मुख्य कारण अमेरिकी मॉनेटरी पॉलिसी (मौद्रिक नीति) को लेकर बदलता नज़रिया है। हाल ही में अमेरिका में महंगाई, रोजगार और कंज्यूमर एक्टिविटी के आंकड़े कमज़ोर रहे हैं, जिससे फेडरल रिज़र्व द्वारा और सख्ती बरतने की उम्मीदें कम हो गई हैं। इसका असर अमेरिकी डॉलर पर पड़ा है और सोने को इससे सहारा मिला है।

आमतौर पर डॉलर के कमज़ोर होने से सोने को फायदा होता है क्योंकि दूसरी करेंसी रखने वालों के लिए यह धातु सस्ती हो जाती है। कम ब्याज दरों की उम्मीदें भी सोने को सहारा दे सकती हैं, क्योंकि सोने जैसी ऐसी एसेट (संपत्ति) को रखने की ‘अपॉर्चुनिटी कॉस्ट’ (वैकल्पिक लागत) कम हो जाती है जिससे कोई रेगुलर इनकम नहीं होती।

भारत के लिए खास वजह क्या है?

घरेलू कीमतें करेंसी में होने वाले उतार-चढ़ाव को भी दिखाती हैं। सोमवार (17 अगस्त) को शुरुआती कारोबार में रुपया कमज़ोर होकर लगभग ₹95.59 प्रति डॉलर पर आ गया। रुपया कमज़ोर होने से सोने और चांदी जैसी इंटरनेशनल कीमत वाली कमोडिटीज़ की ‘लैंडेड कॉस्ट’ (आयात लागत) बढ़ सकती है, जिससे घरेलू कीमतों को और सहारा मिलता है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का भी रुपये पर दबाव रहा है। लेमन (Lemonn) में रिसर्च हेड गौरव गर्ग के अनुसार, WTI क्रूड लगभग $82.83 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि ब्रेंट $89 के आसपास बना हुआ था। गर्ग ने कहा कि डॉलर के कमज़ोर होने और आर्थिक आंकड़े कमज़ोर रहने से फेड द्वारा जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें कम हो गईं, जिससे सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। उन्होंने US-ईरान शांति वार्ता के रुकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से टैंकरों की आवाजाही कम होने के बाद सप्लाई में रुकावट की चिंताओं की ओर भी इशारा किया।

बता दें कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता एक और वजह है जो बुलियन (सोना-चांदी) को सहारा दे रही है। US-ईरान शांति वार्ता में कोई प्रगति न होने और तेल की सप्लाई को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क रखा है। ऐसी अनिश्चितता सोने जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों की मांग बढ़ा सकती है।

अब आगे क्या करें निवेशक

सोने के लिए, फेडरल रिजर्व का रेट आउटलुक, US डॉलर, बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रम मुख्य कारक बने रहेंगे। अगर फेड का रुख नरम (dovish) होता है तो कीमतों को सहारा मिल सकता है, जबकि महंगाई का नया झटका या सख्त (hawkish) पॉलिसी रुख बुलियन पर दबाव डाल सकता है।

VT मार्केट्स में ग्लोबल स्ट्रैटेजी ऑपरेशंस लीड, रॉस मैक्सवेल ने कहा कि $4,400-$4,450 प्रति औंस सोने के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन है। अगर कीमत $4,500 प्रति औंस से ऊपर बनी रहती है तो तेजी का रुझान (bullish trend) मजबूत हो सकता है, जबकि उन्होंने $4,150-$4,200 प्रति औंस को एक महत्वपूर्ण सपोर्ट एरिया बताया।

हालांकि, भारतीय निवेशकों के लिए, ग्लोबल सोना और चांदी की कीमतें समीकरण का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। रुपया-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंटरनेशनल कीमतें और घरेलू बाजार की स्थितियां मिलकर MCX कीमतों की दिशा तय करती हैं।

एस्पेक्ट बुलियन एंड रिफाइनरी के CEO दर्शन देसाई ने कहा, “कमज़ोर अमेरिकी डॉलर, दरों को लेकर बदलती उम्मीदों और सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) के तौर पर लगातार बनी मांग के कारण सोने और चांदी की कीमतें नए हफ़्ते में मजबूती के साथ आगे बढ़ रही हैं।”

देसाई ने कहा, “भू-राजनीतिक जोखिम और ग्लोबल ग्रोथ को लेकर चिंताएं बुलियन को और सहारा दे रही हैं।” हालांकि, एनालिस्ट कीमतों में सीधी बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। हालिया बढ़त के बाद, सोने और चांदी की कीमतों में कुछ ठहराव (कंसोलिडेशन) या मुनाफावसूली (प्रॉफिट-टेकिंग) देखी जा सकती है।

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Delhi Master Plan 2047: नरेला बनेगा दिल्ली का नया एजुकेशन हब; स्कूल से स्टार्टअप तक जुड़ेंगी शिक्षा की कड़ियां

Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के मास्टर प्लान-2047 में राजधानी की शिक्षा व्यवस्था को आने वाले समय की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने पर जोर दिया गया है। इसमें शिक्षा को सिर्फ स्कूल और कॉलेज तक सीमित रखने के बजाय बच्चों की शुरुआती पढ़ाई से लेकर उच्च शिक्षा, रिसर्च, स्किल डेवलपमेंट, रोजगार और नए बिजनेस तक जोड़ने की योजना है।

नए प्लान के तहत स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ खेल, कला और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी ज्यादा जगह उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा। विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए अलग स्कूल और ट्रेनिंग सेंटर विकसित किए जा सकेंगे। इसके अलावा, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक अधिक निर्माण और विस्तार की सुविधा देने का भी प्रावधान किया गया है।

मास्टर प्लान के अनुसार, 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ तक पहुंच सकती है। भविष्य में बढ़ने वाली आबादी को देखते हुए शिक्षा समेत दूसरी जरूरी सामाजिक सुविधाओं के लिए अभी से जमीन और बुनियादी ढांचा तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

इसी दिशा में नरेला में करीब 138 हेक्टेयर क्षेत्र में एक बड़ा एजुकेशन हब विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के साथ स्किल ट्रेनिंग सेंटर और नए कारोबार से जुड़े संस्थान भी विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य आने वाले समय में दिल्ली की बढ़ती आबादी के लिए शिक्षा, कौशल और रोजगार से जुड़ी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

शिक्षा के हर स्तर को एक-दूसरे से जोड़ने की तैयारी

मास्टर प्लान में दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को इस तरह विकसित करने की योजना है कि बच्चों की शुरुआती पढ़ाई से लेकर कॉलेज, उच्च शिक्षा, स्किल ट्रेनिंग और रोजगार तक का रास्ता आसान हो सके। इसके लिए शुरुआती शिक्षा केंद्रों और स्कूलों से लेकर आवासीय व विशेष स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय तक की सुविधाओं को एक व्यापक व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा।

इसके अलावा रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेंटर, ITI, पॉलीटेक्निक, स्किल ट्रेनिंग सेंटर, मैनेजमेंट और टीचर ट्रेनिंग संस्थान, होटल मैनेजमेंट संस्थान और कोचिंग सेंटर भी विकसित किए जाएंगे। इसका मकसद छात्रों को पढ़ाई के साथ जरूरी कौशल देने और आगे बेहतर रोजगार व करियर के अवसर उपलब्ध कराना है।

पढ़ाई के साथ-साथ खेल और दूसरी गतिविधियों पर जोर

इस प्लान के तहत स्कूलों में अब केवल पढ़ाई ही नहीं बल्कि खेल, कला, संस्कृति और अन्य गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा। इसी वजह से स्कूलों में पर्याप्त स्थान की व्यवस्था के लिए अधिक निर्माण क्षेत्र की अनुमति दी जाएगी। नियमों के मुताबिक, स्कूल के कुल अनुमत निर्माण क्षेत्र का कम से कम 15 फीसदी हिस्सा खेल और अन्य गतिविधियों से जुड़ी सुविधाओं के लिए रखना जरूरी होगा। इसके अलावा, छात्रों के लिए स्विमिंग पूल, टेबल टेनिस और स्क्वैश जैसी सुविधाएं विकसित करने की भी छूट दी जाएगी। इन सुविधाओं के लिए अधिकतम 150 वर्गमीटर का निर्माण क्षेत्र तय निर्माण सीमा से अलग रखा जा सकेगा।

स्कूलों के लिए जमीन और FAR के नए मानक

मास्टर प्लान में स्कूलों के स्तर के अनुसार जमीन, निर्माण और सड़क की चौड़ाई के मानक तय किए गए हैं। शुरुआती शिक्षा केंद्र के लिए कम से कम 500 वर्गमीटर जमीन, अधिकतम 40% जमीन पर निर्माण और 150 FAR की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 12 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर रखी गई है।

  • कक्षा छह तक के स्कूल के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन जरूरी होगी। अधिकतम 40% जमीन पर निर्माण और 150 FAR की अनुमति होगी। सड़क कम से कम 18 मीटर चौड़ी होनी चाहिए और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर होगी।
  • कक्षा 12 तक के स्कूल के लिए न्यूनतम 4,000 वर्गमीटर जमीन, 40% तक निर्माण और 180 FAR की अनुमति होगी। सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 18 मीटर रखी गई है। इस श्रेणी के भवनों के लिए अधिकतम ऊंचाई की अलग सीमा तय नहीं की गई है।

दिव्यांग बच्चों के लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र

जो स्पेशल चाइल्ड बच्चे हैं (दिव्यांग) उनके लिए अलग स्कूल और प्रशिक्षण केंद्र विकसित किए जाने का प्रावधान है। ऐसे विशेष स्कूलों के लिए कम से कम 2,000 वर्गमीटर जमीन की जरूरत होगी, जबकि अधिकतम 50 फीसदी हिस्से पर निर्माण की अनुमति होगी। यहां 120 FAR रखा गया है। इन स्कूलों तक पहुंचने वाली सड़क की चौड़ाई कम से कम 18 मीटर और भवन की अधिकतम ऊंचाई 18 मीटर तय की गई है।

इन स्कूलों में पढ़ाई के साथ-साथ खेल की सुविधाएं और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही, नई हो या पहले से बनी स्कूल की इमारत, सभी में दिव्यांगजन अधिकार कानून के नियमों का पालन करना जरूरी होगा। इसके अलावा, बच्चों के लिए आवासीय स्कूल शुरू करने का विकल्प भी मास्टर प्लान में रखा गया है।

कॉलेज और शोध संस्थानों को ज्यादा निर्माण क्षमता

मास्टर प्लान में कॉलेजों, रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेंटर और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए ज्यादा निर्माण और विस्तार की सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। ऐसे संस्थानों के लिए कम से कम 1,000 वर्गमीटर जमीन या संबंधित मान्यता देने वाली संस्था के तय मानकों में से जो भी ज्यादा होगा, उसे आधार माना जाएगा।

इन परिसरों में अधिकतम 40% जमीन पर निर्माण की अनुमति होगी और 225 FAR तय किया गया है। संस्थान तक पहुंचने वाली सड़क की चौड़ाई कम से कम 18 मीटर रखी गई है।

वहीं, छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए कैंपस में लाइब्रेरी, लैब, वर्कशॉप, खेल मैदान, इंडोर गेम्स की सुविधा, ऑडिटोरियम और हॉस्टल बनाए जा सकेंगे। जरूरत पड़ने पर छात्रों और जरूरी स्टाफ के लिए कैंपस के अंदर ही रहने की व्यवस्था भी की जा सकेगी।

विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेल और हरियाली पर भी जोर

विश्वविद्यालयों और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्रों के लिए अधिकतम 225 FAR का प्रावधान है। इनके लिए सड़क की न्यूनतम चौड़ाई 24 मीटर होगी और जमीन का आकार विश्वविद्यालय अनुदान आयोग या अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के मानकों के अनुसार तय किया जाएगा।

छात्रों को पढ़ाई के साथ बेहतर माहौल और दूसरी गतिविधियों के लिए पर्याप्त जगह मिल सके, इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर की कुल जमीन का 15 फीसदी हिस्सा खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए रखना होगा। इसके अलावा, 15 फीसदी जमीन पर पार्क और हरियाली विकसित करना जरूरी होगा। यानी बड़े शैक्षणिक परिसरों में पढ़ाई के साथ खेल, संस्कृति और खुले वातावरण के लिए भी पर्याप्त जगह सुनिश्चित की जाएगी।

नरेला बनेगा दिल्ली का नया एजुकेशन हब

नरेला में करीब 138 हेक्टेयर जमीन पर एक बड़ा एजुकेशन हब विकसित करने की योजना है। यहां विश्वविद्यालयों और रिसर्च संस्थानों के साथ स्किल ट्रेनिंग सेंटर और स्टार्टअप शुरू करने वालों के लिए जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। इसका मकसद शिक्षा को रिसर्च, कौशल विकास, इनोवेशन और रोजगार से जोड़ना है। इस केंद्र में सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों के अलावा अन्य शैक्षणिक व शोध संस्थानों को भी स्थापित होने की जगह मिल सकेगी।

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दिव्यांगजनों को डिजिटल सशक्त बना रही योगी सरकार, स्मार्टफोन-टैबलेट से बढ़ी पहुंच

दिव्यांगजनों को डिजिटल सशक्त बना रही योगी सरकार, स्मार्टफोन-टैबलेट से बढ़ी पहुंच

Yogi government is Divyangjan empowering persons with Divyangjan

– कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना बनी दिव्यांगजनों का मजबूत संबल

– ब्रेल किट और स्मार्ट केन से आसान हुआ दिव्यांगजनों का दैनिक जीवन

– जरूरत के मुताबिक ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और अन्य उपकरण उपलब्ध

– 40 प्रतिशत या अधिक दिव्यांगता वाले पात्र लाभार्थियों को मिल रहा लाभ

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर, सम्मानजनक और सुविधाजनक जीवन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के माध्यम से पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप कृत्रिम अंग एवं विभिन्न सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बदलते समय की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योजना को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा गया है, जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरण भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

 

स्मार्टफोन और टैबलेट से बढ़ी डिजिटल पहुंच

डिजिटल युग में शिक्षा, संचार, सूचना और सरकारी सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाने के उद्देश्य से योजना के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को स्मार्टफोन एवं टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे विशेष रूप से दिव्यांग छात्र-छात्राओं और युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, डिजिटल संचार, अध्ययन सामग्री तथा विभिन्न ऑनलाइन सरकारी सेवाओं एवं सूचनाओं तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है।

 

वित्तीय वर्ष 2025-26 में 34,420 पात्र दिव्यांगजनों को विभिन्न कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं। डिजिटल उपकरणों को योजना से जोड़ने से दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण को तकनीक का नया आयाम मिला है।

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जरूरत के अनुसार मिल रहे अनेक सहायक उपकरण

कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना के अंतर्गत दिव्यांगजनों को उनकी शारीरिक आवश्यकता एवं चिकित्सकीय संस्तुति के आधार पर विभिन्न प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इनमें ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर, बैसाखी, श्रवण यंत्र, एमआर किट, ब्रेल किट, एडीएल किट, वॉकर, रोटेटर और स्मार्ट केन सहित अनेक सहायक उपकरण शामिल हैं।

 

दृष्टिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ब्रेल किट एवं स्मार्ट केन जैसे उपकरण दैनिक जीवन को अधिक सुगम बनाने में सहायक हैं, जबकि गतिबाधित दिव्यांगजनों के लिए ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर एवं अन्य मोबिलिटी उपकरण आवागमन और स्वतंत्र गतिशीलता को बढ़ावा देते हैं। चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार विभिन्न प्रकार के कृत्रिम अंग भी उपलब्ध कराए जाते हैं। वर्तमान व्यवस्था के अंतर्गत पात्र दिव्यांगजनों को 15 हजार रुपये तक की लागत वाले निर्धारित कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराए जाते हैं।

 

योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित है पात्रता

कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण योजना का संचालन विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा रहा है। योजना का लाभ सामान्यतः 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता प्रमाणित होने पर निर्धारित पात्रता के अनुसार दिया जाता है। संबंधित उपकरण की आवश्यकता के संबंध में चिकित्साधिकारी की संस्तुति भी आवश्यक होती है।

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पात्रता के लिए आवेदक को निर्धारित आय सीमा एवं अन्य शर्तों को पूरा करना होता है। सामान्यतः ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वार्षिक पारिवारिक आय सीमा 46,080 रुपये तथा शहरी क्षेत्रों के लिए 56,460 रुपये निर्धारित है। आवेदक को पिछले तीन वर्षों में उसी उद्देश्य के लिए समान उपकरण का लाभ नहीं मिला होना चाहिए।

नियमित शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए निर्धारित अवधि एक वर्ष है। आवेदन के लिए दिव्यांगता प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, फोटो तथा संबंधित उपकरण के लिए चिकित्सकीय संस्तुति सहित आवश्यक अभिलेख प्रस्तुत करने होते हैं।

 

ऑनलाइन प्रक्रिया से पारदर्शिता और सुगमता

योजना को ऑनलाइन किए जाने से पात्र दिव्यांगजनों के लिए आवेदन एवं योजना तक पहुंच अधिक सुगम हुई है। विभाग का प्रयास है कि पात्र लाभार्थियों का चिन्हांकन, सत्यापन एवं उपकरण वितरण की प्रक्रिया पारदर्शी, समयबद्ध और सुगम तरीके से पूरी की जाए।

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दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना प्राथमिकता

दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उपनिदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि विभाग का उद्देश्य केवल दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, रोजगार, डिजिटल सेवाओं और समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने कहा कि स्मार्टफोन, टैबलेट और डेजी प्लेयर जैसे डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ मोबिलिटी एवं अन्य सहायक उपकरण दिव्यांगजनों की वास्तविक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उनके जीवन को अधिक सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण, आप भी एंजॉय करें 14D-360 डिग्री थिएटर में फिल्म

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण, आप भी एंजॉय करें 14D-360 डिग्री थिएटर में फिल्म

– मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर के कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय में साढ़े 4 करोड़ रुपए की लागत से निर्मित 14-डी सिनेमा थिएटर और वर्चुअल जंगल सफारी का किया लोकार्पण

– मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रियों, महापौर, सांसद एवं स्कूली बच्चों के साथ देखी 14-डी व 360 डिग्री थिएटर में फिल्म

– मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर निरंतर नवाचार और विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को देश के पहले वर्चुअल चिड़ियाघर का लोकार्पण किया। साथ ही उन्होंने इंदौर प्राणी संग्रहालय में स्थापित साढ़े 4 करोड़ रुपए की लागत से पीपीपी मॉडल पर निर्मित 14-डी सिनेमा थिएटर एवं वर्चुअल जंगल सफारी का भी लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इंदौर जो भी करता है, सबसे अच्छा करता है। इंदौर निरंतर नवाचार और विकास के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।

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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्चुअल जंगल सफारी आमजन के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगी। इससे लोगों को जंगल और वन्यजीवों का आभासी अनुभव प्राप्त होगा। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से नगर निगम को आमदनी भी प्राप्त होगी।

 

मुख्यमंत्री ने ली तकनीकी जानकारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी मंत्रियों एवं स्कूली बच्चों के साथ 14-डी सिनेमा थिएटर में बैठकर फिल्म का आनंद लिया। फिल्म देखने के बाद उन्होंने कहा कि दोनों फिल्में देखकर उन्हें अद्भुत आनंद की अनुभूति हुई। उन्होंने वर्चुअल जंगल सफारी का भी अवलोकन किया तथा सफारी की व्यवस्थाओं एवं तकनीकी विशेषताओं की जानकारी प्राप्त की।

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तकनीक के माध्यम से प्रकृति को समझेंगे बच्चे

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रिमोट दबाकर फव्वारे का शुभारंभ किया। उन्होंने एक्वेरियम में मौजूद रंगबिरंगी मछलियों का भी अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने प्राणी संग्रहालय में विकसित की गई इन नवीन सुविधाओं की सराहना करते हुए कहा कि इससे शहरवासियों, बच्चों और पर्यटकों को मनोरंजन के साथ वन्यजीवों एवं प्रकृति को नए तकनीकी माध्यम से समझने का अवसर मिलेगा।

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार ‘गो मित्र’

यूपी के गो संरक्षण में अब जेन जी की एंट्री, गांव-गांव तैयार होंगे 10 हजार 'गो मित्र'

Gen Z enters fray for cow conservation in UP

– यूपी में बच्चों के मन में गो माता के प्रति प्रेम बढ़ाने के लिए गांव गांव चलेगा अभियान

– योगी सरकार नई पीढ़ी को बनाएगी गो संरक्षण के प्रति सजग

– तैयार किए जाएंगे मास्टर ट्रेनर, देंगे अन्य ट्रेनर को प्रशिक्षण

– गो संरक्षण में रुचि रखने वालों को दी जाएगी वरीयता

Cow Protection Campaign : योगी सरकार की प्रदेश में गो संरक्षण अभियान से अब नई पीढ़ी, खासकर जेन जी को भी जोड़ने की तैयारी है। गांव-गांव अभियान चलाकर युवाओं को गोवंश के संरक्षण, गो सेवा और इसके सामाजिक-आर्थिक महत्व के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके लिए करीब 10 हजार ‘गो मित्र’ तैयार किए जाएंगे। पहले मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षित होंगे और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। गो संरक्षण और गो सेवा में पहले से रुचि रखने वाले लोगों को इसमें वरीयता दी जाएगी। इसके साथ ही योगी सरकार गो संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण, हरित ऊर्जा और रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भरता का मॉडल विकसित करने पर काम कर रही है।

 

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो संरक्षण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल किया है। सरकार का प्रयास है कि गोवंश का संरक्षण केवल गो आश्रय स्थलों तक सीमित न रहे, बल्कि इससे रोजगार और ग्रामीण समृद्धि के नए अवसर भी पैदा हों। इसी सोच के तहत गोशालाओं को गोबर और गोमूत्र आधारित उत्पादों, प्राकृतिक खेती, बायोगैस और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।

 

बच्चों और युवाओं तक पहुंचेगा गो संरक्षण का संदेश

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि नई पहल में सबसे ज्यादा जोर बच्चों और युवाओं को गो संरक्षण से जोड़ने पर रहेगा। गांवों में अभियान चलाकर उन्हें देसी गोवंश, गो सेवा, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गाय के महत्व की जानकारी दी जाएगी। उद्देश्य यह है कि नई पीढ़ी गो संरक्षण के पर्यावरणीय और आर्थिक पहलुओं को भी समझे।

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अभियान को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने के लिए मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। ये मास्टर ट्रेनर आगे अन्य लोगों को प्रशिक्षण देंगे। इस व्यवस्था के जरिए गांव-गांव प्रशिक्षित लोगों का नेटवर्क खड़ा करने की तैयारी है। गो संरक्षण में रुचि रखने वाले लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।

 

7,500 से अधिक गो आश्रय स्थलों में 12 लाख से ज्यादा गोवंश

उत्तर प्रदेश में निराश्रित गोवंश के संरक्षण और भरण-पोषण के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। प्रदेश में साढ़े सात हजार से अधिक गो आश्रय स्थल विकसित किए गए हैं, जिनमें 12 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं से होने वाले नुकसान को कम करने के साथ गोवंश को सुरक्षित आश्रय देना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

योगी सरकार ने गोवंश के भरण-पोषण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में भी वृद्धि की है। प्रति गोवंश प्रतिदिन मिलने वाली राशि को 30 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये किया गया है। वहीं अधिकांश गो आश्रय स्थलों पर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी की व्यवस्था भी की गई है।

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1.15 लाख पशुपालकों को सौंपे गए करीब 1.85 लाख गोवंश

गोवंश संरक्षण में आम लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन को भी आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत करीब 1.15 लाख पशुपालकों को लगभग 1.85 लाख गोवंश सुपुर्द किए गए हैं। इससे गोवंश को परिवार आधारित संरक्षण मिलने के साथ पशुपालकों को भी इससे जुड़ने का अवसर मिला है।

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा पशुधन वाला राज्य है और दुग्ध उत्पादन में भी देश में पहले स्थान पर है। सरकार अब इस क्षमता को ग्रामीण आय और रोजगार बढ़ाने के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने पर जोर दे रही है।

 

गोशाला से गो आधारित उद्योग तक बढ़े कदम

सरकार की रणनीति गोशालाओं को धीरे-धीरे आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की है। प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में गोबर से गो-काष्ठ, गो-पेंट, वर्मीकम्पोस्ट, धूपबत्ती, अगरबत्ती, गमले और दीपक जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ पंचगव्य, घनामृत और जीवामृत जैसे उत्पादों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन गतिविधियों में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है। इससे महिलाओं के लिए गांव में ही स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं। जो गोबर पहले सामान्य अपशिष्ट के रूप में देखा जाता था, वही अब खाद, ऊर्जा और विभिन्न उत्पादों के जरिए आय का साधन बन रहा है।

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हर जिले की गोशालाओं का होगा मूल्यांकन

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग ने प्रदेश की गोशालाओं की क्षमता का व्यापक मूल्यांकन करने की पहल की है। इसके पीछे उद्देश्य अलग-अलग जिलों की स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों के अनुसार गो-आधारित आर्थिक गतिविधियां विकसित करना है।

 

योजना है कि किसी जिले में गोबर से बायोगैस की संभावना बेहतर है तो वहां उस पर जोर दिया जाए, जबकि दूसरे जिले में जैविक खाद, गो-काष्ठ या गोमूत्र आधारित उत्पादों की इकाइयां विकसित की जाएं। सरकार का लक्ष्य गो संरक्षण को स्थानीय रोजगार से जोड़ना और गांवों में आय के नए स्रोत तैयार करना है।

संजय निषाद का अखिलेश यादव पर निशाना, बोले- NDA सरकार उजड़ी जातियों को दे रही अधिकार और सम्मान; निर्बलों को बनाएंगे सबल

संजय निषाद का अखिलेश यादव पर निशाना, बोले- NDA सरकार उजड़ी जातियों को दे रही अधिकार और सम्मान; निर्बलों को बनाएंगे सबल

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कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने कहा कि देश की आजादी के लिए जिन लोगों ने तलवार और तोप का सामना किया, फांसी पर चढ़े और अपना सबकुछ गंवाया, उनके लिए पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया। अंग्रेजों और मुगलों के दौर में विस्थापित हुए ऐसे लोगों को स्थापित करने और उन्हें संवैधानिक अधिकार दिलाने के लिए एनडीए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जो निर्बल हैं, उन्हें सबल बनाना हमारी सरकार की प्राथमिकता है।

 

संजय निषाद ने कहा कि आज स्वतंत्रता दिवस है, लेकिन पूर्व की सरकारों में कुछ लोगों ने सत्ता और अवसर मिलने के बाद भी आजादी का महत्व नहीं समझा। देश को आजाद कराने और संविधान निर्माण की राह तैयार करने में जिन उजड़े-बिखरे लोगों का योगदान रहा, सत्ता में रहने वालों ने उनकी सुध नहीं ली थी। लेकिन अब हमारी सरकार में इन सभी को अवसर मिले हैं।

 

सपा मुखिया अखिलेश यादव के मुद्दे पर कटाक्ष करते हुए निषाद ने कहा कि सत्ता में रहते उन्होंने शहीदों को याद किया होता, तिरंगा यात्रा निकाली होती और देश की आजादी के लिए संघर्ष करने वाली उजड़ी जातियों के उत्थान के लिए काम किया होता तो उसका महत्व होता। अब एनडीए सरकार ऐसे समाज को सम्मान देने और आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

 

उन्होंने सपा पर महिलाओं की उपेक्षा का भी आरोप लगाया। कहा कि जब सपा सत्ता में थी, तब महिलाओं के लिए कुछ नहीं किया गया। ऐसे में अब उनसे किसी बड़े बदलाव की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

 

पैसा नहीं, रोजगार और व्यवस्था की जरूरत

 

संजय निषाद ने कहा कि लोगों को केवल पैसा बांटने के बजाय ऐसी व्यवस्था की जरूरत है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाए। लोकतंत्र में सीधे पैसा देना समाधान नहीं है। बेहतर नीति और योजनाओं के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने और आगे बढ़ने में सहायता देने की जरूरत है। हमारी सरकार रोजगार के अवसर देने के साथ लोगों को इसके लिए आवश्यक सहयोग भी दे रही है।

 

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों और मुगलों के दौर में विस्थापित हुए लोगों को हमारी सरकार फिर से स्थापित कर रही है। जो लोग पिछली व्यवस्थाओं के ‘गजट और बजट’ के शिकार रहे हैं, उनके संवैधानिक अधिकारों के लिए हम हमेशा आवाज उठाएंगे।

PM मोदी के फ्री कोचिंग ऐलान के बाद Physics Wallah के फाउंडर अलख पांडे ने उठाया ये स्टेप और कही अपनी बात

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा का एडटेक प्लेटफॉर्म फिजिक्स वाला के फाउंडर और सीईओ अलख पांडे ने दिल से स्वागत किया है। अलख पांडे ने केंद्र सरकार के इस कदम की तारीफ करते हुए इस पहल को लागू करने के लिए सरकार को अपना बिना शर्त समर्थन देने की पेशकश की है।

लाल किले से पीएम मोदी ने किया था बड़ा ऐलान

इस बार स्वतंत्रता दिवस के मौके पप देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देने की योजना का ऐलान किया था। इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों पर कोचिंग के बोझ को कम करना है। सरकार की इस योजना का लक्ष्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल को देश के हर कोने तक पहुंचाना है।

क्वालिटी एजुकेशन पर हर बच्चे का हक- अलख पांडे ने कही ये बात

प्रधानमंत्री के इस ऐलान के तुरंत बाद अलख पांडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। अलख पांडे ने पोस्ट में लिखा कि मैं सभी जरूरतमंद छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग के संबंध में माननीय प्रधानमंत्री के वादे की वास्तव में सराहना करता हूं। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से यह मानना रहा है कि ऑनलाइन शिक्षा दूर-दराज के कस्बों और गांवों में रहने वाले छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बनाने का एक बेहतरीन माध्यम है।

अलख पांडे ने सरकार को अपना बिना शर्त समर्थन देते हुए कहा कि वह बदले में कोई प्रॉफिट नहीं चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं बदले में कोई मुनाफा नहीं चाहता। भारत के हर बच्चे के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बिल्कुल मुफ्त होनी चाहिए।

जमीन पर सही क्रियान्वयन (Execution) सबसे जरूरी

अलख पांडे ने योजना का स्वागत करने के साथ ही इसके सफल क्रियान्वयनपर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मैं इसे जमीन पर उतरते हुए देखना चाहता हूं, क्योंकि इसका क्रियान्वयन ही सबसे मुख्य हिस्सा है। उनका मानना है कि इस घोषणा को धरातल पर एक प्रभावी कार्यक्रम में बदलना ही असली चुनौती होगी और इसकी सफलता पूरी तरह से इसके सही एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगी।

AI स्किलिंग प्रोग्राम का भी हुआ ऐलान

लाल किले के भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग ही नहीं, बल्कि एक और बड़े डिजिटल पहल का भी ऐलान किया था। सरकार आने वाले साल में एक करोड़ युवा भारतीयों को प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रव्यापी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किलिंग प्रोग्राम शुरू करने जा रही है। मुफ्त प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग और बड़े पैमाने पर एआई प्रशिक्षण, ये दोनों घोषणाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षा, कौशल और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के सरकार के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।

CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क

CM धामी का बड़ा ऐलान: युवाओं के लिए बनेगा युवा आयोग, 3 जिलों में औद्योगिक पार्क

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देहरादून में ध्वजारोहण किया। उन्होंने युवाओं के रोजगार, प्रशिक्षण और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवा आयोग के गठन का ऐलान किया। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा में पहले चरण में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे।

 

सीएम धामी ने कहा कि हमारी सरकार ने युवाओं को हमेशा ही सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। युवाओं से संबंधित निर्णय, रोजगार से संबंधित बातें, युवाओं को पारदर्शी तरीके से रोजगार मिलने की बात हो, बिना पर्ची, बिना किसी खर्ची के या बिना भ्रष्टाचार या नकल के, हमने युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी काम किए हैं जो राज्य के हित में जरूरी हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के भविष्य के निर्माण के लिए, रोजगार-स्वरोजगार की दिशा में वे आगे बढ़ें, उनका प्रशिक्षण हों, सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, युवा आयोग का गठन किया जाएगा। इसकी हमने घोषणा की है। जल्द ही युवा आयोग युवाओं के विकास की दिशा में काम करेगा।

 

उन्होंने कहा कि मैदानी क्षेत्रों में औद्योगिकरण के लिए काफी बड़ी इंडस्ट्रियां हमारे यहां आ गई हैं। पर्वती क्षेत्रों में भी उद्योग स्थापित हो, रोजगार मिले, वहां भी इंडस्ट्री का विस्तार हो इस दिशा में चमोली, पौढ़ी और अलमोड़ा जनपदों को पहले चरण में औद्योगिक पार्क स्थापित किए जाएंगे। उद्योग से संबंधित गतिविधियां यहां पर प्रारंभ की जाएंगी।

 

मुख्यमंत्री धामी ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 80वें स्वतंत्रता दिवस का यह पावन अवसर राष्ट्र के गौरव, शौर्य और असंख्य बलिदानों को स्मरण करने का विशेष दिवस है। इस गौरवपूर्ण अवसर पर शासकीय आवास परिसर में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराकर देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर वीर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया।

मुक्त व्यापार समझौतों से बने हैं बड़े मौके, MSME उठाएं फायदा: PM मोदी

भारत ने 2014 से अब तक लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) को अंतिम रूप दिया है। इससे देश के सूक्ष्म, लघु और मंझोले उद्यमों (MSMEs) के लिए एक बड़ा अवसर तैयार हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छोटे उद्यमों से इन अवसरों का लाभ उठाने और इस मौके को हाथ से न जाने देने की अपील की है। उन्होंने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय उत्पादों की वैश्विक पहुंच का विस्तार करने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि कपड़ा, मशीनरी और दवाओं जैसे सामान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बनाएं। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें वैश्विक मानकों (ग्लोबल स्टैंडर्ड्स) पर खरा उतरना होगा।

भारत ने हाल में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, EFTA समूह और ओमान के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। यूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौतों को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है। इस वर्ष का स्वतंत्रता दिवस समारोह ‘वंदे मातरम्’ के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में राष्ट्रीय गीत को विशेष रूप से समर्पित है। लाल किले के समारोह में आज, शनिवार को पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया।

देश की मैन्युफैक्चरिंग में MSME सेक्टर का हिस्सा लगभग 35.4 प्रतिशत है। वहीं एक्सपोर्ट में लगभग 48.58 प्रतिशत और GDP में 31.1 प्रतिशत का योगदान है। MSME सेक्टर में 7.47 करोड़ से ज्यादा उद्यम हैं और यह 32.82 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है। यह खेती के बाद रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा सेक्टर है। दुनिया भर में कुल कारोबारों में MSMEs का हिस्सा लगभग 90 प्रतिशत है। ये कुल वैश्विक रोजगार में 50 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देते हैं।

अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते

अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ”भारत की वैश्विक साख बढ़ रही है। आज यह विश्व मंच पर एक सम्मानित राष्ट्र बन रहा है। भारत के पास एक स्थिर राजनीतिक जनादेश और सरकार, एक जीवंत लोकतंत्र और एक मजबूत न्याय व्यवस्था है। ये सभी भारतीय संविधान द्वारा निर्देशित हैं। दुनिया हमारी क्षमताओं को पहचान रही है, यही वजह है कि 2014 से हमने लगभग 40 देशों के साथ FTA किया है।”

उन्होंने आगे कहा, ”इन व्यापार समझौतों से तैयार हुए विशाल अवसर को देखिए। मैं अपने MSME क्षेत्र से आग्रह करना चाहता हूं कि वे इस मौके को हाथ से न जाने दें। हमें वैश्विक मंच तक पहुंचना है। भारतीय उत्पाद, चाहे वे कपड़ा हों, मशीनरी हों या दवाएं, उन्हें वैश्विक बाजारों में जगह बनाने की जरूरत है। हम इस अवसर को गंवाने का जोखिम नहीं उठा सकते।”

प्रधानमंत्री ने कहा, ”हमें वैश्विक स्तर पर उत्पादों की मौजूदा उपलब्ध गुणवत्ता से बेहतर गुणवत्ता और कम कीमत की पेशकश करनी चाहिए। पंजाब के लुधियाना से लेकर तमिलनाडु के तिरुप्पुर तक फैले हमारे कपड़ों में वैश्विक बाजार तक पहुंचने की क्षमता है।”

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घरेलू समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर

पीएम ने यह भी कहा कि इन समझौतों ने घरेलू समुद्री खाद्य (seafood) क्षेत्र के लिए भी भारी अवसर खोले हैं। केरल से लेकर गुजरात और तमिलनाडु से लेकर बंगाल तक, ये FTA घरेलू झींगा निर्यात को बढ़ावा दे रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा, ”मैं चाहूंगा कि हम इस स्थिति का पूरा फायदा उठाएं।” पीएम ने हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी और ड्रोन प्रणाली जैसी एडवांस्ड क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर देते हुए भारत को डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाने की भी वकालत की। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन की मात्रा वित्त वर्ष 2025-26 में 1.78 लाख करोड़ रुपये दर्ज की गई।